खिला पिला कर लंड को वश कर लिया - Antarvasna Sex Stories
- Nilesh Lonke
- 12 hours ago
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नमस्कार सभी चाहते पाठक, मेरा नाम विशाल हैं, अपनी पहिली नई कहानी लेकर, लेकर आया हुं। जो लगभग पिछले पांच-छह साल से आज तक चल रहि हैं ।
आपको अपने बारे में कुछ बता दूं, मेरी आज उम्र पैंतालीस साल हैं। मेरी शादी को लगभग पच्चीस साल हो गये हैं ! मेरी बीबी कि मौत सात साल पहिले हो गयी हैं । कहानी कि शुरुआत भी उसके बाद हो गई हैं । मेरा एक हि बेटा हैं। जो अपनी जिंदगी जी रहा हैं । मेरे बीबी के मौत के बाद मेरे बेटे के पढ़ाई के लिये हम पुना महाराष्ट्र आ गये थे। पुना आने के बाद मेरी पहचान कमला नाम कि मेस चलाने वाली महिला से हुई। उसकी उम्र लगभग मेरी चालीस साल के करीब थी । उसकी एक लड़की और एक लड़का था । पति था मगर बहार नोकरी करता था ।
मेरे बेटे के मेस के लिये मैं उसे मिला था । मै भी पुना मैं काम कि तलाश कर रहा था। पैसों कि चिंता नहीं थी मैं और मेरी बीबी लगभग सोलह साल नोकरी कर चुके थे । मेरी बीबी के बिना मेरा मन नहीं लग रहा था इस लिये मैंने नोकरी छोड़ दीं । लड़का पढ़ाई के लिये कभी होस्टल मैं दोस्तों के साथ तो कभी मेरे साथ रहता था। शादी के जिवन मैं सिर्फ मेरे बीबी का था । मगर बीबी के मौत के बाद जो मेरे साथ जो हुआ वहीं कहानी मैं अब कामवासना के चाहते पाठकों बता रहा हुं।
सुबह सुबह मैं पुना के सब्जी बाजार जाता और वहां कि बाजार को देखता। वापस आकार मेरे घर के पास रहनेवाली मेस वाली के चाय के दुकान चाय सिगारेट पिता। कमला कि एक बहन नीलम भी थी। जो कमल के मेस पर रोटियां बनाने आती थी और जाती थी। पास मैं हि वो उसके मां के साथ रहतीं थीं। दोन तिन महीने मैं कमला के साथ नीलम के साथ भी मेरी अच्छी पहचान हो चुकी थी। मेरे पास मेरी कार थी । नीलम कि मां बीमार होती तो मैं दवा के लिये उन्हें दवाखाने मैं ले जाया करता था। साथ मैं नीलम कभी कमला रहती थी । एक बार उनके मां को हाॅस्पीटल मैं भर्ती करना पड़ा । उनके पास पैसा नहीं थे। तो मैंने हि लगभग तीस हजार का खर्च किया । मगर उनकी मां बच नहीं पाई । कमला और नीलम मां के मौत बाद उनका घर मरे लिये अपना घर बन गया।
कमला अपने लड़की और लड़के के खर्चे कि बजे से पहिले ही नीलम और मां के खर्चे उठा नहीं रहीं थीं । नीलम उसके यहां काम करती थी वो भी मां कि मौत के बाद बंद कर चुकी थी। दुसरे जगा काम तलाश कर रहीं थीं। उसे भी खाना बनाना आता था । पहले नीलम हि मेस चलाती थी । कमला और उसके पति के अनबन के बाद नीलम का सारा कारोबार कमला ने ले लिया था। नीलम मां को संभालने लगी थी। कमला अब नीलम को मेस कारोबार से दुर ही रखा करती थी ।
मुझे भी काम की जरुरत थी । तो मैंने नीलम को मेस शुरू करने की सलाह दी। नीलम तुरंत मान गयी । नीलम का चौदह साल पहेले तलाक़ हो चुका था। उसके बाद वो अपने मां बाप को संभालने के लिये मेस का काम करती थी । मुझे यह बात बहुत ही मन को भा गयी थीं । इसलिए मैं कमला का दुकान छोड़ नीलम को साथ दे रहा था।
