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फेसबुक यार ने मेरी आगे पीछे बजा दी - Antarvasna Sex Stories

हेलो दोस्तों। मेरा नाम प्रिया है। मैं अपने पति रोहन और दो बच्चों के साथ दिल्ली में रहती हूं। दिल्ली की हलचल भरी जिंदगी में जहां ट्रैफिक की आवाजें और बाजार की चहल-पहल हर समय गूंजती रहती है मैं अपने परिवार के साथ एक सुंदर से घर में रहती हूं जहां मेरे दिन बच्चों की देखभाल घर के कामों और कभी-कभी अपनी खुद की छोटी-मोटी इच्छाओं के बीच बीतते हैं। मैं 31 साल की शादीशुदा औरत हूं। मैं 5’5 की गोरी हूं मेरी त्वचा नरम और चमकदार है जो सूरज की किरणों में मोती की तरह जगमगाती है।


मेरे 38 के बूब्स भरे-पूरे और आकर्षक हैं जो मेरे शरीर को स्त्रीत्व से भर देते हैं 36 के पिछवाड़ा गोल और सुडौल है जो चलते समय लहराता सा महसूस होता है मेरे बाल लंबे घने और सुंदर हैं जो हवा में लहराते हैं और मेरा चेहरा आकर्षक नयन-नक्शों वाला है जिस पर मुस्कान खिलने पर सब मुग्ध हो जाते हैं। मैं अपनी इस सुंदरता की मालकिन हूं और इसे संजोकर रखती हूं। मेरे दो बच्चे हैं जो मेरी जिंदगी की खुशियां हैं उनकी हंसी और खेल मेरे दिन को रोशन करते हैं। मेरे पति रोहन हैं जो मुझसे 7 साल बड़े हैं उनकी उम्र के साथ उनकी परिपक्वता और देखभाल बढ़ गई है। हमारी शादी को 10 साल हो चुके हैं और इन सालों में हमने साथ मिलकर बहुत कुछ देखा और अनुभव किया है।


हमारी जिंदगी में सब ठीक चल रहा है। मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं उनका प्यार गहरा और स्थिर है जो हर छोटी बात में दिखता है। हम दोनों एक दूसरे से इज्जत और प्यार से रहते हैं कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर हंसते हैं और एक दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखते हैं। मेरे पति रोहन बहुत ओपन माइंडेड मर्द हैं। हम दोनों अपनी सब इच्छाएं शेयर करते हैं बिना किसी झिझक के एक दूसरे से खुलकर बात करते हैं जो हमारे रिश्ते को मजबूत बनाता है। अब बात है कुछ महीने पहले की।


मेरे पति काम में बहुत बिजी रहने लगे थे ऑफिस की मीटिंग्स डेडलाइन्स और प्रेशर की वजह से वह घर आते-आते थके हुए होते थे। काम की टेंशन से और बढ़ती उम्र के कारण अब हमारे बीच वैसे फिजिकल रिलेशन नहीं बन पा रहा था काफी दिनों से रातें अकेली और ठंडी सी लगने लगी थीं शरीर में एक तरह की खालीपन महसूस होता था लेकिन मैं चुपचाप सह लेती थी। पर प्यार और इज्जत में कोई कमी नहीं थी हमारा भावनात्मक जुड़ाव पहले की तरह ही मजबूत था।


मैंने रोहन से इस बारे में बात की दिल में हिचकिचाहट थी लेकिन उनकी ओपन माइंडेड प्रकृति को जानते हुए मैंने खुलकर कहा। जैसे कि रोहन बहुत ओपन माइंडेड हैं तो उन्होंने मुझे सुझाव दिया कि मैं किसी से दोस्ती कर लूं जिसके साथ मैं अपना समय बिता सकूं कुछ नया अनुभव कर सकूं।


उनका सुझाव सुनकर मैं हैरान थी लेकिन उनकी समझदारी ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। पर आज के जमाने में लोगों का पता नहीं होता कि कौन कैसे है किसके इरादे क्या हैं इस बात का डर मुझे हमेशा सताता था। काफी दिनों तक इस बारे में सोचते रही रातों को बिस्तर पर लेटे-लेटे सोचती कि क्या करना चाहिए मन में उथल-पुथल मची रहती। फिर अपने फेसबुक पर आई हुई फ्रेंड रिक्वेस्ट देखी स्क्रोल करते हुए एक प्रोफाइल आकर्षित कर गया।


