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पति ने मुजे ट्रेन के टॉयलेट में चुदवाया : Sex Story

हेलो दोस्तों, मेरा नाम चांदनी सिंह है। मैं आगरा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 25 साल है, मेरा रंग गोरा है, मेरा फिगर 34B-30-36 है और मेरी हाइट 5.4 है।


मेरी शादी को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, सिर्फ 1 साल 4 महीने हुए हैं। मैं अपने शादीशुदा जीवन से बहुत खुश हूँ। वैसे तो मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं। मेरे ससुराल वाले भी अच्छे हैं। ससुराल में ज्यादा लोग नहीं हैं – सास हैं, ससुर जी हैं, एक छोटी ननद है और मेरे पति हैं।


जो बात मैं आप लोगों के साथ शेयर करने जा रही हूँ, वो बस कुछ महीने पहले की है, करीब 6 महीने पहले की। मेरी शादी को तभी ज्यादा दिन नहीं हुए थे। शादी के बाद हम कहीं घूमने नहीं गए थे, तो मैं अपने पति से बार-बार कहती रहती थी कि आप मुझे कहीं घूमने नहीं ले गए।


कई बार कहने के बाद एक दिन पति ने मुझे कहा, “ठीक है, चलेंगे। बहुत जल्दी घूमने चलेंगे। वैसे कहाँ जाना है तुझे?” मैंने फट से कह दिया, “मुझे शिमला या मनाली जाना है।” उन्होंने भी हाँ कर दी और कहा, “मैं टिकट का इंतजाम करता हूँ, फिर चलेंगे।” मैंने भी हँसकर कहा, “ओके।”


फिर करीब एक हफ्ते बाद पति ने मुझे बताया कि चांदनी, तीन दिन बाद चलते हैं घूमने। उनकी बात सुनकर मैं बहुत खुश हो गई। फिर वो दिन आ गया। हम घर से निकल गए शिमला जाने के लिए। आगरा से चंडीगढ़ के लिए हमारी ट्रेन थी और ट्रेन शाम की थी, शाम 7 बजे की। थर्ड एसी में हम ट्रेन में आकर अपनी सीट पर बैठ गए। मैं पति के सामने बैठ गई और हम ऐसे ही बातें करते हुए चल रहे थे।


हमारी साइड वाली सीट पर एक बुड्ढा बैठा था, उसकी उम्र करीब 45 साल रही होगी। जब से हम ट्रेन में चढ़े थे, वो बीच-बीच में मुझे देखे जा रहा था। ये मैंने भी नोटिस किया था और मेरे पति ने भी। पर न तो मेरे पति ने मुझे कुछ कहा, न मैंने पति को कुछ कहा। हम बातें करते हुए जा रहे थे।


ऐसे-ऐसे करके समय भी निकल रहा था और धीरे-धीरे करके 9 बज गए। बाद में हमने खाना खाया। उसके बाद मैंने पति से कहा, “आप बीच वाली सीट पर सो जाना, मैं ऊपर वाली सीट पर सोऊँगी।” पति ने भी कहा, “हाँ ओके, चल जाएगा।” और मैं ऊपर वाली सीट पर चली गई।


उस समय मैंने रेड कलर का फिटिंग वाला सलवार सूट पहना हुआ था, जिसमें से मेरे स्तन बहुत अच्छे से नजर आ रहे थे। सूट के ऊपर से साइज अच्छे से पता लग रहा था। शायद वो बुड्ढा मेरे स्तनों को देखकर पागल हो गया था।


मेरी सीट पर जाने के बाद मैं अपने फोन में लगी हुई थी, ऐसे ही टाइम पास कर रही थी। कुछ समय बाद मैंने नीचे देखा तो मेरे पति और वो बुड्ढा आपस में बातें कर रहे थे। मैंने इतना नहीं सोचा और फिर फोन में टाइम पास करने लगी, इंस्टाग्राम पर रील्स देख रही थी।


फिर करीब आधे घंटे से ऊपर हो गया होगा कि मेरे पति का मुझे व्हाट्सएप पर मैसेज आया।


एकलव्य: चांदनी, मैं एक बात कहूँ, क्या तुझे गुस्सा तो नहीं आएगा ना?


