जया से संभोग का नशा-१: Antarvasna Sex Stories
मैं राज 35 वर्ष का हूं आज मैं अपनी और मेरी पड़ोसी जया और मेरी कई संभोग कथाएं लिखने जा रहा हूं आपको मेरी सभी कहानियां अच्छी लगेगी, मुझे आशा है, आप मेरी कथा पढ़कर मेरी कथाओ का आनंद ले लेंगे,
जया जो मेरे से 4साल छोटी है उसकी शादी मेरे पड़ोस में रहने वाले रमेश से हुई थी लेकिन वह दोनों कई सालो से मुंबई में रहते थे, अब वह अपने घर यानी पुणे में मेरे पड़ोस में रहने आए थे, उन्हें अभी तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ था, उनके घर पर वह दोनों ही रहते थे , उनका बाकी परिवार गांव में था ।
जया दिखने में बहुत खूब सूरत है , उसे कोई देखे तो देखता रह जाएं , पड़ोसी होने से उसकी बाल्कनी और हमारी बाल्कनी आमने सामने थी, अक्सर हमारी दोनों की नयनो का टकराव होता, उसी में एक नशा सा महसूस होता था,
मेरी बीवी कमल और जया में भी दोस्ती हो गई थी दोनों साथ मार्केट जाते, साथ शॉपिंग करते, कुछ स्पेशल मौके पर खाना भी साथ खाते , साथ में बैठ कर गपशप भी करते रहते थे,
Antarvasna Sex Stories
मैं और रमेश भी दोस्त बन ही गए थे, हम दोनों फैमिली इतने क्लोज हुए थे कि हमें कभी एहसास ही नहीं था कि हम अलग अलग फैमिली है,
एक दिन रमेश ने मुझे कॉल किया और बोला कि आज रात को मेरे घर में पार्टी है, आज जया का जन्मदिन है , आप दोनों को आना होगा, खाना पीना आज इधर ही होगा , मैने हा भर दिया, मेरे मन में अलग अलग सपने सजने लगे , आज कुछ जरूर होगा, जयाsssss जया , आज मेरे करीब आना और मुझे खुश कर देना, ये सोचते रह गया, मैं आफिस में गया तब भी दिन भर मेरी बेताबी बढ़ती रही कब रात होगी कब पार्टी होगी और कब मैं जया को अपनी बाहों में उठाकर बेड पर लिटाकर बहुत प्यार करूं, और हम जब पहली बार करीब आए, तब शायद हमें भी अंदाज़ा नहीं था कि हमारी छोटी-छोटी बातचीत इतनी गहरी यादों में बदल जाएगी।
आखिर वह समय आ ही गया, जिसका मै बेताबी से इंतजार कर रहा था। मैं और कमल तैयार होकर रात के 9.30 बने जया के घर गए, मेरे बच्चे भी खाना खाकर सो गए थे,
डोर बेल बजाया तो डोर ओपन हुआ रमेश ने मुस्कराते हुए स्वागत किया,
रमेश - आइये अंदर , बैठिये
मैं और कमल अंदर जाकर सोफे पर बैठ गए।
कुछ ही समय के बाद जया अंदर से आई, आज बहुत ही सुन्दर लग रही थी, मैने उसे देखता ही रह गया, जया ने पानीवाला ग्लास ट्रे से उठाकर मुझे पकड़ाया तो हमारी दोनों के हाथों का स्पर्श हुआ तो एकदूसरे को देखकर मुस्कराए,
जैसे उस छोटे-से स्पर्श ने बिना शब्दों के बहुत कुछ कह दिया हो। कुछ पल के लिए दोनों चुप रहे, लेकिन उनकी मुस्कान उस खामोशी को खूबसूरत बना रही थी।
तभी कमल की नज़र हम दोनों पर पड़ी। दोनों ने उसे देख लिया और थोड़े संकोच के साथ अपनी नज़रें हटा लीं। फिर एक-दूसरे की ओर देखकर वे दोबारा मुस्करा दिए।
वह पल साधारण था, मगर उनके लिए यादगार बन गया—एक छोटा-सा स्पर्श, एक मुस्कान और एक नज़र, जिसने उस मुलाकात में एक अलग ही मिठास भर दी।
उसके बाद पार्टी शुरू हो गई। कमरे में हल्का संगीत बज रहा था और हम चारों में मज़ाक का माहौल बन गया था। जया के साथ कमल बैठकर गपशप कर रहे थे इधर रामेंश और मैं साथ बैठे थे। सबने अपने-अपने पसंदीदा ड्रिंक लिए और पुरानी यादों को लेकर बातें करने लगे।
रमेंश ने कोई मज़ेदार किस्सा सुनाया तो हम सब ज़ोर से हँस पड़े। जया मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और धीरे से बोली, “आज की शाम सच में बहुत स्पेशल है,
कमल ने भी ड्रिंक लिया था तो वो भी थोड़ी झूम रही थी, रमेश कुछ ज्यादा ही ड्रिंक लिया था तो वह वही सो ही गया, मैने जानबूझकर बहुत कम ड्रिंक लिया था तो ईसलिए मैं होश में था,
कमल ने कहा चलो ....चले क्या ?
