बेटी के सेटिंग के साथ मां ने पहले प्यास बुझाई : Antarvasna Sex Stories
- Nilesh Lonke
- 3 days ago
- 13 min read
आप लोगों ने मेरी खिला पिला कर लंड को वश कर लिया, खिला पिला कर लंड को वश कर लिया १, ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया -१ और ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया - २ कहानी को बहुत प्यार किया इस लिए सभी पाठको का आभार अब आगे।
मेरी पिछली कहानियाँ मेरे नाम के ऊपर क्लिक करके पढ़ सकते है।
अनघा और शोभा की कहानी मैंने आपको मेरे पीछे कहानी में बताएं। अनघा और मेरी दोस्ती अब गहरी हो चुकी थी। शोभा के शादी के बाद मैं हमेशा ही अनघा के घर जाया करता था। एक रात को अनघा ने सोते समय बताया कि "उसके पड़ोस कि नगमा, मेरी बारे मैं उसे पास ज़्यादा ही पुछताछ करती रहते हि"। मैंने अनघा से पुछा "तुम मुझे क्यूं बता रही हो"।
अनघा बोली "शोभा के बाद अब नगमा की बारी हैं"। मैंने अनघा से कहा "नीलम, पुनम और तुम मुझे अब अपने हिसाब से जान बुझकर इस्तेमाल कर रही", "ऐसा मुझे लग रहा हैं"। अनघा बोली "ठिक हैं" मैंने शोभा संभाला वैसे हि नगमा को भी संभाल लुंगी, तुम चिंता मत करो"।
मैं सुबह सो रहा था। अनघा बाहर किसी से बातें कर रही थी। मैंने खिड़की से झांक कर देखा । तो कोई औरत अनघा के साथ खड़ी थी । मैं वापस सो गए । अनघा और साथ में खडी वही औरत बातें करतें करतें घर में आ गई। मैं निकर पर सोया हुआ था।
अनघा कि बातें अब घर मैं हो रही थी, मुझे साफ़ सुनाई दे रही थी। अनघा बोल रही थी "नगमा तुम बस अपना आधार कार्ड, पासबुक, दो फोटो और आधार कार्ड को लिंक मोबाइल नंबर मुझे दो, मैं नीलेश को दे दुंगी । मैंने आंखें खोली, तो देखा, सामने नगमा कुर्सी पर बैठी थी। उसकी नजर मरे तरफ हि थी।
मैं नगमा को देखता हि रहा। गोरी गोरी और लाल टमाटर जैसी नगमा को देख कर मन बदल चुका था। मैंने बेड से उठा तो, अनघा बोली, "नीलेश यह नगमा हैं, पड़ोस के गली मैं रहती हैं", उस का भी तुम्हें पुरा काम करना हैं"।
अनघा कि डबल मिनींग भाषा ने नगमा का चहरा खिल चुका था। मैंने अनघा कि तरफ देखा। कल रात मैं तुम्हें इसके बारे मैं हि बोल रही थी। मैंने नगमा तरह देख कर बाथरूम मैं चले जाने लगा।
अनघा बोली "तुम चाय लोगे या दुध"। मुझे लगा मुझे हि पुछा तो मैं बोला "तुम्हें मालूम नहीं मैं क्या पिता हुं"। अनघा बोली "मुझे सब मालूम हैं तुम क्या पिलाने का ! मैं नगमा से पुछ रही थी"। मैं हंसकर बाथरुम मैं चला गया। बाथरूम मैं नहाने बाद मैंने अनघा को आवाज दे कर टावल मांगा। दरवाजा खुला हि था। मै नंगा खड़ा लन्ड सहलाता खड़ा था और नगमा टावल हाथ लिये देख रहीं थीं। मैंने टावल लिया और लपट कर बाहर आया। पिछले खोली मैं निकल गया।
