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भाभी बोली - जो मर्जी हो करो देवरजी - Antarvasna Sex Stories

मैं उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में रहता हूँ. मेरे परिवार में मेरे भाई भाभी, माँ और पापा रहते हैं। मिर्जापुर की धूल भरी गलियों में हर सुबह सूरज की पहली किरण घर की पुरानी ईंटों वाली दीवारों पर पड़ती है जहां गंगा नदी की ठंडी हवा कभी कभी अंदर घुस आती है। पापा पुलिस में हैं तो वो घर से बाहर ही रहते हैं उनकी ड्यूटी के कारण महीनों तक उनका चेहरा भी नहीं दिखता जिससे घर का माहौल अक्सर शांत और खाली सा लगता है।


भाई की शादी हुई, तभी उसकी जॉब लग गई और वो साउथ अफ्रीका चला गया। उसकी अचानक विदेश जाने वाली जॉब ने पूरे घर की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया था जहां पहले चार लोगों की हंसी गूंजती थी अब सिर्फ तीन की आवाजें रह गई हैं। मतलब यह कि घर में हम तीन लोग ही रहते हैं. मैं, भाभी और मां। घर की छत पर रखे पुराने बर्तनों की आवाज और रसोई से आने वाली मसालों की महक अब रोजमर्रा की याद दिलाती है।


अभी मैं बीएससी के थर्ड इयर में हूँ और साथ में कम्पटीशन की तैयारी करता हूँ। किताबों के ढेर पर घंटों बैठे रहने से कमर दुखने लगती है लेकिन मेहनत जारी रखनी पड़ती है। मैं घर में ही रहता हूँ. घर का सारा काम मुझे ही देखना होता है चाहे वह सुबह का चाय बनाना हो या शाम को बाजार से सामान लाना।


भाई भाभी की शादी को एक साल होने वाला है। समय कितना तेजी से बीत गया था कि एक साल पहले की शादी की रौनक अब सिर्फ यादों में रह गई है। भाभी को भी कोई जरूरत होती है तो मुझे ही उनको बाजार या कहीं और ले जाना होता है उनकी हर छोटी सी जरूरत को पूरा करने में मुझे अच्छा लगता है।


मेरी भाभी की उम्र अभी 23 साल की है. अभी कोई बच्चे भी नहीं हैं, भाई बाहर ही रहता है। उनकी जवानी की निखरी हुई चमक और कोमल चेहरे की मुस्कान घर की उदासी को हल्का सा कम कर देती है। यह रियल भाभी लव स्टोरी इसी भाभी के साथ प्यार भरे सेक्स की है।


भाभी भी मुझे बहुत मानती हैं. मैं भी उन्हें अपना दोस्त जैसा मानता हूँ। उनके साथ बैठकर छोटी छोटी बातें करना और हंसना खिलखिलाना अब रोज की आदत बन गई है। अभी कुछ दिन पहले मेरा फोन खराब हो गया था तो भाभी ने मुझे नया फोन दिलाया था उनकी इस मेहरबानी ने हमारे रिश्ते को और भी गहरा और करीब बना दिया था।


करवा चौथ आने वाला था. उसके व्रत के लिए भाभी को सामान लेने जाना था तो मैं ही उन्हें बाजार ले गया था। बाजार की चहल पहल भरी सड़कों पर पैदल चलते हुए धूप की गर्मी और दुकानों से आने वाली तरह तरह की खुशबू हवा में घुली हुई थी। भाभी ने एक मॉल में शॉपिंग की कपड़े लिए। मॉल की चमकदार रोशनियों और ठंडी एयर कंडीशन वाली हवा में उनका उत्साह साफ नजर आ रहा था।


फिर अपने लिए ब्रा पैंटी देखने लगीं। लिंगरी सेक्शन की नरम कपड़ों वाली शेल्फ पर उनकी उंगलियां धीरे धीरे अलग अलग डिजाइन और रंगों को छू रही थीं। मैं भी पास में ही था। सामान रखने की ट्रॉली मेरे हाथ में थी। उनकी आंखें डिजाइन व कलर पसंद कर रही थीं। मैं उन्हें देख कर अनदेखा करने लगा लेकिन उनकी हरकतें और हल्की सी मुस्कान मुझे बार बार खींच रही थी।


