दोस्त की माँ सुनीता आंटी: Antarvasna Sex Stories
हैलो, दोस्तों मेरा नाम राहुल है, एक बार फिर से आपके लिए अपनी एक और सच्ची कहानी लेकर हाजिर हूं. मुझे उम्मीद है आप लोगों को मेरी कहानि पढ़ने में मजा आयगा।।
मेरी उम्र 25 साल है और कद 5’8″ है। मैं दिखने में सुन्दर हूँ, Bihar से हूँ। मेरा लण्ड का साइज 8.4 '' इंच है ।।
दोस्त की माँ सुनीता आंटी को बहुत सेक्सी तरीके से साड़ी उतार कर चोदा ।।
गर्मी का दोपहर था। सूरज सिर पर जल रहा था और हवा भी रुक-सी गई थी। मैं राहुल , अभिषेक के घर पहुँचा। अभिषेक कॉलेज चला गया था। घर में सिर्फ सुनीता आंटी थीं। दरवाज़ा खोला तो वह पीली साड़ी में खड़ी थीं। पल्लू कंधे पर था, कमर पर साड़ी कसकर बँधी हुई थी। गोरी त्वचा पर पसीने की हल्की चमक थी। बड़े स्तन साड़ी के ऊपर से उभर रहे थे। कमर पतली और कूल्हे गोल-मटोल। आँखें गहरी और होंठ गुलाबी। वह मुस्कुराईं।
"राहुल, अंदर आ जा। अभिषेक तो चला गया। चाय पीएगा?”
मैं अंदर गया। बैठक में पंखा धीरे चल रहा था। वह रसोई से चाय लेकर आईं। बैठते समय साड़ी का पल्लू थोड़ा खिसक गया। गले की हड्डी और छाती की ऊपरी रेखा दिख गई। मैं निगाहें हटा नहीं पाया। वह भी देख रही थीं। हमारी निगाहें मिलीं। वह मुस्कुराईं और पल्लू ठीक किया, लेकिन जानबूझकर धीरे।
चाय पीते-पीते बातें होने लगीं। गर्मी की शिकायत, घर का काम, अभिषेक की पढ़ाई। बातें बढ़ती गईं। वह पास बैठ गईं। उनकी साँस की गंध हल्की खुशबू वाली थी। कभी-कभी उनका हाथ मेरी जाँघ से छू जाता। मैं सिकुड़ जाता, लेकिन वह हँस देतीं।
“तू बड़ा हो गया है राहुल। पहले कितना नन्हा था।” उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। उनकी उंगलियाँ गर्म थीं। मैंने भी हाथ नहीं छुड़ाया। वह और पास खिसक आईं। उनके स्तन मेरी बाँह से टकराए। साड़ी के कपड़े के नीचे नरम गोलाई महसूस हुई।
कमरे में गर्मी और बढ़ गई। उन्होंने पल्लू उतारकर गले पर डाल लिया। अब उनकी गर्दन और कंधे साफ दिख रहे थे। मैं उनकी आँखों में देख रहा था। वह भी मुझे देख रही थीं। साँसें तेज़ हो रही थीं।“आंटी, आप बहुत सुंदर लग रही हैं आज।” मैंने धीरे कहा।
वह शर्माईं, लेकिन मुस्कुराईं। “बकवास मत कर। मैं तो बूढ़ी हो गई।”
“नहीं। आपकी बॉडी अभी भी हॉट है।”
वह चुप हो गईं। फिर उन्होंने मेरा हाथ उठाकर अपने गाल पर रख दिया। मैंने अंगुलियों से उनके गाल सहलाए। वह आँखें बंद करके झुक गईं। मैं और पास गया। उनके होंठ मेरे होंठों से मिल गए। पहला किस नरम था। फिर गहरा होता गया। जीभ मिली। उनका मुँह मीठा था। मैंने उनके कमर पर हाथ रखा। साड़ी के ऊपर से कमर की पतली गोलाई फील हुई। उन्होंने मेरी गर्दन पकड़ ली। किस लंबा होता गया। साँसें गरम हो रही थीं।
