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ऐशोआराम भरी जिन्दगी की चाह - Hindi Sex Stories

मेरा नाम निशा सिंह है और मेरी वर्तमान में 29 साल की उम्र है.


आज मैं अपनी एक सच्ची Hindi Sex Stories आप लोगों के साथ शेयर कर रही हूं.

इसे मैंने आज तक कभी किसी के साथ शेयर नहीं की.


आप इसे मेरी जिंदगी का एक राज ही समझ सकते हैं.

मैं किस शहर से हूँ, यह भी मैं आप लोगों को नहीं बता सकती … बस इतना जान लीजिए कि मैं एक बहुत बड़े शहर से हूँ.


ये बात आज से 6 साल पहले की उस वक्त की है जब मेरी शादी नहीं हुई थी.

तब मैं एक प्राइवेट एयर लाइंस में एयर होस्टेस की जॉब में थी.


उस वक्त मेरी उम्र 23 साल की थी.


जब मैं कॉलेज में थी, तभी से ही मेरा फिगर देखने लायक था और लोग मुझे एक बार देखने के बाद पलट पलट कर देखते थे.

एयर होस्टेस की जॉब में वैसे भी अपने फिगर पर खास तौर पर ध्यान देना होता है और मैं भी अपने फिगर का खास ख्याल रखती थी.


उस वक्त मेरा फिगर 34-28-36 का था.

मेरे तने हुए बूब्स और उभरी हुई गांड लोगों की खास पसंद थे.

लोगों की नजर बार बार इन्हीं दो चीजों पर टिक जाती थी.


कॉलेज के समय से ही मैं काफी लालची किस्म की लड़की थी और महंगी महंगी चीजों का मुझे काफी शौक था.

जॉब में आने के बाद मेरी दोस्ती एक लड़के से हुई, जो काफी रईस फैमिली से था.


उसके साथ महंगी कारों में घूमना, मंहगे मंहगे गिफ्ट लेना मुझे काफी पसंद आने लगा था.


जल्द ही हम दोनों की दोस्ती प्यार मोहब्बत में बदल गई और कुछ महीनों के अन्दर ही मैंने उसके साथ सेक्स भी कर लिया.


वह उम्र में मुझसे तीन साल छोटा था और मुझ पर बिल्कुल दीवाना था.

उसके इसी दीवानेपन का मैंने खूब फायदा भी उठाया.


महंगे गिफ्ट के साथ साथ फाइव स्टार होटल में रुकना, फाइव स्टार रेस्टोरेंट में डिनर करना.

ये मानिए कि मैं बिल्कुल ऐश की जिंदगी जी रही थी.


इन सबके बदले बस मुझे ज्यादा कुछ नहीं करना होता था, बस उसे खुश करने के लिए महीने में एक दो बार उसके साथ सेक्स कर लेती थी.


सेक्स के मामले में वह पूरी तरह से फेल ही था.

साढ़े चार इंच का उसका हथियार मुझे संतुष्ट करना तो दूर, वह मुझे अच्छे से गर्म भी नहीं कर पाता था.


दो मिनट की चुदाई में ही वह स्माल पेनिस बॉयफ्रेंड अपना पानी खाली कर देता था और फिर पूरी रात उसका खड़ा होने का नाम भी नहीं लेता था.


इसके बावजूद भी वह मेरे लिए सब कुछ करता था.

मेरे ऊपर उसने लाखों रुपये लुटा दिए थे.


उसके अलावा भी कई लोग ऐसे थे जो कि मेरे करीब आने की कोशिश करते थे.

लेकिन मैंने केवल अपनी अय्याशी के लिए उसके अलावा किसी से भी दोस्ती नहीं की.


सेक्स मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता था, मैं बस अय्याशी भरी जिंदगी जी रही थी.


करीब डेढ़ साल तक मैंने उसके साथ बहुत एन्जॉय किया और उसके बाद वह अपनी पढ़ाई के कारण विदेश चला गया.


उसके विदेश जाने के बाद मेरी लाइफ पूरी तरह से वीरान सी हो गई.

मुझे लग्जरी लाइफ जीने की आदत सी हो गई थी और अब मैं बोरियत भरी जिंदगी जी रही थी.


मुझे पहले से ही कई लड़कों के ऑफर मिल रहे थे लेकिन उनमें वह बात नहीं थी … जो बात उस साढ़े चार इंची के लंड वाले लौंडे में थी.

इसलिए मैं सभी लड़कों को किनारे करती रही.


यूं कहिए कि मैं बस ऐसे ही इंसान की तलाश में थी जो मुझे उसकी तरह की ऐश करवाता रहे.


करीब पांच महीने तक तो मैं ऐसे ही अकेली रही.

मेरी जिंदगी में कोई लड़का नहीं था.


फिर अचानक से मेरी जिंदगी में वह हो गया जिसके बारे में तो मैंने कभी नहीं सोचा था.


एक दिन मैं अपनी जॉब पर आई.

एयरपोर्ट आने के बाद मुझे पता चला कि मेरी फ्लाइट कैंसिल हो गई है लेकिन मुझे अभी होल्ड पर रखा गया था.


मतलब मुझे किसी दूसरी फ्लाइट पर जाना पड़ सकता था.


लगभग दो घंटे इंतजार करने के बाद मुझे एक फ्लाइट में जाने का आदेश हुआ और मैं अपने जॉब पर चली गई.

यह पांच घंटे की फ्लाइट थी और फ्लाइट में जाने के बाद मैंने अपना रोज का काम शुरू कर दिया.


मैं हमेशा बिजनेस क्लास के पैसिंजर को ही अटेंड करती थी और मैं अपने डेली रूटीन के हिसाब से ही काम कर रही थी.


फ्लाइट के टेकऑफ करने के बाद मैं सभी पैंसेंजर को ब्रेकफास्ट देने लगी.


