पति को उसकी हवसी बहन की चुत दिलवाई: Antarvasna Stories
मेरा नाम राधिका है और यह कहानी है मेरी ज़िंदगी की एक ऐसी सच्ची घटना की। आज मैं आपको अपनी आपबीती बता रही हूँ, जो शायद आपको अजीब लगे। यह कहानी एक बीबी की है, जिसने अपने पति की इच्छा को समझते हुए उसकी हवसी बहन की चुत उसे दिलवाई। सुनने में यह बहुत अजीब लग रहा होगा, लेकिन हकीकत इससे भी अजीब है। Antarvasna यानि अन्तर्वासना वह आग है जो हमारे अंदर सुलगती रहती है और एक दिन ज्वाला बनकर फूट पड़ती है। मेरी यह सच्ची कहानी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर मुरादाबाद से शुरू होती है, जहाँ मैं अपने पति अर्जुन और उसकी बड़ी बहन कामिनी के साथ रहती हूँ।
मेरी शादी अर्जुन से आज से लगभग 3 साल पहले हुई थी। अर्जुन एक अच्छे खाते-पीते परिवार से हैं और पेशे से एक इंजीनियर हैं। मैं खुद भी पढ़ी-लिखी हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती हूँ। हमारा जीवन बहुत अच्छे से चल रहा था। अर्जुन की बड़ी बहन कामिनी उससे सिर्फ दो साल बड़ी है, यानि इस समय वह 27 साल की है। कामिनी दीदी का कुछ साल पहले तलाक हो गया था और तभी से वह हमारे साथ ही रह रही हैं। कामिनी दीदी देखने में बेहद आकर्षक हैं, गोरी रंगत, घने काले लंबे बाल, सुडौल शरीर, और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो पुरुषों को सहज ही अपनी ओर खींचती है। उनका सिंगल रहना और खुले विचारों का होना अक्सर मुझे सोचने पर मजबूर कर देता था, पर मैंने कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
असल में बात तब शुरू हुई जब मैंने कुछ महीनों से गौर करना शुरू किया कि अर्जुन और कामिनी दीदी का आपसी व्यवहार आम भाई-बहन से थोड़ा ज़्यादा करीबी है। वे अक्सर एक साथ बैठकर बातें करते, एक-दूसरे को छेड़ते, मज़ाक करते, और कभी-कभी तो कामिनी दीदी अर्जुन को पकड़कर लड़ती-झगड़ती भी थीं, जिसमें उनका शरीर अर्जुन से रगड़ खाता रहता था। मैंने सोचा शायद भाई-बहन का प्यार ऐसा ही होता है। पर धीरे-धीरे मुझे कुछ ऐसी चीज़ें नज़र आने लगीं जो मुझे बेहद असहज करती थीं। कामिनी दीदी अक्सर छोटे और चुस्त कपड़े पहनती थीं, यहाँ तक कि रात के समय भी वह पतले नाइटी में ही घर में घूमती रहती थीं जिसमें से उनके उभरे हुए स्तन और पतली कमर साफ़ झलकते थे।
शुरुआत में मुझे लगता था कि शायद वह अपनी सुविधा के लिए ऐसे कपड़े पहनती होंगी, पर जल्द ही मेरा संदेह यकीन में बदल गया जब मैंने देखा कि वह जानबूझकर अर्जुन के सामने झुकती हैं, उसके सामने से गुजरते समय अपने वक्ष को उसकी बांहों से छुआती हैं, और मौका मिलने पर उसके करीब बैठ जाती हैं। अर्जुन भी उनकी इन हरकतों से पीछे नहीं हटता था। वह भी उन्हें ताकता रहता था, और कभी-कभी तो मैंने उसे कामिनी दीदी के शरीर को घूरते हुए भी पकड़ा। इससे मुझे बड़ी उलझन होती थी, लेकिन मैं चुप रहती थी क्योंकि मैं सोचती थी कि यह सब मेरा वहम भी हो सकता है।
