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ट्रेन में मिली औरत के साथ अधूरा सेक्स - Antarvasna3 Sex Stories

Antarvasna3 Sex Stories में भीड़ वाली गाड़ी में मेरे बगल में एक जवान भाभी थी. उसके बूब्ज़ को मेरे हाथ लग रहे थे पर उसे कोई आपत्ति नहीं थी. मैंने उसके साथ मजा किया.


दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं पंजाब का रहने वाला हूं (नाम बदला हुआ है)।


मैं जो आपको कहानी सुनाने जा रहा हूं, वह आज से 10 साल पहले की है जब मैं अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके पंजाब से दिल्ली रहने के लिए आया था।

मैं अक्सर ही दिल्ली आता था।


यह उस रात की Xxx ट्रेन स्टोरी है जब मैं ट्रेन से दिल्ली जा रहा था।

मेरी ट्रेन रात को 10:00 बजे की थी, जो कि सुबह 5:00 बजे दिल्ली पहुंचा देती थी।


मैं स्टेशन पर 9:30 बजे पहुंच गया और अपनी ट्रेन का इंतजार करने लगा।

सीट बुक न होने के कारण मैं जनरल डब्बे में जाने वाला था।


ट्रेन अपने निश्चित समय 9:55 पर स्टेशन पर पहुंच गई।

ट्रेन में काफी भीड़ थी और उतरने वाले लोग भी बहुत ज्यादा थे।


इसलिए जब मैं जल्दी से ऊपर चढ़ा तो मुझे सीट मिल गई।

मेरे साथ ही एक परिवार, जिसमें सात-आठ लोग थे, वह भी इस सीट पर साथ आकर बैठ गए।


मैं खिड़की की तरफ था और वह सब लोग आकर सामने और मेरे साथ बैठ गए।


उसमें दो औरतें थीं जिन्होंने साड़ी पहनी थी; एक मेरे सामने और एक मेरे साथ आकर बैठ गई, और पुरुष लोग उनके साथ बैठ गए।


ट्रेन में काफी सवारी चढ़ी, जिससे ट्रेन में भीड़ हो गई और काफी लोग खड़े भी थे।


ट्रेन अपने निर्धारित समय पर स्टेशन से चल दी।


अब मैं आराम से बैठा था और वह औरत मेरे साथ चिपक कर बैठी थी, जो मेरे शरीर में थोड़ा उत्साह पैदा कर रही थी।

तभी वह एकदम ठीक होकर बैठने के लिए हिली, तो मेरा हाथ उसकी चूचियों से छू गया।

मुझे बहुत मज़ा आया पर डर भी लग रहा था कि कहीं वह कुछ बोल ना दे! फिर मैं चुपचाप बैठ गया।


थोड़ी देर बाद वह मेरे और करीब हो गई और मुझसे सट कर बैठ गई।


अब मेरा हाथ बार-बार उसकी चूचियों को छू रहा था पर वह कुछ नहीं कह रही थी।

तभी उसने मेरे हाथ को पकड़ा और अपनी चूचियों पर रख दिया!


मुझे बहुत मज़ा आया और साथ-साथ मेरा डर भी खत्म हो गया कि उसे मेरा यह करना पसंद है या नहीं।


उसे भी मज़ा आ रहा था; वह भी मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख कर दबा रही थी।


तब मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने अपना हाथ उसके ब्लाउज के अंदर डाल दिया और उसकी चूचियों को पकड़ लिया।


दोस्तो, मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था!

उसकी चूचियां बिल्कुल रुई की तरह मुलायम थीं।


मुझे मज़ा आ रहा था तो मेरा लंड भी धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था और मेरी पैंट में टाइट हो रहा था।


तभी अगला स्टेशन आया और ट्रेन रुक गई।

यहां और भी सवारियां ट्रेन में चढ़ गईं जिससे ट्रेन में और भी भीड़ हो गई।


अब हमारी चार लोगों वाली सीट पर 6 लोग बैठे थे, जिससे वह मेरे और भी करीब आ गई।

रात बहुत हो चुकी थी तो किसी ने ट्रेन की लाइट बंद कर दी।


ठंड का मौसम था, इसलिए चिपक कर बैठने में कोई दिक्कत नहीं थी।


लाइट बंद होने पर उसने एक कंबल लिया, जो उसने अपने ऊपर ओढ़ लिया और मेरे ऊपर भी डाल दिया.

