डॉ रंजन के साथ गांड मस्ती - Gay Sex Stories
- Dr. Kamesh
- Jul 5
- 4 min read
मैं आपका प्रिय लेखक डॉ. कामेश, 59 साल का अनुभवी शोधकर्ता, लेकिन दिल से एक सेंसेटिव, सॉफ्ट और बॉटम एक नई सच्ची घटना के साथ कामवासना के पाठकों के लिए एक नई कहानी प्रस्तुत करता हूँ।
कुछ महीने पहले एक कॉमन फ्रेंड के जरिए WhatsApp पर डॉ. रंजन से दोस्ती हुई वह भी 59 साल के हैं, बेंगलुरु के एक मशहूर हॉस्पिटल में डॉक्टर, मजबूत कद-काठी, और टॉप पर्सनैलिटी।
चैट शुरू में सिर्फ हेल्थ, ट्रैवल और लाइफ के अनुभवों पर होती थी, धीरे-धीरे बातें गहरी हुईं। मेरी बातें और मेसेज, और एक-दूसरे की फोटोज शेयरिंग के बाद हम दोनों को एहसास हो गया कि ये सिर्फ दोस्ती नहीं है। फिर एक दिन मुझे ऑफिस ट्रिप पर बेंगलुरु जाना था। मैंने ग्रैंड मगाराथ होटल में रूम बुक किया — लग्जरी, शांत, और प्राइवेसी वाली जगह।
मैंने रंजन को बताया और इनवाइट किया. "रंजन, कल शाम 7 बजे ग्रैंड मगाराथ में आ रहे हो ना? लंबे समय से इंतजार है तुमसे मिलने का। रंजन ने कहा आ रहा हूँ। लेकिन वह नहीं आया उस शाम, मैं अकेले नग्नता की आर्टिस्टिक फ़ोटो खींचता रहा उसके इंतजार में। रात 10 मेसेज़ आया यार मैं हॉस्पिटल में व्यस्त रह गया।
दूसरे दिन मैं मीटिंग से थोड़ा जल्दी फ्री होगया तो शाम को 5 बजे होटल पहुँच गया। डॉ रंजन का मेसेज़ था कि 8: 30 तक क्लीनिक के बाद वह आना चाहता है, मैंने भी हाँ करदी। रात 930 बजे दरवाजे की बेल बजी। मैंने दरवाजा खोला। सामने रंजन — सफेद शर्ट में, लंबा कद, और आँखों में वो आग जो चैट में महसूस होती थी।
हम दोनों एक पल के लिए रुक गए। फिर रंजन ने आगे बढ़कर मुझे जोर से गले लगा लिया। उसकी मजबूत बाहों में मेरा शरीर पूरी तरह समा गया।"आखिरकार..." रंजन ने गहरी आवाज में कहा और मेरे बालों में हाथ फेरा। मेरी सांसें तेज हो गईं। उसने मेरा चेहरा ऊपर उठाया और पहले किस लिया — नरम, लेकिन गहरा। उसने मुझे दीवार से सटा दिया, एक हाथ मेरी कमर पर और दूसरा गर्दन पर। "तुम जितने नरम लगते हो चैट में, उतने ही नरम हो यार," ।
मेरी नजर रंजन की पैंट के सामने उभरे हुए बड़े से औज़ार पर पड़ी। इसी बीच रंजन ने मुझे बेड पर बैठा दिया और खुद की शर्ट उतार दी। फिर उसने अपनी बेल्ट खोली। जैसे ही पैंट नीचे सरकी, मेरी सांस अटक गई। रंजन का लंड — मोटा, भारी और लंबा। पूरी तरह खड़ा होकर 7.5 इंच का, मोटाई इतनी कि मुट्ठी में भी ठीक से नहीं समा रहा था।
