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मेरी हॉट पड़ोसन आंटी नीतू: Sex Stories

  • Rahul
  • 5 days ago
  • 7 min read

हैलो, मेरा नाम Rahul है, मेरी उम्र 25 साल है और कद 5’8″ है। मैं दिखने में सुन्दर हूँ, Bihar से हूँ। मेरा लण्ड का साइज 8.4 '' इंच है ।।

मैं आज आपको मेरी हॉट आंटी की कहानी बताने जा रहा हूं।


वो पड़ोस की रहने वाली हैं उसका नाम नीतू है ,और उनकी चूचियां बहुत बड़ी हैं। उनकी चूतड़ तरबूज जैसे ऊंचे और मोटे हैं। उनकी figure 40 36 44 है । नीतू की इतनी कातिल जवानी है कि कोई भी उन्हें देखकर तुरंत मुठ मारने लग जाए। उनकी उम्र लगभग चालीस के आसपास थी लेकिन उनका शरीर अभी भी पूरी तरह जवानी से भरा हुआ था।


मैंने भी उनके सपने देखकर बहुत बार मुठ मारी थी। रात को अकेले लेटकर उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों को चूसने और उनकी मोटी गांड को दबाने की कल्पना करते हुए मैं जोर-जोर से अपना लंड हिलाता और झड़ जाता। मैंने पहले अपनी चाची, चाची की दोस्त और आंटियों को बहुत चोदा हूँ।


मेरी आंटी बहुत ही सेक्सी हैं और वो एक गृहणी हैं। हमारे परिवार से वे बहुत ज्यादा हिली-मिली हैं इसलिए मैं अक्सर उनके घर जाता रहता हूं। मैं जब भी उनके घर जाता तो सबसे पहले उनके भारी और बड़े मम्मों को देखता। उनकी साड़ी के ब्लाउज को उनके मोटे स्तन तना देते थे। साथ ही उनकी मोटी और उठी हुई गांड के नजारे लेता। उनकी चाल में एक खास लचक होती जो मेरी नजरों को खींच लेती।

आंटी पहले मेरे साथ कोई ऐसी-वैसी बात नहीं करती थीं। पर एक दिन अचानक उन्होंने कहा, “मुझे तेरे से एक काम है।” उनकी आवाज में एक अलग ही नरमी और रहस्य था।


मैंने कहा, “बताओ?”


तो आंटी ने कहा, “मेरी एक कुंवारी सहेली है। उसका एक बॉयफ्रेंड है और उसके फोन का बैटरी मेरे पास है। उसे डलवा दो।” फिर वे थोड़ा रुककर बोलीं, “प्लीज यह बात अपने अंकल यानी मेरे पति को मत बताना।”


मुझे समझ नहीं आया कि वे ऐसी बात क्यों कह रही हैं। बाद में मुझे पता चला कि उनके पति नपुंसक हैं और वे किसी भी दूसरे पुरुष को आंटी के पास बर्दाश्त नहीं कर पाते थे।


मैंने कहा, “ठीक है। मैं नहीं बताऊंगा और आपका काम भी कर दूंगा।”


बस उस दिन के बाद आंटी मुझसे बहुत खुलकर बात करने लगीं। एक दिन वे अचानक मुझसे बोलीं, “क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”


मैंने कहा, “नहीं।”


तो आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा, “झूठ मत बोलो।”


मैंने कहा, “सच्ची नहीं है।”


तो आंटी बोलीं, “तो तुम्हारा टाइम पास कैसे होता है?”


मैंने कहा, “हाथ से।”


“मतलब हाथ से कैसे?” उन्होंने पूछा।


मैंने आंख मारते हुए कहा, “मुठ मार के।”


आंटी जोर से मुस्कुराने लगीं और कहने लगीं, “ऐसे तो तुम कमजोर हो जाओगे।”

मैंने कहा, “अगर मेरी इतनी फिक्र है तो आप ही मेरा काम कर दो। मैंने भी तो आपका काम किया है।”


तो वो मुस्कराने लगीं। मैंने ग्रीन सिग्नल समझा और धीरे से आंटी के हाथ पर अपना हाथ रख दिया। उनकी हथेली नरम, गर्म और मुलायम थी। मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उनके पूरे जिस्म पर फेरना शुरू कर दिया।


सबसे पहले मैंने उनकी बाहों को सहलाया। फिर कंधों पर हाथ घुमाया। उनकी सांसें तेज हो चुकी थीं। मैंने धीरे से नीचे आकर उनके भारी-भरे मम्मों को छुआ। वे इतने बड़े और नरम थे कि मेरी हथेलियां पूरी तरह भर गईं। मैंने हल्का दबाया तो उनकी नरम चूचियों की गर्माहट मेरी उंगलियों में समा गई।

