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पड़ोसी मैकेनिक की बीबी बबनी मेरी रखैल: Hindi Sex Stories

ये कहानी मेरी ज़िंदगी की सबसे गहरी कामवासना है, एक ऐसी Antarvasna जिसे मैं आज तक अपने सीने में दबाए हुए था और कभी किसी को बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। मैं अमित वर्मा, उम्र 28 साल, और मैं इंदौर के विजय नगर इलाके में एक किराए के मकान में रहता था। मेरे ठीक बगल वाले घर में एक मैकेनिक रहता था, जिसका नाम था सुरेश यादव। वो दिन भर अपनी गैराज में गाड़ियाँ ठीक करता और शाम को थका-हारा घर लौटता। उसकी बीबी का नाम था बबनी, उम्र करीब 24 साल, और उसे देखते ही मेरी साँसें रुक जाती थीं। बबनी का रंग साँवला सा था, पर उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो किसी का भी दिल चीर सकती थी। उसकी कमर पतली, कूल्हे भरे हुए और चाल में एक मस्ती थी जैसे वो ज़मीन पर नहीं, बल्कि हवा में तैरती हो।


बबनी ज़्यादातर समय घर पर ही रहती, क्योंकि सुरेश पूरे दिन गैराज में रहता था। वो सुबह कपड़े सुखाने बाहर आती, तो मैं अपनी बालकनी से उसे घूरता रहता। उसकी साड़ी हमेशा हल्के रंग की होती, जो उसके शरीर से चिपकी रहती। एक दिन मैंने देखा कि वो अपने आँगन में बैठकर सिर पर तेल मल रही थी, और उसके बाल खुले हुए थे। उसकी गर्दन पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं, और उसके ब्लाउज़ से उसकी पीठ दिख रही थी। मेरे अंदर की अन्तर्वासना दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी, और मैं उसे पाने के लिए तड़प रहा था। मैंने कई बार उससे बात करने की कोशिश की, पर सुरेश के डर से वो ज़्यादा खुलकर बात नहीं करती थी।


एक दिन मौका मुझे तब मिला जब सुरेश किसी काम से बाहर गया हुआ था। बबनी के घर का नल ख़राब हो गया था, और वो मेरे दरवाज़े पर आई। उसने घूँघट हल्का सा करते हुए कहा, |अमित भैया, घर का नल टूट गया है, पानी रुक नहीं रहा| मैंने तुरंत कहा, |चलो मैं देख लेता हूँ| मैं उसके साथ उसके घर गया। अंदर जाते ही मुझे उसके शरीर की खुशबू आई, जो मुझे पागल कर रही थी। नल सच में टूटा हुआ था और पानी बह रहा था। मैंने उसे ठीक करने के लिए औज़ार माँगे, और बबनी मेरे पास ही खड़ी रही। उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार गिर रहा था, और उसकी कमर दिख रही थी। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था, और मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था।


मैंने नल ठीक कर दिया और हाथ धोने लगा। बबनी ने मुझे तौलिया दिया और कहा, |आपने बहुत मदद की, अमित भैया| मैंने मुस्कुराते हुए कहा, |इसमें कौन सी बड़ी बात है, पड़ोसी तो हैं ही| उसने मुझे चाय पीने के लिए बुलाया, और मैं मना नहीं कर पाया। हम दोनों उसके ड्राइंग रूम में बैठ गए। बबनी चाय बनाकर लाई और मेरे सामने बैठ गई। उसकी साड़ी अब भी गीली थी, और उसके शरीर से चिपकी हुई थी। मैंने उसकी तरफ़ देखा, और वो शरमा कर नीचे देखने लगी। मैंने कहा, |बबनी, तुम बहुत खूबसूरत हो| वो चौंकी और बोली, |ऐसा मत बोलिए, मैं शादीशुदा हूँ| मैंने कहा, |मुझे पता है, पर मैं तुम्हारी तारीफ़ करने से खुद को रोक नहीं सकता|


