मकान मालकिन पटकर चुद गयी: Sex Story
- Ajay Bhadohi
- Aug 9
- 10 min read
दोस्तो, मैं अजय भदोही से हूँ। मेरी उम्र 24 साल है ।
यह हॉट भाभी स्टोरी मेरे और मेरी मकान मालकिन के बीच की है.
मैंने उनको कैसे पटाया और चोदा, उसका वर्णन आप मेरी इस सेक्स कहानी में पढ़ने वाले हैं.
मैं अभी इंजिनिअरिंग कर रहा हु और अभी तृतीय वर्ष पुरा किया हु सफलता पूर्वक और अब समर इंटरंशिप के लिए बनारस आया हु। मैं बनारस में किराए के रूम में रहता हूँ।
अब मैं अपने लूक के बारे मे बता दु मैं 5 फीट 4 इंच का हु, रंग गेहुआ है, और लण्ड का साइज 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मैं कितने देर तक चोद सकता हु आज वही पता चलने वाला था।
मेरे मकान मालिक की फैमिली में उनके पत्नी 2 छोटे बच्चे हैं वे स्कूल जाते है और उन की माँ है जो कानों से कम सुनती है।
घर पर उनकी वाइफ रहती हैं। मकान मालिक का खुद का कारोबार है। मकान मालिक ने अपने घर का दूसरा फ्लोर पर दो रूम किराये के लिए बनवाया है। मैंने एक रूम लिया है और दूसरा वाला अभी खाली है।
मैंने ऊपर वाला रूम किराये पर लिया है और उसका रास्ते अन्दर और बाहर दोनों तरफ से है।
मुझे वह 6 वीक रहना था। मै शाम को उनके बच्चों के साथ समय बिताता था। बच्चो के उन की माँ भी होती थी तो उन के साथ भी दोस्ती हो गयी और मै उन को भाभी कहता हु अब। भाभी मालकिन है।
भाभी सुबह शाम वॉकिंग करती थी मैंने उन को देख लिया एक दिन तो शाम को उन से बाते करते समय बोला की अगर आप को कोई प्रॉब्लम ना हो तो मै भी सुबह आप के साथ वॉकिंग के लिए चल सकता हु। मालकिन ने बोला ठीक है चलो। रोज सुबह वॉकिंग के समय बहुत बाते करने लगे हम दोनों।
मेरा इंटरंशिप का 3 वीक पुरा हो चुका था तभी एक दिन मकान मालिक ने मुझसे से कहा- मैं 15 दिन के लिए टूर पर जा रहा हूँ। आपकी भाभीजी को किसी भी चीज की जरूरत हो, तो प्लीज लाकर दे देना। मैंने ने हामी भर दी।
मैं बोला- ठीक है भैया … आप आराम से जाओ किसी बात की चिंता मत करना।मैं सब देख लूंगा।
मै मकान मालिक को भैया कह कर बुलाता था क्योंकि उन की एज 35 के आस पास है।
अब मैं आपको मकान मालकिन के बारे में बता दूँ.
उनका नाम कविता है और उनकी उम्र 32 साल होगी.
उनका बदन 34-30-36 आकर का है। देखने में वे कांटा माल हैं।
इस कहानी मे केवल मेरा और मकान मालकिन का नाम बदला है बाकी सब कुछ रियल है।
भैया के जाने के 4 दिन बाद भाभीजी को मार्केट जाना था.
उस दिन मैं घर पर था ।
तब भाभीजी ने मुझसे कहा अजय आप मेरे साथ मार्केट चल सकते हो क्या?
मैंने कहा- हां, क्यों नहीं भाभी जी।
माकन मालकिन ने अपने पति का बाइक की चाभी मुझे दिया।हम दोनों बाइक लेकर BLW मार्केट के साइड में जा रहे थे।
वहां पर भीड़ के कारण मुझे बार बार बाइक के ब्रेक लगाने पड़ रहे थे। उस वजह से भाभीजी के बूब्स बार बार मेरी पीठ से टच हो रहे थे। उनकी रसीली चूचियों का स्पर्श होने से मुझे मजा आने लगा था।
ऐसे ही ब्रेक लगाते और चूचों की रगड़ का मजा लेते हुए मैं भाभी के साथ मार्केट में पहुंच गया.
