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कशिश: पेंटी गिरने से पेंटी उतारने तक का सफ़र-२: Free Sex Kahani


लगातार पंद्रह बीस दिनों से रोज़ साथ आने जाने की वजह से धीरे-धीरे हमारे बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ता गया और मैं उसकी निजी ज़िंदगी को ज़्यादा से ज़्यादा जानने की कोशिश करने लगा। वो खुले विचारवाली बिंदास लड़की थी। वैसे पड़ोसी होते हुए भी हमारी मुलाकातें सिर्फ़ मेरी कार में लाने ले जाने तक ही सीमित थी, एक दूसरे के घर पे आने जाना कभी नहीं हुआ।


कशिश के प्रति मेरा आकर्षण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था। रोज़ की बातचीत से वो काफ़ी वो मेरे साथ घुल मिल गई थी और कशिश एक दोस्त की तरह अपनी हर निजी बातें शेयर करती थी, मैं अपनी सेंस ऑफ ह्यूमर से उसको हँसाता रहता था। मेरे मन में कहीं न कहीं उसको भोगने की लालसा पनपने लगी, उसके हुस्न के अंग अंग को पीने की मेरी तलब बढ़ती जा रही थी। उसके मन में मेरे लिए क्या चल रहा था, मैं नहीं जानता था।


एक बार ऑफिस से साथ में आते वक्त उसने बताया कि आज रात जैमिन 1 हफ्ते के लिए क्लायंट मीटिंग के काम से बंगलुरू जा रहा है, तो इन दिनों तो मैं घर पे अकेली बोर हो जाऊंगी। अरे कोई बात नहीं, मैं हूँ ना.... मैं भी तो अकेला हूं, हम दोनों एक दूसरे को कंपनी देंगे, उसमें क्या?


आप हमारी बोरियत दूर करे, हम आपकी बोरियत दूर करेंगे। मुझे ये सही मौका लग रहा था। थोड़ी देर वो चुप रहने के बाद बोली, हाँ तो बोरियत से बचने का आपका क्या प्लान है? मैंने जवाब देते हुए कहा कि, एक काम करते है, कल सैटरडे है, तो हम दोनों की दो दिन की छुट्टी रहती है, तो क्या कल हम "धुरंधर" फ़िल्म देखने चलें?


थोड़ा साथ में घूमेंगे, बाहर खाना खाएंगे। उसने कहा ठीक है, आप प्लान करके मुझे कॉल कर देना मैं तैयार रहूंगी। मैंने कहा ठीक है, आज शाम को मैं कॉल करता हूँ।


दूसरे दिन का प्लान करके मैने कशिश को कॉल किया, और शाम के छह बजे तैयार रहने को बोल दिया। शाम 6 बजने से पहले मैंने कॉल कर के नीचे आने को कहा, और हम लिफ़्ट में ही मिल गए। कशिश ने ऑलिव ग्रीन कलर का फुल-स्लीव रिब्ड टॉप पहना था। स्ट्रेचेबल टॉप होने की वजह से उसका कर्वी फिगर और उभार साफ़ दिख रहे थे, टॉप की नेकलाइन वाइड-राउंड थी साथ में काले रंग की फ्लेयर्ड या वाइड-लेग पेलाजो स्टाइल पैंट पहनी थी। वो इतनी सुंदर दिख रही थी कि, जी करता था, यहाँ लिफ़्ट में ही उसको दबोच लूं...


सबसे पहले हम अमदावाद के साबरमती रिवरफ्रंट गए, रिवरफ्रंट पर टहलते टहलते हमारे बीच ढ़ेर सारी बातें हुई। उसने पूछा, आपने बताया नहीं कि आपका डिवोर्स कैसे हुआ, क्या आपकी सेक्स लाइफ नॉर्मल नहीं थी?? नहीं ऐसा नहीं है, सब नॉर्मल ही था, मेरी शादी 16 साल पहले प्रेमा से हुई थी, तीन साल बाद हमने फैमिली प्लान की और 4 साल बाद एक बेटा हुआ और दूसरे 3 साल बाद दूसरा बेटा.... लेकिन इन सात आठ सालों में मुझे अपनी प्रेमा से सेक्स में रुचि नहीं लगती थी।


कुछ घिसीपीटी सेक्स लाइफ लग रही थी, मुझे सेक्स लाइफ में कुछ किक चाहिए था, कुछ नया करने को मन करता था, मेरे मन में सेक्स के लिए एक फैंटेसी थी। कैसी फैंटेसी?


वाइफ स्वैपिंग!!


वाइफ स्वैपिंग?? हाँ,, वाइफ स्वैपिंग!!


एक बार मैंने वाइफ़ स्वैपिंग के बारे में एक मैगज़ीन में पढ़ा, और 6 महीने तक उसके बारे में सोचता था कि इसके बारे में मेरी वाइफ़ को कैसे बताऊँ?


