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हॉट देसी हाउसवाइफ की चुदाई - Indian Sex Stories

दोस्तो, मैं विशाल शर्मा हूँ और मैं आपको एक नई Indian Sex Stories पेश करने आया हूँ।


इसलिए मैं कामवासना को बहुत लंबे समय से पढ़ता आया हूँ।

पर कभी अपनी व्यथा लिखने की हिम्मत नहीं की।


यह लॉकडाउन के दौरान हुआ था।

हमारा व्यापार भी प्रभावित हुआ।


मैं अपनी आपबीती लिखकर अपने समय का सदुपयोग कर रहा हूँ।


जयपुर में मेरा रियल स्टेट साइड बिजनेस है।


एक बार मेरे एक सहयोगी ने मुझसे कहा कि आदमी के पास मानसरोवर में एक संपत्ति है, लेकिन मकान की मालकिन एक विधवा महिला है। वह स्थिर नहीं रहती, बार-बार बदल जाती है।

मैंने उससे सब कुछ समझा और उस महिला के पास चला गया।


उस संपत्ति की मालकिन से बातचीत करने के बावजूद, मुझे सिर्फ इतना पता चला कि यहां दाल इस तरह से नहीं गलेगी।

वास्तव में, जब पहले वाला इतना बोल रहा था, तो वह सौदा करके दूसरे से बात करती थी। इस प्रकार दो या तीन लोगों को रेट लगाया जाता था।


मैंने एक रास्ता खोज निकाला और..। उसके यहां किराए पर रहने वाली एक महिला ने मुझे लालच दी।

उसका नाम था कविता।

मैंने उसे पटा लिया, हालांकि वह मेरे परिचय में नहीं थी।


मैंने उससे कहा कि मकान मालकिन किस किस से बात करती है, और अगर वह मुझे सारी जानकारी देगी, तो मैं उसे कुछ इनाम देगा।

उसने मेरी बात सुन ली।


अगले दिन शाम को बबीता ने मुझसे फोन किया और कहा कि वह मुझसे मिलना चाहती है।


तब तक सात बज चुके थे। जनवरी का महीना ठंड का था, इसलिए दिन कम थे।

मेरा कार्यक्रम शुरू हो गया था। मैंने दो पैग वोदका लिया था।


यही कारण था कि उसने मुझे घर के सामने की गली में बुलाया था।

मैं गली में आ गया था जब मैं अपनी कार से बाहर निकला।


वह पैदल आई और कार में बैठकर कहा, “यहां से गाड़ी को कहीं और ले चलो।”

उसने गाड़ी को गौर से देखा तो पता चला कि मैंने उसमें मयखाना बना रखा था।


मैंने सकुचाते हुए कहा, “वह बहुत ठंडा नहीं है, और ये मेरी हर शाम है।”

हां, तो मुझे इससे क्या? उसने पूछा।


उसकी आंखों में चमक देखी तो मैंने उससे इस तरह से कुछ पूछा कि वह बुरा न माने।

उसने मेरी आशा से हटकर सहमति में सर हिला दिया।


मैंने जल्दी से एक और गिलास बनाया और उसे पकड़ा।

उसने बिंदास भी पकड़ लिया।


हम चियर्स बोलकर सिप करने लगे।


मैंने कहा, “मुझे मालूम नहीं था कि तुम्हें भी शौक है।”

सर्दी नहीं है, उसने आंख दबाई।


मैंने सिगरेट का पैकेट उठा लिया और गिलास भरकर रख दिया।

अगले ही क्षण, वह भी अपना भाषण खत्म करके मेरी तरफ देखने लगी।


मैंने सिगरेट निकाली और उसे अपने मुँह में लगाया।

बाद में उसने भी एक सिगरेट निकाली।

उसकी सिगरेट में लौ दिखाने के लिए मैंने लाइटर जलाया।

उसने पेशेवराना ढंग से कश खींचा और कार से धुंआ उड़ा दिया।


मैंने भी अपने कश और सुलगाई खींचते हुए कहा, “यार, आपकी और हमारी लंबी जमेगी।”

