अनजान ट्रक ड्राइवर के साथ हम भाई बहन का अनोखा सफर: Sex Stories
- Kamvasna
- 7 hours ago
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ये एक ऐसी कहानी है जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था, लेकिन अब लगता है कि अपनी इस Antarvasana और इस अनोखी Sex Story को सबके सामने लाने का वक्त आ गया है। ये मेरी और मेरी बहन रागिनी की कहानी है, जो हमारी ज़िंदगी का सबसे अजीब और यादगार सफ़र बन गया। मैं अर्जुन हूँ, और तब मेरी उम्र 22 साल थी। रागिनी मुझसे दो साल छोटी है, 20 की थी वो। हम दोनों भाई-बहन दिल्ली में रहते थे, लेकिन हमारी नानी पिछले कई सालों से ऋषिकेश में अकेली रह रही थीं। उनकी तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई थी, और हमें जल्द से जल्द वहाँ पहुँचना था। बारिश का मौसम था, जुलाई का महीना। हमने तुरंत बस का टिकट बुक करने की कोशिश की, लेकिन बाढ़ और भूस्खलन की वजह से सारी बसें कैंसिल हो चुकी थीं। ट्रेनें भी लेट थीं। मैं और रागिनी आईएसबीटी पर खड़े हुए परेशान हो रहे थे। तभी हमारी नज़र एक पुराने से ट्रक पर पड़ी, जिसके पीछे लिखा था «हरिद्वार»। ट्रक के आगे वाले हिस्से पर तिरपाल बंधा हुआ था, और पीछे खाली डाला था, जिसमें शायद कोई सामान ढोया जाता था।
ट्रक के पास एक आदमी खड़ा था। उम्र करीब 30-32 रही होगी। कद छह फुट के आसपास, चौड़ी छाती, सांवला रंग, मूंछें हल्की सी घुमी हुईं। हाथों की नसें उभरी हुई थीं, जैसे बरसों से स्टीयरिंग थामे हुए हों। आँखें गहरी और तेज़ थीं। उसने एक पुरानी सी धोती और ऊपर एक ढीली कमीज़ पहनी हुई थी। नाम था उसका भोलू, हरियाणा के किसी छोटे से गाँव से था। हमने हिम्मत करके उससे पूछा कि क्या वो हमें हरिद्वार तक छोड़ सकता है, क्योंकि वहाँ से ऋषिकेश ज्यादा दूर नहीं था। भोलू ने हमें ऊपर से नीचे तक देखा, खासकर रागिनी को, और फिर मुस्कुराकर बोला, |बैठ जाओ पीछे डाले में, लेकिन बारिश बहुत तेज़ है, भीग जाओगे| मैंने उसकी तरफ देखा, रागिनी की तरफ देखा। रागिनी ने सिर हिलाया। और इस तरह हम दोनों उस ट्रक के पीछे वाले खाली डाले में चढ़ गए। हमने अपना एक छोटा सा बैग साथ रखा था, और एक पुरानी सी चादर जो मैंने पहले ही निकाल ली थी। बारिश की बूंदें तिरपाल पर ऐसे गिर रही थीं जैसे कोई तबला बजा रहा हो। हम दोनों डाले के एक कोने में सिमट कर बैठ गए।
सफर शुरू हुआ तो पता चला कि सड़कें बिल्कुल सुनसान थीं। कहीं कोई गाड़ी नहीं थी। बस हमारा ट्रक था, और चारों तरफ बारिश। रागिनी मेरे करीब आकर बैठ गई। वो डर रही थी। मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा। |डर मत, मैं हूँ ना| मैंने कहा। उसने सिर हिलाकर मेरी बांह पकड़ ली। मैं उसे देख रहा था। रागिनी ने सफ़ेद रंग की एक पतली सी कुर्ती और ब्लू जींस पहनी हुई थी। बारिश के पानी से उसकी कुर्ती हल्की भीग