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सुहागरात में मेरी चूत फट गई - Hindi Sex Stories

मेरी नाम अपर्णा है, मेरी उम्र है 26 साल, मेरा शादी दो महीने पहले हुआ है और मुझे अपने पति से बहुत प्रेम है। वो बहुत ही अच्छा इंसान है और मेरी बहुत केयर करता है। इस साइट पर जब मैंने बहुत सारी कहानियां पढ़ीं तब मुझे लगा कि अपनी कहानी मैं भी शेयर कर दूं। अब ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए मैं सीधे कहानी पर आती हूं। वो मेरी सुहागरात थी और लड़कियां तथा भाभियां मुझे फूलों से सजे हुए खूबसूरत कमरे में अकेला छोड़कर चली गईं। शादी की थकान पूरे शरीर में महसूस हो रही थी इसलिए मैंने नहाने का फैसला किया। मैंने जल्दी से नहा लिया और एक हल्की सुंदर साड़ी पहनकर फिर से तैयार हो गई।


जैसा कि आप सभी जानते ही होंगे कि सुहागरात की अहमियत पति और पत्नी के लिए बहुत ज्यादा होती है। मैं यह भी जानती थी कि वो भी मेरी तरह कुंवारे थे। जैसे ही मैं पलंग पर बैठी, मेरे पति रोहित कमरे में आ गए। उनके शरीर से चंदन, गुलाब और महंगे परफ्यूम की मीठी महक आ रही थी जो पूरे कमरे में फैल रही थी। मैं थोड़ी सी घबरा रही थी। जैसे ही वो मेरे पास आए, मैं उठकर खड़ी हो गई। वो भी पलंग पर मेरे साथ बैठ गए। हमने शादी से संबंधित बातें कीं और जो गिफ्ट्स हमें मिले थे उनके बारे में विस्तार से चर्चा की।


फिर बड़े प्यार से उन्होंने मुझसे पूछा, “क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूं?” वो खड़े हुए और अपने दोनों हाथों से मेरे चेहरे को नरम तरीके से थाम लिया। उन्होंने मेरे गाल पर गहरा और प्यारा किस किया। फिर वो बहुत नजदीक आकर मेरे बगल में बैठ गए। बैठने के बाद उन्होंने मेरी बंद आंखों पर भी हल्के से किस किया और मुझे बताया कि इस दिन का उन्होंने जब से इंतजार किया था जबसे कि वो मुझसे पहली बार मिले थे। उन्होंने मेरे हाथों को अपने गर्म हाथों में लेकर मुझसे पूछा कि क्या मैं थकी हुई महसूस कर रही हूं। अगर ऐसा है तो मैं आराम से सो सकती हूं।


जिसे सुनकर मैंने एक शर्मीली मुस्कराहट के साथ जवाब दिया कि अगर वो भी थके हुए हों तो हम दोनों सो जाते हैं। यह सुनकर उन्होंने मुझे आंख मारी और मुस्कुराते हुए मेरे और भी नजदीक आकर मुझे फिर से किस करने लगे। मैं व्याकुलता से भर रही थी। वैसे भी यह उनका पहला किस नहीं था। ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुके थे। हमारी सगाई के बाद जब भी हम अकेले होते थे, चाहे घर पर या कहीं बाहर घूमने जाते समय। पर शादी के बाद किया जाने वाला किस पता नहीं क्या जादू करता है जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। मैं अपनी सुहागरात को लेकर बहुत ज्यादा उत्सुक थी और मेरे मन में तरह तरह के विचार चल रहे थे।


