जब चुत को प्यास होती हैं वह लन्ड खोजतीं हैं - Hindi Sex Story
- Nilesh Lonke
- 2 hours ago
- 12 min read
मैंने सभी पाठकों को मेरे जिंदगी मैं बीबी के गुज़र जाने बाद मेरे जिंदगी मैं आईं औरतों कि कहानी या यहां लिखी हैं।
पिछली कहानी "बेटी के सेटिंग के साथ मां ने पहले प्यास बुझाई" मैं आपने फैजा और नगमा कि कहानी पढ़ी। आप लोगों ने कहानी को बहुत प्यार किया इस लिए सभी पाठको का आभार अब आगे। मेरी सभी पिछली कहानियां पढ़ने के लिए मेरे नाम के ऊपर क्लिक करके आप पढ़ सकते हैं ।
अब आगे
पिछले दो साल से पुनम बिमारी रहती थी। उसके दिमाग मैं गांठ हो चुकी थी। मैं नीलम और अनघा भी उसका पुरा ख्याल रखते थे। मगर बिमारी एक साल से बढ़ हि रहीं थीं। इसलिए पिछले साल भर से पुनम को पुना के अस्पताल मैं ले जाने लगा। एक दिन अनघा और मैं पुनम को नये अस्पताल ले गये, तो पुनम को अस्पताल मैं भर्ती करना पड़ा। अस्पताल के नजदीक हि कमला का मेस था। रात के खाने के लिए मैं कमला के मेस पर गया।
कमला ने मुझे देखते हि लड़को मेस संभालने को बोला और पिछे हि जो घर था उस मैं लगी। मेरे लिए घर नया नहीं था। चार पांच साल पहले रोज यहां आता था। मैं कमला कि पुछताछ की, तो कमला " ठिक हुं", "अच्छी हैं" "चल रहा हैं" ऐसे जवाब दे रही थी। मैंने कमला कि लड़की और लड़के बारे मैं पुछा तो कमला बोली "लडकां जहाज़ मैं काम को लगा हैं", लड़की "करोना मैं चल बसीं "।
मुझे सुनकर शाॅक लगा था। कमला ने मुझे पुछा कि तुम यहां कैसे "तो मैंने पुनम के बारे मैं बताया"। कलम ने मुझे"नीलम कैसी हैं यह भी पुछा" । मैंने" अच्छी हैं कहां "। कलम बोहोत देर शांत हि थी और फिर बोली "नीलम के साथ मैने बोहोत ग़लत किया मगर उसका नसीब अच्छा था, उसे तुम जैसा सहारा मिला"। बातें करते करते हमने खाना खाया। मैंने पुनम के अस्पताल मैं अनघा थी उसके लिए भी खाना लेकर अस्पताल चला गया।
दुसरे दिन सुबह खुद हि कमला चाय और नाश्ता लेकर अस्पताल आयी, पुनम से मिली, पुछताछ कि और चली गयी। अनघा घर चली गयी और नीलम दुपहर को आ गयी। मैंने कमला के बारे मैं सब नीलम कि बातें बताई और पिछली बातें भुलकर बहन से मिलने को कहां। नीलम खुद कमला से मिलने चली गयी। जब तक पुनम अस्पताल मैं थी तब तक नीलम कमला के घर और अस्पताल मैं रहती थी। पुनम का अस्पताल हम लोगों ऑपरेशन किया और वो कामयाब भी रहा।
उसके बाद कलम और नीलम के पुरे मतभेद दुर हो गये। एक दिन कमला हमारे यहां आयी थी रात हो चुकी थी तो उसे छोड़ने के लिए मुझे नीलम ने भेज दिया। कमला घर जाते वक्त बोल रही थी "नीलेश तुमने मेरे बहन को चार साल मैं पुरा बदल दिया"। मैं कुछ नहीं बोल रहा था। मुझे गाड़ी मैं अनघा का फोन आया तो मैंने अनघा को बोला कि मैं कमला को छोड़ने जा रहा हुं। आते वक्त घर आता। अनघा को मालुम नहीं था गाड़ी मैं स्पीकर पर मैं बात कर रहा हुं। अनघा बोली "कमला के साथ हि रात मत बिता ना, चुपचाप मरे घर आ जाना" मैं जल्दी से स्पीकर बंद कर दिया पर । पर कमला के जैसे मन कि बात अनघा बोली थी।
