बुआ के बेटे ने मेरी माँ की चुदाई की: Antarvasana
नमस्कार दोस्तो!
मैं विनय आप लोगों के लिए ले के आया हूँ सेक्सी मॅाम Xxx कहानी कि कैसे मेरी माँ ने मेरे बुआ के लड़के से मेरे रहते हुए चुदवाया।
तो दोस्तो, बात उस समय की है जब मैं 12th का पेपर दे रहा था। मेरी उम्र उस टाइम 18 साल की थी।
रात के करीब 8 बज रहे थे।
मैं पढ़ाई कर रहा था।
तभी बुआ का लड़का विकास मेरे घर आया और आँगन में बैठ गया।
मम्मी ने उसको पानी वगैरह ला के दिया और वो दोनों आपस में बातें करने लगे।
मैं आपको मम्मी का परिचय दे देता हूँ।
उनका नाम साधना है और उस समय उनकी उम्र 40 की थी।
देखने में बिल्कुल फिल्मों की रेखा लगती हैं।
हाइट 5.6 है, सांवला रंग।
फिगर की बात करें तो 34-32 और गांड उनकी 38 के आस-पास की होगी।
उस समय बुआ के लड़के विकास की उम्र 23 साल थी।
उन दोनों को बातें करते-करते रात के 9 बज गए।
तब मम्मी ने मुझे कहा, “विनय रूम में सो जाओ!”
मैं बोला, “नहीं मम्मी, मेरा सुबह पेपर है। 11 बजे तक पढ़ूँगा!”
तब मम्मी ने कहा, “चलो विकास, तुम्हें अपना कमरा दिखाती हूँ और हम वहीं बातें भी करेंगे। विनय को पढ़ने दो!”
क्योंकि बात 2005 की है, उस समय मिट्टी का एक नया कमरा हमारा बना था।
उसी में मम्मी और विकास चले गए और मैं आँगन में पढ़ाई करने लगा।
आधे घंटे बाद मुझे अहसास हुआ जैसे किसी ने अंदर से कमरे का गेट बंद किया हो।
जब मैं गेट की तरफ गया तो देखा गेट बंद था और अंदर दिया जल रहा था।
गांव में पहले तेल का दिया जलाते थे, वो वाला।
कमरे का गेट पल्ले की लकड़ी वाला था, जिससे कि हर पल्ले में थोड़ा जगह रह जाती है।
उस छेद से देखा तो मम्मी और विकास दोनों अंदर पलंग पर एक साथ लेटे हुए थे।
तो मैंने सोचा शायद मैं बाहर पढ़ रहा हूँ इसलिए ये लोग अंदर हो सोएंगे।
मैं यही सोच रहा था कि तभी मुझे ख्याल आया कि फिर ये गेट क्यों बंद किए और अगर सोना है तो दिया क्यों जला रखा है।
तभी मैंने जैसे दोबारा अंदर देखा तो मैं चौंक गया।
विकास अपना एक पैर मम्मी के ऊपर रख के उनके गालों को सहला रहा था और मम्मी भी अपना हाथ उसके सीने पर रखे हुए थी।
तभी विकास ने मम्मी को बोला, “साड़ी उतार दो!”
ये कहते ही मम्मी उठ के बैठ गई और साड़ी को उतार के लेट गई और विकास को बोली, “तुम भी उतार दो!”
तब विकास ने अपना पैंट और शर्ट उतार के सिर्फ कच्छे में आ गया और मम्मी का साया का नाड़ा खोलते हुए बोला, “मामी, आज तो जम के चुदाई करूँगा तुम्हारी!”
तो मम्मी बोली, “हाँ हाँ क्यों नहीं! तुम्हारे लिए हो तो मैं लेटी हूँ अपनी बुर फैला के!”