एक दिन मैंने अपनी सहेली रूपा से इस बारे में हल्की सी बात की। रूपा ने मुझे बताया कि कुछ भाई-बहनों के बीच ऐसी नज़दीकियाँ कभी-कभी गलत राह पकड़ सकती हैं, और मुझे सतर्क रहना चाहिए। उसने मुझे सलाह दी कि मैं अपने पति से खुलकर बात करूँ। मैंने उसी शाम अर्जुन से बात करने का फैसला किया। रात को जब हम अपने कमरे में अकेले थे, मैंने अर्जुन से पूछा कि क्या उसे अपनी बहन कामिनी के साथ थोड़ी ज्यादा नजदीकी अच्छी लगती है। अर्जुन पहले तो हंसा और बोला कि मैं गलत समझ रही हूँ। पर जब मैंने ज़ोर दिया तो उसने कहा कि वह मुझसे बहुत प्यार करता है और उसके मन में अपनी बहन के लिए सिर्फ भाई वाला प्यार है।
मुझे उसकी बातों से पूरी तरह संतोष नहीं हुआ। अगले कुछ हफ्तों में मैंने और भी ध्यान से देखना शुरू किया। एक दिन शाम को अर्जुन सोफे पर बैठा हुआ था और कामिनी दीदी उसी सोफे पर उसके बिल्कुल करीब बैठकर उसे अपने दिन के किस्से सुना रही थी। मैं किचन से चाय लाने गई। जब मैं वापस आई तो मैंने देखा कि कामिनी दीदी का हाथ अर्जुन की जांघ पर रखा हुआ था और वह उसे बड़े प्यार से सहला रही थीं। अर्जुन ने मुझे आते देखा तो उसका चेहरा थोड़ा सा शर्मिंदा सा हो गया, लेकिन कामिनी दीदी ने बिल्कुल भी परवाह नहीं की और उसी तरह हाथ रखे हुए मुझे देखकर मुस्कुराई। मैं अंदर तक काँप गई।
उस रात मैंने अर्जुन से सख्ती से पूछताछ की। मैंने कहा कि मैं अब और अनदेखा नहीं कर सकती। वह घबरा गया और उसने कबूल किया कि कामिनी दीदी को उसके साथ कुछ ज्यादा ही लगाव है, और वह भी उसे अच्छी लगती है। उसने मुझे बताया कि कामिनी दीदी ने कई बार उससे कहा है कि वह उसे सिर्फ भाई नहीं बल्कि एक पुरुष के रूप में भी चाहती है। यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गई। मैंने अर्जुन से पूछा कि क्या उसने कभी उसके साथ गलत काम किया है। उसने कसम खाकर कहा कि अभी तक वह उसकी बहन के साथ कोई शारीरिक संबंध नहीं बनाया है, लेकिन उसे डर है कि कहीं वह कमजोर पड़कर गलत कदम न उठा ले।
यह सुनकर मेरा दिमाग घूम गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। एक तरफ मैं अपने पति से बेहद प्यार करती थी और उसे खोना नहीं चाहती थी, दूसरी तरफ उसकी अपनी बहन ही उसकी तरफ हवस भरी निगाहों से देखती थी। मैं रात भर सोचती रही कि आखिर इसका हल क्या हो सकता है। अगले दिन सुबह मैंने तय किया कि मैं खुद कामिनी दीदी से बात करूँगी। मैंने उन्हें अकेले में बुलाकर साफ़-साफ़ पूछा कि वह अर्जुन के साथ कैसा व्यवहार कर रही हैं। कामिनी दीदी ने कोई शर्म नहीं दिखाई। वह बोलीं कि वह अर्जुन को बचपन से ही सिर्फ भाई से बढ़कर मानती हैं, और अब जब वह तलाकशुदा हैं, तो उनके मन में उसके लिए और भी गहरी भावनाएँ उभर रही हैं।
मैं यह सुनकर हैरान रह गई। मैंने उनसे कहा कि यह गलत है, समाज में इसकी कोई जगह नहीं है। इस पर वह बोलीं कि प्यार में कुछ गलत-सही नहीं होता, और अगर मैं इतनी ही सच्ची बीबी हूँ तो मुझे अपने पति की खुशी के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने मुझसे कहा कि अर्जुन भी उन्हें चाहता है और अगर मैं बीच में न आऊँ तो वे दोनों एक-दूसरे के साथ खुश रह सकते हैं। मैं सन्न रह गई। मुझे लगा जैसे मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई हो। मैं उस दिन कुछ भी तय नहीं कर पाई और सीधे अपने कमरे में चली गई।