मैंने मेरे बेटे का होस्टल मैं दाखला कर दिया। उसकी सारी जरूरतें पुरी कर मैं और नीलम पुना से नजदीकी आय टी पार्क मैं मेस के काम लिये दुकान ले लिया । मेस के नजदीक हि एक घर भी ले ली । मैं सब्जी और पुरा बाजार का काम देखता और नीलम मेस संभालती। नीलम के पुराने सारे लोग कमला को छोड़ नीलम के रसोई मैं काम के लिये आ गये। मेरे आय टी पार्क मैं पुराने दोस्त थे इसलिए पाच साल का काम मिला था तो कारोबार निकल पड़ा ।
नीलम कि जब मां थी तब तक नीलम दुबली पतली थी । मेस का कारोबार चल पड़ा था। नीलम अब निश्चित हो चुकी थी । पैसे का भी टेंशन मिट चुका था । अब उसकी तबीयत अच्छी होने लगी थी । कमला का कारोबार चल रहा था मगर नीलम की निकल चुकी थी । जो कमला को अच्छा नहीं लग रहा था । मेरी और उसकी पहेले पहचान थी बाद मैं नीलम की पहचान हुई थी । कमला के मन मैं नीलम ने मुझे पटाया और सब कमाया ऐसा आने लगा । मैं जब मेस पर नहीं होता तब कमला आती और नीलम को ग़लत बोल कर जाती। उसके बाद नीलम नाराज रहनें लगीं थीं ।
मैंने नीलम को पुछा मगर उसने मुझे कुछ नहीं बोला । एक दिन मैं घर पर हि था । कमला आ गयी और नीलम से पैसे मांग रहीं थीं । पहिली बार कमला घर पर आयी थी । नीलम ने उसे घर देख ले कहां "विशाल होंगा" यह देखने के लिये हि "आई होंगी ना" । यह सुनकर मेरे कान फट गये । कमला हंस रहीं थीं । घर भी विशाल का हैं, दुकान भी विशाल की हैं और तु भी पुरी विशाल की हैं । मुझे कुछ समझाने कि जरुरत नहीं हैं । मेरी बेटी बीमार हैं । मैंने मां के इलाज के लिये जो पैसे दिये थे । वो पैसे मुझे वापस कर । मैं वापस कभी तुम्हारे घर आने वाली नहीं।
मैं सब सुनकर शाॅक था । मैं सिर्फ दोपहर आराम के लिये घर आता था । मैं कमरे से बहार निकला और नीलम से पुछा कितने पैसे देने के हैं ? नीलम मुझे सर बोलती थी नीलम बोली "सर आप रहनें दो"। मैं देख लुंगी । मुझे देख कर कमला पागल हो चुकीं थीं । मैंने वापस नीलम पुछा "कितने पैसे देने के हैं " ? कमला बोली "लगभग तीस हजार होंगे" , "थोड़े थोड़े लिये होंगे"। मैंने नीलम के मोबाइल पर तीस हजार भेज दिये। नीलम को मॅसेज आया गया था। तो उसने मुझे देखा तो मैंने उसे पैसे देने का इशारा किया ।
मैं नीलम के करीब जाकर खड़ा हुंवा और कमला को बोला "जो आप बोल रहीं हैं "वो सब सच हैं"। "मेरे और नीलम के बीच आप की सोच सही हैं"। "आज के बाद मेरे घर पर या दुकान पर कभी भी आप मत आना"। यह बोलकर मैं घर से निकल गया ।
मैं मेस पर गया। काम कर रहे कामगार बताया कि मैं दोन दिन बाद वापस आ जाऊंगा । मैं मरे बेटे के पास गया उसे मिला । मेरे और मेरी बीबी का जीवन नाशिक मैं बिता था मैं वहां गया। दोन दिन रहा और वापस आ गया। मुझे नीलम ने देखा तो नीलम का चेहरे खिल चुका था । उस दिन के बाद नीलम बदली बदली नजर आने लगी। नीलम ने मेरे मेस पर खाना भी बंद कर दिया था। अब वो हम दोनों के लिये घर पर हि खाना बनाया करती थी ।
मैं वापस आने बात दुकान कि बातें छोड़कर दुसरी बातें नीलम से करता नहीं था । लगभग सप्ताह गुज़र चुका था। एक दिन सुबह-सुबह नीलम का मुझे मॅसेज आया कि "आज शुक्रवार हैं । रात को मटन बनाना हैं। मटन ले आवो"। मैंने कुछ भी रिप्लाई नहीं दिया। मैने सुबह नीलम को देखा "तो नीलम के बाल धुले थे" । मैं समझ चुका था "अब नीलम मेरे साथ मिलन के लिये तैयार हैं"।