नगमा और अनघा बातें कर रहीं थीं। मैंने लुंगी, टि शर्ट पहनकर कर बेड पर जाकर बैठा। मैं नगमा कि शरीर देख कर खुश था। नगमा का शरीर सुडौल था, जांघें, कूल्हे और स्तन भी भरे हुए थे। मैं बैठे बैठे अपने लन्ड को सहला रहा था। नगमा के प्रति अब मुझे प्यास लग चुकी थी। नगमा चाय पीते पीते अनघा से खुसर-पुसर कर रही थी। मुझे अनघा ने मलाई भरी दुध लाकर दे दी। मेरे पास आकर हल्के आवाज बोली "तैयार रहना कुत्ते" और जोरसे बोली नगमा संभाल लेना, मैं दुकान जा कर आती हुं। मैं कुछ समझ हि नहीं पाया।
अनघा ने ताला उठाया और पर्स लेकर घर के बाहर निकल गयी। मैं और नगमा घर मैं लगभग दस मिनट शांत हि बैठे थे। मेरी तो हवा निकल गयी थीं। अनघा साथ थी तो हिम्मत थी। पर आज पहिली बार ऐसा अनुभव था कि मन तो बहुत कर रहा था मगर फिर भी मैं डर रहा था। नगमा हि बेड के नजदीक आई और दुध का ग्लास लेकर किचन मैं चली गयी। मैं शांत हि था। मैं बेड से उठा और खुर्ची पर जाकर बैठ गया। नगमा हंस रही थी।
आधे घंटे बाद नगमा खुद हि बोली "आप के और अनघा के बीच चल रहा चक्कर मुझे पता था, मैंने आप को और अनघा को उस के पती के मौत से पहले हि साथ मैं देखा था"। मैं सुन रहा था। नगमा बोली "पिछले साल से मैं अनघा से जान-पहचान बढ़ाई थी"। मेरे दो बच्चे हैं, मेरा छोटा बच्चा आज सात साल का हैं, दुसरा बच्चा होने के बाद पती का ध्यान मुझे छोड़ दुसरी औरतों पर और अपने हाथ के निचे काम करने वाली लड़की पर हि रहता हैं। मेरे पती ने अनघा पर भी ट्राय किया था"। मैं बोला "तुम्हारी जैसी औरत को छोड़ दुसरी औरतें पिछे पागल हि भागेगा"। मेरी पहली बात मैं रुपाली खुश हो गयी।
मैं बातें कर रहा था पर अंदर डर रहा था यह बात सच थी। हम लोग बातें करते करते लगभग दो घंटे हो गये। मेरे और नगमा के बिच सिर्फ बातें हि चल रही थी। अनघा कि आवाज पिछले दरवाजे पर आते हि मैं भाग कर दरवाजा खोलने गया। नगमा हंसने लगी। मेरा चेहरा देख अनघा भी हंस पड़ी, बोली "मेरा शेर आज नगमा के आगे बिल्ली बन गया"। नगमा बोली"वैसे कुछ नहीं अनघा जान-पहचान नहीं इसलिए बातें कर रहें थे"। नगमा बोली "अनघा मैं चलती हुं, बच्चे स्कुल से आ जायेंगे"। अनघा बोली "ठिक हैं"।
नगमा पिछले दरवाजे मैं जाकर वापस आयी और बोली "अनघा तुम्हारी एक बात सच हैं मेरा नीलेश इन्सान बोहोत अच्छा हैं", "अगर इन्सान ग़लत होता तो अब तक सब कर चुका होता"। अनघा बोली "हमें गर्व हैं इसी लिए नीलेश पर"। नगमा बोली "अब मैं निश्चित हुं अनघा, आधार का नंबर देने को" यह सुनकर हम तीनों हंस पड़े। नगमा निकल गयी। अनघा बोली "मैं आज तक तुम्हें सच मैं समझ हि नहीं पाती" तुमने आज मेरी वापस सोच हि बदल दी" मुझ पर गुस्से होकर बोली"कुत्ते" । मैं हंस पड़ा।
