वाइफ का नया योगा ट्रेनर : Antarvasana
- Kamvasna
- Aug 14
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Antarvasana का मतलब सिर्फ शारीरिक भूख नहीं होती, बल्कि कभी-कभी ये एक ऐसा मनोवैज्ञानिक खेल बन जाती है जिसमें इंसान अपनी ही पत्नी को किसी और के साथ देखकर एक अजीब सा सुख पाता है। ये कहानी मेरी अपनी नई-नई शादीशुदा ज़िंदगी की है, जिसमें मेरी पत्नी राधिका का नया योगा ट्रेनर आया और मेरी रसीली बीबी के साथ जो कुछ हुआ, उसने मेरी पूरी दुनिया बदल कर रख दी। ये मेरी अपनी सच्ची घटना है, जिसे मैं हमेशा अपने सीने में दबाए रखना चाहता था, लेकिन आज मैं अपनी इस Antarvasna को आप सबके सामने खोल रहा हूँ। मेरा नाम अर्जुन है और मैं गुड़गांव में रहता हूँ, मेरी उम्र 29 साल है और मेरी शादी राधिका से हुए अभी सिर्फ छह महीने ही हुए थे। राधिका उम्र में मुझसे तीन साल छोटी है, यानी 26 साल की, और वो दिखने में इतनी खूबसूरत और रसीली है कि उसे देखकर कोई भी मर्द पागल हो जाए। उसका रंग दूध जैसा गोरा, बाल घने और काले, और जिस्म इतना सुडौल कि हर अंग से जवानी टपकती रहती थी।
शादी के बाद से ही मैंने नोटिस किया था कि राधिका को अपनी फिटनेस का बहुत शौक है। वो रोज़ सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज़ करती और हेल्दी खाना खाती। मैं उसकी इस आदत से बहुत खुश था, क्योंकि उसकी बॉडी दिन-ब-दिन और भी निखरती जा रही थी। उसकी कमर पतली, कूल्हे गोल-मटोल और उसके स्तन उतने ही भरे हुए थे जितने शादी के पहले दिन थे, बल्कि अब उनमें और भी उभार आ गया था। फिर एक दिन राधिका ने मुझसे कहा, |अर्जुन, मैंने अपने लिए एक योगा क्लास ज्वाइन की है, ट्रेनर का नाम विक्रांत है, बहुत अच्छा सिखाते हैं।| मैंने कहा, |योगा क्लास क्यों, घर पर भी तो एक्सरसाइज़ करती हो?| उसने कहा, |घर पर वो बात नहीं जो ग्रुप में होती है, और विक्रांत सर बहुत अच्छे से हर पोस्चर सिखाते हैं, पर्सनल ट्रेनिंग भी देते हैं।| पर्सनल ट्रेनिंग शब्द सुनकर मेरे दिमाग में एक हल्की सी घंटी बजी, लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और हाँ कर दी।
अगले हफ्ते से राधिका रोज़ सुबह योगा क्लास जाने लगी। वो वहाँ से लौटकर बहुत खुश रहती और विक्रांत सर की तारीफें करती रहती। वो कहती, |पता है अर्जुन, विक्रांत सर ने आज मुझे नया स्ट्रेच सिखाया, मेरी कमर का दर्द बिल्कुल ठीक हो गया।| मैं उसकी खुशी में खुश था, लेकिन एक दिन मुझे शक हुआ जब वो योगा से लौटी तो उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी और वो थोड़ी शरमाई हुई लग रही थी। मैंने पूछा, |क्या हुआ, इतनी खुश क्यों हो?| उसने कहा, |कुछ नहीं, बस विक्रांत सर ने कहा कि मेरी बॉडी अब बहुत फ्लेक्सिबल हो गई है, और मैंने आज बहुत अच्छा परफॉर्म किया।| मैंने हँसते हुए कहा, |तुम्हारा ट्रेनर तो तुम्हारी बहुत तारीफ करता है।| वो शरमाकर बोली, |हाँ, वो बहुत अच्छे हैं।| उसके इस अंदाज़ ने मेरे दिमाग में कई सवाल खड़े कर दिए और मैं सोचने लगा कि आखिर योगा क्लास में ऐसा क्या होता है जो मेरी बीबी इतना शरमा रही है।
फिर एक रविवार की सुबह राधिका ने मुझसे कहा, |अर्जुन, आज विक्रांत सर हमारे घर आ रहे हैं, क्योंकि क्लास में भीड़ ज्यादा है और वो मुझे पर्सनल सेशन देना चाहते हैं।| मैंने हैरानी से पूछा, |घर पर?| उसने कहा, |हाँ, उन्होंने कहा कि घर का माहौल ज्यादा आरामदायक होता है और योगा के लिए अच्छा रहता है।| मैंने मन मारकर हाँ कह दी और सोचा कि चलो देखता हूँ ये विक्रांत सर कौन हैं। करीब 10 बजे डोरबेल बजी और मैंने दरवाज़ा खोला। सामने एक लंबा-चौड़ा, मज़बूत बदन वाला आदमी खड़ा था, जिसकी उम्र करीब 34-35 साल रही होगी। उसने टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी जिससे उसकी बॉडी के सारे मसल्स साफ दिख रहे थे। उसकी बाहें मोटी और सीना चौड़ा था, और उसके चेहरे पर एक आत्मविश्वास भरी मुस्कान थी। उसने मुझसे हाथ मिलाया और कहा, |हैलो, मैं विक्रांत, राधिका का योगा ट्रेनर।| मैंने भी उसे अंदर बुलाया और कहा, |आइए, अर्जुन, राधिका का हसबैंड।| राधिका भी वहाँ आ गई और उसने विक्रांत का बड़े प्यार से स्वागत किया। उसने योगा पैंट और स्पोर्ट्स ब्रा पहनी हुई थी, और उसकी बॉडी उस टाइट कपड़ों में और भी ज्यादा उभर कर सामने आ रही थी।
