मेरे मामा की लड़की बनी मेरी बीवी - Antarvasna Sex Stories
- Kamvasna
- Feb 4
- 14 min read
मेरा नाम नमन है मेरी उम्र अभी 22 साल है और मैं अपने माता-पिता व बड़ी बहन के साथ पटेल नगर दिल्ली में रहता हूँ। ये मेरी पहली कहानी है जिसमे मैंने अपने मामा की बेटी की चुदाई की थी। चलिए अब मैं आपको सेक्स से भरपूर कहानी सुनाता हूँ।
मेरे मामा एक बैंक में जॉब करते हैं और नोएडा में रहते हैं। मामी हाउस वाइफ है, उनके साथ उनकी बेटी, जिसका नाम मृणालिनी है, रहती है जो अभी कुछ दिन पहले ही 18 साल की हो गई। उसका रंग गोरा है और शरीर पतला है। मेरे मामा का एक बेटा भी है जो फिलहाल लंदन में अपनी पढ़ाई कर रहा है।
जो घटना मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ ये अभी 15 दिन पहले की ही घटना है। जब मामी ने मुझे नोएडा बुलाया क्योंकि उन्हें 2 दिन के लिए किसी काम से अपने मायके जाना था। जब भी वो कहीं जाती हैं तो मुझे मृणालिनी के पास रहना पड़ता है।
मैं मामा के घर पहुंचा तो मामी मुझे घर के दरवाजे पे ही मिल गई। उन्होंने मुझे बताया कि मृणालिनी नहा रही है तुम बैठो, वो आकर चाय बना देगी।
इतना बोल के मामी चली गई।
मैं अंदर जाकर बाहर वाले कमरे में बैड पर लेट गया। अभी 5 मिनट ही हुए थे कि अंदर वाले कमरे में मुझे मृणालिनी दिखाई दी जो कि सिर्फ एक तौलिया लपेटे थी। मेरे कमरे की लाइट बंद थी पर उसके कमरे में लाइट जल रही थी। उसके बाद जो हुआ, वो मेरी कल्पना से भी परे था।
मृणालिनी ने अचानक से अपने कमसिन बदन से तौलिया हटा दिया. अपनी बहन को पूरी नंगी देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई क्योंकि मैंने जीवन में कभी किसी लड़की को ऐसे नग्न हालत में नहीं देखा था।
उसकी लंबाई 5 फिट 6 इंच की है। उसकी फिगर सही तो नहीं बता सकता पर पर उसकी चूचियाँ 32″ की व पेट से वो बहुत पतली सी है. और हाँ उसकी गांड बड़ी जानदार लग रही थी जो लगभग 34 या 36 की होगी।
वो इस बात से अनजान थी कि कोई उसे बिना कपड़ों के देख रहा है। वहीं से मुझे दिखा कि उसकी चूत बड़ी खूबसूरत लग रही थी। देखकर ही पता चल रहा था कि वो अभी उसके बाल साफ करके आई है। मेरा लंड उसकी चूची, गांड व चूत को देखकर बेकाबू हो रहा था। वो शायद अपनी ब्रा व अंडरवियर ढूंढ रही थी।
अभी 2 से 3 मिनट ही हुए थे कि उसे कुछ शक हुआ जैसे घर पे कोई है। मेरे बारे में उसे नहीं पता था। उसने जल्दबाजी में तौलिया लपेटा और उस कमरे में आ गई जिसमें मैं लेटा था।
जैसे ही उसने लाइट का स्विच ऑन किया, वो हैरानी से मुझे देखकर बोली- भैया आप कब आये? और अंदर कैसे आये?
मैंने उसे बताया- जब मामी जी यहीं थी, तब आ गया था।
उसके बाद उसने दूसरा सवाल पूछा- आपने कुछ देखा तो नहीं?
मैंने अनजान बनते हुए पूछा- कुछ मतलब?
वो घबराती हुई बोली- मैं अंदर कमरे में थी बिना कपड़ों के?
