चूत में अपने क्रश का लंड लिया: Hindi Sex Kahani
हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम माया है। मैं एक चुलबुली लड़की हूँ, मेरी उम्र 25 साल की है, मेरी फिगर की साइज़ 34″-26″-36″ है और मेरी हाइट 5’7” है। मैं दिखने में बड़ी खूबसूरत हूँ और बड़ी मनचली लड़की हूँ, लोग कहते हैं कि मैं बिल्कुल अपनी मौसी पर गई हूँ।
मेरी मौसी अब एक दौलतमंद आदमी की रखैल हैं, मगर कुछ साल पहले वह एक कंपनी में काम करती थीं और उसी कंपनी के मालिक को वो पटा ली थी। मेरे भी ऑफिस में काफ़ी दोस्त हैं, मगर मैं किसी को ज़्यादा भाव नहीं देती हूँ। जबकि मुझे कई लड़के चोदने का मन बनाए बैठे हैं, मगर मैं उनके हाथ आने वाली नहीं हूँ।
मुझे तो बस अखिलेश का इंतज़ार रहता है, क्योंकि वह एक अमीर बाप का बेटा है और इंजीनियर है, लंबे कद का, सुंदर लड़का है। उससे मुझे चुदने में बड़ा मज़ा आता है। जब मैं पहली बार उससे चुदी थी तो मेरे होश उड़ गए थे। बड़ी ज़बरदस्त चुदाई करता है अखिलेश। अखिलेश मेरे ऑफिस का बड़ा अच्छा लड़का है।
जब मैं पहले दिन ऑफिस आई थी, तभी वह मुझे अच्छा लगा था। तभी से मेरा मन था कि काश अखिलेश मुझे चोदे। भगवान ने मेरी सुन ली और मुझे वह मौका दे दिया। एक दिन मैं ऑफिस में लेट हो गई थी। मौसम काफी खराब था। बारिश होने लगी थी। मैं जल्दी-जल्दी अपना काम खत्म करके ऑफिस से निकलने ही वाली थी कि देखा अखिलेश ऑफिस में आ गया।
रात के 8 बज रहे थे। ऑफिस बॉय ऑफिस बंद करके जाना चाहता था। अखिलेश ने मुझे देखा तो बोला, “अरे आप अभी तक घर नहीं गईं?” “नहीं… वो काफी काम था… इसलिए।” “नहीं, आपको इतनी देर तक यहाँ नहीं रुकना चाहिए था…” मैंने सोचा अब डर किसका… अब तो बस इंतज़ार है चुदाई का।
मैंने कहा, “जी, शायद आप ठीक कह रहे हैं… अब शायद मुझे ऑटो भी न मिले। बारिश बड़ी तेज हो रही है।” अखिलेश बोला, “ऐसा कीजिए, मेरे घर चलिए। मेरे पास बाइक है, मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ। मेरा घर पास में ही है।” मैं मन ही मन खुश हो गई क्योंकि मेरी मुराद पूरी होने वाली थी। मैंने फिर भी कहा, “नहीं, आप कहाँ तकलीफ करेंगे, मैं चली जाऊँगी।” “अरे, इसमें तकलीफ की क्या बात है… मैं आपको छोड़ देता हूँ। आइए मेरे साथ।” अखिलेश मुझे नीचे ले आया। और अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट करके बोला, “जल्दी बैठिए।” मैं पीछे बैठ गई।
बारिश तेज थी। मैं काफी भीग गई। मेरे कपड़े बिल्कुल भीग गए थे। मेरी चूचियाँ भीगने के बाद ऊपर से पूरी तरह दिखाई दे रही थीं। अखिलेश का घर ज़्यादा दूर नहीं था। हम लोग जल्दी घर पहुँच गए। वह मुझे अंदर ले गया। बोला, “आइए आइए… बैठिए… अरे आप तो पूरी भीग गई हैं… खैर भीग तो मैं भी गया हूँ… आप ऐसा करें… मेरी कुछ शर्ट है… वह ला देता हूँ, आप पहन लीजिए… नहीं तो सर्दी लग जाएगी… मैं भी जब तक कपड़े बदल लेता हूँ।” मेरा दिल खुशी से उछलने लगा था कि क्या बात है, आज लगता है मेरी चुदाई पक्की है।
सारे मोहरे सही जा रहे हैं… अगर आज मैं न चुद पाई तो कभी न चुद पाऊँगी। अखिलेश कपड़े ले आया। मैंने जानबूझकर हल्के रंग की कमीज छाँटी और कपड़े बदलने अंदर चली गई। मगर मैंने कमरा बंद नहीं किया कि शायद वह आ ही जाए। मैंने सिर्फ कमीज पहनी और अपनी ब्रा वहीं उतार फेंकी। और अपनी चूचियों को उभार के देखा, बड़ी सुंदर दिख रही थीं।