उन्होंने अपने मतलब के अंडरगारमेंट्स ले लिए। फिर उन्होंने सनेटरी पैड लिए, क्रीम व कॉस्मेटिक्स आदि ली। दुकान की हल्की मीठी महक और उनके शरीर से आने वाली पार्लर वाली खुशबू मिश्रित होकर एक अनोखा एहसास दे रही थी।


उसके बाद भाभी पार्लर गईं. हम दोनों को घर आते शाम हो गई थी। सड़क पर लौटते समय सूरज डूब रहा था और लालिमा फैली हुई थी जिससे पूरा शहर सुनहरा सा लग रहा था।


मुझे ठंड लग रही थी क्योंकि मुझे पहले से ही हल्का सा बुखार था। शरीर में कमजोरी की लहरें दौड़ रही थीं और ठंड के कंपकंपी से हाथ पैर ठंडे पड़ रहे थे। मैं घर आते ही अपने कमरे में सोने चला गया।


मेरा कमरा छत पर है. मैं कमरे में जाते ही सो गया था। छत की खुली हवा पंखे की तेज फरफराहट के साथ मिलकर कमरे को ठंडा बना रही थी।


एक घंटा बाद मम्मी को खाना आदि खिला कर और उन्हें सुला कर भाभी मेरे रूम में खाना ले आईं। उनकी चाल में थकान साफ झलक रही थी लेकिन चेहरे पर मेरी चिंता की लकीरें गहरी थीं।


उन्होंने मुझे जगाया और मेरी हालत देखी। उनके नरम हाथ मेरे माथे पर रखकर तापमान महसूस करते हुए उनकी आंखों में चिंता उभर आई थी। मुझे तेज बुखार था।


उन्होंने मुझे अपने हाथ से खाना खिलाया और मेरे सर पर तेल लगाने लगीं। उनके उंगलियों का हल्का दबाव और गर्म तेल की महक मेरे सिर में आराम की लहरें पैदा कर रही थी।


उनके हाथ से अपने सर में तेल लगवाने में मुझे काफी अच्छा महसूस हो रहा था। सर में तेल लगाने के बाद भाभी मेरे हाथ पैर दबाने लगीं। उनकी मालिश में इतनी कोमलता थी कि मेरी थकान कुछ पलों के लिए गायब सी हो गई।


मैं उन्हें मना करने लगा मगर वो नहीं मानी। उनकी जिद भरी मुस्कान देखकर मैं चुप हो गया और उनकी देखभाल का आनंद लेने लगा।


मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो भाभी मुझसे बात करने लगीं। उनकी मीठी और धीमी आवाज कमरे के सन्नाटे को भर रही थी और मेरे कानों में मधुर लग रही थी।


मैंने भाभी से पूछा- आपने खाना खा लिया? उन्होंने कुछ नहीं बोला।


मैंने फिर से पूछा। तो उन्होंने बोला- नहीं।


मैंने कहा- खा लो ना। मेरी थाली में परोसने के लिए थोड़ा खाना बचा था।


मैंने कहा- लो, अभी मेरे सामने ही खाओ। पर भाभी मना करने लगीं।


भाभी को रसगुल्ले बहुत पसंद हैं. दो तीन दिन में मां से छिपा कर मैं भाभी के लिए रसगुल्ले लाकर उन्हें खिला देता हूँ।


मैंने पूछ लिया- रसगुल्ले खाने का मन हो रहा है क्या? भाभी ने कुछ नहीं कहा।


मैंने बोला- ठीक है, अभी खाना खा लो. मैं सुबह दवा लेने जाऊंगा, तो रसगुल्ले ला दूँगा।


भाभी अभी भी खाना नहीं खा रही थीं।


मैं अपने हाथ से उन्हें रोटी सब्जी खिलाने लगा। भाभी ने थोड़ा मना किया, फिर खाने लगीं।