ये सब सुन के मेरा दिमाग ही खराब हो गया कि मम्मी ऐसे बातें कर रही हैं।
तभी विकास ने मम्मी को गांड उठा के उनका पेटीकोट खींच दिया।
अब मम्मी नीचे से पूरी नंगी थी।
अपना ब्लाउज भी खोल के मम्मी पूरी तरह से नंगी हो गई।
वो ब्रा और पैंटी नहीं पहनती थी।
तभी विकास ने भी अपना कच्छा निकल दिया और अपने लंड को मम्मी के हाथ में पकड़ा दिया।
मम्मी बोली, “हाय दइया! कितना मोटा और बड़ा हो रहा है रे!”
विकास ने कहा, “क्यों मामा का नहीं है क्या रे?”
मम्मी बोली, “नहीं रे! इससे तो बहुत छोटा और पतला भी है। और अब पहले जैसा चोद भी नहीं पाते!”
तब विकास ने कहा, “आज तेरी बुर का भरता बना दूंगा! सारी चुत की गर्मी बाहर आ जाएगी!”
मम्मी बोली, “कुछ करेगा या बस?”
इतना कहना था कि विकास उठ के बैठ गया और मम्मी की चुत में अपना मुँह लगा दिया।
दिए की रोशनी में मम्मी के बालों वाली बुर मुझे साफ दिख रही थी।
मम्मी ने बुर फैलाते हुए बोला, “अच्छे से चाटो विकास!”
विकास ने कहा, “क्या यार! इतनी बड़ी-बड़ी झांट में चाटने में मजा नहीं आ रहा!”
और वो ऊपर आ के मम्मी के दूध को पीने लगा जैसे कोई बच्चा।
मम्मी अपने दोनों हाथ से उसके चूतड़ को सहला रही थी।
तभी विकास ने कहा, “क्यों रंडी! कभी लंड चूसा है?”
मम्मी ने कहा, “छी! कभी नहीं!”
वो बोला, “आज चूस के देखो! मजा आएगा!”
पर मम्मी नहीं मान रही थी।
तो उसने लंड पर साड़ी लगा के बोला, “अब चूसो!”
मम्मी उसके जांघों पर बैठ के अब उसके लंड को धीरे-धीरे अपने मुँह में ले रही थी।
2 मिनट के बाद मम्मी बड़े आराम से चूसने लगी।
तभी विकास ने साड़ी हटा के पूरा लंड मम्मी के मुँह में दे के सर दबा दिया।
कुछ देर होल्ड करने के बाद मम्मी अब बिना कपड़े के ही बड़े अच्छे से चूस रही थी और बोल रही थी, “आज लगता है जन्नत मिलने वाली है!”
तभी विकास को भी जोश आ गया और मम्मी की चुत को अपने मुँह पर रखवा के चाटने लगा।
दोनों 69 में आ गए थे।
काफी देर चूसने के बाद विकास ने अपनी पिचकारी मम्मी के मुँह में छोड़ दी और सर को दबा रखा ताकि मम्मी सारा माल पी जाए।
और ऐसा ही हुआ।
जैसे ही मम्मी अलग हुई उल्टी करने लगी।
फिर दोनों अलग हुए और मम्मी बोली, “जा के पानी लाओ!”
तभी मैं भाग के अपने बिस्तर पर आ गया और दिया बुझा के सोने का नाटक करने लगा।
जब वो बाहर आया और मुझे सोते देखा तो मम्मी को बुलाया, “आ जाओ! यहीं कुल्ला कर लो। विनय सो गया है!”
मम्मी नंगी ही बाहर आके कुल्ला कर रही थी।
चांदनी रात में क्या लग रही थी!
मम्मी की गांड मेरी तरफ ही थी।
जैसे देख के मेरा नुनू जैसा लंड खड़ा हो गया था।
तभी विकास ने कहा, “यहीं लेट जाओ! यहीं मजे करेंगे। अंदर गर्म है!”
मम्मी बोली, “नहीं! अंदर चलो। गेट खुला रख देना। विनय तो सो गया है!”
