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दोस्त की माँ ने मालिश के बहाने छेद दिखा दिया: Hindi Sex Stories

4 days ago
8 min read

यह मेरी अपनी जिंदगी की वह सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा अपने दिल में छुपाए हुए था और किसी को बताने की हिम्मत नहीं कर पाता था। मेरा नाम विकास है और मैं महाराष्ट्र के पुणे शहर में रहता हूँ। मेरी उम्र 24 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। मेरे सबसे अच्छे दोस्त का नाम साहिल है और हम बचपन से साथ पढ़े-लिखे हैं। साहिल के पिताजी का देहांत दस साल पहले हो गया था, इसलिए वह अपनी माँ के साथ अकेला ही रहता है। उसकी माँ का नाम सुनीता है और उसकी उम्र 44 साल है। सुनीता आंटी बेहद खूबसूरत और आकर्षक महिला हैं। उनका शरीर आज भी किसी जवान लड़की को शर्मिंदा कर दे। भरे हुए स्तन, गोल कूल्हे, गोरा रंग और लंबे काले बाल — वे सच में किसी अप्सरा से कम नहीं लगतीं। उनके पति के जाने के बाद उन्होंने खुद को सिर्फ अपने बेटे की परवरिश में लगा दिया था और किसी दूसरी शादी के बारे में सोचा भी नहीं। लेकिन उनके शरीर की जो प्यास थी वह कहीं न कहीं दबी हुई थी और एक दिन वह फूट पड़ी।


कामवासना एक ऐसी चीज है जो इंसान के अंदर कहीं न कहीं हमेशा मौजूद रहती है, चाहे वह किसी भी उम्र का हो। सुनीता आंटी के अंदर भी यह कामवासना कई सालों से दबी हुई थी और मुझे नहीं पता था कि एक दिन मैं उसका शिकार बन जाऊंगा। साहिल और मैं रोज शाम को उसके घर जाते थे और साथ में पढ़ाई करते थे। सुनीता आंटी हमें चाय और नाश्ता बनाकर देती थीं और हमारा ख्याल रखती थीं। वे मुझे अपने बेटे की तरह मानती थीं और मैं भी उन्हें माँ कहकर बुलाता था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से मैंने देखा कि आंटी मुझे देखकर अजीब तरह से मुस्कुराती हैं और मेरे शरीर पर नजरें गड़ाए रखती हैं। मैं उनकी नजरों को नजरअंदाज कर देता था क्योंकि वे मेरे दोस्त की माँ थीं और मेरे लिए माँ जैसी थीं।


एक दिन साहिल को किसी काम से बाहर जाना पड़ा और वह दो दिन के लिए शहर से बाहर गया हुआ था। उस दिन मैं अकेला उसके घर गया क्योंकि मुझे कुछ किताबें लेनी थीं। सुनीता आंटी ने दरवाजा खोला और मुझे देखकर मुस्कुराईं। उन्होंने कहा — |विकास, आओ बेटा। साहिल तो बाहर गया है, लेकिन तुम आराम से बैठो। मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूँ।| मैं बैठक में बैठ गया और आंटी रसोई में चली गईं। उस दिन आंटी ने एक पतली सी साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उनका पूरा शरीर झलक रहा था। उनकी छातियाँ साड़ी के अंदर से साफ दिखाई दे रही थीं और उनकी कमर पतली लग रही थी। मैं उन्हें देखकर अपनी नजरें नहीं हटा पा रहा था।


चाय पीने के बाद मैं किताबें लेने के लिए उठा तो आंटी ने कहा — |विकास, तुम्हारा शरीर तो बहुत अकड़ा हुआ लग रहा है। क्या तुम बहुत थके हो?| मैंने कहा — |हाँ आंटी, आजकल ऑफिस में बहुत काम हो रहा है। कमर और कंधे में दर्द रहता है।| आंटी ने कहा — |तो फिर तुम आराम करो। मैं तुम्हारी मालिश कर देती हूँ। मुझे मालिश करना अच्छी तरह से आता है।| मैंने पहले तो मना किया लेकिन आंटी ने जोर देकर कहा — |अरे, मैं तो तुम्हें अपने बेटे की तरह मानती हूँ। इसमें शर्म की क्या बात है? आओ, बेडरूम में चलो।| मैं उनकी बात मानकर बेडरूम में चला गया।