वो बोलीं- मैं अपने हाथ से खा लेती हूँ. तुम आराम करो।


मैं लेट गया और मैंने भाभी की कमर को ज़ोर से पकड़ लिया। उनकी कमर की नरम और गर्माहट भरी त्वचा मेरी उंगलियों में महसूस हो रही थी।


वो हंसने लगीं और बोलीं- क्या हुआ? उनकी हंसी की हल्की सी झनकार कमरे में गूंज गई।


मैंने कहा- ठंड लग रही है।


वो बोलीं- ठीक है, मैं अभी कम्बल ले आती हूँ!


मैंने कहा- रहने दो, ऐसे ही ठीक है।


वो खाना खाने लगीं और कुछ ही देर में उन्होंने खाना खत्म कर लिया।


उन्हें भी नींद आने लगी थी तो वो अपने कमरे में जाने लगीं।


मैं भी सो गया.


वे सुबह तीन बजे मेरे कमरे में आईं और मुझे देखने लगीं कि कहीं बुखार ज्यादा तो नहीं हो गया है। छत वाले कमरे की ठंडी हवा अभी भी खिड़की से अंदर घुस रही थी और चांद की हल्की रोशनी फर्श पर चांदी जैसी चमक बिखेर रही थी। भाभी की नरम पांवों की आहट मेरी नींद के बीच सुनाई दी जहां वो चुपके से मेरे बिस्तर के पास आईं और झुककर मेरे माथे को छूने लगीं। उनकी उंगलियों की गर्माहट मेरी त्वचा पर महसूस होते ही मैं हल्का सा हिला लेकिन आंखें बंद रखीं।


लेकिन मेरा बुखार ठीक था। भाभी ने राहत की सांस ली और उनके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई जो चांदनी में चमक रही थी। वे मुझे गले में हाथ लगा कर और पेट पर हाथ फेर कर मुझे चैक कर रही थीं। उनके नरम और गर्म हाथ मेरी गर्दन की नसों पर धीरे धीरे घूम रहे थे जहां उनकी उंगलियां मेरी धड़कन महसूस कर रही थीं। फिर उनका हाथ नीचे सरककर मेरे पेट की सपाट त्वचा पर फिसलने लगा और हल्का सा दबाव देकर बुखार की जांच कर रहा था। उनके शरीर से आ रही हल्की सी पार्लर वाली खुशबू और रात की ठंडी हवा में मिलकर एक अनोखा एहसास पैदा कर रही थी।


उनके स्पर्श से मेरी नींद खुल गई। मैंने आंखें खोलकर देखा तो भाभी का चेहरा मेरे बहुत करीब था जहां उनकी लंबी पलकें चिंता से झुक रही थीं। मैंने पूछा- क्या हुआ? मेरी आवाज अभी भी नींद से भारी थी।


भाभी बोलीं- कुछ नहीं, बस देखने आई थी कि तुम ठीक हो ना! उनकी आवाज में ममता और प्यार का मिश्रण था जो रात के सन्नाटे में और भी मीठा लग रहा था। मैंने कहा- हां, मैं ठीक हूँ। मेरी बात सुनकर उनकी आंखों में चमक आ गई।


भाभी मेरे सर को सहलाने लगीं। उनकी उंगलियां मेरे बालों में धीरे धीरे घूम रही थीं और हर सहलाहट के साथ मेरे शरीर में आराम की लहरें दौड़ रही थीं। मैंने कहा- आप भी सो जाओ, अभी काफी रात है। लेकिन उनकी आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं था।


वो बोलीं- मुझे नींद नहीं आ रही है। फिर वो मेरे बेड पर बैठ गईं और मेरे साथ चादर में घुस गईं। चादर के अंदर उनकी गरम त्वचा मेरी त्वचा से टकराई और उनके घुटनों की हल्की ठंडक महसूस हुई। मैंने उनको फिर से पकड़ लिया तो बोलीं- तुम्हें शायद ज्यादा ठंडी लग रही है? उनकी सांस मेरे गाल पर गर्म हो रही थी।