मैं मटन नहीं खाता था । मेरी बोलने की हिम्मत हि नहीं हो रहीं थीं । शाम को नीलम का मॅसेज आया मटन मैं ले आयी हुं। रात को दुकान कामगार देख लेंगे तुम घर जल्दी आ जाना। मैं लगभग दस बसे घर गया। मैं और नीलम एक हि घर मैं अलग अलग हिस्से मैं रहते थे। अन्दर का दरवाजा दुसरी बार खुला था। पहले कमला आई थी तब और आज ।
मैंने खाना खाने से पहेले ही बोल दिया "मैं मटन नहीं खाता"। नीलम बोली "भगवान की कोई मन्नत हैं क्या "? मैं बोला "नहीं"। "पहले से नहीं खाता"। तो नीलम बोली "कोई बात नहीं आज से खाना शुरू करो" मेरे लिये मैं मटन खाती हुं। मैं उसे हि देख रहां था । उसने मटन के साथ एक थाली मैं अलग से रस्सा ( ज्यूस ) दिया था । रोज पहले इसे पीने को बाद मैं खाना खाने का यह नीलम की पहली ऑडर मिली थी। मैं ज्यूस पी गया । नीलम मेरे तरफ हि देख रहीं थीं। बाद मैं वो मेरे साथ बैठ कर मटन ज्वारी कि भाकरी खाने लगी। उस दिन के बाद नीलम मुझे रोज रात सिर्फ मटन ज्वारी भाकरी और थाली मैं ज्यूस पिलाती साथ बैठ कर। मुझे जबतक मटन खाने कि आदत नहीं लगती जबतक नीलम ने मुझे मटन खिलाया। रोज रोज अलग-अलग मटन के हिस्से खिलाती और कैसे खाने के वो भी दिखातीं। खुद भी खाती ।
दुसरा महिना लग गया था। मुझे अब नीलम के साथ चुदाई के ख़याल आने लग चुके थे। मैं अब नीलम के शरीर को ताड़ने लगा था। नीलम भी मेरी नज़र को पहचान चुकी थी । नीलम अब मुझे सर बोलती नहीं थी । विशाल बोलकर बात करती थी। नीलम अब मेरे नजरों मैं नजरें डाल बात करती थी। महिना भर मटन और रस्सा खिला खिला कर मरे लन्ड का खून खोलने लगा था। रोज खाना खाने बाद मैं अब नीलम को भोगनें के ख्याल दिमाग मैं रखता था। मगर हिम्मत नहीं कर पाता था। बीबी के मौत से पहले तीन साल और उसके मौत के बाद लगभग दो साल से बाद अब लन्ड संभोग मांग यहां था।
एक दिन मैं बाज़ार मैं था । नीलम को फोन आया मुझे - आते वक्त निकर ले आना । मेरी निकर टाईट हो चुकी हैं। पहिले छत्तीस साईज थी अब उससे बड़ी साइज कि निकर ले आना। आज मुझे नीलम ने आमंत्रण दे दिया था । मैंने तीन रंग कि निकर का सेट लिया और घर चला आया। नीलम आते हि मेरे हाथ से बॅग ले गयी और नहा थो कर खाना खाने के लिये आने को बोली। मै खाना खाने बैठा तो नीलम ने मेरा मोबाइल मेरे हाथ से छीन लिया और खाना खाने को बोला। नीलम बोली आज पहिले बार तुम्हारे लिये बकरे के अंडकोष का मटन बनाया हैं। मैंने नीलम को देख कर बोला "तुम भी खाना खाने आवो" । नीलम ने ज्यूस के तरफ देखा मैंने पीने लगा। नीलम जाकर ख़ुद के लिए खाना ले आयी। मैंने एक हि थाली मैं खाने को बोला नीलम ने हल्की स्माइल दी। नीलम ने मैंने एक थाली मैं खाना खाया। खाने बाद एक काम का फोन आया तो लगभग एक घंटा फोन हि चल रहां था।
मैं मेरे कमरे मैं था मुझे नींद हि नहीं आ रही थी। मैंने रात को घर के अन्दर का दरवाजा खोला और सीधे नीलम के कमरें की और गया। नीलम का कमरें का दरवाजा बंद था। मैं वापस घर के बीचोंबीच बैठकर सिगारेट पीने लगा। मेरे सामने पानी का ग्लास आ गया जो नीलम के हाथ मैं था। मैंने नीलम को देखा। नीलम ने हल्की स्माइल दी और बोली पाणी नहीं हैं। तुम्हारे लिये जो रोज देती हुं वो ज्यूस ही हैं । नीलम बोली मेरा कमरे का दरवाजा अब हमेशा खुला ही रहेंगा।