एक लड़का जिसका नाम ध्रुव था उम्र उसकी 27 थी मुझे 3-4 साल छोटा पर उसकी प्रोफाइल मुझे पसंद आ गई उसकी तस्वीरों में उसका आत्मविश्वास झलकता था। ध्रुव एक आईटी कंपनी में मैनेजर था रहने वाला उत्तर प्रदेश का था उसकी कहानी और बैकग्राउंड रोचक लगता था। पर काम के लिए चेन्नई में था वहां की व्यस्त जिंदगी में भी वह समय निकालकर बात करता था। उसकी हाइट 5’10 गोरा एथलेटिक बॉडी क्यूट सा चेहरा देखकर लगता था कि वह फिटनेस का ख्याल रखता है उसके मसल्स हल्के-हल्के उभरे हुए थे। उसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट मैंने एक्सेप्ट कर ली उंगली हल्के से स्क्रीन पर दबाते हुए दिल में एक अजीब सी उत्तेजना हुई।


अब हम रोजाना बात किया करते थे फेसबुक पर मैसेजेस का इंतजार रहने लगा था। उसकी बातें अच्छी लगती थीं वो भी मेरी सुंदरता और बॉडी की तारीफ करता रहता है जैसे मेरे बालों की नरमी मेरी आंखों की गहराई मेरी बॉडी के कर्व्स की प्रशंसा में शब्दों का इस्तेमाल करता जो मुझे अंदर तक छू जाते थे। मुझे बहुत अच्छा लगता था लंबे समय बाद किसी की तरफ से इतनी सराहना मिलने से मन में एक ताजगी सी आ जाती थी चेहरे पर मुस्कान खिल जाती और शरीर में गर्माहट महसूस होती।


बहुत दिनों तक ऐसे ही बात करते हुए हमारी बातचीत धीरे-धीरे गहरी होती गई। फरवरी का महीना आने वाला था ठंड अभी बाकी थी लेकिन हवा में वसंत की महक आने लगी थी। उसके घर में शादी थी। तो वह अपने घर जा रहा था तो उसने मुझे मिलने के लिए पूछा। क्योंकि वो फ्लाइट से दिल्ली आने वाला था और एक हफ्ता घर पर जाने वाला था। मन तो मेरा भी बहुत था पर डर और शर्म भी आ रही थी कि कैसे मिल लूं क्या कहूं क्या होगा हजार सवाल मन में घूम रहे थे। पर मन तो मेरा भी बहुत था इच्छा दबा नहीं पा रही थी।


तो मैंने भी हां कर दी मैसेज टाइप करते हुए हाथ कांप रहे थे। अब ध्रुव अपने घर की शादी अटेंड करके मुझे फेसबुक पर मैसेज किया मिलने के लिए। मुझे बहुत धड़कन हो रही थी पर मैंने हां कर दी सीने में जोर-जोर से धड़कन सुनाई दे रही थी। उसने अपना नंबर दे दिया। अब हम साकेत के सिलेक्ट सिटी वॉक मॉल में 14 तारीख को मिलने के लिए राजी हो गए मॉल की चमक-दमक और भीड़ का ख्याल आकर और नर्वस हो जाती थी।


मैंने रोहन को ये बातें बता दीं। रोहन ने भी हामी भर दी और पैसे देकर मुझे अपना ख्याल रखने को बोला।


दिन के 1 बजे हम मॉल में मिल गए। उस पल साकेत के सिलेक्ट सिटी वॉक मॉल की चमकदार रोशनीयों और लोगों की हलचल भरी भीड़ के बीच मेरे दिल की धड़कनें इतनी तेज हो गई थीं कि मुझे लगा जैसे पूरा शरीर कंप रहा हो। उसको देखकर मुझे पेट में अजीब सी गुदगुदाहट होने लगी जैसे हजारों तितलियां एक साथ उड़ान भर रही हों और मेरी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं। ध्रुव ने ब्लू जींस व्हाइट टी शर्ट पहनी हुई थी जो उसके कसे हुए एथलेटिक शरीर पर बिल्कुल परफेक्ट फिट बैठ रही थी उसके चौड़े कंधों पर टी शर्ट तनी हुई थी और जींस उसकी मजबूत जांघों को हल्के से दबाती हुई दिख रही थी।


