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देवरानी अपने सेटिंग से मिलकर जेठानी की प्यास बुझाई : Hindi Sex Stories

Jul 20
12 min read

मैंने सभी पाठकों को मेरे जिंदगी मैं बीबी के गुज़र जाने बाद मेरे जिंदगी मैं आईं औरतों कि कहानी या यहां लिखी हैं।


पिछली कहानी "खालु और दामाद के रुप मैं मौसी और भतीजी कि चुदाई" मैं आपने को फैजा और हिबा कि कहानी पढ़ी। आप लोगों ने कहानी को बहुत प्यार किया इस लिए सभी पाठको का आभार अब आगे। मेरी सभी पिछली कहानियां पढ़ने के लिए मेरे नाम के ऊपर क्लिक करके आप पढ़ सकते हैं ।


अब आगे


मैंने पिछली कहानी मैं आपको बताया था, कि नगमा और उसके पती मैं अनबन चल रही हैं। एक दिन नगमा ने मुझे फोन किया तब वो फोन पर रो हि रही थी। उसने मुझे मिलने बुलाया था। मैं घर पर हि था, मैंने अनघा को सब बताया, तो अनघा और पुनम दोनों भी मेरे साथ आ गयी। नगमा उसके मां के घर थी। फैजा ने दरवाजा खोला, तो उसका चेहरा भी उदास था। नगमा रो रो के शांत बैठी थीं। पुनम ने पुछा "क्या हुआ"। तो फैजा बोली "तलाक़" । हम सब शांत हो गये थे। पाच मिनट बाद मैं बोला "छोड़ दो नगमा", "आगे कि सोचों"।


फिर नगमा बोली "दुसरी शादी कर रहा हैं"। हम सब फिर शांत हो गये थे। नगमा आगे बोली "मुझे तलाक़ दे कर अब दुसरी शादी कर रहा हैं"। पुनम बोली "मुझे अनघा ने बताया था, इसलिए मुझे मालुम था", "नगमा तुम्हारे पती उससे दस बाहर साल छोटी लड़की से शादी कर रहा हैं ना ? नगमा बोली "पंद्रह साल छोटी", "और अरब देश मैं ले जा रहा हैं"। मैंने पुछा "बच्चों का क्या" ? नगमा बोली ”"मैं अपने बच्चों को पती को हि सोप देने का निर्णय लिया हैं", "वो अय्याशी करेगा और मैं उसके बच्चे संभालु, यह मुझे पसंद नहीं, इसलिए मैंने बच्चों को पती के पास हि रख दिए हैं", "वो जाने और उसकी नयी पत्नी जाने", "तलाक़ के बाद मैं मां के पास चली आयी हुं"।


फैजा ने सबको चाय नाश्ता को पुछा सबने नहीं कहां। पुनम बोली "अब आगे क्या"? नगमा बोली "मां के साथ हि रहुंगी", "अब आगे जिंदगी भी क्या हैं", "पर अब मैं शादी नहीं करुंगी" "मेरे साथ शादी कोई भी नहीं करेगा, एक नहीं दो बच्चें ऑपरेशन से हुं हैं, आगे बच्चे भी नहीं होंगे, हमारे मैं कोन खाटी औरतों को अपनायें गा। मैं यह सुनकर हि सुन्न हो गया था। पुनम और अनघा आपस मैं कुछ बातें कर रही थी। बातें होने के बाद पुनम बोली "हम निकलते हैं "नगमा तुम कल मेरे पास मां को लेकर आ जाना"। "हम सब तुम्हारे साथ हैं"। "हम सब ऐसे लोग हैं जिन्हें कोई नहीं"।