उस दिन बिजनेस क्लास में बेहद कम लोग ही सफर कर रहे थे इसलिए मेरे पास ज्यादा काम नहीं था.


करीब एक घंटे बाद एक पैसेंजर ने मुझे बुलाया.

मैं उसके पास गई तो उन्होंने मुझसे कॉफी के लिए कहा.


पहले तो मुझे सब कुछ नार्मल ही लगा और मैं उनके लिए कॉफी लेकर गई.


कॉफी देने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि क्या मैं आपसे कुछ देर बात कर सकता हूँ क्योंकि मुझे आज बेहद बोरियत महसूस हो रही हैं. चूंकि आज फ्लाइट भी पूरी तरह से खाली है.


उनकी ये बात सुनकर मुझे बहुत अजीब सा लगा क्योंकि आज तक किसी पैसेंजर ने ऐसा कुछ तो नहीं कहा था.

मेरी समझ में नहीं आया कि मैं उनको किस तरह से समझाऊं कि फ्लाइट के दौरान ऐसा करना मेरे लिए सही नहीं है क्योंकि मैं वहां अपनी जॉब करने के लिए थी, किसी का टाइम पास करने के लिए नहीं थी.


फिर भी मैं उनसे बोली- सर ज्यादा देर तो नहीं, बस मैं कुछ मिनट आपके पास रुक सकती हूं.

मैंने देखा कि आस पास की सारी सीट खाली थीं तो मैं उनके पास ही खड़ी होकर उनसे बात करने लगी.


पहले तो उन्होंने मुझसे मेरा नाम पूछा, फिर अपना नाम बताया.

उनका नाम रेड्डी था और उनकी उम्र 51 साल थी.


आगे बातें होती रहीं और उन्होंने अपने बारे में मुझे बताया.

उनका एक बड़ा बिजनेस था और अपने बिजनेस के सिलसिले में वे अक्सर ही फ्लाइट से आते जाते रहते थे.


वे अपने सफर के लिए ज्यादातर हमारी कम्पनी की फ्लाइट का ही इस्तेमाल करते थे.

उनसे ऐसे ही नार्मल बात करने के बाद मैं वापस अपने केबिन में आ गई.


करीब एक घंटे बाद उन्होंने फिर से मुझे बुलाया और कॉफी पीने की इच्छा जताई.

मैं उनके लिए फिर से कॉफी लेकर गई और वापस से कुछ देर उनके पास रुककर उनसे बात की.


ऐसे ही 6 घंटे की फ्लाइट में उन्होंने मुझसे 5 बार कॉफी मंगवाई और हर बार कुछ देर रुकने के लिए कहा.

हर बार मैं कुछ देर रुकने के बाद उनसे बातें करती रही.


ये फ्लाइट मेरे लिए बड़ी ही अजीब थी क्योंकि आज तक किसी पैसिंजर ने ऐसा कभी नहीं किया था.

मैं बस ये ही सोच रही थी कि ये बुड्ढा पागल ही है.


इसके बाद फ्लाइट को जहां जाना था, वहां पहुंच गई और वह आदमी भी चला गया.

इसके बाद मेरे दिमाग से भी ये बात आई गई हो गई.


उस घटना के करीब 20 दिन बाद मैं उसी फ्लाइट से इंडिया वापस आ रही थी और इत्तेफाक कहिए या कुछ और वही रेड्डी साहब भी उसी फ्लाइट से इंडिया वापस आ रहे थे.


उस दिन भी फ्लाइट में बिल्कुल वही मंजर था, बिजनेस क्लास में पैसेंजर ना के बराबर थे और मेरी ड्यूटी भी बिजनेस क्लास में ही थी.


हम दोनों ने एक दूसरे को देखते ही पहचान लिया था और एक दूसरे को देखते ही दोनों के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई.

वह फ्लाइट रात की थी और हम सुबह सुबह इंडिया पहुंचने वाले थे.


फ्लाइट टेकऑफ हुई और मैंने अपना रोज का काम करना शुरू किया.

उसके बाद मैं अपने केबिन में आ गई.


एक घंटे बाद फिर से रेड्डी जी ने मुझे बुलाया और फिर से उनका कॉफ़ी का ऑर्डर शुरू हो गया.

फिर वैसे ही हर बार मैं उनके लिए कॉफी लेकर जाती और कुछ देर रुककर उनसे बात करती.


आज मुझे भी कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि रात की फ्लाइट थी और सभी पैसिंजर सो चुके थे इसलिए मैं भी ज्यादा देर तक रुककर उनसे बातें करती रही.

उनसे बात करते हुए मैंने गौर किया था कि बाकी मर्दों की तरह उनकी नजर भी बार बार मेरे तने हुए बूब्स पर जा रही थी.


मैं भी मन में सोच रही थी कि इस 50 साल के बुड्ढे को भी शर्म नहीं है, जो मुझ पर नजर डाल रहा है.

इसके बाद जब हम इंडिया पहुंचने वाले थे, तो आखरी बार फिर से उन्होंने कॉफी पीने की डिमांड की और मैं उनके लिए कॉफी लेकर गई.


इस बार उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तुम बुरा न मानो तो आज मैं तुम्हें घर ड्राप कर दूं.

पहले तो मैं मन में ही बोली कि साले ठरकी बुड्ढे, अपनी उम्र देख!


उसके बाद मैंने उनसे कहा कि हम लोग केवल कंपनी की गाड़ी से ही आना जाना करते हैं.

फिर भी उन्होंने मुझे कई बार जोर दिया, तो मैंने भी उसे खुश करने के लिए हां कह दिया.


उसके बाद फ्लाइट इंडिया पहुंची और मैं अपने ऑफिस में रिपोर्टिंग करने के बाद एयरपोर्ट से बाहर निकली.

