मालती की जवानी - Antarvasna Sex Stories
- Harry
- 3 days ago
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दोस्तों मेरा नाम हैरी है और मेरी उम्र 24 वर्ष की है। मेरी ये कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाली मालती और मेरे बीच हुए प्रेम और सेक्स की दास्ताँ है ।
मालती के बारे में लिखू तो उसकी उम्र 28 वर्ष कद पांच फ़ीट आठ इंच रंग सावला पर एक दम साफ़ जैसे चमकता हुआ सोना, बड़ा चेहरा, मोटे होठ और शरीर इतना सेक्सी, सुडोल और भरा हुआ की पहली नज़र में ही मैंने ठान लिया था की अगर इसे नंगा कर छत पर नहीं चोदा तो सर गांजा करवा दूंगा अपना। मालती शादी शुदा है और कोई सात महीने पहले उसकी शादी हुई और वो अपने पति के साथ हमारे घर के सामने वाले घर में किराये पर रहने आई।
अपने बारे में लिखू तो मेरा नाम हैरी उम्र 24 वर्ष कद पांच फ़ीट दस इंच, रंग गोरा, शरीर सुडोल और काफी तगड़ा, पिछले दस साल से हर रोज़ जिम कर रहा हु और इससे शरीर बहुत तगड़ा हो चूका है। सेक्सुअली बात करू तो मेरा आठ इंच लम्बा लंड हर औरत की बिना रुके तीन घंटे तक चुदाई करने में सक्षम है। मालती को मिलकर अब तक दो सौ से ज्यादा औरतें मैंने चोद दी है।
खैर मेरी कहानी इस तरह से शुरू होती है की अक्टूबर 2025 की बात है जब मेरे बीसीए के आखरी साल के पेपर हुए थे और कहीं घूमने जाने की बजाये मैं घर पर ही रह कर छुटिया काट रहा था । माँ स्कूल में पढ़ाती है और पापा बैंक में काम करते हैं तो वो दोनों अपने अपने काम पर सुबह ही चले जाते हैं और घर पर मैंने अकेला ही रह रहा था।
खैर सर्दिया आने को थी तो मैं घर के बाहर एक दिन खड़ा था तो मैंने सामने वाले घर में से एक औरत को बाहर आते हुए देखा। वो बाल्टी से पानी गली में गिरा कर साफ़ कर रही थी। मैंने उसे पूरा ऊपर से नीचे तक देखा और मैं जैसे हिल सा गया। पहली नज़र में वो मुझे बेहद खूबसूरत लगी । मैंने वही खड़ा उसे देखता रहा और वो औरत अंदर से पानी भर कर लाती और गली में गिराने लगती । मैंने उसे देखे जा रहा था और उसकी नज़र मेरी और पड़ी पर वो अपने काम में लगी रही।
मैंने वही बाहर खड़ा रहा और वो थोड़ी देर बाद फिर बाहर आई और बाहर धुप निकली हुई थी तो वो धुप में बैठ कुछ काम करने लगी पर मैं उसे निहारे जा रहा था । उसने मुझे काफी बार देखा पर कोई रिएक्शन नहीं दिया पर मैं इसी तरह से उसे लगातार देखे जा रहा था। मेरइ इस तरह देखने से वो औरत मुझे बीच बीच में देखने लगी। वो काम करते करते आँखे मेरी और कर देखने लगती और फिर से काम करने लगती।
वो किरायेदार थी मुझे पता था क्योकि सामने वाले घर में और किरायेदार भी रहते हैं और मकान मालिक से मेरी अच्छी जान पहचान है तो मैंने उससे बात करने का सोचा तो मैं उसके पास गया और बोलै जोगिन्दर अंकल हैं घर पर।
मकान मालिक का नाम जोगिन्दर है तो मैंने कहा जोगिन्दर अंकल है क्या घर पर।
नज़दीक से देखने पर वो मुझे ज्यादा उम्र की नहीं लग रही थी। उसने कहा पता नहीं आप अंदर जाकर पुछलो।
मैंने कहा कितनी प्यारी आवाज़ है आपकी मैं सोचा नहीं था की दिखने में जितने हसीं हो आप उतनी मीठी आपकी आवाज़ है।