बबनी के चेहरे पर शर्म और मुस्कान दोनों थीं। उसने कहा, |अमित भैया, ये सब बातें ठीक नहीं हैं| मैंने उसकी ओर थोड़ा सरकते हुए कहा, |जो दिल में है, वो कह देना ही बेहतर है| बबनी उठने लगी, पर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। वो सिहर उठी और मेरी आँखों में देखने लगी। मैंने धीरे से उसकी उँगलियों को सहलाया और कहा, |मैं तुम्हें पहली नज़र से चाहता हूँ| बबनी ने अपनी नज़रें नहीं हटाईं, और मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया। हमारे होंठ करीब थे, और मैंने उसके होंठों को चूम लिया। बबनी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरी अन्तर्वासना अब हकीकत में बदल रही थी, और मैं उस पल को पूरी तरह से जीना चाहता था।


हमारी चुंबन गहरी होती गई, और मैंने बबनी को अपनी बाहों में भर लिया। उसके शरीर की गर्मी मुझे अंदर तक जला रही थी। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसकी गर्दन पर चुंबन किए। बबनी ने कराहते हुए कहा, |उह्ह्ह्ह… अमित…| मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरा और उसके ब्लाउज़ के बटन खोलने लगा। बबनी ने मेरी मदद की, और जल्द ही उसका ब्लाउज़ खुल गया। उसकी ब्रा के नीचे उसके स्तन उभर रहे थे, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रहे थे। मैंने उसकी ब्रा उतार दी और उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगा। बबनी ने ज़ोर से आह भरी, |आआह्ह्ह…| मैंने उसके एक निप्पल को मुँह में ले लिया और दूसरे को उँगलियों से मसलने लगा। बबनी का शरीर काँप रहा था, और वो मेरे बालों को खींच रही थी।


मैंने बबनी को वहीं सोफे पर लिटा दिया और उसकी साड़ी उतार दी। अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थी। मैंने उसका पेटीकोट भी उतार दिया, और वो पूरी तरह से नग्न हो गई। उसका शरीर साँवला और चिकना था, और उसकी चुत पहले से ही गीली थी। मैंने उसकी टाँगों को फैलाया और उसकी चुत को चूमने लगा। बबनी ज़ोर से चीख पड़ी, |आआअह्ह्ह्हह… अमित… ये क्या कर रहे हो…| मैंने उसकी चुत को अंदर तक चाटा और चूसा, और बबनी उत्तेजना से तड़पने लगी। उसके मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थीं, और उसकी चुत से रस बह रहा था। मैंने उसकी जाँघों को चूमा और फिर उसकी चुत पर अपनी जीभ तेज़ी से फेरी। बबनी ने मेरे सिर को दबाकर कहा, |और… और अंदर…|


मैंने बबनी को चोदने के लिए अपनी पैंट उतार दी। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था, और उसे देखकर बबनी की आँखें चौड़ी हो गईं। उसने कहा, |इतना बड़ा…| मैंने मुस्कुराते हुए कहा, |तुम्हारे लिए ही तो है| मैंने उसकी टाँगों को कंधों पर रखा और अपने लंड को उसकी चुत पर रगड़ा। बबनी ने अपनी कमर ऊपर उठाई, और मैंने धीरे से अपना लौड़ा अंदर डाला। बबनी ने ज़ोर से चीख मारी, |आआअह्ह्ह्हह…| उसकी चुत बहुत तंग थी, और मेरा लौड़ा उसमें कसकर फँस गया था। मैंने धीरे-धीरे अपना लंड बाहर निकाला और फिर अंदर घुसाया। बबनी के मुँह से लगातार कराहें निकल रही थीं, और वो मुझे और गहराई तक अंदर खींच रही थी। मैंने अपनी गति बढ़ा दी और उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।