मैं: हाँ, कहो ना, क्या हो गया? और ऐसे क्यों कह रहे हो कि गुस्सा तो नहीं आएगा?


एकलव्य: अरे, मैंने इसलिए पहले ऐसा कहा क्योंकि बात कुछ ऐसी ही है।


मैं: ऐसी क्या बात हो गई? मेरे पति देव जी, अब बताओगे भी?


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एकलव्य: अरे चांदनी, बात ऐसी है कि हमारे बाजू वाली सीट पर जो ये अंकल थे ना, उनसे मैं ऐसे ही बातें कर रहा था और धीरे-धीरे हमारी दोस्ती हो गई है।


मैं: हाँ तो उसमें क्या हुआ? और मैं इसमें क्यों गुस्सा करूँगी पति देव जी?


एकलव्य: अरे, पहले पूरी बात तो सुन लेती।


मैं: हाँ तो कहो ना, क्या बात है?


एकलव्य: बात ये है कि ये अंकल कह रहे हैं कि जब से हम ट्रेन में चढ़े हैं ना, जब से उन्होंने तुझे देखा है ना, तू उन्हें बहुत पसंद आई है।


मैं: अरे, ये क्या बकवास कर रहे हो? मैं पसंद आई हूँ का मतलब क्या है आपका?


एकलव्य: बता तो रहा हूँ, सुन तो पूरी बात।


मैं: मैं सीट से नीचे देखते हुए बाद में मैसेज के, हाँ बोलो, क्या बात बता रहे हो, बताओ।


एकलव्य: बात ये है कि अंकल ना तेरे साथ वो करने की बात कर रहा है।


मैं: (गुस्से में) वो क्या? मतलब आपका? मैं समझी नहीं।


एकलव्य: वो मतलब तुझे चोदना चाहता है।


इतना सुनते ही पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया और मैं अपने मन में सोचने लगी कि मेरे पति पागल हो गए हैं लगता है, उनका दिमाग ठिकाने पर नहीं रहा है। कैसे बात कर रहे हैं। बाद में मैंने उन्हें मैसेज किया।


मैं: आप पागल तो नहीं हो गए हैं? ऐसे कौन बात करता है अपनी वाइफ के बारे में? और आपसे उसने जब ऐसी बात की तो आपको उसको मारा नहीं गया क्या? आप कितने वैसे इंसान हो? ना मैंने सोचा था कि कोई आपकी वाइफ के बारे में ऐसी बात कहेगा। आपको कुछ समझ भी आ रहा है क्या?


एकलव्य: सॉरी चांदनी, पहले मेरी बात तो सुन तू।


मैं: क्या सुनूँ? इतना सुन लिया आपने, अब और कुछ सुनाना बाकी है? आपने मुझे क्या समझा है? रंडी क्या? जो किसी से चुदवाने की बात कर रहे हो आप?


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एकलव्य: मैंने उसको खुद सामने से नहीं कहा कि मेरी वाइफ को चोद लो। उसने मुझे बात ही ऐसी की कि मुझे तुझे ऐसी बात करनी पड़ी है।


मैं: ऐसी कैसे बात? मतलब मैं समझी नहीं।


एकलव्य: बात ऐसी थी कि हम दोनों ऐसे ही बात कर रहे थे। बात करते-करते तेरी बात छिड़ गई तो अंकल ने मुझे कहा कि मैं तुझे अच्छे से चोद नहीं पाता हूँ। मैंने सुनकर कहा कि ऐसा कैसे कह रहे हैं? मैं तो अच्छे से चोदता हूँ अपनी वाइफ को। उसने कहा, “नहीं, तुम अच्छे से नहीं चोदते।” मैंने उससे पूछा, “ऐसा कैसे कह सकते हैं आप?” तो उसने बताया कि अगर आप अच्छे से उसको चोदते तो अभी वो इतनी प्यासी नहीं लगती लंड के लिए।