वो जैसे मुस्कुराने लगी और मैं अंदर गया और जोगिन्दर अंकल तो थे नहीं तो मैं उनकी बीवी से यही मिलकर वापिस आ गया और फिर से दरवाजे पर खड़ा होकर उसे देखने लगा।
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराती और अपना काम करने लगती तो मैंने अपनी जेब से फोन निकला और उसे कान पर लगाया और बोला आपकी मुस्कराहट बहुत बहुत खूबसूरत है।
देख मैं उस औरत की और रहा था और उसे बोलने के बहाने से फोन मैं कान पर लगाया हुआ था। वो औरत मेरी और देख कर मुस्कुराने लगी थी और मैं वही पर खड़ा ऐसे ही लगा रहा और वो मेरी और देखे जा रही थी।
थोड़ी देर बाद जब वो औरत अंदर गयी तो मैं भी घर में आ गया और शाम को छत पर गया तो वो मालती घर के बाहर अकेली बैठी थी और उसकी नज़र मेरी और पड़ी तो बस फिर से देखना दिखाना शुरू। इस बार तो वो मेरी और लगातार देखे जा रही थी बिना रुके और मैं भी कहा रुकने वाला था । मैंने अस्स पास देखा और अपने कान पर फोन लगाया और बोला आपका नाम क्या है
वो हसने लगी। शायद वो मुझे नाम बता देती पर कहा मैं छत पर था और कहा वो नीचे
खैर मैं इसी तरह से फोन कान पर लगाकर उसकी खूबसूरती की तारीफ करता तो कभी उसका नाम पूछता और मालती मुस्कुराये जाती। थोड़ी देर बाद मालती हस्ते हुए अंदर कमरे में चली गयी और में अपने कमरे में आ गया। मेरा मन उसे देखे बिना नहीं लग रहा था और रात खाना खाकर मैं फिर से छत पर टहलने गया तो वो अपने घर की छत पर कड़ी जैसे मेरी और देख रही थी तो मुझे ऐसा लगा की जैसे वो थोड़ी परेशान है। मैंने कान पर अपना फोन लगाया और बोला क्या हुआ उदास लग रहे हो आप
वो मेरी और देखने लगी और मैंने कहा ऐसा है न
उसने ना में सर को हिलाया
मैंने कहा आपका नाम क्या है
तो मालती ने धीरे से कहा मालती
मैंने सुन तो लिया तो बोला बहुत प्यारा नाम है आपका
मालती जैसे थोड़ी उदास थी
मैंने कहा अगर बात है तो बोल्दो
मालती ने हां में सर को हिलाया
तो मैंने उसे पूछा क्या बात है
मालती ने इशारे में जवाब दिया की बाद में बताती हु
मैंने कहा ठीक है
वो वह मेरी और देखती रही और मैं छत पर उसकी और देखता रहा।
खैर रात को खाना खाया और सो गया और अगले दिन फिर से वही सब। और वो घर के बाहर धुप में बैठ गयी और में दरवाजे पर खड़ा उससे बातें करने लगा और जब कोई दूसरा किरायेदार आता तो मालती चुप कर जाती। दूसरी रात की बात है की मैं अपने कमरे में सोने लगा ही था की जैसे किसी के घर में झगड़ा चल रहा हो ऐसी आवाज़ आने लगी और मैं घर से बाहर देखने आया तो सामने वाले घर में लड़ाई जैसे हो रही थी। मुझे नहीं पता था की क्या चल रहा है पर तभी मालती भागी भर को आई और में दरवाजे पर खड़ा था तो मेरे पीछे जैसे छिप गयी और तभी उसका पति हाथ में डंडा लिए घर से बाहर आया और उसने मुझे एक तरफ करने की कोशिश की तो मैंने उसे नीचे फेंक दिया। उसके पति ने फिर से मल्टी को पकड़ने की कोशिश की टोमैने एक जोर से थपड लगाया तो वो जैसे सुन होकर जमीन पर गिर गया। तभी मेरे माँ पापा और गली के और लोग आ गए। मेरी माँ मालती को मेरे घर में ले गयी और उसके पति ने दारू पी रख थी तो लोगो ने मिलकर उसके पति को घर के अंदर छोड़ा और थोड़ी देर बाद मालती भी उसके घर चल दी।