उसके बाद दोनों अंदर चले गए।
थोड़ी देर बाद मैं भी गेट पर गया तो मम्मी फिर से लंड चूस रही थी।
शायद अब उनको अच्छा लग रहा था।
तब विकास ने कहा, “अब बस करो! चुत में भी तो ले ले!”
मम्मी बोली, “हाँ हाँ क्यों नहीं!”
और वो अपने पैर फैला के लेट गई।
विकास उनके ऊपर आके अपना लंड हिलाते हुए बोला, “क्यों जान-ए-मन रेडी हो?”
मम्मी ने उसका लंड पकड़ के अपने चुत पर रख दिया।
और विकास ने झटका दिया जिससे उसका लंड आधा मम्मी की बुर में घुस गया।
मम्मी रुकने के लिए कहती हुई कराहने लगी, “मार डाला साले! कितना मोटा है! मेरी तो चुत फट गई! आहाहा! आअह्ह! सस्सईई! उईई!”
तभी विकास ने फिर से झटका दिया और पूरा लंड मम्मी के भोसड़े में उतार दिया।
मम्मी कराहते हुए बोली, “निकल ले! नहीं तो मर जाऊंगी! पूरे बच्चेदानी तक घुसा दिया है!”
दो मिनट दोनों रुके रहे।
फिर विकास ने झटके देना शुरू कर दिया।
और अब मम्मी भी गांड उठा-उठा के चुदवा रही थी और बोल रही थी, “फाड़ दे मेरी चुत! कब से तड़प रही थी ऐसे लंबे और मोटे लंड के लिए! आज मिला है! चुत का भोसड़ा बना दो मेरे!”
और विकास ने जम के चोदते हुए बोला, “अब तेरी चुत पर मेरा लंड राज करेगा!”
ये कहते हुए मम्मी को बोला, “अब घोड़ी बनो!”
मम्मी बोली, “ओ क्या होता है?”
तो उसने कहा, “सब सिखा दूंगा तुझे रंडी!”
अब उसने मम्मी को खड़ा कर के घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड घुसा के बोला, “इसे कहते हैं घोड़ी!”
तब मम्मी बोली, “तो तू मेरा घोड़ा!”
ये कहते हुए विकास ने घोड़ी बना के करीब 5 मिनट पेलने के बाद बोला, “मेरा निकलने वाला है! कहाँ गिराऊंगा?”
तो सेक्सी मॅाम Xxx बोली, “भोसड़ी वाले! मुँह में गिराते समय नहीं पूछा! अब पूछ रहा है! सारा माल मेरी चुत में भर दे! तेरे लंड की सिंचाई से मेरे बुर की प्यास बुझेगी!”
विकास ने सारा बीज अपना मम्मी के बुर में भर दिया।
और जब अपना लंड निकाल रहा था तो सारा माल मम्मी के जांघों पर बहने लगा।
जैसे मम्मी ने अपने हाथ से साफ कर दिया और लेट के बोली, “विकास बहुत मजा आया! तूने थका दिया एक ही बार में!”
विकास बोला, “आज क्या है कल तू अपने झांट के बाल साफ रखना! फिर तुझे तेरे बेटे के सामने ही मजा दूंगा!”
तो मम्मी बोली, “ओ कैसे?”
तब विकास ने कहा, “नींद की गोली लाऊंगा! उसको खिला के सुला देना! तो हम आँगन में ही चुदाई करेंगे और तेरे गांड की मालिश भी करूँगा! कमरे में गर्मी रहती है रे! मजा नहीं आता!”
