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मैं अपने फौजी ससुर से चुद गई - Hindi Sex Stories

  • Riya
  • 6 days ago
  • 17 min read

हेलो दोस्तो आपकी रिया फिर से हाजिर है एक सच्ची कहानी बताने के लिए। मेरे गुलाबी होंठों से आप सभी के लन्ड को चुम्बन।


मेरा नाम रिया है मेरे फिगर साइज़ चुचियों का 36D, कमर 30, चूतड़ों गांड़ का 40 है, कद 5'6" है मेरी दोनों चूचियां के उभार सुडौल और उभरे हुए चूतड है मेरे अंग अंग से रस टपकता है मैं गज़ब की गोरी रसभरी हु।


मेरी शादी होने के बाद मैं अपनी ससुराल आ गई। पति के अलावा मेरा किसी के साथ कोई सम्बन्ध नहीं था। मेरे पति मुझे हर तरह से संतुष्ट कर देते थे, जिससे मुझे कभी किसी और मर्द की जरूरत नहीं पड़ी।


शुरू के 9 महीने तक तो वो साथ में रहे लेकिन उसके बाद वो सूरत चले गए और मैं अपने ससुर जी के साथ जो सेना से रिटायर्ड है उनके साथ घर पर अकेली रहने लगी। वो छह महीने में एक बार ही आते थे और मुश्किल से एक हफ्ते रुकने के बाद चले जाते थे।


मेरी आदत ऐसी थी कि मुझे तो रोज ही चुदाई का सुख चाहिए था लेकिन अब वो मुझे नहीं मिल रहा था। मैं रात में अपने कमरे में अकेली बिस्तर पर लेटी हुई करवट बदलती रहती थी और जब कभी मुझसे सहन नहीं होता था तो अपनी उंगलियों से ही अपने आप को शांत करने की कोशिश करती।लेकिन उससे भी मेरी प्यास नहीं बुझती थी।



धीरे धीरे समय आगे बढ़ रहा था और मेरे बदन की प्यास बढ़ती जा रही थी। कई बार मेरे दिमाग में आया कि किसी मर्द को अपना दोस्त बनाया जाए, जिससे मेरी प्यास वैसे ही बुझती रहे जैसे कि शादी से पहले बुझती थी।


लेकिन यह बहुत मुश्किल काम था क्योंकि मेरे घर ऐसा कोई आता जाता भी नहीं था और मैं अकेली कहीं भी बाहर जाती नहीं थी जिससे मेरी किसी मर्द के साथ दोस्ती हो सके।


दुनिया में इंसान हर चीज को कंट्रोल कर सकता है लेकिन चुदाई की भूख ऐसी चीज है कि उसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता।और ऐसी स्थिति में ही लोग सारे रिश्ते नाते भूल जाते हैं। घर पर मैं गाउन ही पहनती थी और उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अन्दर ब्रा और चड्डी नहीं पहनती थी ताकि मेरा गाउन मेरे जिस्म पर चिपका रहे और मेरे अन्दर के अंग उसके सामने झलकते रहे।


मैं जानबूझकर अपने ससुर के सामने झुककर काम किया करती ताकि मेरे दूध उन्हे दिखे और उनके बदन में भी गर्मी आ जाए।बहाने से अपना अंग प्रदर्शन करती।उस पर किसी भी प्रकार से कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था। इसलिए एक दिन सुबह 10 बजे तक मैंने घर का सारा काम खत्म कर लिया।

घर पर मैं और मेरा ससुर ही थे उसी समय मैं नहाने के लिए बाथरूम चली गई। करीब 20 मिनट नहाने के बाद मैं चड्डी और ब्रा पहनी और अपनी चड्डी को और ऊपर की ओर सिकोड़ ली, जिससे कि मेरे बड़े बड़े चूतड़ चड्डी के बाहर निकल आए।


ऐसे ही ब्रा और चड्डी पहने हुए मैं बाथरूम से बाहर निकल आई।। मैंने सोफे पर लेटे हुए अपने ससुर को ऐसे अनदेखा किया जैसे कि मैंने उसे देखा ही नहीं था।


बिना सोफे की तरफ देखे हुए हाथ में गीला तौलिया लिए मैं सोफे के सामने से गुजरी और थोड़ा आगे जाने के बाद जानबूझकर तौलिया नीचे फर्श पर गिरा दिया। सोफे की तरफ मेरी पीठ थी और मैंने झुककर तौलिया उठाया, उसके बाद मैंने एक उंगली से अपनी चड्डी को ठीक की, जो कि मेरी गांड के दरार पर घुस गई थी।


