top of page

शादी से पहले सुहागरात की सच्ची कहानी - Free Sex Kahani

में जैक राजकोट में रहता हूँ। यह मेरी असली कहानी है जिसमे मेरे जीवन के सबसे मधुर पलों में से एक का वर्णन कर रहा है। इसमें कोई तड़का नहीं डाला हुआ है, ये बिल्कुल सच्ची कहानी है।


ये कहानी असली है, इसलिए जो अपनी गर्लफ्रेंड या पत्नी से पहेली बार सेक्स करना चाहता हो वो जरूर से पढ़े। क्योंकि दूसरी कहानियाँ की तरह इसमें कुछ फेक नहीं है।


ये बात आज से २० साल पहेले यानी २००५ की है, जब मैं गुजरात की एक नामी कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा था। मैं एक प्राइवेट हॉस्टल में रहता था, जहां सब शानदार सुविधाएं थीं। मैंने पोस्ट ग्रेजुएशन में नया ही एडमिशन लिया था। जब मैं पहले दिन क्लास में एंटर हुआ तो मैंने देखा कि क्लास में सब लड़के ही थे। क्योंकि मेरा सब्जेक्ट बहुत कम लड़कियां पसंद करती है। तब मैंने सोचा कि साला पीजी भी बेकार जाएगा। क्योंकि ग्रेजुएशन में भी हमारी क्लास में कोई भी लड़की नहीं थी। कोलेज की कुछ लड़कियों के साथ दोस्ती जरूर थी, लेकिन किसी के साथ क्लोज होने का मौका नहीं आया।


कॉलेज के 3-4 दिन तो मेरा परिचय करने में ही निकल गया। बाद में मेरे सहपाठियों से सुनने को आया कि हमारी कक्षा में एक लड़की ने प्रवेश लिया है। और वो आउट स्टेट की है. तब मैंने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। पता नहीं कैसी होगी और कॉम्पिटिशन भी बहुत ज्यादा था कि 50 के क्लास में केवल एक लड़की। हालांकी में पढाई में क्लास में सबसे होशियार और ग्रेजुएशन का टॉपर था। दिखाने में भी स्मार्ट लगता हूँ, और मेरे पास अपनी बाइक और मोबाइल भी थे, जो उस समय बहुत कम लड़को के पास थे। और लड़कियों पर खर्च करने के लिए पैसे भी थे। क्योंकि मैं एक संपन्न परिवार से था। उन दिनों में कॉलेज में बाइक और मोबाइल बहुत कम लोगो के पास थे।


एक दिन क्लास शुरू होने के बाद एक लड़की ने क्लास का दरवाजा खोलकर बोला, क्या मैं अंदर आ सकती हूँ मैम?


और पुरा क्लास शॉक्ड हो गया जैसे पूरे नीरस क्लास में एक रोशनी से फेल गई, पूरे क्लास में सन्नाटा। और मैं भी। क्योंकि वो लड़की नहीं एक अप्सरा थी, बहुत ही खूबसूरत, गोरी, दिखने में ही लग रहा था कि वो गुजराती नहीं है।


उसने सिंपल सा पंजाबी सूट, सूट का कलर आज भी याद है, उसने हरे रंग का सूट पहनना हुआ था। बहुत आकर्षक दिख रही थी। तब मैडम ने परिचय करवाया कि ये प्रियंका है जो देहरादून से है, और इसने हमारे क्लास में ही आउट स्टेट के क्वोटा में एडमिशन लिया है।


तब मैंने अपने आप से कहा कि चाहे कुछ भी हो, ये लड़की पट जाए तो मज़ा आ जाए।


आम तौर पर मैं सबसे पहली पंक्ति में ही बैठता था। क्योंकि मैं बहुत होशियार था। दूसरे लड़के आगे बैठने से डरते थे, क्योंकि प्रोफेसर आगे वालो को ज्यादा सवाल पूछते थे। मेरे बाजु वाली सीट खाली थी. तो मैंने वो ऑफर किया. और वो धन्यवाद बोलके बैठ गई।


लेकिन वो कुछ दिन देर से एडमिशन लिया था तो उसका कुछ विषय समझ में नहीं आ रहा था। एक दिन वो लाइब्रेरी में पढ़ रही थी, तब मैंने उसके पास जाकर हेलो बोला।


