शादी में दुल्हन की माँ स्वरा की प्यास बुझाई: Antarvasana Sex Story
- Kamvasna
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ये एक ऐसी Antarvasana है जो सिर्फ मेरे दिमाग में ही नहीं, बल्कि मेरे जिस्म के रोम-रोम में बसी हुई है। ये मेरी अपनी ज़िंदगी की वो सच्ची कहानी है जिसे मैंने हमेशा तहखाने में बंद एक तिजोरी की तरह छुपाकर रखा, जिसकी चाबी सिर्फ मेरे पास थी, लेकिन अब लगता है वक्त आ गया है कि इस राज़ को ज़ुबान दूँ। ये कोई बनावटी किस्सा नहीं, बल्कि एक सच्ची Sex Story है जो हकीकत में घटी, और जिसका हर लम्हा आज भी मेरी यादों में तरोताज़ा है। ये एक ऐसी अज़नबी औरत की कहानी है जिसने एक ही रात में मेरी रूह और जिस्म दोनों को झकझोर कर रख दिया।
मेरा नाम विवान है, उम्र 28 साल, और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। पेशे से मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। दिल्ली जैसे शहर में नौकरी, जिम, और कभी-कभार दोस्तों के साथ पार्टी, बस यही मेरी ज़िंदगी थी। कद-काठी अच्छी है, जिम जाने का शौक है तो बॉडी काफी टोंड है। चौड़ी छाती, मज़बूत बाज़ू, और पेट पर हल्के-हल्के एब्स भी उभर आए हैं। शक्ल-सूरत से मैं कोई हीरो तो नहीं, लेकिन लड़कियाँ अक्सर कहती हैं कि आँखों में एक शरारत है और मुस्कान में एक ऐसी कशिश जो सामने वाले को खींच ले। शायद यही वजह थी कि उस रात जो हुआ, वो हो सका।
ये बात पिछले साल दिसंबर की है। ठंड अपने पूरे शबाब पर थी। मेरे बचपन का दोस्त राघव, जिसके साथ मैंने स्कूल और कॉलेज के दिन बिताए थे, उसकी छोटी बहन मीरा की शादी तय हुई थी। राघव और मैं एक ही सोसाइटी में रहते थे, हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी। जब उसने मुझे शादी का कार्ड दिया, तो मैंने सोचा था कि चलो, पुराने दिन याद आ जाएंगे, कुछ दोस्तों से मिल लूंगा, और अच्छा खाना खाकर वापस आ जाऊंगा। लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था।
शादी का आयोजन जयपुर के बाहरी इलाके में एक बहुत बड़े और शानदार फार्महाउस में रखा गया था। जयपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर, पहाड़ियों के बीच बसा वो फार्महाउस किसी महल से कम नहीं था। चारों तरफ हरियाली, फव्वारे, और मार्बल की बारीक नक्काशी। मैं दिल्ली से अपनी कार लेकर अकेला ही निकला था। करीब पाँच घंटे की ड्राइव के बाद जब मैं वहाँ पहुँचा, तो शाम ढलने लगी थी। पूरे फार्महाउस को दुल्हन की तरह सजाया गया था। हर तरफ फूलों की महक, गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछी हुई थीं। लाइटिंग ऐसी थी कि पूरा माहौल किसी जादुई दुनिया का हिस्सा लग रहा था।
गाड़ी पार्क करके जैसे ही मैं अंदर दाखिल हुआ, मुझे राघव मिल गया। उसने मुझे गले लगाकर कहा, |विवान! तू आ गया! सोचा था तू देर करेगा।| मैंने हँसकर कहा, |तेरी बहन की शादी है, कैसे नहीं आता?| राघव शादी की तैयारियों में इतना व्यस्त था कि ज़्यादा बात नहीं कर पाया। उसने मुझसे कहा, |तू जा, फ्रेश हो जा, तेरा रूम तैयार है। शाम को हल्दी की रस्म है, फिर संगीत, फिर डिनर। बस मज़े कर।| मैंने उसे धन्यवाद कहा और अपना बैग लेकर गेस्ट रूम की तरफ चल दिया।
रूम बहुत खूबसूरत था। एक बड़ी सी खिड़की से पूरे बगीचे का नज़ारा दिखता था। मैंने फटाफट फ्रेश होकर कपड़े बदले। एक हल्की क्रीम कलर की शेरवानी पहनी जो मैंने खास इसी शादी के लिए सिलवाई थी। शीशे के सामने खड़े होकर जब मैंने खुद को देखा, तो लगा कि आज तो कुछ खास होने वाला है। एक अजीब सी बेचैनी और उम्मीद का मिश्रण मेरे अंदर उठ रहा था।
शाम के करीब 6 बजे मैं हल्दी की रस्म देखने के लिए लॉन में पहुँचा। वहाँ दोस्तों और रिश्तेदारों की भारी भीड़ थी। हर कोई मस्ती में झूम रहा था। ढोलक की थाप पर औरतें गाना गा रही थीं। पीले रंग की हल्दी हर किसी के चेहरे और कपड़ों पर लगी हुई थी। मैं एक कोने में खड़ा होकर ये सब देख रहा था कि अचानक मेरी नज़र दुल्हन मीरा पर पड़ी, और फिर उसके बगल में खड़ी एक औरत पर।
