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बारिश में भीगी अंशू ने सूखने के बाद लण्ड की सलामी ली : Sex Story

हैलो दोस्तो मैं ओजस अलीगढ़ से एक बार फिर हाजिर हूँ अपनी एक नई चुदाई की वास्तविक घटना Sex Story के साथ जो अभी कुछ दिन पहले ही मेरे साथ घटी।


तो दोस्तो जैसा कि आप सब जानते हैं कि हमारी अलीगढ़ में एक पॉली प्रिंटिंग की भी फैक्ट्री है। हमारे पिताजी के एक बहुत पुराने क्लाइंट हैं जिनका माल हमारे यहाँ से बहुत समय से जाता है तो उनसे रिश्ते भी हमारे घरेलू बन चुके हैं।


उनके 4 बच्चे हैं 3 लड़कियां और एक लड़का जो कि आर्मी में है। उनकी छोटी लड़की अंशू ही ज्यादातर उनके व्यापार का और घर का काम संभालती है। चूँकि अंशू का आना जाना हमारे यहाँ ज्यादा रहता है तो मेरी भी उससे अच्छी दोस्ती हो गई है और हमारी आपस में अच्छी बनती है।


वैसे अंशू मुझसे भईया कहती है और मैं उससे दीदी। और न कभी पहले हमने एकदूसरे को हवस की नज़रों से देखा था। वैसे अंशू के बारे में बता दूँ उसकी उम्र करीब 23 साल है और शरीर उसका बड़ा ही आकर्षक और मजबूत है, 5.6 फिट लंबी है और उसका फिगर बिल्कुल कटीली नागिन की तरह 32-28-36 का है। अंशू बहुत ज्याद सुंदर नहीं है पर दिखने में अच्छी है और उसक रंग भी गोरा ही है।


हुआ यूँ कि इस सीजन की पहली बारिश को ही अंशू अपनी एक्टिवा से अलीगढ़ किसी काम से आई तो पूरी तरह से बारिश में भीग गयी। लगभग आधा घंटे की तेज बारिश में वो एक्टिवा पर चली तो इतनी भीग गई कि उसका अंग अंग बारिश के पानी से रूबरू हो गया।


बारिश में भीगते हुए वो हमारे घर आ गयी और आके बैल बजाई। उस दिन पापा अकेले ऑफिस गए थे और मम्मी भी मेरे मामा के घर गई हुई थीं तो मैं अकेला ही घर पे था। मैंने दरवाजा खोला सामने अंशू एक सफेद रंग का सूट पहने हुए खड़ी थी। तरबतर भीगी हुई ऐसी की उसमें से उसकी लाल रंग की ब्रा और पैंटी भी साफ चमक रही थीं।


मैंने कहा अरे अंशू दीदी आओ अंदर आओ कहाँ से आ रही हो भीगती हुई। वो बोली पूछो मत भईया एक फ्रेंड से मिलने आयी थी अलीगढ़ और बारिश में इतनी भीग गई कि अब कहीं जाने लायक नहीं रही तो सोचा यही रुक के कपड़े सूखने के बाद निकलूँ। कहाँ हैं आँटी कहाँ हैं?


मैंने कहा कोई घर पे नहीं है दीदी मैं अकेला ही हूँ। कोई न आप टेंसन मत लो मैं आपके कपड़े सूखने का इंतजाम करता हूँ। मैंने उनको गेस्ट रूम की तरफ बढ़ाया और मैं भी उनके पीछे पीछे आगे बढ़ा। क्या बताऊँ दोस्तो सामने गीली अंशू की बड़ी सी हिलती हुई गीली गाँड उसमें फंसी हुई उसकी लाल पैंटी और पैंटी के ऊपर सफेद सलवार जो कि पानी से पारदर्शी हो गई।


मेरा तो लण्ड खड़ा हो गया उसे देख के। मेरा लण्ड मेरी चड्डी और शॉर्ट्स को फाड़ के बाहर आने को बेताब हो गया।


मैंने अंशू को टॉवल देके बाथरूम की तरफ बढ़ाते हुए कहा आप दीदी कपड़े उतार के मुझे दे दीजिए मैं मशीन में सुखा देता हूँ अभी। वो बोलीं ठीक है भईया और बाथरूम में घुस गई। अंदर जाके उसने कपड़े उतारे और हल्का सा गेट खोलके मुझे कपड़े दे दिए कि लो भईया सुखा दो। अंशू को मैंने उस हल्के से खुले गेट में से इतना तो देख लिया कि उसने नीचे टॉवल लपेट ली थी और ऊपर कुछ भी नहीं पहना था। अंशू के गोरे बूब्स और उनके ब्राउन निप्पल देख के मेरा लण्ड और भी तनके लोहे की तरह सख्त होके उड़ान भरने लगा।


मैंने जैसे तैसे अपने लण्ड को संभाला और अंशू के कपड़े लेके रूम से बाहर आया अंशू ने अपनी ब्रा पैंटी भी उन्हीं कपड़ों में मुझे दे दी। मैं मशीन के पास गया और वहाँ अंशू के कपड़े सुखाए। अंशू की ब्रा के 32 नंबर और उसकी पैंटी पर पड़ा 36 नंबर पढ़ के तो मेरा मन पूरा उसे चोदने को करने लगा।


मैंने बाहर से ही आवाज लगाई दीदी तो अंशू ने हल्का सा गेट खोला और उसमें से देखते हुए बोली सूख गये?