मैंने कहा, “आप ऐसा कह सकते हैं?” फिर उसने कहा, “आज तक आपने अपनी वाइफ की चूत चाटी है क्या?” मैंने मना कर दिया, “नहीं चाटी है।” उसने कहा, “बस यही पकड़े गए ना कि वो खुश है कि नहीं।” उसने कहा, “आज के डेट में जब तक आप चोदने से पहले उसकी चूत को चाट के गीली नहीं करोगे तो लड़की को चुदवाने में मजा नहीं आता ना, वो लाइफ में खुश रह सकती है।”


उनका इतना बड़ा मैसेज पढ़कर और ऐसी बात पढ़कर मैं अपने मन में कुछ अजीब सा सोचने लगी कि शायद ये अंकल कह तो सही रहा है क्योंकि मैंने पोर्न में हमेशा देखा था कि कैसे लड़कियाँ चूत चटवाते समय खुशी महसूस करती हैं। मेरे भी मन में कई बार पोर्न देखते समय ऐसा ख्याल आता था कि कोई मेरी चूत चाटे और चूत चाट-चाट के मेरा पानी निकलने के बाद मुझे चोदे।


मैं: आपको उसने ऐसी बात कही, मैं मानती हूँ वो अपने जगह सही होगा, पर उसका मतलब तो ये नहीं ना कि मैं उससे अपनी चुदाई करवा लूँ। और वो ऐसी बात कर रहा है तो ऐसा काम तो आप भी मेरे साथ कर सकते हैं ना? किसी और से क्यों मुझे चुदवाने के लिए कह रहे हैं?


एकलव्य: किसी और से मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैंने आज तक किसी की चूत नहीं चाटी है, ना ही मुझे आता है अच्छे से चूत चाटना। उसी लिए मैंने सोचा कि एक बार मैं तेरी चूत उससे चटवाके, उसके साथ चुदवाके देखना चाहता हूँ कि कैसे खुश होगी। बाद में तो हमेशा मैं ही किया करूँगा। चांदनी मेरी रानी, मेरे लिए एक बार मान ले, फिर कभी मैं ऐसी बात नहीं करूँगा लाइफ में।


जब उनका ऐसा मैसेज आया तो मैं सोचने लगी कि क्या मेरे पति सही कह रहे हैं? क्या मुझे उनकी बात मान लेनी चाहिए? मेरे बहुत सोचने के बाद मैंने उन्हें मैसेज किया।


मैं: अच्छा सुनो।


एकलव्य: हाँ हाँ चांदनी मेरी जान, बोल ना।


मैं: देखो, बात चूत चटवाने की खुशी देखने की है ना, तो मैं उससे अपनी चूत चटवा सकती हूँ पर चुदूँगी नहीं।


एकलव्य: अच्छा, ऐसा क्या मेरी चांदनी?


मैं: हाँ जी।


एकलव्य: 10 मिनट रुक, मैं मैसेज करूँगा जान।


और मैंने चोरी-चुपके आँखें नीचे करके देखा तो वो दोनों कुछ आपस में बातें कर रहे थे पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या बातें कर रहे हैं। पर वो दोनों खुश हो रहे थे मन ही मन बहुत। मैं सोचने लगी कि आज मेरे पति को हो क्या गया है और ये बुड्ढा मेरे पति से उतना लंबा-चौड़ा है, मैं इससे कैसे चुदवाने के लिए हाँ कह दूँ।


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मैं ये सब बातें सोच ही रही थी कि मेरे पति ने मुझे मैसेज किया।


एकलव्य: अच्छा चांदनी सुन, मेरी एक बात तू अपनी चूत चटवाने रेडी है ना?


मैं: हाँ हाँ हाँ, मैं रेडी हूँ आपके खातिर अपनी चूत चटवाने, खुश अब।


एकलव्य: देख, अगर तू चूत चटवाने से खुश होती है और मजा आता है तो क्या अंकल से चुदवा लेगी क्या? मेरे खातिर प्लीज। मैं अच्छे से खुशी देखना चाहता हूँ तुझे।


मैं: अरे अब ये कौन सी बात हुई? आपके खातिर मैंने चूत चटवाने हाँ किया है, अब ये कौन सी शर्त है आपकी? आप कैसे बात कर रहे हैं?


