कशिश: पेंटी गिरने से पेंटी उतारने तक का सफ़र-१: Sex Stories
- Hardik
- Jul 2
- 5 min read
नमस्ते दोस्तों,
मेरा नाम हार्दिक है, मैं यहाँ एक ऐसी सच्ची घटना के बारे में में बताने जा रहा हूं, जो काफ़ी रोमांचित करनेवाली थी। घटना को अर्थपूर्ण रहने देने के लिए नाम नहीं बदले है।
मेरी उम्र 41 साल है और मेरी शादी के 16 साल हो चुके है, लेकिन एक साल पहले ही मेरा तलाक हो गया था और मेरे दो बेटे भी है, मैं अमदावाद के एक पोश विस्तार में 16 साल से मेरे खुद के फ़्लैट में अकेला रहता हूं और एक कॉर्पोरेट कंपनी में टॉप मैनेजमेंट की अच्छी पोस्ट पे काम करता हूं।
6 महीने पहले की बात है, एक सुबह रविवार के दिन मैं अपने फ्लैट की बालकनी में रैलिंग के सहारे झुके हुए, कुछ सोचते हुए चाय पी रहा था, उसी वक़्त मेरे कंधे पे ऊपर से एक गिला कपड़ा गिरा, मेरी विचारावस्था टूटी, मैंने देखा कि वो किसी लड़की की मरुन रंग की "पेंटी" थी। मैंने ऊपर देखा तो वहां एक बहुत ही खूबसूरत लड़की अपने कपड़े सुखा रही थी।
वो कान पकड़ते हुए, शर्माते हुए धीरे से sorry कह रही थी और मुझसे अपनी पेंटी वापस करने का इशारा कर रही थी। मैंने उसको रस्सी फेंकने का इशारा किया, उसने रस्सी भेजी और उसमें बांध के मैने उनकी पेंटी वापस कर दी। वो थैंक्यू कहते हुए मुस्कुराई। वो बहोत ही खूबसूरत और मासूम सी लग रही थी, उस वक्त मैं उसको पूरा नहीं देख पाया, शायद उसने ब्लैक क्रॉप टॉप जैसा कुछ पहना हुआ था।
दूसरे दिन जब मैं ऑफिस जाने के लिए पार्किंग से मेरी कार निकाल रहा था, तब मेरी नज़र पार्किंग में खड़ी वोही लड़की पर पड़ी, उसने सफ़ेद रंग का शॉर्ट स्लीव पेप्लम टॉप, जिसमें कमर के भाग पर शॉर्ट फ्रिल डिज़ाइन थी, जिससे उसके पेट का नाभि वाला आधा हिस्सा दिख रहा था और ब्ल्यू रंग की वाईड लेग जीन्स पहनी हुई थी, उसकी नाभि पियर्सिंग की हुई लग रही थी, हाथ में लेडीज़ पर्स और दूसरे हाथ में शायद उसके व्हीकल की चाबी लग रही थी, वो कुछ परेशान सी लग रही थी, उसको देख के लगा कि उसको कहीं जाने की जल्दी थी, मैं उसके नज़दीक गया और पूछा, एसक्यूसमी... कोई प्रॉब्लम है, क्या? मैं आपकी कुछ help करूँ?
मेरी आवाज़ सुनते ही वो मेरी तरफ़ मुड़ी।
संतुलित कद-काठी, फिट बॉडी और हेल्दी लेकिन कर्वी फिगर, हल्का सा गोल चेहरा, आत्मविश्वासपूर्ण बड़ी आंखें, घने, गहरे और लंबे खुले स्ट्रेट बालों वाली, ग्लैमरस लड़की लग रही थी.... बिल्कुल ज़रीन खान जैसी गोरी और बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसकी उम्र 35 के आसपास लग रही थी।
बालों की कुछ लटें उसके चेहरे पर बिखर रही थीं, उनकी मादक अदाएं... जो अनजाने में ही किसी के भी दिल की धड़कन रुकवा सकती थी। मैं उसे एक टूक देखता ही रह गया, उसकी नज़र मुझसे टकराई, वो शरमा के अपनी नज़रें झुका गई। उसकी गर्दन पे खूबसूरत सा बटरफ्लाई टैटू था।
जी वो मेरा एक्टिवा में पंक्चर है और मुझे ऑफिस जाना है, और मैं लेट हो रही हूं, वो अपनी मादक आवाज़ में बोली।
अच्छा, किस तरफ है, आपका ऑफिस?
एस जी हाईवे के पास ...
नो प्रॉब्लम, आप मेरी गाड़ी में आ सकती है, मैं भी उस तरफ जा रहा हूं, मेरा ऑफिस भी उधर ही है।
वो मेरी कार में बैठी और हम निकल पड़े। थोड़ी देर बाद वो बोली, sorry... वो कल कपड़े सूखाते वक्त आपके ऊपर मेरी पेंटी गिर गई..!!