हम लोग एक दूसरे को गहरे किस करने लगे थे। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरी पीठ और कमर पर धीरे धीरे गोल गोल फेरना शुरू कर दिया। मेरे हाथ उनके मजबूत कंधों पर थे और मैं उन्हें अपनी ओर खींच रही थी। मैंने महसूस किया कि उनकी गर्म और नम जीभ मेरे होंठों के बीच से मेरे मुंह में अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी। मेरे होंठों को धीरे से खोलती हुई उनकी जीभ मेरे मुंह में चली गई। उसी बीच उनके हाथ मेरे पल्लू के अंदर से होते हुए मेरी पीठ और कमर को सहलाते हुए मेरे स्तनों तक पहुंच गए।


उनका हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे नरम और भरे हुए स्तनों को धीरे धीरे दबा रहा था। मेरी आंखें पूरी तरह से बंद थीं। मैं उनके हर स्पर्श को गहरे से अनुभव कर रही थी और उसका पूरा मजा ले रही थी। जब उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी। आज मैं पहली बार किसी लड़के के सामने पूरी तरह बिना कपड़ों के होने वाली थी। आज तक मेरी मम्मी ने भी मुझे बिना कपड़ों के नहीं देखा था। जब मैं चौदह पंद्रह साल की थी तब भी नहाते समय अगर मम्मी ने सर धोने में मदद की तो भी मैं हमेशा तौलिए में लिपटी रहती थी या ब्रा और पैंटी पहने रहती थी। और आज एक पुरुष को अपना पूरा नग्न शरीर दिखाने का मौका मिलने वाला था।


उन्होंने मेरे पल्लू को मेरे कंधों से धीरे से हटाया और वो एक तरफ सरककर गिर गया। साथ ही साड़ी का दूसरा हिस्सा जो पेटीकोट में घुसा हुआ था उसे भी बाहर की तरफ खींचकर निकाल दिया और साड़ी पूरी तरह से निकाल दी। मैं उनके सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी। उन्होंने एक बार फिर से मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर लिया। हम दोनों एक दूसरे की आंखों में गहरी नजरों से देखने लगे। साथ ही उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक एक एक करके खोलने शुरू कर दिए।


और फिर उन्होंने ब्लाउज को मेरे कंधों पर से होते हुए उतार दिया। अब मैं नरम और चमकदार सैटिन की ब्रा में थी जिसमें मेरे भरे हुए स्तन पूरी तरह फिट थे और बाहर आने को बेताब थे। उन्होंने मुझे पलंग की तरफ चलने को कहा और हम दोनों पलंग पर साथ साथ आराम से लेट गए। फिर उन्होंने मेरी ब्रा के हुक भी खोल दिए और मेरे स्तनों पर से उसे पूरी तरह हटा दिया। मेरे चुचुक उत्तेजना से पूरी तरह खड़े और सख्त हो चुके थे। उनके गर्म हाथों ने मेरे स्तनों को अपनी हथेलियों में भर लिया और उन्हें किस करने लगे। उन्होंने मेरे स्तनों को नरम नरम सहलाना शुरू कर दिया। हम दोनों की सांसे तेज तेज चलने लगी थीं।


वो मेरे निप्पल के साथ खेल रहे थे। वो मेरे स्तनों को बार बार देखे जा रहे थे और मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। उन्होंने एक निप्पल को अपने गर्म और नम मुंह में ले लिया और उसे धीरे धीरे चूसने लगे। हे भगवान्, मैं नहीं बता सकती कि उस पल क्या अनुभूति हुई थी। फिर उन्होंने दूसरे निप्पल को किस किया और उसे भी चूसना शुरू कर दिया। मैंने अपना सर उत्तेजना और आनंद के मारे पीछे की ओर कर लिया था।


वो बार बार मेरे बाएँ और दायें निप्पल को चूसना जारी करे रहे जब तक की मेरे पूरे शरीर में एक आग सी न लग गयी। उनके गर्म और नम मुंह ने मेरे बाएं निप्पल को पूरी तरह अपने अंदर ले लिया। वे उसकी नोक को अपनी जीभ से बार बार घुमाते हुए जोर से चूस रहे थे। फिर वे दाएं निप्पल पर चले गए। वहां भी उन्होंने उसे होंठों के बीच दबाकर खींचा और चूसा। मेरे निप्पल अब पूरी तरह सख्त और लाल हो चुके थे। हर बार जब उनकी जीभ मेरी निप्पल की नोक पर घूमती तो मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती।