खैर अगला दिन आया तो मालती दरवाजे पर बैठी जैसे रो रही थी तो मैंने उसे देखा और थोड़ी बात शुरू की और उससे उसका फोन नंबर मांगा तो उसने हां करदी और मुझे उसका नंबर दे दिया ।
मैंने उसे फोन पर मेसेज किया और वो मेरे से चैट करने लगी। मैंने उसे काल केलिए पूछा तो उसने कहा अभी नहीं।
खैर चैट करते करते उसने उसके बारे में उसके पति के बारे में सब बताया की कैसे उसकी शादी हुई और शादी के बाद उसका पति जो उसे मरता पीटता है सब कुछ। मैंने उसे प्यार से थोड़ा समझाया और कहा की अगर उसका पति उसे फिर कुछ कहे तो बस मुझे बता दे मैंने उसकी अकाल ठिकाने पर लगाऊगा
तो मालती ने लिखा ठीक है
खैर हम दोनों चैटिंग करते रहे और दो दिन तक हम दोनों एक दूसरे से काफी खुल गए थे जैसे की वो छत पर आती तो इशारे मई बात करनी और कभी मैं उसे फोन कर लेता और कभी चैट।
तीसरे दिन मैं किसी काम से बाहर जा रहा था मुझे कालेज में जाकर एडमिशन का पता करना था तो मालती जैसे बोर हो रही थी और फोन या मेसेज पर ज्यादा बात नहीं हुई। शाम को जब मैं वापिस घर आया तो मालती का फोन ा गया और उससे फिर बात होने लगी।
मैंने बातो बातो में मालती से बाहर जाने का पूछा तो वो झट से मान गयी।
मैं हैरान था की मैंने पहली बार पूछा और वो मान भी गयी। मालती बिहार के एक दूर दराज़ से थी और शहर में माल या फिल्म उसने देखि नहीं थी तो मैंने उसे फिल्म देखने के लिए पूछ लय और वो मान गयी।
अगले दिन मैं गाडी में मालती को एक बड़े माल में ले गया। मालती साडी या सूट पहनती थी पहले तो उस दिन उसने लाल रंग का सूट पहना हुआ था जिससे वो मेरी बीवी लग रही थी।
फिल्म देखने के लिए टिकट ली और अंदर हाल में चला गया। फिल्म शुरू हुई तो चारो और अँधेरा हो गया तो मैंने मालती को छेड़ने के लिए मैंने अपने जूते से पाँव बाहर निकला और मालती के पाँव को छुआ तो मालती जैसे दर गई और उसने मेरी बाजु कस कर पकड़ ली। उसे लगा की चूहा है पर मैंने इसी तरह से लगा रहा और कभी उसकी टांग पर अपना पाँव फेरता तो कभी उसके पाँव पर तो मालती दर जाती। पूरी फिल्म में मैं ऐसे ही लगा रहा और खाना खाकर मैं और मालती पार्क चले गए और रात को नौ बजे मालती को मैंने घर पर छोड़। उसका पति घर पर आ गया था तो उसने बहाना लगा दिया की सामान लेने गयी थी वो।
खैर रात को हम फोन पर बातें करते रहे। उसका पति शराब पीकर सो जाता तो उसे क्या पता चलना था और मालती और मैं फोन पर देर रात तक बातें करते रहते। अगले दिन मेरे घर मेरा कालेज का दोस्त आया। उसकी बहना की शादी अगले हफ्ते होनी थी तो वो मुझे और मेरे परिवार को इनविटेशन देने आया था।
मैंने मालती से बात करते करते उसे अपने साथ शादी में जाने के लिए पूछा तो वो मान गयी। अगले दिन मालती फिर सेमेरे साथ घूमने माल गयी तो मैंने उसे एक ड्रेस पसंद करने को कहा तो वो सूट वगैरा देकने लगी तो मैंने उसे फ्रॉक वगैरा ट्राई करने को कहा तो उसे एक फ्रॉक पसंद आ गयी। शादी पर भी जाना था तो कपडे तो लेने ही थे। थोड़ी शॉपिंग करने के बाद रात को नौ बजे मालती कोउसके घर छोड़ मैं अपने घर आ गया और रात भर मालती से फोन पर बातें करता रहा। अगले दिन क्या हुआ की मैं सो रहा था और दरवाजे पर दस्तक हुई और मैं ऐसे ही उठा और गेट खोला तो बाहर मालती कड़ी थी और उसके हाथ में खीर डा डिब्बा था। मैंने सिर्फ कच्छा पहन रखा था और कुछ नहीं तो मल्टी ने मेरी और देखा और हसने लगी। मैंने उसे घर के अंदर आने को कहा तो मालती आ गयी और मैंने कपडे पहने उसके साथ अपने कमरे में बैठ गैप शाप करने लगा । मेरी माँ स्कूल से शाम को चार बजे तक आती है तो मालती वही मेरे कमरे में बैठी रही और माँ के आने से पहले अपने घर चल दी और फिर फोन पर चैट करने लगी ।