मैंने कहा- हां। तभी वो फोन देखने लगी और मैं उन्हें पकड़े पकड़े ही सो गया। मेरी बाहें उनकी कमर के चारों ओर कसकर लिपटी हुई थीं जहां उनकी नरम कमर की गर्माहट मेरी छाती से सट रही थी। थोड़ी देर में वो भी मेरे साथ ही सो गईं। उनके सांस लेने की लय मेरी छाती पर महसूस हो रही थी।


मेरा 5 बजे का अलार्म बजा तो मैं जाग गया। कमरे में सुबह की पहली किरण छत की खिड़की से झांक रही थी। मैंने देखा कि भाभी मेरे साथ ही सोई हैं और वो भी मुझसे चिपक कर! उनकी एक टांग मेरी टांग पर पड़ी हुई थी और उनका सिर मेरी छाती पर टिका था जहां उनकी लंबी बालों की महक मेरी नाक में घुल रही थी।


मैंने भाभी को जगाया और उन्हें बोला कि सुबह हो गई है। वो नींद भरी आंखों से उठीं और मुस्कुराते हुए अपनी चादर संभालने लगीं। वो उठ गईं और अपने कपड़े ठीक करके अपने रूम में चली गईं। उनकी चाल में अभी भी रात की थकान बाकी थी लेकिन चेहरे पर एक हल्की सी शर्म की लाली थी।


सुबह हो गई। धूप की पहली किरणें छत पर बिखर रही थीं और घर में चिड़ियों की चहचहाहट गूंज रही थी। आज उनका व्रत था। भाभी ने पहले ही पूजा की सामग्री सजाकर रखी थी। शायद उनका कुछ सामान आना रह गया जो भूल से नहीं आ पाया था।


तो मैं भाभी को मार्केट ले गया। बाजार की सुबह की चहल पहल शुरू हो चुकी थी जहां दुकानों से ताजा फूलों और मिठाइयों की महक आ रही थी। मैंने अपने लिए दवा ले ली। दवा की दुकान पर कड़वी गंध हवा में फैली हुई थी।


भाभी को खुद के लिए इयररिंग्स लेने थे तो मैं उनको ज्वेलरी की शॉप पर ले गया। शॉप की चमकदार रोशनियों में सोने चांदी के जेवर चमक रहे थे। वो पसंद करने लगीं। उनकी उंगलियां अलग अलग डिजाइन को छू रही थीं और आंखें चमक रही थीं।


फिर मुझे दिखा कर पूछने लगीं- कौन सी लूँ? उनकी नजरें मेरी आंखों में टिकी थीं। उनको एक डिजायन पसंद आ रही थ, तो मैंने भी बोल दिया- हां यही ले लो, अच्छी डिजायन है … आप पर अच्छी लग़ेगी। वो मुस्कुराईं और जेवर खरीद लिया।


उन्होंने वो इयररिंग्स ले लिए। आज फिर से पार्लर जाना हुआ। पार्लर की बाहर की लाइन लंबी थी। आज तो उधर पार्लर में बहुत ही ज्यादा भीड़ थी. सात मेकअप के बाद भाभी का नंबर था।


हम दोनों को इन्तजार करना पड़ा. उसी में 3 बज गए थे। पार्लर की ठंडी हवा और मेकअप की मीठी महक हवा में घुली हुई थी। मैंने भाभी से कहा- भाभी जल्दी करो, आज देर हो जाएगी तो मम्मी गुस्सा करेंगी।


भाभी का पार्लर का कम खत्म करने में 5.30 बज गए। फिर हम दोनों घर आ गए। सड़क पर लौटते समय शाम की लालिमा फैल रही थी। भाभी का व्रत था तो भाभी अपनी पूजा आदि की तैयारी में लग गईं।