विक्रांत ने ड्राइंग रूम में ही योगा मैट बिछाई और राधिका के साथ सेशन शुरू किया। मैं वहीं सोफे पर बैठा हुआ सब देख रहा था। शुरू में तो सब सामान्य लग रहा था, वो दोनों अलग-अलग आसन कर रहे थे और विक्रांत राधिका की पोस्चर सुधार रहा था। लेकिन धीरे-धीरे मैंने गौर किया कि विक्रांत के हाथ राधिका के शरीर पर जरूरत से ज्यादा देर तक रह रहे थे। वो उसकी कमर को पकड़कर सीधा करता, उसकी जाँघों को छूता, और उसके कंधों को सहलाता। राधिका भी उसके स्पर्श से बिल्कुल भी नहीं हिचक रही थी, बल्कि उसके चेहरे पर एक अलग सी शांति और खुशी थी। जब वो नीचे झुकती तो उसके स्तनों की गहरी दरार साफ दिखाई देती और विक्रांत की नज़रें उसी पर टिकी रहतीं। मुझे अंदर ही अंदर गुस्सा तो आ रहा था, लेकिन साथ ही एक अजीब सी उत्तेजना भी महसूस हो रही थी। मेरी बीबी इतनी रसीली और खूबसूरत है कि किसी भी मर्द का उसे देखकर पानी छूट जाए, और यही बात मुझे अंदर से जला भी रही थी और मज़ा भी दे रही थी।
सेशन खत्म होने के बाद विक्रांत ने राधिका को कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ बताईं और कहा कि वो अगले रविवार भी आएगा। राधिका ने उसे चाय पीने के लिए रोका और वो दोनों बातें करने लगे। मैंने देखा कि राधिका की बॉडी पर पसीने की पतली सी परत जमी हुई थी जो उसे और भी कामुक बना रही थी। उसके स्पोर्ट्स ब्रा से उसके स्तनों का उभार इतना साफ दिख रहा था कि मैं खुद उसे घूरने से नहीं रोक पा रहा था। विक्रांत जाते-जाते राधिका के कंधे पर हाथ रखकर बोला, |राधिका, तुम्हारी बॉडी बहुत अच्छी है, बस थोड़ी और मेहनत करो, और भी निखर जाओगी।| राधिका शरमाकर मुस्कुराई और बोली, |थैंक यू सर।| फिर वो चला गया और मैं और राधिका अकेले रह गए।
उस रात राधिका बेड पर मेरे पास आई और बोली, |अर्जुन, आज तुम मुझे कुछ अलग सा महसूस हो रहा है, शायद योगा की वजह से मेरी बॉडी में बहुत एनर्जी है।| मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और कहा, |तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो।| फिर हमने प्यार किया, लेकिन उस रात मेरे दिमाग में बार-बार विक्रांत के हाथ राधिका की कमर पर दिख रहे थे और मुझे उस ख्याल से अजीब सी उत्तेजना हो रही थी। मैंने राधिका को ज़ोर-ज़ोर से चोदा और उसके शरीर से निकलने वाली आवाज़ें मुझे और भी पागल कर रही थीं। उसके मुँह से निकल रहा था, |आआह्ह्ह्ह… अर्जुन… और ज़ोर से…| लेकिन मैं जानता था कि मेरी अन्तर्वासना अब सिर्फ राधिका तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उसमें विक्रांत का ख्याल भी शामिल हो गया है।
अगले रविवार फिर विक्रांत आया और इस बार मैंने जानबूझकर उन्हें ज्यादा अकेला छोड़ दिया। मैंने कहा, |मुझे थोड़ा बाज़ार से कुछ सामान लाना है, तुम लोग सेशन करते रहो।| राधिका ने कहा, |ठीक है, जल्दी आना।| मैं बाहर गया, लेकिन दरवाज़े के पास ही रुक गया और अंदर से आती आवाज़ें सुनने लगा। पहले तो कुछ देर तक सिर्फ योगा के निर्देश सुनाई दिए, लेकिन फिर आवाज़ें बदल गईं। मुझे राधिका की हल्की सिसकारियाँ सुनाई दीं, |उह्ह्ह्ह… विक्रांत…| फिर विक्रांत की धीमी आवाज़, |राधिका, तुम्हारी बॉडी बहुत गर्म है, मैं खुद को रोक नहीं पा रहा।| ये सुनते ही मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा और मैंने धीरे से दरवाज़ा खोलकर अंदर झाँका।