तभी मुझ को अनघा का फोन आया तो घर के बहार निकाल गया, अनघा से बातें करने लगा। अनघा और पुनम भी मेरे पिछे आ गयी। गाड़ी मैं घर वापस आते वक्त, मैं सब अनघा बताया। उसके बाद पुनम बोली "नगमा मेरे साथ काम करेंगी"। मैं और नीलम बात सुनकर हि खुश हो गये। नीलम बोली "पुनम तुमने तो मेरे दिल कि बात छीन ली"। पुनम बोली "नीलेश सब को काम दे कर, खुद सिर्फ दुसरे काम करते फिरता हैं" "अब मेरे हिस्से का काम नगमा संभालेंगी" मुझसे भी अब काम नहीं होते"। मैं बोला "तुम सब का यह अच्छा हैं पहले आदमी को कुत्ता बनावो और फिर तुम हि सुना वो कि तुम कुत्ता बनें हो"। तीनों हसने लगे। मैंने पुनम और नीलम घर छोड़ अनघा घर निकल गया।


अनघा घर शोभा आयी थी, यह मुझे अनघा ने फोन पर बताया था। मैं अनघा घर गया तो, शोभा उसका बच्चा और एक और औरत भी थी। देखा देखा चहरा था। खाना बनाने का काम कर रही थी। अनघा मेरा चेहरा देख सर झुकाते हुए, हंस रही थी। मैंने सब देख कर बोल "नीलम ने मुझे वापस बुलाया हैं, मुझे वापस जाना हैं"। वह औरत मुझे हि देख रहीं थीं। मेरा जैसे माथा भड़क गया था। शोभा मेरे पास आयी और मुझे पिछले कमरे मैं ले गयी। अनघा उस औरत से कुछ बातें कर के, हमारे पिछे आ गयी।


मैंने अनघा आते देख, अनघा से हि बात की "तुम्हें सब मालुम हैं, तो भी तुम सुधरती नहीं"। अनघा वापस हंस रही थी। अनघा मेरे पास आकर बोली "मेरा इस मैं कुछ भी हाथ नहीं हैं नीलेश, यह सब शोभा ने किया हैं। फिर शोभा के तरफ़ मैंने देखा तो शोभा बोली "सब मालूम हैं मुझे, मगर मेरा तीर कमान से पिछे साल हि निकल चुका था", "पिछले साल मैं और जेठानी यहां घर पर शाम को अचानक आये थे। तब घर पर अनघा और कमल थी। हम जाने के बाद, आप घर में आये थे। मेरा पर्स घर मैं रहा था, तो मैं वापस आयी थी। मैंने घर मैं तुम्हें देखा तो, बहाना बनाकर जेठानी को वापस ले गयी थीं।


जेठानी ने घर मैं इन्सान हैं समझ गयी थीं। मैंने तब जेठानी को बोल दिया था कि कमल का दोस्त अनघा घर मिलने आया होंगा। उसपर जेठानी ने अनघा पर भी शक किया। उसके बाद तो मुझपर भी शक करने लगी थी। फिर पिछले साल हि एक दिन तुम्हें अनघा के दुकान पर देखा जेठानी ने, तब दुकान पर कमल भी पापड़ लेने आयी थी। तुम्हें देखने बाद जेठानी जरा बदल गयी थीं। शक छोड़ अब तुम्हारे बारे हि पिछले साल भर से बातें करती थी। मैं तंग आ चुकी थी, तो मैंने सीधे जेठानी बता दिया। भाभी अनघा को तुमने हि पापड़ मशीन, दुकान डालकर दि हैं। कमल को भी तुमने हि काम दिया हैं। मैंने इतना हि बताया था, बाकी बातें सब वो अपने आप खुद हि समझ गयी।


मैं शांत सुन रहा था। अनघा ने मुझे हिबा के बारे मैं बताया था । तब मैंने सब बातें बंद कर दी थी। मगर पिछले दो महीने से जेठानी खुद हि तुमसे मिलने के लिए बेताब थी। कल मेरे सास, ससुर और देवर चारधाम यात्रा को गये। मेरा पती पिछले महीने हि नागपुर गया थे, तो आज वो खुद मुझे ले आयी हैं। आज अनघा भाभी ने सिर्फ़ तुम्हें बुलाने का काम किया हैं। उसे भी हम आने वाले हैं मालुम नहीं था।


