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नई पड़ोसन को टीवी के साथ रिपेयर किया: Hindi Sex Stories

Aug 20
12 min read

आज आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरी ज़िंदगी की सबसे गुप्त अन्तर्वासना है, एक ऐसी Antarvasna जिसे मैं हमेशा से दुनिया से छुपाना चाहता था। ये घटना उस समय की है जब मैं लखनऊ के हज़रतगंज इलाके में एक किराए के फ्लैट में अकेला रहता था। मैं प्रोफेशन से एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर हूँ, नाम है अर्जुन मल्होत्रा, और शौकिया तौर पर घर के आस-पास के लोगों के छोटे-मोटे बिजली के उपकरण ठीक कर दिया करता था। ऊपर वाली मंज़िल पर नई-नई शिफ्ट हुई एक औरत रहने लगी थीं, नाम था रजनी श्रीवास्तव, और उम्र करीब 25 साल रही होगी। पहली ही नज़र में वो मुझे बेहद आकर्षक लगीं, उनका चेहरा दूधिया रंगत लिए हुए, बड़ी-बड़ी पलकों वाली आँखें और घने, घुंघराले बाल जो हवा में लहराते थे। उनकी चाल में एक अदा थी, जैसे वो ज़मीन पर चलती नहीं, बल्कि हवा में तैरती हों।


रजनी जी पेशे से एक स्कूल टीचर थीं और शादीशुदा थीं, पर उनके पति अक्सर बाहर रहते थे किसी प्राइवेट कंपनी के काम से। मैंने पहले दिन से ही उनके प्रति एक अजीब सी खिंचाव महसूस की, जो शायद सिर्फ़ अन्तर्वासना थी या कुछ और गहरा। वो जब भी बालकनी में कपड़े सुखाने आतीं, मेरी नज़रें उनकी तरफ खिंच जातीं। उनकी साड़ी का पल्लू हवा से उड़ता और कभी-कभी उनकी कमर दिख जाती, तो मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगता। मैं दिन में कई बार उनके बारे में सोचता, उनकी आवाज़ मेरे कानों में गूंजती रहती। उनकी मुस्कान ऐसी थी जैसे सुबह की पहली किरण, और मैं उस रोशनी में खुद को जलता हुआ पाता।


एक शाम की बात है, हल्की-फुल्की बारिश हो रही थी और बिजली चली गई थी। अंधेरे में मैं अपने फ्लैट के दरवाज़े के पास खड़ा था कि तभी ऊपर से कुछ आवाज़ आई, जैसे कोई चीज़ टूट रही हो। थोड़ी देर बाद मेरे दरवाज़े पर दस्तक हुई। मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने रजनी जी खड़ी थीं, हाथ में एक टॉर्च लिए हुए। उन्होंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, |अर्जुन जी, मेरा टीवी अचानक से बंद हो गया और अब चालू ही नहीं हो रहा। बारिश के कारण शायद कुछ ख़राब हो गया। क्या आप ज़रा देख सकते हैं?| मेरे लिए ये उनके करीब जाने का सुनहरा मौका था, और मैंने तुरंत हाँ कर दी। ये मेरी असली ज़िंदगी की कहानी है, जिसे मैं कभी किसी को बताने की हिम्मत नहीं कर पाया।


मैं उनके साथ ऊपर उनके फ्लैट में गया। उनका घर बहुत साफ-सुथरा और सुंदर था, हर तरफ़ एक हल्की सी खुशबू फैली हुई थी, शायद मोगरे की। दीवारों पर कुछ पेंटिंग्स टंगी थीं और कोने में एक बड़ा सा सोफा था। रजनी जी मुझे ड्राइंग रूम में ले गईं जहाँ एलसीडी टीवी स्टैंड पर रखा था। मैंने देखा कि टीवी के पीछे का प्लग लटक रहा था और एडाप्टर जल गया था, शायद वोल्टेज की उथल-पुथल के कारण। मैंने उन्हें बताया कि इसमें एक पुर्ज़ा बदलना पड़ेगा जो मेरे पास नीचे पड़ा है। रजनी जी बोलीं, |कोई जल्दी नहीं है, अभी बारिश भी तेज़ है। आप चाहें तो रुक जाइए, मैं चाय बना लेती हूँ| मैंने विनम्रता से कहा, |ठीक है, चाय पी लेता हूँ, पर पहले ये देख लेता हूँ कि और कोई नुकसान तो नहीं हुआ|