मैं जान रही थी कि मेरे ससुर की नज़र मेरी गांड से चड्डी ठीक करते हुए मुझ पर पड़ी होगी और उसने मेरी गांड को गौर से देखा होगा। चड्डी ठीक करते हुए मैं धीरे धीरे अपने कमरे की तरफ बढ़ रही थी।।, फिर मैंने सोचा कि पलटकर अपने ससुर को देखूं कि उसका क्या हाल है। मैंने अपने बालों को झटकारते हुए अपना सर पीछे की तरफ किया और पीछे का नजारा देख कर मेरे पैरों के नीचे से जमीन सरक गई। मेरे ससुर जी लेटे हुए थे और वो एकटक मुझे घूरे जा रहे थे।


मेरी गांड फट गई और मैंने जोर से दौड़ लगाई और अपने कमरे में चली गई। कमरे में पहुंचकर मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं, दिल की धड़कन अपने पूरी रफ्तार में थी।मेरे हाथ पैर कांप रहे थे।



मैंने अपने कपड़े पहने और काफी देर तक बिस्तर पर बैठकर इस घटना के बारे में सोचती रही कि अब कैसे बाहर जाऊं, ससुर जी क्या सोचेंगे। इधर खाना बनाने का समय होता जा रहा था और किसी तरह से मैं नजरें नीचे किए हुए बाहर निकली, उस वक्त बाहर कोई नहीं था और मैं जल्दी से किचन में चली गई।


खाना बनाने के बाद मैंने नजरें नीचे किए हुए अपने ससुर को खाना दिया और खाना खाने के बाद अपने कमरे में आ गई। ऐसे ही एक दिन मैं गाउन पहने हुए घर का काम कर रही थी। उस दिन मैंने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी जिससे मेरा गाउन बार बार मेरी गांड की दरार में घुस रहा था। मैं बार बार अपनी गांड से गाउन को बाहर निकाल रही थी।


उस वक्त मैं घर पर अकेली ही थी। फिर अचानक से मेरी गांड के छेद में जोरों से खुजली हुई और मैं उंगली से गाउन के ऊपर से ही छेद को जोर जोर से खुजाने लगी। उसी समय मेरे ससुर का आना हुआ और उन्होंने मुझे अपनी गांड खुजाते हुए देख लिया।


जैसे ही मेरी नजर उन पर पड़ी, मैं तुरंत वहां से चली गई। मैं सोच में पड़ गई कि ‘हे भगवान … ये सब क्या हो रहा है।


मेरी ऐसी हरकत बार बार ससुर जी क्यों देख लेते हैं।


काफी दिनों तक ऐसा ही सब चलता रहा। फिर एक दिन मुझे पता चला कि मेरा ससुर मुझे देख कर अपने खड़े लन्ड को सहलाने लगे है और मुझे किसी काम से अपने पास बुलाया करते हैं मैंने कई बार गौर किया कि ससुर जी का नजरिया पहले से बदल गया था।


उनका मुझे देखने का तरीका मुझसे बात करने का तरीका, इन सबमें काफी फर्क आ गया था। अब वो हमेशा मेरे लिए कुछ न कुछ खाने के लिए लाने लगे, मेरे लिए साड़ी खरीद कर लाने लगे और यहां तक कि मेरे लिए गाउन भी खरीद लाते थे।


इससे पहले वो कभी ऐसा नहीं करते थे इसलिए मुझे उन पर थोड़ा शक होने लगा था। अब जब भी मैं साड़ी पहनती तो उनकी नजर मेरे चुचियों पर पेट पर और कमर पर टिक जाती थी। मैं घर का काम करती रहती और उनकी नजर मुझे ही देखती रहती थी।


धीरे धीरे ऐसा होना शुरू हो गया कि जब भी मैं उन्हें चाय पानी देने जाती तो वो मेरे हाथों को दबा कर छूने लगे। उनकी निगाहों में मुझे मेरे प्रति हवस साफ साफ दिखाई दे रही थी। मेरे ससुर की उम्र 54 साल है और वो शरीर से काफी हट्टे-कट्टे मर्द हैं।


