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अकेली पंजाबी भाभी गुरमीत की चुत का स्वाद - Antarvasana Sex Story

ये उन दिनों की बात है जब मैं अपनी नौकरी के सिलसिले में लुधियाना शिफ्ट हुआ था। मैं एक प्राइवेट कंपनी में सेल्स मैनेजर था और कंपनी ने मुझे लुधियाना ब्रांच का काम देखने के लिए भेजा था। मेरी उम्र उस वक्त 25 साल थी और मैं एकदम कुंवारा था। शादी के बारे में सोचा तो था लेकिन अभी कुछ पक्का नहीं किया था। असल में मैं हमेशा से थोड़ा शर्मीला और अंतरमुखी रहा हूं, लड़कियों से बात करने में भी बहुत झिझक महसूस होती थी। दोस्त लोग मुझे चिढ़ाते थे कि तू तो किसी लड़की को इम्प्रेस ही नहीं कर पाएगा। ये बात मुझे अंदर ही अंदर बहुत चुभती थी। खैर, कंपनी ने मेरे रहने का इंतजाम शहर के बाहरी इलाके में एक छोटे से मकान में कर दिया था। वो मकान एक शांत मोहल्ले में था जहां ज्यादातर पंजाबी परिवार रहते थे। मुझे पंजाबी संस्कृति और खानपान हमेशा से पसंद था, तो मुझे लगा कि यहां रहना अच्छा रहेगा।


ये मेरी जिंदगी की एक ऐसी सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा से दबाए रखना चाहता था, अपने सीने में छुपाए रखना चाहता था क्योंकि इसमें शामिल रिश्ते और हालात बहुत ही नाजुक थे। लेकिन अब इतना वक्त बीत जाने के बाद मुझे लगता है कि शायद इस Antarvasana को, इस गहरी चाहत और उसके बाद जो हुआ उसे बयां करना कुछ हद तक मेरे लिए राहत देने वाला हो सकता है। इस Sex Story में वो सब कुछ है जो एक नौजवान के दिलो-दिमाग में चलता है जब वो अकेला हो और उसे कोई ऐसा साथी मिले जो उसकी सारी शारीरिक भूख को समझे और उसे पूरा करे। और हां, वो साथी थी मेरी पड़ोस में रहने वाली एक भाभी, गुरमीत भाभी।


जिस दिन मैं अपने नए मकान में शिफ्ट हुआ, उसी दिन शाम को मैं बाहर बरामदे में बैठा चाय पी रहा था। तभी मेरी नजर पड़ोस के मकान के दरवाजे पर पड़ी। दरवाजा खुला और उसमें से एक औरत बाहर निकली। वो औरत कोई 30-32 साल की रही होगी, कद छोटा लेकिन शरीर बहुत ही भरा हुआ और गोल-मटोल था। वो एक पंजाबी सूट पहने हुए थी, हल्के हरे रंग का जिस पर छोटे-छोटे सफेद बूटे बने हुए थे। उसके बाल कंधों तक खुले हुए थे और उसने हल्की सी मेहंदी लगा रखी थी। उसका रंग सांवला लेकिन बहुत साफ और निखरा हुआ था। उसके चेहरे पर एक अलग ही रौनक थी, आंखें बड़ी-बड़ी और होठ भरे हुए थे। और उसके शरीर का जो हिस्सा मेरी नजर को सबसे ज्यादा खींच रहा था, वो था उसकी छाती। उसके स्तन बहुत बड़े और भारी लग रहे थे, जो उसके कुर्ते को तना हुआ कर रहे थे। मैं उसे देखते ही जैसे एकटक होकर रह गया। उसने मुझे देखा और एक मीठी सी मुस्कान दी। मैंने घबराकर अपनी नजरें हटा लीं और चाय के कप में ही देखने लगा। लेकिन मन तो उसकी तरफ ही खिंच रहा था।