और वही कंबल उसके साथ बैठे बच्चे के ऊपर भी डाल दिया।


तभी मैंने भी अपने बैग से कंबल निकाला और ओढ़ लिया।


फिर से मैंने अपना हाथ उसके ब्लाउज में घुसा दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और उसे भी मज़ा आ रहा होगा।


तभी मैंने धीरे से उससे पूछा- कि कहां जाना है? उसने भी बड़ी धीरे से जवाब दिया, “दिल्ली!”


फिर मैंने कंबल की आड़ में उसके गले पर एक किस कर दिया, जिससे उसकी आह निकल गई!


तभी मैंने अपना हाथ उसके ब्लाउज से निकाला और उसके हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया।

उसने पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी।


मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

मेरा लंड और भी टाइट हो रहा था और मेरी पैंट फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था।


तभी उसने एकदम से कंबल ऊपर किया और मेरे होठों पर एक किस कर दिया!

अंधेरे में मैं उसका चेहरा तो नहीं देख पा रहा था पर उसके होठों का स्वाद बहुत ही अच्छा था, जो मुझे बहुत उत्साहित कर गया।


लाइट बंद होने और कंबल के अंदर होने के कारण हमें कोई नहीं देख सकता था, जिसका हम दोनों ही पूरा फायदा उठा रहे थे।


अब मैं अपना हाथ उसकी चूचियों से नीचे की तरफ ले गया और उसके पेट को सहलाने लगा।

उसका पेट भी बहुत मुलायम था।


पेट पर हाथ फिराते हुए मैं अपना हाथ नीचे की तरफ ले गया और साड़ी के अंदर डालने को हुआ.

तभी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रुकने के लिए बोली।


फिर उसने अपनी दोनों टांगें सीट के ऊपर कर लीं और मेरा हाथ पकड़ कर साड़ी के नीचे से अपनी जांघों पर रख दिया।

उसकी जांघों पर हाथ रखते ही मेरा मन रोमांस से भर गया और मैं उसकी जांघों पर हाथ फिराने लगा।


धीरे-धीरे मैं अपना हाथ और अंदर ले गया और उसकी चूत के किनारे पर उंगलियों से सहलाने लगा।

उसकी सांसें धीरे-धीरे बढ़ रही थीं जो मुझे उसकी नाक से आती आवाज़ से पता चल रहा था।


मैं भी बहुत उत्साहित हो रहा था; मैं अपनी उंगलियों को उसकी चूत के किनारे पर फेर रहा था।


दोस्तो, मुझे जन्नत सा मज़ा मिल रहा था!

मैं कभी नहीं जानता था कि जनरल डब्बे का यह सफर मेरे लिए जन्नत का सफर होगा।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।


तभी मैंने धीरे से अपनी एक उंगली उसकी पैंटी में घुसा दी।

उसकी चूत इतनी गीली हो रही थी कि चूत का पानी मेरी उंगलियों पर लग गया।

मैंने अपना हाथ बाहर निकाल लिया।


तभी वह एकदम से बोली, “क्या हुआ? क्यों निकाल लिया?!”

तो मैंने अपनी उंगली को पहले अपने मुंह में लिया और उसकी चूत का नमकीन रस चखने लगा, और फिर दोबारा अपनी उंगली उसकी चूत में घुसा दी।

फिर अपना हाथ निकाला और इस बार मैंने उसकी चूत का रस उसको चखाया।


वो मेरी उंगली को होठों में लेकर चूसने लगी!


अब मैं फिर से अपनी उंगली उसकी चूत पर ले गया और उसकी चूत की फांकों को मचलने लगा और उसकी चूत सहलाने लगा।


दोस्तो, बहुत मज़ा आ रहा था!


फिर मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में घुसा दी और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

उसकी चूत एकदम से गीली हो चुकी थी।


तभी उसने मुझे उंगली को और अंदर घुसने को बोला; मैंने भी अपनी एक उंगली पूरी अंदर घुसा दी।

दोस्तों, बहुत ही मज़ा आ रहा था और वह भी मेरे इस मज़े में पूरा साथ दे रही थी, उसको भी मज़ा आ रहा होगा।


अब मैंने फिर से उसका एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और अपनी पैंट की जिप खोल दी।

वह समझ गई कि मैं क्या चाहता हूं और उसने अपना हाथ मेरी पैंट की जिप के अंदर डालकर कच्चे के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगी।


इधर मैं उसकी चूत में उंगली कर रहा था और वह मेरे लंड को धीरे-धीरे सहला रही थी।

कसम से दोस्तो, बहुत ही मज़ा आ रहा था!