मैने हा बोला, और चलने के लिए उठे, तो वह चलने की स्थिति में नहीं लग रही थी , तो मैने उसे कहा थोड़ा रेस्ट करो यही पर ...तो उसने ठीक है बोल कर बैठ कर ही सो गई,
इधर मैं और जया दोनों ही ठीक थे, फिर मैने मुस्कराकर जया को देखा, तो उसने साड़ी का पल्लू गिराया ,
जया ने मेरी तरफ देखा और हल्की-सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। उसने सहजता से अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और धीमे स्वर में बोली, “क्या देख रहे हो?”
मैंने मुस्कराकर कहा, “कुछ नहीं… बस तुम्हें देखकर अच्छा लग रहा है।”
जया ने मेरी ओर देखकर मुस्कुराई और बेडरूम की ओर चलने लगी तो मैं भी बिना कुछ सोचे उसके पीछे-पीछे चल दिया। उसके कदमों में एक अजीब सी घबराहट थी, जो मुझे साफ महसूस हो रही थी। जैसे ही हम कमरे के अंदर पहुंचे, जया ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और मुड़कर सीधे मेरी आंखों में देखा।उसकी आँखों में ढेर सारे सवाल और एक अनजाना डर था। इससे पहले कि मैं कुछ पूछता, उसने अपनी होंठ मेरी होंठ पर रखकर जोर से गले लग गई, तो मैने भी कुछ भी न सोचते हुए, उसे अपनी बाहों में उठाकर बेड पर लिटाकर किस करने लगा।
उसने मेरे शर्ट की बटन खोलकर निकाल दिया, मेरा बनियान भी निकाल दिया, मैने भी जोश में था उसका ब्लाउज़ निकाला और
और साथ में ब्रा भी निकाल कर दोनों वक्षो को आजाद किए, तो क्या मस्त लग रहा था,
मैने दोनों वक्षो के निप्पल को मुंह में लेकर चूस रहा था बारी बारी से, वह भी अब संभोग के लिए उतावली हो गई थी,
मैने उसकी साड़ी को कमर से ऊपर किया और उसकी पेंटि को एक झटके के साथ निकाल कर फेक दिया, उसके दोनों टांगों को उठाकर साइड करके उसके योनी का रसपान करने लगा, तो वह बहुत गरम हो गई थी, वह यौनि को चाटने से स्वर्ग का आनंद प्राप्त कर रही थी,
अब मैने अपने लिंग उसके मुँह में दिया तो वह भी बहुत दिनों प्यासी हो इस तरह लिंग को मुंह में अंदर बाहर करके चूस रही थी, मुझे बहुत ही मजा आ रहा था, उसने मेरा चेहरा पकड़कर अपनी ओर किया, उसकी आँखों में एक जंगली चमक थी। "बस... अब मुझे अंदर ले लो। मैं तड़प रही हूँ," उसने बेबसी से कह रही थी,
मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे धीरे से पलटकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसके शरीर की गर्मी मेरे सीने से चिपकी हुई थी, और उसकी साड़ी अब पूरी तरह से ऊपर थी, उसकी पतली कमर और गोल नितंब साफ दिख रहे थे।
मैंने उसकी जांघों के बीच अपनी जगह बनाई, और उसके कान के पास झुककर कहा, "तो फिर ले ले... अपनी मर्ज़ी से।" उसने बिना एक पल गँवाए जया ने मेरी कमर पर अपने पैर लपेटे और मुझे अपनी ओर खींच लिया। हमारे शरीर एक हो गए, और उसकी गहरी साँसों ने कमरे में एक अलग ही माहौल बना दिया।
