लौंडेबाज मामा की गांड चुदाई : Indian Sex Stories
- Kamvasna
- 2 days ago
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इस हिंदी गे सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे हॉस्टल मेस में मेरे रूममेट ने आधी रात मेस वाली की बेटी की चुदाई की। लेकिन मैं गांडू तो गांड मारने मराने का शौकीन था।
मेरी गांड बुरी तरह कुलबुला रही थी। खुजला रही थी। लंड के लिए मचल रही थी। लंड की ठोकरों के लिए तड़प रही थी। क्या करूं मौका ही ऐसा था।
मेरा रूममेट मेरा साथी जो एक बहुत माशूक लौंडा था आज मेरे बगल में लेटा अपने मेहमान से गांड मरवा रहा था। मैं नींद का बहाना किए सोया पड़ा था।
दोस्त चिल्ला पड़ा आ आ आ लग गई लग गई धीरे से।
मेहमान धीरे से उसके कान में फुसफुसाया अबे अभी तो डाला ही नहीं केवल छुलाया भर है पहले से ही हल्ला मचाने लगा तेरा दोस्त लौंडा जग जाएगा चुप कर थोड़ी टांगें चौड़ी कर ले गांड ढीली कर इतनी टाइट मत कर।
और मेहमान ने एक जोरदार धक्का दिया और सुपारा गांड के अन्दर।
आ आ आ ई ई फट गई फट गई।
वह औंधा लेटा था हाथों की ताकत से सिर व छाती ऊपर उठाने की कोशिश की तो ऊपर लेटे मर्द ने उसे फिर से लिटा दिया।
उसके सिर पर हाथ फेरता बोला लेटा रह बस अभी निपटे जाते हैं यार तू नखरे बहुत करता है।
और लौंडे की कमर को अपनी बांह से जकड़ लिया एक जोरदार धक्का दिया अब आधा लंड गांड के अंदर घुस गया उसने एक तकिया लेकर उसकी कमर के नीचे रखा दूसरी बांह गर्दन के चारों तरफ लपेट ली फिर जोर से दो तीन धक्के मारे।
अब गांड मराने वाला लौंडा शान्त लेटा था मेहमान लौंडेबाज गांड में अपना पूरा लंड पेल कर चालू हो गया दे दनादन दे दनादन धच्च पच्च धच्च पच्च अंदर बाहर अंदर बाहर।
वह धक्के पर धक्के लगा रहा था उसकी सांस जोर जोर से सुनाई दे रही थी हंह हह हूं वह जोरदार तरीके से लगा था।
लौंडेबाज की कमर बार बार ऊपर नीचे हो रही थी उसके चूतड़ों से उसकी जांघें टकरा रही थीं बार बार आवाज आ रही थीं पच्च पच्च जो मेरा दिमाग खराब कर रहीं थीं मेरी गांड उस चुदाई को देख देख कर मचल रही थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया मैं खुद औंधा होकर उसे बिस्तर से रगड़ रहा था कभी लंड को हाथ से मरोड़ रहा था बार बार चूतड़ भींच रहा था मैं उनके बिल्कुल बगल में लेटा था पर चूंकि वे दोनों गांड मराई में व्यस्त थे इसलिए मेरी हरकत पर उनका ध्यान नहीं था।
अरे मैं तो भूल ही गया।
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मैं आपको अपना परिचय तो दे दूं मैं तब पच्चीस छब्बीस साल का रहा होऊंगा मेरी लम्बाई यही कोई पांच फीट आठ इंच है मेरा रंग का गेंहुए से थोड़ा खुला हुआ है मैं कसरत करता हूं हल्की कसरत सुबह दौड़ना कुछ योगासन इसलिए छरहरे बदन का हूं कमर पतली जांघें व बांहें थोड़ी मस्कुलर हैं पेट सपाट।
इसके लिए बड़ी कोशिश करना पड़ती है।
मैं जॉब में हूं नौकरी के ही एक डिपार्टमेंटल ट्रेनिंग में जबलपुर आया यहां ट्रेनिंग सेंटर के हॉस्टल में रूका मैं थोड़ा लेट आया अतः लास्ट का अकेला कमरा मिला जिसमें एक ही बेड था।
मेरा साथी जिसका नाम हम अनिल रखे देते हैं मेरे भी बाद आया अतः वो मेरे ही कमरे में एडजस्ट हो गया।
