ब्यूटीपार्लर वाली पिंकी की चुदाई : Antarvasana Sex Stories
- Harry
- Aug 9
- 17 min read
दोस्तों मेरा नाम हैरी है और मेरी उम्र 24 साल की है। मेरी ये कहानी पिंकी के साथ हुए प्रेम और सेक्स की दास्ताँ है।
पिंकी के बारे में लिखू तो उसकी उम्र 28 साल कद पांच फ़ीट आठ इंच रंग गोरा चेहरा लम्बा और बेहद खूबसूरत, बड़ी बड़ी आँखें, मोटे मोटे होठ, खुले घुंघराले बाल और भरा हुआ जिसम जिसमें किसी भी चीज़ की कमी न हो और अगर कमी थी तो पिंकी के जिसम का रस पीने वाले की। 34 इंच की ब्रैस्ट, 25 इंच की कमर और 35 इंच की गांड।
Antarvasana Sex Stories
मैंने अपने बारे में लिखू तो नाम हैरी उम्र 24 साल कद पांच फ़ीट दस इंच,रंग सावला, शरीर पूरा तगड़ा क्योकि पिछले दस साल से जिम कर रहा हु तो इससे शरीर बहुत बलवान और सुडोल बन चूका है और सेक्सुअली बोलू तो मेरा आठ इंच लम्बा लंड तीन घंटे तक बिना रुके चुदाई करने में सक्षम है और इसी गवाही मेरी हर प्रेमिका देती है। अब तक मैंने कोई दो सौ से ज्यादा लड़किया भाभियाँ चोद चूका हु और हर लड़की मेरे लंड का स्वाद चखने के बाद सिर्फ मेरी बनना चाहती है।
मेरी कहानी इस तरह से शुरू होती है की मेरे चाचा चाची जो हमारे घर के काफी पास ही रहते थे उनकी एक बेटी थी जिसकी शादी तय हुई पड़ी थी और शादी के दिन को अभी कोई पंद्रह दिन ही रह गए थे तो मेरे चाचा चाची ने मेरे पापा से बात कर कुछ दिन के लिए मुझे उनकी मदद करने के लिए पूछा तो पापा मान गए । मुझे उसने साथ शादी के सारे बंदोबस्त करने थे। हमारे पास दो गाड़िया हैं तो मैं बड़ी गाडी में चाचा चाची के साथ शादी की साड़ी तयारियो के लिए आने जाने लगा ।
खरीदारी से लेकर शादी के लिए पंडाल और सब कुछ, मैं अकेले या चाचा के साथ कर रहा था । चाचा की बेटी का नाम ज्योति है और मेरी उससे काफी अच्छी बनती रही है तो उसके साथ उसकी पसंद के कपडे और और सामान लेने बाजार आना जाना पद रहा था और फिर बारी आई ब्यूटी पारलर वाली का पता करने की जिसने दुल्हन को मेहंदी की रसम और फिर शादी के लिए त्यार करना था । मैंने कुछ बढ़िया ब्यूटी पारलर वाले पता करना शुरू किये।
घर के आस पास हो थे वो बस काम चलाऊ ही थे पर मुझे कोई बढ़िया चाहिए था तो एक दिन ऐसे ही ज्योति के साथ बाजार से खरीददारी करने के बाद घर वापिस आ रहे थे तो मुझे एक ब्यूटी पारलर दिखा जो किसी घर के अंदर बना हुआ था और बहार बोर्ड वगैरिअ लगा हुआ था। वैसे आते जाते मैंने इधर उधर ब्यूटी पारलर का पता करता रहता था पर ये खुद ब खुद सामने आ गया ।
ज्योति और मैंने उस दुकान के अंदर गए तो वह कोई नहीं था। साथ में ही घर था जिनका ये ब्यूटी पारलर था तो मैंने दरवाजा खड़काया तो एक खूबसूरत लड़की ने दरवाजा खोला जिसने उस दिन टीशर्ट और पायजामा पहन रखा था। मेरी नज़र उसके चेहरे से होती हुई सीधे उसके मोटे मोटे मम्मे यानि की ब्रैस्ट पर पड़ी। फिर उसके झांग और पाँव पर।