बेडरूम में आंटी ने मुझे बिस्तर पर लेटने को कहा। मैं अपनी शर्ट उतारकर बिस्तर पर लेट गया। आंटी ने मेरी पीठ पर तेल डाला और मालिश करने लगीं। उनके हाथ बहुत नरम थे और उनकी मालिश से मुझे बहुत आराम मिल रहा था। लेकिन कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि आंटी के हाथ मेरी पीठ से नीचे की तरफ बढ़ रहे हैं। वे मेरी कमर को सहला रही थीं और धीरे-धीरे मेरी पैंट के ऊपर हाथ फेर रही थीं। मेरा लंड उनके हाथों की हरकत से तनकर खड़ा होने लगा। मैंने आंटी को रोकना चाहा लेकिन मेरे मुंह से आवाज नहीं निकली।


आंटी ने धीरे से मेरी पैंट खोलनी शुरू की और उसे नीचे सरका दिया। मेरा लंड अब पूरी तरह से खड़ा हुआ था और उस पर तेल लगाकर आंटी उसे सहलाने लगीं। उन्होंने कहा — |विकास, तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है। साहिल के पिता का भी इतना ही बड़ा था।| मैं उनकी बात सुनकर और भी उत्तेजित हो गया। आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं। उनके हाथ की हरकत से मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं उन्हें रोक नहीं पा रहा था। आंटी ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगीं। मैंने उनके बाल पकड़ लिए और उनके मुंह में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा। आंटी की जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था।


आंटी ने मुझे करवट लेटा दिया और मेरी पीठ पर तेल डालकर मालिश करने लगीं। उनके हाथ मेरी गांड तक पहुंच गए और वे मेरी गांड को सहलाने लगीं। फिर उन्होंने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद में डाल दी। मैं जोर से चीखा — आआह्ह्ह… आंटी… वहां मत… लेकिन आंटी ने मेरी बात नहीं मानी और अपनी उंगली अंदर-बाहर करने लगीं। मेरा शरीर कांपने लगा और मेरा लंड और भी कड़क हो गया। आंटी ने मेरी गांड में तेल डाला और अपनी उंगली को और अंदर कर दिया। मैं दर्द और मजे के अजीब से मिश्रण को महसूस कर रहा था।


आंटी ने मुझे करवट से पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टांगें खोल दीं। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगीं। उनकी जीभ मेरे लंड के चारों तरफ घूम रही थी और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। मैंने उनके बाल पकड़कर उनका सिर नीचे की तरफ दबाया और अपना लंड उनके मुंह में अंदर तक डाल दिया। आंटी ने मेरे लंड को पूरी तरह से अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगीं। उनकी आंखों से पानी निकल रहा था लेकिन वे रुकी नहीं। मैंने उनके मुंह में अपना वीर्य डाल दिया और आंटी ने उसे पूरी तरह से निगल लिया।


आंटी ने अपनी साड़ी उतार दी और अपनी पेटीकोट और ब्लाउज भी निकाल दिया। अब वे पूरी तरह से नंगी थीं। उनकी छातियाँ बहुत बड़ी और भरी हुई थीं। उनके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे और उनकी चूत पर घने बाल थे। मैंने उन्हें देखकर अपनी आंखें नहीं हटाईं। आंटी ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को चूमने लगीं। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई और मैंने भी उनकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया। मैंने उनकी छातियों को अपने हाथों से दबाया और उनके निप्पल चूसने लगा। आंटी के मुंह से आहें निकल रही थीं — आआह्ह्ह… विकास… ऐसे ही… मेरी छातियाँ चूसो…


आंटी ने मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया और मेरा लंड उनकी चूत के मुंह पर रख दिया। उन्होंने अपनी कमर ऊपर उठाई और मेरा लंड उनकी चूत में धीरे-धीरे अंदर जाने लगा। आंटी की चूत बहुत गर्म और गीली थी। मेरा लंड उनकी चूत में पूरी तरह से समा गया और आंटी ने जोर से चीख मारी — आआअह्ह्ह्हह… विकास… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… मेरी चूत फट रही है… मैंने उनकी कमर पकड़ ली और धक्के मारने शुरू कर दिए। आंटी मेरे नीचे उछल रही थीं और उनकी छातियाँ हिल रही थीं। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी और हर धक्के के साथ वे जोर से चीख रही थीं।


मैंने आंटी को करवट लेटा दिया और उनकी एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रख ली। इस पोजीशन में मेरा लंड उनकी चूत में और गहराई तक जा रहा था। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और आंटी की चूत से चट-चट की आवाजें आने लगीं। आंटी बार-बार कह रही थीं — |हाँ विकास… और तेज… मेरी चूत में और लंड डालो… मैं तुम्हारी चुदवाती रहूंगी…| मैंने उनके बाल पकड़कर उनका सिर पीछे की तरफ खींचा और उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए। आंटी का शरीर पसीने से भीग चुका था और उनकी चूत से रस बह रहा था।