उस के बाद कमला खुद हि बोली "नीलेश तुमने नीलम, पुनम और अनघा कि जिंदगी हि बदल दि हैं", तुम्हारे तीनों के साथ रिश्ते हैं मुझे मालुम हैं , मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता"। मैं शांत था। मैंने कमला को उसके घर के सामने छोड़, अनघा घर जाने को वापस निकलने लगा। कमला बोली "नीलेश तुम मुझे पसंद थे, इसलिए हि मैने नीलम पर भड़ास निकाली थी, तुम्हारे लिए मेरा घर भी हमेशा खुला हैं याद रखना"।
मैं कुछ नहीं बोला और हल्की स्माइल दे कर अनघा के घर निकल गया, रात मैंने अनघा बात बताई तो वो बोल रही थी "कुत्ती या चिपकने लिए हि आयी हैं, मुझे मालुम था", "गले पड़गी, जरा संभालकर रहना नीलेश"। मैं बोला " जो हुकुम मेरी जान" । अगले दिन मैंने नीलम को भी कमला कि सारे बाते बतायी, तो नीलम हंसने लगी थी। नीलम बोल रही थी "अब बात समझ मैं आयी, कमला को तुम्हारा पैसा चाहिए था, इसलिए वो तुमसे घुल-मिल चुकी थी, पर मां के मौत बाद तुम मेरे साथ देने लगे, तो उसे अच्छा नहीं लगा। इसलिए उसका दिमाग खराब हो चुका था", और "आज हम सब को ठीक देखकर, उसे अक्कल आयी हैं"। नीलम मुझे चिड़ाने लगी थी "तो नीलेश कब जा रहे हो पुना अपनी पहली पसंद के पास"। मैं नीलम से बोला "मैंने कभी भी ना तुम्हें और ना कमला को उस नज़र से देखा था"।
नीलम भावुक हो कर बोली "मुझे मालूम नीलेश, तुम्हारी जितनी परिक्षा मैंने ली हैं, उतनी किसी ने भी नहीं ली होंगी, तुम बोहोत हि अच्छे इन्सान हो, तुम्हारे दिमाग मैं कभी भी ग़लत ख्याल होते तो तुम कभी कभी मुझे सारी बात नहीं बताते"। पुनम भी सुन रही थी और वो बोली "नीलेश हम आज चार लोग हैं, मैं, नीलम, अनघा और तुम मगर हमारे बीच आज तक सभी बातें आपस मैं मालुम हैं, यह विश्वास हि हमें आज भी साथ रक्खा हैं"। मैं बोला "तुम सब ने मिलकर मुझे कुत्ता बनाया यह बात सच हैं"। हम सब हंसने लगे। नीलम और पुनम भी मुझे "कमला से सावधान रहने बोली" । हमारे चारों मैं बहुमत हो चुका था कि कमला से सावधान रहने का । कमला हम सबसे बात करती, मगर मैंने किसी को भी बताया ऐसा किसीने भी उसे जताया नहीं।
एक दिन फैजा के घर के पास कमला को कोई काम था। कमला ने मुझे फैजा के घर मैं रात को जाते देखा और दुसरे दिन मुझे नगमा के साथ घर से भी निकलते देखा। कमला ने यह बात पहले नीलम को बोली "नीलम बोली उसके जान-पहचान वाले हैं, उनके पास गया था मुझे मालुम हैं"। कमला ने यह बात उसी दिन अनघा को बोली " अनघा सीधे मुद्दे पर आ गयी बोली "कमला अगर नीलेश को अब कभी भी कोई नई औरत कि प्यास उठेंगी ना तो वो तेरे पास हि होंगा", तु चिंता मत कर" । कमला सुनकर हि शाॅक थी अनघा बता रही थी। अनघा उसे यह भी बोली "तुम्हें नीलेश चाहिए यह हम सब को मालुम हैं, घुमा फिरा के बात मत कर और नीलेश ने हमें सब बातें बताई है। हम चार लोग पस मैं सारी बातें एक दुसरे को बताया हैं।