बबनी की चुत से रस बह रहा था, और मेरा लंड उसमें आसानी से फिसल रहा था। उसके स्तन हर धक्के पर उछल रहे थे, और मैं उन्हें मुँह से चूस रहा था। बबनी ने अपनी टाँगें मेरी कमर से लपेट लीं और मुझे और अंदर खींच लिया। मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर अपनी गति और तेज़ कर दी। बबनी चिल्ला रही थी, |आआह्ह्ह… अमित… और ज़ोर से… मुझे चोदो…| उसकी बातें सुनकर मैं पागल हो गया और मैंने उसे पूरी ताकत से चोदना शुरू कर दिया। मेरा लौड़ा उसकी चुत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था, और हमारे शरीर टकराने की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी। बबनी की चुत अब और भी तंग हो गई थी, और मैं उसे चुदाई करने में पूरी तरह से खो गया था।


इसके बाद मैंने बबनी को उल्टा कर दिया और उसे कुत्ते की तरह लिटा दिया। उसने अपनी कमर ऊपर उठाई और अपनी चुत मेरे सामने कर दी। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ा और अपने लंड को पीछे से उसकी चुत में डाल दिया। इस पोज़िशन में मेरा लौड़ा और भी गहराई तक जा रहा था। बबनी ज़ोर से चीख पड़ी, |आआअह्ह्ह्हह… अमित… बहुत गहरा…| मैंने उसके बालों को पकड़ा और अपनी गति तेज़ कर दी। उसकी पीठ पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं, और मैं उन्हें चाट रहा था। मेरा लंड उसकी चुत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था, और उसके नितंब मेरे अंडकोशों से टकरा रहे थे। मैंने उसके नितंबों को थप्पड़ मारा, और बबनी ने और भी ज़ोर से कराहते हुए कहा, |आआह्ह्ह… और मारो…|


मैंने बबनी के नितंबों को कई बार थप्पड़ मारा और अपनी गति और तेज़ कर दी। बबनी की चुत अब सिकुड़ रही थी, और वो अपने चरम पर पहुँच रही थी। उसके मुँह से निकल रहा था, |अमित… मैं… मैं आ रही हूँ…| मैंने उसकी चुत को कसकर पकड़ लिया और अपना लौड़ा उसमें पूरी तरह से घुसा दिया। बबनी का शरीर ज़ोर से काँपा, और वो चरम सुख पर पहुँच गई। उसकी चुत से रस की धारा फूट पड़ी, जो मेरे लंड को भिगो रही थी। मैंने उसे कसकर पकड़ रखा था, और उसके शरीर की कंपन मुझे भी महसूस हो रही थी। बबनी अब पूरी तरह से थक चुकी थी, पर उसके चेहरे पर गहरी संतुष्टि थी।


मैंने बबनी को अपनी गोद में बिठाया और उसे काउगर्ल पोज़िशन में चोदने लगा। वो मेरे ऊपर चढ़ी और मेरे लंड को अपनी चुत में डालकर ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे, और मैं उन्हें चूस रहा था। बबनी ने अपनी कमर को तेज़ी से हिलाया और मेरे लौड़े को अपनी चुत में घुमाया। उसके मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थीं, |आआह्ह्ह… अमित… तुम्हारा लौड़ा… बहुत अच्छा है…| मैंने उसके नितंबों को पकड़कर उसे और तेज़ी से उछाला। मेरा लंड उसकी चुत में गहराई तक जा रहा था, और वो हर धक्के पर ज़ोर से कराह रही थी। मैंने उसके कूल्हों को अपनी ओर खींचा, और बबनी मेरे लंड पर पूरी तरह से सवार हो गई।


बबनी के शरीर से पसीना टपक रहा था, और मैं उसे चाट रहा था। उसकी चुत से रस की धारा बह रही थी, जो मेरे लंड और अंडकोशों को भिगो रही थी। बबनी की हालत अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी। वो चुदक्कड़ की तरह मेरे ऊपर कूद रही थी, और उसके मुँह से लगातार निकल रहा था, |मुझे चोदो… अमित… मुझे चुदवाने दो…| मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके शरीर को अपने से चिपका लिया। फिर मैंने अपनी कमर को तेज़ी से ऊपर उठाया और उसके अंदर अपना लौड़ा पूरी तरह से घुसा दिया। बबनी ज़ोर से चीख पड़ी, |आआअह्ह्ह्हह… अमित…|


