आन्शी ऑन्टी और मैं - २ : Antarvasna Sex Stories
- Rahul Yadav
- Jun 30
- 10 min read
हेलो दोस्तों मैं राहुल आप लोगों का स्वागत करता हु।
मेरे कहानी का पहला भाग पढ़ कर कुछ लोगो ने मुझे मेल किया और अपना फीडबैक दिया। कहानी कुछ लोगो को पसंद आया और कुछ लोगो को पसन्द नही आया। एक लोग थे जिन्होंने मुझे अपनी कहानी मे और कमुखता भरने के लिए सुझाव दिया।
पहला भाग:- आन्शी ऑन्टी और मैं :1
मै अब अपने कहानी के दूसरे भाग को शुरू करता हु।
जैसा की आप लोगों को पता ही होगा ये कहानी राहुल यानी की मै और आन्शी ऑन्टी की है।
एक बार मै आप लोगो को याद दिला दु की मेरी आन्शी ऑन्टी का फिगर कैसा है।
आन्शी की उम्र उस समय 29 साल ( और अब 2026 मे 33 साल है) रंग एक दम पीले दूध की तरह गोरा, हाईट 5.4 फीट (लगभग) थी। साइज 34-32-36 था मतलब एक नम्बर की बड़े गांड वाली माल थी ।
बच्चा होने की वजह से अब तो गांड का साइज और बड़ गया है।
आन्शी की ये गोरी टांगे जैसे किसी हिरनी की मचलती कमर हो, जांघ रुई के गद्दे के जैसे वटवृक्ष की डाली हो, पेट के बीचो बीच नाभी मानो ताज महल पर काले टिके की तरह बुरी नजरो से बचा रहा हो, गला एक दम सुराही के जैसा, और उस का चेहरा एक यैवन से लबालब हंसनी का चेहरा हो । मतलब वो पूरी तरह एक ऐसी रस से भरी फुल है जिसका रस और खुशबु निचोड़ाने का मन कर रहा हैं और गांड के बारे मे क्या बोलू।
उस की गांड इतनी बड़ी है की मानो दो लड़कियों का गांड मिला कर बना हो, गांड का शेप एक दम कतीलाना है। मन तो कर रहा था आन्शी की गांड का तकिया बनाकर सो जाउ । गांड के छेद मे मुह डाल लू और पूरा चाट चाट कर लाल कर दु।
अब शुरू करता हु कहानी को।
उस दिन के बाद मेरे और आन्शी मे ज्यादा ही सेक्स भरे चैट और एक दूसरे को न्युड्स भेजने लगे। हम दोनों आपस मे जब भी मिले तो सब से नजरे बचा कर एक दूसरे से लिपट जाते और किस करने लगते।
अब पानी लेने जाता और मौका देख कर आन्शी को छेड़ने लगता और आन्शी भी मेरा साथ देती। हम दोनों आपस मे एक दूसरे के साथ खुल कर रहते थे। फोन पर बात करते समय या फिर जब भी एक दूसरे से मिलते थे एक दूसरे को गाली देकर बात करना जैसे दोस्तो मे होता है वैसे ही।
हम दोनों ही ऐसे मस्ती करते थे। पर मेरा मन आन्शी को चोदने का करता और आन्शी भी बहुत चाहती थी मै उसे चोदु।
एक बार की बात है ये सायद जनवरी के लास्ट का है। हम दोनों साथ मे बाजार मे घूम रहे थे तभी वहा पर आन्शी के जेठानी के लड़के विशाल ने हम दोनों को हाथों मे हाथ डाले देख लिया। आन्शी ने विशाल को समझाया की बस ऐसे ही साथ मे है।
उस दिन के बाद विशाल मुझे शक के नज़रिये से देखने लगा।
जब वैलेंटाइन वीक आया तो मैंने आन्शी को साथ मे समय बिताने के लिए बोला। आन्शी तुरंत तैयार हो गयी। पर मैंने पैसे के लिए बोला तो बोली कोई बात नहीं मैं देख लुंगी।
आन्शी ने अपने पति से झुठ बोला की वो अपने एक सहेली के पास जाना है और रात वही पर बीता कर आयेगी।
आन्शी के पति को भी वेलेंटाइन नहीं मनाना था तो उस ने भी कह दिया की जाओ।
आन्शी ने अपने पति को बोला की वो बच्चे को भी सहेली के पास लेकर जायेगी।