मैंने सिगरेट पीने के बाद ज्यूस पिया। अपने कमरें मैं जाकर लाईट बंद की और दरवाजा बंद करने को बहार आया रहा था तो नीलम अपने कमरें के दरवाजे पर खड़ी थी। मैंने दरवाजा बंद किया। नीलम के कमरें मैं आ गया। कमरें मैं जाते हि नीलम मुझे देख रही थी और मैं नीलम को देख रहा था। नीलम सीधे आकार मुझे लिपट गयी।
नीलम लिपट जाने बाद मरे अंदर चार साल बाद कामवासना जाग चुकी थी। मैंने भी नीलम को बाहों मैं भर लिया । लगभग दस मिनट तक हम दोनों एक दुसरे के बांहों रहें। नीलम रोने लगी थी। मैं उसे बेड पर बिठाया और खुद ज़मीन पर बैठ कर उसके पैरों पर सर रख दिया था। वो रोते रोते मेरे सर को सहलाने लगीं। दोनों निशब्द हो कर एक दुसरे कि भावना को जान रहें थे।
नीलम का रोना शांत होते हि मैं जमीन से उठा। नीलम के गालों को दोनों हाथों मैं लिया। उस के नज़रों मैं नजरें डाल कार देखेंगे लगा। ओ भी मुझे देखनें लगी । जेसे कह रहीं हों मुझे अपना बना लो। मैंने उसके चहरे नजदीक अपना चेहरा ले जा कर उसके ओठों पर ओंठ रख दिखे। नीलम के चहरे से हाथ हटाकर मैंने उसके बालों को हाथ डाल दिये। उसके ओठों कर रस पीने लगा। नीलम भी साथ देने लगी। घर मैं डिम लाईट चल रही थी। मैं लुंगी और टी शर्ट मैं था। नीलम गाउन मैं थी । दोनों शादी शुदा थे। इसलिए दोनों के लिये काम क्रीड़ा खेल पुराना था। मे चार साल के बाद तो नीलम लगभग पंद्रह साल बाद काम क्रीड़ा के लिये तैयार थी।
मैंने नीलम को खड़ा किया उसका गाउन निकाला। अंदर पर कर और ब्लाउज था । मैंने उसे भी निकाल दिया। नीलम मूर्ती जैसी खडी थी। मैंने पर कर के साथ हि निकर भी नीलम कि निचे कर दी। ब्रा उसने पहने नहीं थे। मैंने उसके सामने अपनी लुंगी निकर और टि शर्ट निकाल कर फेंक दी। नीलम मेरे लन्ड को और मैं नीलम के शरीर को देख रहा था।
मैंने नीलम का हाथ अपने हाथ में ले कर उसे लन्ड धाम दिया। मैं नीलम के स्तनों को सहलाने लगा। नीलम लन्ड को हाथ मैं पकड़ीं हुईं थीं। नीलम के हाथ मैं जाते हि लन्ड आकार बदल रहा था। बदलते आकार से नीलम उसे सहलाने लगी और दबाने लगी थी। लन्ड पुरा आकार लेते हि नीलम बोली "बहुत बड़ा हैं"। मैं उस के कान के पास जाकर बोला "अब तुम्हारा हैं"। नीलम खुलकर हंस पड़ी। मैंने नीलम को बेड पर सुला कर उसके दोन पैरों को बेड निचे हि मैने रक्खा। नीलम बेड पर सोते हि मेरे सामने नीलम कि चुत थी। नीलम ने देखा मैं उसकी चुत देख रहा हुं। तो उसने दोनों पैरों को फैला दे कर मुझे आमंत्रीत दिया।
मैंने पहले नीलम के चुत को हाथों से सहलाया। फिर उसकी चुत मैं एक उंगली डाली । तभी नीलम के बदन मैं करंट दौड़ गया। मैंने पहले एक उंगली को आगे पिछे किया उस के बाद मैं दुसरी भी उंगली अंदर डाल दी। नीलम मेरे तरफ देखती और शरमाते। नीलम जब मरे तरफ देख रहीं थीं तब मैंने दोनों उंगली चुत से बहार निकाल ली अपने मुंह मैं डाल कर चुसने लगा। उंगली चुसने के बाद मैंने वही दोनों उंगली नीलम के मुंह मैं डाल दी। नीलम बच्चे के जैसे मेरी उंगली या चुसने लगी थी।