5’10 की हाइट गोरा कसा हुआ शरीर जैसे कि किसी क्रिकेटर का हो उसकी त्वचा सूरज की रोशनी में चमक रही थी और उसके चेहरे पर एक आकर्षक मुस्कान थी जो मुझे पूरी तरह खींच ले गई। बहुत ही प्रेजेंटेबल लग रहा था उसकी खुशबू हल्की सी लकड़ी और मसाले वाली आ रही थी जो पास आते ही मेरे नथुनों में भर गई। मैंने भी ब्लू टाइट जींस और ब्लैक स्लीवलेस टॉप पहन रखा था जो मेरे 38 इंच के भरे हुए बूब्स को और भी उभारकर दिखा रहा था नीचे हाई हील पहन रखी थी जिससे मेरी कमर पतली और चूतड़ और भी गोल नजर आ रहे थे।


वो भी मुझे देखकर हक्का बक्का रह गया उसकी निगाहें मेरे चेहरे से नीचे मेरे बूब्स पर और फिर मेरे टाइट चूतड़ पर घूम रही थीं और उसके होंठ थोड़े खुले रह गए थे। मेरे बूब्स पैडेड ब्रा में और बड़े लग रहे थे मेरे चूतड़ लाइट ब्लू जींस में जैसे कि फट के बाहर आने को हो रहे थे गोल मोटे और नरम नितंबों की पूरी आकृति साफ उभरी हुई थी जो चलते समय हल्के से हिल रहे थे।


अब हम दोनों ने एक दूसरे को हाथ मिलाकर मॉल में घूमने गए फिर थोड़ी देर में लंच करने भी गए जहां हमने खूब बातें कीं और हंसे मेरे हाथ उसके हाथ में थे और उसकी उंगलियां मेरी हथेली को हल्के से दबा रही थीं। जब भी उसको मौका मिलता मेरे हाथ पकड़ लेता कभी मुझे गले लगा लेता पर पूरे वक्त मुझे ही देखता रहा उसकी आंखों में स्पष्ट इच्छा और प्रशंसा झलक रही थी जो मुझे अंदर तक गर्म कर रही थी।


मैं भी शर्मा कर लाल हो रही थी मेरे गाल गर्म हो रहे थे और मेरी सांसें थोड़ी अनियमित हो गई थीं। मैंने सोचा था कि ऐसे कुछ भी नहीं करूंगी जिसे मुझे बाद में अजीब लगे इसलिए काफी संभाल रही थी खुद को पर ध्रुव इतना आकर्षक था कि मेरी नजरें भी नहीं हट रही थीं उससे उसकी हर हरकत मुझे और ज्यादा खींच रही थी।


अब हमें घूमते और बात करते हुए काफी टाइम हो गया था हमे शाम के 6 बजने वाले थे मॉल की रोशनी अब और चमक रही थी और बाहर धुंधला अंधेरा फैलने लगा था। मैंने कहा अब हमें चलना चाहिए वो भी मान गया और मुझे मेट्रो स्टेशन की तरफ ले कर चला उसका हाथ मेरी कमर पर हल्का सा टिका हुआ था। उसको गाजियाबाद जाना था और मुझे भी ब्लू लाइन लेनी थी।


अब मेट्रो में फेस्टिवल की वजह से बहुत भीड़ थी लोग एक दूसरे को धकेल रहे थे मेट्रो के अंदर भी भीड़ थी पर ध्रुव ने मुझे संभाल रखा था अपनी मजबूत बाहों में मुझे अपनी छाती से चिपका लिया था। हम काफी करीब आ गए थे उसका लंड मेरे गांड़ में टच हो रहा था मैं उसके सख्त गर्म और मोटे लंड की पूरी लंबाई और मोटाई को अपनी जींस के ऊपर से महसूस कर रही थी जो मेरे नरम चूतड़ों के बीच दब रहा था और हर झटके के साथ हल्के से रगड़ खा रहा था।