अगले कुछ दिनों में मुझे पता चला कि उसका नाम गुरमीत कौर है और वो अपने पति और एक 5 साल के बच्चे के साथ रहती है। उसका पति हरप्रीत सिंह एक ट्रक ड्राइवर था और ज्यादातर अपने काम के सिलसिले में बाहर ही रहता था। कभी-कभी तो 15-20 दिन तक बाहर रहता और घर सिर्फ 2-3 दिन के लिए ही आता था। मैंने ये भी देखा कि जब भी वो आता था, उन दोनों के बीच शायद ही कोई बातचीत होती थी। ज्यादातर वो या तो सोया रहता था या फिर बाहर ही रहता था। गुरमीत भाभी अक्सर अकेली ही रहती थीं और अपने घर के कामों में ही व्यस्त रहती थीं।


धीरे-धीरे हमारे बीच रोजमर्रा की मुलाकातों से जान-पहचान बढ़ती गई। वो जब भी मुझे देखतीं, मुस्कुराकर सत श्री अकाल कहतीं। मैं भी हाथ जोड़कर जवाब देता। कभी-कभी वो अपने घर से मेरे लिए खाना भी भेज देतीं। उनका बनाया हुआ मक्के की रोटी और सरसों का साग तो लाजवाब होता था। एक दिन मैंने उनसे कहा, |भाभी, आपके हाथ का खाना तो बहुत स्वादिष्ट है। आपके पति तो बड़े खुशनसीब हैं।| ये सुनकर उनके चेहरे पर एक उदासी सी छा गई। उन्होंने धीरे से कहा, |हां, लेकिन उनको तो इन चीजों की कदर ही नहीं है। उनको तो बस अपना काम और अपने दोस्तों से मतलब है।| मुझे लगा कि ये मामला कुछ गहरा है, इसलिए मैंने ज्यादा बात नहीं बढ़ाई। लेकिन उस दिन के बाद हमारे बीच बातचीत का सिलसिला कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा।


मैं जब भी ऑफिस से लौटता, शाम के वक्त अक्सर उनके घर के बाहर बैठकर उनसे बातें करता। उनका बेटा उस वक्त ज्यादातर अपने दोस्तों के साथ खेलने गया होता था। हम लोग आम जिंदगी की बातें करते, कभी मैं उन्हें अपने ऑफिस के किस्से सुनाता तो कभी वो अपने मायके के बारे में बतातीं। पता चला कि उनकी शादी 19 साल की उम्र में हो गई थी और वो पटियाला के पास एक छोटे से गांव से थीं। उनके पति से उनका रिश्ता शुरू से ही बहुत अच्छा नहीं था। हरप्रीत शराब बहुत पीता था और अक्सर उन पर हाथ भी उठा देता था। ये सब सुनकर मुझे उनसे बहुत सहानुभूति होती थी और एक अजीब सी कशिश भी। उनका वो गोल-मटोल बदन, उनकी वो भरी-भरी छाती, और अब उनकी कोमलता ने मुझे पूरी तरह से उनका दीवाना बना दिया था।


एक दिन मैं ऑफिस से थोड़ा जल्दी घर लौट आया। उस दिन बहुत तेज गर्मी थी और लुधियाना की लू से बुरा हाल हो रहा था। मैंने देखा कि गुरमीत भाभी अपने घर के बाहर एक कुर्सी पर बैठी हुई हैं और पंखा झल रही हैं। उन्होंने एक हल्का सा सफेद रंग का कुर्ता और सलवार पहना हुआ था। पसीने के कारण उनका कुर्ता उनके शरीर से चिपक गया था और उनके उभार साफ नजर आ रहे थे। मुझे देखते ही वो बोलीं, |आओ जी, इतनी गर्मी में कहां से आ रहे हो? अंदर आओ, ठंडा पानी पी लो।| मैंने कहा, |हां भाभी, आज तो सच में बहुत गर्मी है।| और मैं उनके पीछे-पीछे उनके घर के अंदर चला गया।