मैंने लिखा सॉरी आप घर पर आये तो आपने मुझे इस हालत में देख लिया
मालती ने लिखा वैसे अच्छे लगते हो शरीर से इतने तगड़े हो कच्छे में अच्छे दीखते हो आप
मालती मुझे अपनी फोटोस भेजती और मुझसे मेरी फोटोस मांग लेती और हमारा चल रहा था । रोज़ सुबह जब माँ स्कूल चली जाती तो मालती मेरे घर आ जाती और शाम को अपने घर जाती और फिर फोन पर बात या चैट चलती। मेरे घर पर हम डांस करते और ऊँची आवाज़ में गाने लगाकर नाचते। मालती ने कहा की वो जैसे जिंदगी चाहती है उसे वो मेरे घर में ही मिल रही है और इतना की उसने कहा की वो मुझे उसके पति से ज्यादा अपना समझती है। उसका पति उसके लिए कुछ नहीं पर मैं उसके लिए उसकी जिंदगी बन चूका हु। खैर मेरी अच्छी काट रही थी और हर रोज़ मालती मेरे साथ माल जाने लगी और कुछ न कुछ मैं उसे ले देता और देर रात कभी दस बजे तो कभी ग्यारह बजे घर पर आते। एक दिन ऐसे ही माल में फिल्म चल रही थी और मालती के साथ एक लड़की बैठी थी और वो और उसके साथ बैठा लड़का पूरी फिल्म किस करते रहे और मालती उन्हें देखती और फिर मेरी और देखती। खैर शादी का दिन आया जिस दिन मुझे मेरे दोस्त के घर उसकी बहिन की शादी पर जाना था। सुबह सुबह मालती को बाइक पैर लेकर मैं अपने दोस्त के घर निकल गया। मालती ने उस दिन फ्रॉक पहन राखी थी और शादी में खूब मज़े करने के बाद मालती को शाम को मैं घर ले आया और उससे फोन पर बात करते करते मैंने मालती से कहा मालती शादी तो हो गयी मेरे दोस्त की बहन की और आज रात सुहागरात होगी उनकी।
मालती हसने लगी और बोली अच्छा आपको पता है सुहागरात होती है
मैंने कहा हां सुना है की शादी के बाद पहली रात या दूसरी रात सुहागरात होती है पर सुहागररात क्यों कहते हैं वपता नहीं।
मालती बोली अच्छा पता नहीं आपको चलो कोई बात नहीं पता चल जायेगा जब आपकी सुहागरात होगी
मैंने कहा हां वो तो है वैसे आपको पता है सुहागरात क्या होती है
मालती ने कहा नहीं मुझे नहीं पता मेरा पति तो शराबी है मैं तो जैसी शादी से पहले थी वैसे ही अभी हु
मैंने कहा अच्छा वैसे आपको पता है तो बता देना ऐसा न हो की मेरी शादी हो जाये और मुझे पता ही न हो की सुहागरात किसे कहते हैं क्या होती है
मालती ने लिखा अपने दोस्तों से पूछ लो
मैंने लिखा ठीक है अपने दोस्त से पूछ लूंगा और फिर आपको भी बता दूंगा
मालती और मैंने इसी तरह से लगे रहे और रात भर हसी मज़ाक चलता रहता और अगले दिन फिर से सुबह सुबह मालती मेरे घर आ गयी और इस बार फिर से मैं कच्छे में था और मुझे मालती देख हसने लगी और अंदर आकर मेरे कमरे में बेड पर बैठ गयी और हम दोनों ऐसे ही बातें करने लगे ।
मैंने कहा मैंने अपने दोस्त से पूछा था की सुहागरात को सुहागरात क्यों कहते हैं