अनघा बोली "मैंने सच बोहोत समझाया मगर सब पता चला हैं, इसलिए जेठानी भी अब मजा लेना चाहिए है, बंस" यह मुझे चिड़ाने के अनघा बोल रही थी। मैं बोला "यह सब कब रुकेगा"। अनघा ने फिर मुझे छेड़ा "आज शोभा के लिए आयें थे ना? मुझे मालुम हैं"। मैं और शोभा दोनों हंसने लगे। जेठानी सब बातें दिवार के पिछे सुन रही थी ।


जेठानी भी फिर अंदर आ गयी, शोभा बोली "नीलेश यह सुमन हैं, मेरी जेठानी"। मैं कुछ भी बोला नहीं, शांत खड़ा था। अनघा बोली "सुमन, खुद नीलेश पिछले साल से इन सब बातों को बंद करने का बोल रहा हैं, मगर बंद होना दुर, एक एक बढ़ हि रहीं हैं"। सुमन बोली "मैं समझ गयी हुं", मगर मैं सच बोलती हुं, जब से तुम्हें और तुम्हारे सब बातों को सुना हैं, तब से तुम्हारे हि ख़याल रहता हैं"। अनघा बोली चलो छोड़ो खाना बनाते हैं चलो। अनघा और सुमन खाना बनाने निकल गयी। मैं भी बाहर के कमरे मैं निकलने वाला था तो शोभा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे रोका।


शोभा मुझसे बोहोत हि धीमी आवाज मैं बात कर रही थी। शोभा बोल रही थी "नीलेश मेरे लिए सुमन को छोड़ो मत अब सब बातें पता चली हैं। अगर तुम निकल गये तो, हमारा सब राज अब उसे पता चला हैं, वो इसके बाद मेरा बोहत इस्तेमाल करें गी, नीलेश मेरे लिए"। मैं बोला "मैंने हिबा के बारे मैं हि यह सोचकर हि निर्णय लिया था", तुम खाना बनावो अनघा को भेज दो"।


अनघा आते हि मुझे चिपक गयी मैं हंसने लगा। अनघा बोली "तुम अब कामदेव हो चुके हो"। मैं बोला "अनघा"। अनघा बोली "सच बात हैं, औरत को समझने वाला इन्सान औरत चाहिये, मगर कोई औरत को समझता हि नहीं, तुम औरत को समझ कर निर्णय लेते हो"। मैं बोला "वो बातें छोड़ दो"। मैंने तुम्हें कुछ गोलियां लाकर दी थी, वो कहां हैं। अनघा बोली "हैं" ना, शब्बास रे मेरे कुत्ते, आज देवरानी और जेठानी एक साथ चुदेंगी"।


मैं बोला कल हि नीलम ने पुरी जान निकली थी। अनघा बोली "एक बात बोलूं बुरा मत मानना"। मैं बोला "बोलो, तुम्हें सब माफ़ हैं। अनघा बोली "पुनम, मैं, नगमा, फैजा, शोभा, कमल और हिबा से ज्यादा ख्याल तुम नीलम का रखतो हो, सच है ना"? मैं बोला "हां", मगर तुम और नगमा हि मेरी सबसे ज्यादा जान निकली हैं। अनघा बोली "वो तो मेरा काम हैं"। हम दोनों बातें करते कर आगे के रुम मैं चले गये।


अनघा ने दुसरे रुम मैं जाकर अलमारी खोलो, और मुझे आयुर्वेद कि दो गोली, अपने दुपट्टे मैं डालकर दे दी। मैं पिछले था। मेरे दिमाग़ अनघा कि बातें सोच रहा था। मैं आंख बंद कर, दिवान पर सो गया था, और सोच रहा था। मेरे जिंदगी मैं पिछले पहले एक हि औरत थी, और पिछले चार पांच साल में औरतों कि जैसे लाइन लगी हैं। पिछले चार पांच साल मैंने सेक्स के लिए, अपने शरीर कि कसरत, अपने शरीर का खान-पान से लेकर, नित्य व्यायाम भी करने लगा था। मेरा दिमाग़ मैं सब मेरे मैं हुऐ बदला सोच चल रही था, तभी सुमन कि आवाज आयी... खाना का लो...