मैंने कहा- हां, वो तो सब देखा मैंने … पर मैं करता भी क्या … क्योंकि एक अप्सरा मेरे सामने इस अवस्था में थी तो चाहकर भी आँखें नहीं हटा सका।
ये सब सुनकर वो घबरा के वहीं सोफे पे बैठ गई। उसके चेहरे को देखकर ही पता चल रहा था कि उसके हृदय की धड़कनें उसके काबू में नहीं थी।
कुछ देर चुपचाप बैठी रही.
तब मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो मेरी बहन बोली- ये सब नहीं होना चाहिए था।
तब मैंने कहा- इसमें ना तुम्हारी गलती ना मेरी। फिर इसमें डरने वाली कौन सी बात है?
फिर पता नहीं उसके दिमाग में क्या आया, उसने अपने दोनों पैर उठाके सामने वाली मेज पर रख दिये। वो ठीक मेरे सामने थी जिसके कारण मुझे उसकी चूत साफ-2 दिखाई दे रही थी।
मैंने उसे कहा- ये क्या कर रही है?
हमारे बीच पहले कभी ऐसी कोई बातचीत भी नहीं हुई थी. इसलिए मैं संभलने की कोशिश कर रहा था।
वो बोली- आपने सब कुछ देख ही लिया फिर छुपाने का क्या फायदा? आप जी भर के देखो।
उसकी गोरी-2 व नंगी जांघ देखकर साथ में चूत देखकर मेरा लंड दुबारा से हरकत में आ गया। मेरी बेचैनी बढ़ने लगी थी, मेरा हाथ अपने आप उसे सहलाने लगा।
ये सब देखकर वो बोली- आप क्या करने लगे?
मैं बोला- जिसके सामने एक अप्सरा आधी नंगी बैठी हो वो कैसे अपने होश संभाले?
तब उसने कहा- ये अप्सरा तो अब पूरी नंगी भी हो सकती है क्योंकि आपने सब देख ही लिया। लेकिन पहले मुझे आपका वो देखना है जिसे आप हाथ से सहला रहे हो।
मुझे और क्या चाहिए था … जल्दी से मैंने अपनी पैंट उतारी, फिर अंडरवियर उतारकर अपना लंड उसके सामने कर दिया। वो उसे देखकर हैरानी से बोली- ये इतना बड़ा होता है क्या?
मैंने कहा- हां, ये इतना ही बड़ा होता है।
वो बोली- क्या मैं इसे छू सकती हूं?
मैंने जैसे ही हां कहा, वो सोफे से खड़ी हो गई वो तौलिया पूरा निकालकर मेरे पास आकर अपने दोनों हाथों से मेरा औजार पकड़ लिया।
मदहोशी में मेरी आँखें बंद हो गई।
तभी मेरे नाक में एक अजीब सी खुशबू महसूस हुई जो मेरी बहन के नंगे जिस्म की ही महक थी। मृणालिनी मेरे लंड को सहला रही थी. मैंने भी अपना हाथ उसकी कमर पे रखा, फिर धीरे-2 उसे नीचे लाते हुए उसकी गांड पे हाथ फिराया तो ऐसा लगा जैसे मक्खन पे हाथ चल रहा हो।
उसके बाद मैं अपनी जीभ उसकी नंगी जांघ पे फिराने लगा.
वो बोली- भैया रहने दो ना प्लीज़।
मैं कहाँ रुकने वाला था, आगे बढ़ते हुए मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पे लगा दी।
इतना कुछ वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। जबकि उसने पहले ऐसा कभी नहीं किया था। वो पास में खड़ी होकर मेरा लंड चूस रही थी जबकि मैं लेटे-2 उसकी चूत को चाट रहा था।
काफी देर तक हम दोनों इसी हालत में एक दूसरे के साथ मजे लेते रहे. तभी मुझे लगा कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है तो मैंने उसे बताया पर वो तो ना जाने किस दुनिया में थी।
तभी मेरे लन्ड से लावा फूट पड़ा। कुछ तो उसके मुँह में ही चला गया. फिर उसने जैसे ही अपना मुँह हटाया तो मेरे वीर्य से उसका सारा चेहरा गन्दा हो गया।
वो अजीब से मुँह बनाती हुई बोली- भैया ये क्या है?
मैंने उसे बताया- ये वीर्य है.
तो बोली- आपने पहले क्यों नहीं बताया?