मैंने टीवी के पीछे झुककर तारों को चेक करना शुरू किया। इसी बीच रजनी जी अपनी साड़ी को संभालते हुए किचन की तरफ़ गईं। मेरी नज़र उनके पैरों पर पड़ी, उनके पैरों में चांदी की पायलें थीं जो हर कदम पर मधुर ध्वनि कर रही थीं। उनकी साड़ी हल्के नीले रंग की थी और ब्लाउज़ गहरे नीले रंग का, जो उनकी त्वचा पर बहुत फब रहा था। मुझे लग रहा था कि ये मौका मुझे किस्मत से मिला है। मैं सोच रहा था कि कैसे इस बातचीत को आगे बढ़ाऊँ, कैसे उन्हें अपने दिल की बात बताऊँ या शायद इशारों में ही समझाऊँ। उनकी हँसी, उनकी बातचीत, सब कुछ मुझे अपनी ओर खींच रहा था। ये एक ऐसी Antarvasna थी जो मेरे अंदर दिन-ब-दिन और गहरी होती जा रही थी।


रजनी जी चाय बनाकर लाईं, साथ में कुछ बिस्कुट भी। हम दोनों सोफे पर बैठ गए। खिड़की से बारिश की बूंदें अंदर आ रही थीं, और ठंडी हवा चल रही थी। मैंने देखा कि रजनी जी के चेहरे पर बारिश की कुछ बूंदें थीं जो उनकी गर्दन तक बह रही थीं। उन्होंने आँचल से चेहरा पोंछते हुए कहा, |ये मौसम तो बहुत सुहाना है, बस ये बिजली का जाना परेशान करता है| मैंने मुस्कुराते हुए कहा, |हाँ, लेकिन कभी-कभी ऐसा मौसम कुछ अच्छी यादें भी दे जाता है| उन्होंने शरारत भरी नज़रों से मुझे देखा और पूछा, |कैसी यादें?| मैंने चाय की चुस्की लेते हुए कहा, |जैसे किसी अजनबी के घर चाय पीना, बातें करना| वो हँस पड़ीं और बोलीं, |वैसे आप तो अब अजनबी नहीं रहे, पड़ोसी तो हैं ही|


बातों का सिलसिला धीरे-धीरे निजी जीवन की ओर बढ़ने लगा। रजनी जी ने बताया कि उनके पति अधिकतर समय बाहर ही रहते हैं, जिससे वो अकेली हो जाती हैं। उनकी आँखों में एक अकेलापन झलक रहा था, और मैं उस अकेलेपन को महसूस कर सकता था। मैंने कहा, |अगर कभी किसी चीज़ की ज़रूरत हो, तो बेझिझक बता दीजिएगा| उन्होंने कहा, |बस यही तो चाहिए था, कोई अपना जो सहारा दे सके| मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। मैंने हिम्मत करके उनके हाथ पर अपना हाथ रख दिया। वो चौंकी नहीं, बल्कि उन्होंने मेरी आँखों में देखा। उस पल हम दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता बनता हुआ महसूस हुआ। मुझे समझ आ गया कि वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित हैं, और ये अन्तर्वासना अब सिर्फ़ मेरी नहीं, हम दोनों की हो चुकी थी।


बारिश अब थोड़ी तेज़ हो चुकी थी, और बिजली अभी भी नहीं आई थी। रजनी जी ने एक मोमबत्ती जला दी थी, जिसकी रोशनी उनके चेहरे को और भी खूबसूरत बना रही थी। मैंने धीरे से उनके बालों को उनके कान के पीछे किया और उनके गाल को छुआ। उनकी त्वचा बर्फ़ की तरह ठंडी और मुलायम थी। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और मेरे स्पर्श को महसूस करने लगीं। फिर मैंने उनके चेहरे को अपनी ओर खींचा और उनके होंठों को चूम लिया। वो हल्का सा सिहर उठीं, पर उन्होंने विरोध नहीं किया। हमारी चुंबन गहरी होती गई, और हम एक-दूसरे से लिपट गए। उनके होंठ नर्म और मीठे थे, और उनकी साँसों में वही मोगरे की खुशबू थी। ये मेरी ज़िंदगी का सबसे अनमोल पल था, जिसके लिए मैं कब से तरस रहा था।