मेरे बूब्स भी आगे वाले लोगों में दब रहे थे मेरी निप्पल्स सख्त होकर ब्रा के कपड़ों से टकरा रहे थे और हर दबाव के साथ एक मीठी सी सिहरन मेरी रीढ़ में दौड़ रही थी। राजीव चौक तक यही हालत थी पूरी यात्रा भर मैं उसकी बाहों की गर्माहट और उसके शरीर की कठोरता महसूस करती रही। मुझे अजीब से मजे आ रहे थे ध्रुव की बाहों में मेरे शरीर में गर्मी फैल रही थी और नीचे मेरी चूत में हल्की सी नमी महसूस हो रही थी जो मेरी पैंटी को गीला कर रही थी। फिर राजीव चौक मेट्रो आ गया और हम सब लोग उतर गए हम दोनों एक साइड आ गए भीड़ थोड़ी कम हुई तो मैंने राहत की सांस ली।


भीड़ में मैं थक गई थी तो आराम करने लगी मेरी टांगें थोड़ी कांप रही थीं। ध्रुव ने पूछा कि मैं ठीक हूं उसकी आवाज में चिंता और प्यार था। मेरे लिए पानी ले आया और रिलैक्स करवाया मुझे मेरे शोल्डर दबा रहा था उसके मजबूत उंगलियां मेरी मांसपेशियों को गहरी मालिश दे रही थीं जो मेरे पूरे शरीर में सुकून भर रही थीं। मुझे बहुत सुकून मिल रहा था और उस पर प्यार भी आ रहा था मेरी आंखें बंद हो गई थीं और मैं उसके स्पर्श का आनंद ले रही थी।


अब वो जाने के लिए बोलने लगा हम दोनों साइड में आकर जोरदार गले मिले। 2 मिनट तक। अब मेरा मन नहीं मान रहा था अब कि उसको जाने दूं इतने दिनों बाद ऐसा अच्छा फील हो रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और लिपलॉक किस किया बहुत जोर से। उसने मेरे होंठ और जीभ खा ली उसके गर्म होंठ मेरे होंठों को पूरी ताकत से चूस रहे थे उसकी गर्म और नम जीभ मेरी जीभ से उलझकर घूम रही थी लार का मीठा स्वाद मुंह में भर रहा था और वह क्या मजा आ रहा था मेरी सांसें फूल रही थीं।


उसने अपना एक हाथ मेरे बालों को पकड़ रखा था और दूसरे से मेरे जींस के ऊपर से मेरे चूतड़ सहला रहा था मेरे मोटे नितंबों को जोर जोर से दबा और मसल रहा था जिससे मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ रही थी। अब हम दोनों से रुका नहीं गया और हम दोनों बाहर आ गए और सीपी के आसपास होटल रूम सर्च करने लगे पर सभी बुक थे क्योंकि आज वेलेंटाइन डे था।


फिर हमें एक होटल का दलाल मिल गया जो पहाड़गंज इलाके में अपना होटल बता रहा था। उस दलाल की आंखों में चालाकी भरी मुस्कान थी। वह हमें ऊपर से नीचे तक देख रहा था जैसे हमारी जल्दबाजी को भांप लिया हो। अब हमको तो आग लगी हुई थी तो हमने हां कर दी। हम उसके ऑटो में बैठ गए।


ऑटो की तेज रफ्तार और उछाल भरी सड़कों पर हम दोनों एक दूसरे से सटकर बैठे थे। ध्रुव का हाथ मेरी जांघ पर था। मैं उसके कंधे का सहारा ले रही थी। हर झटके के साथ उसकी उंगलियां मेरी त्वचा को हल्के से दबा रही थीं। एरिया ज्यादा अच्छा नहीं था पर होटल काफी शानदार लग रहा था।


