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रिसेप्शन पार्टी में एक बड़े लंडबाज़ से छत में चुदी: Antarvasna Sex Stories

हैल्लो दोस्तों,

मैं जयश्री ऊर्फ जाया,

आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी छोड़ी नौकरी दोबारा पाने के लिए मैं चुद गई तो पढ़ें ही होंगे।


यह कहानी उससे आगे की हैं, जब डॉक्टर बने मुझे लगभग नौ–दस महीने हो चुके थे।

और अभी भी मायके में ही रह रही थी, संदीप से कॉल पर बातें होती रहती थीं।

वो नया घर बनाने की कोशिश में लगा हुआ था, लेकिन इतना जल्दी कुछ होने वाला नहीं था।


डॉ. पटेल से अस्पताल में मुलाकातें होती रहती थीं और मौका मिलते ही वो मेरी दबा कर लेते भी थे।

लेकिन डॉ. पटेल का जल्दी झड़ जाता था, जिससे मैं असंतुष्ट रह जाती थी, शरीर में गर्मी भरी रहती थी।


फिर एक रात को मैं एक रिसेप्शन पार्टी में गई थी, सुनहरे बॉर्डर वाली पारंपरिक सफेद साड़ी पहनी थी।

और कम बाजू वाली सफेद ब्लाउज, सोने की किनारी वाली गहरी वी-नेकलाइन।

जिससे मेरी 38 इंच की चूचियों की गहरी दरार साफ दिख रही थी, उस रात मैं काफी आकर्षक लग रही थी।



इसीलिए वहाँ एक फोटोग्राफर तस्वीरें खींच रहा था, जो दुल्हन से ज्यादा वो मेरी तस्वीरें ले रहा था।

पहले तो मैं परेशान होने लगी थी यह सोचकर कि…"ये कौन हैं जो मेरी तस्वीरें लिए जा रहा हैं?"


फिर जब ध्यान से देखि तो मैं उसे पहचान गई कि ये तो प्रभाकर हैं।

हमारे कॉलोनी के पास वाले बस्ती का बंदा था, जो उम्र में 36-37 साल का होगा।


प्रभाकर दिखने में कोई हीरो जैसा नहीं था, बल्कि लोफर-छापरी टाइप का बंदा था।

जिसके लंबे सुनहरे बाल थे, ठोड़ी पर सुनहरी दाढ़ी था, गालों पर मुँहासों के बड़े-बड़े छिद्र भरे पड़े थे।


लेकिन फिर भी खुदको हीरो समझता था और बाइक पर घूमते रहता था।

मैं उसे लौंडियाबाजी करते हुए कई बार देख चुकी थी, लेकिन बातचीत कभी नहीं हुई थी।


इसीलिए प्रभाकर ने मुझे पहचाना नहीं था, तो मैंने थोड़ी नटखट हरकत करने की सोची।

दरअसल मैं अंजान बनकर साड़ी का पल्लू एडजस्ट करने के बहाने अपनी चूचियों की दरार का दीदार करवाने लगी।


और प्रभाकर ठहरा लौंडियाबाज, वो तुरंत समझ गया कि मैं जानबूझकर उसे दिखा रही हूँ।

तभी मेरे पति संदीप का कॉल अचानक से आया, तब गाने बहुत जोर से बज रहे थे।


मैं कॉल उठाने के लिए गेस्ट हाउस की तरफ चल दी, प्रभाकर भी मेरे पीछे-पीछे आने लगा था।

वो भी यह सोचकर कि मैं उसे देना चाहती हूँ, मैं संदीप से बात करते हुए छत की तरफ जा रही थी।


संदीप ने यूँ ही पूछा कि "क्या कर रही हूँ?"

मैंने बताया कि "रिसेप्शन में आई हूँ।"

फिर जब संदीप ने पूछा कि "साथ कौन–कौन है?"

तो मैं झूठ बोल दिया कि "घरवाले आए हैं।"


फिर मैं बात करते-करते छत पर पहुँच गई, पहुंची तो एक तरफ कुछ युवा शराब पी रहे थे।

मुझे अचानक से जोर की पेशाब लगने लग गई थी और नीचे जाने के बजाय मैं छत के दूसरे तरफ देखि।


उस तरफ पानी की टंकी और कोने में संकीर्ण रास्ता भी था, मैं संदीप से बोली, “मैं बाद में बात करती हूँ, ठीक हैं” और कॉल काट कर दी।

फिर मैं टंकी के संकीर्ण रास्ते से होते हुए पीछे गई, जहां खाली पानी–शराब की बोतलें पड़ी हुई थीं।


इसीलिए मैं एल पानी की खाली बोतल उठा ली, फिर साड़ी उठाई, पैंटी नीचे सरकाई और पेशाब करने लगी।

फिर उसी बोतल में टंकी से रिसता पानी भरकर अपनी चूत धो ली।


और उस जगह से निकलते ही मैं प्रभाकर को देख एकदम चौंक गई।

लेकिन उसने मुझे नहीं देखा था क्यूँकि वो थोड़ी दूरी पर खड़ा होकर कॉल पर बात कर रहा था।


मैं तब मन ही मन सोचने लगी… "अरे ये मेरा पीछा करते-करते यहाँ तक आ गया, कहीं ये उस इरादे से तो यहाँ नहीं आया हैं?"