मालती ने कहा अच्छा फिर ठीक है
खैर मालती पूरा दिन वही मेरे बैडरूम में बैठी रहती पर मैं चाहता था की वो खुद पहल करे। मुझे प्रोपोस करे या कुछ और पर मैंने पहल नहीं करने वाला था तो उसी रात वही हुआ बात करते करते मालती ने मुझे कहा की वो मेरे से प्रेम करती है और विवाह करना चाहती है और हमेशां मेरी बन कर रहना चाहती है। मैंने उसे हां कर दी और कहा की प्रोपोस सामने से करने चाहिए फोन पर नहीं।
मालती ने कहा शर्म आ रही थी कैसे कहती । मालती ने कहा की जब से वो मेरे से प्रेम करने लगी मेरे नाम का सिन्दूर हर रोज़ अपनी मांग में वो भर्ती है।
खैर बातें चलती रही और अगला दिन आया तो फिर से मालती सुबह सुबह मेरे घर आ धमकी। मैंने दरवाजा खोला और वो मेरी और देखकर हस रही थी और अंदर मेरे बैडरूम में आकर बैठ गयी । मैंने भी अंदर आया तो उसने मुझे सामने से प्रोपोस किया और मैंने हां कर दी । हर रोज़ की तरह मैंने गाने चला दिए और मालती और मैंने डांस करने लगे और डांस करते करते मैंने उसके होठो पर चुम्बन लेना चाहा तो वो मुस्कुराने लगी और मैंने धीरे से उसके होठ अपने होठो में भर चूसने शुरू किये। एक मिंट भी नहीं लगा और मालती ने मुझे कास कर अपनी बाहो में पकड़ कर जोर से जकड लिया। उस दिन मालती ने सूट पहना हुआ था तो मैंने उसके गले से दुपट्टा निकाल एक तरफ फेंक दिया और सूट के ऊपर से ही उसके दोनों मम्मे पकड़ दबाने शुरू किये। मालती पूरा साथ दे रही थी और मेरे होठो को चूस रही थी और मैं उसके होठो को और मेरे दोनों हाथ पहले तो धीरे धीरे और फिर जोर जोर से मालती के मम्मे दबाने लगे और मालती को जैसे झटका लग रहा था इससे । मैंने सिर्फ कच्छा पहना हुआ था तो मेरा आठ इंच लम्बा लंड ऊपर को खड़ा हुआ पड़ा था तो मैंने अपना कच्छा नीचे किया और मालती के हाथ को लंड के ऊपर रख दिया और खड़े खड़े हम दोनों प्रेम कर रहे थे एक दूसरे को । आधा घंटा बीत गया होगा और मालती गर्म हो चुकी थी। उसके चेहरे की गर्मी मुझे मेरे चेहरे पर साफ़ महसूस हो रही थी और मैंने फिर उसकी पीठ गांड पर हाथ फिरना शुरू किया और पीछे से सूट का हुक खोल दिया इससे मालती का सूट ढीला हो गया और सूट को थोड़ा नीचे कर उसके गले पर छाती पर मैं किस करने लगा। मैंने अपना कच्छा उतर कर फेंक दिया और मालती को अपनी बाहो में उठा अपने बैडरूम में ले गया। मालती की दोनों आँखे बंद थी। मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया और उसके पुरे बदन को चूमे लगा । मैंने नीचे से उसकी सलवार खोल उतर दी और फिर पेंटी भी उतर दी और ऊपर का सूट उतर ब्रा को खोल कर एक तरफ फेंक दिया और मालती पूरी नंगी मेरी आँखों के सामने थी और मैंने उसके ऊपर लेट गया और उसके पुरे बदन को चूमने लगा । मालती आँखे बंद कर लेती रही और मैंने उसे पूछा कैसा लग रहा है
मालती ने कहा बहुत अच्छा
मैंने कहा बस बोलते रहना कैसा लग रहा है
इतना कह कर मैंने मालती के मम्मे चूसने शुरू किये और मालती बोली आह हैरी बहुत अच्छा लग रहा है।
मैंने दोनों मम्मे जी भर कर चूसे और हाथो से पकड़ पकड़ कर खींचे और मम्मा मेरे हाथ से भी बड़ा था और हाथ में पूरा नहीं आ रहा था। सावले रंग का मम्मा और उस पर भूरे रंग का निप्पल। फिर मैं नीचे गया और मालती की दोनों टांगो को फैलाया और अपनी जीभ जैसे ही डालती मालती सेक्स से तिलमिलाने लगी। मालती बोली बहुत मज़ा आ रहा है हैरी बहुत ज्यादा मज़ा।।