तो बोली, कि मैडम ने बोला है कि कुछ समज में ना आए तो तुम जैक से पूछ सकती हो। और मैंने उसे वो टॉपिक समझाया। मैंने उससे बात करना चालू किया। तब पता चला कि वो देहरादून के एक अमीर परिवार से थी, अलग माहौल के लिए उसके फ़ैमिली ने उसको वहाँ भेजा था। यहाँ वो कॉलेज की गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी, जहाँ बहुत रेस्ट्रिक्शन भी थे। उसकी फ़ैमिली ने उसको बाहर रहने का परमिशन नहीं दिया था।


६ महीने तो दोस्ती बातो में ही बीत गया। मगर क्लास में भी वो 2-4 लड़कों के अलावा ज़्यादा किसी से बात नहीं करती थी। मुझे कुछ कुछ पता चल गया था कि वो भी मुझसे प्यार करती है।


एक दिन सुबह मैंने उसे बोला, भूख लगी है। हॉस्टल से बाहर आओ, चलो कोई रेस्टोरेंट में जाते है। खाना ऑर्डर करने के बाद मैंने उसका हाथ अपने हाथों में लेके प्रोपोज किया और पूछा, आई लव यू। क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?"


वो दिन मुजे आज भी याद है कि वो २ अक्टूबर था और गांधी जयंती की छुट्टी थी।


वो कुछ बोली नहीं. पलके जुका ली, मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसकी आँखों से पानी बह रहा था। डेजर्ट के आइसक्रीम भी पूरी मेल्ट हो गई थी। वो काफ़ी देर बाद नार्मल हुई और बोली कि जैक, तुम मेरे अच्छे दोस्त हो। तुम मुजे पसंद भी हो, लेकिन मेरे संस्कार इसकी इजाजत नहीं देते। मेरा प्यार सिर्फ़ मेरे पति के लिए होगा। ये पल का हर लड़की इंतज़ार करती है की कोई उसे आई लव यू बोले, तुम्हें तो कोई भी मिल सकती है।


अगर तुम मेरा साथ जीवन भर देने का वादा करोगे?


मैंने बिना कुछ सोचे ही हा बोल दिया, क्योंकि संस्कार, रूप और व्यवहार में एक परफ़ेक्ट वाइफ मटेरियल थी । मुजे सोचने की ज़रूरत ही नहीं थी। ख़ाली अंतर था तो हमारे अलग राज्यो और भाषा का। में गुजरात से था और वो उत्तराखंड से। और प्रॉब्लम था हमारे परिवार को मनाने का। मैंने सोच लिया की इसके लिए अगर दुनिया से लड़ना पड़े तो लड़ लूँगा।


बाद में मुझे पता चला कि वो हर बात अपने पापा से शेयर करती थी और वो मेरे साथ जहां भी जाती थी तो उसके पापा को पहले सूचित करती थी। उनको भी कोई समस्या नहीं थी, उनको अपने बेटी पर पूरा भरोसा था. (सिर्फ उसने दोस्ती की ही बात बताई थी, प्रपोज और शादी की नहीं)।


बाद में वो मेरे साथ ऐसी ही बात करती थी और मेरी छोटी छोटी बातों का भी ऐसे ख्याल रखती थी कि जैसे मैंने मेरी पत्नी से उम्मीद की थी। एक दिन मैंने उसे बोला कि गर्मी बहुत है चलो मेरे एक दोस्त के फ्लैट पर चल के बैठते हैं।


फ्लैट मेरे दोस्त का था, उसके पापा की ट्रान्सफर हो गई तो उसके मम्मी पापा दूसरे शहर रहते थे। तो मेरा दोस्त वहाँ अकेला रहता था। मैं कई बार दोस्त के फ्लैट पे जाते थे और मस्ती मूवी गपशप वगेरह करते थे। मेरा दोस्त की भी एक गर्ल फ्रेंड थी तो वो चुदाई के लिए फ्लैट पे आती रहती थी।


उसने हा बोला। मैंने मेरे दोस्त को पहले ही बता दिया था तो वो बाहर चला गया था। मैंने पहले ही उससे चाबी ली थी।