मैंने उसे ब्यूटी पारलर का पूछा तो वो दूकान के अंदर ही आ गयी और ज्योति उससे सारी बात करने लगी की कब मेहंदी है और कब शादी। सारी बातों मेरी मेरा ध्यान उसके मोटे मोटे मम्मे, बड़े बड़े होठ और उसके थाइज़ पर ही जा रहा था । उस समय उसका नाम मुझे पता नहीं था तो ज्योति से बात करते करते वो अक्सर मेरी और देखने लगती और फिर वो लड़की चाय लेने अंदर चली गयी और हम उसके किये काम की कुछ फोटो देखने लगे । ज्योति को तो उसका काम अच्छा लगा तो हमने सोचा की इसे ही बोल देंगे त्यार करने के लिए । वो लड़की चाय लेकर आई और चाय पीते और बातें करते करते ज्योति ने उसे ही पक्का कर लिया। उसने अपना नाम पिंकी बताया और मैंने थोड़े पैसे उसे एडवांस के तौर पर दे दिए और ज्योति ने उसे अपना फोन नंबर दे दिया और हम घर आ गए ।
घर आकर मुझे याद आया की मैं अपना फोन तो वही पर भूल आया हु तो मैं फिर से ब्यूटी पारलर की और चल दिया और फिर से पारलर खुला हुआ था पर पिंकी वहा नहीं थी। मैंने साथ वाले घर का दरवाजा खड़काया तो पिंकी ने दरवाजा खोला और वो जैसे नहाकर निकली हो और खुले गीले बाल, गीला गाला देखकर मेरा आठ इंच लम्बा लंड वही खड़ा होने लगा ।
पिंकी से मैंने कहा की मेरा फोन आपके पार्लर में ही रह गया है तो वो हसने लगी और बोली हां मुझे पता है आप चले गए थे पर फोन यही छोड़ गए तो पिंकी अंदर गयी और फोन लेकर आई तो मैंने कहा शुक्रिया आपका मुझे तो लगा था की गिर गया है कहीं। मैंने कहा वैसे आपने मेरी मदद की तो उसका रिजक देना बनता है।
पिंकी बोली मतलब?
मैंने गाडी से एक शादी का कार्ड निकला और पिंकी को दे दिया और कहा ये आपके और आपके परिवार के लिए आप भी शादी में जरूर आना तो पिंकी हसने लगी तो मैंने कहा मिठाई का डिब्बा रह गया वो मैं पकड़ा जाऊंगा फिर तो पिंकी हसने लगी तो मैंने शादी का कार्ड पिंकी के हाथ में दिया और कोई दो चार मिंट बाद मैं वहा से चल दिया ।
अगले दिन फिर से मुझे ज्योति के साथ बाजार जाना था तो वहा से मैंने एक मिठाई का डिब्बा ले लिया। ज्योति को मैंने नहीं बताया की ये किसके लिए हैं और ज्योति को घर छोड़ कर मैं पिंकी के सलून में गया और पिंकी उस समय खाना खा रही थी तो मैंने उसे मिठाई का डिब्बा पकड़ाया तो वो चाय बनाने चली गयी ।
मैंने वही पार्लर मैं बैठ मेगज़ीने देखने लगा जिसमें वो सारी दुल्हन की फोटो थी जिसे पिंकी ने त्यार किया था। चाय आई और चाय के साथ गपशप करते करते आधे घंटे से ज्यादा बीत गया था तो मैं घर के लिए निकल गया। शादी को कुछ दिन रह गए थे तो घर में पूजा रखी थी तो ज्योति ने थोड़ा सा त्यार होना था घर पर ही तो मैंने बड़ी गाडी निकली और ज्योति से पिंकी का नंबर लिया और पिंकी से बात कर उसे पार्लर से चाचा के घर ले आया और इधर त्यारियां चल रही थी और उधर पिंकी ज्योति को त्यार कर रही थी और आते जाते पिंकी की नज़र मुझ पर पड़ती तो वो मुस्कुराने लगती ।
ऐसे ही पिंकी मेरे पास से कुछ सामान लेकर जाने लगी तो मैंने कहा नमस्ते मैडम जी तो पिंकी है पड़ी।
ऐसे काफी बार हुआ तो एक बार तो चाचा ने भी सुन लिया और वो मेरी और गौर से देखने लगे पर कुछ कहा नहीं। पिंकी जाने लगी तो मैंने उसे खाना खाकर जाने के लिए पूछ लिया तो पिंकी मान गयी । खाना वगैरा खाकर मैं उसे गाडी में सलून तक छोड़ आया और मैंने देखा की वो दो बार मुड़ मुड़ कर पिंकी ने मेरी और देखा होगा और फिर वो सलून में चली गयी।
