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मस्तराम की किताब ने चुत दिलवाई - Desi Kahani

  • Kamvasna
  • 10 जन॰
  • 5 मिनट पठन

मेरा नाम सैफ है, ये बदला हुआ नाम है। असली नाम कोई और है। मैं सूरत के पास एक गाँव का हूँ, कम्प्यूटर रिपेयरिंग का काम करता हूँ। बात जून 2017 की है। मैं अभी-अभी 12वीं पास करके गर्मियों की छुट्टियों में गाँव आया था, उम्र ठीक उन्नीस साल। दिन भर दोस्तों के साथ चौराहे पर बैठते थे, चाय पीते, सिगरेट फूँकते, और शाम होते ही मोहल्ले की लड़कियाँ नज़र आने लगती थीं।


उनमें सबसे अलग थी जरीना। उम्र भी मेरे जितनी ही, अभी कॉलेज में पहला साल शुरू किया था। सलवार-कुरती में रहती थी, दुपट्टा सिर पर, पर जिस्म था कि आग लगा दे। पतली कमर, भारी चूचे जो कुरती में भी उभरे-उभरे दिखते, और चलते वक्त गाँड इतनी मटकती कि लंड अपने आप खड़ा हो जाता। मैं तो रोज़ उसके आने से एक घंटा पहले चौराहे पर पहुँच जाता था। पहले सिर्फ़ नज़रें मिलती थीं। फिर एक दिन उसने हल्की सी स्माइल दी। मैंने भी दी। फिर हाय-हैलो। फिर हँसी-मज़ाक। अब तो वो आती और मेरे पास दो मिनट रुक जाती। मैं उसके साथ-साथ चलने लगता, हल्की-हल्की छेड़खानी करने लगता।


एक रात करीब नौ बजे मैं अकेला बैठा मस्तराम की पतली वाली किताब पढ़ रहा था, टॉर्च की रोशनी में। अचानक जरीना मेरे सामने आ खड़ी हुई। मैं घबरा कर किताब छिपाने लगा, पर उसने झट से हाथ बढ़ाया और किताब छीन ली। दो पेज पलटे, आँखें बड़ी हो गईं, फिर शरमाते हुए बोली, “ये किताब मैं ले जा रही हूँ, कल लौटा दूँगी।” मैं हकलाया, “अरे… ले जाओ… कोई बात नहीं।” वो मुस्कुराई और चली गई। उस रात मुझे नींद नहीं आई, बस यही सोचता रहा कि किताब पढ़कर क्या सोच रही होगी।


अगले दिन शाम को वो खुद आई, किताब लौटाई और फुसफुसा कर बोली, “बहुत मस्त किताब है यार… और है तुम्हारे पास?” मैंने कहा, “हाँ है, मँगा दूँगा।” उस दिन से हमारी बातें खुल गईं। अब वो रोज़ मेरे पास रुकती, छेड़ती, “आज कौन सी किताब पढ़ रहे हो सैफ भाई?” मैं भी मज़ाक में बोल देता, “तेरे लिए तो पूरी लाइब्रेरी है।”


ईद का दिन था। मैं चौराहे पर बैठा हेडफोन लगा कर ब्लू फिल्म देख रहा था। जरीना आई, मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोली, “मोबाइल देना ज़रा।” मैंने बिना देखे दे दिया। दो मिनट बाद उसने चिकोटी काटी, “ये क्या गंदा देख रहे हो?” मैंने हँस कर कहा, “तू भी तो देख रही है, मज़ा आ रहा है ना?” वो लाल हो गई, पर बोली, “अकेले में चल कर देखते हैं, कोई देख लेगा तो बात बन जाएगी।”


मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा। मैंने उसे मोहल्ले के पीछे एक पुराना बंद मकान में ले गया, जिसका मालिक शहर चला गया था। पिछली खिड़की टूटी हुई थी, उसी से हम अंदर घुसे। अंदर अंधेरा था, बस मोबाइल की रोशनी। एक पुरानी चारपाई पड़ी थी, हम दोनों उस पर बैठ गए। फिल्म फिर से शुरू की। सीन था एकदम हॉट, लड़की चूचे दबवा रही थी, लड़का चूत चाट रहा था। जरीना की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी जाँघ मेरी जाँघ से सट गई।


मैंने धीरे से उसकी जाँघ पर हाथ रखा। वो सिहर गई पर हटाया नहीं। मैंने हिम्मत बढ़ाई और हाथ ऊपर सरका कर उसके चूचों पर रख दिया। पहली बार में उसने हाथ झटक दिया, “क्या कर रहे हो सैफ?” मैंने कहा, “बस थोड़ा सा… कोई नहीं देख रहा।” थोड़ी देर बाद फिर हाथ रखा, इस बार वो चुप रही। मैंने धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। उसके मम्मे कड़क थे, ब्रा के ऊपर से पता चल रहा था कि किसी ने आज तक छुआ तक नहीं। मैंने जोर से दबाया तो वो बोली, “आह… दर्द होता है… हल्के से दबाओ ना।”


मैंने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। वो आँखें बंद कर के “ह्म्म्म्म… आह्ह्ह” करने लगी। मैंने कुरती के अंदर हाथ डाला, ब्रा के ऊपर से ही मसलने लगा। वो खुद कुरती ऊपर उठा कर निकाल दी। अब सिर्फ़ सफ़ेद ब्रा और नीली सलवार में थी। मैंने पीठ पर हाथ डाल कर हुक खोला। वो बोली, “कोई आ गया तो?” मैंने कहा, “दरवाज़ा बंद है, खिड़की भी ऊँची है, कोई नहीं आएगा जान।” उसने मुझे ब्रा उतारने दी।