तभी उसने अपने हाथ को थोड़ा और अंदर किया और मेरे कच्छे के अंदर डाल दिया और मेरे लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लिया।

अंधेरा और कंबल होने के कारण किसी को नहीं पता चल सकता था कि अन्दर क्या हो रहा है, पर हम दोनों बहुत ही मज़े कर रहे थे।


हम सब भूल गए थे कि हम एक ट्रेन में हैं; ऐसा लग रहा था कि हम घर पर हैं और हम एक दूसरे से बहुत प्यार कर रहे हैं।


अब मेरा मन अपने लंड को उसकी चूत में डालने का कर रहा था, पर वह मुमकिन नहीं था।


अब मुझमें बहुत वासना भर रही थी, और मैं बहुत तेज़-तेज़ अपनी उंगली उसकी चूत में चलाने लगा।

वह भी मेरे लंड को ऊपर-नीचे कर रही थी और बहुत अच्छे से सहला रही थी।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।


अब मैंने अपनी उंगली की स्पीड और बढ़ा दी, और तकरीबन 5 मिनट तक मैंने अपनी उंगली को उसकी चूत में अंदर-बाहर किया।


फिर उसका शरीर एकदम से अकड़ गया।

उसने मेरी उंगली को पकड़ कर अपनी चूत में जकड़ लिया और उसकी चूत का पानी बहने लगा।


तभी उसने एक आह भरी! मेरा हाथ उसकी चूत के रस से भर गया।

मैं समझ गया कि उसका पानी निकल गया है।


5 मिनट तक वह बिल्कुल शांत होकर बैठी रही।

उसने मेरे लंड को हिलाना बंद कर दिया और बस मेरे लंड को पकड़ कर बैठी रही।


5 मिनट बाद उसने बोला, “मज़ा आ गया!”


दोस्तो, उसके बोलने से ही ज़ाहिर था कि वह बहुत मज़ा ले रही थी और मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था।


अब मेरा भी मन हो रहा था कि बस अपना लंड उसकी चूत में घुसा दूं.

पर ऐसा तो नहीं हो सकता था।


तभी मैंने मायूसी भरे स्वर में उससे बोला, “तुम्हारा तो हो गया, मेरा क्या होगा?!”

उसने मेरे होठों पर एक चुंबन दिया और बोली, “सबर करो, आपको भी पूरा मज़ा देंगे!”


और उसने मेरे लंड को पकड़ कर फिर से हिलाना शुरू कर दिया।

मुझे फिर से बहुत मज़ा आने लगा था।


तभी अगला स्टेशन आया और ट्रेन रुक गई।


हमारी सीट पर बाद में जो दो लोग आए थे, वह उतर गए और हमारे साथ वाले लोग इधर-उधर होकर बैठ गए।


क्योंकि ट्रेन रुकी थी, तो उसने मेरा लंड छोड़ दिया था और सीधा बैठ गई थी।

उसके साथ बैठा बच्चा सो गया था।


अब इस सीट पर मैं, मेरे साथ वह औरत, एक बच्चा और एक पुरुष बैठे हुए थे।


तो उसने उस पुरुष को आगे को होकर बैठने को बोला और खुद भी आगे होकर बैठ गई, और बच्चे को सीट पर पीछे लिटा दिया।

मैंने अपना लंड अभी भी बाहर निकाला हुआ था जो कंबल के नीचे ढका हुआ था।


मैं फिर से उसके द्वारा अपने लंड को हिलाने का इंतज़ार कर रहा था।


तभी उस पुरुष ने उसको भी आगे की तरफ लेटने के लिए बोला।

अब वह बच्चे के आगे लेट गई। उसका सर मेरी तरफ था और टांगें उस आदमी के पीछे थीं.


और उसने फिर से कंबल अपने और बच्चे के ऊपर डाल दिया।

कंबल काफी बड़ा होने के कारण मेरी टांग के ऊपर तक आ रहा था।


थोड़ी देर बाद मुझे अपने कंबल में उसका हाथ महसूस हुआ और उसने कंबल के नीचे से मेरा लंड पकड़ लिया।


मेरा लंड थोड़ा ढीला हो गया था, पर वह फिर से उसे आगे-पीछे करने लगी और जल्दी ही मेरा लंड फिर से टाइट हो गया।


वह मेरे लंड को ऊपर से नीचे तक सहला रही थी और कभी-कभी मेरे अंडों पर भी उंगलियां फिरा देती थी।


कसम से दोस्तो, बहुत ही मज़ा आ रहा था! फिर वह धीरे-धीरे हिलाने लगी।


तभी उसने अपना सर थोड़ा और ऊपर किया और मेरी जांघों पर सिरहाना लगा लिया, और अपने हाथ को अपने सिर के ऊपर लाकर मेरे लंड को हिलाने लगी।

लाइट बंद होने और कंबल में होने के कारण किसी को नहीं पता लग रहा था कि क्या हो रहा है।


दोस्तो, मुझे इस छुपा-छुपी में बहुत ही मज़ा आ रहा था!