मैंने ऊपर के दो बटन खुले छोड़ दिए और बाहर आ गई। मेरी गोरी-गोरी जाँघें बड़ी मस्त दिख रही थीं। मैं किसी फिल्म की हीरोइन से कम नहीं लग रही थी। अखिलेश ने मुझे बड़े गौर से देखा और शायद देख के दंग रह गया था। मेरा तीर चल गया था। वह चुपचाप उठा और कपड़े बदलने चला गया। मैं सोफे पर बैठ गई और पैर एक के ऊपर एक रख लिया कि अखिलेश देख ले।
मैंने नीचे कुछ नहीं पहना था। तभी अखिलेश आया और उसने मुझे देख लिया। उसकी नज़रें मेरी टाँगों के बीच का नज़ारा ले रही थीं। मैं ऐसे बन गई कि मैं उसे देख ही नहीं रही हूँ। शायद उसने अंदर पड़े मेरे कपड़े और मेरी ब्रा और पैंटी देख ली थी। अखिलेश मेरे पास आके बोला, “कुछ पिएँगी… चाय, कॉफी…” मैंने नज़र उठा के देखा, वह मेरे करीब खड़ा था और मेरी खुले हुए बटनों से मेरी चूचियों के दर्शन कर रहा था। मुझे अच्छा लगा।
मैंने कहा, “नहीं, इसकी क्या ज़रूरत है। मैं बस चलना चाहूँगी।” “ऐसे कैसे चली जाएँगी… मेरे घर में पहली बार आप आई हैं… कुछ तो लेना पड़ेगा।” मैंने मन में सोचा, जो मुझे चाहिए वह तो दे नहीं रहा है, बेकार की चीज़ों के बारे में बातें कर रहा है। वह अंदर से कॉफी बना लाया। हम दोनों ने वहीं बैठ के कॉफी पी और बातें करने लगे। मैंने उसकी शादी के बारे में पूछा। वह हँसने लगा, बोला, “मैडम, आज की दुनिया में कोई शादी के बारे में नहीं सोचता, सिर्फ रिलेशन बनाना चाहती है…” मैंने कहा, “हाँ, यह तो है। इसमें हरज ही क्या है… दो लोग अगर आपस में रिलेशन बनाना चाहते हैं तो लोगों को क्या तकलीफ होती है।”
मुझे मालूम था मेरे इस जवाब से उसका हौसला बढ़ जाएगा। वह मेरे पास आके बैठ गया, बोला, “आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं… अगर दो लोग आपस में एक-दूसरे की मर्ज़ी से अगर कोई संबंध बना लें तो क्या बुरा है…” और उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। मैंने कोई ध्यान नहीं दिया। मैं उसे पूरी छूट देना चाहती थी।
“यही तो मैं चाहती हूँ कि एक मर्द के साथ सारी ज़िंदगी गुज़ार देना कहाँ का इंसाफ है… बाहर मुल्कों में कोई ऐसा नहीं करता, वहाँ लोग लाइफ को एंजॉय करते हैं…” यह सुनके उसने मेरी जाँघों पर अपना हाथ फेरा। मैंने उसे देखा और कहा, “क्या बात है… हमम्म… रिलेशन बनाना चाहते हो… ह्म्म्म…” “हाँ… बिल्कुल…” “तो फिर झिझक क्यों रहे हो… मेरे पास आओ ना…” यह कहके मैंने उसे अपने पास खींच लिया। अखिलेश इसकी उम्मीद नहीं कर रहा था। मैंने उसके होंठ पर एक ज़बरदस्त चुंबन किया।
अखिलेश भौंचक्क रह गया। उसने फौरन अपना हाथ मेरी चूचियों पर रखा। मैंने कहा, “नहीं मिस्टर… ऐसे नहीं… यहाँ नहीं… अपने बेडरूम में चलो…” इसे भी पढ़े – किरायेदार रोशनी साथ शानदार सेक्स वह चलने लगा। मैंने कहा, “कहाँ जा रहे हो… मुझे कौन ले जाएगा… तुम्हारे पिताजी?” वह बड़े ज़ोर से हँसा और मुझे अपनी गोद में उठाए अपने बेडरूम की तरफ चल दिया।
बेडरूम में ले जाकर उसने मुझे अपने बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने फौरन अपनी कमीज, जो कि अखिलेश की ही थी, उतार दी। अखिलेश पागल ने बड़े गौर से मुझे देखा।
मैंने कहा, “अखिलेश जी प्लीज़… सामान निकालिए ना… बड़ा मन कर रहा है उसे देखने का…” अखिलेश ने अपने कपड़े उतार दिए और मेरे पास कूद के बिस्तर पर आ गया।