मैं वैसे ही कान पर फोन लगाकर गाडी में बैठा रहा और ऐसा करने लगा जैसे किसी से बात कर रहा हु तो सलून का दरवाजा खुला ही था तो पिंकी वहा बैठी मेरी और देख मुस्कुराने लगी और फिर से चेयर पर दूसरी और बैठ गयी। कोई दस मिंट तक मैं ऐसे ही फोन पर लगा रहा और फिर से ऐसा ही हुआ की पिंकी ने सलून के अंदर से मेरी और देखा और मुस्कुराकर दूसरी और बैठ गयी।
शाम को मैं जिम में था तो मुझे फोन पर एक मेसेज आया। मुझे नहीं पता था की वो किसका नंबर है तो मैंने उसका जवाब नहीं दिया। मेसेज में लिखा था हाय। मैंने ऐसे ही छोड़ दिया और सोचा बाद में देखता हु। मैंने सोचा कहीं मेरी किसी प्रेमिका का ना हो। उन दिनों मैं अपने चाचा के घर पर ही रह रहा था तो जिम से घर आकर मैंने फोन देखा तो उस पर और मेसेज आये हुए थे तो मैंने मेसेज में पूछा की आप कौन तो सामने से जवाब आया पिंकी।
मैंने कहा अच्छा ये तो ब्यूटी पार्लर वाली है पर मैंने फिर ज्योति से उसके फोन में सेव पिंकी के नंबर से चेक किया तो जिस नंबर से मुझे मेसेज आ रहे थे वो वही ब्यूटी पार्लर वाली पिंकी का ही है तो मैंने उससे चैट करनी शुरू की।
पहले एक दूसरे से बारे में फिर घर परिवार के बारे में और धीरे धीरे इधर उधर की गप शाप। पिंकी अकेली अकेली थी और उसकी माँ का काफी पहले ही देहांत हो चूका था और वो सिर्फ अपने पापा के साथ रहती थ। पहले दिन से हम एक दूसरे के बारे में काफी कुछ जान चुके थे । मैंने उससे जो कुछ पूछता वो साफ़ साफ़ बता देती और वो मेरे से जो कुछ पूछती उसमे थोड़ा बहुत सच और ज्यादा तर तो झूठ ही होता। देर रात हो गयी थी और पिंकी को मैंने फिर सोने का बोल मैं खुद सोने चला गया।
अगला दिन मेहंदी का था तो पिंकी को मैंने फोन पर समय पक्का कर लिया और उसे घर ले आया। उसने मेहंदी वगैरा लगाई और खाना पीना खाया और वो भी जैसे ज्योति से बातें वगैरा करने में लगी हुई थी। पिंकी को देखकर नहीं लग रहा था की उसका जाने का मन है तो आते जाते मैंने उसे नमस्ते मैडम कहता तो वो हसने लगती और एकबार तो कह गयी मेरा नाम पिंकी है।
दोपहर होने को थी तो पिंकी ने मुझे घर वापिस छोड़ने को कहा तो मैं उसे उसके घर छोड़ने चला गया और पुरे रस्ते भर बातें और हँसी मज़ाक चलता रहा। पिंकी कोउसके घर छोड़ मैंने चाचा के घर आ गया और इधर पिंकी मेरे से मेसेज पर चैट करने लगी। मैं शादी के काम और चैट दोनों साथ में देख रहर था। दोपहर की चैट शाम और फिर शाम से रात और रात से देर रात तक हो गयी पता नहीं चला ।
दो दिन में हम दोनों मैं बहुत ज्यादा गहरी दोस्ती कह लो या क्या बूत बहुत गहरी से वो मेरे से खुल गयी थी और मैं भी उससे सारी दिल की बातें कर लेताथा।
सुबह हुई और हम दोनों मैं फिर से चैट शुरू और अगले दिन अब शादी थी तो दोपहर को पिंकी को मैं घर ले आया और उसने थोड़ा जो करना होता है शादी से एक दिन पहले मेकअप का वो कर दिया और उस रात डांस वगैरा का भी था तो वो रात को सारा प्रोग्राम देखकर पिंकी रात को कोई ग्यारह बजे अपने घर गयी और उसे उसके घर छोड़ मैंने चाचा के घर आ गया। उस रात भी चैट चलती रही और पिंकी ने कहा हैरी जैसे आप बोल रहे थे की आप घूमने नहीं जाते हो क्योकि कोई साथ नहीं होता।
मैंने लिखा हां कहा था
पिंकी ने लिखा वैसे मैं आपके साथ चल सकती हु घूमने> आपने जब जाना हो तो मुझे बोल देना मैं चल पड़ूँगी आपके साथ।
मैंने लिखा सच मैं?
