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मम्मी ने बूढ़े ससुर के मूसल लंड से चुदवा लिया - Antarvasna Free Sex Stories

  • Kamvasna
  • 24 सित॰ 2025
  • 8 मिनट पठन

मैं कामवासना की नियमित पाठिका हूँ. मैंने यहाँ पर हर प्रकार के रिश्तों में चुदाई की कहानियाँ पढ़ी तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी अपने जीवन में आँखों देखी घटना की कहानी बना कर लिखूँ.


यह बात उन दिनों की है जब दिसंबर का महीना था और 5 तारीख थी.


आज भी मुझे वह दिन अच्छी तरह याद है कि क्या हुआ था.

आज मैं वही कहानी लिखने जा रही हूँ.


आगे बढ़ने से पहले मैं अपने परिवार के बारे में पहले थोड़ा-सा परिचय दे दूँ.


मेरे पापा कोमल पंडित की उम्र 50 साल है.

मेरी मम्मी की उम्र शायद 45 साल होगी.


मेरी उम्र इस समय 19 साल है. मेरी छोटी बहन, जिसे मैं अपनी गुड़िया कहती हूँ, उसकी उम्र जवानी की दहलीज पर ही है.

उसके अलावा मेरा एक भाई भी है.


मेरे पापा को गुजरे हुए 10 साल हो गए हैं.

तब से हम घर में चार लोग ही रहते हैं और बहुत आराम से रह रहे थे.

किसी प्रकार की कोई दिक्कत या कमी नहीं थी.


मेरी माँ एकदम मोटी, काली भैंस जैसी लगती थी.


उन्हें देखकर कोई उन्हें पसंद नहीं करता था.

सब उनसे ज्यादातर दूरी बनाकर ही बैठते थे.


घर में सब कुछ सही चल रहा था. हम सब खुशहाल थे.


लेकिन एक रात अचानक पता नहीं क्या हुआ कि मेरी नींद खुल गई.

मैं सूसू करने गई.


जब सूसू करके वापस लौट रही थी, तभी मम्मी के कमरे से कुछ आवाजें आईं.


मैंने सोचा कि मुझे जाकर देखना चाहिए.

मैं खिड़की के पास गई और वहां से झांकने लगी.


मैंने देखा कि मेरी मम्मी एकदम नंगी बिस्तर पर लेटी थीं और पास में एक बूढ़ा आदमी खड़ा था.


यह देखकर मैं चौंक गई कि यह सब क्या हो रहा है!

मैं वहीं चुपके से खड़ी देखने लगी.


फिर वह बूढ़ा मम्मी के पास आकर लेट गया.

वह मम्मी के स्तनों को ब/च्चे की तरह चूसने लगा और इधर-उधर चूमने-चाटने लगा.


मम्मी भी उसका साथ देने लगीं.


मैं सोचने लगी कि यह सब क्या हो रहा है और वह भी इस उम्र में!

मैं चुपचाप वहीं खड़ी देखती रही.


फिर वह बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे मम्मी के स्तनों को चूसते हुए नीचे उतरने लगा.


उसने मम्मी के पेट को चाटा, नाभि चाटी फिर जांघें चाटने लगा.

इसके बाद मम्मी के पैर की उंगलियां चाटने लगा.


फिर उसने मम्मी के दोनों पैर खोल दिए और दोनों हाथों से उनकी चूत को फैलाकर उसमें जीभ लगा दी.

मम्मी एकदम से चिल्ला पड़ीं- अहह उहह … स्स्स्स्स … ओह मम्मी.


इस पर वह बूढ़ा आदमी बोला- चुप रहो … वर्ना कोई जाग जाएगा!

यह सुनकर मेरी मम्मी शांत हो गईं.


अब वह बूढ़ा लगातार मम्मी की चूत चाटने में लगा रहा.

थोड़ी देर तक चूत चाटने के बाद वह मम्मी को उल्टी घोड़ी बनाकर उनकी गांड पर चढ़ गया.


मम्मी फिर से ‘उहह … अकक अहह … इस्स्स्स … ओह … हईहह’ करने लगीं.