आन्शी ने अपने एक सहेली से पहले से बात कर रखा है की वो अपने पति को ऐसा बोलेगी। आन्शी की सहेली पहले मना किया पर आन्शी के मनाने पर वो तैयार हो गयी।
आन्शी ने उसे बताया की वो अपने बच्चे को एक रात के लिए उस के पास छोड़ कर जायेगी और उस रात मेरे साथ रहेगी। आन्शी ने अपने सहेली को मेरे बारे मे ज्यादा नही बताया बस इतना ही बताया की मेरा नाम राहुल है और उम्र मे आन्शी से छोटा हु।
13 फरवरी को आन्शी अपने घर से सुबह निकल गयी। आन्शी ने उस दिन काले रंग की साडी पहन रखा था। मैं भी आन्शी से सिविल लाइन पर मिला। मैं और आन्शी उस के सहेली के घर चले गए। वहा पर आन्शी ने अपने बच्चे को छोड़ कर मेरे साथ चल दिया। जाते समय आन्शी ने अपने सहेली का स्कूटी ले लिया। हम दोनों स्कूटी से चल दिये।
मैंने प्रयागराज सिटी के बाहर आउटर मे एक होटल बुक कर रखा था जिस का नाम पनाह होटल (नाम बदला हुआ) था।
हम दोनों होटल पहुँच गए वहा पर हम दोनों अपने रूम मे चले गए। हम दोनों दोपहर 12 बजे होटल पहुँचे।
होटल मे पहुँचते ही मैं आन्शी के उपर टूट पड़ा। आन्शी भी मेरा साथ देने लगी। मैंने आन्शी की साडी निकाल दिया और अब वो केवल पेटीकोट और ब्लाउज मे थी। मैंने जोस जोस मे ब्लाउज को जोर से खिच लिया जिस ब्लाउज फट गया। जिसे देख आन्शी गुस्सा हो गयी और बोली मैं एक पहन कर आई हु और एक लेकर आई हु। मैं बोला कोई बात नहीं दुसरा खरीद लेना। आन्शी हसने लगी।
मैंने आन्शी को पुरा नंंगा कर दिया । आन्शी ने भी मुझे नंंगा कर दिया। आन्शी ने तड़पते हुए बोली की राहुल अब बहुत हुआ तुम मुझे चोद दो। मैं भी चोदने के लिए तड़प रहा था। मैंने भी तुरंत आन्शी को बेड पर लिटा दिया और टांगों को फैला कर चूत पर लंड सेट किया और चूत मे लौडा डाल दिया जिस से आन्शी तड़प उठी और मुझे कस के दबा लिया।
मैं कुछ पल का इंतजार किया और आन्शी को चोदना शुरू कर दिया और आन्शी भी मस्ती मे चुदती गयी। लगभग 13-15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों साथ मे झड़ गए मैंने अपना पुरा माल आन्शी के चूत मे डाल दिया।
हम दोनों चुदाई के बाद एक दूसरे से लिपट कर सो गए और 5 बजे के आस पास जाग गए। हम दोनों साथ मे नहाये और तैयार हो कर बाहर घूमने चल दिये। आन्शी बाहर जाते समय लाल रंग की साडी पहन रखा था।
बाहर मार्केट मे आन्शी ने मेरे पसन्द के खुद के लिए कपड़े लिए और एक रेटोरेंट मे खाना खा कर लगभग 10 बजे होटल वापस आ गए।
होटल पहुँच कर आन्शी तुरंत वॉश रूम चली गयी।
मै रूम मे कपड़े एक तरफ रखने लगा और बेड को साफ कर दिया जिस से हम दोनों का दंगल हो सके। आन्शी बाहर आयी फिर मैं लाइट ऑफ करके उनकी टांगों को नाक से करीब के सूंघने लगा और जोश में आकर मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह से ऊपर करने की कोशिश की।
मैंने उसके हाथों को पकड़कर अपनी ओर खींचा और कहा- आ जा मेरी चुदक्कड़ जानेमन! और जितना हो सके उतना जोर से चीखना ताकि तेरी आवाज तेरे पति तक जा सके ताकि उस माधरचोद को पता चले आखिर कैसे चोदा जाता है तेरी जैसी माल को। फिर क्या था … मैं उनके होंठों के ऊपर टूट पड़ा. वो भी मुझे बराबर साथ दे रही थी.