मैंने उसे कहा- बताया था पर तुमने सुना नहीं।
वो बोली- ठीक है, अब आपको मेरा पानी पीना पड़ेगा।
मैंने कहा- नहीं, आज तक मैंने भी नहीं पीया, आज रहने दो, बाद में देखेंगे।
पहले वो अपना चेहरा धो के आई। जब वो बिल्कुल नंगी बाहर जा रही थी तो उनकी गांड देखकर मेरा लन्ड दुबारा से मस्ती में आने लगा।
अब वो वापिस आकर मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और अपनी जीभ मेरे मुँह में दे दी। यह हम दोनों के ही जीवन का पहला चुम्बन था। मैं उसकी तो वो मेरी जीभ को चूसने लगी।
थोड़ी देर किस करने के बाद मैं उसकी चूचियों पे जीभ फिराने लगा।
बारी-2 से दोनों चूचियों को चाटने के बाद वो उठी और घूम कर दुबारा से मेरे लन्ड को मुँह में ले लिया. अब उसकी गोरी, मोटी गांड व बिना बालों की चूत मेरे मुँह से बस थोड़ी दूर थी. तो मैंने भी लपक कर उसकी चूत को पूरा मुँह में ले लिया।
लगभग 10 मिनट तक दोनों इसी हालत में रहे तो मैंने कहा- इस बार पूरा रस मुँह में ही लेना. मैं भी तुम्हारा रस मुँह में ही ले लूंगा।
वो पहले तो मना करती रही फिर मान गई।
कुछ ही देर में मुझे झटके लगने लगे व उसकी चूत से भी कुछ बहने लगा. दोनों ने एक दूसरे का पानी पिया और अलग हो गये।
मैंने उसे कहा- कोई आ सकता है इसलिए बाकी काम रात में करेंगे।
तो वो मान गई और हम दोनों ने अपना मुँह धोकर कपड़े पहन लिए।
दिन में जब वो किचन में खाना बना रही थी तो मैंने उसके गांड पे अपना लंड लगा दिया.
वो बोली- भैया रहने दो ना, रात में जो मर्जी कर लेना पर अभी काम करने दो।
मैंने एक लिप किस किया और जाकर टीवी देखने लगा।
रात में उसने खाना बनाया और दोनों ने एक साथ बैठकर खाना खाया।
उसके बाद दोनों एक ही बैड पे लेट गये. सर्दियां शुरू हो गई थी इसलिए दोनों ने एक कम्बल ले लिया। लेकिन अचानक से वो उठ कर दूसरे रूम में चली गई. वहां से जब वो वापिस आई तो उसने एक सेक्सी सा लाल रंग का गाउन पहना हुआ था।
मेरी ममेरी बहन मेरे पास लेट गई तो मैंने कहा- आज तो हमारी सुहागरात है.
तो उसने शर्मा के अपना चेहरा अपने हाथों में छिपा लिया।
मैंने उसका गाउन उतारा तो देखा कि उसने काले रंग की जालीदार ब्रा व पैंटी पहनी हुई थी जिसमें वो बहुत सेक्सी व हॉट लग रही थी।
उसके बाद उसने मेरे कपड़े खुद ही उतार दिए. मैंने नीचे अंडरवियर नहीं पहना था जिसकी वजह से पैंट निकलते ही मैं पूरा नंगा हो गया।
उसने मेरे लंड को सीधा अपने मुँह में ले लिया उसके गुलाबी होठों ने मुझे मदहोश ही कर दिया। मैंने उसकी ब्रा व पैंटी निकालकर फेंक दी और उसे कहा- मेरे ऊपर आओ.
तो हम दोनों 69 में आ गए.
उसकी चूत से एक अजीब सी महक आ रही थी जो मुझे और भी पागल कर रही थी। काफी देर तक इसी हालत में रहने के बाद मृणालिनी को उठने को कहा और उसे अपने लन्ड पर बैठने को कहा। वो मेरे पेट पर लेट गई। मेरा लन्ड उसकी चूत को छू कर मस्ती से झूम रहा था। उसने अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिये और हम दोनों एक दूसरे को होठों को व जीभ को चूसने लगे।
4 से 5 मिनट के बाद मैंने उसे उठाया और कहा- नीचे आओ, आज तुम्हारी नन्ही सी चूत का उदघाटन करूँगा।
मेरी बहन नीचे बिस्तर पर लेट गई। मृणालिनी डरी हुई थी, बोल रही थी- भाई, मैंने सुना है कि जब पहली बार चुदाई होती है तो बहुत दर्द होता है.