तभी अचानक से लाइट आ गई.


मम्मी ने बूढ़े आदमी का अंडरवियर उतार दिया और उसका लंड देखने लगीं.

मैं खुद उसका लंड देखकर डर गई.


वह गधे के लंड के जैसे लटक रहा था.

वह काफी मोटा और लंबा लंड था.


मैं सोचने लगी कि इतना बड़ा और इतना मोटा लंड मम्मी की चूत में कैसे घुसेगा!


लेकिन उधर मैंने देखा कि मम्मी को कोई डर नहीं लग रहा था.

वे उसे हाथ में लेकर खेलने लगीं, फिर वे उस लंड को मुँह में लेकर पीने लगीं.


जब वह मुँह में नहीं गया, तो मम्मी की आवाज़ निकलने लगी.


जब बूढ़े आदमी का लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा और सख्त होने लगा तो मम्मी भी डर गईं.


वे बोलीं- हाय दैया … कितना मोटा और कितना बड़ा लंड है तुम्हारा. मैं नहीं जानती थी!


तभी वह बूढ़ा अचानक दीवार की तरफ घूम गया.

मैं उसकी शक्ल देखकर उसे पहचान गई कि यह कौन है.


वह बूढ़ा आदमी मेरे पापा का ताऊ लगता था, यानि वह मेरा दादा हुआ.

मैं उसे देखकर अपने मन में बुदबुदाने लगी कि ओ गॉड इस बूढ़े की ताकत तो देखो … यह 80 साल की उम्र में 45 साल की मेरी मम्मी को चोदने आया है … और मम्मी की बुद्धि भी देखो ये कितनी चुदासी हैं जो इस बूढ़े आदमी से चुदवाने जा रही हैं!


तभी मम्मी बोलीं- आपका तो बहुत बड़ा है!

वह बोला- हां पुष्पा रानी, मज़े ले लो इसके!


मेरी मम्मी का नाम पुष्पा है.


बाबा ने कहा- पुष्पा साली मेरी रंडी, आ जा. अपने पैर खोलकर लेट जा.

मेरी मम्मी बेड पर अपने दोनों पैर खोलकर और अपने हाथों से पकड़ कर पैरों को फैला कर लेट गईं.


बूढ़े बाबा ने मम्मी की चूत पर लंड लगाया और अन्दर डालने लगा.

मम्मी बोलीं- अब मत तड़पाओ मेरे राजा. डाल दो न अन्दर!


वे बोले- जरा रुक जा ना मेरी रंडी साली चुदक्कड़ कुतिया … अभी मुझे तेरी चूत की गर्मी के कुछ देर और मज़े ले लेने दो … फिर तो तुम्हारी चूत को फाड़ना ही है!

मम्मी चुप हो गईं और बाबा के लौड़े की मीठी रगड़न को महसूस करती हुई आह आह करती रहीं.


फिर बाबा ने अचानक से थोड़ा थूक अपने लंड पर लगाया और मम्मी की चूत की फाँकों के बीच में लंड को फंसा कर रखने लगे.

फिर उन्होंने मम्मी के कंधे पकड़े और एकदम से झटका दे मारा.


इससे बाबा का आधा लंड मेरी मम्मी की चूत में घुसता चला गया.

मम्मी की चूत चिर सी गई और वे दर्द के कारण रोने लगीं और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगीं- आह मर गई बचाओ … बचाओ मैं मर गई.


बाबा ने झट से मेरी मम्मी का मुँह दबा लिया.

कुछ देर बाद जब मेरी मम्मी थोड़ी शांत हो गईं तो बाबा ने फिर से धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करना चालू कर दिया.


अब मम्मी को मज़ा आने लगा था और वे भी धीरे धीरे अपनी कमर उठाकर बाबा का साथ देने लगीं.

तभी बूढ़े ने अचानक से अपना लंड पीछे खींच लिया और पूरा बाहर निकाल लिया.


मम्मी बोलीं- अब क्या हुआ? डालो न मेरे राजा … बड़ा मज़ा आ रहा था … अपना लंड पेल कर मेरा बाजा बजा दो!


