ख़ाली घर में यार ने मेरी गांड मारी: Antarvasana
- Kamvasna
- Aug 9
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ये कहानी मेरी ज़िंदगी का वो कड़वा-मीठा सच है जिसे मैं अपने सीने में दफ़न किए घूमता था, आज पहली बार बयाँ कर रहा हूँ अपनी Antarvasana का सबसे गहरा राज़। मैं हमेशा से अपनी इस Antarvasana से डरता था, समाज क्या कहेगा, लोग क्या सोचेंगे, पर सच तो यही है कि मेरे अंदर की प्यास उस दिन जागी जब घर खाली था और मेरा यार अर्जुन मेरे पास था। ये मेरी ज़िंदगी की वो सच्ची कहानी है जिसे मैं कभी किसी को नहीं सुनाना चाहता था, पर अन्तर्वासना की इस आग ने मुझे मजबूर कर दिया कि मैं अपनी ज़बान खोलूँ।
मेरा नाम विक्रम है और मैं जयपुर के एक पॉश इलाके में रहता हूँ। मेरे घर वाले अक्सर बाहर रहते थे, पिताजी का ट्रांसफ़रेबल जॉब था और माँ भी उनके साथ ही रहती थीं। मैं अपनी पढ़ाई की वजह से जयपुर में ही अकेला रहता था, पूरे घर में सिर्फ मैं और कभी-कभार आने वाला मेरा बचपन का दोस्त अर्जुन। अर्जुन मेरा स्कूल टाइम का यार था, उम्र करीब 21 साल, कद में मुझसे थोड़ा लंबा, गेहुँआ रंग, और शरीर पर ऐसे गठे हुए मांसपेशियाँ जैसे वो जिम में घंटों पसीना बहाता हो। उसकी आँखों में एक अजीब सी शरारत थी और मुस्कान ऐसी कि कोई भी उसका दीवाना हो जाए।
ये बात उस जुलाई के महीने की है, जब जयपुर में बारिश ने सबको भिगो कर रख दिया था। शनिवार की शाम थी और मेरे माँ-पिताजी एक शादी में शामिल होने उदयपुर गए हुए थे। पूरा घर मेरे लिए खाली था। मैंने अर्जुन को फोन कर के बुलाया, कहा कि घर पर अकेला हूँ, साथ में बीयर पीते हैं और कोई फिल्म देखते हैं। अर्जुन मान गया और एक घंटे के अंदर ही बीयर की चार बोतलें ले कर आ धमका।
बारिश तेज़ हो रही थी, खिड़कियों पर पानी की बूँदें ऐसे टकरा रही थीं जैसे कोई ढोल बजा रहा हो। हमने हॉल में सोफे पर बैठ कर बीयर खोली और बातें करने लगे। अर्जुन ने अपनी शर्ट उतार कर एक तरफ फेंक दी, क्योंकि बारिश की वजह से उमस बहुत थी। उसकी चौड़ी छाती और सिक्स-पैक एब्स देख कर मेरा दिल ज़ोर से धड़का। मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतार दी, हालाँकि मेरा शरीर उसके सामने कुछ खास नहीं था, पर मुझे भी गर्मी लग रही थी।
बीयर पीते-पीते हमारी बातें गहरी होती गईं। अर्जुन ने बताया कि उसका अपनी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया है और वो बहुत दिनों से किसी से मिला नहीं। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कसक थी, एक भूख थी। मैंने भी उसे बताया कि मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है और मैं अकेला ही हूँ। बातें करते-करते दोनों नशे में धुत हो रहे थे, और अर्जुन का हाथ अचानक मेरी जाँघ पर आ गया। मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया, पर मैंने कुछ नहीं कहा।
अर्जुन ने अपना हाथ मेरी जाँघ पर ही रहने दिया और बोला, |विक्रम, तू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, तुझे एक बात बतानी है| मैंने पूछा क्या, तो वो बोला, |मुझे लड़कों के साथ रहना अच्छा लगता है, मतलब मैं गे हूँ| ये सुन कर मैं चौंक गया, पर साथ ही मेरे अंदर कुछ हलचल हुई। मैंने कहा, |कोई बात नहीं यार, दोस्ती में ऐसा क्या| तभी उसने मेरी आँखों में आँखें डाल कर पूछा, |क्या तूने कभी किसी लड़के के साथ कुछ किया है?| मैंने सिर हिला कर मना कर दिया, पर मेरे शरीर की भाषा कुछ और ही कह रही थी।