तो मैंने उसे दिलासा दी- मैं आराम से करूँगा, तू जाकर कोई क्रीम ले आ।
उसके बाद मृणालिनी ने बहुत सारी क्रीम मेरे लन्ड पे लगाई मैंने उसकी चूत पे लगाई। उसे लिटाकर मैं ऊपर आ गया और मृणालिनी को कहा- दर्द होगा पर बर्दाश्त कर लेना, प्लीज़ चिल्लाना मत।
अब मैंने उसकी एक टांग उठा के अपना लन्ड उसकी चूत पे सेट किया। पहला धक्का मारा तो वो अंदर नहीं गया साइड में फिसल गया। कई बार की कोशिश के बाद आखिर में लौड़े का आगे वाला भाग अंदर चला गया पर मृणालिनी दर्द से बिलबिला उठी।
मैं रुक गया क्योंकि वो बहुत नाजुक सी लड़की है। कुछ आराम मिला तो एक धक्का और मारा तो मेरा आधा लन्ड उसकी चूत को चीरता हुई अंदर समा गया पर इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर सकी और चिल्ला कर रोने लगी।
फिर वो बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … भैया, प्लीज़ बाहर निकाल लो, बहुत दर्द हो रहा है, बाकी कल कर लेना।
मैं रुक गया और उसकी चूचियों को बारी बारी से मुँह में लेकर चूसने लगा। जिसमें ध्यान बटने के कारण उसका दर्द कुछ कम हुआ। अब मैंने एक आखिरी धक्का मारा तो मेरा पूरा लन्ड उसकी छोटी से चूत में समा गया. पर वो तो जैसे बेहोश सी हो गई। जिसके बाद मैं डर गया।
पर जल्दी ही वो होश में आ गई और मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटाने लगी। मैं कहाँ मानने वाला था, मैं कभी उसके होंठ चूसता कभी उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ चूसता।
लगभग 5 मिनट के बाद मुझे लगा कि वो अपनी गांड हिला रही है. मैं समझ गया कि अब मृणालिनी को दर्द नहीं हो रहा।
मैंने धीरे-2 धक्के मारने शुरू किए तो वो भी मेरे साथ मस्ती में झूमने लगी। काफी देर तक चुदाई करने के बाद जब मुझे लगा कि छूटने वाला है तो उसकी चूत से निकालकर उसकी मुँह में दे दिया. तभी मेरा पानी छूट गया जिसे उसने पूरा पी लिया।
अब उसकी बारी थी वो भी उठकर मेरे मुँह के ऊपर बैठ गई। मैं उसकी भावनाओं को समझ गया औऱ उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी इतने में ही वो भी अकड़कर ढीली हो गई।
उस रात हमने अपनी सुहागरात में 3 बार चुदाई की। एक बार तो मैं मृणालिनी की गांड में लन्ड देना चाहता था पर वो नहीं मानी बोली- भाई आज चूत का दर्द झेल लूं, अगली बार गांड का ही उदघाटन करवा लूंगी आप से ही।
उसके बाद हम दोनों सो गये।
उसके बाद मैं अपने घर आ गया था। इस घटना के लगभग छह महीने बाद मेरे मामा जी का कॉल आया। “मृणालिनी को किसी एग्जाम के लिए मुंबई जाना है।
मुझे जरूरी काम है जिसके कारण मुझे नोएडा ही रुकना पड़ेगा। अगर तुम तीन-चार दिन के लिए फ्री हो तो तुम इसके साथ मुंबई चले जाओ।” इतना सब सुनते ही मेरे दिल की धड़कनें अनियंत्रित हो गईं। मैं मृणालिनी के नंगे बदन को याद करके जैसे स्वर्ग में पहुंच गया। उसकी नरम चूचियां, टाइट कमर, गोल-गोल गांड और वो गीली चूत… सब कुछ दिमाग में घूमने लगा। कुछ क्षण बाद खुद को संभालते हुए मैंने मामा जी से कहा, “मैं फ्री हूं, उसे लेकर मैं चला जाऊंगा।” मामा जी ने मेरा और उसका राजधानी का टिकट करवा दिया।