एकलव्य: चांदनी, मैं तुझे फोर्स नहीं कर रहा हूँ पर अगर तुझे अंकल ने खुश कर दिया चूत चाट के और तुझे मजा आया तो चुदवाने के लिए कह रहा हूँ।


मैं उस बात सोचते हुए मन में सोची कि चांदनी, जब तू अपनी चूत चटवाने हाँ कह दी है तो अगर सच में उस बुड्ढे से तुझे मजा आया तो चुदवाने में क्या जाएगा? इतना सोचने के बाद मैंने उन्हें मैसेज किया।


मैं: हाँ चलो ओके, मैं मानने रेडी हूँ आपके बात पर। मेरा मन हुआ तो हाँ, कोई जोर जबरदस्ती या ब्लैकमेल नहीं करना ओके।


एकलव्य: हाँ हाँ पक्का जानू।


मैं: पर ये सब होगा कहाँ और कैसे यहाँ?


एकलव्य: जान, हम दोनों हैं ना, सब होगा। तू उसका टेंशन ना ले।


मैं: ओके।


फिर वो दोनों आपस में बातें करने लगे हँस-हँस के। मैं ऊपर से देखे जा रही थी और मन ही मन ये भी सोच रही थी कि चांदनी, आज तू कहाँ फँस गई है और कैसा पति है तेरा जो तुझे किसी और के लंड से चुदवाना चाहता है।


ऐसे मैं अपने मन में सब सोच ही रही थी कि मैंने अपने फोन में टाइम देखा तो उस समय 2 बज रहे थे।


एकलव्य: चांदनी मेरी जान, मेरी अब बात ध्यान से सुनना तू ओके।


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मैं: हाँ बोलो भी, क्या कहना है आपको?


एकलव्य: अपनी सीट से नीचे आ जा और मैं तुझे इशारे से जो बाथरूम बताऊँगा उसमें जाना और बाथरूम अंदर से लॉक मत करना ओके। हम एक-एक करके अंदर आएंगे बाथरूम में।


मैं: ओके, पर आपको ये सब सेफ तो लग रहा है ना? कोई देख-धाक तो नहीं लेगा ना और कुछ परेशानी तो नहीं हो जाएगी ना?


एकलव्य: नहीं होगी कुछ भी परेशानी और अभी इतनी रात हो गई है, सब सोए हैं। तू आ जा नीचे बस।


उतनी बात मैसेज में पढ़के मैं नीचे आ गई और मेरे पति ने मुझे इशारे से बाथरूम बताया। मैं उसमें चली गई और अंदर से लॉक नहीं किया। कुछ 2 मिनट बाद पहले मेरे पति आए अंदर।


मैं: अरे आपने ये कहाँ फँसा लिया मुझे? आप पागल तो नहीं हो गए हो ना? ये सब ठीक तो है ना?


वो धीरे से बोलते हुए एकलव्य: हाँ हाँ सब ठीक है और अब इतना मत सोचो यार मेरी जान तू।


इतनी बात कर ही रहे थे कि उतने में वो बुड्ढा भी आ गया अंदर और उसने अंदर आते ही बाथरूम लॉक कर लिया और मेरी तरफ स्माइल देते हुए


बुड्ढा: हेलो बेटी, डरो मत, तुम एंजॉय करोगी, मेरा वादा है।


उसके मुँह से ‘बेटी’ शब्द सुनते ही मैंने उसको कहा मैं: प्लीज आप मुझे बेटी ना कहो, मैं आपकी बेटी नहीं हूँ। आप मुझे चांदनी कहो बस।


मेरी ये बात सुनते ही उसने बुड्ढा: सॉरी चांदनी, आप गुस्सा ना करो। बस अपनी चूत चटवाने का मजा लो मेरे से।


उसके मुँह से मेरे लिए चूत चटवाने की बात सुनते ही मैंने अपनी आँखें नीचे कर लीं।


फिर उसने मेरे पति को हाथ से साइड में करते हुए मेरे पास आगे आया और उसने मेरे चेहरे पे हाथ रख के मेरा चेहरा ऊपर करते हुए स्माइल दी और कहता है बुड्ढा: चांदनी नाम है, वैसा ही चाँद सा चेहरा है चाँदनी आपका।


ये बात सुनते ही उसके मुझे दिल ने अजीब सी खुशी मिली और मैंने उसको भी स्माइल देते हुए मैं: थैंक यू अंकल जी।


