पड़ोसी अंकल की बीवी रेखा को चोदा : Antarvasana
- Rahul
- Jul 10
- 6 min read
मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र 25 साल है और कद 5’8″ है। मैं दिखने में सुन्दर हूँ, बिहार से हूँ। मेरा लण्ड का साइज 8.4 '' इंच है ।।
मेरे पड़ोस में अंकल-आंटी रहते थे। अंकल सरकारी नौकरी करते थे, उम्र करीब 48 साल की, थोड़े मोटे और हमेशा थके हुए रहते। लेकिन उनकी पत्नी, रेखा आंटी… वाह! वो सच में आग थी। उम्र 38-39 के आसपास, लेकिन बॉडी ऐसी कि कोई भी जवान लड़का पागल हो जाए। गोरी चमड़ी, भरे-भरे स्तन, पतली कमर और गोल-गोल नितंब। साड़ी में वो जब चलती तो उनका कूल्हा हिलता ऐसा कि नजरें हटाना मुश्किल हो जाता।
रेखा आंटी से मेरी मुलाकात रोज होती थी। वो सुबह शाम बालकनी में कपड़े सुखाती या बर्तन माँजती। मैं अक्सर छत पर जाता और उनको देखता। कभी-कभी नजरें मिल जातीं तो वो मुस्कुरा देतीं। शुरू में तो बस हेलो-हाय, लेकिन धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं। अंकल अक्सर टूर पर रहते, तो घर में रेखा आंटी अकेली। एक दिन बारिश हो रही थी, मैं छत से नीचे आ रहा था तो उनकी बालकनी में पानी भर गया था। मैंने मदद की।
“राहुल बेटा, थैंक यू। तुम नहीं होते तो आज मुश्किल हो जाती,” उन्होंने कहा, उनकी आँखों में कुछ अलग सी चमक थी।
“कोई बात नहीं आंटी। आपकी मदद करनी मेरा काम है,” मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
उस दिन से हमारी बातें बढ़ीं। वो मुझे चाय पिलातीं, कभी-कभी घर का सामान लाने को कहतीं। मैं भी मन से मदद करता। उनकी हँसी में मिठास थी, और जब वो झुककर कुछ उठातीं तो उनका ब्लाउज थोड़ा खुल जाता, जिससे उनकी गहरी वादी दिखती। मेरा मन अक्सर अशांत हो जाता, लेकिन मैं कुछ नहीं कहता।

एक शाम अंकल फिर टूर पर गए। रेखा आंटी ने मुझे फोन किया, “राहुल, थोड़ा आकर मदद कर दो ना। लाइट का स्विच खराब हो गया है।”
मैं तुरंत पहुँच गया। घर में हल्की रोशनी थी। वो सलवार-कमीज में थी, बाल खुले हुए। जैसे ही मैं स्विच ठीक करने लगा, उनकी साँसें मेरे कंधे पर पड़ रही थीं।
“आंटी, आप थोड़ा पीछे हट जाएँ,” मैंने कहा।
“क्यों? डर लग रहा है क्या?” उन्होंने हँसते हुए पूछा। उनकी आवाज में शरारत थी।
स्विच ठीक हो गया। मैं मुड़ा तो वो पास ही खड़ी थीं। उनकी आँखों में नमक था, जैसे कुछ कहना चाह रही हों।
राहुल… तुम बहुत अच्छे लड़के हो। अकेले में अच्छा नहीं लगता,” उन्होंने धीरे से कहा।
मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। “आंटी, अगर आप चाहें तो मैं हमेशा आपके पास रह सकता हूँ।”
उन्होंने हाथ नहीं छुड़ाया। उल्टा मेरे करीब आ गईं। उनकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने धीरे से उनका चेहरा उठाया और होंठों पर हल्का सा किस किया। वो थोड़ा काँपीं, लेकिन दूर नहीं हटीं। फिर उन्होंने आँखें बंद कर लीं और मेरे होंठों को अपने होंठों में ले लिया। वो किस इतना गहरा था कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
“रेखा… आप बहुत सुंदर हो,” मैंने उनके कान में फुसफुसाया।
“राहुल… मुझे भी तुम्हारे पास अच्छा लगता है। बहुत दिनों से अकेली हूँ,” उनकी आवाज में चाहत थी।
हम दोनों धीरे-धीरे सोफे पर बैठ गए। मैंने उनकी सलवार की नाड़ी खोल दी। उनकी कमीज़ ऊपर की तो उनके भरे हुए स्तन ब्रा में कैद थे। मैंने ब्रा का हुक खोला। उनके स्तन बाहर आ गए – गुलाबी चूचियाँ, सख्त और निप्पल खड़े हुए। मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा। रेखा आंटी की साँसें भारी हो गईं।