मैंने सोचा कि रेड्डी साहब तो अभी तक चले गए होंगे क्योंकि मुझे काफी देर हो चुकी थी.

लेकिन मैं गलत थी.


एयरपोर्ट के बाहर ही रेड्डी साहब मेरा इंतजार कर रहे थे और उन्हें देखते ही मैं उनके पास चली गई.

मेरे आते ही उन्होंने अपने ड्राइवर को फोन किया और उनका ड्राइवर कार लेकर आ गया.


उनकी चमचमाती BMW देख मैं दंग रह गई.

पहली बार मैं उनसे काफी इम्प्रेस हुई थी.


आज दूसरी बार मैं BMW में बैठने वाली थी.

इससे पहले मैं अपने बॉयफ्रेंड की BMW में बहुत घूमी फिरी थी.


हम लोग बात करते हुए चल पड़े और रास्ते में उन्होंने मुझे अपना कार्ड देते हुए कहा कि जिंदगी में अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो मुझे याद करना.


मैंने उनका कार्ड रख लिया और जल्द ही हम लोग घर पहुंच गए.

जैसे ही मैं जाने लगी, उन्होंने मुझसे कहा- क्या मेरा इतना भी हक़ नहीं है कि तुम मुझे अपना नम्बर दो!


कुछ देर सोचने के बाद मैंने उन्हें अपना नम्बर दे ही दिया.

इसके बाद मैं अपने घर आ गई और कुछ दिन के बाद मैं ये सब भूल भी गई थी.


इसके बाद करीब एक महीने बाद मैं रात में अपने बेडरूम में लेटी हुई मोबाइल पर अपनी सहेलियों के साथ चैटिंग कर रही थी.


उस वक्त रात के 11 बज रहे थे.


तभी अचानक से मुझे एक नए नम्बर से मैसेज आया.


पहले तो मैं सोच में पड़ गई कि इतनी रात में किसने मुझे मैसेज कर दिया.

फिर जब मैंने उस नम्बर की प्रोफ़ाइल चेक की तो उसमें रेड्डी साहब की फ़ोटो देख कर मैं समझ गई कि ये उनका नम्बर है.


इसके बाद मैंने भी उन्हें रिप्लाई दिया और हम दोनों के बीच मोबाइल पर ही चैटिंग शुरू हो गई.

उस रात 2 बजे तक हम दोनों के बीच ऐसे ही नार्मल चैटिंग हुई.


इसके बाद तो जब भी मैं घर पर रहती तो अक्सर हम दोनों के बीच ऐसे ही चैटिंग हुआ करती थी.


धीरे धीरे हम दोनों में एक अच्छी दोस्ती सी हो गई थी.

लेकिन मैंने उनके बारे में कभी कुछ गलत नहीं सोचा था.


फिर एक रात हम लोग ऐसे ही चैटिंग कर रहे थे तो उन्होंने मुझे डिनर के लिए इनवाइट किया.

कुछ सोचने के बाद मैंने उन्हें हां कह दिया और उसके अगले दिन ही उन्होंने डिनर के लिए आने का कहा.


अब अगले दिन शाम को हम लोगों का मिलना तय हुआ.

शाम 7 बजे मुझे उनसे मिलने के लिए जाना था और मैं तैयार होकर उनके आने का इंतजार करने लगी.


उस दिन मैंने सिंपल सी साड़ी पहनी हुई थी, जिसके साथ मैंने बिना बांह का और गहरे गले का ब्लाउज पहना हुआ था.


कुछ देर में उनकी कार मेरे घर के बाहर आकर रुकी और मैं उनके साथ चली गई.

हम लोग रास्ते भर बातें करते हुए जा रहे थे और मुझे पता नहीं था कि वे कहां जाने वाले थे.


जल्द ही उनकी कार एक आलीशान फाइव स्टार होटल में चली गई.

हम दोनों होटल के रेस्टोरेंट में चले गए और कुछ देर बात करने के बाद हमने डिनर का ऑर्डर दिया.

हम दोनों लगातार बात कर रहे थे और रेड्डी साहब की नजर बार बार मेरे ब्लाउज के बगल से मेरे तने हुए बूब्स और मेरी कमर पर जा रही थी.


मैं इतनी भोली भी नहीं थी कि उनकी नजर को भांप न सकूँ.

मेरे मन में बस एक ही बात बार बार आ रही थी कि इस बुड्ढे को मुझसे क्या चाहिए जो ये मुझ पर इतना मेहरबान हो रहा है.


मुझे तो वह बिल्कुल ठरकी ही लग रहा था लेकिन उसकी बातों से ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा था क्योंकि वह एक नॉर्मल दोस्त की तरह ही मुझसे बात कर रहा था.

इसके बाद हमने डिनर किया और डिनर करने के बाद उन्होंने अपने कोट की जेब से एक गिफ्ट पैकेट निकाला और मुझे देते हुए कहा.


‘निशा ये हमारी दोस्ती के लिए मेरी तरफ़ से एक छोटा सा गिफ्ट तुम्हारे लिए है, लेकिन तुम इसे घर जाकर ही देखना.’

कुछ देर रुकने के बाद हम लोग वापस आ गए.

उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया.


घर आकर मैं अपने बेडरूम में गई और कपड़े बदलने के बाद उस गिफ्ट पैकेट को खोलने लगी.

पैकेट खोलते ही मैंने देखा कि उसमें एक आई फोन था और उसके साथ ही एक खत भी था.


आई फोन देखकर तो मेरे होश उड़ गए क्योंकि एक लाख रुपये का गिफ्ट उन्होंने मुझे कैसे दे दिया था.