चुकी थी, जिससे उसके शरीर की बनावट झलकने लगी थी। उसके लंबे काले बाल, जो गीले होकर कंधों से चिपक रहे थे। उसकी हल्की गुलाबी त्वचा, बादलों की रौशनी में चमक रही थी। मेरा मन अजीब सा हो रहा था। भाई होने के नाते मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए था, लेकिन ये अकेलापन, ये सफर, और ये बारिश… सब कुछ मिलकर एक अजीब सी Antarvasana जगा रही थी। हम दोनों के बीच हमेशा से एक गहरा प्यार था, लेकिन ये कुछ और ही था। मेरी नज़र बार-बार उसकी छाती की तरफ जा रही थी, जो गीली कुर्ती के अंदर उभर आई थी। वो ब्रा नहीं पहनी थी, क्योंकि जल्दबाजी में निकले थे।
करीब एक घंटे बाद, ट्रक अचानक एक सुनसान से ढाबे के पास रुका। भोलू पीछे आया और बोला, |बाहर आ जाओ, चाय पी लो, बारिश थम गई है| हम नीचे उतरे। ढाबा बिल्कुल खाली था, बस एक बूढ़ा आदमी चाय बना रहा था। भोलू ने तीन गिलास चाय मंगवाई। बातें करते-करते पता चला कि वो पिछले 10 सालों से ट्रक चला रहा है, और अभी तक शादी नहीं की थी। रागिनी उसकी बातें सुनकर हंस रही थी। मैंने देखा, भोलू की नज़रें बार-बार रागिनी की छाती पर जा रही थीं। लेकिन अजीब बात ये थी कि मुझे इस पर कोई गुस्सा नहीं आ रहा था। उल्टा, मेरे अंदर कुछ और ही हलचल हो रही थी। शायद ये मेरी कामवासना का ही खेल था। रागिनी भी शरमा रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। चाय खत्म करके हम वापस ट्रक में चढ़ गए। लेकिन इस बार भोलू ने कहा, |पीछे मत बैठो, आगे केबिन में चलो, रास्ता खराब है, पीछे बहुत झटके लगेंगे|
हम दोनों आगे केबिन में चढ़ गए। वो जगह थोड़ी छोटी थी। ड्राइवर सीट पर भोलू बैठा, और हम दोनों उसके बगल वाली सीट पर, जो शायद क्लीनर की होती थी। सीट इतनी छोटी थी कि हम दोनों एक दूसरे से बिल्कुल सटकर बैठे थे। ट्रक चल पड़ा। रागिनी की कोहनी मेरी पसलियों को छू रही थी, और उसकी जांघ मेरी जांघ से चिपकी हुई थी। मौसम और खराब हो गया था। बारिश फिर से तेज़ हो गई। अंधेरा होने लगा था। भोलू ने ट्रक की हेडलाइट जलाई, लेकिन रौशनी भी कम पड़ रही थी। अचानक सामने एक पुल दिखा, जिस पर पानी चढ़ा हुआ था। भोलू ने कहा, |आगे नहीं जा सकते, पानी बहुत है, गाड़ी बह जाएगी| उसने ट्रक को एक पेड़ के नीचे, सड़क के किनारे रोक दिया। इंजन बंद कर दिया। |रात यहीं काटनी पड़ेगी| उसने कहा।
अब हम तीनों उस छोटी सी केबिन में बंद थे। बाहर घनघोर अंधेरा और मूसलाधार बारिश। अंदर सिर्फ हम तीनों की साँसों की आवाज़। मैं रागिनी के बिल्कुल करीब था। उसके शरीर की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी। भोलू ने अपनी सीट पीछे खिसका ली, और वो भी हमारी तरफ थोड़ा मुड़ा। उसने अपनी कमीज़ उतार दी, जो गीली थी। उसकी चौड़ी छाती, सांवली त्वचा और पेट पर बने हुए मांसपेशियों के निशान साफ दिख रहे थे। रागिनी की साँसें तेज़ हो गई थीं। शायद उसे भी वही एहसास हो रहा था, जो मुझे हो रहा था। ये हमारी सच्ची कहानी है, जिसे मैं हमेशा अपने सीने में दबाए रखता था।