उनके घर के अंदर घुसते ही मुझे एक अलग ही सी महक महसूस हुई। इत्र और पसीने की मिली-जुली एक भीनी-भीनी खुशबू। उनका घर बहुत साफ-सुथरा था। हाल में एक बड़ा सा पंखा चल रहा था और फर्श पर एक चटाई बिछी हुई थी। उन्होंने मुझे चटाई पर बैठने को कहा और खुद पानी लेने रसोई में चली गईं। जब वो पानी लेकर आईं और मेरी तरफ झुककर गिलास बढ़ाया, तो मेरी नजरें सीधी उनके कुर्ते के गले में गईं। उनके स्तनों की गहरी दरार मुझे साफ दिखाई दे रही थी। पसीने की कुछ बूंदें उस दरार के बीच से बहती हुई नीचे जा रही थीं। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा दम घुट रहा हो। मैंने तुरंत नजरें हटा लीं और पानी पीने लगा। लेकिन भाभी समझ गईं। उन्होंने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, |अरे, तू तो शरमा गया!| मैंने जवाब नहीं दिया और बस मुस्कुरा दिया।


उसके बाद हम दोनों वहीं हाल में चटाई पर बैठकर बातें करने लगे। गर्मी का मौसम था और दोपहर का वक्त, मोहल्ले में बिल्कुल सन्नाटा था। बाहर सिर्फ पंखों की घरघराहट और कभी-कभी कोई रिक्शा गुजरने की आवाज आ रही थी। भाभी ने मुझसे पूछा, |तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है? इतना सुंदर मुंडा है, कोई न कोई तो होगी।| मैंने कहा, |नहीं भाभी, अभी तक तो कोई नहीं मिली। बस ऑफिस और घर का ही चक्कर लगा रहता है।| वो बोलीं, |अच्छा, तो तुझे लड़कियों का कोई शौक नहीं है क्या?| मैंने कहा, |शौक तो है भाभी, लेकिन इतनी हिम्मत ही नहीं होती कि किसी से बात करूं। मैं तो बहुत शर्मीला हूं।| ये सुनकर वो जोर से हंस पड़ीं। उनकी हंसी में भी एक अलग ही कशिश थी, उनका पूरा शरीर हिल रहा था और उनके स्तन उछल रहे थे।


फिर उन्होंने अचानक से मेरा हाथ अपने हाथों में ले लिया और बोलीं, |देख, जिंदगी में थोड़ी हिम्मत तो करनी पड़ती है। ऐसे शर्माता रहेगा तो जिंदगी कैसे चलेगी?| उनका हाथ मेरे हाथ पर पड़ते ही मेरे शरीर में एक करंट सी दौड़ गई। मैंने उनकी तरफ देखा, उनकी आंखें मुझ पर टिकी हुई थीं। उनकी नजरों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वो मुझसे कुछ कहना चाह रही हों। मैंने हल्के से उनके हाथ को दबाया और कहा, |लेकिन भाभी, हिम्मत तो तभी आती है जब सामने वाला भी चाहता हो।| ये सुनकर उनकी मुस्कान और गहरी हो गई।


वो मेरे और करीब खिसक आईं। अब हमारे बीच की दूरी बस कुछ इंच की ही रह गई थी। उनके शरीर की गर्मी और वो नशीली खुशबू मुझे मदहोश किए दे रही थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मुझे लग रहा था कि ये सब कोई सपना है। लेकिन ये हकीकत थी। मेरी पंजाबी भाभी, जिनके लिए मेरे मन में महीनों से एक Antarvasana पनप रही थी, वो आज मेरे बिल्कुल करीब बैठी थीं। ये कोई आम Sex Story नहीं थी, ये तो मेरे सपनों के सच होने जैसा था।


भाभी ने अपना दूसरा हाथ मेरे बालों में फेरते हुए कहा, |मैं बहुत दिनों से देख रही हूं कि तू मुझे किस तरह देखता है। तेरी नजरें बहुत कुछ कह जाती हैं। और सच कहूं तो मुझे अच्छा भी लगता है। हरप्रीत तो मुझे कभी ऐसे प्यार से देखता ही नहीं।| उनकी बात सुनकर मेरा मन भर आया और साथ ही मेरी हवस भी जाग उठी। मैंने उनकी तरफ मुंह करके बैठते हुए कहा, |भाभी, मैं क्या करूं, मुझ पर तो जैसे आपका जादू चल गया है। जब से आपको देखा है, मेरी नींद और चैन दोनों गायब हो गए हैं।| वो मुस्कुराईं और मेरे गाल पर हल्के से चुटकी काटते हुए बोलीं, |अच्छा, तो अब क्या चाहिए तुझे?|