उस दिन शाम को मुझे नगमा का फोन आया, मैं अनघा के साथ पापड़ के दुकान पे था। नगमा बोली नंबर सिर्फ तुम्हारे और अनघा के लिए हैं, याद रखना। मैंने फोन अनघा को दे दिया, अनघा और नगमा बातें करती रहीं। रात को अनघा फोन कि बातें मुझे बता रही थी। नगमा का पती अगले सप्ताह सौदी अरब जा रहा हैं। दो हफ्ते के लिए। नगमा कि सास और बच्चे मुंबई उनके पुराने घर जा रहे हैं। नगमा और उसकी नगमा कि मां हि घर पर रहेगी, तो तुम नगमा घर जा सकते हो तो बोलो, नहीं तो, नगमा यहां आ जाएंगे। मैं बोला अगले सप्ताह देखें लेंगे।
नगमा आठ दिन फोन और मॅसेज करती रही, उसे अनघा मॅसेज पर हि रिप्लाई देते रहती थी। नगमा के सांस बच्चे और नगमा का पती जाने के बाद, नगमा का फोन आया। उसने घर का पता भेजा। वहां आने को बोला। मैंने अनघा से पुछा तो वह पता देख कर बोली यह नगमा के घर का पता नहीं हैं। तो अनघा ने नगमा फोन लगाया तो उसने बताया यह पता मेरे मां के घर का हैं। भैया भाभी भी अब मुंबई रहती हैं, मां अकेली होने के कारण कभी मेरे यहां तो कभी उसके घर पर रहती हैं। मां का घर हि सेफ हैं। यह सुनने बाद मुझे अनघा बोली अब जा सकते हो।
शाम को मैं बस से नगमा के मां के घर गया। घर पर नगमा कि मां थी। उम्र पचास साल के करीब थी। दिखने मैं नगमा जैसे ही थी। मुझे देखते हि नगमा कि मां कि नजर चमक गयी थीं। नगमा कि मां उसका नाम मुझे फैजा बताया। फैजा बोहोत हि खुल कर बातें कर रही थी। नगमा घर पर नहीं थी तो फैजा खाना बनाते ते बनाते मुझसे बातें कर रही थी। नगमा ने उसकी मां फैजा को फोन किया, नगमा बोल रही थी उसे मुंबई से आने के लिए देर हो जाएगी, इस लिए वह कल शाम आयेगी। फैजा बोल रही थी "नगमा तुम कल आना या परसों आना मेरी चिंता मत करना, नील मेरे साथ हैं।
मैं समझ चुका मां बेटी का इरादा एक हि हैं। नगमा ने मुझे फोन किया बोली मुझे माफ़ करना मैं तुम्हें बताना या नहीं। मैं बोला ठिक हैं। मैंने अनघा को फोन किया और सब बताया तो, अनघा बोली आज मां और कल से बेटी तुम्हें क्या जो मिली उसको अब छोड़ना नहीं" कहकर चिड़ा रही थी। अनघा बोल रही थी "मेरा नाम बदनाम मत करना मेरे शेर"। मैं बोला "अनघा तुम भी ना"। अनघा बोली "कुंतीया हुं बराबर ना" ! मैं बोला "हां"। फैजा खाना बना चुकी थी। रात हो चुकी थी।
फैजा मुझे एक कमरे मैं ले गयी, बोली नील तुम यह कमरा और वाशरुम इस्तेमाल करना। उन्होंने अलमारी खोली तो अलमारी मैं सारे लेडिज हि कपड़े थे। मुझे टावल दिया और फौजा रसोई घर मैं चली गयी। मैंने पुरे कपडे उतारे टावल लपेट मैं वाशरूम चला गया। आधे घंटे बाद बाहर आया तो सामने फौजा कपड़े बदल रही थी। सिर्फ ब्लाउज और पर कर थी। मैं देखता हि रहा। फौजा के हाथ मैं गाऊन था तो उन्होंने मुझे देखता देख गाऊन बेड पर डाल दिया और पर कर नाड़ी खोलो दी। पर कर जमीन पर गिर गया। अपना ब्लाऊज के हुक खोले और ब्लाउज भी निकाल कर बेड पर फेंक दिया। फैजा मुझे पुरा बदन दिआ रहीं थीं। मैं सिर्फ देख रहा था। मैंने टावल के उपर से सिर्फ अपने लन्ड को सहला और कंपनी नियम साफ की।