तभी वो मेरे तरफ बाढ़ने लगा जिधर मैं पेशाब करने घुसी थी, मैं तब घबरा गई थी।


इसीलिए वापस से टंकी के पीछे जाने लगी और अच्छी बात यह थी कि वहाँ एक ओर टंकी था।

और उन दो टंकियों के बीच में गैप था, मैं उसी गैप में छिप गई थी और मन ही मन प्रार्थना करने लगी… "प्लीज… प्लीज… मुझे मत देखना।"


फिर प्रभाकर आया और वो एक हाथ की दूरी पर रुक कर पैंट खोलने लगा।


और वो कॉल पर बोल रहा था, “अरे क्या बताऊँ यार, बहुत ही टंच माल मुझे इशारा दे रही थी।”

दूसरे तरफ से आवाज आई, “तो क्या हुआ? कुछ बात बना या नहीं?”

प्रभाकर बोला, “अरे यार उसके पीछे-पीछे आया था, पता नहीं मेरा लंड खड़ा करवा कर कहाँ चली गई।”


ऐसा कहते हुए प्रभाकर ने पैंट समेत अंडरवियर नीचे सरका दिया।

उसका नाग जैसा लंड स्प्रिंग की तरह उछलकर बाहर आ गया।


मेरी आँखें फटी रह गईं, मुँह खुला का खुला रह गया, जगह अंधेरी थी, लेकिन सामने रेस्टोरेंट की हल्की रोशनी उसके बड़े से मोटे खड़े लंड पर पड़ रही थी।


फिर प्रभाकर बोला, “कसम से यार एक बार मिल तो जाए, ऐसे चोदूँगा साली मुझे भूल नहीं पाएगी।”


और प्रभाकर के लंड से पेशाब निकलने लगा…


दूसरे तरफ वाले ने पूछा, “हेलमेट (कंडोम) जुगाड़ करके रखा है न?”

प्रभाकर मुस्कुराते हुए बोला, “अबे हेलमेट लेना मैं कभी नहीं भूलता। एक से बढ़कर एक फ्लेवर हैं।”


और पेशाब करके प्रभाकर लंड झाड़ता हुआ वहाँ से चला गया।

उसके जाने के बाद मैं मन ही मन बोली… "बाप रे… कितना बड़ा तगड़ा लंड था।"


काफी समय से मैं डॉ. पटेल के लंड के अलावा किसी ओर का देखि नहीं थी।

लेकिन प्रभाकर का जोशीला बड़ा मोटा सा लंड देखकर मेरी अंतर्वासना जाग उठी थी।


फिर जब मैं टंकी के पीछे से निकली, तब प्रभाकर छत पर ही था और कॉल पर मशगूल था।

एक पल सोची कि उसे टोकूँ या नहीं, तभी मेरे घर से कॉल आया “कब तक घर आओगी?”

मैंने कहा, “कुछ देर में आ जाऊँगी, खाना खाकर, चिंता मत कीजिए।”


उतनी ही बात हुई थी कि प्रभाकर मेरे सामने आ गया, मैं थोड़ी चौंक गई, थोड़ी शरमा भी रही थी।

लेकिन वो बोला, “मैंने आपकी कुछ तस्वीरें खींची हैं। क्या आप देखना चाहोगी?”

मैंने कहा, “ओह, हाँ क्यों नहीं।”


उसने मुझे अपना कैमरा दिया और मैं तस्वीरें देखने लग गई, तस्वीरें देखकर मैं बोली, "काफी अच्छी तस्वीरें खींचे हैं।”

तभी अचानक से महसूस हुआ कि प्रभाकर का हाथ मेरी गांड पर है, लेकिन मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

तभी छत पर शराब पीने वाले युवा जाने लगे थे और उनके जाते ही प्रभाकर मेरी गांड दबाने लगा।


मैं शरमाते हुए मुस्कुराई और कैमरा देते हुए बोली, “ये लो तुम्हारा कैमरा, मैं अब जाती हूँ।”

वो बोला, “क्यों? कोई इंतजार कर रहा है क्या?”