बाहर से देखने में आधुनिक और साफ-सुथरा। ध्रुव ने उसको पैसे दिए। मैं थोड़े पीछे आ गई थी पर उनकी बात सुन सकती थी। वो बोला साहब की कुछ लाना हो तो बता देना और हंसने लगा। उसकी हंसी में छिपा इशारा साफ था कि वह जानता है हम क्या करने वाले हैं।


मैंने भी रोहन को फोन करके सारी बात बता दी थी। मैंने कहा आज रात लेट हो जाऊंगी शायद कल सुबह आऊंगी घर। मेरी आवाज में थोड़ी कांपाहट थी। उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा बस ठीक है कहकर फोन रख दिया। अब हम दोनों होटल में गए।


कमरा मिल गया। अब रात के 8:30 हो गए थे। हम काफी थक गए थे लेकिन हमारे शरीरों में उत्तेजना की आग धधक रही थी। कमरे में मैं आगे जा रही थी। अब ध्रुव ने कमरा बंद किया और पीछे से मुझे पकड़ लिया।


उसके लंड पैंट के ऊपर से मुझे चुभ रहा था। मैं उसके सख्त और मोटे लंड की पूरी गर्मी और कठोरता को अपने नितंबों पर महसूस कर रही थी। उसने मेरे बूब्स हल्के हल्के दबा कर मुझे लिपलॉक किस किया। उसने मेरी गर्दन पर चूमा और मेरी गर्दन खाने लगा। उसके गर्म होंठ मेरी नरम गर्दन पर लगते ही मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।


मेरी सांसें तेज हो गईं। मेरा रोमांच हालत ही बुरा हो रहा था। मुझसे भी रुका नहीं जा रहा था। अब उसने मेरे टॉप उतार दिया। अब मैं अपनी पैडेड व्हाइट ब्रा में उसके सामने थी।


मेरे गोरे मोटे बूब्स देखकर वो पागल सा हो गया। उसने उन्हें दबाने और चूसने लगा। उसने ब्रा के कप को नीचे खींचा और मेरी सख्त निप्पल्स को मुंह में ले लिया। वो जोर-जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ हर निप्पल को घुमाती और चबाती जा रही थी।


फिर मेरी पीठ भी खाने लगा। मेरे बाल शॉर्ट थे पेट से भी थोड़े ऊपर पर घने काले बाल। अब उसने मेरे जींस उतार दिए। मेरे 36 के गोरे चूतड़ लाइट पिंक पैंटी के ऊपर से कहर ढा रहे थे। उससे रहा नहीं गया।


उसने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरे गांड़ और योनि चाटने लगा। उसकी गर्म जीभ पैंटी के कपड़े पर से मेरी गांड़ की दरार में घूम रही थी। फिर मेरी चूत की फूली हुई लिप्स को चूस रही थी। मेरी पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने कहा ध्रुव क्या हुआ कंट्रोल क्यों नहीं कर पा रहे हो।


वो बोला दिन से आपके चूतड़ देख कर पगला हो रहा था अब नहीं होता कंट्रोल। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। अब उसने मेरी पैंटी उतार दी। उसने मुझे सोफे पर घोड़ी बना कर मेरे गांड़ खाने लगा। उसने दोनों हाथों से मेरे मोटे नितंबों को फैलाया।


उसकी जीभ मेरी गांड़ की गुलाबी छेद पर घुमाने लगा फिर चूसने लगा। आह क्या ही मजे आ रहे थे। जन्नत नसीब हो गए थे जैसे आज मुझे। अब उसने मुझे पीठ के बल लेटा दिया। उसने मेरी टांगें चौड़ी कीं।


उसने अपनी जीभ मेरी चूत की फट में डाल दी। वो ऊपर नीचे चाटने लगा। मेरी क्लिटोरिस को चूसने लगा। मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ। मैं झड़ गई।


मेरे शरीर में तेज कंपकंपी आई। मैं जोर से कांपते हुए अपने रस से उसका मुंह भिगो दिया। इतने दिनों बाद ऐसे हालात हुए थे।


अब वो खड़ा हुआ और अपने पैंट नीचे करके और टीशर्ट उतार दी अब वो अपने कच्चे में ही था। उसकी छाती चौड़ी और पेट पर हल्की लकीरें दिख रही थीं। उसकी त्वचा गोरी और चिकनी थी जो कमरे की हल्की रोशनी में चमक रही थी। मैं उसे देखकर ही सांस रोक ले रही थी।