मैं फैजा कि कमर देख रहा था तभी फैजा घुम गती । फैजा ने मुझे अपना शरीर दिखा कर हल्की स्माइल दे रही थी। मैंने अपनी जगा छोड़ी नहीं। मेरा लन्ड अब आकार बदल रहा था । मैंने लन्ड का अच्छा से सहलाया तो लन्ड का आकार फैजा कि दिख रहा था उसने मुझे पास आकार एक दुपट्टा दिया और बोली "इसे हि पहन लो, मेरे पास मर्दों के कपड़े हि नहीं"। फैजा सिर्फ़ निकर पर थी। उसने गाऊन उठाया और पहन कर जाते जाते "खाना खाने को आवो" बोला कर चली गयी। मैंने निकर पर दुपट्टा लुंगी जैसे पहना और खाना खाने चला गया।
खाने मैं सुक्का मटन था । फैजा मरे साथ बैठ कर एक हि थाली मैं हि खाना खायीं। फैजा ने बकरे कि हड्डी का मांस खा कर हड्डी थाली मैं मेरे और डाल दी। तीन हड्डी या मेरे तरफ डालकर फैजा मुझे देखती और हड्डी को देखती। मैंने भी एक बड़ी हड्डी का मांस खा कर फैजा के हाथ मैं हि दिया तो फैजा ने पहले हड्डी को उपर से चुसना और फिर नल्ली को चुसकर गोटी को खिंचा और मुझे देख कर हंसने लगी। मैंने भी वही किया , फौजा अब मैं जालिम ताड़ रहा था। खाना खाते खाते टि व्ही चल रहा था।
खाने बाद फौजा बोली "नील तुम्हारी और मेरी उम्र एक हि होगी", मैं बोला "लगभग", फौजा बोली "मेरा साल सतहत्तर हैं" । मैं बोला "मेरा अस्सी" । फौजा बोली "लगते नहीं"। फौजा ने खाने बाद एक खाने का पान तैयार किया और मुझे दिया मैंने आधा खाया और आधा वापस फौजा दिया फौजा ने स्माइल दे कर मुंह मैं डाल दिया। मैंने और फैजा ने खाना खाने बाद एक घंटा बातें की। टि व्ही पर उस वक्त डिस्कवरी चॅनल पर जंगली प्राणी के सेक्स कि सिरियल लग चुकी थी। पांच दस मिनट सिरियल देखते देखते हम दोनों शांत हो गये थे। मैंने टिव्ही, टाईट बंद किया और फैजा को जाकर चिपक गया। फैजा कि उठाकर बेड रुम मैं ले गया। बेड पर डालते दिया।
फैजा का गाऊन निकाल कर मैंने फेंक दिया,फैजा कि निकर तो गिली थी, मैं हल्की स्माइल दे कर उसे निकाला और निकर को नाक को लगाकर सुंघा । फैजा चुत पुरी साफ थी। मैंने अपना लपेटा दुपट्टा और निकर निकल कर फेंक दिया और बेड पर चला गया। फैजा ने लाईट बंद करने बोला मैंने मना किया। मेरा लन्ड को फैजा देख रही थी। मैंने बेड पर जाते हि फैजा के हाथ मैं लन्ड दिया। मैंने मेरा हाथ फैजा के चुत पर लगा दिया था। फैजा ने शायद पहली बार बिना कटा हुआ लन्ड हाथ मैं लिया था।