मैंने कहा, “हाँ… मेरे पति इंतजार कर रहे हैं।”


एक पल के लिए वो ठहर सा गया, फिर समझ गया कि मैं झूठ बोल रही हूँ।

मैं दो कदम चली ही थी कि उसने पीछे से मेरी कमर दबोच लिया।


और मेरे कान में बोला, “तो अपने पति को थोड़ा और इंतजार करवा लो।”


मैंने उसके सख्त लंड को अपनी गांड पर महसूस कर पा रही थी, जिस वजह से मेरी धड़कन तेज हो गई थी।

मैं बोली, “देखो… यहाँ कोई भी आ सकता है।”

तो वो बोला, “तो फिर कहीं और चलें? मुझे एक जगह पता है।”


उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसी टंकी के पीछे लेजाने लगा, मैं तब शरमा रही थी।

क्यूँकि वो सब अचानक से हो रहा था, फिर टंकी के पीछे जाते ही सबसे पहले प्रभाकर ने कैमरा छत के किनारे रखा।


फिर मुझे अपनी बाँहों में खींच लिया, मैं मुस्कुराते हुए बोली, “देखो हमें जल्दी करना चाहिए, 10:00 बजने वाले हैं।”

क्यूँकि मुझे चुम्मा-चाटी में कोई दिलचस्पी नहीं थी…


तो प्रभाकर बोला, “ठीक है, लेकिन मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।”

मैं कंफ्यूज हो गई, आखिर इसे क्या मदद चाहिए? तभी उसने अपने बटुए से कंडोम निकाला और मुझे दिया।


मैं मुस्कुराई, फिर प्रभाकर ने बिना देर किए बेल्ट, बटन और जिप खोल दिया।

और अंडरवियर समेत पैंट नीचे सरका दिया, उसका टनटनाया लंड स्प्रिंग की तरह उछलकर बाहर आ गया।


फिर उसने मोबाइल का टॉर्च ऑन किया, तब मैं उसके बड़े-मोटे लंड को देखकर ओर भी उत्तेजित होने लगी।

एक तो प्रभाकर का बड़ा सा लंड ऊपर से उसके झांट घुंघराले और चमकदार थे।


और उसके लंड का गुलाबी सिरा बहुत रसदार था, मैंने उसके गर्म लंड को पकड़ ली और आहिस्ता-आहिस्ता आगे-पीछे हिलाने लगी।

यह कहते हुए कि “अरे वाह!… तुम्हारा तो काफी जबरदस्त है।”


मन तो कर रहा था कि उसके लंड से खेलती रहूँ और बैठ कर चूसती रहूँ।

लेकिन मैं अपनी भावनाओं को ज़रा काबू में रखी और कंडोम के रैपर को फाड़ने लगी।


रैपर फाड़ते ही मुझे स्ट्रॉबेरी फ्लेवर की महक आई, मैं झुककर बैठी और उसके पैंट को थोड़ा ओर सरकाई घुटनों तक।

उसका गर्म लंड मेरे मुँह के बहुत करीब था, हल्की गंध आ रही थी।


मन कर रहा था कि चूस लूँ, लेकिन मैं जानती थी कि अगर चूसने लगी तो रात के बारह बज जाएँगे।

इसीलिए मैं बिना देर किए कंडोम लंड पर चढ़ा दी और खड़ी होकर पीछे घूम गई।


और अपनी मोबाइल को ब्लाउज के अंदर रख ली, फिर साड़ी उठाने लगी।

प्रभाकर भी उत्तेजित हो रहा था, इसीलिए साड़ी उठाने में उसने भी मदद की।


और मेरी पैंटी उसने ही उतारी, मेरी पैंटी उतारकर प्रभाकर मेरी गांड फैलाने लगा।

मेरी गांड की दरार में हाथ डालकर सहलाने लगा, मैं मुस्कुराते हुए बोली, “हे… तुम क्या कर रहे हो? जल्दी करो, मुझे जाना भी है।”


तो वो बोला, “इतनी गोरी चिकनी गांड को चखे बिना… चोदने में मजा नहीं आएगा।”

मैं कुछ कहती उससे पहले ही वो झुककर बैठ गया, मोबाइल जमीन पर रखा जिसका टॉर्च ऑन था।


और प्रभाकर मेरी गांड फैलाकर पूरा चेहरा लगा दिया, सूँघते हुए चाटने लगा, मैं सिसकने लगी उउफ्फ्फ… ईईस्स्स…


तब प्रभाकर बोला, “क्या मस्त महक है तेरी गांड की, कौनसा साबुन लगाती हो।”


मुझे प्रभाकर की बातें सुनकर हसीं भी आ रही थी और गांड चटवाने में मज़ा भी आ रही थी।