अर्जुन ने धीरे से अपना हाथ मेरी जाँघ से सरका कर मेरी छाती पर रखा और मेरे निप्पल को उँगली से छुआ। मेरे मुँह से हल्की सी सिसकारी निकली — |उह्ह्ह्ह्ह| उसने मुस्कुरा कर कहा, |तेरा शरीर तो कह रहा है कि तू भी ट्राई करना चाहता है| मैंने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था और मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं। मेरे मन में बहुत सारे विचार चल रहे थे — क्या ये सही है, क्या ग़लत, लेकिन मेरा शरीर अर्जुन के स्पर्श की माँग कर रहा था।
अर्जुन ने अपना दूसरा हाथ मेरी पीठ पर रखा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। उसने मेरे कान में फुसफुसाया, |आज पूरा घर खाली है, कोई नहीं आएगा, बस आराम से रह और मुझे करने दे| उसके ये शब्द मेरे कानों में शहद घोल रहे थे। उसने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रखे और धीरे-धीरे चूमने लगा। मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। मैंने अपना सिर पीछे कर लिया और उसे अपनी गर्दन पर और जगह दे दी।
अर्जुन अब पूरी तरह से मेरे ऊपर हावी हो रहा था। उसने मुझे सोफे पर पीठ के बल लिटा दिया और मेरे ऊपर झुक कर मेरे होंठों को चूमने लगा। उसके होंठ मुलायम और गर्म थे। मैंने भी अपने होंठ खोल दिए और उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। हम दोनों की जीभें एक दूसरे से लड़ रही थीं और मैंने अपने हाथों से उसकी चौड़ी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया। अर्जुन ने अपना हाथ नीचे ले जा कर मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड दबाया। मेरा लंड पहले ही सख्त हो चुका था और पैंट में एक तंबू बना रहा था।
उसने कहा, |शाबाश, तेरा लंड तो मेरे लिए पूरी तरह से तैयार है| ये कह कर उसने मेरी पैंट और जांघिया उतार दी। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था, उसकी नसें उभरी हुई थीं और सुपारा गीला हो रहा था। अर्जुन ने मेरे लौड़े को अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा। मैंने ज़ोर से कराहते हुए कहा, |आआह्ह्ह्ह, यार, क्या कर रहा है, बहुत अच्छा लग रहा है| अर्जुन ने मेरी आँखों में देखा और बोला, |अभी तो बहुत कुछ बाकी है|
फिर उसने झुक कर मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया। मेरा लंड पहली बार किसी के मुँह में जा रहा था, और वो भी मेरे सबसे अच्छे दोस्त के। उसके होंठों की गर्माहट और उसकी जीभ की नमी ने मुझे पागल कर दिया। वो मेरे लौड़े को जड़ से ले कर सुपारे तक चूस रहा था, और मेरे लण्ड पर उसके थूक की परत जम गई थी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और सिर्फ उस आनंद को महसूस करने लगा। मेरे मुँह से बस यही निकल रहा था, |उह्ह्ह्ह्ह, आआअह्ह्ह्हह, हाँ यार, ऐसे ही चूस, मेरा लंड चूस|
अर्जुन बहुत माहिर था। वो अपनी जीभ से मेरे लण्ड की नसों पर खेल रहा था, सुपारे को चाट रहा था, और कभी-कभी पूरा लंड मुँह से बाहर निकाल कर उसे थप्पड़ मारता और फिर से चूसने लगता। मैंने अपने हाथ उसके बालों में डाल दिए और उसे अपने लंड पर दबाने लगा। उसने मेरी इस हरकत का बुरा नहीं माना, बल्कि और ज़ोर से चूसने लगा।
कुछ देर चूसने के बाद अर्जुन ने अपनी पैंट भी उतार दी। उसका लंड भी पूरी तरह से खड़ा था, मेरे लण्ड से भी मोटा और लंबा। उसे देख कर मैं हैरान रह गया। उसका लौड़ा करीब आठ इंच का होगा, गहरे भूरे रंग का और फड़कता हुआ। उसने मुझे सोफे से उठा कर ज़मीन पर एक तकिए के सहारे पेट के बल लिटा दिया। मेरी गांड उसके सामने थी, पूरी तरह से खुली हुई।