कमला उस दिन बात हम चारों से हि बोलना हि छोड़ चुकी थी। लगभग दो महीने उसने खुद बातें बंद कर दी थी। नीलम फोन करती थी पर वह ज्यादा बात नहीं करती थी। एक दिन मैं बिना बोले शाम को अनघा के घर गया था । तो अनघा को माहवारी चल रही थी। अनघा मुझे बोली "मुझे पुना मैं एक ऑडर का काम हैं चलो"। हम पुना मैं पापड कि ऑडर का काम करने गये। रात हो गयी थीं अनघा बोली कमला के मेस पर चलों खाना खाते हैं। मैंने गाड़ी को कमला के मेस पर ले गया। मेस बंद थी लगभग दस बज गये थे।
कमला बहार हि खड़ी थी। कमला ने मुझे गाड़ी को अलग जगा पार्किंग करने को बोला, अनघा उतर गयी और मैं गाड़ी लगा कर कमला के घर मैं आ गया। मैंने खाना देख अनघा के तरफ़ देखा तो अनघा ने आंख मारी और बोली "मैंने कमला को ज़बान दि थी, "जब भी नीलेश को नई औरत कि प्यास उठेंगी ना, तो वो तेरे पास हि होंगा", "इस लिए खुद लेकर आ गयी हुं"। कमला इतनी सीधे बात के कारण बोहोत शरमाईं थी। अनघा कि बिनधास्त बातों कि मुझे आदत थी। अनघा कमला को बोल रही थी "नीलेश को महिने के पंद्रह बीस दिन हम मटन हि खिलाते हैं", "इसलिए हम तीनों को खाकर भी कभी कभी और जरुरत पड़ती हैं कुत्ते को"। मुझे अनघा बातें नयी नहीं थी पर कमला के लिए सीधे तीर लग रहें थे, मैंने कमला को खाना लगाने को बोला।
अनघा ने खाना सामने आते हि वापस कमला को छेड़ा। अनघा बोली "खाना से बडा ही सुगंध आ रहा आहे, बोहोत हि दिल लगा कर खाना बनया दिख रहा हैं", "खाने से मुंह मैं पानी आया हैं मेरे तो", "मुझे लग रहा हैं आज बोहोत हि पानी निकलने वाला हैं"। कमला बोली "अनघा तुम भी ना !" अनघा ने फिर सीधी बात कि "कमल, जब वहा प्यास हो हैं तो वह प्यास जरुरत खोजतीं हैं"। मैंने अनघा कि बात सुनकर उसके तरफ देखा और मैंने फिर खाना खाते खाते कमला कि मेस के बारे मैं पुछताछ करना शुरू कर दिया। अनका के विषय बदल दिया। हमने खाना खाया।
कमला ने मेस कि हालत ठीक नहीं बताई । तो अनघा बोली "पुना शहर मैं मेरी बोहोत पापड़ कि ऑर्डर होती हैं", मैं मेरा पापड़ तेरे यहां रखकर जाऊंगी, तुम बेच दिया करना, मेरा भी काम हो जायेगा, तुझे भी कुछ पैसा मिल जायेगा"। कमला अब अनघा कि सोच देख थोड़ी बदलती दिख गई और अनघा से सब समझ लेने लगी। खाना खाने बात भी दोनों कि कामकाज कि बातें चल रही थी। दोनों ने बर्तन भी साफ कर लिये थे।
मैं नीलम से फोन पर बातें कर नीलम को बता दिया था। नीलम ने मुझे सब सुनने के बात अनघा को फोन देने को बोला मैंने दिया। अनघा ने फोन पर बातें सुनकर मुझे फ़ोन देते हुए बोली "नीलेश तुम हमेशा मेरा काम हि बढ़ाते हों", मैं नीलम से पुछा "क्या हुआ"? नीलम बोली "अनघा को बोल दिया हैं" । नीलम ने फोन कट कर दिया। अनघा ने अपने मोबाइल से मुझे कामसूत्र कि काउगर्ल पोजीशन के फोटो भेजें और आंख मारी, बाद मैं उसने उटली काउगर्ल कि पोजीशन कि फोटो भेजी, फिर उसने डबल डेकर और जी विझ पोजीशन कि फोटो भेजें कर, अनघा कमला के तरफ़ देख कर बोली "नीलम बोल रही थी, कमला से कहना कि नीलम आज मी अपना सब तुझे दे रही हैं", समझीं कमल। कमला सब समझ गयी थीं।