फिर मैं उस खत को पढ़ने लगी, जिसमें लिखा था कि निशा तुम मुझे बेहद पसंद हो और मैं तुम्हें अपनी गर्लफ्रैंड बनाना चाहता हूं. भले ही हम दोनों की उम्र में बड़ा फासला है लेकिन मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा. अगर तुम्हें मेरी बात पसंद आए तो आगे बढ़कर मुझे फोन करना वर्ना मैं समझ लूंगा कि तुम्हें मेरी दोस्ती पसंद नहीं है. उसके बाद मैं कभी भी तुम्हें फोन या मैसेज नहीं करूंगा.


उनका खत पढ़कर तो मैं बड़ी दुविधा में पड़ गई कि उनके इस खत का क्या जवाब दूं. अगर वे मेरी उम्र के होते तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी.

लेकिन वे मुझसे दुगने से भी ज्यादा बड़े हैं और मैं उनकी बेटी की उम्र की हूं.


सारी रात मैं इसी सोच में रही कि मैं आगे क्या करूँ.

लेकिन मेरे मन में भी लालच तो पहले से ही भरा हुआ था और कुछ सालों से मुझे जो लग्जरी लाइफ जीने की आदत पड़ गई थी, उस लाइफ को जीने के लिए मुझे रेड्डी साहब से अच्छा पार्टनर नहीं मिल सकता था. बस दिक्कत थी तो हम दोनों के उम्र की.


बहुत सोचने के बाद मैंने अपने मन से कहा- चलो अब जो होगा देखूंगी. अगर मुझे सब कुछ मिल रहा है तो क्या दिक्कत है.

मैंने अपने मन से समझौता करते हुए उनको हां बोलने का सोच ली.


उस रात तो मैंने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया और अगली सुबह मैं अपनी जॉब पर चली गई.

दो दिनों तक हमारी कोई भी बात नहीं हुई और उनका भी कोई मैसेज नहीं आया.


तीसरे दिन जब मैं घर पर थी तो रात में उनको मैंने मैसेज किया.

हमारे बीच चैटिंग शुरू हो गई और मैंने उन्हें अपनी बात बता दी.


मेरा जवाब सुनकर उन्हें बेहद खुशी हुई और हम दोनों के बीच रोज ही बातों का सिलसिला शुरू हो गया.

हम दोनों जितनी भी बात करते, उतनी ही एक दूसरे के नजदीक आ रहे थे.


हमारा मिलना जुलना भी शुरू हो गया. अब तो आए दिन हम लोग किसी न किसी फाइव स्टार होटल में जाकर डिनर और लंच करते थे.

मुझे महंगे महंगे गिफ्ट, महंगे कपड़े हर चीज मिलने लगी.


ऐसे ही मेरी जिंदगी बिल्कुल मस्त तरीक़े से चलने लगी.

ऐसे ही छः महीने कब बीत गए, पता ही नहीं चला.


इन छह महीनों में रेड्डी साहब ने मुझे छुआ तक नहीं था.

मैं बड़ी खुश थी कि मुझे कुछ देना भी नहीं पड़ रहा है और मुझे सब कुछ मिल रहा है.


इसके बाद रेड्डी साहब का जन्मदिन आया और उन्होंने अपने फार्म हाउस में मेरे लिए पार्टी रखी.


दो दिन पहले ही उन्होंने मुझे बता दिया था और इस बार मैंने भी उनके लिए एक अच्छी सी महंगी घड़ी गिफ्ट में ली थी.

जन्मदिन वाले दिन मैं एक अच्छी सी ड्रेस पहनी और पूरी तरह से तैयार होकर उनके फार्म हाउस गई.


जब मैं पहुंची तो पार्टी शुरू हो चुकी थी और मेरे पहुंचते ही रेड्डी साहब ने मुझे अपने पास बुला लिया.

पूरी पार्टी में मैं उनके साथ ही साथ रही और पार्टी में मौजूद सभी मर्दों की नजर बस मुझ पर ही टिकी हुई थी.


पार्टी में खाने के साथ साथ ड्रिंक भी चल रही थी और मैंने भी रेड्डी साहब के कहने पर ड्रिंक ले ली.


हल्के हल्के नशे में मैं रेड्डी साहब का हाथ थामे उनके साथ घूम रही थी और रेड्डी साहब मुझे अपने गेस्ट लोगों से मिलवा रहे थे.


पार्टी में मेरी उम्र की दूसरी कोई लड़की नहीं थी और जो औरतें थीं भी, वे अपने अपने पतियों के साथ ही थीं.

पूरी पार्टी में मुझसे ज्यादा सुंदर और बोल्ड लड़की कोई नहीं थी.


मेरी ड्रेस में तने हुए मेरे बूब्स और नीचे से खुली हुई मेरी नंगी टांगें सभी मर्दों की नजर को खींच रही थीं.

रात 12 बजे तक पार्टी ऐसी ही चलती रही और फिर सभी मेहमान अपने अपने घर की तरफ जाने लगे.


मैंने भी रेड्डी साहब से जाने की इजाजत मांगी लेकिन उन्होंने कहा- मैं तुम्हें छोड़ दूँगा.

सभी मेहमानों के जाने के बाद फार्म हाउस में कुछ नौकरों के अलावा मैं और रेड्डी साहब ही बचे हुए थे.


रेड्डी साहब सभी नौकरों को काम बताने के बाद मुझे अन्दर फार्म हाउस में ले गए.

अन्दर उन्होंने मुझे एक बड़ा सा गिफ्ट पैकेट दिया और मुझसे कहा- अगर तुम्हें दिक्कत नहीं है, तो आज यहीं रुक जाओ … रात बहुत हो चुकी है.


मैंने भी उनका दिल रखते हुए उन्हें मना नहीं किया और उन्हें हां बोल दी.