फिर दोनों अपने कपड़े पहनने लगे और मैं अपने बिस्तर पर आके लेट गया।
शाम के 7 बज गए थे।
मैं खाना खा के पढ़ रहा था तो मैंने मम्मी को बोला, “आप भी खा लो।”
तो उन्होंने बोला, “नहीं, विकास आने वाला है तो साथ में खा लूँगी।”
करीब आधे घंटे बाद विकास आया मेरे बगल वाली खाट पर बैठ गया।
मम्मी पानी ले के आई तो उसने उनको हाथ में कुछ दिया।
मैं समझ गया ये नींद की गोली होगी मेरे लिए, ताकि ये दोनों आज खुले आसमान में अपनी रात रंगीन कर सकें।
थोड़ी देर बाद मम्मी मेरे लिए दूध का गिलास लाई पीने के लिए तो मैं गिलास ले के बोला, “मैं जरा बाहर जा के टहल के पी लूँगा।”
ये बोल के मैं बाहर चला गया और दूध को नल पर गिरा के नल चला दिया ताकि पता ना चले।
जब मैं वापस आ रहा था तो मैंने सुना मम्मी ने बोला, “विकास, दवा का असर कब होगा?”
तो विकास ने बोला, “अभी आधे घंटे में विनय सो जाएगा सुबह तक के लिए। उसके अब आज तुम्हारी चुत की चटनी बना दूँगा!”
थोड़ी देर बाद मैं वापस आया और लेट गया।
10 मिनट बाद मैंने बल्ब बुझा दिया और मम्मी को बोला, “नींद आ रही है।”
बोल के आँख बंद कर ली।
कुछ देर बाद विकास ने मुझे बुलाया, “विनय! विनय!”
पर मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वह उठ के मेरे पास आया और मुझे हिला के जगाने की कोशिश करने लगा।
तब भी मैं नहीं उठा तो उसने मम्मी को बोला, “साधना जानेमन, काम हो गया!”
मम्मी बोली, “चलो खाना खा ले फिर।”
तो विकास बोला, “ऐसे नहीं! अब हमें कोई डर नहीं है। कपड़े उतार दो और नंगी हो जाओ। आज हम नंगे ही खाना खाएँगे और तुम्हारे बेटे के सामने ही तुम्हें चोदेंगे!”
उसके बाद मम्मी ने कपड़े उतरना शुरू किया।
साड़ी के बाद ब्लाउज और बाद में पेटीकोट।
उनका पिछवाड़ा मेरी तरफ और चुत विकास की तरफ।
चाँदनी रात में चाँदी जैसा चमक रहा था उनका जिस्म।
क्या गाँड थी दोस्तों, बता नहीं सकता!
मन तो किया अभी उठ के मम्मी के गाँड में लंड पेल दूँ।
तभी विकास ने बोला, “वाह साधना! आज तो बुर के एकदम साफ कर दिया!”
तो मम्मी बोली, “चाँदनी रात में जो चुदवाना था!”
ये बोल के उन्होंने विकास के पेंट की हुक खोल दी।
विकास ने अपनी चड्डी को अलग करते हुए बोला, “ये देखो जान! आज ये तुम्हारी बुर का भोजन करेगा।”
पहले तो माँ ने बोला, “रोका किसने है?”
इतना कहते ही विकास ने मम्मी को खाट पर बैठा दिया और दोनों पैर नीचे कर के फैला के खुद ज़मीन पर बैठ गया।
मुझे मम्मी के बूब्ज़ साफ दिख रहे थे।
क्या माल थी यार मेरी माँ, जो कि मेरे सामने ही अपनी बुर को फैला के किसी और से चुदवाने को रेडी थी!
तभी विकास ने उनके पैर की अंगूठे को चूसना शुरू किया जिससे कि मुझे मेरी माँ की चुत एकदम साफ दिखाई देने लगी।
मुश्किल से 1 मीटर के फासले पर मुझे मम्मी की चुत के दर्शन हो रहे थे.
लग रहा था जैसे आज ही झाँट साफ की गई थी जिससे उनकी बुर का लाल देना साफ दिख रहा था और बुर के ओंठ तो ऐसे आपस में चिपके पड़े थे कि जैसे कभी लंड ही ना गया हो अंदर।
तभी विकास पैर को चूसते हुए उनके बुर तक पहुँच गया.