मैं बड़े आराम से लेट गई क्योंकि मैं जानती थी कि अब मुझे चुदने से कोई नहीं रोक पाएगा। और उसने मेरी टाँगों को दोनों हाथों से पकड़ा और मुझे बिस्तर पर अपनी ओर खींचा। मैं खिंचती ही चली गई। उसने मेरी दोनों टाँगों को अपनी कमर के दोनों ओर कर लिया था। उसका खड़ा हुआ गर्मागर्म लंड मेरी चूत से टकरा रहा था। मैंने अपनी छाती को ऊपर की तरफ उभार दिया ताकि मेरी चूचियाँ देख के उसके होश उड़ जाएँ। उसने अपने दोनों हाथों में मेरी चूचियों को भर लिया और उन्हें दबाने लगा।
मैं बड़ी मस्त हो रही थी क्योंकि मैं यह सोच-सोच के खुश हो रही थी कि अब यह अखिलेश, जिस पर सारी लड़कियाँ जान छिड़कती हैं, वह मुझे चोदने वाला था। उसने जब अपना मुँह मेरी चुची पर लगाया तो मैं सिहर उठी क्योंकि आज तक मेरी चूचियाँ किसी ने नहीं छुई थीं। वह मेरी चूचियों को दबा-दबा के पीने लगा।

मैं मस्त होके उसको अपनी चूचियों से दूध पिला देना चाहती थी, मगर उनमें दूध था ही नहीं। वह तो अब हो जाएगा जब मैं चुदने के बाद अगर माँ बन गई तो… मेरे मुँह से मस्त आवाज़ें निकलने लगी थीं… ऊऊंम्म्म… आआह्ह्ह… ईईएसएस… उम्म्म… ह्ह्हम्म्म… आआईईएल… उफ्फ… आआ… हाँन्न्न… एएसएस… उम्म्म… ह्ह्हम्म्म… ये आवाज़ें सुनके शायद वह मूड में आ गया था। उसने फौरन मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और मेरे होंठों को चूसने लगा। मैंने इससे पहले सिर्फ एक बार अपनी सहेली से अपने होंठ चुसवाए थे, मगर किसी मर्द से चुसवाने का मज़ा ही दूसरा होता है… यह मुझे आज पता चल रहा था। मेरे हाथ भी उसकी गर्दन और उसके बालों में चल रहे थे।
मैं उसे सहला रही थी क्योंकि मैं अब उससे सचमुच चुदने को बिल्कुल तैयार थी। मैंने कहा, “ह्ह्हम्म्म… आआह्ह्ह प्लीज़… अखिलेश… अब चोदो ना… चोदो मुझे… प्लीज़… अब सहा नहीं जाता… प्लीज़… फक मी… अखिलेश… प्लीज़… आआह्ह्ह… फक मी…” यह सुनके अखिलेश ने अपना लंड मेरी चूत पर टिका दिया। मैंने भी एक हाथ से अपनी चूत के दोनों होंठ खोल दिए। अखिलेश ने धक्का मारा मगर लंड फिसल के बाहर आ गया।
तब मुझे एहसास हुआ कि लगता है मेरी चूत बहुत छोटी है और उसका लंड काफी बड़ा है… मैं अब कुछ नहीं कर सकती थी सिवाय चुदने के… अखिलेश ने फिर से मेरी चूत पर लंड रखा और अबकी से उसने अपने हाथ से उसको मेरी चूत में फँसाया और एक धक्का मार दिया… मैं कराह उठी… मेरी चूत एकदम फट गई थी… आआह्ह्ह… ईईएसएस… अरे… मादरचोद… फाड़ दी मेरी… चूत… साले… कमीने… मेरे मुँह से गालियों की बौछार होने लगी… जिसका उस पर कोई असर नहीं था।
उसने मेरी चूचियाँ दबाना शुरू कर दीं। शायद अखिलेश पहले भी किसी को चोद चुका था, तभी उसे हर गुर पता था। उससे मेरा दर्द कुछ कम होने लगा और फिर अखिलेश ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख के चूसने लगा और मौका पाते ही उसने एक धक्का और मार दिया जिससे बचा हुआ लंड भी मेरे अंदर चला गया। लंड पूरी तरह मेरी चूत में ठसा हुआ था।
मेरी चूत चरमरा रही थी। मैंने हाथ लगा के देखा तो खून आ रहा था। मैं समझ गई कि मेरी सील टूट गई है… अब मेरी वर्जिनिटी जाती रही है। मैंने अपने पैर कसके फैला दिए ताकि उसका लंड पूरा मेरे अंदर चला जाए… जिससे मुझे दर्द भी कम होगा। अखिलेश ने कमर चलाना शुरू कर दिया था। उससे उसका लंड मेरी चूत के अंदर-बाहर होने लगा था। मेरी चूत की चुदाई शुरू हो गई थी।