फ्लैट पे जाके हम कुछ देर तक बात करते रहे। मैंने उसके गालो पे किस किया। वो कुछ नहीं बोली, शर्म से उसके गोरे गाल पे शर्म की लालिमा आ गई।


अचानक मैंने उसे बाँहों में लेके लिप किस करना चालू कर दिया। ये मेरी पहेली लिप किस थी. उसने मुझे धक्का मार के रोक लिया और बोली, कि जैक, मेरा प्यार सिर्फ़ मेरे पति के लिए है, मैं तुमको तो अपना पति मान चुकी हूँ, मैं सुहागन बनना चाहती हूँ। मेरी मांग भर दो। बाद में मैं सिर्फ तुम्हारी ही हूं।


मैंने दोस्त के घर के पूजा कक्ष से सिंदूर ढूंढा लेकिन मेरे वो ठरकी दोस्त के घर पूजा घर कहाँ मिलता। मैंने किचन से चाकू लिया, अपने अँगूठे पे हल्का कट लगाया और उसकी मांग में भर दिया। वो मेरा अंगूठा चूसने लगी जिससे हल्का सा ख़ून आ रहा था।


फिर उसने मेरे पैर छुए और बोली, कि मैं अब सिर्फ तुम्हारी ही हूं। मुझे कभी नहीं छोड़ना, कभी धोखा मत देना, वरना वो मेरा इस दुनिया में आख़िरी दिन होगा। और वो मुझे लिपट गई। मैंने उसको एक बच्चे की तरह उठा लिया और बेडरूम में ले गया। उसका वजन कुछ 50 किलो से आस पास होगा।


मैंने उसको बहुत देर तक लिप किस किया। उसके लिप्स बहुत नरम और रसीले थे। उसके भी मेरे होठों को चूस कर किस करना चालू कर दिया। वो बहुत मस्ती से चूस कर रही थी। कुछ 15-20 मिनट तक चूसें करने के बाद मैंने उसकी टी-शर्ट में हाथ डालके उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। वो दर्द और मजे के मारे से सिर्फ उठी क्योंकि उसका ये पहेली बार था।थोड़ी देर बाद मैंने उसकी टी-शर्ट उतार फैका। उसके काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैंने वो भी उतारना चाहा, लेकिन मुजसे खुल ही नहीं रही थी, तो उसने हंस कर पीछे हाथ डाला और एक झटके में खोल दी।


उसके स्तन एक दम कसीले, और कड़क थे। एक दम गोल आकार, बिल्कुल सीधी तने हुए निपल्स। स्तनों पे ब्लू नसे भी साफ़ दिख रही थी। निपल्स बिल्कुल छोटे छोटे, उसके आस पास हल्के भूरे रंग के एरोला। बूब्स में निपल के पास एक छोटा काला तिल, जो उसकी ख़ूबसूरती पे चार चाँद लगा रहा था।


कुछ देर के बाद मैंने उसके निपल्स चूसना शुरू कर दिया। और उसने आँखें बंद कर दी। कुछ देर बाद मैंने उसकी जींस उतार दी। उसकी काली पैंटी मुझ पर नज़र आई। मैं ये नजारा लाइफ में पहेली बार देख रहा था। तब मैंने उसके पूरे बदन पर गौर किया तो एकदम दूध सा बदन था। बदन पे एक भी दाग नहीं। परफ़ेक्ट फिगर था। एक दम स्लिम तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन सब जगह नपी तुली चर्बी थी। मेरी बीवी की शरीर पे बहुत कम बाल है, वैक्सिंग की ज़रूरत ही नहीं पड़ती है, जैसे उपरवाले ने वैक्सिंग करके ही भेजा है।


अब कॉलेज के लड़कों की ड्रीम गर्ल मेरी बाहो में थी। मैं बहुत एक्साइटेड हो गया था, अब तक मेरे कपड़े नहीं उतरे थे। मगर मेरे अंदर ही मेरा लंड खड़ा हो गया था। (दूसरे लोगो की तरह मैं आपको अपना साइज ज्यादा नहीं बताऊंगा। मेरे लंड का साइज तो 5.5 इंच है, मगर औसत से बहुत मोटा है और डंडे जैसा कड़क है, जो आज भी मेरी बीवी की आहें निकलवाता है।)


मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया। मैंने देखा कि पैंटी बीच में से गिली हो चुकी थी। मुझे समझ आ गया है कि चूत चुदवाने के लिए तैयार हो चुकी है। अभी तक वो कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी। सिर्फ मुझसे लिपटके, आंखें बंद करके मजे ले रही थी। मैंने उसकी चूत को देखा तो बिल्कुल किसी रशियन लड़की की चुत लग रही थी।


गहरे गुलाबी रंग की और एक दम साफ थी उसके छोटे-छोटे बाल थे और बीच की दरार बिल्कुल गुलाबी रंग की थी जैसी मैंने फ़िल्मों में देखी थी। शायद उसके 3-4 दिन पहले ही झाँटे साफ किये होगे। उसके होंठ छोटे छोटे और एक दूसरे सी चिपके हुए और गुलाब की पंखडियों की तरह थे, जो उसे कुँवारे होने की गवाही दे रहे थे। चूत के होठों के ऊपर एक गुलाबी दाने जैसा था। मुझे समझ आया कि ये उसका सबसे संवेदनशील बिंदु है। मैंने अपनी उंगली पर थूक लगाके उसकी चूत पे हल्के से हाथ फिराना चुरू कर दिया।


मैंने आपको बताया कि मैंने बहुत बीएफ देखी है और बहुत सी चुदाई वाली कहानी पढ़ी है, तो थ्योरी तो सब अच्छे से जानता था। और आज उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने का पहला मौका मिला। कुछ देर तक चूत की मालिश करने के बाद मैंने उसके दाने को टच किया तो वो मजे की वजह से धीरे से चिल्ला उठी आईआईई, और ढीली होके शांत हो गई। पहेली था तो मेरे छूते ही उसका ऑर्गेज्म आ गया था। उसकी चूत से थोड़ा चिपचिपा पानी निकलने लगा। मैंने भी ये सीन पहली बार देखा था। अभी मेरे लंड की हालत ख़राब हो रही थी। मैंने अपने सारे कपड़े और कपड़े उतार दिये।


मैंने उसकी चूत को स्मेल किया। हमसे बड़ी ही मादक खुशबू आ रही थी। मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया तो वो चिल्ला उठी आह.. आह पियाजी आप ये क्या कर रहे हो। उसके पियाजी बोलते ही मैं जोश में आ गया और जोर जोर से उसकी चूत चाटने लगा। मैंने उसकी चूत के दोनों छोटे छोटे होठों को फैला दिया और चौड़ा किया। वो दर्द से कांप उठी. मैंने अपनी जीभ का जादू दिखाना शुरू कर दिया। उसने अपनी दोनो पैर फेला दिये। और मेरे सर को बालों से पकड़के अपनी चूत में प्रेस कर रही थी। उसे भी अब बहुत मजा आने लगा था।


मैंने करीब १०-१५ मिनट तक चाट के उसकी चूत को साफ कर दिया था। अभी भी उसके होठ भींचे हुए थे। शायद वो मेरे लंड का इंतज़ार कर रहे थे। मुझे तब ध्यान आया कि मेरे पास कंडोम ही नहीं है। (वो टाइम में आई-पिल नहीं मिल रही थी) तो मैंने मेरे दोस्त को फोन किया। आम तौर पर वो अपनी गर्लफ्रेंड के लिए स्टॉक रखता था। उसने मुझे बताया कि कंडोम की दराज में से निकाल लो। मैंने देखा तो उसमें कामसूत्र ब्रांड के दो पैकेट पड़े हुए थे, मैंने एक पैकेट ले लिया।


अब मैंने मेरा लंड उसके हाथों में दे दिया। तो उसने आँख खोल के मेरे प्यारे से लंड को देखा और देखते ही उसके अपने हाथ खिच लिए। वो घबरा गई, और बोली की पियाजी, अब आ जाओ ना, क्यों तड़पा रहे हो अपनी नन्ही सी जान को। वो अभी भी लंड और चूत बोलने से शर्मा रही थी। मैंने बोला कि मेरी जान इस लंड को बोलती है। अब हम पति पत्नी बन गए हैं तो फिर कैसा शर्माना। अभी भी वो नहीं बोल रही थी। मेरे और एक बार आग्रह करने के बाद वो मेरे कान में शर्म से फुसफुसाई। वो बोली, ये छोटे पियाजी अपनी छोटी गुड़िया के अंदर कैसे जाएगा?