पिंकी ने लिखा हां हैरी।
हम दोनों बातें करते रहे और अगला दिन आ गया जब ज्योति की शादी थी तो पिंकी के सलून में सुबह सुबह ही मैं ज्योति को छोड़ घर के कामो में लग गया और दुल्हन को त्यार कर पैलेस में लेकर पहुंच गया और साथ में पिंकी भी त्यार होकर पैलेस में आ गयी। पिंकी इतनी खूबसूरत लग रही थी की पिंकी गाडी के आगे वाली सीट पर बैठ गयी और पीछे ज्योति और उसकी सहेलिया। पिंकी मेरी और देख मुस्कुराने लगती और पैलेस में भी पिंकी मेरे पीछे पीछे रहती और फिर मेरे माँ पापा से बातें करने लगती। पिंकी ने उन्हें बताया की वो ज्योति की सहेली है। नाचना गाना हुआ और शाम को फेरे और फिर बरात चली गयी और पिंकी को मैंने उसके घर छोड़ मैंने अपने घर आ गया और फिर से देर रात तक वो मेरे से चैट करती रही और मुझे वो सारी फोटोस भेने लगी जो उसने हम दोनों की साथ में खींची थी और मैंने जो फोटो मेरे फोन में हम दोनों की खींची थी मैंने उसे वो सारी फोटो सेंड करदी और कुछ मेरी अकेले की फोटो भी साथ में चली गयी और उसके कुछ देर बाद पिंकी भी अपनी अकेले की फोटो भेजनी लगी और साथ में चैट चलती रही। चैट करते करते पिंकी एक बात कहने लगी हैरी आप बहुत बहुत अच्छे हो।
मैंने कहा अच्छे मतलब
पिंकी ने लिखा मतलब मुझे बहुत अच्छे लगते हो। मैंने लिखा अच्छा ऐसा क्यों।
पिंकी ने लिखा पता नहीं पर मुझे अच्छे लगते हो आप।
मैंने लिखा ठीक है फिर
देर रात तक चैट और फिर हम सो गए और अगले दिन सुबह कालेज के लिए जाना था । काफी दिन हो गए थे कालेज गए तो वहा पर भी पिंकी से चैट चलती रही और पिंकी ने लिखा दोपहर का खाना मेरे यहाँ पर खा लेना तो मैंने कहा ठीक है। कोई दो बजे मैं कॉलेज से निकला और पिंकी के सीधा सलून चला गया और रस्ते से पिंकी के लिए एक तोहफा ले लिया और उसके सलून में खाना खापीकर वही पर बैठा रहा और शाम को घर वापिस आया और उसके बाद जिम और फिर रात भर चैट चलती रही । चैट करते करते पिंकी ने मुझे अगले दिन बहार जाने का पूछ लिया तो मैंने हां कर दी। अगले दिन सुबह नौ बजे पिंकी को उसके घर से पिक कर मैंने माल ले गया औरवह पर फिल्म की टिकट ली और फिल्म हाल में बैठ गए। फिल्म चल रही थी तो मैंने पिंकी से शरारत करने के लिए अपने जूते में से पाँव निकला और उसे पिंकी के पाव पर लगाया तो पिंकी बोली ये क्या था
मैंने कहा क्या
पिंकी ने कहा कुछ मेरे पाँव से टकराया
मैंने कहा पता नहीं कोई चूहा वगैरा हो सकता है
थोड़ी देर बाद फिर से मैंने ऐसा ही किया और पिंकी ने दर से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली यार चूहा आया