“आह… राहुल… धीरे… बहुत अच्छा लग रहा है,” उन्होंने कराहते हुए कहा।
मैं दूसरी चूची दबाता, चूसता। उनकी कमर मेरे हाथों में थी। फिर मैं नीचे झुका। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतारी। उनकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और रस से तर। मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत चाटी। क्लिटोरिस पर हल्का सा दबाव दिया तो वो जोर से काँप गईं।
“उफ्फ… राहुल… क्या कर रहे हो… अह्हह!” उनकी उँगलियाँ मेरे बालों में फँस गईं।
मैं जीभ अंदर डालता, चूसता। उनका रस मीठा था। वो बार-बार काँप रही थीं। कुछ मिनट बाद वो पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा शरीर तन गया, आँखें बंद, मुंह खुला।
“बहुत अच्छा… बहुत दिनों बाद…” उन्होंने थकी हुई आवाज में कहा।
अब मेरी बारी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड 8.4 इंच का, मोटा और खड़ा। रेखा आंटी ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगीं।
“इतना बड़ा… धीरे से लेना पड़ेगा,” उन्होंने शरमाते हुए कहा।
मैंने उन्हें सोफे पर लिटाया। उनकी टाँगें फैलाईं। लंड की नोक उनकी चूत पर रखी और धीरे-धीरे दबाया। वो गीली थीं, इसलिए आसानी से आधा अंदर चला गया।
“आह… राहुल… भर गया… धीरे,” वो कराह रही थीं।
मैं पूरे लंड को अंदर डाल दिया। उनकी चूत बहुत टाइट और गर्म थी। मैं धीरे-धीरे स्टोक करने लगा। हर थ्रस्ट पर उनके स्तन हिलते। मैंने एक हाथ से चूची दबाई, दूसरे से उनके होंठ चूमे। रफ्तार बढ़ाई तो वो जोर-जोर से चीखने लगीं।
“हाँ… और जोर से… चोदो मुझे राहुल… अह्हह… तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है!”
मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। उनके गोल नितंब देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। पीछे से लंड डाला तो वो पूरी तरह झुक गईं। मैं उनके बाल पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा। उनकी चूत का रस मेरी जाँघों पर बह रहा था।
“मुझे पसंद है… तुम्हें अंदर महसूस करना… हाँ… तेज… तेज!” वो चिल्ला रही थीं।
हम दोनों पसीने से तर थे। मैंने उन्हें फिर से मिशनरी में लिटाया और गहरी थ्रस्ट्स दिए। उनकी आँखें मेरी आँखों में थीं। वो मेरी पीठ पर नाखून गड़ाए जा रही थीं, लेकिन दर्द नहीं, सिर्फ़ मस्ती।
“राहुल… मैं फिर आने वाली हूँ… साथ में आओ ना,” उन्होंने कहा।
मैंने रफ्तार बढ़ाई। उनके स्तन मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे। आखिरकार हम दोनों साथ में झड़ गए। मेरा वीर्य उनकी चूत में भर गया। वो काँपती रही, मैं भी थक गया।
हम कुछ देर लेटे रहे। मैंने उन्हें चूमते हुए कहा, “रेखा… तुम बहुत हॉट हो।”
“तुम भी कम नहीं। आज के बाद… जब भी अंकल जाएँ, तुम आना,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड पर फिर से घूम रही थीं।
उस रात हम दो बार और प्यार किया। दूसरी बार बेडरूम में। मैंने उन्हें नंगी करके शावर के नीचे चोदा। पानी उनके शरीर पर बह रहा था, उनके स्तन चमक रहे थे। मैंने उन्हें दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। उनकी टाँगें मेरी कमर पर। हर धक्के पर वो चीख रही थीं।
“चोदो… अपनी रेखा को… भर दो… हाँ!”