अगले कुछ दिन बहुत भारी गुज़रे। मैं अर्जुन से दूर-दूर रहने लगी। वह भी मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। कामिनी दीदी पहले की तरह ही अर्जुन के आसपास मंडराती रहती थीं। मैंने अर्जुन से पूछा कि आखिर वह क्या चाहता है। उसने मुझसे कहा कि वह मुझसे बहुत प्यार करता है, पर उसकी बहन की जिद और अपनी कमजोरी के आगे वह खुद को रोक नहीं पा रहा। उसने स्वीकार किया कि उसे भी कामिनी दीदी के प्रति एक अजीब सा खिंचाव महसूस होता है, जो शायद सिर्फ हवस है। वह मुझसे माफी माँग रहा था और कह रहा था कि वह खुद को बदलना चाहता है।
मैंने कई दिनों तक सोचा। मैंने अपनी दादी से सीखी बातों को याद किया कि कैसे रिश्तों में त्याग और समझदारी से काम लेना चाहिए। मैं यह सोचकर परेशान थी कि अगर मैंने अर्जुन को रोका तो वह मुझसे दूर हो जाएगा, और अगर नहीं रोका तो वह अपनी बहन के साथ गलत रिश्ता बना लेगा। फिर मुझे एक उपाय सूझा। मैंने सोचा कि क्यों न मैं खुद ही अर्जुन को उसकी बहन की चुत दिलवा दूँ, ताकि उसकी हवस शांत हो जाए और फिर वह उसे छोड़ दे। मैं जानती थी कि यह विचार गलत है, पर उस वक्त मुझे यही सबसे सही रास्ता लगा।
मैंने इस बारे में अर्जुन से बात की। पहले तो वह चौंका और बोला कि ऐसा नहीं करना चाहिए। लेकिन जब मैंने उसे समझाया कि मैं उसकी खुशी के लिए यह कर रही हूँ और चाहती हूँ कि वह एक बार अपनी बहन के साथ संतुष्ट होकर इस रिश्ते को भूल जाए, तो उसने धीरे-धीरे हामी भर ली। मैंने कामिनी दीदी से भी बात की। उन्होंने खुशी से मेरे प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से चाहती थीं कि मैं उन्हें रोकूँ नहीं बल्कि उनका साथ दूँ। अब मैंने एक ऐसा कदम उठाने की सोच ली थी जो हम तीनों की ज़िंदगी बदल देने वाला था।
यह तय हुआ कि अगले शनिवार की रात को मैं खुद अर्जुन को तैयार करके कामिनी दीदी के कमरे में भेजूँगी। मैंने सोचा कि मैं खुद भी वहीं रहूँगी ताकि चीजें नियंत्रण में रहें। यह सब सोचकर मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी थी, पर साथ ही एक अनजानी सी उत्तेजना भी महसूस हो रही थी। मैं खुद को समझा रही थी कि यह मेरी मजबूरी है, पर अंदर ही अंदर मैं भी इस अन्तर्वासना के दायरे में खिंचती जा रही थी। मैं जानती थी कि यह गलत है, लेकिन अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं था। मैंने ऊपर वाले से प्रार्थना की कि सब कुछ ठीक हो जाए।
शनिवार की शाम ढलते ही मैंने घर का माहौल हल्का करने के लिए अच्छे से खाना बनाया। हम तीनों ने साथ में खाना खाया और बातें कीं। कामिनी दीदी आज बेहद खुश थीं। उन्होंने एक गहरे लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके शरीर पर बेहद कामुक लग रही थी। उनके स्तन उभरे हुए थे और ब्लाउज़ थोड़ा कसा हुआ था। अर्जुन बार-बार उन्हें देख रहा था और मैं उसकी आँखों की चमक साफ पढ़ सकती थी। खाने के बाद मैंने खुद ही कहा कि आज मैं जल्दी सोना चाहती हूँ और कामिनी दीदी को अर्जुन के साथ बैठकर बातें करने को कहा। मैं जानबूझकर अपने कमरे में चली गई।
मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी, पर नींद मुझसे कोसों दूर थी। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। लगभग एक घंटे बाद मैं उठकर धीरे से कामिनी दीदी के कमरे की तरफ गई। दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था। मैंने अंदर झाँका तो देखा कि कामिनी दीदी अर्जुन के बिल्कुल करीब बैठी थीं और उसका हाथ अर्जुन के कंधे पर था। वे आपस में धीमी आवाज़ में कुछ बातें कर रहे थे। मैं साँस रोककर खड़ी रही। थोड़ी देर बाद कामिनी दीदी ने अपने होंठ अर्जुन के गाल पर रख दिए और उसे चूमने लगीं। अर्जुन ने पहले तो हिचकिचाहट दिखाई, पर फिर उसने भी उन्हें गले लगा लिया।
मैंने देखा कि कामिनी दीदी ने अर्जुन का चेहरा पकड़कर उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया। वे दोनों गहरी चुंबन में डूब गए। अर्जुन के हाथ कामिनी दीदी की कमर पर थे और वह उन्हें कसकर पकड़े हुए था। कामिनी दीदी के मुँह से हल्की सी आह निकली। मैं वहीं खड़ी यह सब देखती रही। मेरे शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई। मैं सोच नहीं पा रही थी कि मुझे उन्हें रोकना चाहिए या देखते रहना चाहिए। मैंने खुद को रोका और वहीं छुपकर देखती रही।
कामिनी दीदी ने अर्जुन को सीने से लगा लिया और धीरे-धीरे उसकी कमीज़ खोलने लगीं। अर्जुन ने भी उनके साथ सहयोग किया। कुछ ही पल में अर्जुन की कमीज़ उतर गई और उसका चौड़ा सीना नज़र आने लगा। कामिनी दीदी ने अपने होंठ उसकी छाती पर रखे और उसे चूमने लगीं। अर्जुन के मुँह से गहरी साँसें निकलने लगीं। मैं दरवाज़े की ओट से यह सब देख रही थी। मेरा मन कर रहा था कि मैं वहाँ से हट जाऊँ, पर मेरे पैर वहीं जमे हुए थे। मेरी अपनी साँसें भी तेज़ हो गई थीं।
इसके बाद कामिनी दीदी ने अर्जुन की पैंट की बेल्ट खोली और ज़िप नीचे खींच दी। अर्जुन का लंड उसकी पैंट के अंदर से उभर कर साफ दिखाई दे रहा था। कामिनी दीदी ने उसकी पैंट और अंडरवियर दोनों उतार दिए। अर्जुन का पूरा नग्न शरीर सामने था। कामिनी दीदी उसे देखकर मुस्कुराई और बोली, |अर्जुन, तुम्हारा लण्ड कितना सख्त है| अर्जुन ने शर्माते हुए कहा, |दीदी, यह तुम्हारी वजह से है| कामिनी दीदी ने अपना हाथ बढ़ाकर अर्जुन का लंड पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगीं। अर्जुन ने आँखें बंद कर लीं और आनंद से कराहने लगा।
मैं यह सब देखकर स्तब्ध थी, पर मेरे अंदर भी एक अजीब सी हलचल मच रही थी। मुझे लग रहा था कि मैं भी इस दृश्य का हिस्सा बन गई हूँ। कामिनी दीदी ने अर्जुन के लंड को झुककर अपने मुँह में ले लिया। अर्जुन के मुँह से ज़ोर की आह निकली। कामिनी दीदी उसे अपने मुँह से चूसने लगीं। उनकी जीभ उसके लण्ड के सिरे पर घूम रही थी। वह बड़े ही कुशल तरीके से उसे चूस रही थीं। अर्जुन की उँगलियाँ कामिनी दीदी के बालों में उलझ गई थीं और वह उन्हें पकड़कर अपनी ओर खींच रहा था। कामिनी दीदी के मुँह से चूसने की आवाज़ें आ रही थीं।
कुछ देर बाद कामिनी दीदी ने अर्जुन का लंड मुँह से निकाला और अपनी साड़ी का पल्लू हटाकर अपना ब्लाउज़ उतार दिया। उनके विशाल स्तन निकल आए, जो गोरे और मुलायम थे। उन्होंने अर्जुन से कहा, |मेरे स्तनों को चूसो, अर्जुन| अर्जुन ने तुरंत उनके स्तनों को अपने हाथों से पकड़ा और उनके निप्पलों को मुँह में लेकर चूसने लगा। कामिनी दीदी की कराह पूरे कमरे में गूँज रही थी। उन्होंने अर्जुन का सिर अपने सीने से दबा लिया। अर्जुन बारी-बारी से उनके दोनों स्तनों को चूस रहा था, काट रहा था, और जीभ से सहला रहा था। कामिनी दीदी की हालत बेचैन हो रही थी।