पहले तो वह बोला मैं नीचे सो जाऊंगा।
पर मैंने ही कहा मेरे साथ ही सो जा।
तो वह मान गया।
चूंकि वह असल में तो सिंगल बेड ही था अतः हम दोनों चिपक कर ही सोते।
मेरा रूम मेट भी यही कोई तेईस चैबीस साल का रहा होगा मेरे से ज्यादा गोरा बहुत माशूक बन ठन कर रहता मेरे जैसा ही छरहरा स्मार्ट था।
एक दिन मैं और अनिल एक शाम पिक्चर देखने गए लौटने में देर हो गई।
हम मेस में पहुँचे कुछ मिलेगा।
मेस वाला दारू में धुत्त था पर उसकी लड़की बोली दाल चावल मिल जाएंगे।
हम खा रहे थे तभी अनिल के हाथ से लड़की के मम्मे जब वह परोस रही थी छू गए।
वह मुस्कराई तो अनिल ने मसक दिए वह खाना छोड़ कर उस पर झपट पड़ा और एक कोने में ले जाकर खड़े खड़े ही उसकी चड्डी नीचे कर पूरा लंड पेल दिया।
उसने मेरे को इशारा किया और मैं बाहर देखता रहा तब रात के करीब ग्यारह बज रहे होंगे अनिल उसकी चूत में अपना प्यासा फन फनाता लंड डाल कर धक्के पर धक्के दे रहा था वह जल्दी में था उसकी कमर बुरी तरह झटके ले रही थी अनिल ने लड़की की चूत रगड़ कर रख दी लड़की मुश्किल से उन्नीस की होगी पर चुदाई में अनुभवी लग रही थी लड़की मस्ती में आंखें आधी बंद किए सिसकारियां भर रही थी।
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चुदाई के बाद टेबल के मेजपोश से लंड पौंछ कर बोला तुम निबटोगे।
मैंने मना कर दिया।
वह बड़ा थैंकफुल था अरे यार मजा आ गया तुमने बड़ी मदद की तुम नहीं होते तो नहीं कर पाता चुदाई के समय भी मेरी गांड फट रही थी।
हम कमरे में लौटे तो कपडे उतारे जब अंडरवीयर बनियान में थे तो मैंने देखा उसका अंडरवीयर भी खराब था उसने उतार दिया व धोकर सूखने डाल दिया।
वह तौलिया लपेटे था।
हम लेटे तो उसका तौलिया भी निकल गया वह नंगा ही मेरे साथ लेटा था उसका लंड फिर खड़ा हो गया।
मैंने कहा यार तेरा हथियार तो मस्त है।
वह मुस्कराया।
मैंने उसके लंड को पकड़ कर कहा वाह यार लोहे की रॉड सा है तूने उसकी फाड़ कर रख दी होगी।
वह प्रसन्न हो गया मेरे से और चिपक गया अब उसका लंड मेरे पेट से टकरा रहा था मेरी इच्छा तो हुई कि करवट बदल लूं उसकी तरफ अपनी पीठ कर लूं और वह अपना मस्त फनफनाता लंड मेरी गांड में डाल दे।
मैं अंडरवीयर पहने था वह नंगा था।
वह बोला अपना तो दिखा।
मैंने कहा रहने दे फिर कभी।
उसने हाथ बढ़ा कर मेरा लंड अंडरवीयर के ऊपर से सहलाया तो खड़ा हो गया।
मैंने करवट बदल ली यार रहने दे।
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अब मेरी पीठ उसकी तरफ थी उसका लंड जो खड़ा था मेरे अंडरवीयर के ऊपर से ही मेरे दोनों चूतड़ों के बीच में रगड़ने लगा मुझे मजा आ रहा था मैं चाह रहा था कि वह मेरा अंडरवीयर नीचे कर मेरी गांड में पेल दे।
पर वह अपना हाथ बढ़ा कर मेरा लंड पकड़ने की कोशिश में था वह बुरी तरह मेरे ऊपर चढ़ बैठा बोला दिखाना ही पड़ेगा।
इस पकड़ धकड़ में उसके लंड की ठोकरें मेरी गांड पर पड़ रहीं थीं मुझे मजा दे रहीं थीं।
वह बुरी तरह मेरे पीछे चिपका था उसने हाथ मेरे अंडरवीयर में डाल दिया मैं जान बूझ कर औंधा हो गया तब उसने मेरे अंडरवीयर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे कर दिया।