प्रभाकर का जीभ मेरी गांड से लेकर चूत तक लग रही थी और गीली हो रही थी, लगभग पाँच मिनट तक प्रभाकर ने मेरी गांड और चूत चाटता रहा।


फिर प्रभाकर खड़ा हुआ और मेरी चूत पर लंड रगड़ते हुए घुसा दिया और कस-कस के चोदने लगा।


“ईईस्स्स… अह्ह्ह्ह… ईईस्स्स… अह्ह्ह्ह…” मैं सिसकारियाँ लेती हुई चुदती रही।

उसकी हर ठोके में मेरी 40 इंच की गांड हिल रही थी, थप–थप–थप की आवाज़े आ रही थी।


और मेरी चूचियाँ ब्लाउज में दबकर हिल रही थीं, वो जोर-जोर से ठोके जा रहा था।

बीच में दो–तीन बार प्रभाकर का लंड मेरी चूत से फिसल कर बाहर भी आ गया था।


जिसे कभी वो तो कभी मैं पकड़ कर चूत में सेट करते, फिर लंड मेरी चूत में घुसता और प्रभाकर ठोके में ठोके लगता।

जिससे मैं अह्ह्ह्ह… ईईस्स्स… उह्ह्ह… करते हुए सिसकने लगती।


लगभग दस–पंद्रह मिनट की जोरदार चुदाई के बाद प्रभाकर ने जड़–जड़ के दो–तीन धक्के मारे और उसका गरम वीर्य निकल गया।


जिसे मैं चूत के अंदर महसूस कर पा रही थी, फिर प्रभाकर ने मेरी गीली चूत से लंड निकाला।

तब मैं उसके तरफ मुड़ी और मुस्कुराते हुए बोली, “लगता है काफी समय से तुम्हारा झड़ा नहीं था।”


दरअसल कंडोम में भारी मात्रा में गाढ़ा वीर्य निकला था और कंडोम आगे की ओर झूल गया था।

तब प्रभाकर ने कंडोम निकालते हुए मुस्कुराया, “हाँ, शुक्र करो मैंने कंडोम पहना हुआ था, वरना तुम्हारी गांड मेरे मुठ से लथपथ हो जाती।”


मैं मुस्कुराते हुए बोली, “तब तो… ओर भी मजा आता तुम्हें… क्यों?”

फिर मैं ज़मीन पर पड़े बोतल को उठाई और टंकी से रिसता हुआ पानी भरने लगी।


ताकि मैं अपनी गीली चूत को धो सकूँ, लेकिन प्रभाकर कहने लगा "अरे ये काम मुझे करने दो।"

और वो बदमाश मेरी चूत में ऊँगली करते हुए मेरी चूत को धोने लगा, जिसमें से स्ट्रॉबेरी फ्लेवर की महक आ रही थी।


और जब प्रभाकर ने मेरी चूत को धोया तो मैं उसके लंड को कैसे नहीं धोती।

लेकिन जब मैं प्रभाकर के लंड को धोने लगी तब उसका दोबारा से खड़ा होने लगा था।


और तब मुझसे रहा नहीं गया, इसीलिए मैं झुक कर प्रभाकर के लंड को कुछ देर चूस ही डाली।

और प्रभाकर मेरे सर पर हाँथ रख कर ईईस्स्स… अह्ह्ह्ह… करते हुए सिसकता रहा।


प्रभाकर के लंड को चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रही थी, थोड़ी रंडी–रंडी भी महसूस हो रही थी।

फिर कुछ देर बाद मैं खड़ी हो गई और उसके लंड को पकड़ कर आगे–पीछे करते हुए दूसरी बार झड़वा दी।


जिसके बाद प्रभाकर ने मेरा नाम–नंबर पूछा और मैं उसे अपना नाम बताई साथ ही नंबर भी दे दी।

फिर हम दोनों टंकी के पीछे से निकलकर चले गए, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।


यहाँ तक कि रिसेप्शन से घर जाते समय मेरी जिस्म में एक अजीब सी तृप्ति और भूख दोनों एक साथ थीं।

प्रभाकर का वो मोटा लंड और उसकी गंदी चाट… उफ्फ्फ… पूरे रास्ते महसूस हो रही थी।


अब मैं जानती थी कि ये सिर्फ शुरुआत है!… आगे क्या–क्या हुआ हमारे बीच?

वो जानने के लिए मेरी अगली कहानी का इंतज़ार करें।

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1 Comment


Golu Singrauli
Golu Singrauli
6 days ago

ऐसी कहानी लिखी हैं जिसे पढ़ने के बाद तो मैंने दो बार मुठी मारी हैं… BC मज़ा आ गया, आगे की कहानी जानने के लिए तो मैं अभी से पागल हो रहा हूँ 🤤🤤

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