तभी मैंने सीधे नीलम के चुत पर मुंह लगा दिया। नीलम के लिये ऐसा पहिली बार था। वो सीधे उठ गयी और नीलेश ऐसा मत करों मुझे आदत नहीं हैं। मैं वापस उसे के कान मैं बोला "अब तुम पुरी मेरी हो"। नीलम निशब्द होकर बेड पर सो गई। पहले आदत न होने के कारण शरमाने वाली नीलम धीरे धीरे अब मेरा सर दोनों हाथों से पकड़ लगी थी । धीरे धीरे अब कमर उठाकर मेरे जीभ को अपनी चुत मैं ले रहीं थीं। नीलम अब अकड़ रहीं थीं और तड़प रहीं थीं । नीलम पाणी छोड़ने के नजदीक आते हि उसने मेरा सर अपनी चुत पर दबा कर रक्खा। पानी छुटने लगते हि पहले हि मैने मुंह खोलकर चुत पर रख्खा था। नीलम का सारा पानी मैं जी भर कर पी गया। नीलम का पानी बोहोत सारा था। कुछ निचे बेड पर गिरा ।
नीलम का पानी छुटने के बाद नीलम शान्त हो चुकी थी। मैंने नीलम को कोकोनट तेल कहां हैं पुछा। नीलम ने आइने के सामने हैं बताया। मैं उठा कर तेल लेकर आया। मैंने नीलम से बोला " नीलम कंडोम नहीं हैं। " नीलम बोली पागल हो क्या ? मैं बोला "क्यु" ? तब नीलम ने मरे लन्ड को हाथ मैं लेकर बोली "इसे जब तक मेरे चुत की गर्मी कि आदत नहीं होती तब तक कंडोम नहीं।" "और मेरे साथ संबंधों के समय तुम कभी कंडोम इस्तेमाल नहीं करोंगे"। मुझे अच्छा नहीं लगता। मैंने कहां बच्चा ठहर गया तो? वो बोली मेरा ऑपरेशन हो चुका हैं। मैंने लन्ड को नीलम के हाथ मैं दिया और दुसरे हाथ मैं कोकोनट तेल की बोतल दि।
नीलम ने मुझे देखते देखते बोहोत सारा तेल अच्छा से तने हुए लन्ड पर लगा दिया । "बोहोत बड़ा और मोटा हैं तुम्हारा" "आराम से करों मैं भागी जाने वाली नहीं" नीलम बोली। "आदत हो जाने तक आराम से करना। मैं नीलम को देख रहां था। मैंने बेड के निचे खड़ा था मैंने नीलम को मेरे तरफ खींच लिया। दो बडे पिलो मैंने नीलम के कमर के नीचे डाल दिये । अब नीलम कि चुत मेरे लन्ड के आगे सेट हो चुकी थी।
मैंने लन्ड को चुत के ओठों पर उपर से निचे और निचे से उपर दो तीन बार रगड़। नीलम अब धीरे धीरे अपनी चुत उठाने लगी थी। लन्ड को हाथ मैं पकड़ कर मैंने हल्के हल्के से दो बार मारा चुत के उपर ओठों पर मारा। नीलम अब मेरे तरफ देख रही थी और कुछ बोलना चाहती थी मगर बोल नहीं रहीं थीं । मैं बोला जान जो भी बात हैं खुल कर बोलो। अब हम दो नहीं एक हैं । यह कहकर मैंने लन्ड के चुत के मुंह में सेट किया। उस के मैंने नीलम कि कमर कों दोनों हाथों से पकड़ा।
नीलम बोली तुम बहार बोहत शांत हो मगर यहां बोहत शरारती हों। मैं बोला वो सिर्फ मेरे अपनों के लिये। यह कसते हि मैंने जोर से लन्ड को चुत के अन्दर डाल दिया। नीलम ने जोर से चिल्लाए उठी। ओ मां मर गयी। मैं उस की तरफ देखता कर लन्ड कि तरफ देखा अभी आधा बाकी था। मैंने वापस लन्ड थोड़ा बाहर निकाला, नीलम कि कमर, जांघों को हाथों से सहलाने लगा। नीलम थोड़ी दर्द से बाहर निकली हि तो मैने वापस जोर से लन्ड को चुत अन्दर डाल दिया। नीलम कि आंखो मैं आंसु थे, दर्द से तड़पती दिख रहीं थीं। मरे गिरफ्त से छुटने का प्रयास नीलम कर रहीं थीं।