वो औरत मीरा के चेहरे पर हल्दी का लेप लगा रही थी। उसकी पीठ मेरी तरफ थी। पहली नज़र में ही लग रहा था कि ये कोई बहुत खास औरत है। उसने गहरे मैरून रंग की कांजीवरम साड़ी पहन रखी थी, जिसका पल्लू बड़ी खूबसूरती से सिर पर लिया हुआ था। जरी की कढ़ाई हल्की रोशनी में चमक रही थी। उसके हाथों में मेहंदी रची हुई थी और कलाइयों में सोने की चूड़ियाँ खनक रही थीं। उसके पैरों में पायल बंधी हुई थी जिसकी मीठी छन-छनाहट हवा में घुल रही थी।
मैं उसकी पीठ, उसकी कमर के घुमाव, और साड़ी के नीचे से झलकती उसकी गोरी कलाइयों को बस देखता ही रह गया। उसकी मौजूदगी में एक ऐसा आकर्षण था जो मुझे बेचैन कर रहा था। फिर अचानक, जैसे उसे मेरी निगाहों का एहसास हुआ, वो पलटी। और जब वो पलटी, तो मेरी साँसें थम सी गईं।
उसका चेहरा किसी संगमरमर की मूरत की तरह तराशा हुआ था। तीखी नाक, बड़ी-बड़ी बादामी आँखें जिनमें सुरमे की लकीरें और भी गहराई भर रही थीं, और होंठ जो हल्की सी लिपस्टिक से ऐसे सजे थे जैसे अभी-अभी अनार का दाना चूसा हो। उसका गोरापन ऐसा कि लगता था जैसे दूध में केसर घुला हो। माथे पर लाल बिंदी, माँग में सिंदूर, और गले में कुंदन का एक भारी सेट, जो उसकी खूबसूरती को और भी निखार रहा था।
उसकी उम्र का अंदाज़ा लगाना मुश्किल था। चेहरे पर परिपक्वता के निशान ज़रूर थे, लेकिन वो निशान उसकी खूबसूरती को कम नहीं कर रहे थे, बल्कि एक अलग ही किस्म का निखार दे रहे थे। उसकी आँखों के आसपास हल्की-हल्की महीन लकीरें थीं, लेकिन आँखों की चमक किसी 20 साल की लड़की जैसी ही थी। उसका जिस्म भरा हुआ था, लेकिन कसा हुआ। पेट बिल्कुल सपाट, लेकिन सीना इतना ऊँचा और तना हुआ कि लगता था साड़ी का ब्लाउज़ फट जाएगा। कूल्हों का उभार इतना शानदार कि साड़ी के पल्लू के बावजूद लुभावना लग रहा था।
जब उसकी नज़र मुझसे मिली, तो एक पल के लिए वो रुकी। उसने मुझे सिर से पाँव तक निहारा, जैसे मुझे तौल रही हो। फिर उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान तैर गई। वो मुस्कान ऐसी थी जैसे उसने मुझे पहचान लिया हो, या शायद मुझे अपनी ही किसी कहानी का किरदार समझ लिया हो। मैं वहीं ठिठक गया। मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई और पेट में हल्की सी गुदगुदी होने लगी।
मैंने तुरंत अपने पास खड़े अर्जुन से पूछा, जो राघव का कज़न था और मेरा भी अच्छा दोस्त था, |यार, वो सामने मैरून साड़ी में कौन है? दुल्हन के साथ जो खड़ी है?| अर्जुन ने मेरी तरफ देखा, फिर मेरी नज़रों की दिशा में देखा, और एक शरारती मुस्कान देते हुए बोला, |ओहो! तेरी नज़र तो बड़ी तेज़ है। वो? वो मीरा की माँ है, स्वरा आंटी।|
मैं चौंक गया। |क्या? माँ? तू मज़ाक कर रहा है न?| मैंने अविश्वास से पूछा। |हाँ भाई, बिल्कुल सच। स्वरा आंटी। दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं, पॉलिटिकल साइंस पढ़ाती हैं। उम्र 42 है लेकिन देख तो ऐसे रही हैं जैसे अभी-अभी 30 की हुई हों।| अर्जुन ने बताया। |और हाँ, एक बात और…| उसने आवाज़ धीमी की, |इनके पति, यानी राघव के पापा, का 5 साल पहले हार्ट अटैक से देहांत हो गया था। तब से अकेली ही हैं। बस मीरा और राघव हैं, और अब अपनी प्रोफेसर की नौकरी।|
ये सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल मच गई। एक तरफ तो ये एहसास कि वो राघव की माँ है, यानी मेरे दोस्त की माँ, जो मुझे थोड़ा सा गिल्टी फील करवा रहा था। लेकिन दूसरी तरफ, उसका अकेलापन, उसकी वो अदा, और वो शानदार जिस्म… मेरे दिमाग ने गिल्टी को पीछे धकेल दिया और बस उसे पाने की एक जंगली ख्वाहिश पैदा हो गई। मैंने सोचा, 42 की उम्र, अकेली, और इतनी खूबसूरत… ये तो प्रकृति का अपने आप में एक विरोधाभास है। और आज की रात, ये शादी का माहौल, शायद मेरे लिए एक मौका लेकर आया है।
हल्दी की रस्म खत्म होने के बाद सब लोग संगीत के लिए तैयार होने लगे। मैंने तय कर लिया कि आज रात स्वरा को इंप्रेस करना है। मैं बार-बार अपनी नज़रें उसकी तरफ घुमाता। जब वो मेहमानों के साथ हँसती, तो उसकी हँसी की आवाज़ सीधे मेरे कानों में पड़ती। जब वो चलती, तो उसकी पायल की आवाज़ मेरे दिल की धड़कन बन जाती। मैंने देखा कि वो भी बीच-बीच में मेरी तरफ देख रही है। हो सकता है मेरा वहम हो, लेकिन मुझे लग रहा था कि उसकी आँखों में भी एक सवाल है, एक जिज्ञासा है।