कुछ देर बाद हम अलग हुए और एक-दूसरे की आँखों में देखा। रजनी जी की आँखों में शर्म और चाहत दोनों थीं। उन्होंने कहा, |अर्जुन, ये सही है क्या?| मैंने कहा, |जो हम महसूस कर रहे हैं, उसमें गलत क्या है? तुम अकेली हो, और मैं भी| वो कुछ कहतीं, इससे पहले ही मैंने उन्हें फिर से अपनी बाहों में भर लिया। इस बार चुंबन और भी तीव्र था, और मेरे हाथ उनकी पीठ पर घूमने लगे। उनकी साड़ी का कपड़ा मेरे हाथों के नीचे सरक रहा था। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और उनकी गर्दन पर चुंबन किए। वो आहें भरने लगीं, |उह्ह्ह्ह… अर्जुन…| उनकी आवाज़ से मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई। मैंने उनके ब्लाउज़ के बटन खोलने शुरू किए, एक-एक करके। रजनी जी ने मेरी मदद की, और जल्द ही उनका ब्लाउज़ खुल गया। उनकी ब्रा के ऊपर से उनके उभार साफ़ दिख रहे थे, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रहे थे।


मैंने उन्हें सोफे पर लिटा दिया और उनके ऊपर झुक गया। मेरी उँगलियाँ उनकी ब्रा के हुक पर गईं और मैंने उसे खोल दिया। उनके स्तन बाहर निकले, जो गोल, सुडौल और अत्यंत सुंदर थे। उनके निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने उनके एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और दूसरे को अपनी उँगलियों से सहलाने लगा। रजनी जी ने ज़ोर से कराहते हुए कहा, |आआह्ह्ह… ये क्या कर रहे हो…| मैंने उनके स्तनों को चूसना और दबाना जारी रखा, और उनके शरीर में कंपन होने लगा। वो अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे मुँह के और करीब आने की कोशिश कर रही थीं। उनकी साड़ी अब तक उनकी कमर तक खिसक चुकी थी, और उनका पेट दिखाई दे रहा था। मैंने उनके नाभि के आस-पास चुंबन किए, और वो और भी उत्तेजित हो गईं। उनके मुँह से निकल रही आवाज़ें मुझे और भी मस्त कर रही थीं।


मैंने उनकी साड़ी को पूरी तरह से उतार दिया और अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थीं। मैंने उनका पेटीकोट भी धीरे से खिसकाया, और उनकी शर्मीली मुस्कान के साथ वो पूरी तरह से नग्न हो गईं। उनका शरीर किसी संगमरमर की मूरत जैसा लग रहा था। मैंने उनके अंदरूनी जांघों को चूमा, और वो काँप उठीं। उनकी चुत से रिसाव शुरू हो चुका था, जो उनकी गहरी चाहत को साफ़ दर्शा रहा था। मैंने उनकी टाँगों को फैलाया और उनकी चुत को अपनी जीभ से सहलाने लगा। रजनी जी ज़ोर से चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्हह… अर्जुन… मत… मत रोको…| मैंने उनकी चुत को अंदर तक चाटा और चूसा, उनका रस मेरे मुँह में भर गया। वो मेरे बालों को खींचने लगीं और उनका शरीर ऊपर की ओर उछल रहा था। उनका ये रूप देखकर मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और पैंट में बाहर निकलने को तड़प रहा था।


रजनी जी ने मुझे ऊपर खींच लिया और कहा, |अब तुम भी उतरो| मैंने तुरंत अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। मेरा लौड़ा पूरी तरह से तना हुआ था, और उसे देखकर रजनी जी की आँखें चौड़ी हो गईं। उन्होंने मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगीं। फिर उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। मैंने उनके बालों को पकड़ लिया और कराह उठा, |आआह्ह्ह… रजनी… बहुत अच्छा…| उन्होंने मेरे लौड़े को अंदर तक ले जाने की कोशिश की, और उनकी जीभ उसके ऊपर घूम रही थी। मैंने उनके मुँह को और गहराई तक धकेला, और वो मेरे लंड को पूरी तरह से निगलने की कोशिश कर रही थीं। उनके मुँह की गर्माहट और नमी से मुझे बहुत ही उत्तेजना हो रही थी। मैंने धीरे-धीरे उनके मुँह में चोदते हुए उन्हें चुदवाने का मज़ा देना शुरू किया।