पहली बार कोई ऐसा मेरे साथ कर रहा था। तभी पता नहीं क्या हुआ, मेरे शरीर में एक उफान सा आया और मैं निढाल सी हो गई। मेरी योनी के अंदर से अचानक एक गर्म तरल पदार्थ निकलने लगा। मुझे अपनी योनी में भारी गीलापन सा महसूस हुआ। मेरी पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी। वो मेरा पहला ऑर्गेज्म था उस सुहागरात में। मुझे लगा कि मैंने अपनी पैंटी में पेशाब कर लिया है। मैं बहुत शर्मिंदगी महसूस करने लगी। मेरे चेहरे पर लालिमा छा गई और मैं अपनी आंखें बंद करके मुंह फेरने लगी।


वो समझ गए और उन्होंने पूछा, “क्या हुआ, क्या तुम्हें ऑर्गेज्म हुआ?” “यह क्या था? मुझे लगा कि मैंने पेशाब कर दिया।” मैंने पूछा। “नहीं.. तुम्हें जरूर ही ऑर्गेज्म हुआ होगा..” उन्होंने जवाब दिया।


फिर उन्होंने मेरे स्तनों पर से अपने हाथ नीचे की ओर बढ़ाए और मेरे पेटीकोट पर पहुंच गए। उन्होंने पेटीकोट का नाडा खोल दिया। उनकी उंगलियों का मेरी पैंटी पर स्पर्श हुआ और मेरे बदन में सिहरन दौड़ गई। वो मेरी कमर पर गहरे किस कर रहे थे। उनकी गर्म सांस मेरी त्वचा पर पड़ रही थी। फिर उन्होंने मेरी नम हो चुकी पैंटी पर भी किस किया। उनके होंठ मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी योनी की आकृति को महसूस कर रहे थे।


उन्होंने पीछे से मेरे हिप्स को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ा। उन्होंने अपना चेहरा मेरी पैंटी से पूरी तरह सटा दिया और उसे जोर जोर से चूमने लगे। उनकी जीभ पैंटी के कपड़े के ऊपर से मेरी योनी की दरार पर दबाव डाल रही थी।


फिर उन्होंने अपनी गर्म जीभ मेरी पैंटी की बीच वाली दरार पर घुमाते हुए धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ले जाकर मेरी गांड की दरार पर पहुंचा दी। उन्होंने पैंटी को थोड़ा साइड खींचकर अपनी नम जीभ को मेरी टाइट गांड के छेद पर लगा दिया और जोर-जोर से चाटना शुरू कर दिया। उनकी गर्म जीभ मेरी गांड को पूरी तरह लपलपा रही थी, छेद को चूस रही थी और बार-बार अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी। मैं शर्म और तीव्र उत्तेजना से कांप उठी। उनकी जीभ की नोक मेरे गांड के अंदर हल्का-हल्का दबाव डाल रही थी जिससे मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ रही थी।


वो कुछ देर तक मेरी गांड को लपलपाकर चाटते रहे, अपनी लार से पूरी तरह गीला करते रहे। फिर उन्होंने अपनी जीभ को नीचे मेरी योनी की तरफ ले जाकर उसकी पूरी लंबाई चाट ली। मेरी योनी से अब लगातार रस निकल रहा था।


तत्पश्चात उन्होंने धीरे से अपनी उंगलियां मेरी पैंटी के इलास्टिक में डालीं और धीरे धीरे उसे नीचे करना शुरू कर दिया। मेरी योनी प्रदेश के घने बाल नजर आने लगे थे। हवा मेरी गीली योनी को छू रही थी।