मैं बीच बीच में प्रेमा को उसके बारे में डायरेक्टली या इनडायरेक्टली बताता रहता, लेकिन वो एग्री नहीं हो रही थी। एक बार हम दोनों एक रिसॉर्ट में घूमने गए, वहां स्विमिंग पूल में प्रेमा नहा रही थी, मैं आराम कुर्सी पे लेटकर उनको देख रहा था, तब मेरी नज़र वहाँ एक और लड़की भी पूल में थी, उसपे गई, मैं उसको देखने लगा और सोचने लगा कि ये लड़की मिल जाए तो मज़ा आ जाए।


तब मेरे बाजू में बैठे एक बंदे की आवाज़ आई... कैसी लगी? वो बंदे का नाम ताहिर था। मैं सकपका गया, मैंने पूछा, कौन? वो बोला, सना... मेरी वाइफ़ मैंने कहा अच्छा आपकी वाइफ़ है!! अच्छी है, बहोत सुंदर है।


उसने कहा आपकी वाइफ़ से कम... वो कपल हमउम्र लग रहा था, दोनों अच्छे भी लगे। बातों बातों में मैने उसे वाइफ़ स्वैपिंग के बारे में पूछा, वो एग्री हुआ, लेकिन उसने कहा, मैं सना से एक बार पूछ लेता हूं।


मैंने कहा मैं भी प्रेमा से पूछ लेता हूं। उस रात को मैंने अपने रूम में आकर प्रेमा को ये बात बताई, हमारे बीच थोड़ी बहस हुई, लेकिन आखिर में सिर्फ़ एक बार करने के लिए मान गई। दूसरे दिन दोनों कपल जान पहचान के लिए मिले, साथ में ड्रिंक ली और खाना खाया। तीसरे दिन का रात का प्लान बना।


मैंने प्रेमा को उसके रूम में भेजा और सना मेरे रूम में... मैंने उस रात सना से जम के सेक्स किया। अगले दिन सुबह जब प्रेमा रूम में आई तो उसने बताया कि तुम्हें पता है कि वो उसकी बीवी नहीं है, वो एक कॉलगर्ल है और ये बात उस हरामजादे ने मेरे साथ सेक्स करने के बाद बताई।


उस टाइम "मेरा चुतिया कट गया था" पूरी तरह से... घर आने के बाद प्रेमा ने डिवोर्स पेपर तैयार करवाए और बहुत समझाने के बाद भी वो नहीं मानी और हमारा डिवोर्स हो गया।


मेरे दोनों बेटे भी उनके साथ है। भेनचोद आपका तो गज़ब चुतिया काटा उस आदमी ने..!! आँखें फ़ैला के बोली और हंसने लगी। अच्छा तुम बताओ तुम्हारी लव मैरिज थी कि अरेंज?


मैंने बात काटते हुए पूछा। मेरी लव मैरिज है, लेकिन मैं फ़िर भी इतनी खुश नहीं हूं, एक घुटन सी महसूस हो रही है, कुछ खालीपन सा लग रहा है। जैमिन ज़्यादातर बाहर रहता है, और मैं घर में अकेली बोर हो जाती थी।


मैंने हमारी ज़िंदगी के लिए जैसा सपना देखा था, वैसा नहीं हो रहा था। और सेक्स लाइफ? शुरू में तो सब ठीक था, लेकिन धीरे धीरे उनके वर्क स्ट्रेस के कारण सेक्स लाइफ भी बोरिंग सी हो गई है, मुझे तो याद भी नहीं कि मैं कब उनसे सेटिस्फाई हुई थी!! अब तो जैसे हमारे बीच एक मैकेनिकल सेक्स ही हो रहा है, जैसे मैं एक मशीन हूं, वो मुझे मशीन की तरह यूज़ कर के करवट लेके सो जाते है। उसने अपना दुःख जताते हुए कहा। ये बात करते वक़्त उसकी आँखे नम सी हो गई।


मैंने उसके कंधे पे हाथ रख के उसको सांत्वना दी। वो इतनी भावुक हो गई कि वो मुझसे लिपट गई। रिवरफ्रंट घूमने के बाद हम एक रेस्टोरेंट में डिनर किया, बाद में कुछ देर मॉल में घूमे, हमने वहां से हम दोनों के लिए कुछ आउटफिट्स खरीदे। शॉपिंग होने के बाद बाहर निकले तब तक फ़िल्म शुरू होने में आधे घंटे की देर थी। मैंने कशिश से कहा कि तुम यहां रुको, मैं कार में ये सब सामान रख के आता हूं।


इस बहाने मैंने वहाँ से निकलकर एक शो रूम से एक घड़ी और परफ्यूम खरीदा और उसका गिफ़्ट रैपिंग करवा के सब सामान के साथ कार में रख के आ गया। कशिश मेरी राह देख रही थी। 10 बजे के शो के लिए हम थियेटर में दाखिल हुए। हॉल में वो मेरी लेफ़्ट साईड वाली सीट में बैठी थी, फ़िल्म शुरू हो गई... उस रात मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल हो रखी थी, एक उम्मीद, एक डर, और एक गुनाह का थोड़ा एहसास। मैं जानता था कि ये गलत है, लेकिन मेरा दिल मानने को तैयार नहीं था।


और अब जब उसका पति शहर से बाहर था, तो उसको भोगने का एक अवसर सामने था, एक ऐसा मोड़ जो हमारी ज़िंदगी को एक नयी दिशा दे सकता था। कहानी जारी रहेगी। आगे मैं बताऊंगा कि कैसे पेंटी की वजह से "कशिश" मेरे बेडरूम तक पहुँची।


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1 Comment


Roma
Roma
Jul 06

Next part kab aayega??

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