मेरे चूतड़ देख कर वह मस्त हो गया यार तेरे तो चूतड़ क्या हैं लौंडियों को मात करते हैं मेरे से बड़े हैं मस्त हैं।
वो दोनों को हाथों से मेरे चूतड़ मसलने लगा बोला बहुत टाइट हैं।
मैंने कहा डालेगा ढीली करूं।
पर वह फिर मेरे ऊपर पीठ से चिपक गया मैं औंधा था वह मेरा लंड पकड़ने की जिद पर उतारू था मैं उसके मजे ले रहा था।
खैर उसने हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ ही लिया बोला यह तो बहुत मोटा है दिखा तो।
मैं औंधा लेटा था वह भी मेरे से चिपका था अब उसका खड़ा मस्त लंड मेरी खुली गांड से टकरा रहा था और मुझे करवट दिलाने की कोशिश में उसके लंड का सुपारा बार बार मेरी गांड के छेद से टकरा रहा था।
एक बार तो सुपारा मेरी गांड में घुस भी गया मैंने भी गांड ढीली करके अपने चूतड़ों के जोरदार धक्के दिये परन्तु लंड पर न चिकनाई थी न वह ठीक से प्रयास कर रहा था अतः सुपारे से ज्यादा नहीं घुसा जल्दी ही गांड में घुसा हुआ लंड भी निकल गया क्योंकि वह आगे पीछे धक्के न देकर अगल बगल में बार बार मूव कर रहा था और वह मुझे चित करने को जोर लगा रहा था।
एक बार जब वह जोर लगा रहा था तो उसका हथियार जो तना था मेरी गांड के छेद पर अड़ा था उसके जोर लगाने से एक दो बार तो मेरी गांड में पूरा सुपारा घुस गया मैं पूरा जोर लगा कर औंधा पड़ा था टस से मस नहीं हो रहा था।
मैंने अपनी टांगें चौड़ी कर लीं और वह मुझे चित करने के लिए पूरा जोर लगाए जा रहा था मैं उससे ताकतवर था और उसके लंड का सुपारा मेरी गांड में घुसा आनंद दे रहा था।
पर ऐसी हालत ज्यादा देर तक न रही पर इस चक्कर में उसके जोर लगाने से उसका खड़ा मस्त लंड मेरी गांड के छेद पर बार बार हल्के हल्के धक्के भी दे जाता था तो मुझे मजा आ जाता था।
आखिर वह मुझे चित करने में सफल हो गया मैं भी उसे नाराज नहीं करना चाहता था अतः मान गया।
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वह मेरे लंड को देख कर बोला क्या मस्त हथियार है कितना मोटा है।
दुबारा उसने हाथ में ले लिया नौ इंची का होगा।
वह मेरे से चिपका था बोला तेरे को लौडिया दिलाऊंगा चोदेगा कभी चोदी है।
वह बहुत ज्यादा प्रभावित था बार बार हाथ में मेरा लंड लेकर कह रहा था इतना बड़ा तो कम लोगों का होता है।
मेरा लंड देख कर अपना देख रहा था तुलना कर रहा था।
मैंने उसका मन बहलाया मैंने कहा यार तेरा भी मस्त है।
मैं उसका मरोड़ दिया बोला अभी वह लौंडिया चुद कर मस्त हो गई क्या चुदाई की साली चूत सहला रही होगी।
वह मुस्कराया।
मैं चित लेटा था वह मेरी तरफ करवट किए मेरे से चिपका था उसकी जांघें मेरे ऊपर मेरी जांघ पर रखी थीं उसका लंड मेरे लंड से टकरा रहा था वह मेरा लंड पकडे उसे आगे पीछे करने लगा मैंने अपना एक हाथ उसकी गर्दन में डाल कर उसे चिपका लिया हाथ पीठ पर सहलाते सहलाते मैं उसके चूतड़ सहलाने लगा फिर उसकी गांड पर मैं उंगली फेरने लगा।
वह फिर बोला लौंडिया चोदेगा।
मैंने बढ़ कर उसका मुंह चूम लिया नहीं रहने दे यार मैं लौंडेबाज हूं।
वह दिन भर क्लास की बैचमेट लड़कियों को फ्लर्ट करता रहता उनके आगे पीछे घूमता कुछ क्लास के और लौंडियाबाज दोस्तों से मिल कर लौंडियां लगाई वह थोड़ा डरपोक और झेंपू भी था।