इस बार मैंने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने बस उनके चेहरे की तरफ देखा और फिर धीरे से अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। पहले तो वो एक पल के लिए ठिठकी, लेकिन फिर उन्होंने भी अपनी आंखें बंद कर लीं और मेरे होंठों को अपने होंठों में ले लिया। उनके होंठ बहुत मुलायम और गर्म थे। हम दोनों ने देर तक एक-दूसरे के होंठ चूसे। फिर मैंने अपनी जीभ उनके मुंह के अंदर डाल दी। उन्होंने भी अपनी जीभ से मेरी जीभ को सहलाना शुरू कर दिया। हमारी लार एक-दूसरे के मुंह में मिल रही थी। मेरा हाथ अब उनकी कमर पर चला गया था और उनकी चर्बी को दबा रहा था।


कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए और एक-दूसरे को देखने लगे। हम दोनों की सांसें तेज हो रही थीं। भाभी के चेहरे पर एक सुर्खी आ गई थी और उनकी आंखें नशीली हो गई थीं। मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा, |भाभी, मैं आपको बहुत दिनों से चाहता हूं। आज मुझे अपना बना लो, प्लीज।| उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, बस खड़ी हो गईं और हॉल की खिड़कियों के परदे गिरा दिए। हॉल में अंधेरा सा हो गया और बस पंखे की रोशनी की हल्की सी चमक थी। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, |सुन, तू मुझसे उम्र में छोटा है, और मैं तेरी भाभी लगती हूं। लेकिन मैं भी बहुत अकेली हूं। मुझे भी किसी की जरूरत है। अगर तू सच में मुझे चाहता है, तो आजा।| ये सुनना था कि मैं फिर से उनसे लिपट गया।


इस बार मेरा हाथ सीधे उनकी छाती पर चला गया। उनके स्तन सच में बहुत बड़े और मुलायम थे। मैंने उनके कुर्ते के ऊपर से ही उनके स्तनों को दबाना और सहलाना शुरू कर दिया। भाभी ने अपना सिर पीछे की तरफ कर लिया और उनके मुंह से एक लंबी सिसकारी निकली, |आआह्ह्ह्ह… और जोर से दबा…| उनके ऐसा कहते ही मेरे लंड में एक तेज जोश दौड़ा। मेरी पैंट अब तंग होने लगी थी और मेरा लौड़ा खड़ा होकर पैंट को तान रहा था। मैंने भाभी का कुर्ता ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। उन्होंने अपने हाथ ऊपर करके मेरी मदद की। जैसे ही उनका कुर्ता निकला, मेरी नजरें उनके उन विशालकाय स्तनों पर पड़ीं जो एक बड़ी सी ब्रा में कैद थे। ब्रा सफेद रंग की थी और पसीने से कुछ जगहों से पारदर्शी हो गई थी। मैंने पीछे से हाथ डालकर उनकी ब्रा के हुक खोलने की कोशिश की, लेकिन मैं थोड़ा घबराया हुआ था।


भाभी ने मेरी घबराहट देखकर हल्के से हंसते हुए कहा, |रुक, मैं खोलती हूं। तू तो है ही शर्मीला।| और उन्होंने एक झटके में अपनी ब्रा के हुक खोलकर उसे उतार फेंका। अब उनके स्तन मेरे सामने पूरी तरह से नंगे थे। वो स्तन सच में बहुत बड़े थे, हर एक तरबूज के आकार का। उनका रंग थोड़ा सांवला था और उन पर हल्की-हल्की नीली नसें दिख रही थीं। उनके निप्पल गहरे भूरे रंग के और बड़े-बड़े थे, और उत्तेजना के कारण पूरी तरह से खड़े और सख्त हो गए थे। मैं बस एकटक उन्हें देखता ही रह गया। मैंने अपनी जिंदगी में इतने बड़े और खूबसूरत स्तन कभी नहीं देखे थे।