कुछ देर तक उन्होंने मेरे लंड को चूसने के बाद, मैंने उन्हें सोफे पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया। मैंने उनकी टाँगों को अपने कंधों पर रखा और अपने लंड को उनकी चुत के दरवाज़े पर लगाया। रजनी जी ने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं और उनके मुँह से उत्तेजना भरी आवाज़ें निकल रही थीं। मैंने धीरे से अपने लौड़े को अंदर डाला। जैसे ही मेरा लंड उनकी चुत के अंदर गया, वो ज़ोर से चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्हह… अर्जुन…| मैंने उनके अंदर अपना लौड़ा और गहराई तक धकेला। उनकी चुत तंग और गर्म थी, जो मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे अपना लौड़ा बाहर निकाला और फिर अंदर डाला। रजनी जी ने अपनी कमर ऊपर उठाई और मुझे और गहराई तक अंदर खींच लिया। मैंने अपनी गति बढ़ा दी, और अब मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।


रजनी जी की चुत से रस बह रहा था, और मेरा लंड उनके अंदर आसानी से फिसल रहा था। उनकी टाँगें मेरे कंधों पर थीं, और मैं उन्हें पूरी तरह से चोद रहा था। उनके स्तन हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे, और उनके मुँह से लगातार कराहें निकल रही थीं, |आआह्ह्ह… उह्ह्ह्ह… और ज़ोर से… अर्जुन…| मैंने उनकी टाँगों को अलग करके उनकी चुत में अपना लौड़ा पूरी तरह से घुसाया और बाहर निकाला। मेरे अंडकोश उनके चुत के बाहरी हिस्से से टकरा रहे थे, और उससे एक विशेष ध्वनि निकल रही थी। रजनी जी अपनी आँखें बंद किए हुए, होंठों को दाँतों से दबाए हुए, पूरे आनंद में डूबी हुई थीं। उनकी ये हालत देखकर मैं और भी तेज़ी से चोदने लगा। मेरा लंड उनकी चुत के अंदर आग-सा जल रहा था, और मैं उन्हें चुदाई करने में पूरी तरह से खो गया था।


इसके बाद मैंने रजनी जी को उल्टा कर दिया, यानी उन्हें पीठ के बल से पेट के बल लिटा दिया। उन्होंने अपनी कमर ऊपर उठाई और अपनी चुत मेरे सामने कर दी। मैंने उनके कूल्हों को पकड़ा और अपने लंड को पीछे से उनकी चुत में डाल दिया। इस पोज़िशन में मेरा लौड़ा और भी गहराई तक जा रहा था। रजनी जी ज़ोर से चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्हह… अर्जुन… ये पोज़िशन… बहुत गहरा है…| मैंने उनके बालों को एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ से उनके कूल्हों को, और ज़ोर-ज़ोर से उन्हें चोदने लगा। उनकी पीठ पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं, और मैं उन्हें चाटते हुए अपने लंड को अंदर-बाहर कर रहा था। उनकी चुत से निकलने वाला रस मेरे लंड को और भी चिकना बना रहा था, जिससे मेरी गति और भी तेज़ हो गई थी। मैंने उनके नितंबों को थप्पड़ मारा, जिसकी आवाज़ से पूरा कमरा गूंज उठा। रजनी जी ने ज़ोर से कराहते हुए कहा, |आआह्ह्ह… और मारो… अर्जुन…|