एक दिन उसके मामा जी आए शाम का समय था उनके साथ डिनर लिया घूमे और रात को कमरे पर लौटे।
वे यही कोई अट्ठाइस तीस के होंगे मेरी हाईट के मोटे तो नहीं पर हल्के दोहरे बदन के थोड़ा सा पेट दिखता था गाल फूले फूले से बड़े बड़े चूतड़ मोटी मोटी जांघें हल्के सांवले गेंहुए रंग के।
अपने शहर होशंगाबाद से बिजनस का सामान लेने आए थे।
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चूँकि हमारे पास एक ही बिस्तर व पलंग था अतः गद्दा आड़ा करके बिछाया पैरों के नीचे दरी बिछाई हम तीनों एक साथ लेटे पहले मामा जी फिर अनिल फिर मैं।
रात को लाईट बंद कर हम सो गए थके थे नींद आ गई।
रात को मामा जी ने अनिल को करवट दिलाई उसका चेहरा मेरी तरफ कर दिया पीठ उनकी तरफ।
फिर अनिल बोला नहीं मामा जी वह देख लेगा।
पर मामा जी बोले वह सो रहा है।
और उन्होंने उसका अंडरवीयर नीचे खिसका दिया अपने खड़े लंड पर थूक लगा कर उसकी गांड के छेद को अंदाज से उंगली से टटोला और अपना नौ इंची का हथियार थूक लगा कर उसकी गांड में पेल दिया।
अनिल चिल्लाया मामा जी लग रही है जरा धीरे से फट जाएगी आ आ आ ब स थोड़ा रूको।
पर मामा जी नहीं रुके वे जोश में थे दो तीन झटके लगाए और उसे औंधा होने को कहा।
वह मना करता ही रहा पर वे उसके ऊपर चढ़ बैठे और अपना आजमूदा हथियार चालू कर दिया अंदर बाहर अंदर बाहर।
वे लगे हुए थे मुझे उन दोनों की आवाजें आ रहीं थीं नींद खुल गई पर मैं चुप लेटा रहा।
चुदाई के बाद मामाजी को अंधेरे में दरवाजा नहीं सूझ रहा था मैंने उठ कर लाईट जला दी व दरवाजा खोल दिया।
वे आश्चर्य चकित हो उठे थोड़े शर्मा गए तू जग रहा था।
मैंने कहा नहीं अभी आपकी आहट से जगा।
वे समझ तो गए पर मुस्कुरा कर रह गए।
बाहर यूरिनल में पेशाब करके लंड धोकर आए व सो गए मैं लेटा पर नींद नहीं आ रही थी तो करवटें बदलता रहा।
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लगभग पांच बजे सुबह उठा फ्रेश हुआ और ग्राउण्ड में दौड़ने निकल गया लौटकर मैं कमरे में कसरत करता रहा मामा जी देखते रहे।
मैं छः बजे सवेरे ब्रश कर रहा था कि पीछे से मामा जी निकले।
मैं वाशबेसिन पर झुका था वे मेरे चूतड़ सहलाने लगे बोले यार तू क्या मस्त चीज है एक्सरसाइज करता है इसलिए बॉडी मस्त है कब से करते हो।
मैंने कहा जी चार पाँच साल से।
वे बोले तुम हेन्डसम भी बहुत हो बॉडी भी बना रखी है लड़कियां मरती होंगी कोई पटी।
मैं जी अभी तक तो नहीं।
मामा जी अच्छा अभी तक कोई तजुरबा नहीं मैं सिखाऊंगा।
मैं मुस्कराया मैं समझ गया वे मुझे पटा रहे थे।
मैं ब्रश करके कमरे में आ गया खिड़की पर विन्डो के प्लेटफॅार्म पर मैं टूथ ब्रश व पेस्ट रख रहा था थोड़ा कमर झुकी थी वे पीछे से आकर मेरे चूतड़ फिर सहलाने लगे मैं चुपचाप खड़ा रहा।
उनकी हिम्मत बढ़ी उन्होंने एक चूतड़ कसके मसक दिया फिर वे मेरे पीछे चिपक गए और मेरे बगल में चेहरा लाकर पूछने लगे मैं ये पेस्ट ले लूं।
वे मेरे ऊपर झुके थे हल्के हल्के धक्के लगा रहे थे उनका खड़ा होकर मेरे दोनों चूतड़ के बीच रगड़ रहा था।
वे पेस्ट लेकर उसका ढक्कन खोलने लगे मैं समझ गया वे बहाने से मेरी गांड से जितनी देर चिपकना चाहें चिपक रहे हैं।
उंगली पर पेस्ट लेकर वे फिर ढक्कन लगाने लगे फिर वहीं पेस्ट दांतों में लगा लिया दांतों की मालिश के साथ साथ वे मेरी गांड की भी मालिश कर रहे थे।