मेरे मुँह से ‘अंकल’ शब्द सुनते उसने कहा, “चांदनी तुम मुझे अंकल मत कहो, मेरा नाम है अहमद। मुझे अहमद कह के बुला सकती हो आप।” मैं: ओके अहमद जी।


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फिर उसने मुझे अपनी सलवार खोलने को कहा। मैंने भी देर न करते हुए अपनी सलवार उतार के साइड में रख ली कहीं गंदी न हो या गीली न हो और मैं बस नीचे से पैंटी में आ गई। मैंने उस समय येलो कलर की पैंटी पहन रखी थी।


अहमद: क्या बात है चांदनी, क्या मस्त तेरी चूत पैंटी के ऊपर से ही फूली हुई लग रही है।


इतना कहते ही उसने मेरी पैंटी उतारना शुरू किया और पैंटी घुटनों तक कर दी और उसने मेरी चूत पे किस करते हुए कहता है अहमद: क्या चूत है तेरी चांदनी, आज तो इसको जी भर के चाटूँगा और चोदूँगा।


‘चोदूँगा’ नाम सुनते ही मैं अपने मन में सोची, लगता है आज बुड्ढा पक्का चोद के ही मानेगा। और मैंने अपने पति की तरफ देखा। उसने स्माइल देते हुए कहा कि एंजॉय करो आज जानू।


और उतने में अहमद ने मेरी टाँगें थोड़ी खोलने के लिए कहा। मैंने भी अपनी टाँगें खोल लीं और अहमद घुटनों के भरो बैठा मेरी चूत को चाटने लगा। आह्ह्ह्ह्ह… मैं बता नहीं सकती हूँ मेरे दिल में क्या हो रहा था उस समय। मेरी आँखें बंद हो गई थीं और मैं उससे अपनी चूत चटवाने का मजा ले रही थी। उसने धीरे-धीरे मेरी चूत को पूरा गीला कर लिया था और अपनी जीभ चूत पे घुमाए जा रहा था, चाटे जा रहा था। मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मैं जन्नत के सैर कर रही हूँ।


धीरे-धीरे मेरी चूत चाटते-चाटते उसने मेरी चूत में अपनी एक उँगली करते हुए मुझसे पूछा अहमद: कैसा लग रहा है चांदनी तुझे?


पहले तो मैंने कुछ जवाब नहीं दिया उसको। और वो मेरी चूत चाटने लगा फिर। और वो ऐसे चूत चाट रहा था जैसे पोर्न में चाहते हैं चूत को। और उसने चाटते-चाटते मेरी चूत में अपनी दूसरी उँगली डालते हुए पूछा अहमद: कैसा लग रहा है चांदनी जान तुझे?


जब उसने फिर पूछा तो पता नहीं क्यों मेरे मुँह से निकल गया मैं: अहमद पूछो मत कुछ, बस चाटते जाओ जाओ मेरी चूत को। आज तुम खा जाओ, ये बस आज तुम्हारे लिए है। मेरी चूत को चाटो।


अहमद मेरी चूत को चाटते जा रहा था। मेरी चूत में उँगलियों के साथ-साथ अपनी जीभ भी डाल रहा था। मेरी तो साँसें तेज़ चल रही थीं और ट्रेन अपनी रफ्तार में चल रही थी। और फिर अहमद ने मेरे पति को इशारा करते हुए कहा अहमद: इसको ऊपर से भी नंगी कर दो तो पूरी नंगी ये मस्त लगेगी।


इतना सुनते ही मेरा पति मेरे पास आया और मेरे कुर्ते को ऊपर करते हुए उसने उतार दिया और मेरी ब्रा खोल दी और मेरे स्तनों को दबाने लगा।


अब एक तरफ मेरी चूत की चटाई हो रही थी, दूसरी तरफ स्तनों की दबाई हो रही थी। मैं तो कौन सी दुनिया में थी पता नहीं चल रहा था।


फिर अहमद खड़ा हुआ तो मैंने उसको पूछा मैं: क्या हुआ? चाटो ना।


इतना सुनते ही अहमद ने स्माइल देते हुए कहा अहमद: अरे 1 मिनट रुक जा रंडी, आज चाटूँगा भी न चोदूँगा भी तुझे।


‘रंडी’ शब्द सुनते ही मुझे थोड़ा अजीब सा लगा अपने बारे में। मैं कुछ सोच ही रही थी कि अहमद ने अपना पजामा उतार के नीचे किया और अपना अंडरवियर भी नीचे किया और उसका लंड बाहर आया। मैंने देखा, मेरी तो आँखें फट्टी की फट्टी रह गईं और मैं कुछ सोचते हुए अहमद को कही मैं: अहमद जी, ये क्या है? लंड है कि खंभा आपका?