मैंने उनके नितंबों को कई बार थप्पड़ मारा और अपने लंड को पूरी तरह से बाहर निकालकर फिर से अंदर घुसाया। रजनी जी की चुत अब और भी तंग हो गई थी, और उनका शरीर काँप रहा था। उनके मुँह से लगातार अश्लील बातें निकल रही थीं, |अर्जुन… मुझे चोदो… और ज़ोर से चोदो… मुझे चुदवाने में बहुत मज़ा आ रहा है…| उनकी बातें सुनकर मैं पागल हो गया और मैंने अपनी पूरी ताकत से उन्हें चोदना शुरू कर दिया। मेरा लंड उनकी चुत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था, और मेरे अंडकोश उनके नितंबों से टकराकर आवाज़ कर रहे थे। मुझे लग रहा था कि मैं अब जल्द ही झड़ जाऊँगा, पर मैं इस सुख को और लंबा खींचना चाहता था। मैंने अपनी गति को धीमा किया और उनके अंदर गहराई तक घुसा रहा।


फिर मैंने रजनी जी को अपनी गोद में बिठाया, यानी काउगर्ल पोज़िशन में। वो मेरे ऊपर चढ़ीं और मेरे लंड को अपनी चुत में डालकर ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके स्तन मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे, और मैं उन्हें मुँह से चूस रहा था। रजनी जी ने अपनी कमर को तेज़ी से हिलाना शुरू किया, और मेरे लंड को अपनी चुत के अंदर घुमाने लगीं। उनके मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, |आआह्ह्ह… अर्जुन… तुम्हारा लौड़ा… बहुत बड़ा है…| मैंने उनके नितंबों को पकड़कर उन्हें और तेज़ी से उछालना शुरू किया। मेरा लंड उनकी चुत में गहराई तक जा रहा था, और वो हर धक्के पर ज़ोर से कराह रही थीं। मैंने उनके कूल्हों को पकड़कर अपनी ओर खींचा, और वो मेरे लंड पर पूरी तरह से सवार हो गईं। इस पोज़िशन में उनकी चुत मेरे लंड को पूरी तरह से निगल रही थी, और मैं उनके अंदर और गहराई तक घुस रहा था।


उनके शरीर से पसीना टपक रहा था, और मैं उस पसीने को चाट रहा था। उनकी चुत से रस की धारा बह रही थी, जो मेरे लंड और अंडकोशों को भिगो रही थी। रजनी जी की हालत अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी। वो चुदक्कड़ की तरह मेरे ऊपर कूद रही थीं, और उनके मुँह से लगातार निकल रहा था, |मुझे चोदो… अर्जुन… मुझे चुदवाने दो…| मैंने उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनके शरीर को अपने से चिपका लिया। फिर मैंने अपनी कमर को तेज़ी से ऊपर उठाया और उनके अंदर अपना लौड़ा पूरी तरह से घुसा दिया। रजनी जी ज़ोर से चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्हह… अर्जुन… अब मैं… अब मैं आ रही हूँ…| मैंने उनकी चुत को कसकर पकड़ लिया और अपनी गति और तेज़ कर दी।


मैंने रजनी जी को फिर से नीचे लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर मिशनरी पोज़िशन में चोदना शुरू किया। मैंने उनकी टाँगों को उनके सिर की तरफ़ मोड़ दिया, जिससे उनकी चुत पूरी तरह से खुल गई। मेरा लंड उनके अंदर बहुत गहराई तक जा रहा था। रजनी जी की आँखें ऊपर की ओर घूम रही थीं, और उनका शरीर काँप रहा था। मैंने उनके होंठों को चूमा और अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, और मेरी पूरी ताकत उनके अंदर जा रही थी। उनके मुँह से निकल रही आवाज़ें मेरे लंड को और भी सख्त कर रही थीं। मैंने उनकी गर्दन पर चुंबन किए, उनके कान को चूसा, और उन्हें पूरी तरह से अपने अधीन कर लिया। उनकी चुत अब सिकुड़ रही थी, और मैं महसूस कर सकता था कि वो अपने चरम पर पहुँच रही हैं।