फिर मामा जी कुल्ला करने चले गए।
वे लौट कर आए तो मैं कमरे में दीवार की ओर मुंह करके खड़ा था हाथों से बारी बारी से धक्का दे रहा था।
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वे देखते रहे बोले कब तक करोगे।
मैंने कहा आप दोनों नहा लें तब मैं नहाऊंगा फिर ब्रेक फास्ट पर चलेंगे तब तक।
वे रोज दो तीन घंटे करते हो।
मैं जी हां जब तक फ्री रहता हूं।
मामा जी अच्छी आदत है।
वे फिर मेरे पास आ गए तभी तो तुम्हारी इतनी पतली कमर है।
मेरे पेट पर हाथ फेरते बोले बिल्कुल सपाट रखा है उस पर ऐसे मस्त कूल्हे।
वे फिर मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगे बोले जिनकी कमर पतली होती है उनके कूल्हे भी पिचके होते हैं और जिनके कूल्हे बड़े होते हैं उनकी कमर भी मेरी जैसी होती है।
और हो हो कर हंसने लगे तुम्हारे गाल भी मेरे जैसे नहीं।
वे मेरे गालों पर भी इस बहाने हाथ फेरने लगे।
मैंने कहा मामा जी आप थके हुए हैं रात में ठीक से सो नहीं पाए दिन भर काम में लगे रहेंगे थोड़ा रेस्ट ले लें।
मामा जी तो तुम वह सारी नौटंकी देख रहे थे।
मैं मुस्करा कर रह गया।
अब वे असली बात पर आए क्या तुमने कभी करवाई है।
मैं मामा जी अब मैं एडल्ट हूं अफसर हूं तगड़ा हूं अब मेरी कौन मारेगा।
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मामा जी अभी नहीं यार कभी पहले।
मैं हां माशूकी की उमर में दोस्तों के साथ करता करवाता था कुछ पड़ोस के अंकल चाचा मामा ने मारी उन्होंने गांड मराना व मारना सिखाया उनके लंड तब मेरे को भयंकर लगते थे मरवाने में गांड फट जाती थी कभी कभी दिन में दो बार मराना पड़ती थी वह भी अलग अलग लौंडों से।
मेरे मुख से अनजाने में सच बात निकल गई मैं फंस गया।
मामा जी तो उन दोस्तों से अब नहीं करवाते।
मैं मैं जहाँ पढ़ा वह शहर छूट गया कालेज का शहर भी छूट गया अब नई जगह हूं दोस्त जाने कहां हैं बहुत सारे दोस्तों की शादी हो गई सब मस्त हैं ऐसे ही कभी मीटिंग व पार्टी में मिलते हैं बाकी बहुत सारे न जाने कहां हैं उनसे कोई सम्पर्क नहीं अब किसी से नहीं करता करवाता।
मामा जी इसका मतलब खूब सारे दोस्तों से करवाई मेरे से भी हो जाए।
मैं मामा जी अब बहुत दिनों से नहीं कराई।
मामा जी आखिरी बार कब।
मैं यही कोई चार पांच साल पहले जब मैं अट्ठारह उन्नीस का रहा होऊंगा बी एस सी में पढ़ता था हम पांच लड़के थे एक डिबेट में शामिल होने ग्वालियर गए थे वहां रात को रुके थे दिसम्बर का महीना था सब एक साथ सोए तो वहीं एक दोस्त ने मेरी रात को मार दी मैं औंधा लेटा था कि उसने मेरी गांड में लंड पेल दिया मैं अचानक लंड गांड में घुसने से चिल्ला पड़ा आ आ आ ब स तब तक उसने पूरा पेल दिया फिर उसके बाद एक दूसरे लौंडे ने भी उसके बाद मारी मेरे साथी दूसरे चिकने लौंडे की दूसरा बड़ा लड़का मार रहा था।
मामा जी बड़े किस्मत वाले थे वे जिन्हें तुम जैसे नमकीन की मारने को मिली तो एक बार मेरे से भी हो सकती है।
और मामा जी ने मेरे अंडरवीयर में हाथ डाल दिया।
वे मेरी गांड में उंगली करने लगे मैं विरोध नहीं कर पाया उन्होंने मेरा अंडरवियर नीचे खिसका दिया।