गुलाबी-भूरा रंग, नसों से भरा हुआ, मोटा सिरा चमकदार और थोड़ा मुड़ा हुआ — जैसे तैयार होकर इंतजार कर रहा हो। नीचे दो मध्यम आकार के अंडकोष लटक रहे थे, जिनमें उम्र की गहराई और ताकत दोनों महसूस होती थी। रंजन मुस्कुराए, “पसंद आया?” मैं बस देखते रह गया। रंजन ने मुझे पेट के बल घुमाया। मेरे नरम और उभरे नितंब सामने थे — दो बड़े, गोल, मुलायम जो सालों की देखभाल से बिना ढीले हुए भरे-भरे हैं । रंजन ने दोनों हाथों से मेरे हिप्स को पकड़ा। उंगलियाँ हिप्स के नरम मांस में धंस गईं।
“क्या जबरदस्त हिप्स हैं यार... इतने सॉफ्ट और गोल कि हाथ फिसल रहा है,” रंजन ने गहरी आवाज में कहा और दोनों फाँकों को अलग-अलग करके चूमा। उनकी जीभ मेरी गहरी लाइन पर घूमने लगी। मेरी कमर खुद-ब-खुद उठने लगी। रंजन ने लुब्रिकेंट लिया और अपने मोटे लंड पर अच्छे से लगाया। मोटा सिरा मेरी गांड पर रगड़ने लगा ।
मैं थोड़ा डरा और बोला “धीरे... रंजन ... बहुत मोटा है,”। रंजन ने कमर पकड़ी और धीरे-धीरे दबाव डाला। मोटा सिरा अंदर घुसा तो मेरी आँखें बंद हो गईं और मुंह से लंबी आह निकली — “आह्ह्ह्ह... फट जाएगी...” लेकिन वह रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा का पूरा मोटा लंड मेरी गर्म और टाइट गांड में उतर गया। अंदर तक भर गया था। मुझे महसूस हो रहा था कि यह पेट तक भरा हुआ है। रंजन ने दोनों नितंबों को मजबूती से पकड़ लिया और धीमी लेकिन गहरी गतियों से ठोकना शुरू किया। हर थ्रस्ट पर मेरी गोल नितंब लहरा रही थीं। उसके के हाथ हिप्स कि ग्लूटेन मसल्स को मसल रहे थे, कभी थपथपा रहे थे, कभी जोर से पकड़ रहे थे।
“तेरी ये हिप्स... कमाल की हैं कामेश ... हर बार अंदर जाते ही लगता है जैसे कोई गर्म, मुलायम कुशन है,” और रफ्तार बढ़ा दी। कमरे में धप्प धप्प और चप्प-चप्प की आवाज़, और मेरी हर्ष मिश्रित हल्की चीखें और रंजन की गहरी सांसें गूंज रही थीं। मैंने अब वे पोजीशन बदला, और उसके ऊपर बैठ गया खुद ही अपनी गोल हिप्स को ऊपर-नीचे करने लगा। डॉ रंजन नीचे लेटे थे और दोनों हाथों से मेरे नितंब सहला रहे थे, थपथपा रहे थे। मेरे लंड से रस टपक रहा था रंजन के पेट पर।
आखिरकार में रंजन ने मेरे हिप्स को जोर से पकड़कर अंदर ही गर्म-गर्म रिलीज कर दिया। मेरा पूरा शरीर थरथरा रहा था। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे।
वह मेरी हिप्स पर हाथ फेरते हुए फुसफुसाया “तेरी ये गोल हिप्स और मेरा ये मोटा लंड... परफेक्ट मैच है यार।” फिर उसने मुझे पीछे से गले लगाया। फिर साथ बैठ कर काफ़ी पी ।
"अगली ट्रिप कब है?" मैंने मुस्कुराकर कहा , "जब तुम बुलाओगे।"
फिर मैं उसे नीचे होटल की लाबी तक छोडने गया जहां उसने किसी को न बताने को कहा, इसी लिए नाम बदल कर लिखा है। अपनी राय जरूर लिखें, हमें इंतजार रहेगा कि आप का खड़ा हुआ या नहीं इसे पढ़ कर।
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