अरे.. कोई बात नहीं, फ्लैट में तो ऐसा होता रहता है, मैंने बेफिक्री से जवाब दिया।
बाय द वे, क्या नाम है, आपका? बातचीत का दौर बढ़ाने के लिए मैने उनसे पूछा।
जी, मेरा नाम कशिश है, मैं मेरे हसबंड जैमिन के साथ आपके ऊपरवाले फ्लैट में रहती हूं।
कशिश,,, बहोत खूबसुरत और युनिक नाम है, आपका... वैसे क्या मतलब होता है, "कशिश" का..?
जी, थैंक्यू.... "कशिश" मतलब, अट्रैक्शन... एक खिंचाव या लगाव जैसा कुछ...
वैसे आप भी बहुत अट्रैक्टिव है, आप के नाम की तरह.. मैंने फ्लर्ट करते हुए कहा।
वो ह्म्म्म.... कहते हुए शर्माते हुए मुस्कुराई..
अच्छा, क्या करते है आपके हसबंड?
जैमिन एक MNC में सेल्स एंड सर्विस मैनेजर है, इसलिए वो ज़्यादातर बाहर ही रहते है। आज भी वो दो दिनों के लिए सुरत है, आज रात को आनेवाले है।
वैसे तो मेरी शादी के 10 साल हुए है, 3 महीने पहले ही हमने यहाँ आपके ऊपरवाला फ्लैट खरीदा है, हम यहाँ पिछले हफ़्ते ही रहने आए है, पहले हम नवरंगपुरा में किराए पर रहते थे।
वैसे मैं कभी अड़ोस पड़ोस में ज़्यादा ध्यान नहीं देता था, इसलिए मुझे आसपास की ज़्यादा खबर नहीं रहती थी, लेकिन हां, कुछ महीने पहले मेरे ऊपरवाले फ्लैट का रेनोवेशन चल रहा था, तो उससे समझ गया कि पुराने मालिक ने बेचने के लिए शायद रेनोवेट करवाया होगा। मेरा अनुमान सही निकला।
और किड्स वगैरह?? मैंने उसके बारे में और जानने के लिए पूछा..
वो एक गहरी साँस लेते हुए बोली, जी अभी तो ऐसा कुछ नहीं है।
मैं समझ गया कि, दोनों में से किसी एक को इंफर्टिलिटी का इश्यू होगा।
बाय द वे, मेरा नाम हार्दिक है, मैं तलाकशुदा हूं, यहां अकेला ही रहता हूँ और एक फार्मा कंपनी में जनरल मैनेजर की पोस्ट पे काम करता हूँ, मैंने अपना इंट्रो देते हुए कहा।
कैसे हुआ आपका तलाक?
एक साल हो गया, लेकिन वो एक लंबी कहानी है, फ़िर कभी बताता हूं।
ऐसे ही जान पहचान की औपचारिक बातों में मेरा ऑफिस आ गया, मैने उसे पूछा, मेरा ऑफ़िस तो आ गया... आपकी ऑफिस कहां पे है?
यहां से आगे एकाध किलोमीटर ही दूर है।
ठीक है, मैं आपको वहां छोड़ देता हूं।
उसका ऑफिस आने से वो बोली, बस बस बस यहाँ रोक दीजिए। मैंने कार रोकी और वो कार से उतरी और मुझे थैंक्स बोली।
मैने पूछा, अच्छा कशिश... शाम को आप कितने बजे निकलती हो, आप चाहो तो मैं आपको पिकअप कर लूँगा।
मैं तो 6 बजे निकलती हूं, लेकिन आप जल्दी या लेट निकलते हो तो आप चले जाना, मैं cab या रिक्शा करके आ जाऊंगी।
अरे कोई बात नहीं, मैं मैनेज कर लूंगा, मैं 6 बजे यहां आपको लेने आ जाऊंगा, मुझे आपका नंबर दे दो, मैं कॉल करूंगा। हमने नंबर एक्सचेंज कर लिया।
उसको छोड़ के मैं अपनी ऑफ़िस को निकल गया, उसको देख के और बातें करते हुए, मेरे मन में पहले दिन से ही उसके लिए एक अनकहा, अज़ीब सा आकर्षण पनपने लगा था।
शाम को उसको पिक अप करने गया तब बातों बातों ही मैंने कशिश को रोज़ मेरी कार में आने को कहा, और वो उसके लिए तैयार भी हो गई।
कहानी जारी रहेगी।
आगे मैं बताऊंगा कि कैसे पेंटी की वजह से "कशिश" मेरे बेडरूम तक पहुँची।
Sex Stories कैसी लगी?
दूसरा भाग पढ़े कशिश: पेंटी गिरने से पेंटी उतारने तक का सफ़र-२
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