इसके बाद उन्होंने मेरे और अपने लिए फिर से ड्रिंक तैयार की और हम दोनों साथ में ही ड्रिंक पीने लगे.


दो दो पैग पीने के बाद हम दोनों ही नशे से भर गए क्योंकि उससे पहले भी हमने ड्रिंक पी हुई थी.


उसके बाद रेड्डी साहब मुझे बेडरूम में लेकर गए और बोले- ये रहा तुम्हारा बेडरूम!

वह बेडरूम देख कर मुझे किसी फाइव स्टार होटल का कमरा याद आ गया.


इतना आलीशान तो फाइव स्टार का कमरा भी नहीं रहता.

हर तरह से लग्जरी चीजों से सजा हुआ बेडरूम, जिसमें एक आलीशान बिस्तर बिछा हुआ था.


कुछ देर हम दोनों वहीं बिस्तर पर बैठे हुए बात करते रहे और उसके बाद रेड्डी साहब ने मुझे जो गिफ्ट दिया था, उसे खोलने के लिए कहा.

मैंने उनके सामने ही वह गिफ्ट पैकेट खोला.


उसके अन्दर से एक गाउन था जो कि पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट (जालीदार) था.

मेरे पहनने पर मेरे अन्दर का पूरा बदन उस गाउन से झलकने वाला था और वह काफी महंगा गाउन भी था.


रेड्डी साहब ने मुझे कहा- अगर तुम्हें कोई दिक्कत नहीं है, तो मैं तुम्हें इस गाउन को पहने हुए देखना चाहता हूँ.


उनकी बात सुन मुझे पहली बार लगा कि इनके मन में कुछ न कुछ चल रहा है.

मैं उस वक्त सोच में पड़ गई थी कि करूं तो करूं क्या!


अगर मैं वह गाउन पहनती हूँ तो मेरे अन्दर का पूरा बदन उनके सामने दिखाई देगा.

कुछ समय सोचने के बाद मैंने मन में सोचा कि जो भी होगा देखा जाएगा. अगर मुझे कुछ मिल रहा है तो इतना सब तो करना ही पड़ेगा.


इसके बाद मैं बेडरूम में ही बने बाथरूम में चली गई और अन्दर जाकर अपनी ड्रेस निकाल दी.

उसके बाद मैंने उस जालीदार गाउन को पहना और अपने आप को आईने में देखने लगी.


उस गाउन से मेरी ब्रा पैंटी के साथ साथ मेरा पूरा गोरा बदन झलक रहा था.

इसके बाद मैं धीरे धीरे बेडरूम में गई और रेड्डी साहब मुझे ऊपर से नीचे तक देखने लगे.


उनकी आंखों में वासना की लहर साफ साफ दिखाई दे रही थी.

मैं जाकर उनके सामने खड़ी हो गई और वे मुझे नीचे से ऊपर तक देखे जा रहे थे.


कुछ देर बाद वे खड़े हुए और अपने दोनों हाथ मेरे कंधे पर रख कर बोले- तुम किसी कयामत से कम नहीं हो निशा!

इसके बाद उन्होंने मेरे चेहरे को थामा और मेरे गालों की तरफ अपने होंठ बढ़ाने लगे.


मैंने उन्हें रोकते हुए कहा- ये सब गलत है प्लीज ऐसा मत कीजिए!

लेकिन वे मेरे गालों पर उंगलियां चलाते हुए बोले- एक बॉयफ्रेंड और गर्ल फ्रेंड के बीच इतना तो चलता है निशा. वैसे भी आज मेरा जन्मदिन है और मुझे इससे अच्छा गिफ्ट नहीं मिल सकता है. अगर तुम ये गिफ्ट दे दोगी तो मुझे भी अच्छा लगेगा.


इतना सुनने के बाद मैं उनकी आंखों में देखने लगी और बोली- लेकिन ये सब मैं रोज रोज नहीं करूंगी.

मेरे मुँह से इतना सुनकर उन्हें तो पूरी आजादी ही मिल गई थी और उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया.


मेरे गालों को ताबड़तोड़ चूमने के बाद उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठ पर लगा दिए और मेरे होंठों को चूमने लगे.

मैं भी उनका साथ देने लगी और उनके बालों को सहलाने लगी.


मेरे होंठों को चूमने के साथ साथ वे अपने हाथों को मेरी पीठ और कमर पर चला रहे थे.

मैं अपने आप को पूरी तरह से उन्हें सौंप चुकी थी.


काफी देर तक मेरे होंठों का रस पीने के बाद उन्होंने वहीं पर मेरा गाउन निकाल दिया.

अब मैं ब्रा पैंटी में उनके सामने खड़ी थी.


मेरी ब्रा से मेरे बूब्स बाहर निकलने के लिए बेताब थे और आधे बूब्स तो पहले ही ब्रा से बाहर निकले हुए थे.


रेड्डी साहब झुके और ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स चूमने लगे.


उनके चूमने से मेरे अन्दर भी वासना की लहर दौड़ गई और मेरी ‘आआह आआह ऊऊऊ ऊह ऊऊ’ की सिसकारी निकलने लगी.

कुछ देर ऐसे ही मेरे बूब्स चूसने के बाद उन्होंने एक झटके में ही मेरी ब्रा निकाल दी और मेरे दोनों दूध उछलकर उनके सामने तन गए.


उन्होंने तुरंत ही मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे दोनों दूध पर टूट पड़े.

वे मेरे एक निप्पल को चूसते हुए जोर जोर से दूसरे दूध को मसलने लगे.


वे कसकर मुझे जकड़े हुए थे और लगातार अपने हाथ मेरी नंगी पीठ और कमर पर चला रहे थे.


जल्द ही मेरे गोरे गोरे दूध बिल्कुल लाल हो गए.