मैंने आँखें खोली तो सुमन सामने थी। सुमन ने कपड़े बदले थे सुमन सिर्फ गाऊन मैं थी। सुडौल शरीर वाली सुमन बोहोत हि फिट गाऊन पहनी थी जिससे पुरा शरीर दिखाई भी दे रहा था और आकर्षित भी कर रहा था। मैं सुमन को देखता हि रहा। दिवान उठकर मैं खड़ा होकर सिर्फ़ इतना हि बोला "आता हुं खाना खाने"। सुमन निकल गयी, मैने अपने कपड़े निकाले और टि शर्ट, नाईट पॅन्ट पहनकर, गोलीयां खा कर, आगे वाली खोली गया। आज अनघा घर भरा हुआ था। मैं बाथरूम जाकर आया। खाना खाने बैठ गया। मुझे अकेले हि खाना मिला था, मैं खाना खाकर को बच्चे को लेकर घुमाने चला गया ।


बाहर जाकर मैंने सब बातें पुनम और नीलम को बताईं तो वो नाराज़ थी । मगर कुछ बोली नहीं। रात के दस बजे मैं घर आया। मैं बच्चे के लिए कुछ मिठाई और आइसक्रीम ले आया था। घर में सभी ने आइसक्रीम खाया और मैं पिछले खोली मैं सोने चला गया। अनघा मेरे पास आयी और बोली "इच्छा नहीं तो जाने दो"। मैं बोला "ऐसी बात नहीं मगर सब अब कहीं तो रुकना चाहिए पुनम और नीलम भी वही बोल रही थी"। सुमन सुन रही थी। सुमन बोली "शोभा और मेरे साथ हि यह बाद खत्म होगी"। अनघा बोली "चलो सो जाते हैं"। मैं पिछले रुम मैं सो गया और अनघा, सुमन, शोभा और बच्चा आगे वाली रुम में।


रात के दो बजे गोली का असर होने लगा। मैं बाथरुम जाने लिए अगले खोली गया तो सब सोये। मैं बाथरूम से आया तो शोभा मुझे देख रही थी। मैंने शोभा पिछले रुम मैं आने का इशारा किया, तो उसने सुमन और हाथ किया । मैंने निकल कर पिछले रुम आ गया। आगे के रुम मैं शोभा और सुमन कुच बातें चल रही थी। अनघा भी फिर आवाज़ आने लगी। अनघा उठकर मेरे रुम आयी, तो मैं धीरे आवाज बोला "गोली खाईं थी ना" अनघा बोली "तो क्या चिंता हैं, एक नहीं तीन तीन सेवा मैं हाज़िर हैं"। मैंने अनघा हि पकड़ लिया, मगर वो भी चिपकर बोली, "पहले सुमन" मुझे से खुद को छोड़ कर निकल गयी।


मैं अनघा पिछे आगे रुम में गया और सुमन के पास जाकर सुमन का हाथ पकडा, तो शोभा और अनघा हंस रही थी। मैं बोला "शोभा" । शोभा आंख बंद कर सोने नाटक करने लगी। मैंने सुमन पिछले रुम ले आया। सुमन दोनों रुम के बिच का दरवाजा बंद करने लगी, तो अनघा बोली "खुला हि रखो जरुरत पड़ेगी, आज कुछ अलग मामला हैं"। मैंने सुमन को चिपक गया। सुमन मेरे हाईट से सिर्फ आधा फिट छोटी थी। पुरा सुडौल शरीर था। मैंने निचे झुककर, सुमन के गाऊन को नीचे से उपर उठाकर ऊपर खिंचते खिंचते निकाल दिया। अब सुमन कि सिर्फ निकर बचीं थी। मैंने सुमन को दिवान पर बिठा और अपने कपड़े निकाल कर पुरा नंगा होकर सुमन के सामने खड़ा हुआ।