मैं थोड़ा घबरा गया और बोला, |यार, ये क्या करने वाला है, मुझे डर लग रहा है| अर्जुन ने मेरे कान में प्यार से कहा, |बस आराम से रह, मैं धीरे-धीरे करूँगा, तुझे कोई तकलीफ नहीं होगी, उल्टा बहुत मज़ा आएगा| उसने अपनी उँगलियाँ मेरी गांड के छेद पर रखीं और धीरे-धीरे मसलने लगा। मेरा छेद बिल्कुल कसा हुआ था, कभी किसी ने वहाँ हाथ तक नहीं लगाया था। अर्जुन ने अपनी उँगली पर थूक लगाया और धीरे-धीरे मेरी गांड में डालने लगा। पहले तो बहुत तकलीफ हुई, पर फिर धीरे-धीरे मेरी मांसपेशियाँ ढीली पड़ने लगीं।
उसने अपनी एक उँगली पूरी तरह अंदर डाल दी और हिलाने लगा। मेरी गांड के अंदर एक अजीब सी गर्मी और भरापन महसूस हुआ। मैं ज़ोर-ज़ोर से कराह रहा था, |आआह्ह्ह्ह, यार, अजीब सा लग रहा है, पर अच्छा भी लग रहा है| अर्जुन ने कहा, |अभी तो मैंने उँगली डाली है, जब अपना लंड डालूँगा न, तब तू चीखेगा| फिर उसने दूसरी उँगली भी डाल दी और मेरे छेद को फैलाने लगा।
जब अर्जुन को लगा कि अब मेरी गांड तैयार है, तो उसने अपने लण्ड पर खूब सारा थूक लगाया और मेरे छेद पर रखा। मेरी साँसें थम गईं। उसने धीरे-धीरे अपने लौड़े का सुपारा अंदर डाला। मेरी गांड में जैसे आग लग गई। मैंने चीख कर कहा, |आआअह्ह्ह्हह, रुक, बहुत ज़ोर से हो रहा है| अर्जुन ने मेरी पीठ पर हाथ फेरा और बोला, |बस थोड़ी देर और, फिर तुझे मज़ा आने लगेगा| उसने अपना आधा लौड़ा मेरी गांड में उतार दिया और फिर बिल्कुल रुक गया, ताकि मेरा छेद उसके मोटे लण्ड के हिसाब से खुल सके।
कुछ सेकंड बाद उसने पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। मैं ज़ोर से चीखा, |आआह्ह्ह्ह, यार, पूरा अंदर तक जा रहा है, मेरी गांड फट जाएगी| पर अर्जुन ने अब रुकना नहीं था। उसने मेरे कूल्हे पकड़ लिए और धीरे-धीरे झटके मारने शुरू कर दिए। शुरू-शुरू में हर झटके पर मुझे दर्द हो रहा था, पर फिर जैसे-जैसे मेरी गांड उसके लण्ड की आदी होने लगी, दर्द की जगह एक अजीब सी सिहरन ने ले ली। मेरे लिए ये बिल्कुल नया अनुभव था और मेरा शरीर इसे स्वीकार कर रहा था।
अर्जुन ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। वो मेरी गांड में पीछे से ज़ोर-ज़ोर से झटके मार रहा था और मेरा लंड भी सख्त हो कर मेरे पेट और ज़मीन के बीच दब रहा था। उसकी जाँघें मेरी जाँघों से टकरा रही थीं और कमरे में चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी — चप चप, धप धप। वो बीच-बीच में मेरी गांड पर थप्पड़ भी मारता और कहता, |तेरी गांड बहुत टाइट है यार, बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसे ही चोदूँगा तुझे|
उसने मेरी पोज़िशन बदली। उसने मुझे चारों हाथ-पैरों पर कर दिया, यानी डॉगी स्टाइल में। इस पोज़िशन में मेरी गांड और भी खुल गई और अर्जुन का लंड और गहराई तक जाने लगा। मैं अपने हाथों के बल ज़मीन पर टिका था और अर्जुन मेरे पीछे घुटनों के बल बैठा मुझे चोद रहा था। हर झटके के साथ मेरा शरीर आगे की तरफ खिसकता और फिर अर्जुन मेरी कमर पकड़ कर मुझे वापस अपनी तरफ खींच लेता। मेरी गांड का छेद अब ढीला हो गया था और उसमें से एक चिकनाहट सी निकल रही थी, जिससे अर्जुन का लौड़ा आसानी से फिसल रहा था।
मैं अब दर्द पूरी तरह से भूल चुका था और सिर्फ मज़ा ले रहा था। मेरे मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थीं — |हाँ यार, मेरी गांड मार, ऐसे ही चोद, तेरा लंड बहुत अच्छा लग रहा है मेरी गांड में| ये सुन कर अर्जुन और जोश में आ गया। उसने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरा सिर पीछे की तरफ खींच कर मुझे चोदने लगा। ये एक अलग ही एहसास था, जैसे मैं पूरी तरह से उसके कब्ज़े में हूँ।