मैंने बबनी को फिर से नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़कर मिशनरी पोज़िशन में चोदना शुरू किया। मैंने उसकी टाँगों को उसके सिर की तरफ़ मोड़ दिया, जिससे उसकी चुत पूरी तरह से खुल गई। मेरा लंड उसके अंदर बहुत गहराई तक जा रहा था। बबनी की आँखें ऊपर की ओर घूम रही थीं, और उसका शरीर काँप रहा था। मैंने उसके होंठों को चूमा और अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, और मेरी पूरी ताकत उसके अंदर जा रही थी। उसके मुँह से निकल रही आवाज़ें मेरे लंड को और भी सख्त कर रही थीं। मैंने उसकी गर्दन पर चुंबन किए, उसके कान को चूसा, और उसे पूरी तरह से अपने अधीन कर लिया।


मैंने अपनी गति और तेज़ कर दी, और अपने लौड़े को पूरी तरह से बाहर निकालकर फिर से अंदर घुसाया। बबनी की चुत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया था, और अब वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी, |आआअह्ह्ह्हह… अमित… मैं… मैं…| मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर अपना लौड़ा उसके अंदर पूरी तरह से घुसा दिया और एक साथ कई बार तेज़ी से चोदा। बबनी का शरीर ऊपर की ओर उछला और वो चरम सुख पर पहुँच गई। उसकी चुत से रस की धारा फूट पड़ी, जो मेरे लंड को भिगो रही थी। उसके मुँह से निकल रही आवाज़ें अब थकान भरी थीं, पर उनमें गहरी संतुष्टि थी। मैंने उसके चेहरे को देखा, जो पूरी तरह से लाल हो चुका था, और उसकी आँखों में आँसू थे जो खुशी के थे।


मैं अब भी उसे चोद रहा था, और मेरा अपना चरम भी करीब था। मैंने उसे गले से लगा लिया और उसके कान में फुसफुसाया, |बबनी, मैं भी अब…| उसने अपनी टाँगों को मेरी कमर से कसकर लपेट लिया और कहा, |हाँ अमित… अंदर ही…| मैंने अपनी आखिरी ताकत से अपने लौड़े को उसकी चुत में पूरी तरह से घुसाया और ज़ोर से झड़ गया। मेरा गर्म वीर्य उसके अंदर तेज़ी से निकल रहा था, और मेरा शरीर काँप रहा था। मैंने उसे कसकर पकड़ रखा था, और बबनी भी मुझसे चिपकी हुई थी। हम दोनों एक-दूसरे की साँसों में खो गए, और मुझे लगा जैसे समय थम गया है। मेरा लंड अब भी उसके अंदर था, और वो धीरे-धीरे नरम हो रहा था।


कुछ देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और उसके पास ही लेट गया। बबनी ने मेरी छाती पर सिर रख दिया और मेरे बालों को सहलाने लगी। उसने कहा, |अमित, तुमने मुझे वो सुख दिया जो मुझे कभी नहीं मिला| मैंने मुस्कुराते हुए उसके माथे पर चुंबन किया और कहा, |बबनी, अब तुम मेरी रखैल हो| वो शरमा कर मेरी छाती से लिपट गई। हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे, और फिर उठकर कपड़े पहने। बबनी ने मुझे चाय पिलाई और हम फिर से बातें करने लगे। उस दिन के बाद से बबनी मुझसे मिलती रही, और हमारा रिश्ता और गहरा होता गया। ये मेरी सच्ची कहानी है, जिसे मैं हमेशा से दुनिया से छुपाना चाहता था, और आज मैंने उसे उजागर कर दिया।


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1 Comment


Amit Sharma
Amit Sharma
4 days ago

HII

DEAR BATAO GARAJE KAHA HAIN KIS NAAM SE HAIN MERI BIKE THEEK KARWANI HAIN ?😍

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