वो मेरी तरफ स्माइल देते हुए कहता है अहमद: अरे रंडी, आज तो तुझे ये अपने चूत में लेना है। इससे आज तेरी ऐसी चुदाई करूँगा कि ना तो आज तक किसी ने की होगी ना कोई कर पाएगा, ये वादा है मेरा।


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अहमद: आज तक किसी से चुदाई है पति के अलावा? सच बताना, मुझे छुपाना मत।


इतनी बात पूछते फिर वो घुटनों के भरो बैठ गया और उसने मेरी चूत पे पहले बहुत सारा थूका लगाया और बहुत सारा थूका जिससे मेरी चूत गीली हो जाए। और फिर पूछा उसने अहमद: बता ना रंडी, अपने पति के अलावा कभी किसी से चुदाई है क्या? शादी से पहले या बाद में।


जो सच था मैं उसको बताते हुए मैं: नहीं अहमद, आज तक मैं बस इनसे ही चुदाई हूँ और किसी से नहीं चुदाई हूँ।


इतनी मेरी बात सुनते ही उसने मेरी चूत को फिर चाटना शुरू कर दिया और वो मेरी चूत चाट ही रहा था। और मैंने साइड में देखा तो मेरे पति ने भी अपना पैंट नीचे कर के अपना लंड बाहर निकाल के अपने हाथ में लेके सहला रहा था। मैं उसको स्माइल दी और अपनी चूत चटवाने का मजा ले रही थी। वो मेरी चूत को चाटते जा रहा था। कभी एक उँगली चूत में डाल के चाटता, कभी दो उँगलियाँ मेरी चूत में डाल के अपनी जीभ भी मेरी चूत के अंदर डाल देता। उससे मैं अपनी चूत चटवाए जा रही थी और कब मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया पता ही नहीं चला। और मैं अपनी आँखें बंद करके उसके सिर पे हाथ रख के अपनी चूत में दबाए जा रही थी। वो भी मेरा पानी पी रहा था जो निकल रहा था।


उसने मेरी चूत से निकलता हुआ पानी अपनी जीभ से चाट-चाट के साफ कर लिया और बाद में वो खड़ा हुआ और उसका लंड पूरा तना हुआ था। पहले तो मैं अपने मन में ही सोच थी कि कितना बड़ा लंड है उसका, जैसे पोर्न में होते हैं वैसा है लंड इसका। साइज 7-8 इंच का पर मुझे से रहा नहीं गया और मैं उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ते हुए पूछी मैं: अहमद आपका लंड कितना मस्त है? क्या साइज होगा आपके लंड का?


उसने मुझे बताते हुए कहा अहमद: अरे रंडी, मेरे लंड का साइज है 8.7। बता, इससे चुदना पसंद करेगी तू? मौका है तुझे आज। बाद में कभी ऐसा लंड नहीं मिलेगा तुझे। बोल, चुदेगी मेरे लंड से?


इतनी बात उसके मुँह से सुनते ही पहले मैं मन में सोचने लगी, क्या करूँ, क्या जवाब दूँ इसको।


अहमद: अरे रंडी चुदवा के मजा ले ले। ऐसे लंड के बाद कभी ऐसे लंड से चुदवाने का मौका नहीं मिलेगा। ये देख, तेरे पति का लंड कैसा है? पतला छोटा सा है बस। इससे ही चुदती रहना। बाद में मेरे जैसा लंड मिलेगा नहीं रंडी तुझे।