मैं अपनी जगह से हिला ही नहीं, बस उनके स्तनों को घूरता रहा। तब भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने स्तनों पर रख दिया। जैसे ही मेरी हथेली ने उनके गर्म और मुलायम मांस को छुआ, मेरे शरीर में एक बिजली सी कौंध गई। मैंने दोनों हाथों से उनके स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा। उनके स्तनों का मांस मेरी उंगलियों के बीच से बाहर निकल रहा था। मैं उन्हें दबाता और छोड़ता, फिर जोर-जोर से उनकी मालिश करने लगा। भाभी की सांसें अब बहुत तेज हो गई थीं और वो लगातार कराह रही थीं। |उह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… हां… ऐसे ही… मेरे मम्मे दबा… बहुत दिन हो गए इनको किसी ने दबाया नहीं…|


फिर मैंने अपना मुंह उनके एक स्तन की तरफ बढ़ाया और उनके निप्पल को अपने होंठों में ले लिया। मैं उनके निप्पल को चूसने लगा, पहले धीरे-धीरे और फिर तेजी से। मैं अपनी जीभ से उनके निप्पल के चारों तरफ गोल-गोल घुमाता, फिर उसकी नोक को काटता और फिर पूरे जोश से चूसने लगता। मेरी ये हरकतें भाभी को पागल किए दे रही थीं। वो अपने हाथों से मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपनी छाती से और जोर से दबा रही थीं। |आआअह्ह्ह्हह… तू तो बहुत अच्छा चूसता है… उह्ह्ह्ह… दूसरे वाला भी… दूसरा वाला भी चूस…| भाभी ने कहा और अपने दूसरे स्तन को मेरे मुंह की तरफ कर दिया। मैंने झट से उनका दूसरा निप्पल अपने मुंह में ले लिया और उसी तरह चूसने लगा।


अब तक मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा होकर मेरी पैंट में तन गया था और बहुत दर्द कर रहा था। मैंने अपनी पैंट की जिप खोली और अपने लंड को बाहर निकाल लिया। मेरा लौड़ा सख्त और गर्म था, और ऊपर से चमक रहा था। मैंने अपना हाथ अपने लंड पर रखा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगा। भाभी की नजर जैसे ही मेरे हाथ पर पड़ी, उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया और खुद अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया। उनके कोमल और गर्म हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया। वो बोलीं, |वाह, कितना मोटा और सख्त है तेरा लंड…| और उन्होंने मेरे लंड को पकड़कर उसे ऊपर-नीचे हिलाना शुरू कर दिया।


भाभी के हाथों का वो जादू था कि मैं बस कुछ ही पलों में झड़ने वाला था। मैंने कहा, |भाभी, रुको… अभी नहीं… पहले मैं आपकी चुत का स्वाद लेना चाहता हूं।| भाभी ने मेरी तरफ देखा और एक बार फिर शरारत से मुस्कुराईं। फिर वो खुद ही चटाई पर पीठ के बल लेट गईं और उन्होंने अपनी सलवार के नाड़े खोल दिए। मैंने उनकी सलवार और उसके अंदर की कच्छी एक साथ खींचकर उतार दी। अब गुरमीत भाभी पूरी तरह से नंगी मेरे सामने लेटी हुई थीं। उनका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था और हॉल की हल्की रोशनी में चमक रहा था। उनकी जांघें बहुत मोटी और मांसल थीं और उनके बीच में उनकी चुत का वो हिस्सा था जो घने काले बालों से ढका हुआ था।