पंद्रह दिन बाद मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। उधर से मामा उसे छोड़ने आए थे। मृणालिनी को देखकर मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं क्योंकि उस दिन सुहागरात मनाने के बाद उससे पहली बार मिल रहा था। अब वो और भी हसीन लग रही थी। उस दिन की चुदाई के कारण उसकी चूचियां पहले से कुछ बड़ी और भारी लग रही थीं, जैसे दूध से भरी हों।
मैंने उसे सामने से देखा, उसकी सलवार में गांड का साइज भी साफ बढ़ा हुआ महसूस हो रहा था। उसने सलवार सूट पहना था जिसमें वो एक साधारण सी कॉलेज लड़की लग रही थी, लेकिन मुझे पता था अंदर क्या छुपा है। हम दोनों ट्रेन में चढ़कर अपनी सीट ढूंढने लगे। हमारी सीटें एक बीच वाली और दूसरी ऊपर वाली बर्थ थीं।
अभी लगभग पांच बजे थे, ट्रेन का समय साढ़े पांच का था। जिसके कारण बीच वाली बर्थ पर अभी बैठना या लेटना संभव नहीं था। इसलिए हम दोनों बाकी सवारियों के साथ नीचे ही बैठ गए। वैसे हम वहां पूरी तरह खुल सकते थे क्योंकि किसी को नहीं पता था कि हम भाई-बहन हैं, सब हमें कपल समझ रहे थे।
मृणालिनी मेरे साथ बैठे-बैठे शायद उस रात की यादों में खोई थी क्योंकि उसके चेहरे पर अजीब तरह के भाव आ रहे थे, बीच-बीच में वो शर्मा रही थी, आंखें नीचे करके मुस्कुरा रही थी। जिनके कारण बाकी सवारियां हमें पति-पत्नी मान रही थीं। एक आंटी ने तो मुस्कुराते हुए कहा भी, “नई-नई शादी हुई है क्या?” हम दोनों ने बस शरमाकर हां में सिर हिला दिया। रात होने पर हम दोनों ऊपर वाली बर्थ पर बैठकर खाना खाया और वहीं लेट गए।
सीट की चौड़ाई कम होने के कारण दोनों के शरीर एक-दूसरे से पूरी तरह सटे हुए थे। मैंने धीरे से उसके सलवार में हाथ डाल दिया तो महसूस हुआ कि उसकी पैंटी पहले से ही पूरी गीली हो चुकी थी। उसके कान में मैंने धीरे से पूछा, “क्या हुआ, इतनी गीली क्यों हो?” उसने मदहोश सी आवाज में कहा, “जब से आपको देखा है तब से सुहागरात वाली बातें ही दिमाग में घूम रही हैं।” उसने भी मेरे लोअर में हाथ डालकर मेरे लंड को पकड़ लिया, उसे सहलाने लगी। रात में सभी के सोने तक हम धीरे-धीरे ऐसे ही मस्ती करते रहे, कभी उंगलियां अंदर डालकर, कभी लंड को बाहर निकालकर सहलाकर।
सबके सोने के बाद मैंने उसके सलवार को धीरे-धीरे नीचे कर दिया और अपना लोअर निकालकर लंड उसकी चूत पर रख दिया। उसने धीरे से मेरे कान में कहा, “भैया, कोई देख न ले!” तब मैंने कहा, “कुछ नहीं होगा क्योंकि सब हमें पति-पत्नी मान रहे हैं।” इसके बाद वह भी बेफिक्र होकर मजे लेने लगी। ट्रेन में ही मैंने उसकी चूत में अपना लंड धीरे से घुसाया। जैसे ही टिप अंदर गई, वो हल्के से सिसकारी, “आह… भैया… धीरे… ट्रेन हिल रही है ना।” मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। उसकी चूत की गर्मी और टाइटनेस ने मुझे पागल कर दिया।