क्या ही बॉडी थी उसकी मुझे तो देखते ही शर्म आने लगी। उसके कच्चे के ऊपर से उसका लंड दिखा मैं तो घबरा गई। बाप रे इतना बड़ा। मुझसे रहा नहीं जा रहा था।


मैंने कच्चा नीचे किया उसका तो 8 इंच का गोरा मोटा लंड मेरे सामने था। उसकी टोपी गुलाबी और चमकदार थी। नसें उभरी हुई थीं और पूरी लंबाई सीधी खड़ी थी। मैंने खुद को रोक नहीं पाई और नीचे बैठ कर पहले उसके लंड को सहलाया और खेला।


मेरी नरम उंगलियां उसके मोटे शाफ्ट को ऊपर नीचे घुमा रही थीं। फिर उसके लंड की टोपी को चाटने लगी। मेरी गर्म जीभ उसकी टोपी के छेद पर घूम रही थी। फिर अब कंट्रोल नहीं हुआ तो मुंह में ले कर अच्छे से चूसने लगी।


मैंने अपना मुंह चौड़ा करके आधा लंड अंदर लिया। मेरे होंठ उसके शाफ्ट को कसकर दबा रहे थे। मैं जोर जोर से सकिंग कर रही थी। उम्म्म क्या ही स्वाद था उम्म्म गजब।


उसका हल्का नमकीन और गर्म स्वाद मेरे मुंह में भर गया था। 15 मिनट चूसने के बाद वो सोफे पर मुझे बैठा दिया। उसने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरे ऊपर आकर अपना लंड मेरे मुंह में देना लगा। इतना बड़ा लंड सीधा मेरे गले तक जा रहा था मैं मना करने लगी पर वह नहीं माना।


वो मेरे मुंह को पूरी ताकत से चोद रहा था। हर धक्के के साथ उसका लंड मेरी गला तक पहुंच रहा था। मेरी आंखों से पानी आ रहा था पर मजा भी बहुत आ रहा था। अगले 10 मिनट मेरे मुंह की चुदाई करता रहा।


अब उसने अपना गाढ़ा वीर्य मेरे मुंह में निकाल दिया। गर्म और मोटी धार मेरे गले में उतर रही थी। मैं उसको धक्का मारकर वॉशरूम में गई और थूक दिया। पहले अजीब लगा पर 1 मिनट बाद बहुत अच्छा लगा तो फिर बाथरूम से बाहर आई।


वो नंगा ही सोफे पर बैठा था और मुझे देख रहा था। उसकी गोरी एथलेटिक बॉडी पूरी तरह नंगी थी। उसकी छाती चौड़ी थी और पेट पर हल्की मसल लकीरें दिख रही थीं। उसका 8 इंच का मोटा लंड अभी भी आधा सख्त था और हल्के से हिल रहा था।


मैं शर्मा गई और बेड पर चादर ओढ़ कर बैठ गई। मेरे गाल लाल हो गए थे। मैं बस ब्रा में थी और ध्रुव नंगा। अब वो मेरे पास आकर बैठ गया उसका लंड अभी भी खड़ा था।


उसने मुझे बेड पर लिटा कर मुझे प्यार करना शुरू किया। मैं भी अब गरम होने लगी। उसने मेरी ब्रा खोल दी। मेरे 38 इंच के भरे हुए गोरे बूब्स बाहर आ गए।


उसने उन्हें दोनों हाथों से जोर से दबाया और पीने लगा। वो बोल रहा था प्रिया जी आपके जैसे बूब्स किसी के नहीं। और ना ही आपके गांड़ और चूत जैसे स्वाद कहीं और नहीं। वो बूब्स दबा दबा के जोर जोर से चूस रहा था।


मेरी सख्त निप्पल्स उसके गर्म मुंह में थीं। उसकी जीभ उन्हें घुमा रही थी और हल्के से काट रही थी। मुझे बहुत मजे आ रहे थे। मेरी सांसें तेज हो रही थीं।