लगभग बारा बजे थे। कमला का घर बोहत हि छोटा-सा था। मेस के पिछे, एक रुम थी जिसमें सिंगल बेड, अट्याच बाथरुम था। अनघा ने कमला से गाऊन मांग लिया और अपना पंजाबी ड्रेस कमला और मेरे सामने उतार कर, गाऊन पहनकर सिंगल बेड पर सो गयी। मुझे पंजाबी ड्रेस का दुपट्टा दे दिया और कपड़े निकालने को बोला, मैं सारे कपड़े उतार कर निकर पर बाथरूम गया। बाहर आया तो कमला अपना ब्लाऊज खोल रही थी। निचे सिर्फ निकर थी। निचे सोने के लिए गद्दी बिछाया था। मैं निचे बेड पर बैठ गया। कमला ब्लाउज निकालने के बाद ब्रा निकल कर बेड पर पड़ा गाऊन पहने लगी तो अनघा बोली "कुत्ता अभी निकाल फेंकेगा मत पहन"। मैं निचे बैठ कर कमला के शरीर को देख रहा था।
कमला और मेरी उम्र एक जैसी हि थी। कमला का शरीर सुडौल था। त्रिकोण शरीर था। नितंबों मैं उभार था। मै कमला को देख लन्ड सहलाने लगा था। मैंने बैठे बैठे अपनी निकर निकाल फेकी । मैं कमला और जाकर उसकी कमर को हाथ लगाकर उसकी भी निकर निकल फेंकी। कमला खड़े खड़े करंट लगने जैसी हिल गयी। मैंने कमला के नितंबों को दोनों हाथों से घेर के कमला को चुत को अपने मुंह के और खींच सीधे चुत को चाटने लगा। कलम चुत तो पहले हि गली थी। अनघा बोली "मैं बोली थी आज बोहोत पानी बहेगा" । कमला बोली "अनघा"। मैंने चुत को पानी चाटकर वापस जीभ को चुत को चोदने मैं लगा दिया। पहले कमला अपने खुद के स्तनों को हि सहला रही थी । गर्म होते हि उसने मेरा सर पकड़ कर अपनी चुत पर खिचना शुरु किया था। दस मिनट बाद कमला ने फिर पानी छोड़ा था। आहे भर भर मुझे पानी पिलाकर कमला मेरे सामने बैठ गयी।
मेरा लन्ड पुरा तनाव मैं था। कमला ने लन्ड को और देखा और अनघा कि और देखा बोली "यह बात हैं"। अनघा बोली "बातें मत कर"। मैंने कमला का हाथ पकड़ कर उसके हाथ मैं लन्ड पकड़ा दिया। मैं सो गया। कमला मेरे पैरों को फैला कर लन्ड सहलाने लगी। कमला लन्ड को बोहोत हि जोर जोर दबा रही थी। अनघा बोली कुछ होंगा नहीं कमला चार पांच साल से औरतें कि हाथों कि, औरतों के मुंह की, औरतों के चुत की और गांड़ की इतनी आदत लगी हैं इसे कि जबतक मन भरता नहीं तब तक यह पानी नहीं छोड़ेगा। प्यार से खेलती रह और आनंद लेती रह बस्सी।
कमला ने फिर जोर से हिलाना और दबाना बंद कर लन्ड को अपने मुंह मैं लिया। कमला ने लन्ड का मुंह चमड़े सहीत मुंह मैं लिया था। हाथ से चमड़ा निचे करती लन्ड का खुला मुंह चुसती और फिर चमड़ा उपर करती दस मिनट चुसने बाद कमला ने लन्ड को छोड़ दिया। कमला को लन्ड छोड़ता देख अनघा बेड से उठी और अपनी पर्स से डबल रबर के सेट को कमला को दिया। कमला बोली "क्या करु"। अनघा हंसने लगी, मेरे पास बैठ कर लन्ड और अंडकोष को रिंग पहनाई। जाकर बेड पर सो गयी। मैंने कमला कि कमर को पकड़ कर अपनी और खींचा चुम्बन करने लगा। मैंने पहले कमला अपने उपर रखकर चुमा फिर उसे निचे सुलाकर उसके पुरे शरीर को चाटा। कमला अब जैसे मुझे चोद दो चोद दो ऐसी परिस्थिति मैं थी। बिना पानी के मछली जैसी तड़प रही थी।