इसके बाद कामिनी दीदी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। अब वह सिर्फ कच्छी में थीं। उनकी जाँघें गोरी और मोटी थीं। उन्होंने अर्जुन का हाथ पकड़कर अपनी चुत पर रख दिया। अर्जुन ने उनकी कच्छी उतार दी। कामिनी दीदी की चुत साफ दिख रही थी। वह पहले से ही गीली थी। उनके बाल घने थे और चुत का रंग हल्का गुलाबी था। अर्जुन ने उनकी चुत को अपनी उँगलियों से सहलाना शुरू किया। कामिनी दीदी ने अपने पैर फैला दिए और उसके हाथों का आनंद लेने लगीं। उनके मुँह से लगातार आहें निकल रही थीं।
अर्जुन ने अपनी उँगलियाँ कामिनी दीदी की चुत के अंदर डालीं और उसे खोलने लगा। कामिनी दीदी कराह रही थीं, |अर्जुन, और अंदर, और तेज़| अर्जुन ने उनकी बात मानते हुए अपनी उँगलियों की गति तेज़ कर दी। कामिनी दीदी की चुत से पानी निकल रहा था। अर्जुन ने झुककर अपना मुँह उनकी चुत पर रख दिया और उसे चाटने लगा। कामिनी दीदी ज़ोर से चीख पड़ीं। उन्होंने अपने पैर अर्जुन के कंधों पर रख दिए। अर्जुन उनकी चुत को बड़ी लगन से चाट रहा था। उसकी जीभ उनकी चुत के भीतर जा रही थी और बाहर आ रही थी। कामिनी दीदी का शरीर काँप रहा था।
मैं दरवाज़े से यह सब देख रही थी। मेरी अपनी चुत में भी पानी छूट रहा था। मैं अनजाने में ही अपना हाथ अपनी चुत पर रखकर सहलाने लगी। यह पहली बार था जब मैं अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ इतने करीब देख रही थी, और वह औरत उसकी अपनी बहन थी। मुझे घृणा होनी चाहिए थी, पर हो नहीं रही थी। बल्कि मुझे इसमें एक विकृत सा आनंद आ रहा था। मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी।
अर्जुन ने अपना मुँह कामिनी दीदी की चुत से हटाया और उनके ऊपर आ गया। उसने अपना लंड उनकी चुत के द्वार पर रखा। कामिनी दीदी ने अपने हाथों से उसका लण्ड पकड़कर अपनी चुत में लगाया। अर्जुन ने धीरे-धीरे अपना लंड उनकी चुत के अंदर डालना शुरू किया। कामिनी दीदी ने गहरी साँस ली और उनके मुँह से आह निकली। अर्जुन ने एक ही झटके में अपना पूरा लंड उनकी चुत में भर दिया। कामिनी दीदी ज़ोर से चीखीं, |आआह्ह्ह, अर्जुन, बहुत बड़ा है तुम्हारा लौड़ा| अर्जुन ने उनके स्तनों को पकड़कर झोंके मारने शुरू कर दिए।
अर्जुन कामिनी दीदी को बुरी तरह चोद रहा था। उसकी हर झोंके के साथ चुत से चुदाई की गीली आवाज़ें आ रही थीं। कामिनी दीदी के मुँह से लगातार कराहें निकल रही थीं। उन्होंने अपने पैर अर्जुन की कमर से लपेट दिए थे। अर्जुन उन्हें और गहराई से चोद रहा था। मैं दरवाज़े से यह सब देख रही थी और अपनी चुत सहला रही थी। मेरे मुँह से भी हल्की सी आह निकल रही थी। मैंने अपनी साड़ी उठाकर अपनी चुत में उँगलियाँ डाल ली थीं।
अर्जुन ने कामिनी दीदी को सीधा लिटाकर उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और गहरे झोंके मारने लगा। कामिनी दीदी की आँखें आनंद से बंद थीं। वह अर्जुन का नाम लेकर कराह रही थीं। अर्जुन के शरीर से पसीना बह रहा था। वह लगातार कामिनी दीदी की चुत में अपना लंड घुसा रहा था और बाहर निकाल रहा था। कामिनी दीदी के स्तन उछल रहे थे और उनका पूरा शरीर झटके खा रहा था। मैंने देखा कि अर्जुन की गति बढ़ती जा रही थी।