वह भी हम्म कहकर खुश होती थी।


ताकि सही से बातचीत हो सके, मैं उसको अपने एक मित्र के फ़ार्म पर ले गया; साथ ही मैं वोदका का आनंद भी लेता रहूँगा।


मैं उसे पार्किंग में ले गया।


मुझे 5000 रुपये की जरूरत है और मुझे आज ही किसी को देना है, उसने अंदर आते ही कहना शुरू कर दिया। मैं ये पैसे कई किस्तों में चुकाऊँगा। मैं इसके बदले कुछ भी कर सकता हूँ।

मुझे आश्चर्य हुआ कि साली चुम्मा लेते ही अपने गाल काटने की फिराक में है।


जब मैंने उसे ध्यान से देखा, तो वह बहुत सुंदर दिख रही थी. मैंने सोचा कि इतने कम मूल्य पर भी सौदा अच्छा नहीं है।

मैंने अभी तक इस दृष्टिकोण से उसे नहीं देखा था।


बबीता ने सोचा कि मैं मना नहीं करूँगा, इसलिए वह मेरी चापलूसी करने लगी।

मैंने भी अपना रुखा व्यवहार दिखाने का प्रयास किया।


उसने मिन्नतें करते हुए जानबूझकर पल्लू गिरा दी।

जब मैं उसके मम्मों की ओर देखा तो वह एक सुंदर परी की तरह दिखती थी।


उसके ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ था, जिससे उसकी दूधिया गोलाईयां दिखाई देती थीं।

अब तक मैं भी एक मंजा हुआ खिलाड़ी था।

वह तड़फता हुआ देखकर मैं खुश हो गया।


उसने अपने मम्मे उठाकर मुझे अपनी खुशी दिखाई, जब मैंने उसकी तरफ देखा।


जब मैं बिस्तर पर बैठकर अपने गिलास में फिर से वोदका भर दी, तो उसने सोडा और पानी मिलाकर मेरे होंठों पर लगा दिया।

इसलिए वह मेरे करीब आई।


जब मैंने उसके उरोजों को हाथ लगाया, तो मुझे लगा कि वह रूई की तरह नरम था।

उसने भी कोई आपत्ति नहीं की और मुस्कुरा दी।


इससे मेरा साहस बढ़ा।


अब मैं नियंत्रण खोने लगा था।

बबीता अपना ब्लाउज उस पर खोलने लगी।


उसके रसीले आमों को अपने दोनों हाथों में लेकर मैं उनका मर्दन करने लगा।

जैसे पागल होने लगी, बबीता ने ब्रा और दोनों आम मुझे दिए।


मैंने उन्हें ब्रा से बाहर निकालकर दोनों मम्मों को बार-बार चूसने लगा।

अब बबीता मेरी पैंट और शर्ट भी खोलने लगी।


मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोला।

पेटीकोट निकालने के लिए उसने अपनी गांड उठाई।


पेटीकोट हटाते ही मैंने देखा कि सुसु की जगह पर बबीता की गुलाबी पैंटी गीली हो रही थी।


जब मैंने अपना मुँह उस जगह रखा, तो एक अद्भुत सुगंध आ गई।


अब मैं बबीता पर गिर पड़ा और उसकी कच्छी को चूसने लगा।

बीच-बीच में कच्छी निकालकर दाने और छेद के फलकों पर जीभ फेरता।


बबीता पागल हो गई थी।

उसकी मादक आवाज, “आ..आह… उई…”, पूरे कमरे को गूँजने लगा।


कुछ ही देर में वह अपने शरीर को ऐंठने लगी।

उसकी चूत से मुँह हटाकर मैंने एक सिगरेट सुलगा और कश लेने लगा।


थोड़ी देर बाद, वह उठी, मेरे सारे कपड़े उतार कर मेरे लंड पर झुक गई और मुँह में लेकर चूसने लगी।

मैं धुंआ उड़ाते हुए उसके लंड को चुसाई देता रहा।


कुछ देर बाद मैंने बबीता को बिस्तर पर किनारे लेकर सीधा लेटाया।

उसने अपनी चूत पर हाथ फेर कर मुझे आंख मारते हुए अपनी टांगें खोल दीं।


मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया।

बबीता मचल उठी और अपनी चूत पर मोटे लंड का अहसास पाते ही गांड उठा कर लंड को खींचने की कोशिश करने लगी।