उनकी निप्पल्स कपड़ों के ऊपर से सख्त होकर खड़े हो गए। मैंने उन्हें अपनी उंगलियों से हल्का सा घुमाया तो आंटी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गई। उनकी सांसें अब और तेज हो चुकी थीं और उनका शरीर हल्का सा कांपने लगा।


फिर मैंने उनकी कमर को पकड़ा और धीरे से सहलाया। उनकी कमर पतली थी लेकिन नितंब बहुत मोटे और भरे हुए थे। मैंने हाथ पीछे ले जाकर उनकी मोटी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उनके गांड के मांसल गोले इतने बड़े, ऊंचे और मुलायम थे कि मेरी उंगलियां उनमें धंस गईं। मैंने उन्हें जोर से दबाया और महसूस किया कि उनकी गर्मी मेरे हाथों में फैल रही है। मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो चुका था और पैंट के अंदर तनाव से फटने को तैयार था।


आंटी ने भी अपनी आंखें बंद कर ली थीं।


मैंने आंटी के होंठों पर चुम्मी की तो आंटी की चूत में सुरसुरी होने लगी और वे भी चुदास की आग से भर उठीं।


मेरे होंठ उनके नरम, गर्म और मोटे होंठों से टकराए तो एक गहरी चुंबन में डूब गए। मैंने उनके निचले होंठ को हल्का सा काटा और फिर अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी। आंटी की सांसें भारी हो गईं। उनकी चूत में गर्मी और खुजली जैसी सनसनी दौड़ने लगी थी। वे अपनी जांघें कसकर बंद करने लगीं क्योंकि उनकी योनि पहले से ही भीगी हुई थी और अब और ज्यादा रस टपकने लगा था। उनकी पूरी देह चुदाई की तीव्र इच्छा से भर उठी थी।


अब आंटी भी मेरा साथ देने लगीं और मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरा लंड पकड़ लिया।


उनकी उंगलियां कांप रही थीं। उन्होंने मेरी जिप नीचे खींची और मेरे कड़े लंड को पैंट से बाहर निकाला। उनका हाथ गर्म था। उन्होंने मेरे मोटे, लंबे और नसों भरे लंड को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया। वे ऊपर नीचे हिलाने लगीं। मेरा लंड उनकी हथेली में और भी सख्त हो गया।


मैंने भी अपना लौड़ा आगे बढ़ा दिया। आंटी ने अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं

मैंने अपना कमर आगे किया तो आंटी ने झुककर अपना मुंह खोला और मेरे लंड का सिरा अपने गर्म, गीले मुंह में ले लिया। उनकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूमने लगी। वे जोर-जोर से चूसने लगीं। उनके मुंह की गर्मी और नमी मेरे पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर रही थी।


मैं तो यारों उस टाइम मानो जन्नत में पहुंच गया था। 20 मिनट के बाद आंटी के मुंह में ही अपना शरबत गिरा बैठा।


मुझे इतना मजा आ रहा था कि मेरा सिर घूम रहा था। आंटी के मुंह की चुसाई सहन नहीं हो पा रही थी। कुछ ही मिनटों में मेरे लंड में झनझनाहट हुई और मैं जोर से कांप उठा। मैं आंटी के मुंह के अंदर ही अपने गाढ़े, गर्म वीर्य की धार छोड़ने लगा।

आंटी ने भी मेरा लंड चूस चूस कर साफ कर दिया।


वे मेरे लंड को अंत तक चूसती रहीं। हर बूंद को उन्होंने निगल लिया और फिर जीभ से पूरा लंड साफ कर दिया। उनके होंठ और ठोड़ी पर थोड़ा वीर्य लगा हुआ था।


अब आंटी ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और मैं आंटी की चूत चाटने लगा। उनकी चूत से बहुत अच्छी महक आ रही थी।


आंटी ने अपनी साड़ी, ब्लाउज, ब्रा और पैंटी सब उतार फेंके। उनकी नंगी देह सामने थी। बड़े-बड़े स्तन, पतली कमर और मोटी चूत। मैं उनके पैरों के बीच लेट गया और अपनी जीभ उनकी चूत की लकीर पर फेरने लगा। उनकी चूत से मीठी-सी, उत्तेजक स्त्री महक आ रही थी जो मेरे दिमाग को और उत्तेजित कर रही थी। मैंने उनकी क्लिटोरिस को चूसा और जीभ अंदर डाल दी।


आंटी भी ज्यादा देर टिक नहीं पाईं और उन्होंने भी अपना रस मेरे मुंह में ही छोड़ दिया।


उनकी कमर ऊपर उठने लगी। वे जोर-जोर से कराहने लगीं। अचानक उनकी देह अकड़ गई और उन्होंने मेरे मुंह पर ही अपना गर्म, मीठा चूत रस उछाल दिया। मैंने लपलपाकर सब चाट लिया।