उनके दूध चूसने से मैं बिल्कुल मदहोश हो गई और मेरे मुँह से जोर जोर से सिसकारी निकलने लगी ‘आआह आआ सीई ईईई ओओह ओओ गॉड उफ्फ़ बस बस्स आआह आआह ऊऊऊ.’

काफी देर तक मेरे दोनों दूध को चूसने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और अपने कपड़े निकालने लगे.


दोस्तो, मैं अब रेड्डी साहब के लंड से चुदने के लिए मन बना चुकी थी.जल्द ही रेड्डी साहब ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और बस अंडरवियर पहने ही बिस्तर पर आ गए.

अब उन्होंने मुझे पैरों से चूमना और चाटना शुरू किया और जल्द ही मेरी जांघों तक आ गए.


मेरी जांघों को सहलाते हुए अपनी जीभ से मेरी जांघ को चाटते हुए ऊपर की तरफ आने लगे.

मैं जोश से भर गई थी और अपने दोनों हाथों से अपने चूचों को मसलने लगी.


जल्द ही रेड्डी साहब मेरी नाभि तक पहुंच गए और मेरी नाभि में अपनी जीभ डालकर उसे चाटने लगे.

उनके इस तरह से नाभि चाटने से मुझे बेहद गुदगुदी होने लगी और मैं बिस्तर पर इधर उधर मचलने लगी.


इसके बाद उन्होंने मेरे दोनों हाथ को ऊपर की तरफ कर दिया और मेरे अंडरआर्म को चाटने लगे.

इसके बाद उन्होंने एक बार फिर से मेरे दोनों मम्मों को जकड़ लिया और जोर जोर से मसलते हुए बारी बारी से निप्पलों को चूसने लगे.


उस वक्त तक मैं पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और मैं अपने नाखूनों से उनकी पीठ को नोच रही थी.


मैं उनके भारी भरकम शरीर के नीचे दबी जा रही थी और मुझे बस ऐसा लग रहा था कि बस रेड्डी साहब अब मुझे चोद ही डालें.

मेरे पहले वाले बॉयफ्रेंड ने भी कभी मुझे इतनी बुरी तरह से गर्म नहीं किया था.


वह तो 5 मिनट चूमने चाटने के बाद ही चोदने लगता था और 2 मिनट में ही झड़ कर किनारे हो जाता था.


लेकिन आज मेरा पूरा बदन चुदाई की गर्मी से जल उठा था और अभी तो रेड्डी जी ने ओल्ड मैन सेक्स की बस शुरूआत ही की थी.


रेड्डी जी मेरे दोनों निप्पलों को अपनी उंगलियों से ऐसे मसल रहे थे कि मैं जोर जोर से ‘सीईईईई सीई ईईई आआ आआ आह’ कर रही थी.

जी भरकर मेरे चूचों से खेलने के बाद रेड्डी जी मेरी पैंटी के पास गए और पैंटी को पकड़कर एक बार में ही बाहर निकाल दिया.


अब मैं पूरी तरह से नंगी हो गई थी और अपने हाथों से अपनी चूत को छुपा रही थी.

उन्होंने मेरे हाथों को अलग किया और मेरी चूत देखते हुए बोले- माय गॉड वैरी टाइट!


इसके बाद उन्होंने अपनी उंगलियों से चूत को फैलाया और अपनी उंगली मेरी चूत में रगड़ने लगे.

‘सीईईई ईईईई आआह ईई आआआह प्लीज आह.’


इसके बाद रेड्डी जी मेरी चूत पर झुक गए और अपनी जीभ मेरी गुलाबी चूत पर चलाने लगे.

मेरी गीली चूत का सारा पानी वे चाट रहे थे और मैं बिस्तर पर लहरा रही थी.


रेड्डी जी कभी उंगलियों से चूत को फैलाकर अन्दर तक जीभ डाल देते तो कभी पूरी चूत ही अपने मुँह में भर लेते और जोर से चूस लेते.

पहली बार इस तरह से अपनी चूत चुसाई को मैं ज्यादा देर नहीं झेल पाई और जल्दी ही रेड्डी जी के मुँह में ही झड़ गई.


मेरी चूत से गर्म गर्म पानी निकलता जा रहा था और रेड्डी जी एक एक बूंद चूस रहे थे.

अभी भी उन्होंने मुझे छोड़ा नहीं और लगातार चूत की चुसाई चालू रखी.


जल्द ही दुबारा मेरा पूरा बदन चुदाई की गर्मी से भर उठा और अब तो बस ऐसा लग रहा था कि जल्दी से रेड्डी जी मुझे चोद दें.

आधा घंटा लगातार चूत चाटने के बाद उन्होंने अब जाकर मेरी चूत को आजाद किया और अब वे भी मेरी चुदाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे.


उन्होंने एक झटके में अपना अंडरवियर निकाल दिया और मेरी नजर उनके काले मोटे लंड पर पड़ी.

उस लंड को देखकर मेरी तो अन्दर ही अन्दर आआह निकल गई.


करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा वह काला लंड मेरी आंखों के सामने झूल रहा था.

मैं समझ गई कि आज मेरी चूत का भर्ता बनने से कोई नहीं रोक सकता.


रेड्डी जी ने लंड के सुपारे को बाहर निकाला और मेरे दोनों पैरों को फैलाकर दोनों पैरों के बीच से होते हुए मेरे ऊपर लेट गए.


उनका लंड मेरी जांघ को सहला रहा था और रेड्डी जी ने मेरे गालों को चूमते हुए मेरे दोनों घुटनों पर अपने दोनों हाथों को फंसा लिया और मेरी दोनों टांगें हवा में उठ गईं.


इस तरह से उन्होंने मुझे पूरी तरह से चुदाई की पोजीशन में कर दिया था और अब उन्होंने लंड को मेरी चूत में लगा दिया.