मैंने कहा नहीं दीदी मशीन में पूरी तरह से कहाँँ सूखते हैं और उसकी तरफ उसकी ब्रा की मोटी सी तनी बढ़ाते हुए कहा कि देखो गीले हैं हल्के से अभी।


वो बोली हाँ हैं तो सही फिर क्या किया जाए यार? मैंने कहा आप बाहर आओ मैं आपको आयरन प्रेस देता हूँ उससे सुखा लीजिए आप।

तो वो बोली ठीक है मुझे कुछ पहनने को दो मैं आती हूँ। मैंने जानबूझकर अपनी एक टाइट कॉलर वाली टी शर्ट निकाल के अंशू को दी जिसमें बटन भी नहीं थे।


अंशू ने उसे पहन के कहा नीचे पहनने को तो कुछ दो। मैंने कहा अरे नीचे बाँधी तो है तौलिया उसे पहन के ही आ जाओ कौन सा यहाँ कोई है बस मैं और आप ही तो हैं।


अंशू ने बाथरूम का गेट खोला और मेरी तरफ इठलाकर मुस्कुराते हुए देखा और कमरे में आ गयी बोली लाओ दो प्रेस। मैं तो एक मिनट उसे देखता ही रह गया उसके सख्त बूब्स मेरी टी शर्ट में से बाहर आने को बेताब और निप्पल टी शर्ट में से उठकर बाहर और उसका क्लीवेज, उसकी गांड़ गीली तौलिया में। मेरा शरीर वही सुन्न हो गया और मेरा लण्ड इतना टाइट हो गया कि शॉर्ट्स का तम्बू बनने लगा। अंशू ने मुझे झकझोरा और बोली कहाँ खो गए भईया लाओ प्रेस दो।


मैंने उसे प्रेस दी वो उसे गरम करके अपने कपड़े सुखाने लगी। मैं वहीं उसके पास बेड पर बैठ गया और उससे कहा और बताओ अंशू दीदी पहले कभी आयी हो ऐसे तौलिया बाँध के बाथरूम से बाहर। उसकी निगाहें बार बार मेरे खड़े लण्ड की तरफ जा रही थीं वो समझ चुकी थी कि मैं उसकी चोदने का पूरा मन बना चुका हूँ।


फिर वो बोली कि नहीं मैं तो पहली बार आयी हूँ पर मुझे लगता है तुम आ जाते हो ऐसे बाहर। मैं हँसा और बोला मेरा बाथरूम रूम में ही है इसलिए मैं तो नंगा ही आ जाता हूँ। मैं तो बाहर आके ढंग से रगड़ रगड़ के पोंछता हूँ पहले तब सुकून से कपड़े पहनता हूँ।


अंशू बोली सही है मजे हैं तुम्हारे। मैंने कहा आप ले लो ऐसे मजे मना किसने किया है। मैं जा रहा हूँ बाहर आप पहले नंगी होके ढंग से रगड़ना तब पहनना कपड़े। वो बोली नहीं मैं ऐसे ही सही हूँ।


मैंने कहा अच्छा कोई न मैं उधर मुँह कर लूँगा तब पहन लेना। वो बोली नहीं रहने दो वैसे भी मुझे तुम्हारा इरादा सही नहीं लग रहा। मेरे लण्ड की तरफ इशारा करते हुए बोली जरा इसकी हालत देखना कैसे बिना बम्बू के तम्बू बना दिया है।


मैंने कहा अरे अब इतनी हॉट सेक्सी फिगर वाली लड़की मेरे सामने खड़ी होगी तो ये तो खड़ा होगा ही इसे थोड़े ही पता है किसकी चूत के सामने सलामी देनी है और किसकी के नहीं।


अंशू ने आयरन प्रेस को ऑफ करके साइड में रखा और बोली बस सलामी देता है या सलामी के बाद का भी कुछ जानता है।


मैंने कहा सलामी क़ुबूल करो इसकी पहले तब बताएगा ये। उसने कहा वो कैसे क़ुबूल होगी बताओ।

मैंने वहीं एक झटके में अंशू की तौलिया खींच के उतार दी और बेड पे दूसरी तरफ फेंक दी।

अंशू एक साथ चौंकी और अपनी चिकनी चूत को हाथों से ढकते हुए बोली ये क्या कर रहे हो भईया?


मैं वहीं उसके पास खड़ा हुआ और उसको अपनी बाँहों में खींच के भर लिया और उसकी चूत पे हाथ फिराते हुए बोला दीदी डार्लिंग इतनी चिकनी चूत लेके फ्रेंड से तो मिलने नहीं जा रही थीं आप। साफ पता चल रहा है आज ही झाँटें साफ की हैं आपने। बॉय फ्रेंड से मिलके चुदाई का प्रोग्राम था आपका।


अंशू बोली बड़ा जानते हो लड़कियों के बारे में।

मैंने कहा अच्छा ठीक है अगर उससे अच्छी चुदाई आज तुम्हारी मैं करूँ तो मुझे क्या दोगी?