वहां से भाभीजी ने सामान लिया और हम दोनों वापस रवाना हो गए थे। वापस आते समय भी ब्रेक मारने पड़ रहे थे। इस बार भाभीजी मेरी पीठ से चिपक कर बैठ गई थीं। उनका एक हाथ भी मेरे कंधे पर आ गया था।
फिर मैंने भाभीजी से कहा- भाभी जी, आप कुछ पियेंगी?
वे कहने लगीं- क्या पिला रहे हो?
मैंने कहा- चलो जूस पीते हैं.
भाभीजी ने कहा- हां चलो.
हम दोनों जूस वाली दुकान पर चले गए.
जूस पीते पीते मैंने भाभीजी से पूछ लिया- भाईसाहब आपको 15 दिन तक अकेले छोड़ कर चले जाते हैं, तो आपका मन कैसे लगता है?
तब उन्होंने कहा- उनका काम सिर्फ पैसे कमाने का रह गया है … उनका और कहीं ध्यान ही नहीं रहता है.
यह कहती हुई भाभीजी थोड़ी उदास हो गईं।
मैंने उनसे कहा- अरे आप टेंशन मत लो, जो होगा अच्छा ही होगा।
वे कहने लगीं- अरे क्या अच्छा होगा, जब समय ही बीत जाएगा, तब क्या बचेगा.
उनकी बात का मर्म मैंने खूब समझ लिया था कि जवानी का मजा बुढ़ापे में कैसे लिया जा सकता है।
यही समझ कर मैंने बोल दिया- आप चिंता क्यों करती हैं भाभी, मैं हूँ ना आपका देवर. कभी किसी भी चीज की जरूरत हो तो मुझे बता दीजिएगा।
इस पर भाभी जी हंसने लगीं और मुझे देखने लगीं। उनकी आंखों की शोखी बता रही थी कि वे मुझे परखने को रेडी हैं। फिर इसी तरह की चुहलबाजी के चलते जूस खत्म किया और हम दोनों ने वापस अपनी चिपक कर बैठने वाली पोजीशन बनाई और इस बार भाभी ने कुछ ज्यादा ही अपनापन दिखाते हुए मुझे अपने हाथ से पकड़ लिया। उनकी चूचियों का रस लेता हुआ मैं उन्हें लेकर घर वापस आ गया।
घर पर आकर भाभीजी ने बोला- अजय, आप अपना नम्बर मुझे दे दो.
मैंने झट से अपना नम्बर भाभी को दे दिया।
रात को मैं व्हाट्सअप चला रहा था।
तब भाभी का मैसेज आया- हाय।
मैंने नंबर की प्रोफाइल चैक की, तब पाया कि ये भाभीजी थीं।
मैंने भी झट से मैसेज किया- हां जी भाभीजी!
उनका फिर से मैसेज आया- सोये नहीं क्या?
तो मैंने रिप्लाई दिया- नहीं भाभी जी … अभी नहीं सोया हूँ।
भाभी- किससे बातें कर रहे हो?
मैं- एक फ्रेंड से.
भाभीजी- फ्रेंड से या गर्लफ्रेंड से!
मैं- नहीं भाभी जी, फ्रेंड से ही कर रहा हूँ.
भाभीजी- क्यों, आपकी गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैं- नहीं भाभीजी, ऐसा कुछ नहीं है.
भाभीजी- झूठ मत बोला करो, आपकी गर्लफ्रेंड नहीं हो, ऐसा हो नहीं सकता है.
मैं- अरे भाभी जी विश्वास कीजिए … मुझे अभी तक वैसी कोई मिली ही नहीं, जैसी मुझे चाहिए.
भाभीजी- हम्म … कैसी चाहिए?
मैंने समझ लिया कि भाभी मूड में हैं इसलिए मैंने लिख दिया कि आपकी जैसी मिल जाए.
भाभीजी- आप मज़ाक अच्छा करते हो.
मैं- नहीं भाभी, मैं मज़ाक नहीं कर रहा … सच कह रहा हूँ.
भाभीजी- अच्छा आपको मेरी जैसी चाहिए … मतलब आपको मैं पसंद हूँ।
मैंने झौंक में लिख दिया- हां जी.