मैं उसके बस बातें सुनने जा रही थी। वो मुझे रंडी-रंडी कहे जा रहा था। मैं सोचती कुछ कि पता नहीं मेरे मन ने ही कहा मैं: हाँ अहमद, मैं तुमसे चुदवाने रेडी हूँ। वैसे भी मेरे पति की इच्छा है शायद मुझे चुदवाते देखने की। तो हाँ, मैं चुदूँगी आपसे। बन जाती हूँ आज आपकी रंडी।


इतना सुनते ही अहमद ने कुछ नहीं सोचा और मुझे लिप्स किस करना शुरू कर दिया और मेरे होंठों को चूस रहा था। उसने मेरा एक हाथ पकड़ के अपने लंड पे रखते हुए उसको सहलाने का इशारा किया। मैं उसके लंड को सहलाए जा रही थी।


वो मेरे होंठों को चूस रहा था, मैं भी उसका साथ दे रही थी और मेरा पति अपने लंड को हाथ में लेके सहला रहा था, मेरे स्तनों को बीच-बीच में दबा रहा था। अहमद का लंड मेरे हाथ में था। फिर अहमद ने मुझे छोड़ते हुए लंड की तरफ देखते हुए बोला अहमद: ले रंडी, अब इसको चूस नीचे बैठ के।


मैं उसके बात सुनते ही घुटनों के भरो बैठ गई और उसके लंड को देखने लगी अच्छे से, अपने हाथ में लेके और सहला ही रही थी कि अहमद कहता है अहमद: रंडी देख क्या रही है? उसको तेरा ही है ये। ले लंड मुँह में।


और उसने मेरे सिर को पकड़ते हुए पीछे से अपने लंड के तरफ दबाव देते हुए मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया (इससे पहले मैंने कभी किसी का लंड मुँह में नहीं लिया था। मेरे पति का और मेरा सेक्स जो हुआ था आज तक बस लंड-चूत वाला ही हुआ था) और मैं उसके लंड को चूसने लगी, अपने मुँह में लेके। उसका इतना मोटा था कि अच्छे से मेरे मुँह में नहीं आ रहा था और लंबा तो इतना था कि आधा से कम ही मेरे मुँह में आया था। मैं उसी को चूसने लगी थी जैसे मुझे आ रहा था चूसने उसका लंड। और वो भी बड़े प्यार से मेरे से अपना लंड चुसवा रहा था।


ऐसे चूसते-चूसते उसने मेरे मुँह में और लंड डालना चाहा। मेरी आँखों में से आँसू आने लगे और मुँह में से थूक बाहर आने लगा पर वो मेरे मुँह में जितना हो सकता था अपना लंड डाल रहा था और मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी और उसके लंड को बस मुँह में लेके चूसने की कोशिश में थी।


कुछ 10 मिनट लंड चुसाया उसने मेरे से। बाद में उसने लंड निकाला मेरे मुँह से बाहर तो मुझे राहत की साँस मिली।


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फिर अहमद ने मुझे खड़ी किया और मुझे कहता है अहमद: रंडी अपनी एक टाँग इस पॉट पे रख (इंग्लिश टॉयलेट का पॉट था)।


मैंने वैसा ही किया। फिर अहमद नीचे बैठा और उसने मेरी चूत पे बहुत सारा थूक लगाया और थूका जिससे मेरी चूत गीली हो गई। और उसने खड़े होते हुए अपने लंड पे भी थूक लगाया बहुत सारा और मेरे पति को कहा कि अहमद: एकलव्य, तेरी बीवी के मेरे लंड से पहली चुदाई है। उसके चीख निकलेगी तो तू उसके मुँह को बंद करना जब मैं तुझे कहूँगा। जब अपना लंड डालूँगा उसकी चूत में, अपनी रंडी बनाऊँगा इसको अभी।


एकलव्य: अहमद भाई, थोड़ा आराम से करना। ट्रेन के बाथरूम है, कहीं किसी को पता न लग जाए, लेने के देने पड़ जाएंगे।


मैं अपने मन में डरते हुए कही मैं: अहमद जी प्लीज, जो भी करो आराम से करो। एकलव्य सही कह रहे हैं।


अहमद: अरे रंडी तू टेंशन मत ले, कुछ नहीं होगा तुझे। ना किसी को पता लगेगा। बस 4-5 मिनट तुझे पेन होगा, बाद में तू खुद कहेगी डालो जितना डालना है।