हम बेतहाशा एक दूसरे को चूम रहे थे, एक दूसरे के मुंह में अपनी लार डाल रहे थे, जीभ से होंठ से खेल रहे थे।किस के दौरान मैंने उनकी साड़ी निकाल दी. आन्शी ने भी मेरी बनियान को निकाल दिया। होंठों को चूसने के बाद मैं नीचे आ गया और उनके पेटीकोट को धीरे ऊपर करके मैंने आन्शी ऑन्टी की जाँघों के बीच में सूंघा।मेरी गरम साँसों से आँटी तड़प जा रही थी। फिर मैंने उनकी टांगों और जाँघों को चाटना चूसना शुरू किया.
वो पागलों की तरह तड़प रही थी, तरह तरह की आवाज निकाल रही थी और कह रही थी- कुत्ते इतना मत तड़पा मुझे … अपना लंड मेरी चूत में डाल और मुझे तृप्त कर दे राहुल!
मैंने उनसे कहा- इतनी भी क्या जल्दी है आँटी! तब मैंने उनके ब्लाउज़ को पकड़कर जोर से खींच दिया। उस का ब्लाउज फिर फट गया.
उसने मुझे खींचकर एक झापड़ दिया- कुत्ते तूने मेरा ब्लाउज क्यों फाड़ा? और क्या आँटी आँटी लगा रखा है? मैं तुम से चुद चुकी हु , अब मैं तुम्हारी आँटी नहीं तुम्हारी रांड हूँ। तुम मुझे नाम से या कुछ भी कहकर बुला सकते हो! फिर क्या था … उसके बाद मैं उनके 34 के बड़े बड़े गोल मटोल चूचों को चूसने लगा, दबाने लगा.
उनके जिस्म की खुशबू ने मुझे पागल बना दिया था! इसके बाद मैंने उसका पेटीकोट निकाल दिया, पैंटी भी उतार दी। फिर मैंने अपनी एक उंगली आन्शी ऑन्टी की चूत में घुसा दी.
वो चिहुँक उठी ।आंटी का शरीर एकदम गदराए आम के फल का सा था, सख्त ही नर्म भी … ऐसे आम को खाने में बड़ा ही आनंद आता है जितना पका हुआ खाने में नहीं आता। मैं उसकी चूत को उंगली से चोद रहा था, साथ ही मैं उसकी टाइट निप्पल को चूस रहा था.
इधर वो भी मुझे पूरी तरह से नंगा करने में लगी थी और बोल रही थी- मैं अपने पति से कई बार चुदी हूँ पर आज तक मुझे चोदने से पहले ऐसा मजा उस ने नहीं दिया । तुम मुझे तो चूत में लंड डालने से पहले ही एक बार झाड़ दोगे.
मैंने कहा- आप माल ही ऐसी हो जिसे प्यार से, आराम से, इत्मीनान से खाया जाए।
फिर मैं बूब्स को छोड़कर उनकी चूत चाटने लगा.
सबसे पहले जब मैंने उनकी चूत में जीभ लगाई तो वो कहने लगी- ऐसे कौन करता है?