मैंने लगा रहा और थोड़ी देर बाद मालती की चूत से पानी निकला पर मैं फिर से शुरू हो गया और फिर से उसकी चूत चाटने के साथ साथ उसके मम्मे खींचे जा रहा था। आधा घंटा बीता होगा और मालती की चूत से पानी निकला और वो ढीली होकर बेड पर लेटी रही और मैं बेड पैर लेट गया और मालती मेरे ऊपर पूरी चढ़ गयी और मेरे जिस्म पर हाथ फेरने लगी और फिर प्रेम की बातें करने लगी । मेरा लंड अभी तक तना हुआ था तो मालती बोली यार ये कितना मोटा और लम्बा है
मैंने कहा हां तुम्हारे मम्मे भी तो कितने मोटे हैं
मालती हसने लगी और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बैठी हुई थी तो मैंने कहा इसे चूस कर देखो तो मालती हसने लगी और उसने लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी । मैंने कहा जितना मुँह के अंदर जा सकता है उतना ले जाओ तो मालती ने लंड को मुँह के और अंदर तक लेलिया और मैंने मालती का चेहरा आगे पीछे करना शुरू किया इससे लंड मल्टी के मुँह के अंदर बाहर होने लगा। मैंने कहा ऐसे करो तो मालती उसी तरह से करने लगी।
मैंने बेड पर लेता हुआ और मालती लंड का स्वाद चख रही थी। एक घंटा बीत गया पर लंड जो का त्यों खड़ा था। मालती थक चुकी थी पर लंड उसने मुँह से बाहर नहीं निकला । मैंने मालती को मेरे ऊपर आने को कहा की उसकी चूत मेरे मुँह के ऊपर आ जाये तो वो अपनी चूत मेरे मुँह के ऊपर ले आई और मैंने उसे लंड को मुँह में लेने कोकहा तो उसने ऐसा ही किया। मैंने मालती किछूट को चूसने लगा और वो मेरे लंड का सवाद लेने लगी। काफी देर बाद मालती की चूत से पानी निकला और मालती जैसे ढीली हो गयी पर वो लंड को चूसे जा रही थी। मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसके चेहरे की और मैं अपना लंड लेकर गया और लंड को मुँह में डालकर तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा और कभी उसके दोनों मम्मे के बीचे मैं लंड को रख कर लंड को आगे पीछे करता तो कभी मालती लंड को चूसने लगती। तीन घंटे से थोड़ा ज्यादा हो गया था की मेरे लंड में से माल निकला और सारा माल मालती के मुँह में गिर गया । मालती ने माल को नीचेगीरा दिया और चार बजे तक नंगी मेरे ऊपर लेटी रही और फिर कपडे पहन अपने कमरे में चली गयी। अगला दिन इतवार का था तो सिर्फ फोन पर ही बातें हुई और सोमवार को जब माँ स्कूल गयी तो मालती फिर से मेरे घर सुबह सुबह आ गयी और मैंने भी सोचा था की आज इसकी ठुकाई करूंगा पर मेरे से ज्यादा जल्दी तो मल्टी को थी और उसने गेट पर ही मुझे कस कर गले से लगा लिया और मैं उसे अंदर ले गया और उसके होठ चूसते चूसते मैंने उसके कपडे उतारे और फिर अपने कपडे उतारे और पहले उसकी गॉड में सिर्फ रख उसके मम्मे चूसे और इससे मालती सेक्स से पूरी भर गयी और फिर उसकी चूत में अपनी जीभ दाल अच्छे से मालती को मज़ा कराया और फिर मैंने मालती की दोनों टाँगे फैलाई और अपने आठ इंच लम्बे लंड को मालती की चूत पर रख मैंने जोर लगाना शुरू किया । मालती की चूत एकदम टाइट