उसकी हालत बिन पानी की मछली की तरह हो गई।

वह लंड डालने के लिए मिन्नत करने लगी, लेकिन मैं उसको तरसाने में बहुत खुश था।


उसने अपने छेद पर मेरे लंड को तुरंत पकड़ा और नीचे से एक झटका दिया।


इस अचानक हुए खेल से मेरी चूत में मेरा लंड आधा घुस गया।

उसने रोते हुए कहा, “आह मर गई… मेरी खुशी दोगुनी हो गई।”


जोश में मैं उसको धक्के लगाने लगा, बबीता अपनी कमर को नीचे से उठाने लगी।

जैसे कमरे में मधुर संगीत बज रहा हो।


कमरे में “फच फच फच…” की आवाज आई।

‘आइ ऊह आंह…’ बबीता के मुँह से निकल रहे शब्दों ने उस पर आग लगा दी।


थोड़ी देर चुदने के बाद, बबीता ने एकदम से मुझे कसकर पकड़ लिया और अपने नाखून मेरी पीठ पर गाड़ दिए।

वह तीव्र स्वर में चिल्लाने लगी: “आह, मैं चला गया!”


बस उसे स्खलन होना शुरू हुआ।

बहुत अच्छा स्खलन था।


झड़ने के बाद उसने मुझसे कहा, “तुम मजा लेने या देने आए हो..।” आज मैं धन्य हो गई । तुम बहुत अच्छा चोदते हो!

मैंने कहा, “अब मेरी बारी है।”

किसने मना किया है, आओ, वह तुरंत बोली।


मैंने उसको बिस्तर से थोड़ा ऊपर किया और टांगों को बिस्तर के किनारे में फंसाकर चूत में लंबे धक्के देने लगा।

बबीता मचलने लगी।


उसकी बच्चेदानी मेरा हर धक्का महसूस करती थी।

राजा, मैं धीरे-धीरे मर गया।साथ ही, गीली चूत में “फच फच…” की आवाजों से चुदाई मज़ा आने लगी।


घड़ी में अब नौ बज गए थे।

नतीजतन, मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी।


मैं और बबीता ने एक साथ अपना स्खलन पूर्ण किया।


मैं फिर से उसके होंठों को चूसने लगा, और हम दोनों ने फिर से एक पैग लगाया।

उसने इठलाते हुए पूछा, “अभी भी मन नहीं भरा क्या?”


मैंने कहा कि तुम एक बार में मन नहीं भर सकते।

मेरा भी मन नहीं भरा, उसने कहा।


मैंने पूछा: तुम्हारे पति का क्यो नहीं लेती?

“उसकी शक्ति खत्म हो चुकी है, तभी बाहर मुँह मारना पड़ रहा है,” उसने जरा उदास स्वर में कहा।


मैंने इस विषय पर अधिक चर्चा नहीं की और उसके दूध को चूमने लगा।


अब कितनी देर में मुझे फारिग करना चाहते हो? उसने पूछा।


मैंने पूछा कि क्यों इतनी जल्दी हो रही है? पति देव घर पर इंतजार कर रहे हैं क्या?

नहीं, मैं तभी आपके साथ आई हूँ क्योंकि आज वह घर पर नहीं है।


मैंने कहा, “ओके, जल्दी से मेरा लंड ढीला करो और वापस आ जाओ।”

मैंने उसे हचक कर चोदा जब वह मेरे लंड पर सवार हुई।


हम दोनों कुछ देर बाद स्वतंत्र हो गए।


हॉट इंडियन लेडी की चुदाई के बाद, मैंने उसकी मदद के लिए पांच हजार रुपये दिए, जो बाद में मुझे वापस दिए गए और मकान मालकिन से मेरा सौदा करवाया।


प्रिय, ये मेरी असली यौन कहानी है।

मैं अपनी अगली सेक्स कहानी लिखने के लिए आपको Indian Sex Stories कैसी लगी, मुझे मेल करके बताएं।

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