मैंने आंटी को घोड़ी की तरह झुका दिया और उनकी गांड में अपना लंड डाल दिया। आंटी पहले तो चीखीं लेकिन फिर उन्होंने खुद को ढीला कर लिया और मेरा लंड उनकी गांड में धीरे-धीरे अंदर चला गया। मैंने उनकी गांड में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। आंटी का शरीर झूल रहा था और उनकी छातियाँ बिस्तर पर रगड़ खा रही थीं। मैंने उनकी चूत में भी अपनी उंगलियां डाल दीं और उन्हें दोनों जगह से चोदने लगा। आंटी अब पूरी तरह से चुदक्कड़ हो चुकी थीं और वे बार-बार कह रही थीं — |मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी रखैल हूँ… मेरी चूत और गांड दोनों तुम्हारी हैं…


मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं। मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाला और पूरी ताकत से चोदने लगा। आंटी की चूत अब लाल हो चुकी थी और उसमें से झाग निकल रहा था। मैं बार-बार अपना लंड बाहर निकालता और फिर से अंदर डाल देता। आंटी हर बार जोर से चीखतीं — आआह्ह्ह… विकास… मेरी चूत को मत छोड़ो… मुझे और चोदो…| मैंने उनकी छातियों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसने लगा। आंटी की छातियों से दूध जैसा रस निकल रहा था जो मैं पी रहा था।


मैंने आंटी को अपनी गोद में उठा लिया और खड़े-खड़े उन्हें चोदने लगा। आंटी की टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं और उनके हाथ मेरे गले में थे। मैं उन्हें उछाल-उछाल कर चोद रहा था और आंटी हर बार जोर से चीख रही थीं। उनकी चूत से रस टपक रहा था और मेरे लंड पर फैल रहा था। मैंने उन्हें दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उनकी टांगें अपनी कमर पर लपेटकर उन्हें और जोर से चोदने लगा। आंटी की आवाज अब बैठ चुकी थी लेकिन वे फिर भी चिल्ला रही थीं — |हाँ… और… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी चुदवाती रहूंगी…


मैंने आंटी को वापस बिस्तर पर लिटाया और उनकी गांड में अपना लंड डाल दिया। इस बार मैं और जोर से धक्के मार रहा था और आंटी की गांड से खून की हल्की धारा भी निकल आई। लेकिन आंटी को दर्द नहीं हो रहा था, उल्टा उन्हें और मजा आ रहा था। वे बार-बार कह रही थीं — |मेरी गांड चोदो… मेरी गांड में लंड डालो… मैं तुम्हारी चुदक्कड़ हूँ…| मैंने उनकी गांड में अपना पूरा लंड अंदर तक डाल दिया और उसे अंदर-बाहर करने लगा। आंटी का शरीर अब पूरी तरह से टूट चुका था लेकिन वे रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।


करीब एक घंटे तक मैं आंटी को अलग-अलग तरीकों से चोदता रहा। मैंने उन्हें कई बार चरम सुख तक पहुंचाया और आंटी भी हर बार मेरे साथ झड़ती रहीं। आखिरकार मैंने आंटी की चूत में अपना वीर्य डाल दिया और उनके अंदर ही लेट गया। आंटी ने अपनी टांगें मेरी कमर पर कसकर लपेट लीं ताकि एक भी बूंद बाहर न निकले। दोनों काफी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे और एक दूसरे की सांसें महसूस करते रहे।


उस दिन के बाद से आंटी और मेरे बीच एक नया रिश्ता बन गया। जब भी साहिल बाहर जाता, मैं आंटी के पास चला जाता और हम दोनों पूरी रात एक दूसरे के साथ मस्ती करते। आंटी ने मुझे अपने शरीर के हर हिस्से को छूना और चूमना सिखाया। उन्होंने मुझे बताया कि कैसे एक औरत को खुश किया जाता है और कैसे उसकी चूत को चोदा जाता है। मैंने भी उन्हें हर वह चीज दी जिसकी उन्हें तलाश थी। हमारे बीच अब कोई शर्म नहीं थी और हम दोनों अपनी कामवासना को पूरी तरह से जी रहे थे।


दोस्त की माँ ने मालिश के बहाने छेद दे दिया — यह सिर्फ एक घटना नहीं थी बल्कि मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा राज बन गई। आज भी जब मैं सुनीता आंटी को देखता हूँ तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है और मुझे वह पल याद आ जाता है जब उन्होंने मुझे अपने शरीर से मिलाया था। यही हमारी Hindi Sex Stories है और हम इसे खुलकर जी रहे हैं।


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