फिर अर्जुन ने मुझे उठा कर सोफे पर बिठा दिया और खुद मेरे ऊपर बैठ गया। ये रिवर्स काउगर्ल पोज़िशन थी। उसने अपनी पीठ मेरी तरफ करी और मेरे लंड पर अपनी गांड से बैठ गया। मेरा लंड उसकी गांड में चला गया और वो उछल-उछल कर मेरे लौड़े को अंदर-बाहर करने लगा। उसकी ये हरकत देख कर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, और मैंने भी उसकी कमर पकड़ कर नीचे से झटके मारने शुरू कर दिए।
अर्जुन बोला, |हाँ, ऐसे ही, तू भी मेरी गांड मार, मुझे भी मज़ा दे| ये पहला मौका था जब मैं किसी को चोद रहा था, और वो भी अपने दोस्त को। मेरा लंड उसकी गांड में जा रहा था और वो मेरे ऊपर उछल रहा था। दोनों के शरीर पसीने से भीग गए थे और हमारी साँसें बुरी तरह से फूल रही थीं।
कुछ देर बाद अर्जुन ने फिर से मुझे अपने नीचे कर लिया। इस बार उसने मुझे सोफे पर पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टाँगें ऊपर उठा कर मेरे कंधों पर रख दीं। मेरी गांड पूरी तरह से उसके सामने खुली हुई थी। उसने अपना लंड फिर से मेरी गांड में डाला और मेरी टाँगों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा। ये पोज़िशन बहुत गहरी थी और मेरी गांड में उसका लण्ड बहुत अंदर तक जा रहा था। मैं चीख रहा था, |आआअह्ह्ह्हह, हाँ, मुझे चोद, मेरी गांड फाड़ दे, ऐसे ही चोदते रह|
अर्जुन ने झुक कर मेरे होंठ चूस लिए और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर मुझे किस करने लगा, साथ ही साथ वो मेरी गांड भी मार रहा था। ये डबल सेंसेशन बहुत ही शानदार था — ऊपर से उसके होंठ और नीचे से उसका लंड। मेरी आँखों के सामने सितारे घूम रहे थे।
फिर अर्जुन ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। अब वो मुझे पूरी ताकत से चोद रहा था। उसके अंडकोष मेरी गांड पर ज़ोर-ज़ोर से टकरा रहे थे। मेरा लंड भी पूरी तरह से खड़ा था और उसमें से पानी निकल रहा था। अर्जुन बोला, |विक्रम, मैं झड़ने वाला हूँ, बता कहाँ गिराऊँ| मैंने बिना सोचे कहा, |मेरी गांड में ही भर दे, अंदर ही डाल दे सब|
अर्जुन ने अपने झटके और तेज़ कर दिए और कुछ ही सेकंड में वो मेरी गांड में ही झड़ गया। उसने ज़ोर से गरज कर मेरी गांड के अंदर अपना सारा माल छोड़ दिया। उसके गर्म-गर्म माल का एहसास मेरी गांड में बहुत अच्छा लग रहा था। उसने अपना लण्ड मेरी गांड में से निकाला तो माल मेरे छेद से बह कर सोफे पर गिरने लगा।
अब तक मैं भी झड़ने की कगार पर था। मैंने अपना लौड़ा पकड़ कर तेज़ी से हिलाना शुरू किया। अर्जुन ने झुक कर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगा। मैं उसके मुँह में ही झड़ गया, मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया। अर्जुन ने एक बूँद भी नहीं छोड़ी, सब पी गया।
फिर हम दोनों बिना कुछ बोले सोफे पर लेट गए। अर्जुन ने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी छाती पर रख लिया। हम दोनों की साँसें अभी भी तेज़ थीं और शरीर पसीने से भीगे हुए थे। कमरे में बीयर की बोतलें बिखरी हुई थीं और हमारे कपड़े इधर-उधर फैले हुए थे।
अर्जुन ने मेरी तरफ मुड़ कर कहा, |कैसा लगा?| मैंने शरमा कर कहा, |पहले तो बहुत दर्द हुआ, पर बाद में बहुत मज़ा आया| वो मुस्कुराया और बोला, |अब तुझे इसकी लत लग जाएगी, देखना| मैंने उसकी बाँह पर हल्का सा मुक्का मारा और हम दोनों हँस पड़े।
वो शाम और वो रात मेरे लिए सब कुछ बदल कर रख गई। मैं आज भी जब भी घर पर अकेला होता हूँ, अर्जुन को बुला लेता हूँ। ये मेरी सच्ची कहानी है, मेरी Antarvasana का वो सच जिसे मैं दुनिया से छुपा कर रखता हूँ, पर आज तुम सबको बता दिया।

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