वो अब मेरी चूत के ऊपर लंड रख दिया। मैंने कहा बिना कंडोम के नहीं। फिर उसने अपनी जींस के पॉकेट से कंडोम निकाला। मैं हैरान होकर पूछी ध्रुव ये कब लिया।


तो वह बोला जब आप घर पर बात कर रही थीं तभी। मैं घबरा रही थी इतना बड़ा लंड कैसे लूंगी। पर इतने में ही उसका लंड मेरी चूत में घुस गया। आह्ह्ह्ह इतने दर्द हुए मैं चिल्ला पड़ी।


आह्ह्ह्ह ध्रुव रुको। पर वह कहां रुकने वाला था। वो बुरे तरह से मेरी चूत पेल रहा था। हर धक्के के साथ उसका मोटा लंड मेरी चूत को पूरी तरह फैला रहा था।


मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को कसकर दबा रही थीं। आह अब मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। 40 मिनट पेलने के बाद वो झड़ गया। उसने अपना लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा कंडोम आधा वीर्य से भरा पड़ा है।


उसने कंडोम वहीं खोल कर बांधकर फेंक दिया। मेरी तो बुरी हालत थी। नीचे फर्श पर मेरे कपड़े कच्ची ब्रा और उसके कपड़े और कच्चा पड़ा था। कमरे का माहौल काफी गरम हो गया था।


अब मैं ध्रुव से नजर नहीं मिला पा रही थी। मैं चादर में खुद को ओढ़ कर बैठी थी और वह नंगा। उसने मुझे खाने के लिए पूछा। उसने होटल वाले को कॉल पर खाना ऑर्डर कर दिया।


वेटर खाना लेकर अंदर आया। मैं चादर में लिपटी हुई थी। मेरे बूब्स चादर में से दिख रहे थे। वो मुझे घूर रहा था।


ध्रुव ने वॉशरूम से टॉवल लपेट लिया था। उसने जो कमरे में देखा उसके आंखों में चमक आ गई। और ध्रुव को आंख मारकर बाहर चला गया।


अब रात के 12 के आसपास का समय था हम लोग फिर से बातें करते हुए सेक्स के लिए रेडी हो गए या यू कहें कि ध्रुव ने फिर मुझे गरम कर दिया। उसकी उंगलियां मेरी जांघों पर घूम रही थीं। उसकी गर्म सांस मेरे कान के पास थी। मेरे शरीर में फिर से आग सी लग गई थी।


मैं समझ गई कि प्रिया तेरे आज खैर नहीं। पर अंदर से खुशी भी बहुत थी। मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। अब उसने मुझे घोड़ी बना कर बेड पर अच्छे से मेरे गांड़ चाट खाई।


उसकी गर्म जीभ मेरी गांड़ की दरार में गहरी घुस रही थी। वो जोर जोर से चूस रहा था। मुझे मजा आ रहा था पर शक भी हो रहा था कि अब क्या होने वाला है। उसने बाथरूम से एक मॉइश्चराइजर निकाल लिया।


उसने मेरे गांड़ के छेद में ठंडा जेल लगा दिया। फिर थोड़ा अपने लंड पर भी लगा लिया। मैंने मना किया कि प्लीज मत करो ध्रुव इतना बड़ा है मेरे बारे में कुछ तो सोचो। मेरी आवाज कांप रही थी।


पर वह नहीं रुका बोला जब से प्रिया आपके चूतड़ देखे हैं इनको पेलने का मन हो गया था। अब रोको मत। मैं भी उसके प्यार के लिए मान गई। अब उसका 8 इंच का लंड मेरे गांड़ में हल्के हल्के से देने लगा।


उसकी टोपी मेरे टाइट छेद को धीरे धीरे फैला रही थी। मुझे सिसकियां निकल रही थीं पर अब धीरे धीरे मजा आना लगा। उसने भी मेरी हां देख ली। और अब पूरा लंड अंदर डाल दिया।


हाय मेरी तो जैसे जान निकल गई। मेरा पूरा शरीर कांप उठा। मैं चीखें रही थी बस करो। पर वह कहां रुका।