मैंने कमला के कमर के नीचे तकिया डाल लन्ड को चुत मैं सेट कि और सीधे लन्ड चुत मैं गाड दिया, कमला "उई मां" कह कर आहे भर रहीं थीं। दो प्रयास मैं पुरा लन्ड मैं कमला के चुत मैं गाड चुका था। मैंने कमला एक पैर घुटनों मोड़ उपर उठा कर अपने कांधे पर ले कर कमला कि चुत खोदने लगा था। कमला के स्तन मैंने दबा दबा कर लाल कर दिये थे। एक पैर छोड़ मैंने दुसरे पैर को उठाकर कांधे पर ले कमला चुत खोदते जा रहा था। कमला ऐसा सेक्स पहली बार हि अनुभव कर रहीं थीं शायद जो "उई मां, नीलेश, अनघा, आह्ह आह्ह कह रही थी।
उपर से मेरा मन भरते हि मैने कमला को उठाकर, अपने उपर ले लिया। कमला उपर से लन्ड चुत मैं लेते हि मेरे उपर हि सौ गयी और उत्तेजना मैं मुझे काटने लगी थी। मेरे स्तनों भी चुसने लगी थी, दबाने लगी थी। कमला कि चुत मेरे लन्ड को अच्छे से खींच रही थी। कमला कि उत्तेजना देख अनघा हंस रही थी। कमला ने वापसी से पानी छोड़ दिया था। थक कर मेरे उपर से हटकर मेरे बगल मैं सो कर बड़बड़ा रही थी। "नीलेश तुम बेड पर हैवान हो, पहली बार जिंदगी में अनुभव ले रही हुं"।
अनघा बोली "हैवान का अभी बाकी हैं" , कमला बोली "अब तुम लेलो" अनघा बोली "मैं आज ले सकती तो तुम्हें कैसे मिलता, मेरी महावारी चल रही हैं" कमला ने अपने सर पर हाथ मारा बोली "हे भगवान" मैं उठा कमला का पलटी किया, कमला के कमर के उपर उठाया, कमला को पलटी घुटनों मैं कर पिछे से सीधे लन्ड को चुत मैं गाड दिया। कमला कि कमर को मैंने इतना पक्का पकड़ के रक्खा था कि कमला को छुटने का कोई भी प्रयास विफल था।
मैंने कमला कि नितंबों को भी हाथ से चटाक मार मार लाल किया था, और चुत को भी पुरा लन्ड से खोदकर लाल किया था। मेरा होने को था तो मैंने कमला को छोड़ा हि नहीं। पुरा कमरा फच्चक फच्चक कि आवाज से और कलम कि अह्हा आह्हा उह्ह कि आवाज से गूंज रहा था। मुझे भी आनंद आ रहा था। कमला कि चुत लन्ड अन्दर खिंच रही थी । एक बजने को दस मिनट कम थे । मैंने कमला कि चुत अपने पाणी से भर दि थी। अच्छे से कुत्ते जैसे चुदाई के बाद मैंने कमला कि कमर छोड़ दि तो कमला वैसे हि अपने पैरों को सुकड़ कर निचे लेट गई।
मैं बाथरुम जा कर आया। कमला वैसे हि सोयी थी। मैंने टावल लिया कमला के चुत से मेरा और उसका बहता पानी साफ किया। कमला को जैसे कुछ नया हि अनुभव था। मैंने कमला को सीधे सुलाया। उसको बांहों भर के साथ मैं सो गया। कमला बोली रहीं थीं " नीलेश तुम बोहोत हि अच्छे इन्सान हो" पर बेड पर हैवान हो" । मैं बोला "अब सो जाओ, नहीं तो वापस पकड़ लुंगी" । कमला "हंस बोली अभी नहीं कल"।
अनघा अकेली सुबह जल्दी उठी थी। अनघा ने मुझे भी सुबह-सुबह हि उठाया और कमला को भी उठाया। अनघा उस के घर कि चाबी मुझे दि, कमला के लेकर जाने को बोला। मैं और कमला सुबह सुबह अनघा घर चले आये। कमला सुबह अनघा घर आकर वापस सो चुकी थी। अनघा कमला के मेस पर रुकी थी, कमला के मेस पर कामगार को सब कामकाज समझा कर, कमला आठ दस नहीं आयेगी बोल कर, शाम को अपने घर आ गयी। शाम को अनघा आने बाद कमला उठ चुकी थी।