इसके बाद अर्जुन ने कामिनी दीदी को उलटकर पीछे की तरफ कर दिया। कामिनी दीदी ने अपने घुटनों के बल बैठकर अपनी चुत अर्जुन की तरफ उठा दी। अर्जुन ने उनके कूल्हों को पकड़कर अपना लंड उनकी चुत में डाला और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। कामिनी दीदी ज़ोर से चिल्ला रही थीं। उनके मुँह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं। अर्जुन उनकी चुत को पीछे से ज़ोरदार झटके दे रहा था। मैं दरवाज़े से उनकी चुदाई का आनंद ले रही थी।
कुछ देर बाद अर्जुन ने कामिनी दीदी को बिस्तर से उतारकर खड़ा कर दिया और उन्हें दीवार से सटाकर उनकी एक टाँग उठाकर अपनी कमर से लगा ली। फिर उसने अपना लंड उनकी चुत में डालकर चोदना शुरू किया। कामिनी दीदी उसके कंधों से लिपट गईं और उसके साथ लय मिलाकर चुदवाती रहीं। अर्जुन के होंठ उनके स्तनों को चूस रहे थे। कामिनी दीदी की आहें तेज़ होती जा रही थीं। मैं समझ गई कि वह भी चरम के करीब है।
अर्जुन की गति और तेज़ हो गई। कामिनी दीदी चिल्ला उठीं, |अर्जुन, मैं आ रही हूँ, और ज़ोर से चोदो मुझे| अर्जुन ने उनकी बात मानते हुए अपनी पूरी ताकत से झोंके दिए। कामिनी दीदी का शरीर काँपने लगा और वह ज़ोर से चीखकर चरम पर पहुँच गईं। उनके शरीर में ऐंठन पैदा हो गई। अर्जुन ने कुछ और झटके मारे और फिर वह भी ज़ोर से कराहकर उनकी चुत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े।
मैं दरवाज़े से हटकर अपने कमरे में आ गई। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। मेरी चुत अभी भी गीली थी। मैंने अपनी साड़ी उतारी और बिस्तर पर लेट गई। मैं सोच रही थी कि मैंने यह क्या किया। मेरे पति ने मेरी इजाज़त से अपनी बहन को चोदा था। मैंने खुद उसे अपनी बहन की चुत दिलवाई थी। मुझे अफसोस भी हो रहा था और आनंद भी आ रहा था। मैंने तय किया कि अब मैं अर्जुन से बात करूँगी।
अगले दिन सुबह मैंने अर्जुन को अकेले में बुलाया और पूछा कि कैसा लगा। वह शर्मिंदा था पर उसने कहा कि अब उसकी हवस शांत हो गई है। मैंने उससे कहा कि यह सिर्फ एक बार की बात थी और अब हमें इस रिश्ते को यहीं खत्म कर देना चाहिए। अर्जुन ने मेरी बात मान ली। लेकिन कामिनी दीदी अब और ज्यादा आज़ाद हो गई थीं। वह अब खुलकर अर्जुन से मिलती थीं और मुझसे कहती थीं कि अब तो मैं खुद उन्हें मिला चुकी हूँ। मैं बड़ी उलझन में पड़ गई।
मैंने सोचा कि शायद अर्जुन को अब अपनी गलती का एहसास हो गया होगा। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। अर्जुन अब भी कामिनी दीदी को उसी नज़र से देखता था। कामिनी दीदी भी अब पहले से ज्यादा बेफिक्र होकर उसके साथ घूमती थीं। मैंने अर्जुन से पूछा कि क्या वह फिर से अपनी बहन के साथ संबंध बनाना चाहता है। उसने कहा कि वह मेरा फैसला मानेगा। मैंने उसे डाँटा और कहा कि अब वह अपनी बहन को भूल जाए।