थी। मैंने धीरे धीरे करके लंड को थोड़ा सा अंदर धकेला और फिर धक्के देने शुरू किये। पहले तो धीरे धीरे और फिर जोर जोर से मैंने लंड को चूत के और अंदर धकेलने के लिए जोर लगाना शुरू किया । मैंने मालती की दोनों टांगें अपने कंधो पर रख और लंड को जोर से धकेलते हुए मालती के ऊपर ही मैं लेट गया पर मैं लगातार लंड को जैसे जोर लगा कर रखा था की लंड और चूत में घुस जाये । थोड़ी देर बाद मैंने फिर से लंड को धक्के देने शुरू किये।
मेरे हर धक्के पर मालती आह आह आह आह कर रही थी पर मैं हटा नहीं
काफी देर बाद मैंने मालती को लंड के ऊपर बैठने को कहा और वो लंड के ऊपर आए गयी । मैंने लंड को पकड़ चूत के मुँह पर रखा और मालती को नीचे होने को कहा। ऐसे धीरे धीरे लंड चूत में घुसने लगा और मैंने मालती को लंड के ऊपर नीचे होने को कहा और मालती शुरू हो गयी। मालती आह आह कर रही थी और वो भी काफी जोर से।
थोड़ी देर बाद मुझे मेरे लंड पर खून दिखने लगा। मैंने सोचा मुबारक हो सील टूट गयी । मालती जो दर्द होने लगा था पर वो लगी रही। मैंने से लंड के ऊपर ही रुकने को कहा। लंड मालती की चूत में था और वो जैसे वही रुकी रही और कुछ मिंट बाद फिर से शुरू हो गयी। एक घंटा बीत चूका था और मालती को मैंने फिर घोड़ी बनाया और पीछे से लंड चूत में दाल चूत चुदाई फिर से शुरू कर दी।
मालती आह आह हैरी आह हैरी आह आह कर रही थी
पर मैं रुका नहीं और जोर जोर से धक्के देने लगा
मालती आह आह आह हर्री आह आह किये जा रही थी।
मैंने फिर मालती की चूत में से लंड निकला और उसकी गांड में डालने के लिए जोर लगाने लगा । लंड थोड़ा सा अंदर गया तो मैंने मालतको को कमर से पकड़ पीछे और लंड को जोर से आगे को धकेलने लगा और इससे लंड गांड मैं और अंदर घुस गया। काफी देर तक गांड की ठुकाई मैं करता रहा और फिर से मालती को लंड के ऊपर बिठाकर मैंने लंड को गांड में डाला और मालती ऊपर नीचे होने लगी । जब मालती थक जाती तो वही रुक जाती और फिर से वही से शुरू हो जाती।
ऐसा काफी देर तक चलता रहा और दो घंटे बीत चुके थे। मालती थक चुकी थी और उसमें बिलकुल भी हिम्मत नहीं थी तो मैंने मालती को बेड पर बिठाया और पहले किसी कपडे से लंड को साफ़ किया क्योकि लंड उसकी गांड में गया था तो लंड को साफ़ किया और मालती की गॉड में सर रख उसके मम्मे चूसने लगा और मालती मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर हिलाने लगी । पूरा एक घंटे मैंने मालती के मम्मे चूसने पर लगा दिया और लंड अभी भी तना हुआ था और काफी समय बाद फिर लंड में से माल निकला और सारा माल बेड पर गिर गया। मालती इसी तरह से नंगी बेड पर बैठी मेरे सर पर हाथ फेरती रही और मैं उसकी गोद में सर रख लेटा रहा। मैं बाजार जाकर एक दर्द की दवाई लेकर मालती को दी और चार बजे माँ के स्कूल से आने से थोड़ा पहले मल्टी अपने घर को चल दी। उसके अगले कुछ दिन हम फोन पर बातें करते रहे पर कोई हफ्ता भर बाद फिर से मालती मेरे घर सुबह सुबह आ गयी और मैंने जब तक उसकी चुदाई की और उस दिन से आज तक मैं हफ्ते में तीन दिन उसकी अच्छे से चुदाई कर रहा हु और मालती मेरे साथ काफी खुश है।
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