भाभीजी- ठीक है अजय, अभी उनका कॉल आ रहा है … मैं बाद में बात करती हूँ।
यह बोल कर भाभीजी ने मैसेज लिखना बंद किया और शायद अपने पति से बात करने के बाद सो गईं। सुबह हुई, तो मैं उनसे इंटरंशिप पर जाते वक़्त मिला और हैलो बोला कर पूछा- भाभी जी कुछ लाना है क्या मार्केट से?
तब भाभीजी ने कहा- अगर कुछ लाना होगा, तो मैं आपको मैसेज कर दूंगी।
मैंने बोला- हां ठीक है भाभीजी।
शाम को भाभीजी ने सब्जी लाने के लिए मैसेज किया। और बोली की जब तक आप के भैया नही है तब तक मेरे साथ खाना खा लेना।
मैंने कहा- अरे आप क्यों तकलीफ कर रही हो भाभीजी, मैं बना लूंगा।
उन्होंने कहा- इसमें तकलीफ की क्या बात है, मैं भी आपको काम बताती हूँ … तब आप करते ही हो न!
मैंने कहा- ओके भाभी।
फिर जब मैं घर गया तो मैंने सब्जी का थैला भाभी को पकड़ा दिया और फ्रेश होने ऊपर चला गया।
गर्मी बहुत थी तो स्नान करके ऐसे ही लेटा हुआ था।
तब भाभीजी का मैसेज आया- ऊपर अकेले हो, नीचे आ जाओ … और हां अन्दर वाले रास्ते से आना, वह खुला है।
मैं अन्दर वाले रास्ते से नीचे चला गया
भाभीजी ने उस समय मैक्सी पहनी हुई थी, क्या मस्त माल लग रही थीं। किचन मे पहुँच कर मैंने जब भाभी को देखा तो मेरा लण्ड से लेकर सब कुछ खड़ा हो गया क्योंकि मेरे सामने 32 साल की दूध सी गोरी एक 5 फीट 2 इंच, 34 के बूब्स, 30 के कमर, 36 का गांड वाली हुस्न की परी लाल मैक्सी मे खडी थी।
मैंने नीचे जाकर पूछा- बच्चे और आप की सांस कहां गए भाभी?
तब उन्होंने बताया- दोनों बच्चे उनके वो सब बाहर घूमने गये है ।
अब हम दोनों बातें करने लगे।
फिर भाभीजी ने पूछा- आप रात में क्या बोल रहे थे कि आपकी जैसी मिली नहीं और मेरी जैसी आपको पसंद है … वह सब क्या कह रहे थे?
मैंने उनके मूड को भांप लिया और कहा- हां, आपकी जैसी ही मुझे पसंद आने वाली है. काश आप मिल जातीं, तो मैं तो आपको छोड़ कर कभी कहीं नहीं जाता. हमेशा आपके साथ ही रहता।
भाभीजी ने कहा- ऐसा आपको मेरे में क्या पसंद आ गया है?
तब मैंने बोला- आपका तो मुझे सब कुछ पसंद है।
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तो भाभीजी ने पूछा- सबसे ज्यादा क्या पसंद है?
मैंने मना किया जाने दीजिये नही तो बुरा मान जाओगी आप। पर उन्होंने ने बहुत जोर दीया की बताओ। मैंने भी थोड़ा सम्भलते हु बोल दिया।
मैंने कहा- आपके बूब्स।
तो भाभीजी ने बोला- हां उस दिन मार्केट गए थे तो क्या इसी लिए बार बार ब्रेक मार रहे थे आप?
मैं हंसने लगा और भाभीजी भी हंसने लगीं।
मैंने उसी टाइम भाभीजी का हाथ पकड़ कर बोल दिया- आई लव यू भाभीजी।
भाभी जी ने बोला - अब तुम यहाँ से चले जाओ ज्यादा ही हो रहा है तुम्हारा।
ये सुन कर मै वहा से चला गया। इन सब के बाद मेरी गांड फटी पड़ी थी अब क्या होगा।
लगभग भाभी जी का मेसेज आया की खाना खा लो।
मैं वहा सब के साथ बैठ कर चोर नजर से खाना खाया।
खाना खत्म होने के बाद मैंने मौका देख कर किचन मे चला गया और भाभी जी से माफी मांगने लगा। उन्होंने मुझे माफ कर दिया तुरंत। मैंने एक बार फिर रिस्क लिया और फिर से बोल दिया- भाभी आप बहुत खूबसूरत हो आई लव यू भाभीजी।
पर इस बार कुछ और ही हो गया।
भाभीजी ने बोला- लव भी करते हो और भाभीजी भी बोलते हो!