लेकिन मेरे मन में भी एक जिज्ञासा सी घर कर गई थी। मैंने देखा था कि अर्जुन कामिनी दीदी को किस जुनून से चोद रहा था। क्या वह मुझे भी उतने ही जुनून से चोदता था? मैं इस बारे में सोचती रहती थी। एक दिन मैंने अर्जुन से पूछा कि क्या उसे कामिनी दीदी के साथ मुझसे ज्यादा आनंद आया। उसने पहले तो मना किया, पर फिर सच कहा कि उसके लिए वह एक अलग अनुभव था। इस बात ने मुझे जला दिया। मैंने सोचा कि अगर मैं उसे ऐसा आनंद नहीं दे सकती तो मैं भी किसी और से ले सकती हूँ।
मैंने तय किया कि अब मैं खुद भी इस खेल में शामिल होऊँगी। अब मैं कामिनी दीदी से जलती नहीं थी, बल्कि मैं भी चाहती थी कि मैं इस अन्तर्वासना का आनंद लूँ। मैंने अर्जुन से कहा कि अगर वह चाहता है तो वह कामिनी दीदी के साथ संबंध रख सकता है, पर अब मैं भी इसमें शामिल रहूँगी। अर्जुन चौंका। मैंने उसे बताया कि मैंने उन्हें देखा था और मुझे भी वह दृश्य उत्तेजित करता है। उसने मेरी बात सुनी और धीरे-धीरे मान गया।
अब हम तीनों का रिश्ता एक अजीब सी राह पर चल पड़ा। कामिनी दीदी मुझसे अब और खुलकर बातें करने लगीं। उन्होंने मुझे बताया कि वह अर्जुन को बचपन से ही चाहती हैं और अब उन्हें पाकर वह खुद को पूर्ण महसूस करती हैं। मैंने उनसे कहा कि मैं उन्हें अर्जुन से दूर नहीं करूँगी, पर उन्हें मुझे भी इस रिश्ते में शामिल करना होगा। वह मान गईं। अब हमारे बीच एक नया समीकरण बन गया था।
अगले शुक्रवार की रात को कामिनी दीदी ने हमें अपने कमरे में बुलाया। मैं और अर्जुन दोनों उनके कमरे में गए। कामिनी दीदी ने मुझे अपने पास बैठाया और अर्जुन से कहा कि आज वह हम दोनों को एक साथ खुश करेगा। मैं घबराई हुई थी, पर उत्तेजित भी थी। कामिनी दीदी ने अर्जुन को कहा कि वह पहले मुझे चूमे। अर्जुन ने मुझे अपनी बाँहों में लेकर मेरे होंठ चूमे। मैंने भी उसका साथ दिया। कामिनी दीदी हमें देखकर मुस्कुरा रही थीं।
कामिनी दीदी ने मेरी साड़ी का पल्लू हटाया और मेरा ब्लाउज़ खोल दिया। अर्जुन ने मेरे स्तनों को चूमा। मैंने उसकी ज़ुल्फें सहलाईं। कामिनी दीदी ने भी अपने कपड़े उतार दिए और अर्जुन के पीछे से उसे गले लगा लिया। अब अर्जुन मेरे साथ था और कामिनी दीदी उसके साथ। यह एक अजीब सा नज़ारा था। मैंने देखा कि कामिनी दीदी ने अर्जुन की पैंट उतार दी और उसके लंड को पकड़कर मेरी चुत की तरफ ले जाने लगीं।
अर्जुन ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी टाँगें फैला दीं। कामिनी दीदी ने मेरी चुत को सहलाया और अर्जुन से बोली, |अपनी बीबी को अच्छे से चोदो| अर्जुन ने अपना लण्ड मेरी चुत में डाला। मैं ज़ोर से आह भरकर रह गई। अर्जुन मुझे धीरे-धीरे चोदने लगा। कामिनी दीदी मेरे बगल में बैठकर मेरे स्तनों को सहला रही थीं। मेरे शरीर में जैसे आग लगी हुई थी। अर्जुन की हर झोंके के साथ मेरी चुत से रस बह रहा था।
कामिनी दीदी ने झुककर मेरी चुत के ऊपर वाले हिस्से को चाटना शुरू किया जबकि अर्जुन उसके अंदर लंड डालकर चोद रहा था। मैं दोनों के बीच घिरी हुई थी। मेरे मुँह से लगातार आहें निकल रही थीं। कामिनी दीदी की जीभ मेरी चुत पर घूम रही थी और अर्जुन का लंड अंदर घुस रहा था। यह मेरे लिए एक नया अनुभव था। मैं इतनी उत्तेजित पहले कभी नहीं हुई थी। मेरा शरीर काँप रहा था और मैं बार-बार चरम की ओर बढ़ रही थी।