मैंने कंडोम निकाला, तो वो कंडोम को कौतूहल से देख रही थी। उसने वो पहेली बार देखा था। मैंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और उसकी चूत के दरवाज़े पर रख दिया। वो मजे से आहे भरने लगी और बोली पियाजी आज हमारी सुहाग रात है। मुजमे समा जाओ, मैं कब से प्यासी हूं। आज तक मेरे पति के लिए जो चीज़ संभाली थी, वो तुम्हें सोंप रही हूँ। मेरा भरोसा मत तोड़ना वरना में जी नहीं पाऊँगी।


मैंने एक हल्का सा धक्का मारा। वो दर्द से कराह उठी, क्योंकि मेरा लंड बहुत मोटा है। वो अन्दर ही नहीं जा रहा था. क्योंकि उसकी चूत कुंवारी और बहुत टाइट थी। ( मैंने बाद में काफ़ी लड़कियों और औरतों को चोदा है, मुजे लगता है मेरी बीवी की चुत संकरी और छोटी है।) मैंने बहुत कोशिश की मगर वो अंदर ही नहीं जा रहा था।


अब ये प्रैक्टिकल तो फेल होने वाला था, क्युकी अंदर ही नहीं जा रहा था। वो बोली, अंदर कैसे जाएगा ये, इतनी छोटी तो है और ये इतना बड़ा।


मैंने बोला, सबका जाता है तो मेरा भी चला जाएगा। फिर मैंने कंडोम के ऊपर उसके पर्स से सनस्क्रीन लोशन निकाला और लगा दिया और मेरी उंगली पे थोड़ा सा लोशन लगाके उसकी चूत में डाला और अंदर घूमने लगा।


मैंने उँगली जरा सी ही डाली थी, क्युकी मुजे अंदर कोई अवरोध लग रहा था। मैंने सोचा कि ज़िंदगी में पहली बार सिल तोड़ने का मौक़ा मिल रहा है तो उँगली से क्यों तोड़े। लंड से ही सील तोड़ूँगा।


थोड़ी देर के बाद मैंने दूसरी उंगली भी जरा सी अंदर घुसेड दी। दूसरी उँगली डालते ही उसने जम्प मारा और उसकी दर्द भरी आवाज़ निकल गई, आईआईई आईआईई दर्द हो रहा है।


अब मेरे धीरज की सीमा आ गयी थी. मैंने उसकी चूत के नीचे तकिया लगा दिया, जिसकी उसकी चूत एकदम ओपन हो गई। मैंने उंगली निकालके अपना लंड चूत पे रखा और हल्के से धक्का दे दिया। मगर मेरा लंड बाहर फिसल गया। मैंने कुछ 5 मिनट तक कोशिश की। मैं नहीं चाहता था कि उसको ज्यादा दर्द हो। मजबूरन मैंने मेरे लंड से जोर से धक्का मारा। उसका सुपाड़ा अंदर चला गया. वो ज़ोर से चिल्ला उठी.. आआयी……पियाजी…. दर्द हो.. रहा है. निकाल दो...


(आप लोगो ने सील तोड़ी, उसका अनुभव कैसा रहा वो पता नहीं, मगर मेरा अनुभव कुछ खास अच्छा नहीं रहा, क्युकी उसको बहुत दर्द हो रहा था तो सहयोग नहीं कर रही थी)


वो मेरे कान में बोली, पता नहीं लोग कैसे कर लेते है, कितना दर्द हो रहा है।


तो मैंने उसके होठों को चूसने लगा, क्योंकि ज़्यादा आवाज़ से आस-पास वालो को पता चल जाता है कि यहाँ चुदाई हो रही है। थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई। मैंने वापस लंड का सुपाड़ा अंदर डालना शुरू किया। अब मुझे पता था कि मेरी जानू की सील (जीली) टूटने वाली है। मैंने उसके मुँह पर हाथ रखके ज़ोर से धक्का मारा। उसने ज़ोर से मेरे हाथ काट लिया क्योंकि उससे बहुत दर्द हो रहा था। मेरे हाथ पे उसके दाँत के निशान बैठ गए थे।