संगीत सेरेमनी शुरू होने में थोड़ी देर थी। मैंने सोचा क्यों न बातचीत का मौका बनाया जाए। मैं जानबूझकर उस एरिया में गया जहाँ पानी और शरबत की व्यवस्था थी। वहाँ मैंने स्वरा को एक गिलास में ठंडाई लेते देखा। मैं भी वहाँ पहुँच गया। |नमस्ते, आंटी जी|, मैंने हाथ जोड़कर कहा, लेकिन मेरी आवाज़ में ‘आंटी’ शब्द के लिए थोड़ा सा व्यंग्य था।
वो पलटीं और मुझे देखकर मुस्कुराईं। |नमस्ते। आप हैं…? | उनकी आवाज़ शहद से भी मीठी थी, लेकिन उसमें एक अजीब सी कमान थी। |मैं विवान हूँ, राघव का बचपन का दोस्त। दिल्ली से हूँ।| मैंने अपना परिचय दिया। |अच्छा, विवान! राघव ने आपका ज़िक्र किया था। कह रहा था कि उसका सबसे शैतान दोस्त आ रहा है।| उन्होंने चुटकी ली। मैं हँस पड़ा। |शैतान? मैं? नहीं तो, बिल्कुल सीधा-सादा हूँ। बस, आंटी जी, कभी-कभी मौका मिल जाए तो थोड़ी मस्ती कर लेता हूँ।|
मैंने जानबूझकर ‘आंटी जी’ पर ज़ोर दिया। उन्होंने अपनी भौंहें थोड़ी सिकोड़ीं। |आंटी जी मत बुलाओ। बहुत बूढ़ा फील करवाते हो। स्वरा कहो, या स्वरा जी।| मेरा दिल जोर से धड़का। ये पहला संकेत था कि वो खुद को मुझसे दूर या बड़ा नहीं मानना चाहतीं। |जैसी आपकी मर्ज़ी, स्वरा जी।| मैंने कहा और उनकी आँखों में देखा। उनकी आँखें पल भर के लिए झुकीं, फिर उठीं।
|अच्छा, मुझे जाना होगा। मीरा को तैयार करना है।| वो जाने लगीं। |ज़रूर, लेकिन एक बात कहूँ?| मैंने रोका। वो मुड़कर खड़ी हो गईं। |आपकी साड़ी बहुत खूबसूरत है, लेकिन उससे भी ज़्यादा खूबसूरत आप लग रही हैं।| ये तारीफ थोड़ी गैर-परंपरागत थी, खासकर दोस्त की माँ के लिए। वो एक पल के लिए सन्न रह गईं। फिर उनके चेहरे पर लाली दौड़ गई। उन्होंने अपने होंठ दबाए, और बिना कुछ कहे, बस एक गहरी नज़र मुझ पर डाली और चली गईं।
उस नज़र ने मेरे अंदर आग लगा दी। मैं समझ गया कि तीर कमान से निकल चुका है। अब बस इंतज़ार था तो रात के गहराने का।
संगीत सेरेमनी शुरू हुई। डीजे ने एक से बढ़कर एक गाने बजाने शुरू किए। माहौल पूरी तरह से रंगीन हो गया। सब लोग डांस फ्लोर पर झूम रहे थे। मैं अपने दोस्तों के साथ डांस कर रहा था, लेकिन मेरी नज़रें लगातार स्वरा को ढूँढ रही थीं। वो कुछ औरतों के साथ बैठकर गप्पें मार रही थीं और तालियाँ बजा रही थीं।
अचानक डीजे ने एक पुराना रोमांटिक गाना बजाया, ‘पहला नशा’। मैंने मौका देखा और सीधे स्वरा के पास पहुँच गया। |स्वरा जी, क्या मुझे ये डांस मिल सकता है?| मैंने हाथ बढ़ाते हुए कहा। उनकी सहेलियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ीं। |ले लो स्वरा, जवान लड़का पूछ रहा है, मना मत करना।| एक सहेली ने चिढ़ाया। स्वरा ने शरमाते हुए अपना हाथ मेरे हाथ में दे दिया।
डांस फ्लोर पर हम दोनों आमने-सामने थे। मैंने धीरे से अपना एक हाथ उनकी कमर पर रखा। उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया। उनका स्पर्श बेहद गर्म और कोमल था। हम धीरे-धीरे गाने की धुन पर झूमने लगे। इतने पास होने का एहसास खुद में एक नशा था। उनके इत्र की खुशबू, जिसमें चमेली और चंदन का मिश्रण था, मेरे नथुनों में भर गई। उनकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं, जो मेरे पूरे जिस्म में बिजली की तरह दौड़ जाती थीं।
|तुम बहुत अच्छा डांस करते हो, विवान|, उन्होंने धीरे से कहा। |सच तो ये है स्वरा जी, कि मैं डांस बहुत कम करता हूँ। बस, साथ अच्छा हो तो डांस अपने आप अच्छा हो जाता है।| मैंने जवाब दिया। वो मुस्कुरा दीं। हमारे जिस्म अब और करीब आ चुके थे। मेरी छाती उनके तने हुए सीने को छू रही थी। मैं महसूस कर सकता था कि उनके निप्पल सख्त होकर ब्लाउज़ से चुभ रहे हैं। ये एहसास मेरे लिए असहनीय रूप से उत्तेजक था।
गाने की धुन पर हम घूम रहे थे। मैंने अपना हाथ उनकी कमर से थोड़ा सा नीचे, उनके कूल्हों के उभार पर सरका दिया। वो एक पल के लिए ठिठकीं, लेकिन फिर सामान्य हो गईं। उन्होंने विरोध नहीं किया। मैंने हिम्मत करके अपनी उँगलियों को हल्के से दबाया। उनका माँस इतना कसा हुआ और भरा हुआ था कि मेरी उँगलियाँ धँस गईं। उन्होंने गहरी साँस छोड़ी और अपनी आँखें मूँद लीं।