उनके चोड़े सीने पर काले सफेद घुंगराले बालों के गुच्छे है उनके शरीर पर बुढ़ापे का एक भी असर नहीं दिखाई देता और वो अभी पूरी तरह फिट हैं। लेकिन वो थे तो मेरे ससुर ही … और मैं उनके लिए ऐसी गंदी बात सोच भी नहीं सकती थी।


अब कोई मुझे गलत समझे या सही … अपनी वासना से मजबूर होकर मैं भी उनके प्रति झुकने लगी। जिस्म की आग तो मेरे अन्दर भी लगी हुई थी और मैंने भी उनको जलाना शुरू कर दिया और मैं जानबूझकर उनके सामने झुककर काम करने लगी, जिससे मेरे बड़े बड़े गोरे सुडौल दूध उनको नजर आए।


धीरे धीरे मैं उनके साथ वैसा ही करने लगी, मेरे ससुर इस मामले में काफी होशियार थे और वो मेरी इन हरकतों को अच्छे से भांप गए।


जल्द ही वो मुझे देख कर मुस्कुरा देते और उन्हें देखकर मेरे चेहरे पर भी हल्की मुस्कुराहट आ जाती। अब हाल ये हो गया था कि दोनों के बदन पर बारूद लगा हुआ था, बस कमी थी उस बारूद में आग लगाने की। ससुर मुझे देख कर हंसते हुए अपने लन्ड को सहलाने लगते।


मैं भी मुस्कुरा देती थी। लेकिन पहल कोई भी नहीं कर रहा था दोनों के ही मन में एक दूसरे का डर था क्योंकि दोनों का रिश्ता ही ऐसा था और ऊपर से हम दोनों कि उम्र भी एक दूसरे से मेल नहीं खाती थी। मेरे ससुर मुझसे 30 साल के बड़े थे।



इधर मैंने भी सोच लिया था कि अगर ससुर जी ने मेरे साथ कुछ करना चाहा, तो मैं उन्हें मना नहीं करूंगी क्योंकि मुझे अपने जिस्म की आग अब बर्दाश्त नहीं हो रही थी। हम दोनों के बदन में ही चुदाई की गर्मी भरती जा रही थी और हम दोनों ही जानते थे कि दोनों के दिल में क्या चल रहा है लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि किसी को कुछ बोले या आगे बढ़ कर पहल करे।


फिर साल 2020 में अचानक से सारे देश में लॉकडाउन लग गया। इस बीच न हम लोग कहीं जाते थे और न ही हमारे यहां कोई आता था। मेरे पति का भी आना मुश्किल हो गया था क्योंकि सभी साधन बंद हो चुके थे। अब मैं और ससुर जी सारा दिन घर पर ही रहते।


इस बीच हम दोनों के बीच की वासना अपने चरम पर पहुंच गई। ससुर जी की हवस भरी नज़रें मुझे बेहद ही गंदी तरह से देखने लगीं और अब मुझसे भी अपने आप पर कंट्रोल नहीं होता था। मैं रोज अपनी उंगलियों से अपने आप को शांत करने लगी लेकिन फिर भी मेरा बदन किसी मर्द को पाने के लिए उतावला हो गया था। आखिर में वो दिन आ ही गया जब हम दोनों का सब्र टूट गया।


हुआ यूं कि एक दिन शाम को खाने से पहले मैं खाना खाने के लिए ससुर जी को बुलाने उनके कमरे में गई। उस वक्त वो बिस्तर पर बैठे हुए थे और सामने मेज पर शराब रखकर पी रहे थे। मैं उन्हें खाने के लिए बोली और वापस चली आई। कुछ समय बाद वो खाना खाने के लिए आए और हम दोनों ने खाना खाया।


खाना खाने के बाद मैं साफ सफाई करने लगी और फुर्सत होकर अपने कमरे में जाने लगी। तभी मेरे ससुर जी ने मुझे आवाज लगाई।


ससुर - रिया बहूं मैं -जी पापा जी आई मैं उनके कमरे में गई तो उन्होंने मुझसे पानी लाने के लिए कहा। मैं पानी का जग लेकर उनके पास गई और उन्होंने पानी अपने दारू वाले गिलास में भरा और बाक़ी का जग का पानी अपने जग में भर लिया।