मैंने देखा कि मेरा आधा लंड अब अंदर था। कंडोम में भी उसकी चूत की गर्मी मुझे बहुत अच्छी लग रही थी। अब वो कोई रिस्पांस नहीं दे रही थी, वो अर्ध बेहोशी की हालत में पहुँच गई थी। उसके शरीर में कोई हलन चलन ही नहीं हो रही थी, सिर्फ़ साँसे और धड़कन चल रही थी।


मैं भी थोड़ा गभरा गया, क्युकी उसे कुछ हो जाता तो बड़ा मसला हो जाता। डॉक्टर के पास जाना पड़ता तो भी क्या बताते। मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा, अब उसने धीरे से अपनी आखे खोली और बोली, गया पूरा अंदर?


मैंने हाँ बोला तो उसने ज़ोर से अपनी साँस छोड़ी। ऐसी में भी वो पसीना पसीना हो गई थी।


मुझे ऐसा लगता है कि मैं एक धधकती भठ्ठी में घुस गया हूं। मैंने जब लंड स्ट्रोक लगाने के लिए थोड़ा बाहर निकाला, तो पूरा पक्कक्क आवाज़ के साथ पूरा बाहर निकल गया। मैंने देखा मेरे कंडोम पे थोड़ा खून के धब्बे थे। चूत के होठ अब खुले हुए थे और उसमें भी चूत से थोड़ा खून रिसने लगा था। मैंने जल्दी से बाजू से मेरा रुमाल उठाया और उसकी गांड के नीचे रख दिया। क्योंकि मेरे दोस्त की बेडशीट ख़राब हो जाती।


मैंने मेरी जानू को कुछ नहीं बताया क्योंकि इससे वो घबरा जाती। अब मैंने उसके स्तन चुनना चालू किया तो उसका दर्द थोड़ा कम हो गया। वो आहे भरने लगी. आह…. आआआ… ह्ह्ह….. बस वो आहे भरती जा रही थी लेकिन उसके मुँह से कोई लब्ज़ नहीं निकल पा रहे थे। और मैं पागल हो जा रहा था। थोड़ी देर बाद वो खुद अपनी गांड हिलाने लगी और मेरे बालों में उंगली घुमाने लगी। तब मुझे पता चल गया कि उसका दर्द ख़तम हो गया है। और मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब वो भी अपनी चूतड हिलाके साथ देने लगी।


कुछ देर बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब वो चुदाई हिलाके मेरा साथ दे रही थी और आहे भारी जा रही थी, वो आहे मस्ती की थी या दर्द की ये वो ही जानती थी। उसका ये रूप देखकर मैं हैरान हो गया। कि बहार एक सीधी सादी दिखने वाली लड़की ऐसी हॉट भी हो सकती है। 10-15 मिनट तक चुदाई के बाद उसने जोर से मेरे बाल भींच लिए और बोली, आ…ह…ह…… आ…आई ……पिया……जइइइ, धीरे धीरे से करुओन्नआआ…।


वो मेरे चूतड़ अपनी और खींच के मेरे स्ट्रोक को कंट्रोल करने लगी ताकि मैं ज़ोर से धक्के ना लगा पाऊ, क्युकी पूरा डालने पर उसको दर्द हो रहा था। वो अपनी चुत की और धीरे धीरे धक्के मारने लगी जैसे मुजे पूरा चूत में समा लेने वाली हो। और कुछ देर बाद वो शांत हो गई। मुझे पता चल गया कि वो झड़ गई है। मैंने धक्के मारना चालू किया तो अब वो मुजे दूर करने के लिए धक्का मारने लगी की मैं लंड बाहर निकाल लू। मेरा अभी नहीं हुआ था, मगर मैंने लंड बाहर निकाल लिया।


मगर मैं अभी भी जोश में था। मैंने धक्के लगाना बंद करके, बिना लंड बाहर निकले उसके स्तन चूसना चालू कर दिया। एक बार झड़ जाने की वजह से उसका पानी लुब्रिकेशन जैसा काम कर रहा था। थोड़ी देर बाद वो वापस जोश में आ गई और चूतड उठाने लगी। मैंने उसको बोला कि मेरे ऊपर आ जाओ। थोड़ी ना नुकुर की तो मैने उसकी चूत से लंड निकला बिना पलटा दिया।