मैंने अपनी टांगें फैला दीं जिससे कि उन्हें आसानी हो सके। फिर मैंने अपने एक पैर को ऊपर किया और फिर दूसरा जिससे कि उन्होंने मेरी पैंटी भी उतार दी। अब मेरी योनी पूरी तरह नंगी और खुली हुई उनकी नजरों के सामने थी।


तब रोहित को लगा कि उन्होंने अपने कपड़े तो उतारे ही नहीं। सो उन्होंने अपने कुरते और पायजामे को उतार दिया और अंडरवियर पहन कर मेरे ऊपर लेट गए। मेरे स्तन उनके चौड़े और गर्म सीने के नीचे पूरी तरह दबे हुए थे। उनके हाथ मेरे बदन को हर जगह महसूस कर रहे थे। मैं अपनी टांगों के बीच भारी गीलापन महसूस कर रही थी। उनके कहने पर मैंने अपना हाथ उनके अंडरवियर पर रखा और…और..मैंने उनका कठोर लिंग पकड़ा। मैंने उसे अपनी उंगलियों में लपेट लिया। वो बहुत बड़ा था। मुझे नहीं पता था कि यह मेरे अंदर जा भी पाएगा कि नहीं। उनके हिप्स भी हरकत करने लगे थे। वो खड़े हुए और अपना अंडरवियर उतार दिया। उसके बाद उन्होंने मुझे इस तरह लिटा दिया कि मेरी पीठ उनकी छाती से लग गई। उन्होंने अपने दोनों हाथों में मेरे स्तन दबा लिए। हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे और एक दूसरे के शरीर को महसूस कर रहे थे।


फिर उन्होंने मेरे स्तनों को मसलना शुरू कर दिया। उनके मजबूत हाथों ने मेरे नरम और भरे हुए स्तनों को पूरी तरह अपनी मुट्ठियों में भर लिया। वो उन्हें धीरे धीरे मसल रहे थे, ऊपर नीचे दबा रहे थे। कभी वो मेरी निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच पकड़कर हल्का सा उमेठ देते तो कभी पूरे स्तन को जोर से दबाकर निचोड़ते। हर बार जब वे मेरी निप्पल को खींचते, मेरे शरीर में मीठी सी झुरझुरी दौड़ जाती। मेरे स्तन अब लाल हो चुके थे और उनकी उंगलियों के निशान पड़ रहे थे।


उसके बाद मैं सीधी लेट गई और उन्होंने मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। उनकी उंगलियां मेरी योनी के ऊपर वाले हिस्से पर घूम रही थीं। उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी चूत के गीले लिप्स के बीच में डाली और धीरे से अंदर डालकर बाहर निकाल ली। फिर उन्होंने मेरी क्लिटोरिस को अपनी अंगूठे से रगड़ना शुरू कर दिया। मेरा बुरा हाल था। मेरे मुंह से बार बार आहें निकल रही थीं। मैं उनकी उंगलियों द्वारा मेरी चूत पर किए जा रहे घर्षण को पूरा मजा लेते हुए महसूस कर रही थी। मेरी योनी से लगातार रस निकल रहा था जो उनकी उंगलियों को चिकना बना रहा था।


उन्होंने मुझसे पूछा कि उंगली डालने पर दर्द तो नहीं हो रहा। मैंने मन कर दिया तो उन्होंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियों को अंदर जाने में कुछ रुकावट आ रही है। उन्होंने ही कहा, “शायद तुम्हारी हाइमन है.. जो रोक रही है.. कोई बात नहीं।” फिर वो मुझे चूमने लगे और मैंने उनका लिंग फिर से पकड़ लिया। उन्होंने फिर से मेरे गुलाबी निप्पल चूसने शुरू कर दिए।