फैजा ने लन्ड कि पुरी चमड़ी पिछे कर लन्ड को देख रही थी। मै और फैजा बेड पर बैठे हुए थे। मैंने फैजा के मुंह मैं मुंह डाल दिया और किस करने लगा। फैजा का किस करते वक्त मैंने फैजा का सर हाथों से पक्का पकड़ रख्खा था। किस करते करते मैं अपने घुटनों पर बेड पर बैठ गया। मैंने फैजा का ओंठ छोड़ दिये और लन्ड को हाथ मैं पकड़ कर पुरी चमड़ी पिछे कर, फैजा कि निप्पल पर और स्तन पर फेरने लगा। दोनों स्तन और निप्पल पर लन्ड रगड़ने के बाद, मैंने लन्ड फैजा के ओठों पर लगा दिया।
फैजा आंखे बंद कर आनंद मैं आहे भर रहीं थीं। ओठों पर मैं दोन तीन मिनट लन्ड का मुंह रगड़ता रहा। फैजा ने मुंह नहीं खोला, तो मै बोला "जान इतनी क्या नाराजगी पहला स्वाद तो ले कर देखो" फिर शायद छोड़ने का नाम हि नहीं लोगी"। फैजा ने आंखें खोल हाथ मैं लन्ड पकड़ लिया और मुंह खोला। पहले जीभ को निकाल लन्ड के बिना कटे हिस्से पर लगाकर दोन तीन बार स्वाद लिया और फिर सीधे लन्ड गटक लिया। मैंने ने फौजा को बेड पर सुलाया और उसके मुंह मैं लन्ड ले कर मैंने फैजा की चुत पर अपना मुंह लगा दिया।
फैजा का पहला हि अनुभव लग रहा था इस लिए ऐसी आहे भर रहीं थीं मानो जन्नत मिला हैं। फैजा का पानी वापस निकला तो मैंने मुंह चुत से निकाल लिया। फैजा जम के लन्ड चुस रही थी। मैं बोला "फैजा जान छोड़ दीजिए, आप नहीं निकल पायेंगी पानी को। फैजा ने लन्ड को मुंह से निकल दिया। में बोला " तीन चार औरतों ने इसे इतनी मुंह कि आदत लगा दि हैं कि अब उसे आदत लग चुकी हैं। फैजा हंस पड़ी।
मैंने फैजा कि पैरों को फैला कर मिशनरी पोजीशन मैं अपने को सेट किया। फैजा के हाथ मैं लन्ड दिया तो फैजा खुद हि लन्ड का चमड़ा निचे कर अपने चुत पर लन्ड रगड़ कर आनंद लें रहीं थीं। फैजा ने खुद हि मन भरने के बाद लन्ड का मुंह चुत के मुंह मैं सेट किया और कमर को उठाया। मै फैजा धक्का हि मार नहीं रहा था। फैजा अपनी कमर और उपर उपर उठाती। फैजा आखिर बोली "नीलु" मैंने फैजा कि आवाज आते हि लन्ड फैजा कि चुत मैं गांड़ दिया। आधे से जादा लन्ड एक हि धक्के मैं फैजा के चुत मैं था।
फैजा बोल रही थी "नीलु" , मैंने वापस पुरा लन्ड बहार निकाल जोर से पुरा लन्ड अन्दर डाल दिया और फैजा पर सो गया। फैजा ने अपने पैरों कि मरे कमर पर डाल कैंची बना ली थी। मैं फैजा के ओठों पर किस करना शुरू किया था, हाथों से स्तनों को दबाने लगा था। फैजा ने कमर उठाते हि मैने फैजा के दोनों और हाथ बेड पर सेट कर कांधों पर अपना अगला शरीर उठा कर कमर को उपर निचे कर के सेट किया। फैजा ने अपनी पैरों कि कैंची थोड़ी सैल कर दी। मैं फैजा चुत अब कमर उठा उठा चोदने लगा था। फैजा खुश थी। फैजाने वापस पानी छोड़ दिया था। कमरे मैं फचक फचक कि आवाज गुंजने लगी तो मैंने लन्ड निकाल लिया। बेड के नीचे आ गया।