तभी उसने मेरी कमर को पकड़ कर मुझे घूमने का इशारा दिया।

मैं थोड़ा करवट लेकर टेढ़ा बैठ गया।

मेरा लंड उसके सर को छू रहा था।


तभी उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपना सिर ऊपर करके मेरे लंड पर एक किस कर दी!


दोस्तो, उसकी किस से मैं एकदम वासना से भर गया और मुझे बहुत मज़ा आने लगा।


तभी उसने फिर से मेरे लंड के सुपाड़े को अपने होठों में दबा लिया और उसको लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी!

कसम से दोस्तो, बहुत ही मज़ा आ रहा था!


धीरे-धीरे से वह मेरे लंड को हिला रही थी और मेरे लंड के सुपाड़े को चूस रही थी।

वह धीरे-धीरे अपने मुंह को खोल रही थी और लंड को और भी अंदर ले रही थी।


दोस्तो, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मैं स्वर्ग का आनंद ले रहा था!


अब वह मेरे लंड को पूरा मुंह में लेकर चूस रही थी।

मेरा 6 इंच का लंड बार-बार उसके मुंह के अंदर-बाहर हो रहा था।


वह मेरे लंड को अपने होठों से दबाकर ऐसे हिला रही थी जैसे मानो मेरा लंड चूत में अंदर-बाहर हो रहा हो।


दोस्तो, मुझे जन्नत का मज़ा मिल रहा था!


तकरीबन 20 मिनट मेरे लंड को चूसने के बाद उसने मेरे हाथ को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचा और मेरे कान में बोली, “आपका कितनी देर में होगा?!”

तभी मैंने धीरे से जवाब दिया, “तुम लगी रहो, जल्दी ही हो जाएगा!”


कुछ देर के लिए वह फिर से हाथ से हिलाने लगी और 5 मिनट बाद फिर से मेरा लंड मुंह में भर लिया और बहुत तेज़-तेज़ हिलाने लगी।


दोस्तो, अब मुझे भी ऐसा लग रहा था कि मैं चरम सीमा तक पहुंचने वाला हूं।


वह बहुत तेज़-तेज़ अपने होठों में मेरे लंड को हिला रही थी।


मेरा शरीर भी अकड़ने लगा था; मुझे पता चल गया था कि मेरा होने वाला है तो मैंने उसका सर दूर करने की कोशिश की कि कहीं उसके मुंह में होने से उसको बुरा न लग जाए।


पर उसने अपने होठों की पकड़ मेरे लंड पर और भी मजबूत कर दी!


तभी दोस्तो, मेरे लंड ने अपना पानी उसके मुंह में छोड़ दिया।


एक के बाद एक मेरे लंड से पिचकारी उसके मुंह में निकलने लगी।

वह मेरा सारा पानी गटक गई!


मैं अपनी आंखें बंद करके चरम आनंद को महसूस करने लगा।

उसने अच्छी तरह से मेरे लंड को चाट कर साफ कर दिया.


तब फिर उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और धीरे से बोली, “मज़ा आया ना?!”

मैं बोला, “जन्नत का मज़ा आ गया!”


और उससे भी पूछा, “तुम्हें कैसा लगा?!”

उसने बोला, “मुझे भी बहुत मज़ा आया!”


दोस्तो, कुछ देर तक हम फिर ऐसे ही बैठे रहे।


फिर थोड़ी देर बाद वह अपना सर नीचे सीट पर रखकर सो गई।


उस चरम सुख की थकान से मुझे भी नींद आ गई.


दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना!

और हां याद रखना, अभी सफर आधा ही हुआ है, अभी आधा सफर बाकी है।

आधे सफर में क्या हुआ, आपको बाद में बताऊंगा।


पहले आप लोग बताओ मेरी अधूरी कहानी कैसी लगी?

दोस्तो, आप मुझे मेरी Antarvasna3 Sex Stories के बारे में बताने के लिए मेल कर सकते हैं।

मेरी मेल आईडी है

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