हम दोनों ही आउट ऑफ कंट्रोल हो चुके थे। वो मेरी चूत के गीले लिप्स को महसूस कर पा रहे थे। उन्होंने अपनी उंगलियां मेरी चूत के लिप्स पर लगा दीं और दबाने लगे जिससे कि उनकी उंगलियों ने मेरी चूत के लिप्स खोलते हुए उंगली को अंदर जाने दिया। वो कुछ देर तक ऐसे ही करते रहे। मुझे अच्छा महसूस हो रहा था और जब भी उनकी उंगली मेरी चूत के लिप्स के नजदीक आती थी तो मैं अपनी हिप्स ऊपर उठाकर उसे अंदर डालने की कोशिश करती। मेरी सांसें तेज हो रही थीं और मेरी योनी बार बार सिकुड़ रही थी।


और आखिर मैं रह नहीं पाई और मैं बोल पड़ी, “रोहित, प्लीज मुझे प्यार करो।” “क्या तुम इसके लिए तैयार हो?” उन्होंने पूछा। “हां, मैं पूरी तरह से अब आपकी ही हूं। मुझे सुहागरात का पूर्ण सुख चाहिए..” मैंने जवाब दिया। “देखो, हो सकता है कि तुम्हें थोड़ा दर्द हो.. पर बाद में अच्छा लगेगा।” उन्होंने कहा। “मैं जानती हूं। बस आप मुझे प्यार करो।” मैंने बोला।


वो मुस्कुराए और मेरी टांगों के बीच में आ गए। उसके बाद उन्होंने एक हाथ पर अपने शरीर को संभालते हुए दूसरे हाथ से मेरी चूत के नम लिप्स सहलाने लगे। और फिर कुछ देर ऐसा करने के बाद, उन्होंने अपने हाथों से अपने लिंग को पकड़ लिया। मैंने देखा कि वो अपने लिंग को मेरी तरफ ला रहे थे, और मैं लिंग के मुंड को अपनी चूत पर महसूस कर पा रही थी। उन्होंने बहुत ही धीरे से उसे ऊपर से नीचे तक रगड़ा, जैसे कि सही जगह ढूंढ रहे हों अंदर डालने के लिए। सही जगह का अनुमान होने पर वो रुक गए। धीरे से वो नीचे की ओर झुके और उनके लिंग ने मेरी चूत में प्रवेश किया।


वो मेरी आंखों में देख रहे थे, कि मैं उन्हें संकेत दे सकूं अगर मुझे दर्द महसूस हो तो। मैंने उनकी छाती पर अपना हाथ फिराना शुरू कर दिया। उन्होंने धीरे धीरे और अंदर डालना शुरू किया। फिर वो धीरे से थोड़ा पीछे आए और फिर अंदर की ओर बढ़े। मैं अपने अंदर उस गहराई में हो रहे उस अनुभव को लेकर बहुत आश्चर्यचकित थी।


यहाँ तक कि मैं उनके लिंग को मेरी योनी के दीवारों पर महसूस कर रही थी। एक बार फिर वो पीछे हटे और फिर अंदर की ओर दबाव दिया। मेरे अंदर अवरोध महसूस होने लगा था। वो उठे और फिरसे धक्का दिया, ज्यादा गहराई तक नहीं पर थोड़ा जोर से।


मुझे पता था कि उनके लिंग को मेरी योनी के रस ने पूरी तरह भिगो दिया था, जिसकी वजह से उनका मोटा और गर्म लिंग आसानी से अंदर और बाहर हो पा रहा था। और अगली बार के धक्के में उन्होंने थोड़ा दबाव बढ़ा दिया। मेरी सांसें जल्दी जल्दी आ रही थीं। मैंने अपनी बाहें उनके मजबूत कंधों पर लपेट दी थीं और अपने नितंबों को ऊपर की ओर उठा दिया। मैंने एक तीव्र चुभन सी महसूस की। रोहित का लिंग मेरी हाइमन से टकरा रहा था और जब उसने उसे भेदकर आगे बढ़ना चाहा तो मुझे लगा कि दर्द के मारे मैं मर जाऊंगी।