और... जोर से...और जोर से...!" उसने चीखते हुए कहा, अपनी कमर को मेरी गति के साथ उठाते हुए। उसके दोनों स्तन मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे, और उसका चेहरा पसीने से चमक रहा था। मैंने उसकी एक टाँग को और ऊपर उठाकर अपने कंधे पर रख लिया, जिससे मेरा लिंग और गहराई तक अंदर जाने लगा।
उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठों से बस "हाँ... हाँ... आह आह... उह ऊह !" की आवाज़ें निकल रही थीं।
मेरी गति तेज़ होती गई, हर धक्के के साथ हमारे शरीरों की टक्कर की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। उसकी योनी की दीवारें मेरे लिंग को और कसकर दबा रही थीं, और मैं महसूस कर सकता था और उसने अपने होंठ काटते हुए मेरी गर्दन पर अपना मुँह दबा लिया ।
मैने दोनों वक्षो के निप्पल को मुंह में लेकर चूस रहा था बारी बारी से, वह भी अब संभोग के लिए उतावली हो गई थी,
मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकती," उसने कांपती आवाज़ में कहा, अपनी उंगलियों से मेरे बालों को सहलाते हुए। उसकी जांघें मेरे कमर के चारों ओर कस गईं, और मैंने महसूस किया कि उसकी साड़ी पहले ही ऊपर खिसक चुकी थी।
मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे धीरे से पलटकर बिस्तर पर लिटा दिया।
मैंने उसकी योनी में अपना लिंग डाला और जोर-जोर से धक्के
देने लगा। उसकी गीली, गर्म योनी ने मेरे लिंग को कसकर जकड़ लिया, जैसे वह मुझे अंदर ही अंदर खींच रही हो। उसकी कराहें अब बेकाबू हो चुकी थीं, हर धक्के के साथ उसके नाखून मेरी पीठ पर और गहरे गड़ते जा रहे थे।
"और... और जोर से...!" उसने चीखते हुए कहा, अपनी कमर को मेरी गति के साथ उठाते हुए। उसके स्तन मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे, और उसका चेहरा पसीने से चमक रहा था।
मैंने उसकी एक टाँग को और ऊपर उठाकर अपने कंधे पर रख लिया, जिससे मेरा लिंग और गहराई तक अंदर जाने लगा। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठों से बस "हाँ... हाँ... वहीं...!" की आवाज़ें निकल रही थीं।
"मैं... मैं नहीं रुक सकती...!" उसने कांपती आवाज़ में कहा, और उसी पल उसके शरीर में एक झटका सा आया। मैंने भी उसकी गर्मी को महसूस करते हुए अपनी गति और तेज़ की, और कुछ ही पलों में मेरे लिंग ने पूरा वीर्य उसकी योनी में छोड़ दिया और हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में थककर लेट गए,
उसकी साँसें अभी भी मेरे कान के पास चल रही थीं।
वह अब उठकर वाश रूम गई, मैं भी अपने कपड़े ठीक करके बाहर आया, इधर कमल और रमेश अभी भी सो रहे थे , जया अंदर से ठीक होकर आई , मैने कमल को आवाज दिया और हिलाकर उठा दिया, अब उसका नशा थोड़ा कम हो गया था,
उसने जया को बाय करके चल पड़ी , मैने पीछे मुड़कर फ्लाइंग किस किया , जया ने भी रिप्लाई वैसे ही दिया
मैं वो रात आज भी नहीं भूल पाता हूं जो काम वासना से भरा हुआ था , जया और मैने उसके बाद कई बार संभोग किए है वह सभी आपको मैं Antarvasna Sex Stories के माध्यम से बताऊंगा ,
धन्यवाद
आपका राज

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