अब वो मेरे लंड के ऊपर वो बैठ गयी। अब लंड पूरा अंदर होने की वजह से उसकी गर्भाशय को स्पर्श कर रहा था, उसको शायद थोड़ा ज़्यादा दर्द हो रहा था तो वो हिल नहीं रही थी। मैंने उसके चूतड़ थोड़े ऊपर किए और में नीचे से धना धन शुरू हो गया। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को मचलना शुरू कर दिया। अपनी उंगली पर थूक लगाके उसके दाने को भी मसलने लगा। अब पागल सी हो गई है और मेरे नियंत्रण के बाहर थी। वो आअहह…आ ह्ह्हहा…. करती जा रही थी।


अब वो आहे भरने लगी और मेरी छाती पर अपना हाथ घुमाने लगी। कुछ देर बाद वो वापस लेट गई। बोली, दर्द हो रहा है अंदर। तो मैंने वापस उसको नीचे पलटा और जोर से धक्के मारने लगा। कुछ देर बाद मैंने भी अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया। कुछ देर बाद हम दोनो ऐसे ही लेटे रहे। मेरा लंड छोटा हो गया था। मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो कंडोम अंदर ही फंस गया। हम दोनों उसको देखके हँस पड़े।


अब वो मुजसे खुल गई थी। कंडोम देखके वो बोली: पियाजी, शादी के बाद ये इस्तमाल नहीं करेंगे, मुजे मेरे और मेरे पियाजी के बीच कुछ नहीं चाहिए। बाद में मैंने मेरे रूमाल से उसकी चूत को और मेरे खून से सने लंड ली गोटियों को साफ किया।


हम दोनों ने कपडे पहने और बैठ गए. मैने बोला कैसा रही सुहागरात। वो बोली, आप बहुत बेशरम हो। फिर उसने मेरा कानो में बोला, "बहुत मजा आया, मगर अभी भी दर्द हो रहा है। पियाजी शादी के बाद हर रोज़ ऐसे ही प्यार करोगे ना?


मैने बोला हा जानू। बोलके उसको बाहो में भर लिया।


फिर मैंने पूछा कि तुमने मुझपे इतना यकीन था कि, तुम्हें पता होने के बावजूद भी अकेले फ्लैट पर चली आई और अपना सब कुछ मुझे दे दिया।


तो वो बोली,"पियाजी, आप पे यकीन नहीं करूंगी तो और किस्से यकीन करु। आप मेरे हो, और मैं आपकी। भले ही दुनिया की नज़रों में हम पति-पत्नी नहीं हैं मगर मैंने तो आप को ही अपना पति मानके अपना सब कुछ दे दिया है।


मैंने उससे पूछा कि कॉलेज में तुम्हें और कोई लड़का पसंद है क्या। तो वो बोली, "छि, आप ये कैसी बातें कर रहे हैं। आप के होते हुए मुझे भला क्यों किसी की ज़रूरत पड़े।"


मैंने उसको अपनी बाहों में ले लिया। कुछ 15 मिनट तक हम एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे।


बाद में मैंने उसको उसके हॉस्टल में ड्रॉप करने जा रहा था तो स्पीड ब्रेकर आने पर वो बोलती थी, आईईई पियाजी, धीरे-धीरे चलो पियाजी, अंदर दर्द हो रहा है। मैंने रास्ते से उसको पैन किलर ले दिया।


फ़िर जब वो हॉस्टल गई। आधे घंटे में उसका फोन आया, वो कुछ घबराई लग रही थी, मैंने पूछा, "जानू क्या हुआ।" वो बोली, "पियाजी अभी 6 दिन ही हुए हैं, मुझे वापस पीरियड आ गया। मेरी पैंटी भी थोड़ी खराब हो गई।"


मैं उसकी नादानियत पे हस पड़ा। और उसको समझाया कि तुम्हारी झिल्ली फटने से ये खून निकला था, मगर मैंने तुम्हें बताया नहीं कि शायद तुम घबरा जाओगी। और ऐसा सिर्फ पहेली बार ही होता है। वो बोली,”पियाजी, आप बहुत गंदे हो।”