मैंने कहा- जानेमन, सेक्स में औरत को चोदने से पहले उनके शरीर के हर एक अंग को चूमकर चाटकर जब तक रोमांचित न करो तो वो सेक्स अधूरा है।
“वाकयी में राहुल … तुम खूब मजा दे रहे हो मुझे!”
मैं उनकी चूत को चाट रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ गांड के छेद में डाल दी।वो पागल हो गई।
फिर मैंने उनको अपना लंड चूसने को कहा.
उन्होंने शुरु में मना किया, फिर जिद करने पे मान गई।
वो मेरे लंड को चूसने लगी बेतहाशा।फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और एक दूसरे को चाटने चूसने लगे.
कुछ देर में ही हम दोनों एक साथ एक दूसरे के मुंह में झड़ गए।मैंने उनका सारा रस पी लिया मुझे देखकर वो भी मेरे वीर्य पीना चाहा पर पी नही पायी।
थोड़ी देर के बाद हम दोनों फिर गर्म हो गए. मैं उनकी चूत के ऊपर लंड को ले जाकर घिसने लगा.
तो वो कहने लगी- जान अब तो डाल दो. मैं तुम्हारे इस विशाल लंड को अपनी चूत में कब से लेना चाह रही हूं।
मैंने उनकी चूत के छेद में लंड टिकाकर एक जोर का झटका दिया.
वो जोर से चिल्ला पड़ी- मार दिया रे … आराम से नहीं डाल सकता कुत्ते? इतना बड़ा मूसल लंड है तेरा … एक बार में कहाँ घुसेगा।
फिर मैं धीरे धीरे उनके चूत में अपना लंड डालने लगा वो धीरे धीरे चीखने लगी- आह आह … चोद राहुल चोद!
मैंने धीरे धीरे स्पीड बढ़ायी तो वो कहने लगी- और जोर से चोद राहुल … और जोर से!
फिर मैंने कहा- जानू मुझे लाइट चालू करके आपके बदन को देखते हुए चोदना है।
मैंने लाइट आन कर ली.
मेरा जोश और बढ़ गया.
मैं आंटी के होंठों को चूमते हुए चोद रहा था।
फिर वो कहने लगी- जोर से चोद मुझे मेरी जान … आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे।
मैं भी उनको कहने लगा- हाँ जानू, आज तुम्हें मेरी रांड बनाऊंगा. तुम्हें देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. आप विशाल गोल गोल चूचों की मालकिन हो … बड़ी सी गांड की मालकिन हो … आपकी गदरायी माँसल जांघों ने मुझे सबसे ज्यादा पागल बनाया!
फिर मैंने उनसे कहा- आप मेरे लंड पर बैठ जाओ!
वो मेरे ऊपर आकर मेरा लंड अपनी चूत में टिकाकर बैठ गयी और कूदने लगी.
फिर मैंने उनको गोदी में उठा लिया और गोदी में उठाकर चोदने लगा.
वो इस पोज़ से बहुत खुश हुई और कहा- मेरी जान, ये मेरा बेस्ट पोज़ है जो आज तुम्हारे द्वारा पहली बार मुझे मिला।
इसी तरह हम दोनों घनघोर चुदाई के सागर में डूब गए.
वो झड़ गयी जिससे मेरा लंड उसके चूत में आसानी से फिसल रहा था पूरा!
फच फच की आवाज आ रही थी और मेरा लंड उसके चूत में गच गच जा रहा था।
फिर मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने स्पीड और बढ़ा दी.
तो वो बोली- अमेजिंग जानू … मेरे अंदर ही डालना तुम्हारा सारा माल!
मैंने सारा माल आंटी की चूत में छोड़ दिया।
फिर उसी तरह हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सो गए।
थोड़ी देर बाद मैंने उनसे पूछा- बेबी आप इतनी माल चीज हो. तो आपको आप के पति अच्छे से नहीं चोदते क्या जो इधर उधर मुंह मारती हो?