फिर उन्होंने दारू का एक सिप पिया। दारू के नशे में चूर थे उनकी आंखों में लाली और आवाज कंपकंपा रहीं थीं जब मैं उनसे खाली जग वापस लेने लगी तो उन्होंने मेरे हाथों को बड़े प्यार से सहलाया और मुझे देखते हुए मुस्कुरा दिये। उन्हें देख कर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान की लहर आ गई।


ऐसा होना हम दोनों के लिए अब आम बात हो गई थी।

मैं - पापा जी आज आपने ज्यादा पी ली है।

ससुर - रिया जब से तुझे देखा है बस तुझे चोदना चाहता था तुम बहुत खूबसूरत है।


मैं - आज आप अपने होशोहवास खो बैठे हों तभी अचानक से ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और एक झटके में मुझे अपनी ओर खींचकर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया।


मैं उनसे छूटने के लिए जोर लगाने लगी और बोली- ये क्या कर रहे है आप पापा जी … छोड़िये ये सब गलत है। आपने ज्यादा पी ली है शायद इसलिए भूल गए हैं कि मैं आपकी बहू हूँ।


ससुर जी - हां मैंने ज्यादा पी ली है रिया और ये कुछ भी गलत नहीं है। रिया, हम दोनों ही को पता है कि हम एक दूसरे से क्या चाहते हैं। आज तुम मुझे मत रोको।


तुम भी एक मर्द का साथ पाने के लिए तड़फ रही हो। मैं- नहीं नहीं पापाजी, आप मुझे छोड़ दीजिए। ये सब किसी को पता चल गया तो बड़ी बदनामी होगी, आप इस बात को समझिए।


मैं जानबूझकर दिखावे का विरोध करने लगीं।


ससुर जी- जब कोई किसी को बताएगा, तभी तो किसी को पता चलेगा। जो बात रहेगी, हम दोनों के बीच रहेगी।


रिया तुझे देखकर मैं हमेशा से बैचेन रहता था कब तेरी रसभरी चुचियों को चूसने को मिलेगी, तेरी चुत ओर गांड़ चोदने को मिलेगी।


इतना कहते हुए उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और मेरी चिकनी कमर को कस कर पकड़ लिया।


वो मेरे गोरे गुलाबी गालों को चूमने लगे। मैं ससुर की बाहों में मचल रही थी और बोले जा रही थी- नहीं पापाजी, ऐसा मत कीजिए।


लेकिन मजा मुझे भी आ ही रहा था और मैं केवल झूठा विरोध कर रही थी। तभी ससुर जी ने मेरे गुलाबी होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। ममममममम।।,हहहहहहह।।,इइइइइगिग।।। कुछ देर में मेरा विरोध भी खत्म हो गया और मैं भी उनसे लिपट गई।


मैंने अपनी दोनों बाहें हार बना कर ससुर जी के गले में डाल दी।।, मन ही मन मैं बहुत खुश हो रही थी और सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि आज ससुर जी ने ज्यादा शराब पी ली, जिससे उनके अन्दर इतनी हिम्मत आ गई कि उन्होंने खुद ही शुरूआत कर दी।


कुछ देर मेरे गालों को चूमने के बाद उन्होंने मेरे चेहरे का दोनों हाथों से थामा और मेरे होंठों पर फिर से अपने होंठ लगा दिए।, मैं भी उनके होंठों से होंठ लगा कर उनको चुम्बन में साथ देने लगी थी, साथ ही मैं अपने हाथों से उनके बालों को सहलाने लगी थी।


वो भी समझ गए थे कि चिड़िया ने दाना चुग लिया है। वो मेरे मुँह में अपनी जीभ डालने की कोशिश करने लगे थे।, खुद मैं इतनी जोश में आ गई थी कि अपनी जीभ निकाल कर उनके मुँह में डालने लगी जिसे वो अपने दांतों से हल्के हल्के काटते हुए चूसने लगे। आइआइटी।।,ममममममम।।।,ईईईईईईईई।।।ममममममम।


मैं उनकी जांघ पर बैठी हुई थी और उन्होंने मेरी साड़ी कमर तक निकाल दी थी। मेरे सामने टेबल पर ससुर जी का दारू का ग्लास बना रखा था।

मुझे प्यास लग रही थी और मेरा गला सूख रहा था। मैंने झट से उनका पैग उठाया और एक ही सांस में हलक के नीचे उतार लिया। ससुर जी ने ये देखा तो मुस्कुरा दिए। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर कर जोर से जकड़ा हुआ था।