मैंने उनकी जांघों को फैलाया और उनके बीच में अपना चेहरा ले गया। उनकी चुत से एक तेज और नशीली गंध आ रही थी, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी। मैंने अपने हाथों से उनके बालों को हटाया और उनकी चुत के होंठों को खोला। अंदर से उनका गुलाबी और गीला मांस दिख रहा था, जो रस से पूरी तरह से भीगा हुआ था। उनका रस उनकी जांघों तक बह रहा था। मैंने पहले अपनी उंगली उनकी चुत के अंदर डाली। वो इतनी गर्म और तंग थी कि मेरी उंगली चारों तरफ से दब गई। भाभी के मुंह से जोर की चीख निकली, |आआअह्ह्ह्हह…| मैंने अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया और उनकी चुत का रस उनके लिए और भी ज्यादा बहने लगा।


फिर मैंने अपनी उंगली निकाली और अपनी जीभ उनकी चुत पर रख दी। जैसे ही मेरी जीभ ने उनकी चुत के उस गर्म और नमकीन रस को चखा, मुझे लगा जैसे मैंने अमृत पी लिया हो। मैंने अपनी जीभ को उनकी चुत के होंठों पर फिराया, उनके क्लिटोरिस पर हल्के से जीभ मारी, और फिर अपनी पूरी जीभ उनकी चुत के छेद के अंदर डाल दी। मैं जोर-जोर से उनकी चुत को चाटने और चूसने लगा। मेरे मुंह से चप-चप की आवाजें आ रही थीं और भाभी का रस मेरी ठुड्डी से बह रहा था। भाभी अब पूरी तरह से बेकाबू हो गई थीं। वो अपनी कमर को ऊपर-नीचे कर रही थीं और मेरे सिर को अपनी चुत पर जोर से दबा रही थीं। |हां… हां… आआह्ह्ह्ह… ऐसे ही… मेरी चुत चाट… उह्ह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… और तेज… और तेज कर…|


मैं काफी देर तक उनकी चुत को चाटता और चूसता रहा। इस दौरान भाभी कम से कम दो बार मेरे मुंह पर ही झड़ गईं। उनके झड़ने का अंदाज बहुत ही जबरदस्त था। वो पूरी तरह से अकड़ जाती थीं, उनकी जांघों में जोर की कंपकंपी होती थी और उनकी चुत से रस का एक तेज फव्वारा सा मेरे मुंह में निकलता था। मैं उनका सारा रस पी जाता था। उनका स्वाद हल्का सा खारा और बहुत ही नशीला था। ये था अकेली पंजाबी भाभी गुरमीत की चुत का असली स्वाद, जिसे चखने के लिए मैं कितने दिनों से तरस रहा था। ये मेरी जिंदगी की सबसे अनमोल और यादगार Antarvasana की पूर्ति थी। ये कोई झूठी Sex Story नहीं, बल्कि मेरे साथ घटित एक सच्ची घटना है जिसे छुपाने की मैंने बहुत कोशिश की।


अब मेरी बारी थी। मैं उनके ऊपर चढ़ गया और अपने लंड को उनकी चुत के दरवाजे पर रख दिया। मेरे लंड का टोपा उनकी चुत के गीले होंठों को छू रहा था। मैंने उनकी आंखों में देखा, मानो उनसे आखिरी इजाजत मांग रहा था। भाभी ने अपनी जांघों को और फैलाया और अपने हाथों से मेरे कूल्हों को पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए कहा, |डाल दे… पूरा अंदर डाल दे… मुझे चोद…| बस फिर क्या था, मैंने एक जोरदार झटका मारा और अपना पूरा लंड एकदम से उनकी चुत के अंदर तक पहुंचा दिया।


दोनों की एक साथ जोर की चीख निकली। उनकी चुत इतनी तंग और गर्म थी कि मैं तो पागल ही हो गया। उनकी चुत की दीवारों ने मेरे पूरे लंड को जकड़ लिया था। मैंने पहले धीरे-धीरे और फिर तेजी से उन्हें चोदना शुरू किया। मैं अपने कूल्हों को पीछे ले जाता और फिर पूरी ताकत के साथ आगे की तरफ झटका मारता। मेरा लंड उनकी चुत के अंदर बहुत तेजी से आ-जा रहा था। हमारे शरीरों के टकराने से थप-थप की गीली आवाजें आ रही थीं।