अर्जुन ने अपनी गति तेज़ कर दी। मैं उसे घूर रही थी, वह मुझ पर पसीना बहाते हुए चढ़ा हुआ था। कामिनी दीदी मेरे स्तनों को चूस रही थीं। मैंने अर्जुन की पीठ पर नाखून गड़ा दिए। वह और ज़ोर से मुझे चोदने लगा। मेरी चुत से लगातार चुदाई की गीली आवाज़ें आ रही थीं। कामिनी दीदी ने मेरे कान में कहा, |राधिका, अब तुम समझ गई न कि मैं अर्जुन को क्यों चाहती हूँ| मैं सिर्फ कराह सकती थी।
अर्जुन ने मुझे भी कामिनी दीदी की तरह उलटकर पीछे से चोदा। मैंने अपने घुटनों पर बैठकर अपनी चुत उसकी तरफ उठाई। उसने मेरे कूल्हों को पकड़कर अपना लंड मेरी चुत में डाला और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। कामिनी दीदी मेरे सामने आकर बैठ गईं और मुझे चूमने लगीं। मैंने भी उनके होंठ चूसे। अब अर्जुन मुझे पीछे से चोद रहा था और मैं उसकी बहन को चूम रही थी। यह सब कितना विकृत और कितना सुखद था, यह मैं बता नहीं सकती।
इसके बाद कामिनी दीदी ने अर्जुन से कहा कि अब वह उसे चोदे। अर्जुन ने मुझे छोड़कर कामिनी दीदी को नीचे लिटाया और उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखकर अपना लंड उनकी चुत में डाल दिया। कामिनी दीदी ज़ोर से चिल्लाई। मैं उनके पास ही लेटी हुई थी और अर्जुन को अपनी बहन को चोदते हुए देख रही थी। मेरी चुत अभी भी गीली थी। मैंने अपनी उँगलियाँ अपनी चुत में डालीं और खुद को सहलाने लगी। कामिनी दीदी का चेहरा आनंद से विकृत हो रहा था।
अर्जुन ने कामिनी दीदी को खड़ा करके दीवार से सटाया और उनकी एक टाँग उठाकर चोदने लगा। कामिनी दीदी उसके कंधों से लिपटी थीं। मैं बिस्तर से उठकर उनके पास गई और अर्जुन की पीठ पर अपने स्तन रगड़ने लगी। उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराया। मैंने कामिनी दीदी के स्तनों को पकड़कर सहलाया। कामिनी दीदी ने मेरी उँगलियाँ अपने मुँह में ले लीं। अर्जुन उन्हें लगातार चोद रहा था।
अब अर्जुन ने कामिनी दीदी को बिस्तर पर बैठाया और उनकी चुत में अपना लंड डालकर उन्हें उछालने लगा। कामिनी दीदी उसकी गोद में बैठी थीं और खुद ही ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं अर्जुन के पीछे बैठकर उसके कंधों को दबा रही थी। कामिनी दीदी की आहें तेज़ हो रही थीं। अर्जुन उनके स्तनों को चूस रहा था। अचानक कामिनी दीदी ज़ोर से चीखीं और उनके शरीर में झटके लगने लगे। वह चरम पर पहुँच गईं। अर्जुन ने उन्हें पकड़ रखा था।
कामिनी दीदी के बाद अर्जुन फिर मुझ पर चढ़ गया। मैंने उसे अपने अंदर समेट लिया। उसने मुझे ज़ोर से चोदा। मैं उसका साथ देती रही। वह मेरे कान में फुसफुसाया, |राधिका, तुम दोनों मेरी ज़िंदगी हो| मैंने उसे चूम लिया। कुछ ही झटकों में वह मेरे अंदर अपना वीर्य छोड़कर ढेर हो गया। मैं भी चरम पर पहुँच गई। हम तीनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।
इसके बाद हमारा यह सिलसिला अक्सर चलने लगा। मैं, अर्जुन और कामिनी दीदी अब एक साथ ही सोते थे। अर्जुन बारी-बारी से हम दोनों को चोदता था। कामिनी दीदी अब मेरी अच्छी सहेली भी बन गईं थीं। हम तीनों की यह Antarvasna अब किसी से छुपी नहीं रहती थी, बल्कि हम खुलकर इसे जीते थे।
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