मेरी चूत में उसका लंड काफी टाइट चल रहा था। मैं बड़े मज़े से चुदने लगी थी क्योंकि मुझे मज़ा आने लगा था। जबकि उसका लंड शायद बड़ा था और मेरे पेट के अंदर ठोकर मार रहा था। अब उसकी लटकती गोलियाँ मेरी चूत पर टकरा के फच-फच की आवाज़ें कर रही थीं। मेरी कराहटों से कमरा गूँज रहा था… आआह्ह्ह… उह्ह्म्म्म… प्लीज़ अखिलेश… और तेज… प्लीज़… चोद दो मुझे… प्लीज़… आआह्ह्ह… उसकी साँसें मेरे गर्म होंठों से टकरा रही थीं।
मैं उत्तेजित हो गई थी। मैं अपनी कमर उछाल-उछाल के उसके लंड को अपनी चूत में ले रही थी। वह मुझे बड़े प्यार से चोद रहा था। फिर वह बोला, “चलो रानी… अब कुतिया बन जाओ…” मैं उसका इशारा समझ गई। मैंने कई बार इंटरनेट पर पोर्न मूवीज देखी थी तो मैं जानती थी कि अलग-अलग तरह से चुदवाने में बड़ा मज़ा आता है। मैं फौरन अपने कोहनियों और घुटनों पर आ गई और अपनी गांड़ मैंने पीछे उठा दी। अखिलेश का लंड काफी बड़ा है। उसने पीछे से ही मेरी चूत में लंड घुसेड़ दिया और मेरे ऊपर झुक गया और मेरी चूचियों को मेरी बाजू से हाथ डाल के पकड़ लिया और चुदाई करने लगा। उसका लंड मेरी चूत को रगड़ के चोद रहा था।
आज मुझे अपना जीवन सफल होता दिख रहा था… क्योंकि भगवान ने औरत क्यों बनाई… बच्चे पैदा करने के लिए और उसको चूत क्यों दी चुदवाने के लिए… तभी तो मैं ज़िंदगी का मज़ा ले रही थी… अखिलेश मुझे ज़बरदस्त चोद रहा था… मेरी चूचियों को कस-कस के मल रहा था… मैं बहुत खुश थी… मैं बड़ी देर से चुद रही थी… मेरी चीखें तेज हो रही थीं… आआह्ह्ह… ऊऊफ्फ… ह्ह्हम्म्म… एएसएस… आआह्ह्ह… और फिर अखिलेश के धक्के तेज हो गए और मेरी चूत भी पानी छोड़ने वाली थी।
मौसम क्योंकि काफी ठंड था मगर फिर भी हम दोनों पसीने से भीग गए थे। और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए और उसके लंड का पानी यानी माल मेरी चूत के अंदर ही गिर गया। वह मेरे पेट में जा रहा था। मैं उसको जाता हुआ अपने अंदर महसूस कर रही थी। अखिलेश मेरे अंदर अपने लंड को डाले-डाले मुझे लेकर एक तरफ को लुढ़क गया। मैं भी थक गई थी तो वैसे ही पड़ी रही। फिर मैं उठी, उसके लंड को जो अब मुरझा चुका था, अपनी चूत से अलग किया और अपनी चूत को कपड़े से साफ करके कपड़े पहनने लगी।
जो कपड़े ज़्यादा गीले थे उनको पहले आयरन किया और फिर पहन लिया और. अखिलेश से बोली, “क्या यहीं रखने का इरादा है… रखैल बनाओगे क्या… चलो मुझे घर छोड़ के आओ।” अखिलेश उठा और कपड़े बदल के तैयार हो गया और मुझे छोड़ने के लिए कार निकाली। फिर मैं उसमें बैठी और तब अखिलेश बोला, “डियर… देखो मैं… यह जो कुछ भी हुआ मैं उसके लिए…” मैंने कहा, “क्या… हमम्म… यह मेरी मर्ज़ी भी तो थी। तुमने मुझसे ज़बरदस्ती तो नहीं की ना…” “हाँ मगर मैं तुमको एक बात बताना चाहता हूँ कि… मैं एक शादीशुदा आदमी हूँ… मेरी एक 2 साल की बच्ची भी है।” मैं सन्न रह गई… मगर अब भी क्या कर सकती थी। मैंने उससे कुछ नहीं कहा। फिर मैं घर पर उतर गई और अखिलेश अपने घर चला गया।
मगर हम दोनों का रिश्ता खत्म नहीं हुआ… हम अक्सर मिलते हैं और वह मुझे हर बार ज़बरदस्त चोदता है। मैं 2 बार उससे प्रेग्नेंट भी हो चुकी हूँ मगर मुझे उससे इतना प्यार है कि मैं किसी और को अपने पास नहीं आने देती। मुझे यकीन है कि एक न एक दिन मैं उसको पा लूँगी… आप लोग भी मेरे लिए दुआ करें…
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