|क्या कर रहे हो?| उन्होंने फुसफुसाकर पूछा, लेकिन उनकी आवाज़ से ये नहीं लग रहा था कि वो सच में रोकना चाहती हैं। |कुछ नहीं, बस डांस का आनंद ले रहा हूँ|, मैंने बेशर्मी से जवाब दिया। गाना खत्म हुआ तो मैंने उनका हाथ पकड़कर धीरे से कहा, |थोड़ी देर बाद बगीचे में मिलना, प्लीज़। बस बात करनी है।| उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने ना भी नहीं कहा। वो एक रहस्यमयी मुस्कान देकर अपनी सहेलियों के पास लौट गईं।
रात के करीब 12:30 बज रहे थे। डिनर का दौर लगभग खत्म हो चुका था। बहुत सारे लोग सोने चले गए थे और कुछ लोग अभी भी डीजे पर डटे हुए थे। मैंने खाना जल्दी-जल्दी खत्म किया और बगीचे की तरफ निकल गया। जयपुर की सर्द हवाएँ चल रही थीं। आसमान में चाँद पूरा था और तारों की बारात सजी हुई थी। बगीचे में संगीत की आवाज़ दूर से आ रही थी, जो माहौल को और भी रुमानी बना रही थी। मैंने अपनी शेरवानी का बटन बंद किया और इंतज़ार करने लगा।
करीब 15 मिनट बाद मैंने पायल की आवाज़ सुनी। वो आ रही थीं। अब उन्होंने साड़ी का पल्लू अपने सिर पर ले रखा था। चाँदनी में उनका चेहरा और भी जादुई लग रहा था। वो मेरे पास आकर खड़ी हो गईं। |तुमने बुलाया तो मैं आ गई, लेकिन मुझे ज़्यादा देर नहीं रुकना। लोग देख लेंगे तो बात बनेगी।|
|चलो थोड़ा टहलते हैं, पीछे वाले रास्ते पर कोई नहीं है।| मैंने कहा और हम दोनों साथ-साथ चल पड़े। बातें शुरू हुईं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी, अपने पति, और अपने अकेलेपन के बारे में खुलकर बात की। |दुनिया के सामने तो हम हँसते-खेलते रहते हैं विवान, लेकिन रात को जब कमरे में अकेली होती हूँ, तो सन्नाटा बहुत भारी लगता है। बच्चे अपनी ज़िंदगी में व्यस्त हो गए। नौकरी से दिन कट जाता है, लेकिन रात… रात कटती ही नहीं।| उनकी आँखें भर आईं।
मैंने बिना कुछ कहे, बस उनका हाथ पकड़ लिया। वो हाथ बेहद नरम और ठंडा था। मेरे स्पर्श से उनका हाथ गर्म होने लगा। हम एक पुराने पेड़ के नीचे रुक गए। मैंने उन्हें अपनी तरफ घुमाया और उनकी आँखों में देखा। चाँदनी सीधे उनके चेहरे पर पड़ रही थी। उनकी आँखों में आँसू चमक रहे थे, लेकिन साथ ही एक गहरी, बुझती हुई प्यास भी साफ झलक रही थी।
|स्वरा, मैं नहीं जानता कि ये सही है या गलत। लेकिन जब से मैंने तुम्हें देखा है, मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा। तुम्हारी खूबसूरती, तुम्हारा अकेलापन… मैं तुम्हें यूँ ही अकेला नहीं छोड़ सकता।| मेरी आवाज़ भर्रा गई थी। उन्होंने अपनी उँगलियाँ मेरे चेहरे पर फेरीं। |तुम पागल हो विवान… लेकिन शायद मैं भी पागल हूँ।|
उनका ये कहना था कि मैंने अपने दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़ लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो वो बिल्कुल स्थिर हो गईं, जैसे कोई बिजली का झटका लगा हो। लेकिन फिर अगले ही पल, उनका पूरा शरीर मेरी तरफ झुक गया। उन्होंने अपनी बाँहें मेरी गर्दन के चारों ओर लपेट दीं और मुझे कसकर पकड़ लिया।
हमारा चुंबन गहराता गया। ये सिर्फ होंठों का मिलन नहीं था, ये दो भूखी आत्माओं का मिलन था। मेरी जीभ उनके होंठों को चीरती हुई अंदर गई और उनकी जीभ से उलझ गई। वो जीभ बेहद गर्म और मीठी थी, जैसे अभी-अभी शहद चाटा हो। हम एक-दूसरे को चूस रहे थे, काट रहे थे, चाट रहे थे। मेरा एक हाथ उनकी पीठ पर था और दूसरा उनके कूल्हों को दबा रहा था।
|उह्ह्ह्ह्ह…| वो चुंबन के बीच ही कराह उठीं। मेरा लंड अब पूरी तरह से सख्त होकर मेरी पैंट में तन गया था और उनके पेट से रगड़ खा रहा था। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख दिया। |यहाँ…| उन्होंने बस इतना कहा।
|नहीं, स्वरा, यहाँ नहीं। मेरे कमरे में चलो।| मैंने हाँफते हुए कहा। वो बिना कुछ बोले मेरे साथ चल पड़ीं। हम दोनों पीछे के रास्ते से, जहाँ कोई नहीं था, मेरे गेस्ट रूम की तरफ बढ़ गए। किस्मत से रास्ते में कोई नहीं मिला। कमरे में घुसते ही मैंने दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया और लाइट जलाई।