मैंने भी उनकी चूत चाट कर साफ कर दी।


फिर कुछ देर बाद आंटी ने मेरा लौड़ा चूस कर खड़ा कर दिया और अब मैंने आंटी की टांगों को अपने कंधों पर रखकर उनकी चूत में लंड पेलने लगा। पर लंड जा नहीं रहा था क्योंकि आंटी ने काफी समय से चुदवाया नहीं था। यह बात उन्होंने मुझे बाद में बताई थी कि उनकी एक और आदमी से सेटिंग थी जिससे वो अपनी प्यास बुझाया करती थीं पर अब वो आदमी कनाडा चला गया है और उनको अब लंड नहीं मिलता है इसलिए उनकी चूत कस सी गई थी।

दूसरी बार कोशिश करने पर मेरा आधा लंड चूत में एकदम से घुस गया और आंटी ने एक जोर की चीख मारी।


वे तड़प उठीं और कहने लगीं, छोड़ो छोड़ो मुझे। तेरा बहुत बड़ा है। दर्द हो रहा है। ओह्ह।


लेकिन मैं कहां रुकने वाला था। मैंने धक्के लगाने शुरू किए तो कुछ ही पलों के बाद आंटी भी गांड उठाकर साथ देने लगीं।


आंटी चुदते हुए बहुत मस्त आवाजें निकाल रही थीं और गाली भी दे रही थीं।


आआवउ ऊहीईईहह। साले पहले कह इतना बड़ा है।


मैं मस्त चोदता रहा।


आह्ह। चोद मेरी जान। चोद अपनी आंटी को। अब तक क्यों नहीं चोदा। आह्ह।


कुछ देर बाद हम दोनों ने आसन बदला। आंटी अब मेरे लंड पर बैठ गईं और खुद जोर जोर से लौड़े पर अपनी गांड पटक रही थीं।


मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरा होने को था।


मैंने काफी देर लगभग 40 से 50 मिनट तक चोदता रहा और फिर झड़ गया। मैंने सारा माल लौड़े को बाहर निकालकर आंटी की गांड पर छोड़ दिया और हांफने लगा।


मैं थक गया था सो बेड पर लेट गया पर कुछ मिनट के बाद मैं फिर से तैयार हो गया।


मैं पूरी तरह थक चुका था। शरीर में एक मीठी थकान फैली हुई थी। मैं बेड पर लेट गया और आंखें बंद करके कुछ गहरी सांसें लेने लगा। लेकिन बस कुछ मिनट ही बीते होंगे कि मेरे लंड में फिर से खून की लहर दौड़ने लगी। वह धीरे-धीरे सख्त होने लगा और फिर से पूरी ताकत से खड़ा हो गया।

आंटी ने भी मेरा लंड चूस कर खड़ा कर दिया।


आंटी मेरे पास आईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए झुककर अपने गर्म और नरम मुंह में मेरे लंड को ले लिया। उनकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूमने लगी। वे जोर-जोर से चूसने लगीं। उनकी गर्म सांसें और नमी मेरे पूरे शरीर में सिहरन भर रही थी। कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से लोहे जैसा कड़ा और लंबा हो गया।


अब मैंने आंटी की गांड पर हाथ फेरते हुए कहा, मैं तो आपकी गांड मारना चाहता हूं।


तो आंटी ने कहा, मैं आज से तेरी रंडी हूं। जो मर्जी कर ले।


मैंने सरसों का तेल अपने लंड पर लगाया और आंटी की गांड पर भी लगा दिया।


आंटी घोड़ी बन गईं तो मैंने अपना लंड आंटी की गांड पर सेट करके करारा धक्का मारा और मेरा आधा लंड आंटी की गांड में घुसता चला गया।


आंटी को बहुत दर्द हो रहा था और वो गालियां भी दे रही थीं, भेंचोद मार डाला निकाल इसे।


लेकिन मैंने कुछ नहीं सुना और दूसरा धक्का मारा। मेरा पूरा लंड अंदर चला गया।


आंटी अब भी गालियां दे रही थीं।


मैंने अपने धक्के चालू किए तो आंटी भी साथ देने लगीं और आंटी मेरे ऊपर आकर बैठ गईं और उछलने लगीं।


कमरे में चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं। इस बार भी मैंने 45 मिनट लगातार चुदाई की और फिर मैं इतनी देर चुदाई करने के बाद टूट गया था।


आंटी भी थक चुकी थीं।


आंटी ने कपड़े पहने और मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक लेकर आईं। उन्होंने मुझे 10000 रुपये देकर कहा, घर आता जाता रहा कर।


मैं बहुत खुश था और अब मैं हमेशा ही उनकी चुदाई करता हूं।


दोस्तों प्लीज बताइएगा कहानी कैसी लगी।


आपको यह सच्ची Sex Stories कैसी लगी

आप मुझे mail कर सकते हो।।

अगर किसी भाभी ,आंटी , गर्ल्स को मुझसे सेक्स करनी हो तो मुझे मेल करे ...........

मैं सबो का रिप्लाई दूंगा।।

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