उसके बाद मैंने बीच बीच में इसी तरह से करता रहा और पिंकी ने मुझे मेरी बाजु से कस पकड़ रखा था और ऐसे ही आधी फिल्म निकल गयी। फिल्म के आधा होने से पहले मैं जूते मैं पाव दाल लिया था और जब फिर से फिल्म शुरू हुई तो मैंने फिर से यही सब करने लगा । फिल्म खत्म हुई तो एक रेस्टोरेंट में खाना खाने चले गए हम और वहा पर पिंकी मेरे से जैसे काफी चिपक कर हम दोनों की फोटो खींचने में लगी हुई थी और उसके बदन की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी और पिंकी बस हम दोनों की सेल्फी लेने में मस्त थी । खाना वगैरा खाकर हम फिर से माल चले गए क्योकि बाहर थोड़ी गर्मी थी और फिर मैंने पिंकी से कहा की वो पहली बार मेरे साथ बाहर आई है तो मैं उसे कुछ ड्रेस लेकर देना चाहता हु तो वो मान गयी। उसने कुछ स्कर्टस फ्रॉक जीन्स नाईट सूट पसंद किये और सामान लेकर इधर उधर घुमते रहे और रात के सात बजने को थे पर पिंकी ने घर जाने का नाम तक नहीं लिया और मैंने उसे कहा पिंकी घर चले
पिंकी ने कहा आप अपने घर लेकर जा रहे हो चलो फिर
मैंने कहा मेरे घर
पिंकी ने कहा हां पर आप कहा जाने का पूछ रहे थे
मैंने कहा आप अपने घर और मैंने अपने घर। ये पूछ रहा था मैंने
पिंकी ने कहा थोड़ी देर रुक कर चलते हैं
मैंने कहा ठीक है और हम दोनों इधर उधर घुमते रहे और कोई रात 9 पिंकी को उसके घर छोड़ मैं अपने घर आ गया और फिर से चैट शुरू हो गयी।
पिंकी ने चैट में लिखा जब आप मुझे शॉपिंग करवा रहे थे तो ऐसा लग रहा था जैसे मेरा होने वाला पति मुझे शॉपिंग करवा रहा है
मैंने लिखा अच्छा
पिंकी ने लिखा हां बिलकुल यही फीलिंग आ रही थी मुझे की मैं मेरे पति के साथ हु
मैंने लिखा आप मुझे प्रोपोस कर रहे हो वैसे
पिंकी ने लिखा पता नहीं यार पर मुझे ऐसा लगता है की आपके बिन मैं नहीं रह पाऊँगी और आपको अंदर से मैं अपना पति बना चुकी हु और आपके बिन एक पल भी नहीं रहा जाता
मैंने लिखा वैसे मेरे अंदर भी कुछ यही चल रहा है। हर समय आपके ख्याल और आपसे बात करने की तड़प रहती है।
पिंकी ने लिखा तो फिर मुझे प्रोपोस क्यों नहीं करते अआप
मैंने लिखा अपने अभी कर तो दिया मुझे प्रोपोस की मेरे बिन आप आप रह नहीं सकते और मुझे आपने अपना पति बना लिया है और
पिंकी ने लिखा और क्या
मैंने लिखा और तुम मेरी पत्नी
इससे पिंकी बहुत खुश हो गयी जब मैंने उसे अपनी पत्नी कहा और देर रात तक हम दोनों की इसी तरह से चैट चलती रही।
अगले दिन सुबह उठा तो फोन पर पिंकी का मेसेज आया हुआ था की मैंने उसके सलून में आ जॉन तो मैंने वैसा ही किया और उसके सलून में चला गया।
सलून में पहुंचा तो उसने कस कर मुझे अपने गले से लगा लिया और पत्नी की तरह मेरे से चिपक गयी और मैंने उसकी पीठ पर अपना हाथ रख उसे कस कर अपने से जकड लिया। ऐसा लग रहा था जैसे ताप्ती भट्टी को मैंने अपने गले से लगा लिया हो । पूरा बदन आग की तरह जैसे था तो पिंकी मेरे गले से लगी रही और मैंने उसकी पीठ पर हाथ फिरना शुरू किया और उसकी पीठ, फिर कमर और फिर उसकी गांड पर हाथ फिरने लगा तो पिंकी ने कास कर मुझे जैसे अपनी बाहो में जकड लिया ।