हालांकि मैं उनसे तगड़ा था पर खड़ा रह गया वे मेरे पर हावी हो गए उन्होंने फिर से मेरा मुंह दीवाल की ओर कर दिया और अपने लंड में थूक लगाने लगे फिर एक उंगली अपने मुंह में डाल कर निकाली और वह थूक से भीगी उंगली मेरी गांड में डाल दी और उसे गोल गोल घुमाने लगे।
फिर उन्हें तेल की शीशी दिखाई दी तो वे लपक कर उठा लाए और अपनी उंगलियों पर डाल कर चुपड़ने लगे फिर तेल चुपड़ी दो उंगलियाँ मेरी गांड में डाल दी उन्हें घुमाने लगे फिर आगे पीछे करने लगे।
अब मामाजी बोले अब ढीली हो गई।
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उन्होंने तेल भीगा अपना लंड मेरी गांड पर टिकाया बोले डाल रहा हूं ढीली रखना कसना नहीं बिल्कुल परेशानी नहीं होगी मेरा भी मजा देखो घबराओ मत लगेगी नहीं।
वे मुझे नए अनचुदे लौंडे की तरह समझा रहे थे जो पहली बार लंड का मजा ले रहा हो जबकि मैं पुराना खिलाड़ी था मेरी गांड लंड पिलवाने को लपलपा रही थी उसे वाकई बहुत दिन बाद कोई मारने वाला मिला था।
उन्होंने लंड गांड पर टिका कर धक्का दिया सुपारा अंदर घुस गया था मेरे मुख से हल्की चीख निकली उम्म्ह अहह हय याह।
वे बोले ज्यादा लग रही है।
मैंने इन्कार में सिर हिलाया तो वे बोले तो पूरा पेल दूं।
अपनी गांड की एक जोर दार ठांप से मैंने पीछे धक्का दिया वे पहले तो एकदम अचरज में पड़ गए फिर मुस्करा उठे शाबाश तुम यार वाकई मराना जानते हो लंड का मजा लेना जानते हो तुम्हारा वह दोस्त अनिल तो बहुत नखरे करता है।
उन्होंने एक जोरदार धक्के के साथ पूरा पेल दिया अब पूरा लंड जड़ तक मेरी गांड में था उन्होंने मेरी पीठ के पीछे से अपनी दोनों बांहें कन्धों के नीचे से निकाल कर मेरे कन्धे पकड़ लिए अब वे जोरदार तरीके से दे दनादन दे दनादन चिपट गए।
वे फिर बोले लग तो नहीं रही।
मैंने उनका जवाब गांड चला कर उसे बार बार ढीली टाइट ढीली टाइट करके दिया।
मुझे बहुत दिनों बाद लंड का मजा मिला था इस शकरकंदी के स्वाद के लिए दस बारह दिन से अनिल को पटा रहा था पर साला तैयार नहीं हो रहा था बहाने बाजी कर रहा था।
वे एक डेढ़ घंटे पहले ही अनिल की मार चुके थे अतः थके हुए थे जल्दी ही हांफने लगे मोटे थे ज्यादा दम नहीं थी उनकी सांस जोर जोर से चलने लगा हू हू हू ढीले पड़ने लगे।
उनके धक्के धीमे हो गए मुझे गांड में पता लग रहा था कि अब लंड में वह कड़क नहीं रह गई।
पर मामाजी छोड़ना भी नहीं चाहते थे।
मैं गांड से धक्के लगा रहा था तो वे बोले थोड़ा ठहर जाओ।
जबकि मेरे दोस्त मारते समय उत्साह दिलाते थे हां और जोर से बहुत अच्छे।
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वे बोले यार लेट जाओ।
उन्होंने लंड निकाल लिया और अलग हो गए।
मैं वहीं फर्श पर लेट गया।
तब तक अनिल नहा कर कमरे मे आ गया मैंने उसकी गांड मराई छुप कर देखी थी वह सामने साफ साफ देख रहा था।
मामाजी मेरे ऊपर चढ़ बैठे उन्होंने फिर से तेल लगा कर लंड पेला अभी उनका पानी नहीं निकला था पर वे ढीले दिख रहे थे लंड भी ढीला पड़ गया था।
जैसे तैसे जोर लगा कर मामाजी ने मेरी गांड में डाला और मेरे ही ऊपर पसर गए उनका पानी छूट गया।
थोड़ी देर में वे अलग हो गए अनिल तौलिया लपेटे खड़ा था तौलिये में से उसका तना हथियार दिख रहा था।