मै उनकी बांहों में अतृप्त यौवना सी मचल रही थी। अब मेरे अन्दर भी शराब की मस्ती छाने लगी थी। फिर उन्होंने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और बिस्तर पर खींच लिया।


बिस्तर पर ले जाकर उन्होंने तुरंत अपनी बनियान और लुंगी निकाल दी वो पूरी तरह से नंगे हो गए थे।। उनके लन्ड को देखते ही मेरे होश उड़ गए क्योंकि उनका लन्ड मेरे पति से काफी लम्बा और मोटा था।, सुपाड़ा भी शलगम की तरह से मोटा था। और ससुर ने मेरी साड़ी को भी अलग कर दिया। एक झटके में वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे चेहरे को जोर जोर से चूमने लगे।


हम दोनों ही बेहद उतावले हो गए थे और एक दूसरे को तेजी से चूम रहे थे। कुछ देर बाद ससुर जी मेरे ब्लाउज के बटन खोलने लगे, लेकिन मेरे दूध के कसाव के कारण बटन खुल नहीं रहा था। ससुर जी बेहद उतावले हो चुके थे और उन्होंने दोनों हाथों से ब्लाउज को पकड़ा और एक झटके में सामने से ब्लाउज फाड़ दिया, जिससे सारे बटन टूट गए।


अन्दर ब्रा नहीं होने के कारण मेरे दोनों दूध एक झटके में उछल कर उनके सामने तन गए। मेरे बड़े बड़े तने हुए दूध देखकर ससुर जी जैसे पागल से हो गए।, उन्होंने मेरे मम्मों पर हमला बोल दिया और अपने दांतों से मेरे निप्पलों और स्तनों को बारी बारी से चूस कर काटने लगे।


मेरे बड़े बड़े दूध पर वो जगह जगह काटे जा रहे थे और मैं मचलती जा रही थी- आआह हहआ आहह पापा जी आआ ।।, ममममममम।।, ईईईईईईईई।।।, ममममममम।।।। ईईईईईईईई।।।। ममममममम।।।।ऊई मम्मी।।।।हह कैसे कर रहे हैं … आआ हह दर्द हो रहा है पापा जी … आऊऊच आआ आहह।


ससुर जी मेरे मम्मों को बिल्कुल चूस चूस कर निचोड़ रहे थे और मुझे काफी तकलीफ हो रही थी लेकिन मैं भी उस समय पूरे जोश से भरी हुई थी और अपनी शर्म को दूर करते हुए अपने आप को उनको सौंप चुकी थी। वो दोनों हाथों से मसलते हुए दोनों मम्मों को बुरी तरह से चूम रहे थे। फिर वो अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे पेटीकोट के अन्दर डालने लगे लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।


मेरे रोकने के बावजूद उन्होंने अपना हाथ अन्दर डाल दिया और मेरी जांघ को सहलाते हुए अपना हाथ मेरी चूत तक ले गए।। मैंने चड्डी भी नहीं पहनी थी और उनका हाथ मेरी चूत पर चला गया। उन्होंने अपने अंगूठे से चूत को मसलना शुरू कर दिया और चूत से निकल रहा पानी उनके अंगूठे पर लग रहा था जिससे अंगूठा चिपचिपा हो गया और उन्होंने अंगूठा चूत में डाल दिया।


‘ऊईईई आहहह आह नहींईईई रुकिए आहहह रुकिए।’आआइइइ।।,ममममममम।।। ईईईईईईईई।।।, फिर उन्होंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और एक झटके में पेटीकोट नीचे खींच दिया।


अब मैं भी पूरी तरह से नंगी हो गई थी। ओर ससुर जी के चोड़े सीने के नीचे दबी हुई थी।, ससुर जी का लंड देखकर ही मैं समझ गई कि ये मेरी हालत खराब कर देंगे। उनका लंड लगभग ९ इंच लंबा और काफी मोटा था। उन्होंने मेरी चूत को देखा और मेरे दोनों पैरो को एक साथ झटके से फैला दिया और अपना मुँह मेरी चूत पर लगाकर चाटने लगे।


मैं जोर जोर से उछलने लगी क्योंकि उनके चाटने से मुझे काफी गुदगुदी हो रही थी- आह हहह आहहह ऊईईई मां आआऊच ओह होह रुकिए आहहह! आआआआइ।।,ममममममम।।, ईईईईईईईई।।। ममममममम।।। ईईईईईईईई।।।, ममममममम हहहहहहह इइइइइगिग।।।।