इधर मेरा आठ इंच लम्बा लंड कड़क हो चूका था और मैंने पिंकी का चेहरा ऊपर किया और उसके होठो को अपने होठो में भर चूसने लगा। पिंकी को जैसे सेक्स चढ़ गया और वो मेरे बालो पर हाथ फेरने लगी और फिर मैंने दोनों हाथो से पिंकी की टीशर्ट के ऊपर से ही उसके दोनों मम्मे पकड़ दबाने शुरू किये और इससे पिंकी को और मज़ा आने लगा । काफी देर तक मैंने इसी तरह से लगा रहा और फिर पीछे से पिंकी की टीशर्ट मैं हाथ दाल उसकी पीठ को सहलाया और उसके पायजामे में हाथ दाल पैंटी के अंदर हाथ डाला और उसकी गांड को सहलाने लगा और फिर हाथो को ऊपर टीशर्ट के अंदर लेजाकर पीछे से ब्रा के हुक खोले और फिर आगे से टीशर्ट के अंदर हाथ दाल ब्रा के अंदर हाथ दाल दोनों मम्मे अपने हाथ में पकड़ दबाने शुरू कर दिए। पिंकी सेक्स से पूरी भरी हुई थी और मैं उसका सारा रस पी रहा था।
हम दोनों इसी तरह से लगे रहे और मैंने दोनों हाथो से कभी मम्मे जोर जोर से पकड़ कर खींचता तो कभी मसलता। ब्रैस्ट मेरे हाथ से भी बड़ी थी और मम्मा मेरे हाथ में पूरा नहीं आ रहा था पर मैं लगा रहा और मैंने आगे से टीशर्ट ऊपर कर ब्रैस्ट को बहार निकला और मैं नीचे कोहुआ और पिंकी का एक मम्मा मैंने अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा और पिंकी बोली आह।
पिंकी को और स्वाद आ रहा था। मैंने मम्मा चूसते चूसते ऊपर देखा तो पिंकी की दोनों आँखें बंद थी और वो आह आह कर रही थी पर मैंने पिंकी ने निप्पल्स चूसता रहा और फिर मैंने पायजामा के अंदर हाथ दाल पेंटी के ऊपर अपना हाथ डाला और पिंकी की चूत मैंने अपनी उंगली डाल दी और जैसे ही उंगली अंदर गयी पिंकी आह हैरी बोली और उसे बहुत मज़ा आने लगा था और सेक्स से तिलमिलाने लगी थी तो मैंने धीरे से अपनी उंगली को चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया और इससे पिंकी को जबरदस्त मज़ा आ रहा था ।
मैंने पिंकी का पायजामा नीचे कर पैंटी को नीचे कर दिया था और मैं नीचे बैठ गया और पिंकी की दोनों टांगें फैलाई और अपनी जीभ को चूत के मुँह पर रख चूत के अंदर जैसे ही जीभ को घूमना शुरू किया तो पिंकी दाए बाए होने लगी। मैंने कहा कैसा लग रहा है । पिंकी ने कहा बहुत मज़ा आ रहा है हैरी।
मैंने पिंकी की चूत को चेतना जारी रखा और दोनों हाथो से पिंकी की ब्रैस्ट को दबाने लगा । एक घंटे से जयादा बीत चूका था की तभी पिंकी की चूत से पानी निकलना शुरू हुआ पर मैं उसकी चूत चाटता और उसके मम्मे दबाता रहा। मैं उठा और मैंने पिंकी को आँखें बंद रखने को कहा और उसे पास पड़ी कुर्सी पर बिठाया और फिर मैंने अपनी जीन्स नीचे की और अपना आठ इंच लम्बा लंड जो किसी नाग की तरह सर उठाये डसने के लिए खड़ा था पिंकी के मुँह में धीरे धीरे डाल दिया और पिंकी से कहा की आँखे बंद रखना और इसे चूस कर देखो कैसा लगता है । पिंकी लंड को मुँह में लेकर आँखें बंद करके बैठी रही और मैंने धीरे धीरे से लंड को मुँह के अंदर बाहर करना शुरू किया और दोनों हाथो से पिंकी की ब्रैस्ट पकड़ कर मसलनी शुरू करदी ।