मैंने अपनी गति और तेज़ कर दी, और अपने लंड को पूरी तरह से बाहर निकालकर फिर से अंदर घुसाया। रजनी जी की चुत ने मेरे लौड़े को कसकर पकड़ लिया था, और अब वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थीं, |आआअह्ह्ह्हह… अर्जुन… मैं… मैं…| मैंने उनके कूल्हों को पकड़कर अपना लौड़ा उनके अंदर पूरी तरह से घुसा दिया और एक साथ कई बार तेज़ी से चोदा। रजनी जी का शरीर ऊपर की ओर उछला और वो चरम सुख पर पहुँच गईं। उनकी चुत से रस की धारा फूट पड़ी, जो मेरे लंड को भिगो रही थी। उनके मुँह से निकल रही आवाज़ें अब थकान भरी थीं, पर उनमें गहरी संतुष्टि थी। मैंने उनके चेहरे को देखा, जो पूरी तरह से लाल हो चुका था, और उनकी आँखों में आँसू थे जो खुशी के थे।


मैं अब भी उन्हें चोद रहा था, और मेरा अपना चरम भी करीब था। मैंने उन्हें गले से लगा लिया और उनके कान में फुसफुसाया, |रजनी, मैं भी अब…| उन्होंने अपनी टाँगों को मेरी कमर से कसकर लपेट लिया और कहा, |हाँ अर्जुन… अंदर ही…| मैंने अपनी आखिरी ताकत से अपने लौड़े को उनकी चुत में पूरी तरह से घुसाया और ज़ोर से झड़ गया। मेरा गर्म वीर्य उनके अंदर तेज़ी से निकल रहा था, और मेरा शरीर काँप रहा था। मैंने उन्हें कसकर पकड़ रखा था, और रजनी जी भी मुझसे चिपकी हुई थीं। हम दोनों एक-दूसरे की साँसों में खो गए, और मुझे लगा जैसे समय थम गया है। मेरा लंड अब भी उनके अंदर था, और वो धीरे-धीरे नरम हो रहा था।


कुछ देर बाद मैं उनके ऊपर से हटा और उनके पास ही लेट गया। रजनी जी ने मेरी छाती पर सिर रख दिया और मेरे बालों को सहलाने लगीं। बारिश अब भी हो रही थी, और बिजली अभी भी नहीं आई थी। मोमबत्ती की हल्की रोशनी में हम दोनों एक-दूसरे के साथ शांति से लेटे थे। रजनी जी ने कहा, |अर्जुन, ये मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत अनुभव था| मैंने मुस्कुराते हुए उनके माथे पर चुंबन किया और कहा, |मेरे लिए भी, रजनी| उन्होंने मेरी ओर करवट ली और मेरे होंठों को चूम लिया। हम फिर से एक-दूसरे से लिपट गए, और कुछ देर बाद हम दोनों को नींद आ गई।


सुबह जब मेरी आँख खुली, तो रजनी जी मेरे पास ही सो रही थीं। मैंने धीरे से उन्हें देखा, उनका चेहरा सुबह की रोशनी में और भी सुंदर लग रहा था। मैंने उनके बालों को हटाया और उनके गाल को चूमा। वो हल्के से मुस्कुराईं और आँखें खोलीं। उन्होंने कहा, |सुबह हो गई?| मैंने कहा, |हाँ, और बारिश भी रुक गई है| वो उठ बैठीं और उन्होंने अपनी साड़ी संभाली। मैंने भी अपने कपड़े पहने। उन्होंने मुझसे कहा, |टीवी तो अभी भी ख़राब है| मैं हँस पड़ा और बोला, |हाँ, मैं अभी ठीक कर देता हूँ| मैंने नीचे जाकर वो पुर्ज़ा लाया और टीवी ठीक कर दिया। रजनी जी ने मुझे चाय पिलाई और हम कुछ देर बातें करते रहे।


उस दिन के बाद से हमारे बीच एक गहरा रिश्ता बन गया था। जब भी रजनी जी को कोई बहाना मिलता, वो मुझे बुला लेतीं। कई बार तो सिर्फ़ बातें करने के लिए भी बुला लेतीं। लेकिन मैं जानता था कि इस रिश्ते का कोई भविष्य नहीं है, क्योंकि वो शादीशुदा थीं। फिर भी, उस शाम की कामवासना, वो बारिश, वो अंधेरा, और उनका शरीर — ये सब मेरी ज़िंदगी की सबसे गुप्त और सुखद यादें बनकर रह गईं। ये मेरी सच्ची Hindi Sex Stories है, जिसे मैं हमेशा से दुनिया से छुपाना चाहता था, और आज मैंने आपके सामने उसे उजागर कर दिया।



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