जल्द ही मेरी चूत पानी से भर गई थी। मेरे ससुर भी काफी उतावले हो गए थे और वो तुरंत ही मुझे चोद लेना चाहते थे।, वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे पैरों को फैलाकर लंड को चूत में लगाया और तुरंत एक धक्का लगा दिया।


ससुर जी का फोलादी लंड मेरी चूत को फैलाते हुए आधा अन्दर तक घुस गया।। मेरी हिचकी के साथ ही लम्बी चीख निकल गई।। उईईईईई मम्मी।,मररररर गई।।।। आआआआइ।।, तुरंत ही उन्होंने दूसरा धक्का भी लगा दिया और लंड चूत के आखिरी छोर तक बच्चेदानी में पहुंच गया- ऊईईई मम्मी रेरेए … मर गई।।।, उईईईईई मम्मी मररररर। गई।, आआआआइ।, ममममममम।।, ईईईईईईईई।।। ममममममम।।।, हहहहहहह।।


मुझे काफी ही दर्द हुआ लेकिन बहुत अच्छा लगा।कई दिनों बाद मेरी चूत ने लंड का स्वाद चखा था। इतना लम्बा और मोटा लन्ड मैं पहली बार लें रहीं थीं।।, ससुर जी ने मुझे जकड़ लिया और अपने दोनों हाथों को मेरी पीठ पर लगाकर मुझे अपने सीने से लगा लिया। अब उन्होंने दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए। ‘आह आह ऊईईई ऊईईई धीरे धीरे आह आआऊच आह ।,फषषचचच।।,फफफटटटट।।,षचफच।।आआइआ।।, ईईईईईईईई।,


मेरी सिसकारियां जोर जोर से निकलने लगी ’ऐसी आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगीं। जिस हिसाब से वो मुझे चोद रहे थे उससे मुझे पक्का यकीन हो गया कि ससुर सेक्स के एक माहिर खिलाड़ी हैं और इनके साथ मुझे बहुत मजा आने वाला है।


ऐसी चुदाई करने का स्टाइल न मेरे पति का … और न ही ऐसा लंड ही उनके पास था। सुसर जी को चोदते हुए करीब 10 मिनट ही हुए थे कि मेरी चुत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया।।, मैं झड़ गई थी।



लेकिन ससुर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए चोद रहे थे। फिर उन्होंने मेरी दोनों टांगें उठा कर अपने कन्धों पर रख कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा कर चोदने लगे।।, उईईईईई मम्मी मररररर गई।, आआआआइ ममममममम।, ईईईईईईईई।, ममममममम हहहहहहह।। इइइइइगिग।, ससुर जी का लन्ड हर धक्के से मेरी बच्चेदानी में जा कर तहलका मचा रहा था।


मैं फिर से झड़ गई।। मैंने ससुर जी को अपनी तरफ खींच कर अपनी बाहों में भर लिया। ससुर जी को मुझे चोदते हुए 35 मिनट के करीब हो गये थें।। अभी भी चोदने में लगे हुएथे।। मममम।। चचचचचचच।। ईईईईईई।।।।ममममममम।


मैं भी अपने होंठों से जीभ से ससुर जी के चुचियों के निप्पल को अपने मुंह से चूसने लगी और जीभ से चाटने लगी। इससे ससुर के मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलने लगी और वो ओर जोर जोर से मुझे चोदते हुए अकड़ने लगे।, उनके लन्ड ने गर्म गर्म ढेर सारा वीर्य सारा माल मेरी चूत में उड़ेल दिया।, मैं भी उनके साथ ही फिर से झड़ गयी।


मेरी चुत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया।।। आआआआइ ।।। ममममममम ईईईईईईईई ममममममम ईईईईईईईई ममममममम।।।, हहहहहहह।।। इइइइइगिग।।।।, लेकिन मैं जानतीं थी वो काफी उतावले होकर चोद रहे थे।


ये तो मैंने अपने होंठ जीभ से ससुर के निप्पल को अपने मुंह में ले चाट कर उनको झड़ने पर मजबूर कर दिया था। नहीं तो वो दारू के नशे में चोदते रहते।। मेरी हालत खस्ता करते रहते।।। इसके बाद उनका समय और ज्यादा होने वाला है।क्योंकि पहली बार तो मैंने उनको झड़ने पर मजबूर कर दिया था।