ब्रा निकलते ही मैं दंग हो गया। इतने बड़े-बड़े चूचे फिर भी एकदम खड़े, ज़रा सा भी नहीं लटके। गुलाबी निप्पल तने हुए। मैं तो बस देखता रह गया। वो शरमाते हुए बोली, “क्या घूर रहे हो… कभी देखे नहीं क्या?” मैंने झट से उसका मुँह पकड़ा और जोर से किस्स कर लिया, जीभ अंदर डाल दी। पहले तो वो छटपटाई, फिर खुद मेरी जीभ चूसने लगी, “चुम्म्म… चुप्प्प…” की आवाज़ आने लगी।


मैंने उसे चारपाई पर लिटाया और एक चूचे को मुँह में लेकर चूसने लगा, दूसरा हाथ से मसल रहा था। वो “आह्ह्ह सैफ… हल्के से… ओह्ह्ह कितना मज़ा आ रहा है… आह्ह्ह्ह” करने लगी। उसने मेरा सिर अपने चूचों पर दबाना शुरू कर दिया। मैं निप्पल को दाँतों से हल्का काटता, तो वो कमर उचकाती।


धीरे से एक हाथ उसकी सलवार के नाड़े में डाला। जाँघों के बीच पहुँचा तो सलवार पूरी गीली थी। मैंने ऊपर से ही चूत सहलानी शुरू की। वो पागल हो गई, “सैफ रुक जा… आह्ह्ह कुछ हो रहा है… ओह्ह्ह्ह्ह” मैंने नाड़ा खोला और सलवार नीचे सरका दी। अंदर कुछ नहीं, एकदम चिकनी गुलाबी चूत, फूली हुई। मैंने घुटनों के बल बैठ कर उसकी टाँगें चौड़ी कीं और मुँह लगा दिया। जीभ से चूत के दाने को रगड़ने लगा। उसका रस नमकीन-मीठा था। वो मेरे सिर को चूत पर दबाते हुए बोली, “हाय अल्लाह… सैफ बस… मैं मर जाऊँगी… आह्ह्ह्ह्ह ऊउउईईई माँँ” और जोर की पिचकारी मेरे मुँह में छोड़ दी।


अब मेरा लंड पैंट में दर्द कर रहा था। वो खुद मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी, फिर पैंट की बेल्ट, ज़िप, अंडरवियर एक साथ नीचे। मेरा 7 इंच का मोटा लंड बाहर आया तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया, “ये क्या है सैफ… इतना बड़ा… मेरी तो फट जाएगी यार।” मैंने कहा, “पहले चूस ले, डर मत।” वो हिचकी, फिर झुकी और सुपारा मुँह में लिया, “ग्ग्ग्ग्ग… गों गों गोग” करते हुए चूसने लगी। मैंने उसका सिर पकड़ कर गला तक पहुँचाया, वो खाँसने लगी पर चूसती रही।


हम 69 में आ गए। वो ऊपर, मैं नीचे। मैं उसकी चूत चचोर रहा था, वो मेरा लंड गले तक ले रही थी। करीब 20 मिनट तक ऐसे ही चला। वो तीन बार झड़ी, मैंने एक बार उसके मुँह में छोड़ा, उसने सारा माल पी लिया और बोली, “तेरा तो बहुत स्वाद है रे…”


अब मैंने कहा, “जरीना, अब असली खेल?” वो डरते हुए बोली, “धीरे करना, बहुत दर्द होगा।” मैंने अपने लंड पर खूब थूक लगाया, उसकी चूत पर भी। उसकी टाँगें कंधों पर रखीं, सुपारा सेट किया और एक ज़ोर का धक्का मारा। वो चीख पड़ी, “निकालोोो हरामी… मर गई मैं… आआअह्ह्ह्ह्ह्ह” आधा लंड अंदर, खून की धारा बहने लगी। वो रोने लगी, “बहुत दर्द है सैफ… प्लीज़ निकाल।” मैं रुका, उसे किस्स किया, चूचे चूसे, निप्पल काटे। जब वो थोड़ी शांत हुई तो दूसरा धक्का, पूरा लंड अंदर। उसका मुँह मैंने हाथ से दबा रखा था, सिर्फ़ “ह्म्म्म्म्म” की आवाज़ आई।


मैं पाँच मिनट रुका रहा, लंड अंदर ही। धीरे-धीरे वो सामान्य हुई। बोली, “अब थोड़ा मज़ा आने लगा है।” मैंने हल्के-हल्के झटके देने शुरू किए। पहले दर्द, फिर मज़ा। वो खुद कमर उचकाने लगी, “चोद सैफ… ज़ोर से… फाड़ दे मेरी चूत… आह्ह्ह ह्ह्ह्ह इह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह” मैंने स्पीड बढ़ाई, चारपाई चरमराने लगी। 12-15 मिनट की ज़ोरदार चुदाई के बाद वो फिर झड़ी, चूत में ऐंठन हुई, मेरा लंड दब गया। मैंने भी ज़ोर-ज़ोर से ठोका और उसकी चूत में ही सारा माल उड़ेल दिया।


हम दोनों पसीने से तर, एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उसने धीरे से कहा, “सैफ… आज से मैं तेरी हूँ।” मैंने हँस कर कहा, “हर रोज़ चोदूँगा तुझे।” कपड़े पहने तो शाम साढ़े पाँच बज चुके थे। वो बोली, “अब जल्दी घर जाना है, अम्मी शक करेंगी।” हम चुपके से निकल गए। उस दिन के बाद जरीना की कच्ची कली हमेशा के लिए खिल गई।


तो कैसी लगी आप को मेरी Desi Kahani।

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