उनका मोटा सा गर्म सुपाड़ा मेरे छेद पर लग चुका था और तभी मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं.


मैं जानती थी कि इस लंड को आसानी से झेलना मेरे बस की बात नहीं है.

फिर भी किसी तरह से मैंने अपने आप को तैयार किया.


रेड्डी जी लगातार मेरे गालों और कान को चूम रहे थे और मेरे दोनों दूध उनके सीने के नीचे पिसे जा रहे थे.

अब उन्होंने लंड पर जोर देना शुरू किया और उनका सुपाड़ा मेरे छेद को फैलाता हुआ अन्दर की तरफ बढ़ गया.


जल्द ही सुपाड़ा गप्प से छेद में घुसा.

‘ऊऊऊई ईई मम्मीई ईई मर गई आआहह … आराम से कीजिएगा प्लीज!


रेड्डी जी- तुम बिल्कुल चिंता न करो, मैं तुम्हें जरा सी भी तकलीफ नहीं होने दूँगा.

इसके बाद बिल्कुल धीमी गति से उन्होंने लंड को अन्दर की तरफ पेलना शुरू किया.


जैसे जैसे उनका लंड अन्दर जा रहा था मेरा पूरा बदन अकड़ता जा रहा था.

इंच इंच करते हुए करीब पांच मिनट में उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया.


मैंने जोर से रेड्डी जी को जकड़ लिया था और किसी तरह से इतने मोटे लंड के दर्द को सह रही थी.

ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरी चूत में गर्म रॉड डाल दी हो.


मेरी दोनों जांघें हवा में थीं और मैं बुरी तरह से कांप रही थी.

मैं अपने होंठों को दांत में दबाकर किसी तरह से उस दर्द को बर्दाश्त कर रही थी.


रेड्डी जी वास्तव में चुदाई में माहिर मर्द थे.

उन्होंने जरा भी जल्दबाजी नहीं दिखाई क्योंकि अगर वह लंड एक बार में ही डाल देते तो मेरी बहुत बुरी हालत हो जाती.


उन्होंने ये अंदाजा लगा लिया था कि मेरी चूत उनके मोटे लंबे लंड को आसानी से नहीं झेल पाएगी इसलिए वे पूरा समय ले रहे थे ताकि मुझे तकलीफ न हो.


मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी और मुझे जो भी दर्द हो रहा था उसे सहती जा रही थी.

दस मिनट तक तो उन्होंने लंड बस डालकर ऐसे ही रखा और बस मेरे गाल, होंठ, कान को चूमते रहे.


इसके बाद रेड्डी जी ने बड़े आराम से लंड को आधा बाहर निकाला और फिर से अन्दर किया.

अब तक मेरा दर्द हवा हो गया था और मेरी चूत पानी से भर चुकी थी.


रेड्डी जी इस चीज को जल्द ही भांप गए थे.

अब उन्होंने मुझे पीठ से जकड़ लिया और मुझे बुरी तरह से चूमने लगे थे.


‘आआह मेरी जान कैसा लग रहा है अब तुम्हें?’

‘बहुत अच्छा लगा रहा है अब!’


‘अब जोर से करूं क्या?’

‘ज्यादा जोर से नहीं.’


मेरा इतना कहने के बाद उन्होंने लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया और उनका लंड गपागप अन्दर जाने लगा.

उस वक्त पहली बार चुदाई का असली अहसास मुझे हुआ था कि चुदाई का मजा क्या होता है.


जल्द ही उनकी रफ्तार इतनी तेज हो गई थी कि पलंग तक हिलने लगा था.


उन्होंने मेरी पीठ को दोनों हाथों से जकड़ रखा था और मेरे गालों को चूमते हुए लगातार मेरी चुदाई किये जा रहे थे.

मैं बुरी तरह से आआह आआह आआह आआह कर रही थी.


हम दोनों के मुँह से निकलती गर्म सांसें एक दूसरे के होंठों से टकरा रही थीं.

मैं तो उस वक्त आंख बंद किये बस उस चुदाई का मजा ले रही थी.


जल्द ही रेड्डी जी को आभास हो गया कि अब मैं अच्छे से उनके लंड को झेल सकती हूं तो उन्होंने अपनी रफ्तार इतनी तेज कर दी कि उनके धक्कों से पूरा पलंग जोर जोर से हिलने लगा.


उनके धक्के मेरे पेट पर जोर जोर से पड़ रहे थे, जिससे थप थप थप की तेज आवाज कमरे में गूँजने लगी थी.


मेरे दोनों दूध उनके सीने के नीचे बुरी तरह से दबे जा रहे थे, जिससे मुझे सीने में दर्द हो रहा था लेकिन उस दर्द से भी ज्यादा मुझे चुदाई का मजा मिल रहा था.

करीब दस मिनट की धुंआधार चुदाई के बाद रेड्डी जी रुके और उन्होंने लंड बाहर किया औऱ कपड़े से मेरी चूत का और लंड का पानी साफ किया.


इसके बाद उन्होंने मेरी एक टांग हवा में उठा ली और घुटनों के बल बैठकर लंड को अन्दर डाल दिया.

अब पानी साफ होने से चूत में लंड घिसता हुआ जा रहा था, जिससे मुझे बेहद ही ज्यादा मजा आने लगा.


मेरी एक टांग को हवा में उठाये वे जोर जोर से मुझे चोदे जा रहे थे.

मेरे दूध जोर जोर से इधर उधर हिल रहे थे, जिन्हें मैं अपने हाथों से काबू करने की कोशिश कर रही थी.


कुछ देर बाद उन्होंने मुझे पलटने के लिए कहा और मैं पेट के बल लेट गई.