सुमन सामने तना हुआ लन्ड था। मैंने सुमन का हाथ पकड़ और लन्ड पर रख दिया। सुमन बोहोत हल्के हाथ से लन्ड सहला रही थी। सुमन ने दुसरा हाथ मेरे अंडकोष पर लगा दिया। मैंने सुमन के बालों मैं हाथ डालकर सर पकड़ लिया और सुमन के चुमना शुरु किया। पांच मिनट तक चुमने बाद, मैंने सुमन के ओठों को छोड़ा। तबतक सुमन हाथ से लन्ड हि सहला रही थी। सुमन दिवान से उठकर, जमीन पर बैठी, मैं खड़ा हि थी। सुमन पहले लन्ड कि चमड़ी को पिछे किया और अपने दांत से हल्का सा चबाया। सुमन बोली "अभी समझीं सब पसंद किस लिए करती हैं"।


फिर बोहोत हि अच्छे से लन्ड चुसने लगी थी। कभी अंडकोष चुसती और कभी पुरा लन्ड गटकने का प्रयास करती। शोभा पिछले रुम के दरवाजे मैं खड़ी सब देख रही थी। पांच मिनट बाद मैंने सुमन के हाथ पकड़ कर खड़ा कि, और उटला खड़ा कर, एक हाथ पिछे से डालकर स्तनों को जोर जोर दबाने लगा । एक हाथ से चुत को दबाने लगा। सुमन को वैसे हि मैने दिवान पर झुकाया दिया, सुमन के एक पैर दिवान को पर घुटनों बल मोड़ा कर रख दिया, और लन्ड को सुमन के चुत पर सेट किया। सुमन कि चुत पर लन्ड को दो तीन बार सहलाने बाद, जब सुमन ने अपने कुल्हे उठाना शुरू किया, तो मैंने सुमन कि कमर पक्की पकड़ कर, लन्ड को चुत मैं डाल दिया।


आधा लन्ड आराम से सुमन के चुत मैं समां गया। सुमन ने "ऊं मां" किया। मैंने वापस पुरा लन्ड निकाल लिया, तो जैसे सुमन तड़प उठी थी और पिछे देखने लगी, तभी मैंने वापस लन्ड को अन्दर डाल दिया। सुमन "ऊं मां" मैं तो मरी" कह रही थी। मैंने ऐसा हि बार बार करता रहा, सुमन पानी तो छोड़ चुकी थी, पर आहे भर भर चुदाई कर रही थी। मैंने दस मिनट बाद सुमन को छोड़ दिया। मैं दिवान पर जाकर सो गया और सुमन को अपने उपर खींच लिया। पहले सुमन को आगोश मैं लेकर चूमता रहा , फिर सुमन मेरे लन्ड पर बैठने का प्रयास करने लगी थी। मैंने सुमन को पैरों के और मुंह कर लन्ड को चुत मैं लेने को बोला, तो दिवान पर खड़ी रह कर, पलटी होकर जब लन्ड बैठी, तो उसने देखा कि शोभा खड़ी होकर, सब देख रही थी।


सुमन शान्त रह, संभोग आनंद लें रहीं थीं। मैं निचे से सुमन को चोदता और सुमन मुझे उपर से चोदती, दस मिनट तक मैं इसी तरह सुमन कि चुदाई करता रहा, सुमन कुछ नया आनंद ले रही थी। सुमन के नितंबों को मैंने हाथ से दबा दबा कर और चापट मार मार कर लाल कर दिया था। सुमन संभोग आनंद लेकर फिर चरम सिमा पर आकर पानी छोड़ चुकी थी। सुमन का चुत का सारा पानी, निचे मेरे लन्ड पर बह रहा था । सुमन थक चुकी थी, सुमन ने अपनी कमर उठायी और लन्ड को चुत से निकाल दिया। मैंने सुमन को दिवान पर एक साइड सरकाया, दिवान उतर गया, फिर सुमन को अपने और खिंचने लगा सुमन बोली "आज बस्स, पांच मिनट तक सेक्स देखा था, बीस मिनट अब मुझसे नहीं हो गया, अब बस्स।