भाभी के बड़े-बड़े स्तन मेरे हर झटके के साथ जोर-जोर से हिल रहे थे। ये नजारा बहुत ही कामुक था। मैंने अपने हाथों से उनके स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें जोर से मसलते हुए उन्हें चोदता रहा। भाभी अपनी आंखें बंद किए हुए थीं और लगातार गंदी-गंदी बातें किए जा रही थीं। |आआह्ह्ह्ह… मुझे चोद… मेरी चुत को चोदते रह… उह्ह्ह्ह… तू तो बहुत अच्छा चोदता है… तू तो चुदक्कड़ निकला… हां… ऐसे ही चोद मुझे…| उनकी इन बातों ने मेरे जोश को और बढ़ा दिया। मैं और तेजी से उनकी चुत में अपना लंड घुसाने लगा।


कुछ देर तक मिशनरी पोजीशन में चोदने के बाद, मैं रुका और मैंने अपना लंड उनकी चुत से बाहर निकाल लिया। मेरा लंड पूरी तरह से उनके चिपचिपे रस से भीग चुका था और चमक रहा था। भाभी ने तुरंत कहा, |अभी रुकना मत… मुझे और चोद…| मैंने कहा, |अभी तो बहुत कुछ बाकी है भाभी। अब तुम मेरे ऊपर आकर बैठो।| ये सुनकर भाभी मुस्कुराईं और फौरन खड़ी हो गईं। मैं चटाई पर पीठ के बल लेट गया और मेरा लंड हवा में खड़ा हुआ था। भाभी मेरे ऊपर आईं और अपनी जांघों को मेरे कूल्हों के दोनों तरफ रखकर बैठ गईं।


उन्होंने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चुत के मुंहाने पर रखा। फिर वो धीरे-धीरे नीचे की तरफ बैठने लगीं। जैसे-जैसे मेरा लंड उनकी चुत में समाता जा रहा था, उनके चेहरे के भाव बदल रहे थे। पहले उन्होंने अपने होंठों को दबाया, फिर उनका मुंह गोल हो गया और अंत में जब मेरा पूरा लंड उनके अंदर चला गया, तो उन्होंने एक गहरी सांस छोड़ी। |उह्ह्ह्ह… कितना गहरा जा रहा है…| अब वो मेरे ऊपर बैठकर ऊपर-नीचे होने लगीं। वो अपनी कमर को गोल-गोल घुमाती थीं और उछलती थीं। इस पोजीशन में उनके स्तनों का नजारा सबसे खूबसूरत लग रहा था। वो बेतहाशा उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उनके कमर को पकड़ लिया और उनकी रिदम को और तेज कर दिया। मैं खुद भी नीचे से जोर-जोर से अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर उनकी चुत में अपना लंड घुसा रहा था।


भाभी अब चीखने लगी थीं। |हां… बस… अब… आआअह्ह्ह्हह… मैं जा रही हूं… मैं फिर से झड़ रही हूं… उह्ह्ह्ह…| और वो एक जोरदार झटके के साथ मेरी छाती पर गिर पड़ीं। उनका पूरा शरीर कांप रहा था और वो हांफ रही थीं। लेकिन मैं अभी तक नहीं झड़ा था। मैंने उन्हें अपनी छाती से लगाकर प्यार से उनकी पीठ और बालों को सहलाया। कुछ मिनटों के बाद वो फिर से उठीं और बोलीं, |तू तो बहुत ताकतवर है। लेकिन मैंने सोचा था कि तू एक बार में ही थक जाएगा।| मैंने मुस्कुराकर कहा, |भाभी, आज तो मैं आपको पूरी रात चोदूंगा। अभी तो मेरा लंड और सख्त हो गया है।|