वो मेरे कंधे पर मुंह दबाकर उंह… उंह… कर रही थी। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “तेरी चूत अभी भी वैसी ही टाइट है, मृणालिनी… रोज मेरी याद में उंगली करती है क्या?” वो शरमाते हुए बोली, “हां भैया… आपका लंड याद आता है… आह… और जोर से डालो ना।” मैंने स्पीड बढ़ाई, ट्रेन की थप-थप में हमारे धक्के छिप गए। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था। आखिर में मैंने उसके अंदर ही झड़ दिया, वो कांपते हुए बोली, “आह… भैया… पूरा भर दो मुझे… गर्म-गर्म महसूस हो रहा है।” हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।
मुंबई पहुंचकर मैंने दादर के एक अच्छे होटल में रूम ले लिया जहां तीन दिन तक हम दोनों ने खुलकर मजे किए। मुंबई में कोई जानकार तो था नहीं, इसलिए हम पूरी तरह फ्री थे। रूम में सिर्फ एक बड़ा बेड था जो हमारे लिए काफी था। उस दिन हमें कोई काम नहीं था इसलिए हमने दोपहर के बाद घूमने का प्रोग्राम बनाया। हम दादर से चार बजे निकले, ट्रेन से अक्सा बीच पहुंच गए। वहां हम भाई-बहन के रूप में नहीं बल्कि पति-पत्नी के रूप में घूम रहे थे, इस कारण किसी तरह की कोई शर्म या झिझक नहीं थी।
बीच पर घूमते-घूमते हम थोड़ा साइड में आ गए जहां भीड़ बहुत कम थी, सिर्फ दूर-दूर कुछ लोग नजर आ रहे थे। हम दोनों ने अपने कपड़े निकाले और समुद्र के पानी में नहाने लगे। उस समय मैंने सिर्फ अंडरवियर पहना था और मृणालिनी ने लाल रंग की ब्रा व काले रंग की पैंटी पहनी थी। इस हाल में वह किसी मॉडल से कम नहीं लग रही थी। उसका पतला और लंबा शरीर, पानी में चमकती त्वचा, देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता था। उसे देखकर मेरी हालत खराब हो रही थी। सेक्स विद सिस्टर के ख्याल से मेरा लंड अंडरवियर को फाड़ने को तैयार था जिसे देखकर मृणालिनी पूरी मस्ती के मूड में आ गई थी।
पानी के अंदर ही वह मेरी गोद में बैठ गई। उसके बैठते ही मेरा लंड दर्द करने लगा क्योंकि वह पूरी तरह टाइट था। मैंने उसे थोड़ा ऊपर उठने को कहा और अंडरवियर से अपने लंड को बाहर निकाल लिया। उसे कुछ पता नहीं था क्योंकि मैं पानी में बैठा था। इसके बाद उसकी पैंटी को भी नीचे करके उसे अपनी गोद में बैठा लिया। मेरे लंड को अपनी गांड में महसूस करते ही वो खुशी से झूम उठी, “आह भैया… आपका लंड कितना सख्त हो गया।” पानी के अंदर ही मैंने उसकी पैंटी पूरी तरह बाहर निकाल दी और उसका मुंह अपनी तरफ करके गोद में बिठा लिया।
इससे मेरा लंड मृणालिनी की चूत के छेद से लग गया। वह धीरे से मेरे कान में बोली, “भैया, लोग देख रहे हैं।” मैंने उसे कहा, “देखने दो… सबको मजे लेने दो। आखिर हम हनीमून पर आए हैं तो ये सब तो होगा ही।” अब मैंने उसे हल्का सा ऊपर उठाकर दोबारा गोद में बैठाया तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा चला गया। मृणालिनी को पहले हल्का दर्द हुआ, “उई… भैया… धीरे… पानी में और टाइट लग रही है।” लेकिन बीच सेक्स की मस्ती में वो कुछ नहीं बोली।