मैं अपने रूम में जाकर लेट गया। आज मैं फिर से सो गया। नींद में भी भाभी का चेहरा आ रहा था। भाभी अपनी पूजा आदि ख़त्म करके मम्मी को सुला कर मेरे रूम में खाना लेकर आ गईं।


उन्होंने मुझे जगाया। उनकी आवाज में थकान के साथ प्यार था। मैंने भाभी को देखा।


क्या लग रही थीं यार … मैं तो उन्हें देखता ही रह गया। भाभी ने शादी वाला लहंगा पहना था। वो लहंगा उनके शरीर पर इतना फिट बैठा था कि उनकी हर कर्व साफ नजर आ रही थी।


वो डिजायनर लहंगा था और काफी महंगा था। भाभी मेरे पास बैठ गईं और बोलीं- लो खाना खा लो।


उन्होंने मुझे प्रसाद भी दिया। मीठे प्रसाद का स्वाद मेरे मुंह में फैल गया। मैंने खा लिया।


उन्होंने मुझसे पूछा- तुम ठीक तो हो ना! उनकी आंखें मेरे चेहरे को टटोल रही थीं। मैंने कहा- नहीं।


भाभी ने पूछा- क्यों अब क्या हुआ? उनकी भौंहें चिंता से सिकुड़ गईं। मैंने कहा- यार भाभी, आप इतनी सेक्सी लग रही हो, मैं तो देख कर ही बीमार हो गया।


वो हंसने लगीं। उनकी हंसी की झनकार कमरे में गूंज गई। मैं भाभी से बात करने लगा।


भाभी ने बताया कि आज भैया की कॉल भी नहीं लग रही, वो शायद बिज़ी हैं। उनकी आवाज में उदासी झलक रही थी। मैंने बोला- कोई बात नहीं, सुबह कॉल कर लेना।


लेकिन भाभी को भैया की बहुत याद आ रही थी; उनको रोना आ रहा था। उनकी आंखों में आंसू तैरने लगे। मैंने कहा- भाभी आप रो नहीं, मेकअप खराब हो जाएगा।


मैं लाइन मारने लगा। मैं बोला- भाभी, आज आप सच में बहुत कातिल लग रही हो।


वो हंसने लगीं। उनकी हंसी में शर्म की लाली छा गई। मैंने भाभी की कमर पकड़ ली।


भाभी ने भी मुझे पकड़ लिया और रोने लगीं। उनकी उंगलियां मेरी पीठ पर कस गईं। वो मुझसे बोलने लगीं- तुम्हारे भैया, पता नहीं कब तक वापस आएंगे. मुझे उनकी बहुत याद आती है. अकेली रहा नहीं जाता, उनके बिना नींद नहीं आती।


मैंने भाभी को समझा बुझा कर शांत करवाया और भाभी को गले से लगा लिया। आज भाभी भी मेरा साथ दे रही थीं।


उन्होंने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मैंने भाभी को ज़ोर से हग कर लिया और भाभी ने भी मुझे कस लिया।


मुझे उनके ब्लाउज में कसे उभार चुभने लगे। उनके नरम और भारी स्तन मेरी छाती से सटकर दब रहे थे जहां ब्लाउज का कसा हुआ कपड़ा उनकी निप्पल की आकृति साफ दिखा रहा था। मेरे सीने में कुछ असहज सा होने लगा।


मैं अपने सीने पर हाथ डाल कर खुजाने लगा तो भाभी के दूध टच होने लगे। उनके स्तनों की गर्मी और मुलायमता मेरी हथेली में महसूस हो रही थी। भाभी बोलीं- क्या हुआ?


