top of page

भ्राता श्री ने दिया नवीन को गे सेक्स का नवीन अनुभव: Gay Sex Story

मेरे प्यारे पाठको और कामवासना की टीम आप लोगों को डॉ कामेश का प्यार भरा नमस्कार। आज मैं अपने प्रिय भ्राता श्री द्वारा लिखित एक नई कहानी जो एक सत्यघटना पर आधारित है बिना किसी परिवर्तन के प्रस्तुत कर रहा हूँ। मैं खुद इसको पढ़ने के बाद अभी हाथ में अपना शिश्न पकड़ कर कामतिरेक से घर्षण कर माल निकाल चुका हूँ और मेरे उनंत नितंब आनंद से मचल रहे हैं कि कोई पाठक उनको अपने माल से तर कर दे।


लीजिये प्रस्तुत है नई कहानी भ्राता श्री के शब्दों मे जो एक लड़के से मुलाक़ात और उसकी एक लड़की को चोदने की घटना से प्रारम्भ होकर भ्राता श्री द्वारा उसको नए रास्ते पर लाने तक के सुहाने सफर की।


उसका नाम नवीन केन्जिगे था। मुझे एक वस्त्र भंडार में मिला। गोरा चिट्टा करीब 5 फुट 7 इंच की लंबाई, इकहरा बदन, चेहरे की रंगत बता रही थी कि लौंडा किशोरावस्था से युवावस्था की सीमा पर हिलोरें ले रहा था। बाएं कान में सोने का स्टड, देख कर ही दिल में उसकी काया का रसपान करने के विचारों की जलतरंग बज उठी। पूछने पर पता चला कि यहां से E and C में डिग्री कर रहा है। अपना परिचय दिया तो तुरंत बोला कि अंकल (मेरे चौंकने के लिए काफी था), क्या आप अपना नंबर शेयर कर सकते हैं। अंधा क्या चाहे दो आंखें, तुरंत नंबर दिया। शॉपिंग हो चुकी थी, उसने खुद पूछा कि आपसे दुबारा कैसे मिलूँ। मैने पूछा, छुट्टी कब होती है?? बोला शनिवार हाफ डे रहता है, और रविवार पूरा ऑफ। बस यही तो चाहिए था मुझे, शनिवार दोपहर के बाद का समय सबसे उचित होता है भावनाओं के कार्यान्वयन के लिए।

मैने कहा, घर आओ, बोला स्योर, जब आप कहें।


मैने कहा, शनिवार क्लास के बाद आ सकते हो,


बोला ओके, लंच करके आता हूँ। मैने कहा ग्रेट!! अंकल लोकेशन दे दीजिए। मैने तुरंत भेज दिया।


अब इंतजार शनिवार का था, लगभग 12.00 बजे नवीन का कॉल आया, बोला, लास्ट क्लास फ्री है अंकल, मैं जल्दी ही आ जाऊंगा। मैने कहा, ग्रेट, एक्चुअली मैं भी यही चाहता था कि जल्दी आए लौंडा। मैं भी खाना वगैरह खाकर फ्री हो गया था।


लगभग 12.45 पर कॉल आया कि लोकेशन पर आ गया हूं। मैं बाहर निकला, देखा, क्या ड्रेस डाली थी। क्रीम कलर की पैंट पर डार्क ब्लू टी शर्ट। वाउ, आया तो मैने अपनी बांहें फैला दीं, और बिना किसी संकोच के वो भी बाहें फैलाकर लिपट गया, मानो बहुत पुरानी पहचान हो। इस दौरान मैने उसको थोड़ा कमर के पास से दबाया और अंदाज लगा कि लौंडे का लौड़े का उभार लगभग उसी रेंज में है जैसा अनुज ने बताया। वाह मन प्रसन्न हो गया। थोड़ा डियो भी लगाया था उसने। मैने कहा वेलकम नवीन, बोला थैंक्स अंकल।


अंदर ले आया। बोला क्या पियोगे, चाय या ठंडा, बोला, कुछ नहीं, आपके साथ बैठना है, बातें करनी हैं। मैने सोचा कि बातें ही नहीं, काम भी करना है।

मैने कहा ओके आओ बैठते हैं।


शुरू हुई परिवार के विषय में जानकारी आदि से। पूछा शौक क्या क्या हैं, बोला टेबल टेनिस खेलता हूं। मैने पूछा, फ्रेंडशिप करना अच्छा लगता है, या शाइ हो, बोला, नहीं मुझे बात करना और फ्रेंडशिप करना बहुत अच्छा लगता है। आपसे बात करके ही मेरा आपसे फ्रेंडशिप करने का मन हो गया था। अब मैने एक डायरेक्ट सवाल पूछा, लड़कियों से भी दोस्ती ही क्या। थोड़ा शरमाया और बोला, जी अंकल।

कितनी लड़कियों से दोस्ती है।


करीब 8-9 लड़कियों से अंकल।


ओके, सबसे गहरी दोस्ती किस लड़की से है।


बोला, एक लड़की, उसका नाम नीरा है।


अब मैने उसकी नस पकड़ने की कोशिश की, पूछा कितनी ज्यादा दोस्ती है नीरा से, और यह कहते हुए उसके गले में हाथ डाल दिया और थोड़ा अपनी ओर खींच कर चिपका लिया। इस बार लड़का थोड़ा झेंपा और बोला, बस समझिये कि दोस्ती की हद तक दोस्ती है। मैने पूछा, बुरा न मानो तो कभी फिजिकल हुए हो क्या? इस बार उसने अपने मुंह पर अपना हाथ रखा और सर हिला कर हामी भरी।

इस बार मैने उसको करीब करीब जकड़ लिया और उसके गालों पर एक किस करते हुए मैने पूछा, कितनी लड़कियों से??