मम्मी सिसकारियाँ निकाले जा रही थी और कह रही थी, “और डालो!”
तो विकास बोला, “ये जीभ है, लंड नहीं!”
तब मुझे समझ आ गया कि उसने मम्मी की बुर में जीभ घुसा दी है और जोर-जोर से चूस रहा था।
मम्मी ‘आ हाहा आहा हा!’ जैसे आवाज निकाल रही थी और विकास मम्मी की चुत चाटे जा रहा था।
मम्मी ने अपने दोनों पैर उठा के मेरी खाट पर रख दिए और विकास उसके बीच में बैठ के बुर के मजे ले रहा था।
ये सब मेरे आँखों के सामने चल रहा था।
तभी विकास ने कहा, “जान, अगर विनय अभी जग जाए तो क्या होगा?”
मम्मी बोली, “कुछ भी तो नहीं! उससे भी चुदवा लूँगी। तुमने इतना गर्म कर दिया है मुझे कि अब तो बस मुझे लंड चाहिए, चाहे वो जिसका भी हो!”
इतना कहना था कि विकास उठ के खड़ा हो गया और अपना लंड मम्मी के मुँह में डाल के बोला, “साली रांड, इसको चूस! तू तो बहुत बड़ी रंडी निकली जो अपने बेटे से भी चुदवा सकती है!”
वह अपना लंड मम्मी के मुँह में जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।
करीब 5 मिनट के अंदर उसने मम्मी के बाल पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया और सारा वीर्य मम्मी के मुँह में डाल दिया।
मम्मी ने छूटने की बहुत कोशिश की पर विकास ने उसके बाल पकड़ रखे थे जिस वजह से उनको सारा वीर्य पीना पड़ गया।
जब मम्मी ने सारा माल गटक लिया, तब जा के विकास ने उनको छोड़ा और बोला, “कैसा था मेरा माल?”
तो मम्मी बोली, “अजीब सा टेस्ट था पर पीने के बाद अच्छा लग रहा है।”
तब विकास बोला, “चलो जान, खाना खा लेते हैं। उसके बाद तो तुम्हें चोदना भी तो है!”
तो दोनों खाना ला के बगल वाली खाट पर बैठ गए।
विकास ने मम्मी के चूचे पकड़ के बोला, “जान, आज तो चमक रहे हैं!”
तो मम्मी बोली, “चाँदनी रात जो है।”
विकास ने मम्मी को कहा, “जान, आज गाँड भी मारूँगा। मना मत करना!”
तो मम्मी बोली, “नहीं, मैंने आज तक नहीं मरवाई। मैं तो मर ही जाऊँगी!”
पर वह मानने को तैयार नहीं था तो मम्मी ने कहा, “ठीक है, पर मैं जो बोल रही हूँ वह करोगे तो वह राजी हो जाएगा।”
मम्मी बोली, “जा के विनय का लंड पीओ तभी मेरी गाँड मिलेगी!”
ये सुन कर तो मेरी गाँड फट गई कि ये साले क्या करने वाले हैं!
तो विकास बोला, “ठीक है, इसमें क्या है? तेरी गाँड के लिए तो कुछ भी करूँगा। वैसे भी विनय तो नींद में है, कौन सा उसको पता चलने वाला है।”
उसके बाद वे दोनों खाना खा के मेरे पास आये, आके मेरी चादर हटा दी और मेरा अंडरवियर उतार दिया.
मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था.
पर उन्होंने सोचा कि हो सकता है नींद में ऐसा हो गया हो।
तभी विकास मेरा लंड चूसने लगा.
तो मम्मी बोली, “यार, विनय का तो तेरे से बड़ा लग रहा है!”
विकास बोलता है, “साली, तेरे बेटे का है। चुत में लेगी तो बता!”
मम्मी बोली, “धत्त!”