हम दोनों ने पूरे साल बहुत मजे किये। मुजे कभी भी महसूस नहीं हुआ कि हमारी शादी नहीं हुई है। हम कभी कभी जी भरके चुदाई करते थे।

लेकिन मैंने अपना वादा निभाया। कॉलेज से निकलते ही मुजे अच्छी जॉब मिल गई। हम दोनों ने अपने परिवार को मनाकर शादी कर ली। हम हनीमून पे फुकेत गए और वहाँ जी भर के चुदाई की। वो कॉलेज के दो साल हमारी ज़िंदगी के सबसे हसीन पल थे। हम आज भी उसको याद करते है।


दोस्तो, आज वो मेरी बीवी है। हमारी शादी को १८ साल हो गए। और हमारे २ प्यारे बच्चे भी है, जो ऑपरेशन से हुए है तो उसकी चूत अभी भी कसी हुई है। करीब ८ साल विदेश में बिताने के बाद हम भारत वापस आ गया। अब में एक बिजनेसमैन भी हूँ।


विदेश में भी मैंने बहुत चुदाई की जिसकी कहानी आप कामवासना पे मेरे नाम पे क्लिक करके पढ़ सकते है, जो सब सच्ची कहानी है।


हम दोनों जी भरके हर रोज़, हर स्टाइल में चुदाई करते हैं, आज भी वो उतना ही मजा देती है, जितनी पहेली बार दिया था, शायद उससे भी ज्यादा। क्युकी अब सिर्फ़ मजा होता है, दर्द नहीं। अब तो हमारी रोमांस और चुदाई घंटो तक चलती है जिसमें वो पूरी तरह मेरा साथ देती है। हमारी चुदाई में वो पूरा कंट्रोल अपने पास रखती है।


सुबह बच्चे स्कूल जाते है तो ऑफिस पे जाने से पहेले भी कभी कभी बेड पे या बाथ टब में चुदाई कर लेते है। पहले वो लंड की चुसाई नहीं करती थी। मगर अब तो वो लंड को जी भरकर चूसती है। कभी-कभी ज्यादा मस्ती आ जाती है तब अपनी गांड भी मरवाती है।


तो दोस्तों कैसी लगी मेरी रियल लाइफ Free Sex Kahani। मुझे मेल जरूर दीजिए और मुजे मेल करे jack.infinium@gmail.com

Recent Posts

See All
संध्या चाची की रासलीला : Antarvasna Sex Stories

संध्या कहती है सुनील आज पहली बार में अपने मुंह में लंड लेना चाहती हूं। सुनील क्यों तुमने अपने पति का लंड कभी नहीं चूसा। संध्या इतना छोटा लंड चूसने में मजा भी आएगा इसलिए नहीं मन होता है। फिर वो लंड अपन

 
 
 
चचेरी बहन की चुत चाटी : Hindi Sex Stories

मेरी छोटी चचेरी बहन को हगते टाइम कुछ चुभ गया। तो वो रोने लगी। मैंने उसका दर्द कम करने के लिए उसकी चुत चाटी और बदले में अपना लंड भी चटवाया।

 
 
 
दोस्त की माल ने पैसे लेके अपनी सहेली चुदवाई : Hindi Sex Stories

सोनल ने साक्षी की फोटो दिखा के मुझसे उसे चोदने के लिए उकसाया और मुझसे पैसे लेके उसे मुझसे चुदवाया। साक्षी का सफेद गोरा बदन मैंने हर छेद में अंदर तक चाटा और उसकी जबरदस्त चुदाई करके उसे अपनी गर्ल फ्रेंड

 
 
 

Comments


Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Desi Stories, Antarvasna, Free Sex Kahani, Kamvasna Stories 

कामवासना एक नोट फॉर प्रॉफिट, सम्पूर्ण मुफ्त और ऐड फ्री वेबसाइट है।​हमारा उद्देश्य सिर्फ़ फ्री में मनोरंजन देना और बेहतर कम्युनिटी बनाना है।  

Kamvasna is the best and only ad free website for Desi Entertainment. Our aim is to provide free entertainment and make better Kamvasna Community

bottom of page