फैजा समझ पाती उससे पहले मैं बेड के निचे जा। फैजा मुझे देखा मैं बेड के निचे खड़ा लन्ड सहला रहा था। मैंने बेड पर छुक कर फैजा पैर एक हाथ से पकड़ा और सीधे अपने और खींचा। फैजा दोनों पैरों के बेड नीचे खींच मैंने फैजा को पलटी किया। फैजा कि दोनों नितम्बों को हाथों से सहला कर मैंने जोर से उसपर हाथों से मारा। फैजा बोली "आज मैं मरने वाली हुं"। मैंने दोनों नितम्बों कि बीच दरार मैं हाथ डाल पहले गांड़ को सहला और फिर चुत को दबाया। फैजा "नीलु" "नीलु" कर रही थी। मैंने गांड़ में उंगली डाल निकल कर चुत चाटने लगा। फैजा बोल रही थी, नीलु चूतड़ नहीं" । मैं बोला "फैजा जान आज तुम किसकी हों"। फैजा बोली "तुम्हारी"। मैं बोला "फिर तुम्हारी चूतड़ किस की"। फैजा बोली "नगमा कहां से पकड़ के आयी हैं इस सांड को"। मैं बोला "जन्नत से"।
मैंने चुत चाटना छोड़ लन्ड को चुत मैं सेट किया फैजा दोनों पैर मेंढक जैसे फैलाकर पिछवाड़े से पानी निकलने तक चोदता रहा। मुझे बोहोत आनंद आया, इसलिए फैजा कि चूतड़ छोड़ चुत हि मारते रहां। फैजा तिसरी बार पानी छोड़ चुकी थी। मैं और फैजा नंगे हि सो गये। फैजा को मैंने जैसे जिंदगीभर नहीं मिला ऐसा सुख दिया था। सुबह दस बजे फैजा मुझे उठाने आयी, तो मैंने वापस फैजा का चोद दिया। सुबह - सुबह मिली चुदाई पर फैजा बोली "बेटीने एका हि कासिम चुना, मगर पुरा हिस्सा देने वाला चुना" ।
फैजा ने नगमा को दोन दिन बाद नगमा को आने को बोला दिया था। मैं फैजा कि हालत खराब कर चुका था। मैंने फैजा पर बिल्कुल भी रस्म नहीं किया। तीन बच्चों कि मां थी और पुरी तरह साथ देती थी। चार पाच साल से चुदी नहीं थी। मैंने फिर से चुदाई कर अब चुत लाल कर दि थी। मैंने दुसरे दिन रात हो हि फैजा कि चूतड़ को खोल दिये था। वो पहले भी चूतड़ मार चुकी थी जवानी मैं। नगमा पांच दिन बाद आने वाली थी। हैज - महामारी उसे आ चुकी इसलिए तब तक मैं फैजा को पुरी तरह चोद चोद कर हालत खराब कर दी थी।
नगमा लग रहा था मैं वापस निकल गया हुं पर घर आकार अपनी अम्मी कि दास्तान सुन भौंचक्का पड़ चुकी थी। नगमा मुझे बोली " "नीलेश तुम भी" । मैं बोला "फैजा खुद हि तैयार थी"। नगमा मुझ से नाराज़ हो चुकी थी। फैजा नगमा को अपने कमरे मैं ले गयी। उनके बिच बंद कमरे मैं क्या बात हुई मालूम नहीं पर आधे घंटे बाद नगमा सामान्य हो गयी।
मैं सोपा सेट पर बैठा था। नगमा कमरे से बाहर आयी और मेर पास बैठ कर बोली "नीलेश मेरी मां का और मेरा दुसरा मर्द एक ही हैं और वो तुम हो" , "याद रखना"। हमारे बीच बोहोत सारी बातें हुं मैं वापस घर निकल आया। पांच दिन बाद नगमा को फोन आया। उसने अपने मां के यहां हि मुझे बुलाया। मैं मिलने चला गया।