इसके बाद मैंने उन्हें पलटकर डॉगी पोजीशन में लिटा दिया। भाभी अपने हाथों और घुटनों के बल चटाई पर आ गईं। उनकी मोटी और गोल गांड मेरी तरफ उभरी हुई थी। उनकी चुत उनकी जांघों के बीच से पूरी तरह से खुली हुई और गीली दिख रही थी। मैंने उनके पीछे घुटनों के बल बैठकर उनकी कमर को पकड़ा और एक झटके में अपना लंड उनकी चुत में घुसा दिया। इस पोजीशन में मेरा लंड उनकी चुत में बहुत गहराई तक जा रहा था। मैंने उनके बालों को पकड़कर हल्का सा खींचा और उनकी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारते हुए उन्हें चोदना शुरू किया।


हर थप्पड़ के साथ भाभी की गांड के मांस में लहरें सी उठती थीं और वो और जोर से चिल्लाती थीं। |आआह्ह्ह्ह… मुझे मारो… मेरी गांड पर मारो… और चोदो… मुझे जानवर की तरह चोदो…| उनकी ये गंदी बातें सुनकर मेरा लंड अब फटने को हो रहा था। मैं उन्हें बेतहाशा चोद रहा था। मेरे अंडे उनकी चुत पर जोर-जोर से टकरा रहे थे। कमरे में सिर्फ हमारी हांफने और चीखने की आवाजें और मांस के टकराने की गीली आवाजें गूंज रही थीं।


आखिरकार मैं अपने आप को रोक नहीं पाया। मुझे लगा कि मेरा माल अब निकलने वाला है। मैंने जोर-जोर से उनकी चुत में अपना लंड घुसाना शुरू किया। मेरी सांसें तेज हो गईं और मेरा पूरा शरीर तन गया। |आआअह्ह्ह्हह… भाभी… मैं निकल रहा हूं…| ये कहते हुए मैंने अपना लंड उनकी चुत से बाहर निकाला और उनकी पीठ और गांड पर अपना माल बहा दिया। मेरे माल की धारें बहुत तेज और गर्म थीं। एक… दो… तीन… चार… मैं काफी देर तक उन पर झड़ता रहा। मेरा लंड अभी भी तड़क रहा था और उसमें से रिस रहा था।


सब कुछ खत्म होने के बाद हम दोनों वहीं पसीने से लथपथ चटाई पर लेट गए। हमारी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और हम दोनों चुपचाप एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे। कुछ देर बाद भाभी ने हल्के से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और बोलीं, |बहुत अच्छा था। आज इतने सालों बाद मुझे ऐसा लगा कि मैं जिंदा हूं। तू मेरे लिए वरदान बनकर आया है।| मैंने उनके माथे को चूमते हुए कहा, |और आप तो मेरे लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हो भाभी। ये तो मेरा सपना था और आज वो सच हो गया।|


वो शाम हमारे रिश्ते की बस शुरुआत थी। उसके बाद तो हम जब भी मौका मिलता, एक-दूसरे की बाहों में खो जाते। कभी दिन में तो कभी रात में। उस एकांत मकान में हमारे मिलन के वो पल जिंदगी के सबसे हसीन पल बन गए थे। अब न तो मैं शर्मीला रहा था और न ही गुरमीत भाभी अकेली। हम दोनों ने एक-दूसरे के साथ जिंदगी की वो सारी खुशियां भोगीं जो हमारी किस्मत में पहले कभी नहीं थीं। मैंने उस दिन गुरमीत भाभी की चुत का जो स्वाद चखा था, वो आज भी मेरे जीभ पर रचा-बसा है। ये किस्सा मेरी जिंदगी की एक ऐसी अनकही सच्ची कहानी है जिसे मैं अपने सीने में दबाए फिरता था। ये सिर्फ एक Sex Story नहीं, बल्कि मेरे अकेलेपन और उनकी उदासी के मिलन की एक गाथा है, जहां दो अधूरे लोग एक-दूसरे में पूरे हो गए। और हां, इस रिश्ते की शुरुआत एक गहरी Antarvasana से ही हुई थी जो धीरे-धीरे एक खूबसूरत सच्चाई में बदल गई।

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