तभी बाबा ने अपने लंड पर थूक लगाया और मम्मी के कंधे पकड़ कर बहुत तेज़ी से लंड को चूत में लगाया और एकदम बिजली की सी तेजी से पूरी ताकत से झटका दे मारा.


इस बार बाबा का पूरा लंड मम्मी की चूत में घुसता चला गया.

मम्मी फिर से ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगीं- आह मर गई … बचाओ इस बुढ़ऊ से … आह बचाओ मर गई ऊई मम्मी रे!


बाबा ने मम्मी के मुँह को दबाया और उनके बूब्स चूमने व चाटने लगे.

वे एक दूध को पीने लगे और दूसरे को मसलने लगे.


साथ ही बाबा अपने हाथ मम्मी के जिस्म पर इधर उधर भी लगा रहे थे.

वे मम्मी के कान भी चाट रहे थे.


इससे मम्मी का दर्द थोड़ा कम हो गया था, वे शांत हो गई थीं.


अब बाबा अपना लंड धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगे और कुछ ही पलों में वे अपनी पूरी स्पीड में चुदाई को करने लगे.

अचानक से बाबा ने अपनी पूरी स्पीड मानो खोल दी और वे मम्मी की चूत की मां चोदने लगे.


मम्मी चिल्लाने लगीं- ओह इस्स … उम्म्म … आह राजा … प्लीज धीमे चोदो ना!


मेरी मम्मी की मदभरी चीखें गूँजती रहीं और बाबा उन्हें पेलते रहे ‘उईईई उह्ह्ह … मर गईईईई.’


बाबा बराबर चोदते रहे.


थोड़ी देर बाद बाबा मम्मी से बोले- चल अब उठ जा मेरी पुष्पा रंडी … अब घोड़ी बन जा!

मम्मी घोड़ी बन गईं, तो बाबा को उनकी गांड दिख गई.


बाबा ने मम्मी की गांड को चाटना शुरू कर दिया.

मम्मी रोती हुई बोलीं- नहीं … गांड मत मारो. मैंने आज तक कभी गांड नहीं मरवाई!


बाबा हंसते हुए बोले- वाह मेरी रंडी. तूने तो मेरे लिए अपनी गांड कुंवारी रखी है. आज तो मैं तेरी गांड ज़रूर मारूँगा!

मम्मी ने बाबा के पैर पकड़ लिए और रोते हुए माफी माँगने लगीं.


लेकिन बाबा नहीं माने.

उन्होंने मम्मी की गांड चाटी, फिर धीरे-धीरे उसमें थूक लगाकर दो-तीन बार लंड अन्दर डालने की कोशिश की.


परंतु बाबा का मोटा लंबा, घोड़े जैसा लंड अन्दर नहीं गया.

वह हर बार इधर-उधर फिसल जाता रहा.


बाबा बोले- मेरी पुष्पा रंडी साली बदमाश … तेरी गांड बहुत कसी है. जा, जाकर तेल ले आ!

मम्मी ने कहा- ऐसे कैसे नंगी बाहर चली जाऊं?


फिर वे बोलीं- अच्छा रुको … मैं देखती हूँ. शायद यहीं बेड के बाजू में नारियल का तेल रखा हो.

उन्होंने बेड खोला और नारियल तेल का डिब्बा निकाल कर बाबा को दे दिया.


बाबा ने अपने लंड को तेल के डिब्बे में डुबोया और मम्मी की गांड में उंगली डालकर तेल भरा.

उन्होंने आधे से ज़्यादा डिब्बा खाली कर दिया.


फिर बाबा ने धीरे-धीरे लंड डालने की कोशिश की लेकिन फिर भी नहीं गया.


बाबा ने गांड चाटकर लंड का टोपा गांड के ऊपर रखा और मम्मी के कंधे पकड़ कर ज़ोर से धक्का मारा.

इस बार उनका आधा लंड मम्मी की गांड में घुस गया.


मम्मी ज़ोर से चिल्लाई- आआ आह फट गई!

वे आगे गिर गईं.


बाबा भी उनके ऊपर गिर गए.