उन्होंने कहा- चोदना तो दूर … छूते ही नहीं!
पहले बच्चे पैदा करने तक खूब चोदे. तब जाके बच्चे हुए. जोरदार चुदाई की आदत तो उन्होंने ही मुझे डाली थी. पर अब अचानक चोदना छोड़ दिए तो मेरी शरीर की जरूरत थी तो कैसे करती। बच्चे होने के बाद बच्चों के सामने तो नहीं चोद सकते … इसलिये बंद हो गया। सच बताऊं तो इतने दिनों बाद मुझे आज सही चुदाई मिली।
हमारा चुदाई का दौर लगभग 12 बजे से पहले खतम हुआ उस के बाद जब 12 बज गये तो हम दोनों ने 14 फरवरी को वेलेंटाइन सेलिब्रेट किया केक काटा और आन्शी के लिए पहली बार ड्रिंक्स का भी प्रोग्राम किया।
ड्रिंक्स के बाद उस रात हम दोनों ने 2 राउंड की और चुदाई किया। ड्रिंक्स के बाद तो आन्शी ऑन्टी अपने आपे से बाहर हो गयी थी।
चुदते समय आन्शी मुझे अपने पति को पता नही क्या क्या बक रही थी।
मैंने उसको उस रात 3 बार चोदा … हम रात भर सोये नहीं।
सुबह 6 बजे सोये!
हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर नंगे सोये थे।
दोपहर के 12 बजे आन्शी की आँख खुली और आन्शी ने अपना फोन देखा जिस मे उस के पति का और सहेली का फोन आया था। आन्शी ने अपने पति से बात किया और बोला की फोन साइलेंट था जिस की वजह से पता नही चला और शाम को घर आ जायेगी।
आन्शी की इन बातो से उस के पति को शक हुआ। उस के बाद आन्शी ने अपने सहेली को काल किया और बोला अभी कुछ देर मे आ रही है।
आन्शी मुझे लेटे हुए ही लिप किस किया और कहा- इतनी हसीन रात के लिए धन्यवाद जानू! अब तुम मेरे हर रात के राजा हो।
आन्शी ऑन्टी बिस्तर पर से उठी और बाथ रूम जाने के लिए खड़ी हुयी पर पैर लड़खड़ने लगे और फिर वापस बिस्तर पर बैठ गयी। उस के टांगों मे इतना दम नही था की रात भर रण्डी की तरह चुदने के बाद चल सके। मैंने सहारा दिया और ऑन्टी को बाथ रूम ले कर गया।
हम दोनों एक साथ बाथरूम घंटो भर नहाया। नहाते समय भी हम दोनों ने एक और राउंड चुदाई किया। नहाने के बाद तैयार हो कर आन्शी ने पिंक कलर का सूट और काले रंग का सलवार पहन लिया और इन कपड़ो मे जोरदार माल लग रही थी मै बता नही सकता।
होटल से निकल कर आन्शी के सहेली के घर गए वहा पर आन्शी के बच्चे ने आन्शी को गले से लगाया और खुश हो गया। आन्शी की सहेली ने आन्शी को देख कर समझ गयी की आखिर रात भर आन्शी कैसे एक तबले की तरह बजी हुयी है।
आन्शी अपने घर चली गयी और मै अपने रूम पर चला गया। उस दिन बाद आन्शी ऑन्टी मेरे रूम पर आने लगी और घंटो रहती फिर चली जाती।
अब इस भाग को यही पर खत्म करता हु। अगर इस भाग का भी अच्छा फीडबैक आया खास तौर पर किसी भाभी का तो मै कालेज जाने से पहले का आखिरी चुदाई का भी कहानी बताऊंगा।
तो आप लोगों से अनुरोध है की अगर आप को Antarvasna Sex Stories पढ़ के अच्छा या खराब लगा तो मेल के जरिये जरूर बताईगा।

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