मैंने पल्लू पूरी तरह हटा दिया। उनके स्तन साड़ी के ब्लाउज में टाइट भरे हुए थे। गोल, भारी, निपल्स की नोक कपड़े से उभर रही थी। मैंने हाथ बढ़ाकर एक स्तन पकड़ लिया। नरम और गरम। उन्होंने आह भरी। मैंने दूसरा भी थाम लिया। दोनों हाथों से सहला रहा था। उन्होंने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। छाती नंगी हुई तो उन्होंने हाथ फेरा।
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ब्लाउज का हुक पीछे से खोला। कपड़ा ढीला पड़ा। मैंने ब्लाउज उतार दिया। उनके स्तन बाहर आ गए। गोरे, बड़े, गुलाबी निपल्स खड़े हुए। मैंने मुँह लगाया। एक निपल मुँह में लिया और धीरे चूसा। जीभ घुमाई। उन्होंने सिर पीछे किया और आह निकाली। “आह… राहुल…” दूसरा स्तन भी उसी तरह चाटा और चूसा। दोनों हाथों से दबा-दबाकर सहला रहा था। दूध जैसे नरम।
साड़ी की पेटी खोली। कपड़ा कमर से खिसकने लगा। मैंने साड़ी धीरे-धीरे उतारी। वह खड़ी हो गईं। साड़ी फर्श पर गिर गई। अब सिर्फ पेटीकोट था। पतली कमर, गोल कूल्हे, मोटी गांड पेटीकोट में टाइट दिख रही थी। मैंने पेटीकोट भी नीचे खींच दिया। अब पूरी नंगी थीं। गोरी त्वचा, बालों वाली चूत थोड़ी सी गीली चमक रही थी। गांड गोल और मुलायम। मैं पीछे गया और दोनों हाथों से गांड पकड़ ली। सहलाया, दबाया। उन्होंने कमर आगे की और आह भरी।
मैं घुटनों पर बैठ गया। उनकी चूत के सामने। दोनों हाथों से जाँघें फैलाईं। चूत की पत्तियाँ गुलाबी और गीली थीं। मैंने जीभ निकाली और धीरे चाटा। ऊपर से नीचे तक। उन्होंने कमर काँपी। मैंने चूत की फांक में जीभ डाली। अंदर तक चाटा। रस मीठा था। क्लिट पर जीभ घुमाई, चूसा। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। “आह… वहाँ… और चाट…” मैं लगातार चाट रहा था। उनकी टाँगें काँप रही थीं। रस बहने लगा। मैंने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। चूत टाइट और गरम थी। उंगलियाँ अंदर-बाहर कीं और साथ में चाटता रहा। वह काँपने लगीं। एक लंबी आह के साथ उनका शरीर सिहर गया। रस और ज्यादा निकल आया।वह नीचे आईं। मेरी पैंट खोली। लंड बाहर निकला। तना हुआ, मोटा। उन्होंने हाथ में लिया और सहलाया। फिर मुँह में लिया। गर्म मुँह। जीभ लंड के सिरे पर घुमाई, फिर पूरा अंदर लिया। गले तक। ऊपर-नीचे करने लगीं। मैं उनके बाल सहला रहा था। उन्होंने लंड को दोनों हाथों से पकड़कर चूसा। गांड को मैं सहला रहा था। उन्होंने लंड को छोड़कर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया।
वह मेरे ऊपर चढ़ीं। चूत को लंड के सिरे पर रखा। धीरे-धीरे बैठने लगीं। चूत टाइट थी। लंड अंदर घुसता गया। पूरा अंदर चला गया। दोनों आहें निकलीं। वह मेरे सीने पर हाथ रखकर ऊपर-नीचे होने लगीं। स्तन मेरे चेहरे के पास झूल रहे थे। मैंने दोनों स्तन मुँह में लिए और चूसने लगा। वह कमर घुमा रही थीं। चूत लंड को कसकर पकड़े हुए थी। रस बह रहा था। आवाज़ गिच-गिच की आ रही थी।