“ओह माँ…” मेरे मुंह से निकला। मेरे स्तन ऊपर की ओर उठ गए और शरीर ऐंठन में आ गया जैसे ही मेरे पति का गर्म, आकर में बड़ा लिंग पूरी तरह से मेरी गीली हो चुकी योनी में घुस गया। अंदर, और अंदर वो चलता गया। मेरी चूत के लिप्स को पूरी तरह खुला रखते हुए, मेरी क्लिटोरिस को रगड़ता हुआ वो गहराई तक चला गया था। मेरी योनी मेरे पति के लिंग के संपूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गई थी। उधर उनके हिप्स भी कड़े होकर दबाव दे रहे थे और लिंग अंदर जा रहा था।


मेरी आंखों से आंसू भी निकल आए थे। मैं अपना कौमार्य खो चुकी थी और लिंग मेरे अंदर था। रोहित रुका और मेरे आंसुओं पर एक निगाह डाली पर मैं नहीं रुकी, मैं अपने हिप्स ऊपर की ओर उठाकर उनके लिंग को और अंदर तक ले गई।


हम दोनों के शरीर एक दूसरे से चिपटे हुए थे। हम दोनों एक दूसरे को गहरे किस किए जा रहे थे और मैंने महसूस किया कि उनके हिप्स आगे पीछे हो रहे हैं धीरे धीरे। और फिर अचानक उन्होंने अपने हिप्स और ऊपर किए जिससे लिंग थोड़ा बाहर आया और फिर वो अंदर डालने लगे। इसी तरह उन्होंने एक लय में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। जब जब उनका लिंग मेरी योनी की दीवारों से टकराता हुआ मेरी गहराइयों में जाता तो उसके स्पर्श मात्र से मेरे पूरे शरीर में सनसनाहट दौड़ जाती।


“मैं ज्यादा देर नहीं रुक सकता… मेरा यह पहला समय है..!” उन्होंने कहा। “मेरे अंदर ही निकाल दो… मैं भी यही चाहती हूं।” मैंने जवाब दिया।


उन्होंने अपनी गति बढ़ा दी और बड़ी जल्दी ही उनका वीर्य निकल गया। मैं महसूस कर पा रही थी कि मेरे पति के लिंग में से निकल रहा गर्म वीर्य मेरी योनी को तर कर रहा था। मैं रोहित से मिलने वाले सुख का पूरा आनंद ले रही थी, मेरा पति, पहली बार….मेरी योनी में अपने वीर्य को उड़ेल रहा था।


कुछ देर बाद रोहित ने अपने लिंग को मेरी योनी में से बाहर निकाल दिया। वो खून से लाल हो रखा था। चादर पर भी एक लाल धब्बा सा था और मेरी योनी की दीवारें भी खून से सनी थीं। कुछ मिनटों तक हम दोनों साथ साथ लेटे रहे। मेरा सर उनके सीने पर था। उन्होंने मुझसे पूछा, “कैसा लगा?” मैंने उन्हें किस किया और कहा, “आप बहुत शरारती हो।”


फिर हम लोग बाथरूम में चले गए। अपने आप को साफ किया और हमारे इस पहले प्यार की सारी निशानी कमरे में से साफ की। फिर लगभग एक घंटे तक हम दोनों नंगे ही रहे और सो गए। अगली सुबह हम उठकर तैयार हुए और बीच बीच में एक दूसरे को चूमते भी रहे।


अगली सुबह रोहित की बहन हम लोगों को उठाने आई। मैं शर्मा रही थी और उनसे आंख नहीं मिला पा रही थी। वो समझ गई और गर्दन हिला कर मुझे चिढ़ाने के अंदाज में बोली, “क्यों भाभी? भैया ने ज्यादा परेशान तो नहीं किया न?” मैं कुछ नहीं बोली और शर्मा कर वहां से निकल गई।

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धन्यबाद …..

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