भोलू ने अचानक रागिनी से कहा, |बहुत ठंड लग रही होगी तुम्हें, ये लो मेरा कंबल| उसने अपनी सीट के नीचे से एक कंबल निकाला और हमारी तरफ बढ़ा दिया। रागिनी ने कंबल ले लिया और हम दोनों ने उसे अपने ऊपर डाल लिया। लेकिन इससे हम दोनों और भी करीब आ गए। कंबल के नीचे, मेरा हाथ उसकी कमर पर चला गया। रागिनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बस अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मेरी उंगलियाँ उसकी कमर की मोड़ पर धीरे-धीरे घूमने लगीं। उसकी साँसें गर्म होकर मेरी गर्दन से टकरा रही थीं। मेरा लिंग अब अकड़ने लगा था। जींस के अंदर मेरा लौड़ा तन गया था, और उसकी जांघ से सटा हुआ था। रागिनी ने इसे ज़रूर महसूस किया होगा, क्योंकि उसने अपनी जांघ को हल्का सा दबाया, जैसे पुष्टि कर रही हो।
भोलू ये सब देख रहा था। उसकी आँखों में एक शैतानी चमक थी। उसने धीरे से अपनी धोती को एडजस्ट किया, और मैंने देखा कि उसका भी लंड उठ चुका था। धोती के नीचे एक तंबू सा तन गया था। रागिनी ने भी वो देखा। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया। मैंने कंबल के नीचे अपना हाथ उसकी कुर्ती के अंदर डाल दिया। सीधा उसकी पीठ पर। उसकी त्वचा रेशम की तरह मुलायम थी। मैं धीरे-धीरे उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। वो सिहर उठी। मैंने अपना हाथ ऊपर ले जाकर उसकी ब्रा की हुक ढूंढी, लेकिन याद आया, उसने पहनी ही नहीं थी। सीधे उसकी नंगी पीठ पर मेरा हाथ घूम रहा था। मैंने हौले से उसके कान में फुसफुसाया, |रागिनी, क्या तुम ठीक हो?| उसने जवाब नहीं दिया, बस अपनी बाहें मेरी गर्दन के चारों तरफ कस दीं। ये उसकी हाँ थी।
भोलू अब हमारे और करीब खिसका। उसने रागिनी के बालों को छुआ। रागिनी ने चौंककर उसकी तरफ देखा, लेकिन डरी नहीं। भोलू ने कहा, |इतनी खूबसूरत लड़की, और इतनी ठंड में काँप रही है| उसने अपना बड़ा सा हाथ रागिनी के गाल पर रख दिया। रागिनी ने आँखें बंद कर लीं। मैंने देखा, उसके होंठ हल्के से खुले। भोलू ने अपना चेहरा झुकाया और अपने मोटे होंठ उसके कोमल होंठों पर रख दिए। पहले तो रागिनी ने विरोध किया, उसका शरीर अकड़ गया। लेकिन जैसे ही भोलू ने उसके निचले होंठ को अपने दांतों से हल्का सा काटा, वो पिघल गई। उसकी बाहें मेरी गर्दन से छूट गईं और भोलू के कंधों पर जा टिकीं। भोलू उसे चूमता रहा, और मैं उन्हें देखता रहा। मेरी अपनी बहन को कोई और चूम रहा था, और मुझे इसमें एक बेतहाशा उत्तेजना हो रही थी। ये वो सच्ची कहानी है जिसे बताने से मैं हमेशा डरता था।