मैंने बताया कि कुछ गड़ रहा है। भाभी बोलीं- ठीक है, अभी चेंज करके आती हूँ।


मैंने कहा- रहने दो भाभी, आप इसमें बहुत अच्छी लग रही हो। भाभी बोलीं- अभी उतारना तो होगा ही, इसे पहन कर थोड़ी सोऊंगी।


मैंने कहा- ठीक है, आपने शाम को कपड़े सुखा कर मेरे ही कमरे में रख दिए थे. वो रखे हैं, चेंज कर लो।


उन्होंने लहंगा चेंज करने के लिए कपड़े लिए और नीचे जाने लगीं। मैंने कहा- यहीं कर लो, मैं कौन सा देख रहा हूँ।


वो थोड़ी सी हंस दीं और मेरे रूम में ही कपड़े बदलने लगीं। पहले उन्होंने सलवार पहन ली और लहंगा उतार दिया, फिर ब्लाउज उतार दिया।


वो मेरे सामने ब्रा में आ गईं। उन्होंने नेट वाली ब्रा पहनी थी, क्या मस्त माल लग रही थीं।


सच में बहुत ही खूबसूरत। उनकी ब्रा के नेट से उनके गुलाबी निप्पल झांक रहे थे और स्तनों की नरम त्वचा चमक रही थी।


उन्होंने अपने कपड़े चेंज कर लिए और मेरे पास आ गईं। मैंने उनकी कमर पकड़ ली।


हम दोनों को ही डर नहीं रहता था क्योंकि मम्मी छत पर नहीं आती थीं। तो हम दोनों थोड़ी मस्ती कर लेते हैं।


भाभी बात करने लगीं और कहने लगीं- आजकल मेरी कमर कुछ ज्यादा ही पकड़ी जा रही है. क्या बात है, कोई गर्लफ्रेंड नहीं मिली क्या? उनकी आंखों में शरारत झलक रही थी।


मैंने बोला- मिली ही नहीं कोई! भाभी ने पूछा- क्यों?


मैंने कहा- यार, आपकी जैसी कोई मिल जाए, तो ही गर्लफ्रेंड बनाने की सोचूँगा। उन्होंने कहा- अच्छा, मेरे में ऐसा क्या है?


मैं उनकी तारीफ़ करने लगा। मैंने उनको हग किया और ज़ोर से दबा दिया।


भाभी ने भी मुझे ज़ोर से पकड़ लिया। मैंने उनको गाल पर एक किस कर दी।


भाभी बोलीं- आज तो तुम मेरे लिए रसगुल्ले लाने वाले थे?


मैंने कहा- हां यार भाभी, भूल गया, सॉरी।


वो हंसने लगीं। मैंने कहा- मैं तो बहुत रसगुल्ले खिलाता हूँ, आप भी तो मुझे कुछ खिलाओ. तब तो बात बराबर की होगी।


वो बोलीं- बोलो क्या खाओगे? मैंने बोला- कुछ भी, जो आपको पसंद हो।


फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गईं और मस्ती करने लगीं। उनकी जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ दब गईं और उनका वजन मेरे शरीर पर महसूस हो रहा था।


मैंने भी उन्हें ज़ोर से पकड़ लिया और अपने मुँह को उनके मुँह के सामने कर दिया। वो मेरी आंखों में झांकने लगीं।


तभी मैंने उनके गाल काटने की सोची और जैसे ही आगे बढ़ा, उन्होंने अपना गाल हटा लिया और होंठ मेरे मुँह के सामने कर दिए।


मुझसे उनके होंठों की किस हो गई। उनके होंठ गर्म, नरम और थोड़े नम थे जहां उनका स्वाद मीठा और ताजा था।


वो मुझे देखने लगीं और बोलीं- अच्छा बेटा लिप किस … मैं समझ गई कि तुम्हें क्या खाना है। ये कह कर भाभी मुझे ज़ोर से लिप किस करने लगीं।


मैं भी उनका साथ देने लगा। मैंने उनको ज़ोर से पकड़ लिया।


हमारा लिप किस लम्बा होने लगा। उनके जीभ मेरी जीभ से टकरा रही थी और लार का मिश्रित स्वाद मुंह में फैल रहा था।


मेरा चुदाई का मूड बन गया। मैंने उनके चूत ड़ों को ज़ोर से मसल दिया।


वो भी अब जोश में आ गईं। मैं भाभी की गर्दन पर किस करने लगा।


वो भी मेरा साथ देने लगीं। मेरा लंड खड़ा हो गया।


उनको लंड महसूस होने लगा। वो भी मेरे ऊपर अपनी गांड रगड़ने लगीं।


मैंने कहा- भाभी क्या करूं, अब रहा नहीं जाता।


भाभी बोलीं- जो मर्ज़ी हो, वो करो … आज मना नहीं करूंगी.


