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बड़ी दीदी ने चोदना सिखाया

  • Kamvasna
  • 3 फ़र॰ 2025
  • 5 मिनट पठन

नमस्कार दोस्तों, जैसा कि आप मुझे जानते है, मैं आपका दोस्त राजवीर अपने जीवन की सच्ची सेक्स कहानियों से आपको रूबरू करवाता हूं। ये कहानी मेरे और मेरी बड़ी बहन के बीच हुए पहले समागम की, या यू कहें चुदाई की है।

मेरी उमर उस वक्त 19 साल थी, और मेरी बहन की उमर उस समय 22 साल थी। मेरे पिता जॉब करते थे। उनकी नौकरी हमारे घर से दूर थी, तो वो हम दोनों को अपने साथ ले गए पढ़ने। तो हम तीनों ही रहते थे साथ में।

मैं नया जवान लड़का था, जिसे कॉलेज में साथी सहपाठियों ने ज्ञान देना चालू किया था, कि चुदाई कैसे होती है, क्या होती है। वैसे मेरी सच्ची कहानी में मैंने कुछ नहीं किया। मेरी दीदी ने मुझे पटाया, और मुझे सिखाया था। चलो तो आपको सीधा कहानी पर लेके आता हूं।

हमने जो घर ले रखा था, उसमें 2 कमरे थे। मैंने वैसे मुठ मारना और मस्तराम की कहानियां पढ़ना शुरू ही किया था, तो मेरा लौड़ा खड़ा होना शुरू हो गया था अच्छे से। जैसा आप सब को पता ही होगा कि 18 साल वाले लड़कों में चुदाई के नाम से लंड कितना जल्दी खड़ा रहता हैं।

ये सर्दियों की बात है। हम शुरू से ही बहन-भाई एक साथ ही, एक ही बिस्तर पर, एक ही रजाई में होते थे। क्योंकि हमारे घर का माहौल ही ऐसा था, और कोई गलत भावना भी नहीं थी मेरे मन में कभी।

मैं जवान हो गया था और मेरी दीदी का शरीर भर चुका था, 34″ के बूबे, 34″ की गांड थी। मैं एक दिन मुठ मार रहा था, तो दीदी ने चुपके से देख लिया, जो बाद में दीदी ने बताया मुझे। मेरा लौड़ा देख कर उसके मन में मेरे लिए चुदाई के ख्याल आने लगे।

एक रात को जब हम साथ सो रहे थे, मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे लोड़े से खेल रहा था। मैंने हल्के से देखा तो दीदी मेरे लंड को बॉक्सर से निकाल कर पूरा खड़ा कर चुकी थी, और एक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़े हुए और दूसरे हाथ से अपनी बूब्स सहला रही थी। ऐसा कुछ देर तक हुआ और मेरा पानी निकल गया। फिर दीदी मेरे लोड़े को साफ करके साइड में मुंह करके सो गई। मैं भी सो गया।

सुबह सब नॉर्मल था, और ऐसे ये रोज का काम हो गया कि दीदी मेरे लंड का पानी निकाल कर चूत में उंगली करके सो जाने लगी। उसे लगता मैं सो रहा होता था। अब मेरा मन दीदी की चुदाई का होने लगा था, क्योंकि मैंने अभी तक ना दीदी को नंगा देखा था, ना ही मैंने छुआ था। तो मैं सोचने लगा कि कैसे दीदी को नंगा देखा जाए?

हमारे घर में बाथरूम बाहर दूर था, तो दीदी अक्सर खुले में ही नहाती थी। लेकिन मुझे बाहर भेज देती थी। अगले दिन मैंने बाहर जाने के बजाय दीदी को बोला-

मैं: मैं रूम में पढ़ रहा हूं।‌ आप मेरा गेट बंद करके नहा लो।

खुश किस्मती से हमारे उस रूम के गेट के नीचे के हिस्से में एक छेद था। जिसमें से मैं सब साफ देख सकता था। दीदी मेरा गेट बंद करके नहाने के लिए पानी की बाल्टियां लेके आई, और अपने कपड़े जो वापस पहनने थे रखे, और अभी के कपड़े खोलने लगी।

मैं छेद से देख रहा था। मैं पहली बार किसी लड़की को नंगे देखने वाला था, तो बहुत उत्तेजित था ये सोच कर ही। दीदी ने सबसे पहले तो अपना कुर्ता खोला, फिर पजामा। अब दीदी सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी। मुझे पहली बार दीदी इतनी हॉट लग रही थी। मेरा लंड खड़ा हो गया था।

मैंने अपने लोड़े को पजामे से बाहर निकाल कर हाथ में ले लिया था। अब दीदी ने पहले ब्रा-पेंटी में ही अपने बाल धोए। फिर दीदी को जोर की सुसु लगी, तो पेंटी खोल कर दीदी सुसु के लिए बैठ गई। मुझे पीछे से दीदी की बड़ी नंगी गांड दिख रही थी। मेरी हालत खराब हो रही थी। मैं लोड़े को हिला रहा था।