कमरे की मद्धम रोशनी में स्वरा और भी खूबसूरत लग रही थीं। उनके होंठ सूजे हुए थे और आँखों में एक जंगली चमक थी। मैं उनकी तरफ बढ़ा और उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया। अब हमें कोई जल्दी नहीं थी। मैं धीरे-धीरे उनकी साड़ी का पल्लू हटाने लगा। पल्लू हटा तो उनके गोरे कंधे और भरी हुई बाँहें नज़र आईं। मैंने झुककर उनके कंधे को चूमा। वो सिहर उठीं।
मैं उन्हें चूमता हुआ उनकी गर्दन तक पहुँचा। वहाँ उनका इत्र और भी गाढ़ा था। मैंने अपनी जीभ से उनकी गर्दन पर लकीर खींची। |आआह्ह्ह्ह…| वो कराह उठीं और उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। मेरे हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे और ब्लाउज़ के हुक ढूँढ रहे थे। मैंने एक-एक करके हुक खोलने शुरू किए। हर हुक के खुलने के साथ उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
जैसे ही आखिरी हुक खुला, मैंने ब्लाउज़ को पीछे से खींचकर उनकी बाँहों से बाहर निकाल दिया। अब वो सिर्फ एक ब्रा और साड़ी में लिपटी हुई थीं। साड़ी अब भी उनकी कमर से लिपटी हुई थी। मैंने ब्रा की तरफ देखा। वो काली लेस वाली ब्रा थी, जिसमें से उनके दूधिया स्तनों का ऊपरी हिस्सा बाहर झाँक रहा था। वो हिस्सा चाँदनी की तरह चमक रहा था।
मैंने अपनी उँगलियाँ ब्रा के कप के अंदर डालीं और धीरे से खिंचाव दिया। उनका एक पूरा स्तन बाहर आ गया। वो स्तन इतना सुंदर था कि मेरी साँस रुक गई। बिल्कुल गोल, तना हुआ, और ऊपर की तरफ उठा हुआ। निप्पल गहरे गुलाबी रंग का और एक अँगूठे जितना बड़ा, जो पहले से ही सख्त होकर खड़ा था। मैंने झुककर उस निप्पल को अपने होंठों के बीच ले लिया।
|उह्ह्ह्ह्ह… हाँ… विवान…| स्वरा की कराह कमरे में गूँज उठी। मैं उनके स्तन को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। मेरी जीभ निप्पल के इर्द-गिर्द गोल-गोल घूम रही थी, कभी हल्के से दाँतों से दबाती, तो कभी तेज़ी से चाटती। मेरा दूसरा हाथ उनके दूसरे स्तन पर था, जो अब भी ब्रा में बंद था। मैंने ब्रा को पूरी तरह से खींचकर नीचे कर दिया और दोनों स्तनों को एक साथ मसलने लगा।
स्वरा पूरी तरह से बेकाबू हो रही थीं। उन्होंने अपनी पीठ पीछे की तरफ मोड़ ली ताकि उनके स्तन और भी बाहर की तरफ उभरें। मैं बारी-बारी से दोनों स्तनों को चूस रहा था। उनकी गोद में अब एक तूफान उठ रहा था। मेरा हाथ उनकी साड़ी की सिलवटों के बीच से होता हुआ नीचे उनकी नाभि तक पहुँचा। उनकी नाभि बहुत गहरी और खूबसूरत थी। मैंने अपनी उँगली उसमें डाली और हल्के से हिलाया। वो खिलखिला पड़ीं, |शैतान कहीं के!|
फिर मैंने उनकी साड़ी की गाँठ खोली। साड़ी ढीली होकर नीचे गिरने लगी। मैंने साड़ी को पूरी तरह से उनके जिस्म से अलग कर दिया। अब वो सिर्फ पेटीकोट और पैंटी में थीं। पेटीकोट भी सफेद सिल्क का था, जो उनकी कमर पर बंधा हुआ था। मैंने पेटीकोट की डोरी खोली और वो भी सरसराती हुई नीचे गिर गया।
अब सिर्फ पैंटी बची थी। वो भी काली लेस की, ब्रा से मैचिंग। पैंटी के पीछे से उनकी गांड का भारी उभार साफ दिख रहा था। मैंने उन्हें घुमाकर बेड की तरफ किया और पीछे से उनकी गांड को दबाने लगा। |कितना भरा हुआ है…| मैंने बुदबुदाया। मैंने पैंटी को नीचे खींचा। वो धीरे-धीरे उनकी जाँघों से सरकती हुई नीचे आई और उनके टखनों तक पहुँची। स्वरा ने खुद अपने पैर उठाकर पैंटी को पूरी तरह से बाहर कर दिया।
अब स्वरा मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थीं। सिर्फ गले में कुंदन का सेट, हाथों में चूड़ियाँ और पैरों में पायल थी। बाकी पूरा जिस्म कुदरत का एक शाहकार था। 42 की उम्र में भी उनका बदन बिल्कुल कसा हुआ था। पेट पर हल्की सी लकीरें ज़रूर थीं, लेकिन वो उनकी ममता की निशानी थीं, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थीं। उनकी जाँघें गोल-मटोल और बहुत गोरी थीं। और उन जाँघों के बीच, उनकी चुत का तिकोना निशान, जिस पर हल्के-हल्के बाल थे, जो साफ बताते थे कि वो खुद को पूरी तरह से सँवारती हैं।
मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया और उनकी टाँगों को फैला दिया। उनकी चुत के होंठ गुलाबी और भीगे हुए थे। रस टपक रहा था और चादर पर हल्का सा गीला धब्बा लग चुका था। मैंने अपनी उँगलियों से उन होठों को खोला। अंदर का माँस चमकीला लाल और पूरी तरह से गीला था। मैंने अपनी दो उँगलियाँ अंदर सरका दीं।