मैंने उन्हें नीचे लिटा दिया। उनके ऊपर चढ़ गया। टाँगें उनके कंधों पर रखीं। लंड अंदर-बाहर करने लगा। धीरे, गहरा। हर धक्के पर उनके स्तन काँपते। उनकी आँखें मुझमें गड़ी हुई थीं। साँसें मिल रही थीं। मैं झुककर किस करता रहा। उनके होंठ काटता, जीभ चूसता। कमर की हरकत धीमी और गहरी थी। चूत बहुत टाइट महसूस हो रही थी। मैंने एक हाथ से उनका क्लिट सहलाया। वह और जोर से काँपने लगीं।
फिर मैंने उन्हें पेट के बल लिटाया। गांड ऊपर उठाई। लंड पीछे से चूत में डाला। दोनों हाथों से गांड पकड़कर धीरे ठोका। गांड काँप रही थी। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर स्तन मसला। दूसरा हाथ क्लिट पर। वह तकिए में मुँह दबाकर आहें निकाल रही थीं। “आह… राहुल… और अंदर…” मैं गहराई तक जा रहा था। उनकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी।फिर वह चारों तरफ हो गईं। मैं पीछे से चोदता रहा। उनके बाल पकड़कर धीरे खींचे, लेकिन नरम। कमर की हरकत मस्त थी। चूत रस से लथपथ थी। लंड आसानी से फिसल रहा था, फिर भी अंदर टाइट पकड़ था।
आखिर में वह फिर ऊपर चढ़ीं। इस बार तेजी से कमर हिला रही थीं। स्तन उछल रहे थे। मैं उनके निपल्स चूसनिपल्स चूस रहा था। दोनों का शरीर पसीने से चमक रहा था। साँसें तेज़। करीब 40 मिनट के बाद। उनकी चूत लंड को और कसने लगी। मैं भी सीमा पर था। उन्होंने जोर से बैठकर कमर घुमाई। दोनों एक साथ काँपे। मेरा रस उनकी चूत के अंदर छूट गया। गर्म, गाढ़ा। वह भी अपने रस के साथ सिहर गईं। शरीर ढीला पड़ गया। वह मेरे सीने पर गिर पड़ीं।
देर तक वैसे ही पड़े रहे। साँसें धीमी हो रही थीं। मैं उनके पीठ सहला रहा था। उनके स्तन मेरे सीने से दबे हुए थे। उन्होंने सिर उठाया और मुझे किस किया। नरम, लंबा किस।
“अभिषेक जब न हो… तब आ जाया कर,” उन्होंने कान में फुसफुसाया। आँखों में मुस्कान थी।
मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया। साड़ी एक तरफ पड़ी हुई थी। कमरा अभी भी गर्म था, लेकिन अब एक अलग गर्मी थी। दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे। निगाहें, साँसें और छूने का सिलसिला अभी थमा नहीं था। शाम ढलने तक हम फिर से एक-दूसरे में खो गए। इसके बाद तो में सुनीता आंटी को सप्ताह में चार दिन चोदने लगा । फिर क्या वह अपनी दो फ्रेंड पायल और सूची को भी मुझसे बहुत चूदवाई।। वह कहानी फिर कभी लिखूंगा।।।
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आपको यह सच्ची सेक्स घटना कैसी लगी
आप मुझे mail कर सकते हो।।
अगर किसी भाभी ,आंटी , गर्ल्स को मुझसे सेक्स करनी हो तो मुझे मेल करे ...........
मैं सबो का रिप्लाई दूंगा।।
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