कोई आधा घंटा पिंकी लंड को मुँह में लेकर बैठी रही और मैंने कहा कैसा लग रहा है इसका स्वाद तो पिंकी ने हां में सर को हिलाया तो मैंने कहा ठीक है फिर चूसते रहो किसी लॉलीपॉप की तरह। पिंकी का पायजामा और पेंटी पूरी पाव तक पहुंच चुकी थी और उसके मोटे थाई और खूबसूरत पाँव देखकर बहुत अच्छा लग रहा था और मैंने भी धीरे से अपनी जीन्स उतार एक तरफ कर दी और ऊपर से टीशर्ट भी उतर मैंने पूरा नंगा पिंकी के सामने खड़ा था और पिंकी लंड को मुँह में लिए आँखे बंद कर लंड चूस रही थी।
दो घंटे बीत चुके थे और मेरा आठ इंच लम्बा नाग अभी भी सर उठाये सीधा पिंकी के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था और मैंने कहा आँखें खोलनी है तो खोल लो तो पिंकी ने आँखें खोली और जैसे ही उसकी नज़र मेरे लंड पर पड़ी तो उसने मुँह से लंड निकला और बोली छी। मैंने कहा अभी तो कह रही थी कि अच्छा लग रहा है। पिंकी को शर्म आ रही थी क्योकि मेरे सामें उसका जिसम लगभग नंगा ही था और मैं उसके सामने पुरे नंगा। पिंकी ने लंड को हाथ में लिया और फिर समूह में ले लिया और मैंने पिंकी कि पहले टीशर्ट और फिर उसकी ब्रा और पाँव पर गिरी उसकी पेंटी और पायजामा सब उतार उसे भी पूरा नंगा कर दिया और मैंने पिंकी का सर पकड़ जोर जोर से आगे पीछे करना शुरू किया और लंड तेज़ी से मुँह के अंदर बाहर होने लगा।
तीन घंटे से ऊपर हो चूका था कि लंड में से पानी निकलना शुरू हुआ पर में लंड को मुँह के अंदर बाहर करता रहा और सारा पानी पिंकी के मुँह में गिरने लगा और पिंकी ने बाद में सारा पानी नीचे गिरा दिया और फिर हम दोनों नंगे सलून में बैठे रहे। शाम को उसके पापा के घर आने से पहले मैं अपने घर चल दिया और रात भर चैट करते रहे और पिंकी मेरे से आज प्यार करके बहुत खुश थी और अगले दिन फिर से उसने मुझे सलून आने को कहा और पिंकी ने ये तक कह दिया कि मैं घर से निकल कर सीधा उसके सलून में आ जाया करू।
अगले दिन मैंने फिर से सलून मैं गया और पिंकी मुझे अंदर घर में उसके बेडरूम ले गयी और वहा पर मेरे होठो पर चूमने लगी तो मैंने भी उसके पायजामा, पेंटी और फिर उसकी टीशर्ट और ब्रा उतार उसे नंगा कर दिया और फिर मैंने अपने कपडे उतरे और खुद नंगा होकर पिंकी को नीचे बैठकर लंड चूसने को कहा तो पिंकी शुरू हो गयी। थोड़ी देर बाद मैं बेड पर लेट गया और पिंकी बेड के ऊपर बैठ तेज़ी से लंड को मुँह के अंदर बाहर करने लगी और फिर मैंने पिंकी को मेरे ऊपर 69 कि अवस्था में लेटने को कहा तो पिंकी वैसे ही लेट गयी तो मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल चाटना शुरू किया और पिंकी सेक्स से तिलमिलाने लगी और उत्तेजना में मेरे लंड को मुँह में भर लिया । इससे पिंकी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी तो उसके बाद मैंने पिंकी को बेड पर लिटाया और उसके टांगो को फैलाया और लंड को चूत के मुँह पर रख जैसे ही धकेलने लगा तो पिंकी बोली आह।