मैंने कहा तू भी यार कर ले।
वह बोला मैं रगड़ दूंगा तो छिल जाएगी।
मैं बोला करके देख।
मामा जी ने उसका तौलिया निकाल दिया और कहा अनिल बातें देता रहेगा या कुछ करेगा भी।
उसका खड़ा लंड उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था।
मामा जी ने उसे मेरी जांघों पर बिठा दिया नखरे नहीं पेल दे ये तैयार है और तू बहाने कर रहा है।
उसने तेल की शीशी उठाई लंड पर चुपड़ा और लंड को मेरी तड़पती गांड पर टिका दिया मामा जी के मारने के बाद गांड असंतुष्ट रह गई थी प्यास और भड़क गई थी।
अनिल ने धक्का दिया लंड पेला मैंने फिर गांड ऊपर को उचकाई आधा लंड अंदर था।
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वो बोला मेरे साथ स्मार्टनेस नहीं चलेगी अभी कसके रगड़ दूंगा तो फड़फड़ाओगे तीन दिन तक दर्द करेगी फिर मत कहना।
मैंने कहा तू दम लगा ले।
वह बोला अच्छा मुझे चुनौती दे रहे हो।
मामा जी ने भी उत्साह भरा रगड़ दे देखें पूरा दम लगा दे।
वे अपने को हारा हुआ समझ रहे थे बोले पेल दे।
उसने पूरा अंदर कर दिया मैं मुस्करा रहा था वह शुरू हो गया अंदर बाहर अंदर बाहर करने लगा पूरी ताकत से वो मेरी गांड में लंड पेल रहा था मुझे मजा आ रहा था वह पूरे दम से रगड़ रहा था मुझे मजा आ रहा था।
आखिर मैं उससे अपनी मारने की दस बारह दिन से उससे कह रहा था आज मामा जी के प्रेशर में वो मेरी गांड मारने में पूरा दम लगा रहा था जल्दी जल्दी धक्के दे रहा था।
मैंने कहा थोड़ा ठहर जा।
तो बोला फट गई मेरे से अच्छे अच्छे घबराते हैं।
मैंने कहा थोड़ा ठहर जा तू भी तो मजा ले इतनी जल्दी हड़बड़ी क्यों मचाए है।
उसने एक दो धक्के और दिए और झड़ गया उसका जल्दी ही पानी निकल गया लस्त होकर लंड निकाल कर या ढीला लंड अपने आप ही निकल गया वह मेरे बगल में लेट गया।
मामा जी बोले अब इनकी बारी है अनिल तैयार हो जा।
अनिल मामाजी की ओर मुंह बना कर देखने लगा।
मैंने मामा जी से कहा अगर अनिल की इच्छा नहीं तो मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा इसने दोस्ती में मेरी मार ली तो कोई बात नहीं।
मामा जी उखड़ गए वाह कोई बात कैसे नहीं तुमने दो लोगों से कराई मजा दिया वह क्यों नहीं कराएगा उसे कराना पड़ेगी।
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अनिल से मामाजी ने कहा जल्दी औंधा हो जा नखरे नहीं।
मामा जी के कहने से अनिल औंधा लेट गया मैं उस पर बैठ गया।
तेल की शीशी उन दोनों ने मेरी गांड में लगा कर और अपने अपने लंड पर चुपड़ चुपड़ कर खाली कर दी थी अतः मैंने थूक लगा कर लंड उसकी गांड पर टिकाया वह गांड सिकोड़ने लगा मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ अलग किए फिर एक हाथ से थूक लिपटा लंड उसकी गांड पर टिकाया थोड़ा अंदर डाला फिर दोनों हाथों से उसके चूतड़ मुट्ठी से पकड़ कर अलग किए और लंड पेला।
अब मेरा लंड साफ साफ उसकी गांड में जाता दिख रहा था वह गांड हिलाना तो चाहता था पर हिला नहीं पा रहा था बार बार टाईट कर रहा था मुझे लंड पेलने में बहुत दिक्कत आई ज्यादा ताकत लगानी पड़ी।
पर जब एक बार घुस गया तो गांड सिकोड़ने ढीली करने का कोई मतलब नहीं रह गया।
वह फिर चिल्लाने लगा आ आ ब स लग रही लग रही है तेरा बहुत मोटा है।