मैंने नगमा देखा तो बोहोत खुबसूरती लग रही थी। मैं सोपा सेट पर बैठा नगमा भी पास हि बैठी मैं वहां हि नगमा को चुमने लगा था। नगमा भी चिपक गयी थीं। मेरी असली प्यास नगमा हि थी। जो पाच हफ्ते बाद बुझने वाली थी। मैं भूखें भेड़िया जैसा नगमा के ऊपर तुट पड़ा था। दस मिनट अच्छे से चुमने बाद जब मैंने नगमा को छोड़ा तो आवाज आयी "नगमा बेटा घर मैं बेड रुम हैं"। नगमा उठ कर बेड रुम मैं चली गयी।
मैंने फैजा कि तरफ देखा और फैजा को चिपक गया किस किया। मेरा पती बेवफा नहीं था पर उसका हैं। तुमने मेरी मर्जी से सब मेरे साथ किया अब नगमा के मर्जी का ख्याल रखना। मेरे जैसे मत करना। मैं हंस पड़ा। बेड रुम मैं जाते जाते मैं बोला "फैजा जी आप ऐसा बोल रही हैं जैसे मैंने ग़लत किया" । फैजा बोली "नहीं नहीं नीलु"। कमरे मैं नगमा कपड़े उतार रहीं थीं मैंने दरवाजा खुला रख नगमा को पकड़ कर बेड पर फेंक दिया। वापस भूखें भेड़िया जैसे नगमा पर तुट पड़ा।
नगमा के दोनों भी बच्चा सिजेरियन हुवा था। उसके पेट पर ऑपरेशन के निशान थे। मैंने मेरे बीबी के भी देखें थे। फैजा के साथ मैं सिर्फ मैंने लन्ड शांती के लिए सेक्स किया था। मगर नगमा साथ मैं दिल से रोमांस करते करते सेक्स करने वाला था। इसलिए मैंने बड़े हि प्यार से नगमा को उत्तेजित किया और उसके साथ सेक्स किया। नगमा और मैं सेक्स कर एक दुसरे के बाजुओं नंगे हि सो गये।
शाम को फैजा आयी और नगमा को आवाज दे रही थी। नगमा और मैं दोनो हि उठ गये थे। तो फैजा बोली "नगमा तुम्हें नीलु पसंद करता हैं"। नगमा बोली "कैसे" ? फैजा बोली "मैं देख रही थी नीलु तुम्हारे साथ दिल से सेक्स कर था" और "मेरे साथ अलग था"। मैं चुपचाप पड़ा रहा। नगमा बोली " तो नीलेश ने तुम्हें बोहोत कि तकलीफ दी हैं ऐसा लग रहा हैं"। फैजा बोली "नहीं बेटी, मगर मैं जो बोल रही हुं वो सच हैं", आदमी अपनी मनपसंद औरत के साथ अगल हि रहता हैं"। मैं हल्का सा मुस्कुरा या। तभी नगमा ने देख लिया। तो नगमा बोली "समझ गयी मां"।
नगमा और मेरी बीबी एक जैसी हि शरीर कि थी। नगमा दिखने बोहत हि सुंदर थी मेरे बीबी से पर सेक्स मैं नगमा और मेरी एक जैसी हि थी। पुरी तरह एक-दूसरे के समझ कर सेक्स करती थी। मन मैं कुछ भी नहीं खाली शरीर सुख का आनंद लेना हि नगमा को भी पसंद था। मुझे नगमा पसंद थी। उस के बाद एक हफ्ते मैं नगमा के साथ रहा। दो हफ्ते मैं मैंने नगमा के साथ ज़्यादा रात बिताई। नगमा खुश थी। फैजा को भी वापस जवानी मिल चुकी थी।
आज दो साल गुजर चुके हैं । नीलम, पुनम और अनघा साथ हमेशा रहकर कभी शोभा तो कभी फैजा से भी मैं मिलता हुं। नगमा भी अब मेरी चौथी मनपसंद औरत बन चुकी थी। इसलिए मेरा मन करे तब मैं भी नगमा से मिलता हुं और वो भी जब उसका मन करे मुझे बुला लेती हैं।
तो कैसी लगी कामवासना के पाठको मेरी ननंद को भाभी ने पहला हि बड़ा लन्ड खिलाया । Antarvasna Sex Stories मुझे प्लीज़ मुझे मेल कीजिएगा.
आपका निलेश लोंके

Comments