फिर अहमद ने अपना लंड मेरी चूत पे सेट करते हुए मेरे पति को बोला, “जोर से इसके मुँह को दबाना, छोड़ना मत ओके।” एकलव्य ने भी मेरी तरफ देखते हुए हाँ में सिर हिलाया और मेरा मुँह बंद कर लिया। उधर उसने मेरी चूत में धक्का दिया तो उसका लंड स्लिप हो गया, चूत में नहीं गया।


अहमद: अभी भी रंडी तेरी चूत टाइट है? इतना थूक लगाने के बाद भी।


फिर उसने लंड सेट किया और मुझे पकड़ते हुए अच्छे से उसने फिर धक्का मारा। उसका थोड़ा लंड अंदर गया। मेरी आँखें फट्टी की फट्टी रह गईं। मैंने चीखना चाहा पर मेरे पति ने मेरा मुँह बंद कर रखा था। मैं मछली की तरह छटपटाने लगी पर अहमद ने भी पक्की झकड़ रखी थी और उसने देर न करते हुए और धक्का देते हुए मेरी चूत में पूरा लंड डाल दिया। मैं उसको हाथ में इशारा करके कह रही थी निकालो, मैं मर जाऊँगी, निकालो। मेरी आँखों में से आँसू आने लगे थे पर मेरे पे ना पति को रहम आ रहा था ना उसको आ रहा था। और वो फिर धीरे-धीरे धक्के दे रहा था। कुछ ऐसे करने के बाद मुझे आराम मिल रहा था।


फिर कुछ समय बाद मुझे भी जब मजा आने लगा तो अहमद ने पति को कहा, “अब छोड़ दे।” पति के छोड़ने के बाद अहमद मेरी अच्छे से चुदाई कर रहा था।


मेरे मुँह से आआ आआ आऊह्ह्ह्ह की आवाजें निकल रही थीं। अहमद: रंडी तुझे मजा आ रहा है ना? मैं: हाँ आ रहा है, चोदो मुझे। रंडी हूँ मैं आपकी अहमद।


कुछ ऐसे उसने मेरी 20 मिनट चुदाई की। उस बीच में 2 बार पानी छोड़ चुकी थी और कुछ देर में उसने भी मेरी चूत में ही पानी छोड़ दिया और वो हट गया। उतने में फिर मेरा पति आया आगे और मेरी चूत में उसने भी लंड डाल दिया, अहमद के पानी के साथ ही। और उसने 3-4 मिनट चुदाई के धक्के मारे। कुछ पता नहीं चल रहा था। वो भी पानी छोड़ दिया।


और वो भी अलग हो गया। अहमद: सच बोलना रंडी, तुझे मजा आया ना? मैं: हाँ आया, बहुत आया। आपकी रंडी बन के। एकलव्य: और चुदवाना है क्या तुझे चांदनी?


मैं कुछ कहती कि उतने में अहमद बोल पड़ा अहमद: एकलव्य अब रहने दे, ट्रेन है। वैसे भी बहुत टाइम हो गया है। अब इसको फिर कभी चोदूँगा, तू चाहेगा तो मेरा नंबर ले लेना तू।


मैं: अभी 4 ही बज रहे हैं, ज्यादा कहाँ टाइम हुआ है? मुझे तो आपका लंड और एक बार चूसना है आपकी रंडी बन के। अहमद: अच्छा मेरी रंडी, उतना पसंद आया है क्या मेरा लंड तुझे? तो एक काम करते हैं। तेरी ऊपर वाली सीट है ना, तुझे वहीं चुसवाऊँगा अपना लंड, चल…


फिर हम बाथरूम से बाहर आ गए एक-एक करके अपने-अपने कपड़े पहन के…


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आगे मैं बताऊँगी कि कैसे अहमद से मैं सीट पे आके चूदी और उसका लंड मुँह में लेके चूसी।


ये मेरी सच्ची कहानी है। आप लोगों को भरोसा हो तो मुझे मेल करना और बताना मैंने सही किया कि गलत किया और कैसी लगी आप लोगों को मेरी चुदाई दर्द भरी।

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