शोभा हंस रही थी। मैंने दरवाजे मैं खड़ी शोभा के और गया और शोभा को पकड़ लिया। शोभा तैयार हि थी। सुमन देख रही थी। सुमन बोली "शोभा सच्च बोलती हुं, दिखाई शांत देता हैं नीलेश, पर बेड पर हैवान बन जाता हैं"। मैंने पानी कि बोतलें उठाईं, लन्ड और अंडकोष साफ किया। तब तक शोभा ने अपनी गाऊन, निकर निकाल फेकी और दिवान पर दोनों पैर फैलाकर बैठ गयी। शोभा सब देख रही थी तो पानी बह रहा था, मैंने ज़मीन पर बैठा और शोभा के चुत पर मुंह लगा, सुमन को यह देख कर हि करंट लग गया था, और सुमन हि आह्ह कर रही थी।


मैं शोभा कि चुत चाट चाट कर साफ़ कर रहा था। मैंने सुमन को देखता देख, शोभा के चुत मैं पुरी जीभ को डालकर चाटते जा रहा था। शोभा आहे भर रहीं थीं, मेरा सर पकड़ कर कमर उठा उठा कर चुत चटवा रही थी। मैंने शोभा के चुत मुंह निकाला और खड़ा होकर अपनी दोनों उंगलियां शोभा के चुत मैं अन्दर डाल दि, और उंगलियों को अन्दर बाहर कर के, जी पाईट को दबाने लगा था। मैं एक हाथ से लन्ड सहला रहा था। शोभा का पानी निकलता देख, मैंने लन्ड को शोभा के चुत मैं सेट किया, पुरा लन्ड चुत मैं गाड दिया। जैसे सुमन कि चुदाई कि थी, वैसे हि पुरा लन्ड बाहर निकाल कर वापस अन्दर डालता देख, सुमन में तरफ क़ातिल अदा से देख रही थी।


कमरा पुरा फच्चक फच्चक आवाज से गुंज रहा था। मेरा होने था, यह शोभा समझ चुकी थी। शोभा ने मुझे रुकने को बोला और उठ गयी। मैं आहे भर रहा था। मुझे बीच मैं हि रोका था । शोभा उठीं, मैं दिवान पर सो गया । शोभा ने लन्ड पर पानी डाल धोया, अंडकोष जोर से दबाकर, चुसना शुरू किया, सुमन देख रही थी, तो शोभा सुमन कि बोली "चुसो"। सुमन चुसने लगी, तो शोभा ने अंडकोष चुसने शुरू किया, मैंने सुमन का सर पकड़ लिया था। मेरा होने को था, मैंने सुमन का सर पक्का पकड़ कर, सुमन के मुंह मैं लन्ड कमर उठा उठा कर डाल रहा था। सुमन को यह पहिली बार था शायद मैंने सुमन का सर पक्का पकड सुमन के मुंह मैं पानी छोड़ दिया। तो सुमन ने पुरा ज़ोर लगा कर अपना सर निकाल लिया, तभी शोभा ने लन्ड पकड़ लिया और लन्ड अंडकोष को हिला हिला कर पानी पीने लगी। सुमन ने शोभा को पानी पिता देख, सुमन भी मलाई गटक गयी।


शोभा बोली "जेठानी जी कैसा लगा देवरानी का हैवान" सुमन बोली "बोहत अच्छा" मैं वैसे हि दिवान पर सो गया। शोभा उठीं और सुमन भी उठी , तो मैंने सुमन को अपने और खिंचा लिया, सुमन को आगोश मैं लेकर सो गया। शोभा निकल गई। सुबह बारा बजे तक मैं और सुमन सो रहे थे। सुमन कब उठ कर चली गयी मुझे मालुम भी नहीं था। घर में सिर्फ सुमन शोभा और बच्चा हि था। अनघा दुकान गयी थीं। मैं सुबह बाथरुम जा कर आया और वापस सुमन को पकड़ कर मिशनरी पोजीशन मैं जमके चुदाई कि, शोभा देखने भी आई नहीं। सुमन पुरी तरह एक दिन मैं तैयार हो चुकी थी।


शाम को अनघा आई उसने मुझे उठाया। सुमन उठ चुकी थी। मैं नहाकर आया तो अनघा बोली पुना जाना है, जल्दी चलो... आगे अगली कहानी मैं।


तो कैसी लगी कामवासना के पाठको मेरी Hindi Sex Stories मुझे प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.

आपका निलेश लोंके

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