भोलू का चुंबन गहराता गया। उसकी जीभ रागिनी के मुँह के अंदर चली गई। रागिनी पहली बार ऐसा कुछ अनुभव कर रही थी, ये मैं जानता था, क्योंकि उसने आज तक कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनाया था। वो एक कुंवारी थी। उसकी साँसें उखड़ रही थीं। भोलू ने अपना एक हाथ उसकी कुर्ती के ऊपर, उसकी छाती पर रख दिया। रागिनी ने «आआह्ह्ह्ह» की आवाज़ निकाली। मैंने कंबल हटा दिया। अब सब कुछ खुला था। भोलू ने रागिनी की कुर्ती को ऊपर खींचना शुरू किया। रागिनी ने अपनी बाहें ऊपर कर दीं, जैसे आत्मसमर्पण कर रही हो। कुर्ती निकल गई। अब वो सिर्फ अपनी जींस और उसके नीचे एक छोटी सी पैंटी में थी। उसके स्तन, गोल, गोरे, और पूरी तरह से उभरे हुए थे। चूचियाँ हल्की गुलाबी, छोटी और तनी हुईं। भोलू ने लालची नज़रों से उन्हें देखा। फिर उसने अपना मुँह उन पर रख दिया। एक स्तन को उसने अपने बड़े से हाथ में पकड़ा, और दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा। रागिनी की पीठ मेरी छाती से सटी हुई थी। वो कराह उठी, |उह्ह्ह्ह, आआअह्ह्ह्हह| मैंने अपना हाथ उसकी जींस के बटन पर लगाया।
मैंने धीरे से उसकी जींस की ज़िप खोली। भोलू अभी भी उसके स्तनों को चूस रहा था, और उसकी चूचियों को अपने दांतों से हल्के से काट रहा था। रागिनी पूरी तरह से बेकाबू थी। उसने अपनी जांघें भींच ली थीं, जैसे कुछ रोकना चाहती हो। मैंने जींस नीचे खींची। उसने खुद अपने कूल्हे उठाए, ताकि मैं आसानी से उतार सकूँ। अब वो सिर्फ अपनी सफ़ेद पैंटी में थी। पैंटी गीली थी, सिर्फ बारिश से नहीं, बल्कि उसकी अपनी रसों से। मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को सहलाया। वो तड़प उठी। |अर्जुन, प्लीज़| वो फुसफुसाई। भोलू ने अपना ध्यान उसके स्तनों से हटाकर उसके चेहरे पर लगाया। उसने रागिनी को ज़ोर से चूमा, और फिर अपनी धोती खोल दी। उसका लंड बाहर आ गया। इतना बड़ा और मोटा लंड मैंने कभी नहीं देखा था। रंग गहरा काला, ऊपर की त्वचा ढीली, और आगे का हिस्सा चमकदार लाल। रागिनी ने जब वो देखा, तो उसकी आँखें फैल गईं। उसने डर के मारे मेरा हाथ पकड़ लिया। लेकिन उसकी आँखों में जिज्ञासा भी थी।
भोलू ने रागिनी का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। पहले तो रागिनी ने हाथ खींच लिया। लेकिन भोलू ने ज़बरदस्ती नहीं की। उसने बस अपना हाथ वहीं रखा, और इंतज़ार किया। ये बिल्कुल भी ज़बरदस्ती नहीं थी, ये एक सहमति थी। कुछ सेकंड बाद, रागिनी ने खुद अपना हाथ उसके लंड पर रख दिया। उसकी उंगलियाँ पूरी तरह उसे घेर नहीं पा रही थीं। उसने धीरे-धीरे उसे सहलाना शुरू किया। भोलू ने आँखें बंद कर लीं और «आह्ह्ह» किया। मैंने इस दौरान रागिनी की पैंटी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी थी। उसकी चुत के बाल घने और काले थे। उसकी लबिया बाहर झाँक रही थीं, गुलाबी और रस से भरी हुईं। मैंने अपनी उंगली उसकी चुत के गीलेपन में डुबोई। वो बहुत गर्म थी। मैंने उंगली अंदर डाली। रागिनी चीखी, |आआह्ह्ह्ह!| वो इतनी टाइट थी कि मेरी एक उंगली भी मुश्किल से घुसी।