लेकिन उन्होंने मेरी कमर को ऊपर उठाते हुए मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांड को सहलाते हुए चूमते हुए बोले- तुम्हारी पीछे की गोलाइयां बेहद गोरी है निशा! ये मुझे बहुत पसंद आई.


इसके बाद उन्होंने मेरी कमर को पकड़ा और लंड को मेरी चूत में लगाकर एक बार में ही अन्दर डाल दिया.

मेरे मुँह से जोर से आवाज निकली ‘सीईईई आआ आहह!’


इसके बाद उन्होंने मेरी कमर को कसकर पकड़ लिया और धक्के लगाना शुरू कर दिए.

मेरी गांड पर उनके धक्के फट फट फट फट की आवाज के साथ पड़ रहे थे और मेरे दोनों दूध नीचे झूल रहे थे.


मैंने घोड़ी बने हुए ही अपने चेहरे को तकिए पर टिका लिया, जिसके कारण मुझे नीचे से ही पीछे तक का नजारा दिख रहा था.

मैं साफ साफ देख पा रही थी कि उनका मोटा सा लंड मशीन की रफ्तार से मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था और रेड्डी जी के बड़े से अंडकोश नीचे झूल रहे थे.


मेरी चूत से टपकता हुआ पानी बिस्तर पर गिर रहा था.

करीब दस मिनट तक ऐसे ही चुदने के बाद मैं झड़ गई और मेरी चूत से पानी की धार बिस्तर पर गिरने लगी.


रेड्डी जी अभी भी मुझे लगातार चोदे जा रहे थे.

हमारी चुदाई को आधा घंटा से भी ज्यादा हो गया था. मैं उनके धक्कों से बहुत थक चुकी थी लेकिन वे बिना थके लगातार चुदाई किए जा रहे थे.


मेरी पूरी चूत पानी से भरी हुई थी और पहले जहां चूत से पानी टपक रहा था वह पानी अब झाग बनकर टपक रहा था.

मैं समझ चुकी थी कि मेरी चूत का पानी इतनी तेज चुदाई के कारण झाग में बदल गया है.


जल्द ही रेड्डी जी ने मेरी कमर को जोर से जकड़ लिया और आआह आहहह की आवाज निकालने लगे.

जल्द मेरी चूत में उनका गर्म पानी का फव्वारा फूट गया और मेरी चूत उनके वीर्य से भर गई.


रुक रुककर उनकी पिचकारी से पानी निकल रहा था और वे अभी भी धीरे धीरे मुझे चोदे जा रहे थे.

फिर उन्होंने लंड बाहर किया और मैं पलटकर बिस्तर पर लेट गई.


ओल्ड मैन सेक्स के बाद हम दोनों पूरी तरह से पसीने से भीग चुके थे और दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे.


लंड को कपड़े से साफ करने के बाद रेड्डी जी भी मेरे बगल में लेट गए और हम दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते हुए मुस्कुराने लगे.


दस मिनट बाद मुझे जोर से बाथरूम आई और मैं टॉवेल लपेटकर बाथरूम गई.

बाथरूम में मैंने आईने में अपने आप को देखी तो मेरा गोरा बदन पूरा लाल हो गया था.


मेरे दूध, जांघ, गाल और मेरी गांड पर दबाने मसलने चूमने के कारण पूरे बदन पर अलग ही लाल रंग दिखाई दे रहा था.


मेरी चूत का छेद इतने मोटे लंड घुसने से अभी भी फैला हुआ था.

पेशाब करने के बाद मैं वापस कमरे में आ गई और रेड्डी जी भी बाथरूम गए.


करीब आधा घंटा के बाद उन्होंने मुझे फिर से गर्म करना शुरू कर दिया और एक बार फिर से उन्होंने मेरी चुदाई शुरू कर दी.


रात के तीन बजे तक हम दोनों तीन बार चुदाई कर चुके थे और उसके बाद दोनों ही एक दूसरे से लिपटकर सो गए.


सुबह होते ही एक बार फिर उन्होंने मेरे साथ मॉर्निंग सेक्स का मजा लिया और फिर फ्रेश होकर मैं अपने घर आ गई.

पहली रात की चुदाई के बाद मेरे बदन का बुरा हाल हो गया था और पूरा बदन दर्द कर रहा था.


रेस्ट करने के लिए मैंने ऑफिस से दो दिन की छुट्टी ले ली और दो दिन मैंने केवल आराम किया.

हम दोनों के बीच चुदाई की शुरुआत होते ही अब हम दोनों और भी ज्यादा एक दूसरे के करीब आ गए थे.


एक दूसरे से हर एक पर्सनल बात करने लगे. हम दोनों के बीच चुदाई का वह दौर शुरू हुआ कि हफ्ते में तीन से चार रात मैं उनके साथ ही रहने लगी.

कभी उनके फार्म हाउस में तो, कभी किसी फाइव स्टार होटल में हम दोनों चुदाई का भरपूर मजा लेने लगे.


अब मैं इंटरनेशनल फ्लाइट नहीं लेती थी, बस लोकल फ़्लाइट में ही जाती थी.

मैं रेड्डी जी के साथ रहकर एक हाई प्रोफाइल जिंदगी का मजा ले रही थी, जिसमें मुझे बेहद मजा आ रहा था.


दो महीने के अन्दर ही हम दोनों के बीच बहुत ज्यादा चुदाई हुई थी.

उन्होंने मेरी चूत के साथ साथ मेरी गांड को भी बुरी तरह से चोदना शुरू कर दिया था.


तीसरे महीने मुझे पता चल गया कि मैं प्रेग्नेंट हो चुकी हूं. लेकिन रेड्डी जी ने आसानी से उस समस्या को निपटा दिया.

दोनों ने मिलकर मेरे साथ चुदाई का ऐसा खेल खेला, जिसे मैं कभी भी नहीं भूल सकती.

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