चूत टाइट थी तो लंड अंदर नहीं जा रहा था तो मैंने धीरे से जोर लगाना शुरू किया और धीरे धीरे करते करते लंड थोड़ा सा चूत के अंदर गया तो मैंने धक्के देने शुरू किये ।
हर धक्के पर पिंकी आह आह करती पर मैं लगा रहा और पहले धीरे धीरे और फिर जोर जोर से लंड को चूत के और अंदर धकेलने के लिए जोर लगाने लगा तो पिंकी आह आह हैरी बोले जा रही थी पर मैं लगा रहा और काफी देर बाद मैं बेड पर लेट गया और पिंकी को अपने ऊपर लंड के ऊपर आने को कहा तो वो लंड के ऊपर आई तो मैंने लंड को पकड़ा और पिंकी कि चूत के मुँह पर रख दिया और जैसे जैसे पिंकी नीचे आती गयी वैसे वैसे लंड चूत के मुँह पर जैसे जाकर रुक गया और मैंने पिंकी को नीचे खींचना शुरू किया तो उसे फिर से दर्द होने लगा तो धीरे धीरे करते करते लंड चूत में घुसने लगा और मैंने पिंकी से कहा कि लंड के ऊपर नीचे होवो तो पिंकी वैसे शुरू हो गयी ।
पिंकी आह आह करे जा रही थी और कभी कभी मैं लंड को ऊपर को जोर से धकेल देता तो पिंकी तड़प उठती और फिर मुझे लंड पर खून दिखने लगा जो पिंकी की चूत से निकला था । पिंकी कि सील टूट चुकी थी पर मैं लगा रहा और एक घंटे से ज्यादा हो गया था चूत चुदाई करते करते तो पिंकी को मैंने बेड पर घोड़ी बनाया और उसकी गांड को हाथ से खोला और लंड को गांड में धकेलने लगा और फिर धक्के देने शुरू किया । लंड थोड़ा सा गांड के अंदर घुस चूका था।
पहले धीरे धीरे और फिर तेज़ी से मैं लंड को गांड में धकेलता रहा और पता नहीं कितनी देर तक पर मैं गांड कि चुदाई करता रहा । जब मैं थक गया तो बेड पर लेट गया और पिंकी को फिर से मेरे ऊपर लंड के ऊपर आने को कहा और लंड उसकी गांड में डाल पिंकी को ऊपर नीचे होने को कहा तो पिंकी शुरू हो गयी। पिंकी थक जाती तो वही पर रुक जाती और लंड उसकी गांड में फसा रहता औरफिर से पिंकी शुरू हो जाती और दो घंटे से ज्यादा समय बीत चूका था। फिर मैंने पिंकी को बेड पर बैठाया और उसकी गोद में सर रख उसके एक मम्मे को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और फिर दुसरे मम्मे को।
बारी बारी से मैंने पिंकी के दोनों मम्मे और उसके निप्पल्स चूसे और पिंकी मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर हिलाती रही। जब लंड में से पानी निकलना शुरू हुआ और पिंकी लंड को बस हिलाती गयी और फिर वो बेड पर जैसे गिर सी गयी क्योकि उसके पेट और चूत में भयानक दर्द था। मैंने कपडे पहने और डॉक्टर से दवाई लेकर दी तो पिंकी दवाई कहर नंगी ही बेड पर आराम करने लगी ।
शाम को जब उसके पापा का काम से आने का समय हुआ तो उसके थोड़ा पहले पिंकी ने कपडे पहने और वो सलून में बैठ गयी और मैंने अपने घर चला गया। उसके अगले एक हफ्ते तक मैंने पिंकी से सेक्स नहीं किया और उसके बाद से आज तक लगभग हर रोज़ पिंकी कि उसके घर में चुदाई कर रहा हु। मेरी ये कहानी आप सब दोस्तों को कैसे लगी मुझे मेरी इस ईमेल पर जरूर लिखें ।

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