भोलू अब उसके ऊपर झुक गया। उसने रागिनी को अपनी तरफ खींच लिया, और अपने पैर फैला लिए। रागिनी उसकी गोद में बैठ गई, उसकी पीठ मेरी तरफ थी। भोलू ने अपना लंड उसकी चुत के द्वार पर लगाया। रागिनी तन गई। |भोलू, धीरे से करना, पहली बार है| मैंने कहा। भोलू ने सिर हिलाया। उसने रागिनी के कूल्हों को पकड़ा, और बहुत धीरे से अपना लंड अंदर खिसकाना शुरू किया। रागिनी का चेहरा दर्द से लाल हो गया। उसके नाखून भोलू के कंधों में गड़ गए। |आआअह्ह्ह्हह! अर्जुन, बहुत दर्द हो रहा है!| वो रो पड़ी। मैंने पीछे से उसके स्तनों को पकड़ लिया, और उन्हें सहलाने लगा, ताकि उसका ध्यान बँटे। भोलू ने सिर्फ अपने लंड का आगे का हिस्सा अंदर डाला था, और रुका हुआ था। उसने रागिनी के आँसू पोंछे। |दर्द तो होगा ही छोटी, लेकिन फिर मज़ा आएगा| उसने प्यार से कहा।
कुछ मिनटों तक वो ऐसे ही रुका रहा। रागिनी की साँसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। उसने भोलू की तरफ देखा, और हल्का सा हिली, जैसे उसे आदत हो रही हो। भोलू ने इसे इजाज़त समझा, और थोड़ा और अंदर गया। इस बार रागिनी का दर्द कम था, और उसकी कराह में एक मिठास थी। |उह्ह्ह्ह, हाँ, ऐसे| भोलू ने फिर से थोड़ा और अंदर डाला। अब वो पूरी तरह उसके अंदर था। रागिनी की चुत ने उसके लंड को पूरी तरह से जकड़ लिया था। भोलू ने धीरे-धीरे झटके देने शुरू किए। पहले बहुत धीमे, फिर थोड़े तेज़। केबिन में बस पानी की बूंदों, ट्रक की हल्की हिलने की आवाज़, और रागिनी की कराहें गूंज रही थीं। |आआह्ह्ह्ह! उह्ह्ह्ह! हाँ, हाँ, ऐसे ही| वो चिल्ला रही थी। उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने अपनी पैंट खोल दी थी। मेरा लंड भी पूरी तरह तन गया था। मैं उसे देखकर हिलाने लगा। ये नज़ारा इतना उत्तेजक था कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मेरी बहन, एक अनजान ट्रक ड्राइवर के लंड पर चढ़कर चुदाई कर रही थी।
भोलू ने अब अपनी पकड़ मज़बूत की और रागिनी को ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। वो उसे ऊपर-नीचे उछाल रहा था। रागिनी की चीखें तेज़ होती जा रही थीं। |उह्ह्ह्ह! आआअह्ह्ह्हह! भोलू, मैं… मैं मर जाऊंगी| वो हाँफ रही थी। भोलू ज़ोर से हाँफ रहा था, पसीने से उसका शरीर चमक रहा था। वो रागिनी की गर्दन को चूम रहा था, उसके कंधों को काट रहा था। मैं अपनी जगह से हिला, और उनके सामने बैठ गया। मैंने अपना लंड रागिनी के मुँह के सामने लाया। रागिनी ने अपनी आँखें खोलीं, और बिना कुछ कहे, अपना मुँह खोल दिया। मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। उसने चूसना शुरू कर दिया। उसके होंठ मेरे लंड पर कसे हुए थे, और जीभ आगे-पीछे हो रही थी। अब हम तीनों एक लय में थे। भोलू पीछे से चोद रहा था, और रागिनी आगे से मेरा लंड चूस रही थी। इस एहसास ने मुझे पागल कर दिया। मेरी बहन एक चुदक्कड़ बन चुकी थी, पूरी तरह वासना में डूबी हुई।