मुझे उनके दूध दिख रहे थे, मैंने मुँह लगा दिया और एक दूध पीने लगा। उनके निप्पल मेरे होंठों के बीच में आते ही गर्म और सख्त महसूस हुए जहां मैंने धीरे से चूसना शुरू किया और मेरी जीभ उसके चारों ओर घूमने लगी। भाभी का स्तन मेरा मुंह भर गया था और उसकी मुलायम मलाई जैसी त्वचा मेरे गालों पर दब रही थी। मैंने जोर से एक लंबा सा चूस लिया तो उनके मुंह से हल्की सी आह निकली और उनका शरीर हल्का सा कांप उठा।


वो बोलीं- ऐसे क्या पी रहे हो, बाहर निकाल लो और अच्छे से चूस लो। उनकी आवाज में वासना की गहराई थी जहां उन्होंने अपने हाथ से ब्रा का कपड़ा थोड़ा सा खींचकर अपना पूरा स्तन बाहर निकाल दिया। मैंने उनसे कुर्ता निकालने को बोला। वो उठ गईं, मैंने फट से कुर्ता निकाल दिया। अब ब्रा के ऊपर से ही मैं भाभी के मम्मों को किस करने लगा।


वो बोलीं- आह पागल … आराम से करो … मैं कहां भागी जा रही हूँ, जो इतनी जल्दी मचा रहा है। मैंने ब्रा का हुक खोला और उसे निकाले बिना दूध मसलने लगा। भाभी बोलीं- पूरी ही निकाल लेते न … ऐसे तो नई ब्रा को खराब ही कर दोगे।


मैंने उनकी ब्रा उतार दी और दूध पीने लगा। क्या मक्खन मम्मे थे यार … बिल्कुल मलाई जैसे मुलायम मम्मे थे। मैंने थोड़ी देर भाभी के निप्पल को खींच खींच कर उनकी आंखों में देखते हुए दूध चूसे। भाभी की वासना जग गई थी, वो भी मुझे अपने सीने पर खींच कर दूध पिला रही थीं।


मैंने कहा- भाभी और कुछ भी हो सकता है क्या?


भाभी बोलीं- अब लिख कर दे दूँ क्या?


मैं समझ गया कि भाभी की चूत में आग लग गई है।


मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी को निकाल दिया। भाभी क्या माल लग रही थीं यार. बिल्कुल फ़िल्मी हीरोइन जैसी। मैंने भाभी के पूरे बदन को चूमा, बहुत सारी किस की. फिर उनकी चूत में उंगली करने लगा।


भाभी की चूत गीली हो चुकी थी। मेरी उंगली उनके गीले और गर्म फ्लैप्स के बीच फिसलते हुए अंदर घुसी जहां उनकी चूत की दीवारें मेरी उंगली को कसकर पकड़ रही थीं और गीला रस मेरी हथेली पर बह रहा था। मैंने उन्हें चित लिटाया और अपना लंड चूत पर रख कर अन्दर घुसाने लगा।


चूत लंड के लिए मचल रही थी और पनिया गई थी। मैंने लंड सही से सैट किया और धक्का मार दिया. एक बार में मैंने पूरा लंड घुसा दिया। वो मचल गईं और आवाज दबाती हुई बोलीं- आंह … आराम से करो, पागल हो क्या?