तीसरी बार सुबह होने से पहले। वो मेरे ऊपर सवार हुईं। काउगर्ल पोजिशन। उनके स्तन हिलते हुए, कमर घुमाते हुए वो खुद को चोदवा रही थीं। मैं नीचे से ऊपर धक्के दे रहा था। उनका चेहरा आनंद से लाल था।
“मुझे लगता है… तुम्हारी चूत मेरे लंड के लिए बनी है,” मैंने कहा।
“हाँ… अब ये तुम्हारी है… जब चाहो चोद लेना,” उन्होंने जवाब दिया।
उसके बाद हमारे रिश्ते में नई जान आ गई। अंकल जब भी बाहर जाते, रेखा आंटी मुझे बुलातीं। कभी-कभी दिन में भी। हम खुलकर प्यार करते। वो मुझे सिखातीं कि कैसे उनकी चूत को चाटूँ, कैसे उनके नितंब दबाऊँ। मैं उन्हें नई-नई पोजिशन्स में चोदता।
एक दिन उन्होंने कहा, “राहुल, तुम्हारे साथ मुझे जवान लगती हूँ। अंकल तो बस… काम के बोझ में। तुम्हारी वजह से मेरी जिंदगी में रंग आ गया।”
मैंने उन्हें गले लगाया। “मुझे भी तुम बहुत पसंद हो। तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारा शरीर, सब।”
हमारा रिश्ता सिर्फ़ सेक्स तक सीमित नहीं रहा। हम बातें करते, साथ खाना बनाते, फिल्में देखते। लेकिन जब भी मौका मिलता, हम एक-दूसरे में खो जाते। उनकी चूत हमेशा मेरे लंड के लिए तरसती रहती। और मेरा लंड उनकी चूत में घुसते ही घर जैसा लगता।
कई महीने बीत गए। एक बार अंकल लंबे टूर पर गए। हमने पूरे हफ्ते घर को अपना बना लिया। सुबह उठते ही सेक्स, नहाते हुए सेक्स, रसोई में सेक्स, बालकनी में छुप-छुपकर। रेखा आंटी अब पूरी तरह खुल गई थीं। वो खुद कहतीं, “आज मुझे पीछे से चोदो,” या “आज मुँह में लेना है तुम्हारा।”
एक शाम हम बेड पर थे। मैं उनका मुंह चोद रहा था। उनकी जीभ मेरे लंड को चाट रही थी, गले तक ले रही थीं। फिर मैंने उन्हें उल्टा करके उनकी गांड चाटी। वो काँप गईं।
“पहली बार… लेकिन तुम्हारे साथ… हाँ,” उन्होंने कहा।
मैंने लुब्रिकेंट लगाया और बहुत धीरे से अपनी गांड में लंड डाला। वो दर्द नहीं, सिर्फ़ भराव महसूस कर रही थीं। धीरे-धीरे पूरी तरह अंदर। फिर मैंने हल्के स्टोक्स दिए। उनकी चूत पर हाथ फेरता रहा। वो दो बार झड़ गईं। आखिर में मैंने उनकी चूत में वीर्य डाला।
“तुमने मुझे पूरी तरह अपना बना लिया राहुल,” उन्होंने थके लेकिन खुश होकर कहा।
हमारा ये सिलसिला चलता रहा। पड़ोसी होने के नाते हम सावधानी बरतते, लेकिन जुनून कम नहीं हुआ। रेखा आंटी अब मेरी थी – उनकी मुस्कान, उनका शरीर, उनकी चाहत, सब।
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