तभी चूसते-चूसते मेरा माल निकल गया और विकास सारा पी गया।
उसके बाद वह उठ के सीधा मम्मी की चुत में उँगली घुसा के बोला, “जान, अब तो आगे-पीछे सब मेरा!”
इतना कहा कि मम्मी लेट गई और वह जोर-जोर से उँगली करने लगा।
तभी मम्मी ने बोला, “सिर्फ उँगली डालेगा या अपनी मामी को चोदेगा भी?”
इतना कहना था कि विकास ने अपना लंड मम्मी की बुर पर रख के जोर का झटका दिया और सारा का सारा लंड मम्मी की चुत में उतार दिया।
मम्मी चिल्लाने लगी, “मर गई साले! आराम से नहीं डाल सकता था कुत्ते!”
और जोर-जोर सिसकारियाँ भरने लगी, “आहाह! उउउ! सीसीसी! कितना मजा आ रहा है!”
मेरे सामने मेरी माँ की चुदाई हो रही है और मैं देख रहा हूँ। ये सब मेरे लिए भी किसी मजे से कम नहीं था।
जिस चुत से मैं निकला था आज उसी चुत को मेरे सामने चोदा जा रहा था और मम्मी मजे ले रही थी।
तभी विकास ने कहा, “साली रंडी, तूने विनय का लंड क्यों चूसवाया?”
तो मम्मी बोली, “तो चूसेगा नहीं और मेरी गाँड बच जाएगी? पर तू तो पक्का हरामी निकला। अब तो गांड देनी ही पड़ेगा!”
इतना सुन के विकास ने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और देखते ही देखते सारा वीर्य मेरे माँ की चुत पर डाल के अपना मुरझाया लंड निकाल लिया।
जैसे ही माँ उठ के बैठी सारा वीर्य उनकी चुत से बहता हुआ उनकी चिकनी जाँघों पर आ गया और वह सारा साफ कर के लेट गई।
थोड़ी देर बाद विकास ने उनको उल्टा होने को कहा और बोला, “अब गाँड की बारी!”
तो वह उल्टा हो के लेट गई।
विकास उनकी गाँड में लंड डालने की कोशिश करने लगा पर शायद मम्मी को नहीं डलवाना था इसलिए सफल नहीं हो पा रहा था।
तभी मम्मी ने कहा, “ऐसा करो, आज चुत की चुदाई करो। कल दिन में मैं गाँड की थोड़ा मालिश कर लूँगी ताकि कुछ ढीली हो जाए तब रात में आके कर लेना।”
वह मान गया और मम्मी को कुतिया स्टाइल में बैठा दिया।
उनकी चुत मेरे सामने एकदम से फैल गई।
अभी तक जो चुत बिलकुल चिपकी हुई थी वह एक ही बार चुदने से भोसड़े का रूप ले चुकी थी।
इतने में विकास ने पीछे से मम्मी को चोदना शुरू कर दिया और चोदते-चोदते सारा माल फिर से मम्मी के बुर में भर दिया।
मम्मी थक चुकी थी और लेट गई।
विकास भी उनके पास लेट गया और बोला, “मजा आ गया! पर तुमने अपने बेटे का लंड पिलाया है मुझे। इसका बदला ले के रहूँगा!”
मम्मी, “कोई बात नहीं मेरे राजा। कल मेरी गाँड तुम्हारे लंड का स्वागत करेगी। तैयार रहना!”
ये सब बातें करते-करते दोनों सो गए और मुझे भी नींद आ गई।
तो दोस्तो, कैसी रही मेरी माँ की हवस की कहानी?
अगली कहानी में मैं आपको बताऊँगा कि कैसे विकास का प्लान कैंसिल हुआ और मैंने अपनी ही माँ के गाँड के मजे ले लिए।
दोस्तो, तैयार रहना मेरी अगली कहानी के लिए!
Antarvasana कहानी पर कमेंट्स और मेल करें.

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