|आआअह्ह्ह्हह… हाँ… अंदर डालो…| स्वरा चीख पड़ीं। उनकी चुत बेहद तंग थी। मानो सालों से कोई वहाँ गया ही न हो। भीतरी दीवारें मेरी उँगलियों को कसकर जकड़ रही थीं। मैं अपनी उँगलियों को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। हर बार जब मेरी उँगलियाँ अंदर जातीं, तो एक गीली सी आवाज़ निकलती। मेरा अँगूठा उनके भगनासे पर था, जो एक छोटी सी सख्त गेंद की तरह बाहर निकल आया था। मैंने उसे दबाया और गोल-गोल घुमाया।
|उह्ह्ह्ह्ह… बस… बस… मैं…| स्वरा का जिस्म तन गया। उनकी पिंडलियाँ अकड़ गईं और उनकी एड़ियाँ बिस्तर में धँस गईं। लेकिन मैं रुका नहीं। मैं अपनी उँगलियों को और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। उनका रस मेरे हाथ पर बह आया। वो ज़ोर से काँपीं और उनके मुँह से बस अस्फुट आवाज़ें निकलने लगीं। वो मेरी उँगलियों पर ही झड़ गईं।
|ये तो बस शुरुआत है, स्वरा|, मैंने फुसफुसाया और अपनी उँगलियाँ चाट लीं। उनका स्वाद हल्का नमकीन और मीठा सा था। अब मैंने अपनी शेरवानी और पैंट उतार फेंकी। मेरा लंड पूरी ताकत से तना हुआ था। मैंने अपना अंडरवियर उतारा और मेरा लौड़ा बाहर आ गया। वो सिरे से लेकर जड़ तक मोटा और लंबा था, ऊपर की तरफ हल्का सा मुड़ा हुआ। सुपारा चिकना और बैंगनी रंग का था, जिस पर से चमड़ा पूरी तरह से पीछे हट चुका था और पानी की एक बूँद लटक रही थी।
स्वरा ने जब मेरा लण्ड देखा, तो वो सहम सी गईं। |इतना मोटा… कहीं मुझे चोट न लग जाए…| उन्होंने चिंतित स्वर में कहा। |चिंता मत करो, तुम्हारी चुत इसे आसानी से ले लेगी। और चोट नहीं, सिर्फ मज़ा देगी।| मैंने भरोसा दिलाया और उनके करीब आ गया।
मैंने उनकी टाँगों को मोड़कर उनके घुटनों को उनकी छाती तक ले आया। उनकी चुत अब पूरी तरह से खुलकर मेरे सामने थी। मैंने अपना लंड पकड़ा और सुपारे को उनके चुत के द्वार पर रगड़ने लगा। वो गर्म और गीलेपन का एहसास मुझे पागल कर रहा था। मैंने सुपारे को हल्के से अंदर डाला और बाहर खींच लिया। ये मैंने कई बार किया। हर बार स्वरा कराहतीं और अपने कूल्हे ऊपर उठातीं ताकि मेरा लंड और अंदर जा सके।
|अब और मत सताओ… अंदर डालो न… प्लीज़…| वो गिड़गिड़ाने लगीं। उनकी ये बेचैनी देखकर मैंने एक ज़ोरदार झटका मारा और अपना पूरा लंड एक साँस में उनकी चुत के अंदर घुसेड़ दिया। |आआआअह्ह्ह्हह… भगवान…| स्वरा की चीख पूरे कमरे में गूँज गई। अगर कमरा साउंडप्रूफ न होता, तो पूरे फार्महाउस में सुनाई दे जाती। उनकी योनि की माँसपेशियों ने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से जकड़ा कि मैं एक पल के लिए हिल भी नहीं सका।
मैं रुका रहा, ताकि उनकी चुत मेरे लौड़े के साइज़ में ढल जाए। कुछ ही सेकंड में वो ढीली हुईं और फिर कसाव बढ़ गया। मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे होना शुरू किया। मेरा लंड उनके रस से पूरी तरह से भीग चुका था, जिससे रगड़ कम हो गई थी और मज़ा बढ़ गया था। मैं हर झटके के साथ गति बढ़ाता गया।
|आआह्ह्ह्ह… हाँ… तेज़… और तेज़…| स्वरा कराह रही थीं। उनकी आँखें मूँदी हुई थीं और चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान थी। मेरा लंड उनकी चुत में अंदर तक जा रहा था और उनकी गहराई में कहीं टकरा रहा था। मैंने उनकी टाँगों को अपने कंधों पर और ऊपर चढ़ा लिया और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। बिस्तर ज़ोर-ज़ोर से चरमरा रहा था। हमारे जिस्मों के टकराने से थप-थप की आवाज़ें आ रही थीं।
|तुम बहुत कसी हुई हो स्वरा… तुम्हारी चुत मेरे लंड को निचोड़ रही है…| मैं गुर्राया। |तुम्हारा लण्ड ही इतना बड़ा है… मेरी तो चुदाई हो रही है पूरी…| स्वरा ने हाँफते हुए जवाब दिया। उनकी ये बातें सुनकर मेरी उत्तेजना और बढ़ गई। मैं झुका और उनके होंठों को चूमते हुए अपने कूल्हे तेज़ी से चलाने लगा।
मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अपने लंड और उनकी चुत के उस घर्षण पर केंद्रित था। मैं अपनी पूरी ताकत से उन्हें चोद रहा था। स्वरा के मुँह से लगातार आहें और कराहें निकल रही थीं। |आआह्ह्ह्ह… उह्ह्ह्ह्ह… मारो… मुझे और चोदो…| उनकी आवाज़ अब पूरी तरह से कामुकता में डूब चुकी थी। वो अपने पैर मेरी कमर पर लपेटे हुए थीं और मेरी हर गति के साथ अपने कूल्हे ऊपर उठा रही थीं।