फिर ससुर जी उठे और बगल में लेट गए।, कुछ देर बाद मैंने भी अपने पेटीकोट से अपनी चूत को पौंछा और चादर ओढ़कर लेट गई। मैंने तो चादर ओढ़ रखी थी लेकिन ससुर जी ऐसे ही खुले में नंगे लेटे हुए थे। जल्द ही उनका बड़ा सा लंड सिकुड़ कर बैठ गया।


ससुर जी का बदन पसीने से भीग चुका था और वो आंख बंद किए लेटे हुए थे। मैं भी लेटी हुई पहली चुदाई के बारे में सोच रही थी।


हम दोनों के बीच आज से एक नए रिश्ते की शुरूआत हो गई थी लेकिन इस रिश्ते को हम दोनों ही किसी के सामने नहीं ला सकते थे। मुझे खुशी इस बात की थी कि अब मुझे अपनी प्यास बुझाने के लिए घर पर ही एक लम्बा और मोटा लंड का सहारा मिल गया था। भले ही वो मेरे ससुर हैं और मेरे बाप की उम्र के थे लेकिन हम दोनों ही एक दूसरे की प्यास बुझाने के लिए यह सब कर रहे थे।


मुझे इस बात का बिल्कुल भी पछतावा नहीं था क्योंकि अगर मैं बाहर किसी से चुदाई करवाती तो भी बदनामी होनी ही थी। इससे अच्छा है कि घर में ही मुझे अब सब कुछ मिल जाएगा।


यही सब सोचते हुए मैं ससुर जी के लंड की तरफ देख रही थी जो कि सिकुड़ गया था और उसका सुपारा बाहर निकला हुआ मेरी तरफ ही था।


इतने बड़े सुपारे को मैं पहली बार ही देख रही थी और इस लन्ड ने ही मेरी चुत को चोद कर सुजा दिया। क्योंकि इतना बड़ा लंड और सुपारा न तो मेरे बॉयफ्रेंड का था और न ही मेरे पति का। कुछ देर बाद मेरे ससुर जी ने अपनी आंख खोली और मेरी तरफ देखा।


मैंने शर्म से अपनी आंखें बंद कर लीं। उन्होंने मुझसे कहा- रिया, तुम चिंता न करो, ये सब बात कभी किसी को पता नहीं चलेगी हम दोनों ही इस बात को गुप्त रखेंगे।


मैंने भी अपना सर हिलाकर सहमति जताई। इसके बाद ससुर जी ने मेरे चादर को एक झटके में हटा दिया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया। इसके बाद तो हम दोनों फिर से गुत्थमगुत्था होने लगे। कभी मैं ससुर जी के ऊपर आती, कभी वो मेरे ऊपर आते।, इस तरह हम दोनों ही बिस्तर पर पलटते रहे।


कुछ देर बाद हम दोनों रुके और मैं ससुर जी के ऊपर थी। मेरे बड़े बड़े दूध उनके सीने पर दबे हुए थे। उन्होंने मेरे सर को नीचे किया और मेरे होंठों को चूमने लगे।


मैं भी उनका साथ देने लगी। ससुर जी अपने दोनों हाथों से मेरे उभरे हुए चूतड़ों को सहलाते हुए दबा रहे थे। फिर मेरे चूतड़ को फैलाकर अपनी एक उंगली को गांड के छेद पर रगड़ते हुए नीचे चूत तक ले जाते और उंगली को चूत में डाल देते। उनके बार बार ऐसा करने से मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और मैं अपनी जीभ ससुर जी के मुँह के अन्दर डालने लगी, जिसे वो बड़े प्यार से चूस लेते।


मेरे पेट में उनका गर्म गर्म लंड फिर से महसूस हो रहा था जो कि अब पूरी तरह से खड़ा हो कर लम्बा और मोटा गया था और उनका सुपारा मेरी नाभि में घुस रहा था। उनके लंड से निकल रहा चिपचिपा पानी मेरी नाभि को गीला कर चुका था। फिर कुछ देर बाद ससुर जी ने मेरे दोनों निप्पलों को अपने सीने के बगल से बाहर निकाला क्योंकि मेरे दूध उनके सीने में दबे हुए थे।, वो मेरे दोनों निप्पल को चुटकी में लेकर मसलने लगे।