अंदर का नज़ारा देखकर मेरी साँसें थम गईं। विक्रांत राधिका को सोफे पर लिटाकर उसके ऊपर झुका हुआ था और उसके होंठों को चूम रहा था। राधिका की स्पोर्ट्स ब्रा उतार दी गई थी और विक्रांत एक हाथ से उसके नंगे स्तनों को मसल रहा था। राधिका उसके बालों में हाथ फेर रही थी और उसकी आवाज़ें गहरी होती जा रही थीं। मैं दरवाज़े के पीछे छुपकर सब देख रहा था और मेरा लंड मेरी पैंट में तन गया था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि मुझे गुस्सा आए या खुशी, लेकिन मैं अंदर जाकर उन्हें रोकना नहीं चाहता था। शायद यही मेरी अन्तर्वासना थी, कि मैं अपनी रसीली बीबी को किसी और मर्द के साथ देखकर सुख पा रहा था।
विक्रांत ने राधिका की योगा पैंट उतार दी और उसकी पैंटी भी खींच ली। अब राधिका पूरी तरह से नंगी थी और विक्रांत उसके शरीर को चूम रहा था। वो उसके स्तनों से लेकर पेट तक और फिर उसकी जाँघों के बीच अपनी ज़बान घुमा रहा था। राधिका की चुत से रस बह रहा था और वो उसे चाट रहा था। राधिका ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी, |आआअह्ह्ह्ह… विक्रांत… मुझे और चाहिए…| विक्रांत ने उसकी टाँगों को फैलाकर अपना लंड बाहर निकाला और उसकी चुत में डाल दिया। राधिका ज़ोर से चीखी और विक्रांत उसे पागलों की तरह चोदने लगा। मैं बाहर से देख रहा था कि मेरी बीबी किसी और के लंड से चुदाई करवा रही थी और उसके चेहरे पर जो संतोष था, वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था। विक्रांत उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर और गहराई से चोद रहा था और राधिका उसके हर एक धक्के पर जवाब दे रही थी।
फिर विक्रांत ने राधिका को पीछे से झुकाया और उसकी चुत में अपना लंड दोबारा डाल दिया। इस पोज़ीशन में राधिका की गांड उछल रही थी और उसके स्तन झूल रहे थे। विक्रांत उसकी कमर पकड़कर तेज़ी से चोद रहा था और राधिका के मुँह से सिर्फ अस्पष्ट आवाज़ें निकल रही थीं। मैंने देखा कि विक्रांत ने राधिका के बाल पकड़ लिए और उसे अपनी तरफ खींचकर और भी ज़ोर से चोदने लगा। थोड़ी देर बाद वो दोनों एक साथ झड़ गए और विक्रांत ने अपना सारा माल राधिका की चुत के अंदर छोड़ दिया। राधिका बेदम होकर सोफे पर गिर पड़ी और विक्रांत उसके बगल में लेट गया।
मैंने थोड़ी देर बाद दरवाज़े से आवाज़ की जैसे अभी-अभी आया हूँ। दोनों ने जल्दी से कपड़े पहन लिए। विक्रांत ने कहा, |अरे अर्जुन, आ गए, मैं तो सेशन खत्म करके जाने ही वाला था।| मैंने मुस्कुराते हुए कहा, |कोई बात नहीं, आते रहिए।| विक्रांत चला गया और राधिका मेरी तरफ देखकर शरमा गई। उसके चेहरे पर अब भी एक अलग चमक थी और उसके शरीर से विक्रांत के पसीने की गंध आ रही थी। मैंने उसे गले लगा लिया और कहा, |मुझे सब पता है, और मुझे कोई शिकायत नहीं है।| राधिका ने हैरानी से मेरी तरफ देखा और मैंने उसे बताया कि मैंने उन्हें देखा था और मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि मुझे ये देखकर एक अलग ही आनंद आया। ये सुनकर राधिका की आँखों में पानी आ गया और वो मुझसे लिपट गई। उस रात हमने बहुत प्यार किया और राधिका ने मुझे बताया कि विक्रांत के साथ वो बहुत खुश है और मेरे साथ भी उसका प्यार कभी कम नहीं होगा।
उसके बाद तो ये सिलसिला आम हो गया। विक्रांत अकसर हमारे घर आता और राधिका के साथ योगा के बहाने चुदाई करता, और मैं कभी छुपकर देखता तो कभी सामने बैठकर उनका मज़ा लेता। राधिका की रसीली बॉडी अब और भी निखर गई थी और वो दोनों मर्दों का पूरा ध्यान रखती थी। मेरी अन्तर्वासना ने मुझे सिखाया कि प्यार और हवस का खेल बहुत गहरा होता है, और मैं अपनी बीबी को खुश देखकर ही खुश रहता था। विक्रांत भी अब मेरा अच्छा दोस्त बन गया था और हम तीनों का ये अनोखा रिश्ता अपनी पूरी रवानी में चल रहा था।
Antarvasana

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