मैंने अपनी गति को कुछ देर के लिए धीमा किया और अपने लंड को लगभग पूरा बाहर खींच लिया, सिर्फ सुपारा अंदर रहने दिया। फिर एक ज़ोरदार झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। स्वरा की चीख निकल गई। |हाँ… यही… ऐसे ही चोदो…| मैंने ये प्रक्रिया कई बार दोहराई। धीमी गति से पूरा बाहर, फिर तेज़ी से पूरा अंदर। ये खेल स्वरा को पागल बनाए दे रहा था।
फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। |अब डॉगी स्टाइल में चोदूंगा तुम्हें|, मैंने कहा। स्वरा ने फटाफट अपने घुटनों के बल होकर अपनी गांड ऊपर उठा दी। उनकी पीठ का घुमाव और गांड का वो फैलाव देखकर मेरा लौड़ा और भी सख्त हो गया। मैंने पीछे से उनकी कमर पकड़ी और अपने लंड को उनकी चुत के द्वार पर रगड़ा।
|डालो न अब…| वो बेताब थीं। मैंने एक झटके में अपना लंड पूरा अंदर घुसेड़ दिया। इस पोज़ीशन में मेरा लंड उनकी चुत की दूसरी दीवार को रगड़ रहा था। स्वरा ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगीं। मैंने उनके कूल्हों को कसकर पकड़ लिया और तेज़ी से झटके देने लगा। उनकी गांड मेरे पेट से टकराकर ज़ोर-ज़ोर से हिल रही थी।
मैंने एक हाथ उनकी पीठ पर रखा और दूसरे से उनके बाल पकड़ लिए। हल्के से खींचते हुए मैं उन्हें चोद रहा था। |हाँ… बाल खींचो… और चोदो मुझे…| स्वरा चिल्लाईं। उनकी चुत से रस टपककर बिस्तर पर गिर रहा था। मेरा लंड अब बिल्कुल चिकना और चमकीला हो गया था। मैंने अपनी गति को और तेज़ किया। मेरे अंडकोष उनकी चुत के ऊपरी हिस्से पर ज़ोर-ज़ोर से टकरा रहे थे।
|तुम तो पूरी चुदक्कड़ निकलीं, स्वरा|, मैंने हाँफते हुए कहा। |हाँ… मैं चुदक्कड़ हूँ… तुम्हारे लिए… सिर्फ तुम्हारे लिए…| वो कराह रही थीं। |बहुत दिनों से चुदवाने का मन कर रहा था मेरा… आज तुमने मेरी चुदाई कर दी…| उनकी आवाज़ बेहद कामुक और बेकाबू थी।
कुछ देर और इसी तरह चोदने के बाद, मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उन्हें अपनी तरफ घुमाकर चूमने लगा। |अब तुम ऊपर आओ|, मैंने कहा और खुद बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया। मेरा लंड एक मीनार की तरह खड़ा था। स्वरा मेरे ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने अपनी चुत को मेरे लंड के ठीक ऊपर लाया और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं।
|उह्ह्ह्ह्ह… कितना गहरा जा रहा है…| उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और पूरा लंड अंदर ले लिया। अब वो मेरे ऊपर बैठी हुई थीं। ये पोज़ीशन शायद उन्हें सबसे ज़्यादा पसंद थी, क्योंकि इसमें वो खुद नियंत्रण में थीं। उन्होंने अपने पैरों को मोड़कर मेरे शरीर के दोनों तरफ जमा लिया और फिर अपने कूल्हों को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया।
स्वरा के स्तन मेरे चेहरे के बिल्कुल सामने झूल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। वो उछल रही थीं, मानो किसी घोड़े पर सवार हों। उनकी गति बढ़ती जा रही थी। मैं अपने हाथों से उनके कूल्हों को पकड़कर उन्हें और तेज़ी से उछलने में मदद कर रहा था। मेरा लंड उनकी चुत में रगड़ खा रहा था और एक ज़बरदस्त घर्षण पैदा कर रहा था।
|आआह्ह्ह्ह… विवान… मैं आ रही हूँ… फिर से…| स्वरा चीख उठीं। उनका पूरा शरीर काँपने लगा। उन्होंने अपनी गति और बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर से खुद को मेरे लंड पर पटकने लगीं। उनके मुँह से अस्पष्ट आवाज़ें निकल रही थीं। अचानक उनका शरीर तन गया, उनकी पीठ पीछे की तरफ मुड़ गई और वो ज़ोर से चीख पड़ीं। |आआआअह्ह्ह्हह…| उनकी चुत ने मेरे लंड को बुरी तरह से निचोड़ लिया। वो मेरे ऊपर ही ढह गईं, पूरी तरह से साँस फूली हुई।
मैंने उन्हें प्यार से सहलाया, लेकिन अभी मेरी बारी बाकी थी। मैंने उन्हें अपने ऊपर से उतारा और खुद उठ खड़ा हुआ। मेरा लंड अब भी तना हुआ था और माल निकालने के लिए बेताब था। स्वरा ने मेरी तरफ देखा और समझ गईं। वो बिस्तर से उतरीं और मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं।