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। लहरें हमारे शरीर को हिला रही थीं, पानी हमारे बीच में छप-छप कर रहा था। वो मेरे सीने से चिपककर आह… आह… कर रही थी, “भैया… आपका लंड इतना गहरा जा रहा है… ओह… इह्ह… ह्ह्ह…।” मैंने उसके होंठ चूसते हुए कहा, “तेरी चूत की गर्मी मुझे पागल कर रही है, मृणालिनी… चोदने दे मुझे ठीक से।” वो हल्के से मेरे होंठ काटते हुए बोली, “हां चोदो… मैं तुम्हारी हूं… आह… जोर से… लहरों में मजा आ रहा है।” मैंने स्पीड बढ़ाई, उसके निप्पल्स को पानी में ही चूसना शुरू किया। वो उछल-उछलकर मेरे लंड पर बैठ रही थी, थप-थप की आवाज पानी में गुम हो रही थी, “ओह भैया… और गहरा… इह्ह… ह्ह्ह… आऊ… ऊई… उईईई…।” मैंने उसके कान में डर्टी टॉक किया, “तेरी चूत का रस निकल रहा है बहन… मुझे लगता है तू झड़ने वाली है।” वो कांपते हुए बोली, “हां… आ रही हूं… आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह… निकल गया… पूरा गीला कर दिया।” इसी तरह पानी में उसके चूत व अपने लंड की प्यास बुझाने लगा।
इस बीच में मैं उसकी ब्रा से उसकी गोल-गोल चूचियां बाहर निकालकर चूसने लगा, निप्पल्स को हल्का काटा तो वो और जोर से चिल्लाई, “आह… भैया… दांत मत लगाओ… मजा आ रहा है।” चुदाई का यह खेल थोड़ी देर में खत्म हो गया क्योंकि मृणालिनी की चूत का पानी निकल चुका था। तो मैंने उसको उठाकर पास में बैठा लिया। तब मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया जिसे वो हिलाकर तेज-तेज करने लगी, “भैया… झड़ो… मेरा हाथ गर्म कर दो।” आखिर में मैंने उसके हाथ पर ही झड़ दिया, वो मुस्कुराते हुए बोली, “भैया, आपका माल कितना गर्म है… आह… हाथ चिपचिपा हो गया।”
मृणालिनी की चुदाई करने के बाद हमने पानी से बाहर आकर कपड़े पहने और थोड़ी देर घूमकर अपने रूम पर आ गए। होटल पहुंचते ही हमने दरवाजा बंद किया और एक-दूसरे पर टूट पड़े। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए, ब्रा खोलकर चूचियां चूसने लगा।
वो आंखें बंद करके उंह… उंह… कर रही थी, “भैया… चूसो जोर से… निप्पल्स काटो।” मैंने उसे बेड पर लिटाया, उसकी चूत को उंगली से सहलाया, वो कमर उचकाकर बोली, “आह… अंदर डालो उंगली… गीली हो गई हूं।” मैंने दो उंगलियां डालीं, अंदर-बाहर करने लगा, वो चिल्लाई, “ओह… ह्ह्ह… इह्ह… और तेज… चूत फाड़ दो।” फिर मैंने अपना लंड उसके मुंह में दिया, वो चूसने लगी, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, “भैया… आपका लंड नमकीन है… डीप थ्रोट करूं?”
मैंने हां कहा, वो गहरा लेने लगी, गोग… गोग… करते हुए। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से लंड डाला, थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी, वो चिल्ला रही थी, “आह… भैया… गांड पर थप्पड़ मारो… चोदो जोर से… उई… ऊउइ… ऊईईई।” मैंने कई पोजिशन्स ट्राई कीं, मिशनरी में उसके पैर कंधों पर रखकर गहरा धक्का लगाया, वो कांप गई, “आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह… निकल रहा है फिर से… भैया… साथ में झड़ो।” आखिर में मैंने उसके मुंह में झड़ा, वो निगलते हुए बोली, “मजा आ गया भैया… तीन दिन ऐसे ही रहना है।” तीन दिन हमने ऐसे ही होटल में चुदाई की, कभी शावर में खड़े-खड़े, कभी बालकनी पर छिपकर, कभी बेड पर लंबे समय तक। एग्जाम के बाद हम वापस आ गए।
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Fir kya hua aage ke salo me