अब दीदी ने पेशाब करके अपने चूत को साफ किया, और फिर वो अपनी ब्रा उठाने लगी। अब दीदी पूरी नंगी थी। दीदी ने चूत के बाल साफ नहीं किए हुआ थे, तो उनकी चूत बड़ी लग रही थी। झांटे लंबी-लंबी थी, और बूबे बड़े-बड़े पिंक कलर के निप्पल में बहुत ही शानदार लग रहे थे।

मेरा लौड़ा देख ये कर बहुत ज्यादा जोश में आ गया। अब दीदी ने अपने पूरे शरीर पर पानी डाल कर साबुन लगाया, और चूत पर काफी देर तक साबुन लगाती रही। दीदी ने अपने बोबे को भी बहुत देर तक मसला, और फिर नहा कर कपड़े पहन लिए। इधर मेरा पानी निकल गया था।

आज मुझे पहली बार इतना मजा आया था, कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता। यहां सभी कहानी पढ़ने वाले लड़कों और लड़कियों को ये बताना चाहता हूं, कि चूत और लोड़े का कोई रिश्ता नहीं होता है। ये सिर्फ सामाजिक भावना है। तो कामवासना में किसी भी रिश्ते को लेकर मन में ख्याल ना रखे। जो भी चूत मिले या लौड़ा मिले, उससे मजे लेकर चुदाई करे।

उसी रात मैं दीदी का मेरे लोड़े को हिलाने का इंतजार करने लगा। वहीं हुआ। हम जैसे ही लाइट बंद करके सोए, दो मिनट बाद ही दीदी ने मेरे बॉक्सर में हाथ डाल कर लोड़े को हिलाना शुरू कर दिया। लेकिन आज दीदी का मूड कुछ ज्यादा ही था, तो दीदी हाथ से हिलाते हुए अपना चेहरा लोड़े के पास लाई, और किस करने लगी लोड़े को।

कुछ देर टोपे को चूम कर फिर लोड़े को मुंह में लिया और चूसने लगी। शायद दीदी को अब पता लग गया था कि मैं जाग रहा था। ये दीदी ने बाद में बताया कि उसे पता था कि दूसरे दिन से ही मैं जगा हुआ रहता था रोज। फिर दीदी से आज रहा नहीं गया, तो वो धीरे से बोली-

दीदी: करेगा क्या?

मैं बोला: मुझे नहीं आता दीदी कुछ भी।

तो दीदी बोली: मैं सिखा दूंगी तो करेगा क्या?

मैं बोला: क्यों नहीं दीदी, मजा आ रहा है बहुत।

ये इतने साल पहले की बात है, तो हम किसिंग वगेरह नहीं जानते थे ज्यादा। तो दीदी ने बोला-

दीदी: तू लेटा रह,‌ मैं सब कर लूंगी। तुम एक बात का वादा करो कि किसी को कुछ भी बताओगे नहीं।

मैं बोला: पक्का दीदी, किसी को कुछ नहीं बताऊंगा।

फिर दीदी बोली: तू नया है तो जल्दी निकल जाएगा तेरा। पहले एक बार मुंह से निकाल देती हूं तेरा। नहीं तो मुझे मजा नहीं आएगा।

फिर वो जोर-जोर से मेरा लौड़ा चूसने लगी, और दो मिनट में मेरा पानी निकल गया।

अब दीदी बोली: तू मेरे ऊपर आजा, और मेरे बूब चूस, जैसे बचपन में दूध पीता था।

मैंने वैसे ही किया, और मैं दीदी का दूध पीने लगा। दीदी मेरे सर पर हाथ फेर कर आहें भर रही थी। मैं बूबे चूसे जा रहा था। इधर दीदी की हालत खराब हो रही थी। अब मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो चुका था पूरा तन के।

दीदी बोली: अब तो सीधा लेट जा, बाकी मैं कर लूंगी।

और दीदी झांटे भरी चूत को लेके मेरे ऊपर आ गई। दीदी ने बूबे मेरे मुंह में देके मेरे ऊपर बैठ कर अपने हाथ से मेरा लौड़ा अपनी चूत में सेट किया, और एक झटके में पूरा लौड़ा अन्दर ले लिया चूत के, और हल्का-हल्का हिलने लगी।

मुझे अपने लोड़े पर ऐसा महसूस हुआ, जैसे किसी गर्म भट्टी में लावे जैसे चिप-चिप वाली जगह लौड़ा डाला हुआ हो। दीदी मजे लेके चुदाई के रही थी। ऐसे ही दीदी ने उछल-उछल कर 10 मिनट चुदाई की, और मेरे ऊपर ढेर हो गई। मेरा भी पानी निकल गया, और फिर हम कपड़े पहन कर सो गये।

ये था मेरा पहला चुदाई का अनुभव। आपका प्रेम अगर मिलेगा तो आगे बताऊंगा कैसे दीदी ने मुझे चूत चाटना, लोड़ा मोटा करना, और अलग-अलग आसन में चुदाई करना सिखाया। आप मुझसे किसी भी जानकारी और चुदाई सहयोग के लिए जुड़ सकते हैं।

आप मुझे मेल कर के जरूर बताएं मेरी सच्ची कहानी आपको कैसे लगी। आपका प्यार मुझे आगे भी कहानी लिखने को उत्साहित करेगा। मेरी मेल आईडी नीचे लिखी हुई है। rajforyou2686@gmail.com

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