वो मेरे गांड़ को पूरी ताकत से पेल रहा था। हर धक्के के साथ उसके लंड की नसें मेरी दीवारों को रगड़ रही थीं। 30 मिनट के बाद वो झड़ गया। मैंने उसका लंड देखा कंडोम में वीर्य और क्रीम लगी हुई थी।


उसने फिर से कंडोम नीचे फेंक दिया। अब मेरे अंदर हिम्मत नहीं बची मैं नंगी ही सोई रही। और सोच रही थी कि प्रिया आज तो तेरे मजे आ गए। इस तरह हमने पूरे रात 4 बार सेक्स किया।


पहली बार उसने मेरी चूत को घोड़ी बनाकर जोर जोर से मारा। दूसरी बार उसने मुझे अपनी गोद में बिठाकर मेरी चूत में लंड डाला। तीसरी बार उसने मेरी गांड़ फिर से पेली। चौथी बार उसने मेरी चूत और गांड़ दोनों को बारी बारी से चोदा।


सुबह के 6 बज गए थे। मैं वॉशरूम गई और फ्रेश हो गई। मैंने टॉवल में बाहर आई। और लिपस्टिक लगा कर रेडी होने लगी।


ध्रुव अभी भी सोया था। कमरे की हालत बुरी थी। 4 कंडोम और बेड और सोफे की बुरी हालत हो गई थी। मुझे पूरे रात का याद करके शर्म भी आ रही थी और खुशी भी।


ध्रुव को बोली उठ जाओ अब घर जाना है। मैं टॉवल में थी। लिपस्टिक और आंखों में हल्का काजल लगा रखा था। ये सब देखकर ध्रुव का मन फिर हवस से भर गया।


उसका लंड मेरे मुंह में दे दिया। मेरे टॉवल हटा कर फिर से मेरे गांड़ चाटने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरी गांड़ की दरार में गहरी घुस रही थी। वो जोर जोर से चूस और चाट रहा था।


फिर बिना किसी क्रीम के मेरे गांड़ में लंड डाल दिया। अब कंडोम खत्म हो गए थे पर मुझे अब कोई दिक्कत नहीं थी। उसका 8 इंच का मोटा लंड मेरे टाइट गांड़ में जोर से घुस रहा था। मुझे तेज दर्द के साथ गहरा मजा भी आ रहा था।


15-20 मिनट मेरे गांड़ मारने के बाद अपना पानी निकाल दिया। कुछ वीर्य की बूंदें नीचे भी गिर गईं। मैंने भी उसकी निशानी अपनी गांड़ के अंदर रखी। ऊपर से अपनी कच्ची पहन ली।


फिर ध्रुव वॉशरूम चला गया। मैंने भी अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गई। और अब वो भी आ गया था। उसने कॉल करके होटल स्टाफ को बताया दिया कि हम जा रहे हैं।


रात वाला वेटर जो कि वहां क्लीनिंग भी करता था आए। उस वक्त ध्रुव बाहर जा रहा था। उसको देखकर आंख मारी। ध्रुव ने भी उसकी 500 का नोट दे दिया।


अंदर की हालत देखकर उसने मुझे बड़े हवस भरी निगाह से देखा। मैं बाहर जाने लगी। वो मेरे चूतड़ ही देख रहा था। जो कि हाई हील और चुदाई की वजह से काफी मटक रहे थे।


अब हम बाहर आए। मुझे ठीक से चला नहीं जा रहा था। मेरे चूतड़ हिल रहे थे। मैं भी अब पूरी मस्ती में थी।


ध्रुव ने ऑटो बुलाया मेट्रो के लिए। और किस्मत से वही रात वाला ऑटो वाला मिल गया। मेरी हालत देखकर वो हवस भरी हंसी हंसा। जब तक हम मेट्रो नहीं पहुंचे तब तक बैक मिरर से घूरता रहा।


अब मेट्रो स्टेशन उतर कर मेरे चलने में दिक्कत हो रही थी। ऑटो वाले सब मेरे चूतड़ देख रहे थे। सबको शायद पता लग गया कल रात क्या हुआ। अब हम दोनों मेट्रो में आकर एक दूसरे को किस और हग करके अगले बार मिलने को बोलकर चले गए।


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