मैं भाभी को धकापेल चोदने लगा। हर धक्के के साथ उनका पूरा शरीर हिल रहा था और उनके स्तन ऊपर नीचे उछल रहे थे जहां मेरे लंड की नोक उनकी चूत की सबसे गहरी जगह को बार बार छू रही थी। वो भी लंड के मज़े लेने लगीं। उनकी चूत बहुत टाइट थी, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।


तभी उनका रस छूटने लगा, वो निढाल हो गईं। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड के चारों ओर सिकुड़ने लगीं और गर्म गीला रस मेरे लंड पर बहने लगा जहां उनका पूरा शरीर झुरझुरी से भर गया और उनकी आंखें बंद हो गईं। मगर मैं भाभी को चोदता रहा।


कुछ देर बाद मेरा भी होने वाला था। मैंने पूछा- कहां निकाल दूँ? भाभी बोलीं- अन्दर ही कर दो।


मेरा माल चूत में निकल गया। गर्म गाढ़ा वीर्य उनकी चूत के अंदर फूट पड़ा जहां हर स्पर्म की धार उनके गर्भाशय तक पहुंच रही थी और उनकी चूत पूरी तरह भर गई थी। मैंने अपना लंड निकाला तो भाभी की चूत से रस बाहर आने लगा।


पूरी चूत मेरे लंड रस से भर गई थी। भाभी ने मुझे ज़ोर से किस कर दी। वो बोलीं- आज मजा आ गया।


मैंने बोला- तो फिर से करें? भाभी मेरी कमर सहलाती हुई बोलीं- मर्ज़ी है, तो कर लो।


मैंने कहा- आप मेरे औजार को खड़ा कर दो। वो हां बोल कर मेरे नीचे से निकलीं और मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगीं।


मैंने उनके मुँह में लंड दे दिया, वो चूसने लगीं। उनकी गर्म और नरम जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी जहां उन्होंने पूरा लंड मुंह में ले लिया और गहरी चूसाई शुरू कर दी। मेरा फिर से मूड बन गया।


मैंने भी अपना मुँह उनकी चूत पर रख दिया और थोड़ी देर चूस दिया। वो भी मूड में आ गईं। मैंने फिर से उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें चोदना शुरू कर दिया।


दस मिनट की चुदाई के बाद वो फिर से झड़ गईं मगर मेरा नहीं निकला था। मैं भाभी की चूत चोदता रहा।


तभी वो फिर से झड़ गईं और इस बार मैं भी निकलने वाला हो गया था। इस बार भी मैंने चूत के अन्दर ही रस टपका दिया। भाभी दो बार चुद कर बहुत खुश थीं।


थोड़ी देर में हम दोनों वैसे ही नंगे सो गए। सुबह 5 बजे अलार्म बजा तो मैं जागा और मैंने उनको जगाया।


वो कपड़े पहन कर अपने कमरे में चली गईं। अब जब भी मेरा मन होता है, घर में ही भाभी को चोद लेता हूँ।


वैसे कम से कम एक बार तो मैं भाभी को रोज ही चोद लेता हूँ। अब वो भी मेरी बिल्कुल बीवी बन गई हैं. बस वो मुझे अपनी गांड नहीं मारने देती हैं. चूत चोदने को जब मर्ज़ी हो, तब चोद लो।


कभी कभी तो सुबह सुबह मैं किचन में ही भाभी को घोड़ी बना कर चोद लेता हूँ। एमसी के दिन छोड़ कर ऐसा ही कोई दिन होता होगा, जिस दिन मैं उन्हें नहीं चोदूं।


वो भी मेरे लौड़े का पूरा मज़ा लेती हैं. गांड देने की बात करता हूँ, तो वो ना बोल देती हैं। मैं भी लगा हूँ, देखो कब देती हैं।


उनका कहना है कि गांड मारने से फिगर खराब हो जाएगा. गांड फ़ैल जाएगी, डिग्गी बड़ी हो जाती है और उनको बड़ी डिग्गी पसंद नहीं है। इसलिए वो गांड नहीं मारने देती हैं।


भाभी मुझे बहुत प्यार करती हैं. वो बोलती हैं कि अब जीएफ बनाई तो अच्छा नहीं होगा। वो मेरे फोन को भी रोज चैक करती हैं।


मेरा सारा खर्च वो ही मुझे देती हैं। आई लव यू भाभी।


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