अनघा मुझे बोली "मैं तुम्हें कल हि बोली थी, तुम हमेशा मेरा काम बढ़ाते हों"। कमला बोली"अनघा कुछ नहीं रे, अब आदत नहीं रही थी, सच बोलती हुं हैवान हैं । अनघा हंस रही थी और मैं भी। अनघा ने मुझे सामान लाने बहार भेज दिया ! मैं कुछ नमकीन, स्वीट और कसाई से मांस ले आया। अनघा और कमला दोनों वापस आकर देखा तो पुरी घुल-मिल चुकी थी। सब सामान निकाल कर कमला ने देखा, मांस देखते हि बोली "अनघा आज तुम ही खाना बनाना"। कमला सुबह से कुछ नहीं खाया था तो स्वीट और नमकीन खाने लगी।
मुझसे भी अब खुलकर बातें करने लगी थी। अनघा ने मुझे मॅसेज किया "लोहा गरम है मार दो हथोड़ा" मैंने मॅसेज कि "अभी भी नहीं जान"। अनघा वापस मॅसेज आया "मेरी माहवारी खतंम" । मैंने मॅसेज किया "कलम अब बचीं" । अनघा मुंह से बोली "कलम को बताया इसलिए हि संभल गयी नहीं तो जाने को बोल रही थी"। कमला बोली "अनघा तुम भी ना ! अनघा बोली "हम आपस मैं कुछ भी छिपाते नहीं कमल"।
मैने अपने कपडे निकाल निकर पर बाथरूम चला गया। वापस आया तो कमला कपड़े बदल गाऊन पर बेड पर सोयी थी। अनघा खाना बना रही थी। अनघा बोली "कमला सो गयी क्या"? कमला बोली"नहीं"। मैंने बेड पर जाकर कमला पास बैठ गया तो कमला उठने लगी तो अनघा बोली "कमला क्यु तकलीफ दे रही हैं उठने कि सोयी रह", "तुम्हें जो चाहिए वहीं होने वाला हैं"। मैंने कमला और देखा तो कमला हंस रहे थी।
मैंने कमला को पकड़ लिया कमला के साथ वापस सेक्स किया। कमला आज तैयार थी पुरा साथ दे रही थी। मिशनरी पोजीशन मैं कलम का एक पैर उठाकर फिर दोनों पैर उठा कर मैंने कमला कि चुदाई कि। बाद मैं कमला को लोटस पोजीशन मैं अपने कमर पर बिठाकर कर जमकर चुदाई की। कमला को मैंने दोनों कि पुरी शांती नहीं होती तब तक छोड़ा नहीं। कमला चुदाई से पुरी पसीने से भीग गयी थीं तो वह बाथरूम चली गयी। मैंने बेड पर सोया रहा।
अनघा ने खाना बनाया था। रात को खाने बाद मैं और अनघा काम कि बातें करने लगे। कमला सुन रही थी। कमला के साथ आधे घंटे पहले चुदाई चल रही थी और अब अनघा मैं काम कि बातें कर रहे थे तो कमला शान्ती से सब सुन रही थी। कल से कमला यह बात समझ चुकी थी, कि नीलम, पुनम, अनघा और मेरा रिश्ता कुछ भी हो,मगर सब करके भी पैसा कमाने का कामकाज सब मिलकर करते हैं। कोई किसी का फायदा उठा नहीं रहें। सब मिलकर काम कर रहे हैं राज़ी ख़ुशी जिंदगी जी रहे हैं।
हमारी बातें खत्म होने पर कमला बोली "नीलेश तुम सच मैं अलग इन्सान हो, तुमने सब को अपने पैरों पर खड़ा किया हैं, इसलिए नीलम, पुनम और अनघा तुमपर खुद से जादा भरोसा करती हैं", "अब मैं भी इन तीनों जैसे हि तुम्हारे साथ दुंगी"। मैं बोला "कमला तुम पहले ग़लत हि थी, पर तुम्हारे गलती से यह सब हुआ हैं इसलिए तुम भी सब भुल जानो और बची जिंदगी मैं आगे बढ़ो"।
तो कैसी लगी कामवासना के पाठको मेरी जब चुत को प्यास हो तो वह लन्ड खोजतीं हैं। कहानी मुझे प्लीज़ मेल कीजिएगा.
आपका निलेश लोंके
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