उन्होंने मेरे गीले लंड को अपने एक हाथ से पकड़ा और अपने होंठों के पास ले आईं। पहले तो उन्होंने सिर्फ सुपारे को चूमा। फिर अपनी जीभ बाहर निकालकर पूरे लंड को नीचे से ऊपर तक चाटा। उनकी जीभ गर्म और मुलायम थी। उन्होंने मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर लिया। उनका मुँह गर्म और गीला था। वो तेज़ी से मेरे लंड को चूसने लगीं, ऊपर-नीचे सिर हिलाते हुए।
|आआह्ह्ह्ह… स्वरा… बहुत अच्छा चूस रही हो…| मैंने उनके बालों को सहलाते हुए कहा। उन्होंने मेरी तरफ देखा और और भी तेज़ी से सिर हिलाने लगीं। कभी वो मेरे अंडकोषों को चूसतीं, तो कभी पूरे लंड को गले के नीचे तक उतारने की कोशिश करतीं। मेरा पूरा लौड़ा उनकी लार से भीग गया था।
मैंने उनके सिर को पकड़ लिया और उनके मुँह में धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। मानो मैं उनके मुँह की चुदाई कर रहा हूँ। स्वरा ने अपने होंठ कसकर बंद कर लिए और मुझे अंदर तक जाने दिया। मेरी गति बढ़ गई। मेरे अंडकोष तन गए। |स्वरा… मैं निकलने वाला हूँ… मुँह में ले लो… पूरा…| मैं चीखा।
मैंने ज़ोर से उनके मुँह में अपना लंड ठूँस दिया और गहराई में जाकर झड़ गया। मेरे माल की तेज़ धारें सीधे उनके गले में जा रही थीं। स्वरा ने मेरा लंड कसकर पकड़ रखा था और गट-गट करके मेरा सारा वीर्य पी रही थीं। मेरा पूरा शरीर झनझना उठा। मैं करीब 15-20 सेकंड तक उनके मुँह में झड़ता रहा। जब मेरा सारा माल निकल गया, तब भी स्वरा मेरे लंड को चूसती रहीं, जैसे आखिरी बूँद भी निकालना चाहती हों।
आखिरकार मैंने अपना लंड उनके मुँह से बाहर निकाला। स्वरा ने अपने होंठों पर आए हुए माल की आखिरी बूँद को अपनी उँगली से पोंछा और चाट लिया। फिर वो खड़ी हुईं और मुझसे लिपट गईं। हम दोनों का शरीर पसीने से भीगा हुआ था और साँसें तेज़ चल रही थीं।
हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। स्वरा ने अपना सिर मेरी छाती पर रख लिया। मेरा एक हाथ उनकी पीठ को सहला रहा था और दूसरा उनके बालों को। कुछ देर तक कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की आवाज़ें गूँजती रहीं। फिर स्वरा ने धीरे से कहा, |मुझे नहीं पता था कि मेरी ज़िंदगी में इतनी आग बाकी है।|
|आग तो तुम्हारे अंदर हमेशा से थी, स्वरा। बस किसी को चिंगारी दिखाने की ज़रूरत थी।| मैंने कहा और उनके माथे को चूम लिया। हम दोनों करीब आधे घंटे तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर स्वरा उठीं और बोलीं, |अब मुझे जाना होगा। सुबह सबको पता चलेगा तो बहुत बुरा होगा।|
वो उठकर तैयार होने लगीं। मैंने उन्हें देखा। वो बड़ी सावधानी से अपनी साड़ी पहन रही थीं, ताकि कोई सिलवट न रहे। पूरा तैयार होने के बाद वो मेरे पास आईं और मेरे होंठों पर एक हल्का सा चुंबन दिया। |थैंक यू, विवान। आज की रात मैं कभी नहीं भूलूँगी।|
|मैं भी नहीं भूलूँगा, स्वरा।| मैंने कहा। फिर वो धीरे से दरवाज़ा खोलकर बाहर निकल गईं और अंधेरे में गायब हो गईं। मैं वहीं बिस्तर पर पड़ा रहा, उनकी खुशबू और उनके जिस्म का एहसास मेरे साथ था।
अगली सुबह विदाई की रस्म थी। मैं जानबूझकर देर से पहुँचा। स्वरा वहाँ सबके साथ खड़ी थीं, बिल्कुल शांत और गरिमामयी। उन्होंने आज हल्के हरे रंग की साड़ी पहनी थी और बिल्कुल एक प्रोफेसर की तरह गंभीर लग रही थीं। लेकिन जब हमारी नज़रें मिलीं, तो उनकी आँखों में एक पल के लिए वही चमक लौट आई। उन्होंने बहुत हल्के से मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा और फिर वहाँ से चली गईं।
मैं भी उसी दिन वापस दिल्ली आ गया। उस रात के बाद मैंने स्वरा से कभी संपर्क करने की कोशिश नहीं की। वो मेरे दोस्त की माँ थीं, और मैं जानता था कि उस रिश्ते को यहीं छोड़ देना ही बेहतर है। लेकिन वो रात, वो शादी, और स्वरा की वो प्यास… ये सब मेरी यादों में हमेशा के लिए बस गए। ये मेरी ज़िंदगी की वो सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा से छुपाना चाहता था, एक ऐसी चुदाई की दास्तान जो सिर्फ मेरे और स्वरा के दिलों में कैद है।

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