लन्ड लगभग आधे से ज्यादा चुत मैं डाल ने बाद नीलम के उपर सो गया। नीलम के स्तनों को सिर्फ सहलाया फिर दोनों हाथों से अच्छे से दबाने शुरू किया। नीलम के ओठों पर ओंठ रखकर मैं मेरी जीभ को चुसने के लिये नीलम को देने लगा। निचे चुत पर हल्ला शांत था। स्तनों पर और ओठों पर हल्ला हो रहा था। नीलम को अच्छा लग रहा था। मैंने नीलम के स्तनों को अच्छे से दबाकर चुसना शुरु किया था। नीलम ने अपने हाथ उठाकर मरे सर को सहलाने शुरू कर दिया था। मैने नीलम की ओठों पर ओंठ रख दिये और उसे मेरी जीभ चुसने दी। नीलम जीभ चुसने लगी। मेरी जीभ चुसने के बाद नीलम ने मुझे अपनी जीभ मुझे चुसने के लिये मेरे मुंह मैं भेजी। तभी मैंने निचे लन्ड को थोड़ा बहार निकाला और वापस जोरसे चुत के अन्दर डाल दिया। इस बार नीलम तैयार हो चुकी थी। मैंने वापस दोन तीन बार मैं लन्ड को पुरा नीलम के चुत अन्दर डाल दिया था।
लन्ड अन्दर डालकर नीलम के ऊपर सोया हुआ था । नीलम बोली तुमने मुझे वापस जिंदा किया हैं । तुम मेरे लिये सब कुछ हो। कल तक तुम मेरे लिये एक भगवान थे। आज से तुम मेरे पती हो। तुम मुझे अपनी पत्नी मानो या ना मानो मैं जिंदगी भर तुम्हे अपना पती मानती रहुंगी। मैंने पुरा लन्ड बाहर निकाल और वाटर पुरा अन्दर डाल दिया। मैं वापस बैंड के निचे खड़ा हो गया नीलम की कमर पकड़ी और चुत लन्ड का मिलन शुरु किया। नीलम अब काम क्रीड़ा का आनंद लें रहीं थीं। पांच मिनट के बाद हि नीलम ने पाणी छोड़ दिया। मेरा अभी मन भरा नहीं था। मगर मुझे औरत का पाणी छुटने के बाद जमकर चुदाई मजा आता हैं। मैंने नीलम के और देखा कर बोला जानु तैयार हो। नीलम बोलु हां। मैंने नीलम कि कमर पकड़ी जोर जोर से नीलम को चोदने लगा। नीलम चुत कि गर्मी फुट पड़ी थी । जो मेरे लन्ड भी महसूस कर रहा था। मैंने मेरा पुरा पानी चुत के अन्दर छोड़ा, नीलम के बगल मैं जाकर सो गया। नीलम उठी बाथरूम जाकर वापस आयी।
नीलेश तुमने मेरे चुत से खून निकाला हैं । मैंने उठकर लाईट लगाई तो देखा पीलो पर भी खून के निशान थे। मैंने चुत के नजदीक जा के देखा तो चुत का निचले हिस्से मैं दरार पड़ आ चुकी थी । नीलम बोली तेरे मुसल के कारण खून निकला हैं। मेरे कहां नहीं तुम्हारे मुसल के कारण खून निकला हैं। नीलम हंसने लगीं। मैंने नीलम को मेरे रुम में जाने को बोला। आयोडेक्स लाने को बोला। नीलम बोली सुबह जाती हुं । मैं बोला नीलू तुम्हारा मुसल अभी दो बार मेरी चुत की गर्मी मांग रहा हैं। नीलम हंसते हुं बोली कल से आज सो जानो।
नीलम और मैं उस दिन के बाद रोज साथ मैं हि सोने लगे। मैंने नीलम को मेस मैं जाना भी बंद किया था। मेस पर दो लोग और काम पर लगा दिये। नीलम के पहचान के सभी लोगों को एक दुसरी जगा मेस चालु करके वहां भेज दिये। अब नीलम मालकीन बन चुकी थी।
सभी पाठको "मुझे नीलम मुझे क्या पिलाती थी हैं। मुझे आज तक पता नहीं चला हैं। आप को पता हो तो मुझे लिखें।
तो कैसी लगी मेरी "खिला पिला कर लंड को वश कर लिया "
कहानी पाठको, मेरी जरूर लिखें मेल कि आयडी हैं
nileshlonke@gmail.com हैं। आगे आप के दुसरी कहानी लेकर आऊंगा।
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