बो बोली सब कुछ ले लोगे फिर कुछ बचेगा क्या लेने को।

मैंने कहा हाँ। फिर उसे छोड़ देना और जब भी चुदाई का मन करे मुझसे करवाना।


अंशू बोली ठीक है देखते हैं। कितना दम है तुम्हारे लण्ड की सलामी में।

मैंने तुरंत वहीं अपना शॉर्ट्स चड्डी सहित उतार दिया और अपना 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लोहे की रॉड जैसा खड़ा टाइट लण्ड अंशू के हाथ में देते हुए कहा लो क़ुबूल करो सलामी।


अंशू हाथ में लण्ड लेके चौंक गई उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वो मेरे लण्ड पे हाथ फिराने लगी और उसको सहलाते हुए बोली आज ब्रेक अप पक्का। आज से मुझे ये ही लण्ड चाहिए।


मैंने कस के अंशू को बाँहों में जकड़ा और उसके होठों को अपने होठों से चूसना शुरू किया। साथ ही उसके नंगे चूतड़ों पर हाथ फिराने लगा कभी उसकी गाँड की दरार में मेरी उंगली घूमती तो कभी उसकी टी शर्ट में उसकी पीठ पे और उसके चूचों पे। अंशू भी मेरे लण्ड को कस के मसल रही थी और हिला रही थी।


थोड़ी देर बाद हम दोनों ने एकदूसरे की टी शर्ट को भी उतार दिया और दोनों बिल्कुल नंगे हो गये। मैंने अंशू को बिस्तर पे लिटा लिया और उसको चाटना शुरू किया उसकी गर्दन उसके बूब्स उसकी नाभि को मैंने कस के चूसा और उसके चूचे ऐसे निचोड़े जैसे उन्हें उखाड़ने का मन हो। पर अंशू को बहुत ही मजा आ रहा था।


फिर मैंने काफी देर तक उसकी चूत चाटी अंशू मेरे सर की बालों से पकड़ के अपनी गीली चूत पर दबा रही थी और जोर जोर से सिसकियाँ ले रही थी। फिर उसको 69 में लेके मैंने उसे अपना लण्ड भी चुसवाया।


69 में मैंने उसकी चूत में जीभ अंदर तक डाल के उसको चाटा और पानी निकाला वो भी मेरा लण्ड ऐसे चूस रही थी जैसे बरसों से प्यासी हो।


थोड़ी देर बाद मैंने उसे अपने ऊपर अपने लण्ड पे बिठा लिया और उसकी चूत में एक बार में ही पूरा लण्ड घुसा दिया। अंशू दर्द से जोर से चीखी और छूटकर ऊपर उठकर लण्ड अपनी चूत से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी पर मैंने उसे कसके अपनी बाँहों में जकड़ लिया। और नीचे से ही उसे चोदना चालू किया। अंशू कभी दर्द से चिल्लाती कभी मजा लेते हुए आह आह यस आह करती।


जब अंशू मेरे लण्ड पर उछल उछल कर थक गई तो मैंने उसे नीचे लिटा और ऊपर आके उसे चोदा। थोड़ी देर में ही अंशू का शरीर अकड़ा और जोर से उसकी चूत ने मेरे लण्ड पे पानी छोड़ा।


झड़ने के बाद उसकी चूत और टाइट हो गई तो मैंने उसकी बेड पर ही कुतिया बना लिया। कुतिया बनके उसकी चूत और टाइट हो गई और मेरा लण्ड मुश्किल से अंदर घुसा। अंशू भी चिल्ला चिल्ला के पूरा लण्ड अपनी चूत में ले गई उसकी आँखों में आँसू थे पर उसने ढंग से चूत में लण्ड लिया।


फिर मैंने अंशू को खड़ी करके घोड़ी बनाया और पीछे से ढंग से चोदा। अंशू ने फिर एक बार ढंग से पानी छोड़ा जो उसकी चूत से निकल के नीचे उसकी जाँघों से होता हुए उसकी एड़ी तक बहा।


फिर मैं भी झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा बताओ अंशू दीदी कहाँ झाड़ूँ। तो उसने कहा जहाँ तुम्हारा मन करे भईया। आज तुमने चुदाई ऐसी शरीरतोड की है मेरी की आज से ये पूरा शरीर तुम्हारा गुलाम हो गया।


मैंने भी जोर से तेजी से झटके लगाए अंशू की चूत में और लास्ट झटके में लण्ड उसकी गाँड में घुसा के अपना गाढ़ा माल उसकी गाँड में झाड़ दिया।


फिर हम दोनों बेड पर लिपटकर लेट गए और 3 राउंड और चुदाई की उसके बाद अंशू अपने घर चली गयी। और फिर जब भी हमें मौका मिलता है हम चुदाई कर लेते हैं।


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