मम्मी रोती रहीं और चिल्लाती रहीं लेकिन बाबा पर कोई असर नहीं हुआ.

वे वैसे ही पड़े रहे.


जब मम्मी का दर्द कुछ कम हुआ तो बाबा ने धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया.


फिर उन्होंने पूरा लंड बाहर खींच लिया.


मम्मी बोलीं- हाय मेरे राजा … अब क्या हुआ? बड़ा मज़ा आ रहा था. बजा दो मेरा बगीचा मेरे राजा … चोद डालो मेरी गांड को भी … इसने मुझे बहुत परेशान किया था. मेरी गांड में बहुत ज़्यादा खुजली हो रही थी. चोदो मेरे राजा जल्दी-जल्दी चोदो ना!


बाबा को गुस्सा आ गया और उन्होंने फिर से अपना लंड तेल के डिब्बे में डुबोकर मम्मी की गांड में तेल भरना शुरू कर दिया.

बाबा ने मम्मी की गांड में लंड का टोपा लगाकर दोबारा से धक्का मार दिया.


बाबा का पूरा लंड मम्मी की गांड में चला गया और मम्मी रोने लगीं.

वे चिल्लाने लगीं- हाय … मम्मी मर गई. बचाओ … इस सत्यानाशी बुढ़ऊ से … आह कोई तो बचाओ आह मर गई मम्मी!


बाबा ने मम्मी का मुँह दबाकर लंड की स्पीड बहुत तेजी से बढ़ा दी ‘घच घच घच कचा कच.’


बाबा गांड मारने में लगा रहा और उसकी स्पीड से पूरे कमरे में बस कचा-कच की चुदाई की आवाज़ गूँजने लगी थी.


मम्मी दर्द से रो रही थीं.


तभी मैंने देखा कि मम्मी की गांड से बूँद-बूँद खून टपक रहा है.

मैं तुरंत समझ गई कि मम्मी की गांड फट गई है.


लेकिन मम्मी भाग नहीं रही थीं … पता नहीं क्यों … शायद वे बहुत ज्यादा गर्म व चुदासी थीं.

उन्होंने दस साल से नहीं चुदवाया था, तभी वे नहीं भाग रही थीं और बराबर चुदवाती रहीं.


अचानक से बाबा का लंड झड़ने लगा और मम्मी की गांड में ही उन्होंने अपना पानी टपका दिया.


मम्मी उठ गईं और काँपती हुई बैठ गईं.

जब मैंने देखा तो मम्मी की गांड से बाबा का वीर्य और खून दोनों निकल रहा था.


तभी मुझे अचानक किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी तो मैं वहां से निकल गई.


मैंने छुप कर देखा कि कि मेरी छोटी बहन गर्म सांसें लेती हुई अपने कमरे में वापस जा रही है.


मैं समझ गई कि अकेली मैं ही मम्मी की ओल्ड यंग चुदाई की गवाह नहीं हूँ … मेरी छोटी बहन भी मम्मी की चुदाई का मजा ले रही थी.


अब मैं जाकर अपने बिस्तर पर लेट गई, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी.

मैं अपनी सलवार और पैंटी उतार कर अपनी चूत में उंगली करने लगी.


जब इससे कुछ काम नहीं हुआ तो मैं किचन में आ गई और वहां से एक बैंगन उठाकर अपनी चूत में डालने लगी.


फिर कुछ देर तक बैगन से चूत चोद कर मैं शांत हो गई.

मेरी चूत का पानी निकल गया.


इसके बाद मैं जाकर अपने बिस्तर पर सो गई.


इससे आगे की सेक्स कहानी में मैं आप लोगों को बताऊंगी कि कैसे मैं भी इस खेल में शामिल हो गई.

फिर क्या क्या हुआ और कैसे कैसे हुआ.

कैसे बाबा ने मेरी बुर का उद्घाटन किया और मेरी छोटी बहन की चूत का उद्घाटन भी बाबा ने किया.


दोस्तो, आपको Antarvasna Free Sex Stories कैसी लगी … प्लीज जरूर बताइएगा.

धन्यवाद.

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