मैंने कहा यार बार बार गलत समय गांड टाइट करेगा तो लगेगी ही मेरी तो बड़ी बेरहमी से मारी अब बहाने बाजी कर रहे हैं।
मामा जी मुस्कराए यह बदमाशी करता है तुम लगे रहो क्या पहली बार करा रहे हो नखरे मत करो टांगें चौड़ी करो थोड़ी ढीली करो तुम्हें भी मजा आएगा।
मैं लंड उसकी गांड में डाले चुपचाप उसके ऊपर लेटा रहा वह गांड हिला रहा था।
फिर बोला कब तक डाले रहोगे।
मैंने कहा जब तक तुम चालाकी करोगे चुपचाप ढीली करके लेटो तो जल्दी निबट जाऊंगा वरना डाले रहूंगा।
वह थोड़ी देर लेटा रहा फिर चूतड़ दबाने लगा हिलने लगा।
मैंने कहा यार मराना है ही फिर नखरे उठा पटक क्यों लंड गांड में पिला है ही।
वह बोला नहीं और लोग जब मारते हैं तो गांड हिलाता हूं नखरे करता हूं तो उन्हें मजा आता है वे जल्दी झड़ जाते हैं तुम तो पंदरह मिनट से गांड में लंड पेले हो न झटके दे रहे न झड़ रहे हो।
मैंने कहा आज मैं बिना करे नहीं उठूंगा गांड ढीली कर अब तो मान जा मेरा भैया मेरा दोस्त।
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वह थोड़ा पिघला उसने टांगें चौड़ी कर लीं यह उसके रिलैक्स होने का संकेत था गांड भी ढीली की तब मैं शुरू हुआ।
मैं बहुत धीरे धीरे धक्के लगा रहा था पूछा लग तो नहीं रही।
वह मुस्कराया बोला गांड मराने में थोड़ी बहुत तो लगती ही है चलता है।
मैंने कहा लगे तो बताना।
उसने ढीली कर ली मैं धक्के लगा रहा था।
जाने क्या हुआ वह फिर गलत समय गांड चलाने लगा जल्दी जल्दी बार बार टाइट ढीली टाइट ढीली करने लगा फिर गांड बुरी तरह एकदम टाइट कर ली उसने पूरी कोशिश की कि गांड में घुसा लंड उसके जोर से बाहर निकल जाए।
मैं दोनों हाथों से उसकी कमर को जकड़े उससे चिपका रहा लंड पूरी ताकत से अंदर पेले रहा निकलने नहीं दिया।
मैंने अपनी सांस रोक ली धक्के रोक दिए लंड पेले चुपचाप उसके ऊपर लेटा रहा।
वह करीब तीन मिनट बाद बोला झड़े नहीं।
मैंने कहा अब तू थक गया अब मैं चालू होता हूं।
मैंने धक्के शुरू किए अंदर बाहर अंदर बाहर वह उनको अनुभव करता रहा।
मेरी कमर की गति देख कर मामा जी बोले ये हैं गांड फाड़ू झटके।
उससे पूछा लग तो नहीं रही।
वह मुस्करा दिया।
अब उसकी ढीली हो गई थी मैं मजा ले रहा था फिर मेरा पानी छूट गया हम अलग हुए।
हम दोनों कुछ देर लेटे रहे।
वह बोला तुम बड़ी देर लगे रहे मुझे एकदम भड़भड़ी छूटती है चालू हुआ तो बीच में रूक नहीं पाता।
फिर हम उठे मामा जी से कहा आप पहले नहा लो हम फिर नहाएंगे देर हो गई ध्यान ही न रहा।
मामा जी मुस्करा रहे थे तुमने तो कमाल कर दिया लगभग पौन घंटा उसकी में पेले रहे अनिल की सारी अकड़ निकाल दी उसकी सारी चालाकी धरी की धरी रह गई मुझे तो हर बार बहुत परेशान करता है ठीक से निपट ही नहीं पाता।
मैंने अनिल का एक किस लेकर कहा नहीं मामा जी पहले जरूर नखरे किए पर बाद में तो बहुत कोओपरेट किया हमने मजा किया वह मेरा इम्तहान ले रहा था।
मामा जी बोले इम्तिहान बहुत कड़ा लिया क्यों अनिल ये पास हुए या नहीं।
अनिल मुस्करा दिया।
हम लोग तैयार होने में हालांकि लेट हो गए पर जब ब्रेक फास्ट के लिए मेस में गए तो नाश्ता चल रहा था समापन दौर था।

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