कुछ देर बाद, भोलू ने रागिनी को पीछे से खींच लिया। अब वो उसे डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था। उसने रागिनी को सीट पर घुटनों के बल कर दिया। उसके कूल्हे हवा में थे, और उसकी चुत खुली हुई थी। मैंने उसकी चुत को फैलाकर देखा। अंदर से गुलाबी मांस बाहर निकल आया था, और रस टपक रहा था। भोलू ने अपना लंड पीछे से अंदर डाला। इस पोज़ीशन में वो पूरी गहराई तक जा सकता था। उसने एक ही झटके में पूरा लंड घुसा दिया। रागिनी ज़ोर से चिल्लाई, |आआअह्ह्ह्हह! भोलू! बहुत गहरा जा रहा है!| लेकिन उसने रुकने के लिए नहीं कहा। भोलू ने उसके कूल्हों को कसकर पकड़ा, और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। उसके अंडकोष रागिनी की चुत से टकरा रहे थे, जिससे «टप-टप» की आवाज़ आ रही थी। मैंने अपना लंड अब उसकी गांड के छेद पर लगाया, लेकिन वो इतना टाइट था कि मुझे लगा दर्द होगा, तो मैं रुक गया। इसके बजाय, मैंने अपनी उंगलियाँ उसकी चुत में डालीं, जबकि भोलू उसे चोद रहा था। रागिनी अब पूरी तरह बेहोश थी। उसकी आँखें पीछे मुड़ी हुई थीं, और मुँह से राल टपक रही थी।
भोलू ने अब अपनी रफ्तार और तेज़ कर दी। लग रहा था कि वो झड़ने वाला है। उसने रागिनी के बाल पकड़ कर खींचे, और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाया, |ले, ले, ये ले मेरा माल!| उसने अपना लंड बाहर निकाला, और रागिनी की पीठ पर झड़ने लगा। गरम, गाढ़ा सफ़ेद माल रागिनी की पीठ पर धार बनकर गिरने लगा। एक धार, दो धार, तीन धार। उसने अपना लंड रागिनी के बालों में पोंछा। मैंने भी अपनी हद पार कर ली थी। मैंने अपना लंड रागिनी के मुँह में झड़ दिया। |ये लो, पी लो सब| उसने सब निगल लिया, एक भी बूँद नहीं गिरने दी। इसके बाद हम तीनों ढेर हो गए। पसीने से तर, हाँफते हुए, एक-दूसरे से लिपटे हुए।
कुछ घंटों बाद, बारिश रुक गई, और भोर होने लगी। हम तीनों चुपचाप वहाँ बैठे रहे। कोई कुछ नहीं बोला। रागिनी ने अपनी कुर्ती पहनी, और मैंने अपनी पैंट। भोलू ने चुपके से ट्रक स्टार्ट किया। रास्ता साफ़ हो गया था। सुबह होते-होते हम हरिद्वार पहुँच गए। भोलू ने हमें उतार दिया। जाते वक्त उसने रागिनी के गाल पर हाथ फेरा और बोला, |फिर कभी सफ़र करना हो तो बुला लेना| रागिनी शर्मा गई। फिर हम दोनों ऋषिकेश के लिए बस में बैठ गए। नानी से मिले, सब ठीक था। लेकिन हम दोनों के दिमाग में बस वो एक रात घूम रही थी। उसके बाद हमने कभी उस बारे में बात नहीं की। एक अनकही सहमति थी। यही मेरी और मेरी बहन की अनोखी Antarvasana की सच्ची Sex Stories है, जो अनजान ट्रक ड्राइवर के साथ सफ़र में घटी, और हमेशा मेरे दिल में एक राज़ बनकर रह जाएगी।

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