ऐसा करने से मेरे बदन के अन्दर करंट सा दौड़ने लगा और मैं अपने दूध को उनके सीने पर रगड़ने लगी। उनके सीने पर बहुत बाल थे जिसके कारण जल्द ही मेरे दूध पर कई जगह जलन होने लगी। फिर ससुर जी ने मुझे अपने ऊपर से उठाया और खुद घुटनों पर बैठ गए।


उन्होंने मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया।, मैंने भी अपनी दोनों टांगें फैलाईं और उनकी कमर में टांग डालकर उनके गले में अपनी बांहें डाल दीं। ससुर जी ने नीचे से मेरे चूतड़ को एक हाथ से थामते हुए मुझे सहारा दिया और मुझे चूमने लगे।कभी गाल पर कभी गले पर, कभी होंठ पर कभी सीने पर। वो एक हाथ से मेरी गदराई हुई पीठ को सहलाते जा रहे थे।


मैं भी आंख बंद किये उस हसीन पल का मजा ले रही थी। कुछ देर में ही मेरी चूत पानी से भर गई और टप टप करते हुए पानी ससुर जी के हाथ में गिरने लगा। ससुर जी ने उस पानी को मेरी गांड पर लगाने लगे। जल्द ही मेरी गांड पूरी तरह से चिपचिपा गई।


अब ससुर जी ने अपने नीचे लगाए हुए हाथ की एक उंगली मेरी चूत में डाल दिया। ‘ऊईईई अम्मा … हाय आह।’आआइ मममममम ससुर जी उंगली को अन्दर बाहर करने लगे जिससे कि पोच्च पोच्च की आवाज निकल रही थी।


मैंने कहा- ये क्या कर रहे हैं आहह! ससुर जी- यही सब में तो मजा आता है, तू बस मजा लेती रह! कुछ देर तक ऐसे ही मैं उनसे लिपटी रही।, फिर उन्होंने अपने लंड को चूत में रगड़ना शुरू कर दिया। वो बोले- ऐसे ही डाल रहा हूँ मजा आएगा।ऐसा बोलते ही उन्होंने लंड अन्दर डाल दिया और मेरी गांड को जोर से अपनी तरफ दबा लिया जिससे उनका पूरा लंड एक बार में ही मेरी चुत में अन्दर तक समा गया। ससुर जी ने मेरी कमर को थामा और मुझे ऊपर नीचे करने का इशारा किया।


मैं अपनी कमर को नागिन की तरह लहराने लगी जिससे लंड अन्दर बाहर होने लगा।, ऐसा मैंने कभी नहीं किया था और मुझे इस पोजीशन में काफी मजा आ रहा था। ससुर जी भी दोनों हाथों से मेरी गांड को सहला कर पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगें।।।


फिर कुछ देर बाद ससुर जी मुझे पलटी देकर अपने नीचे दबा कर जोर जोर से चोदने लगे उईईईईई।।, मम्मी।।, मररररर।।।, ममममममम।।।, ईईईईईईईई।।।। ममममममम।, अबकी बार ससुर जी ने मुझे हर तरह से घोड़ी बनाया, अपनी गोद में उठा कर, अपने उपर चढकर, मेरे ऊपर चढ़ कर, ओर मुझे खड़ी करके सभी स्टाईल से चोदा।।


मेरी चुत ने ढेर सारा पानी कई बार छोड़ा।, मैं बहुत बार झड़ी।


ससुर ने भी हर बार मेरी चुत में अन्दर तक अपने ढेर सारे वीर्य से मेरी बच्चेदानी तक लबालब भर दिया था।


उस रात ससुर जी ने मुझे 4 बार दारू पी पी कर जमकर चोदा।, अब ससुर मुझे अपनी बीवी की तरह ही दिन रात खूब चोदते रहते हैं। मैं


भी उन्हें पति की तरह मानकर उन्हें बीवी की तरह से खुश रखने लगीं।। और ससुर ने मुझे चोदते हुए मुझे अपने 3 बच्चों की मां बनाया और पति से मैं 2 बच्चों की मां बनीं।


इस तरह से मैं 5 बच्चों की मां बनीं। घर में मैं और ससुर पति-पत्नी की तरह रहते थे और ससुर मेरी खुब चूदाई करते। घर से बाहर हम ससुर बहु की तरह से रहते।


आपकी रिया। rs9533749@gmail.com


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