तब मैंने बोला- आई लव यू कविता!
फिर उन्होंने भी कहा- लव यू टू अजय!
भाभीजी को मैंने पकड़ कर किस कर दिया और भाभीजी खुद साथ देने लगीं.
उस समय भाभीजी ने कहा- अजय अपने पास पूरी रात पड़ी है, काम खत्म करने दो और सासु मां को बच्चो को सो जाने दो, फिर जो करना हो करना।
पर मैं माना नहीं। कविता भाभी बर्तन धो रही थीं.
तब मैं उनके पीछे गया और उनको पकड़ कर किस करने लगा। मैं उनसे चिपका हुआ था, तो मेरा लंड कविता भाभी की गांड में घुस रहा था। मेरे लंड ने अकड़ना शुरू कर दिया था और भाभी को लौड़े की सख्ती का अहसास होने लगा था.
वे मेरे साथ मस्ती से चिपकी हुई थीं और उनके दोनों चूतड़ों की गर्मी मेरे लौड़े में सनसनी भर रही थी।
ऐसे ही हम दोनों चिपक कर बातें कर रहे थे।
भाभी ने अपना काम खत्म करके कहा- चलो कमरे में चलते हैं। हम दोनों उनके रूम में आ गए।
रूम में आते ही मैंने भाभी की मैक्सी उतार दी।
उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहना था। मैंने भाभी को पहली बार पूरा नंगा देखा तब उस के पूरे शरीर का पूरा पता चला।
कविता भाभी की ये गोरी टांगे जैसे किसी हिरनी की मचलती कमर हो, जांघ रुई के गद्दे के जैसे वटवृक्ष की डाली हो, पेट के बीचो बीच नाभी मानो ताज महल पर काले टिके की तरह बुरी नजरो से बचा रहा हो, गला एक दम सुराही के जैसा, और उस का चेहरा एक यैवन से लबालब हंसनी का चेहरा हो । मतलब वो पूरी तरह एक ऐसी रस से भरी फुल है जिसका रस और खुशबु निचोड़ाने का मन कर रहा हैं और गांड के बारे मे क्या बोलू। उनकी की गांड इतनी बड़ी है की मानो दो लड़कियों का गांड मिला कर बना हो, गांड का शेप एक दम कतीलाना है। मन तो कर रहा था भाभी जी की गांड का तकिया बनाकर सो जाउ । गांड के छेद मे मुह डाल लू और पूरा चाट चाट कर लाल कर दु।
मैंने पूछा- अन्दर कुछ नहीं पहना?
वे हंस कर बोलीं- वैसे भी तुम सब उतारने वाले थे तो क्यों पहनना!
हम दोनों हंसने लगे।
मैं कविता भाभी को किस करने लगा.
वे भी पूरी गर्मजोशी से मेरा साथ दे रही थीं।
मैं उन्हें लिप किस करता रहा और उनके दूध सहलाता रहा.
भाभी के होंठ बड़े ही रसीले थे। मैं शब्दों में नहीं बता सकता।
तभी भाभी की बेटी आयी और बोली मम्मी मुझे यहाँ सोना है। मै छुप गया। भाभी जी ने मैक्सी पहना और बच्ची को सास के पास जबरजस्ती सुला दिया और वापस मेरे पास आ गयी।
आते ही मान भाभी ने मैक्सी निकाल फेका और फिर कविता भाभी ने मेरे कपड़े निकाल दिए और मुझे भी नंगा कर दिया।
वे मुझ पर भूखी बिल्ली के जैसी टूट पड़ी थी, ऐसा लग रहा था जैसे वर्षों से प्यासी हों।
हम दोनों किस कर रहे थे, फिर मैं उनके चूचे चूसने लगा।
क्या मस्त बूब्स थे यार … पूछो मत!
कविता भाभी ‘आह अहाहा अहाहा …’ कर रही थीं।
चूचियां चूसते हुए ही मैंने अपनी एक उंगली भाभी की चूत में डाल दी और दाने को रगड़ने लगा। मैं बूब्स भी चूस रहा था और चूत भी रगड़ रहा था। कविता भाभी को बहुत मजा आ रहा था; वे लगातार आह आह कर रही थीं।
फिर मैंने उनकी नाभि पर किस किया तो वे उछलने लगी थीं।
मैं और नीचे आता गया और धीरे से भाभी की चूत को चाटने लगा। चूत पर मेरी जीभ को पाते ही वे और जोर जोर से सिसकारियां भरने लगीं ‘आआह यश आह मर गई मैं … आह क्या कर रहे हो आह.’
वे मेरे सर को अपनी चूत पर खुद से दबा रही थीं.
मैंने कुछ मिनट तक उनकी चूत को चूसा तो उनका रस निकल गया।
भाभी ने कहा- सच में अजय, बहुत मजा आया … आज तक।
मैंने उनसे लंड चूसने के लिए कहा।
तब उन्होंने झिझकते हुए कहा- मैंने भी कभी नहीं किया है ऐसा, पर आज जरूर करूंगी।
मैंने उनके मुँह में लंड दे दिया।
भाभी ने बहुत जोर जोर से लंड को चूसना शुरू कर दिया.
उनके लंड चूसने से मेरे मुँह से भी आह आह निकलने लगा था।
कुछ देर के बाद भाभी ने कहा- अब ज्यादा इंतजार मत करवाओ यार, मुझे चोद दो … जोर जोर से चोद दो।
मैंने भाभी की गांड के नीचे तकिया लगाया और उनकी चूत में लंड डाल दिया
वे आह कहती हुई लंड लील गईं और मैं उन्हें जोर जोर चोदने लगा। कविता भाभी अपनी दोनों टांगें उठाए हुई लंड का मजा ले रही थीं ‘आह आह यश मजा आ गया … आह और जोर जोर से करो मेरी जान.’वे मुझे चूमने लगीं और लगभग दस मिनट में उनका पानी निकल गया।
मैं हॉट भाभी को अभी भी जोर जोर से चोद रहा था.
फिर जब मेरा पानी निकलने वाला था, तब मैंने पूछा- रस कहां डालूँ?
उन्होंने कहा- अन्दर ही छोड़ दो. मैं अपने प्यार का रस महसूस करना चाहती हूँ।
बस 10-15 झटकों साथ में भी डिस्चार्ज हो गया और कविता भाभी के ऊपर ही लेट गया।
कविता भाभी ने मेरे कान में कहा- बहुत तगडा चोदा है तुम ने मुझे। आई लव यू अजय।
मैंने भी बोला- लव यू टू कविता डार्लिग।
उस रात मैंने कविता भाभी को कई बार चोदा।
बचे हुए दिनों मे हम दोनों ने चुदाई की सारी करने वाले थे। कभी चुदाई बेड रूम मे, कभी बाथ रूम मे, हाल मे, बालकनी मे, फार्स पर, हर जगह फ्लैट का कोई भी कोना नहीं छोड़ा था जहाँ की जगह हमारे चुदाई की गवाही ना देता हो और वहा से हम दोनों के वीर्य की महक ना आता हो। बचे हुए दिनों मे मैंने बहुत चोदा भाभी को और एक मौका ऐसा भी आया की मैंने उनकी गांड भी मारी। उन्होंने पहली बार अपनी गांड मरवाई थी।
यह सिलसिला तब तक चला जब तक मकान मालिक नही आ गया। अब लगभग दो वीक हो गए है की मै वहा से रूम छोड़ चुका हु। और अब तो कॉलजे खुल गया है और कॉलजे वापस आ गया। भाभी को जब मौका मिलता है वो काल करती है।
आप लोगो के feedback का इंतजार रहेगा ।अगर feedback मे अगले कुछ दिनों के चुदाई का और कविता भाभी की गांड मारने का Sex Story की डिमांड आयी तो आगे की स्टोरी जरूर शेयर करूँगा। दोस्तो, ये मेरी रीयल Sex Story है. आपको कैसी लगी, मुझे मेल जरूर करें।

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