बोला, बस नीरा से।


मैने पूछा, कितनी बार?

बोला 4-5 बार हो चुका है।

मतलब अब तक दो चीजें साफ हो गई थीं, कि लड़के ने अपने हुस्न और रूप का उचित सदुपयोग किया है और, लड़का फ्रैंक है, दोस्ती के साथ विश्वास होने पर स्वयं को किताब जैसे खोल सकता है।


मैने पूछा, बुरा न मानो तो एक बात पूछूँ,

बोला बुरा मानने की क्या बात है, पूछिये

मैने पूछा, कंफर्टेबल हो,


बोला ऑफ कोर्स,आपके साथ बहुत अच्छा लग रहा है।

तो क्या तुम नीरा के साथ पहले संसर्ग पर थोड़ा बता सकते हो?

बोला क्यों नहीं।


वो मेरे घर के पास में ही रहती थी। आते जाते सामना हो ही जाता था, बात तब की है जब मैं फर्स्ट ईयर में था। पर मुझे एक चीज लगता था कि वो मुझे बहुत ध्यान से देखती थी। मुझे शर्म आती थी पर नजरे बचा के मैं भी उसे देख ही लेता था। लड़की भी सुंदर थी। धीरे धीरे नजरें मिलने का टाइम बढ़ता गया। एक दिन आखिर उसने मुझसे पूछा, हेलो भैया आपका नाम क्या है।


(शुरुआत भैया से ही होती है), नाम वगैरह पूछने के बाद थोड़ा बहुत पढ़ाई लिखाई की बात हुई। मोबाइल नंबरों के आदान प्रदान के बाद फिर उसने कहा, आइए एक दिन चाय पीते हैं। पता लगा कि घर में बस वो और उसकी मां रहते थे, पिताजी बाहर नौकरी करते थे और सप्ताहांत पर आते थे। मैने कहा ओके, जब आप कहें।


शाम को आने की बात कहकर बातचीत का सिलसिला टूटा। पर अंकल इतना देर बात करने पर पर ये तो पता लग गया कि लड़की काफी सुंदर थी और मुझे काफी देर तक देखती थी। मेरे दिल के तार थोड़े से झंकृत हुए थे। शाम को चाय पीने गया, मां से भी परिचय हो गया। अब बातों बातों में ही क्या इंटरेस्ट हैं क्या हॉबीज हैं, की बातें भी होने लगीं। लेट नाइट टेक्सटिंग भी चलती रही, और हम काफी घुल मिल गए थे। एक दिन शाम के धुंधलके में उसने बातों बातों में ही मुझसे पूछा, क्या आपकी कोई गर्ल फ्रेंड है क्या।


मैं इस अचानक हुए सवाल से चौंक गया, हकबकाते हुए बोला न, नहीं तो। वो जोर से हंस दी, बोली घबरा क्यों गए आप। मैने कहा बस ऐसे ही। उसके बाद जो हुआ, उसने आगे का मार्ग खोल दिया। उसने तुरंत अपना हाथ बढ़ाया, मैने पूछा, ये क्या। बोली, क्या मैं? इस दूसरे बाउंसर से मैं चित हो गया, मैंने कहा हां, वो, ओके ओके। और अब मैने मौके पे चौका मारा और उसे अपनी ओर खींचा तो वो बिना किसी संकोच के मेरे आगोश में आधी आ गई। अंधेरा हो रहा था, मैने चारों ओर देखा, कोई नहीं था, सो कुछ देर हम लोग ऐसे ही निस्तब्ध लिपटे रहे।


इस हसीन पल की तंद्रा भंग करते हुए अंदर से मां ने आवाज लगाई, अरे नवीन आ गया क्या। अब मां को कैसे बताता कि मैं तो पिछले दस मिनट से यहीं हूँ। आया मां, कहकर उस हसीन लम्हे को विराम देते हुए, "फिर मिलते हैं" बोलकर अंदर आ गया। पर अंकल घंटों तक लगता रहा कि अभी भी वो मेरे आगोश में थी। क्या कोमल बदन और जल्दी से छूटने के चक्कर में उसकी चूची पर मेरा हाथ लग गया।


कितने कोमल, मेरे हाथ झनझना गए थे। मैं सोच में डूबा ही था कि फिर मां ने आवाज लगाई, "क्या हुआ नवीन, क्या सोच रहा है, कुछ प्रॉब्लम है क्या". अब मां को कैसे बताऊं कि, लड़का अनकहे प्यार में डूबा हुआ है". कुछ नहीं मां, मेरा एक मित्र बीमार था उसी के बारे में सोच रहा हूं। चल खाना खा ले, फिर सोचना, क्या ज्यादा बीमार है क्या, हां मां टायफायड है उसे। ओके बेटा, हाल चाल ले ले उसका। ठीक है मां।

एक दिन ऐसे ही मेसेज आया कि कल दोपहर में मैं फ्री हूं, क्या आप फ्री हो,


मैने कहा, ओके, पर मां??

बोली, तो क्या हुआ, आओ तुम (अब आप से मैं तुम हो गया था)

ओके, आता हूँ।


अंकल, दोपहर में चाय के लिए बुलाना, आप से तुम पर उतर आना, मुझे मेरे सिक्स्थ सेंस को कुछ अलग सिग्नल लग रहे थे। सो, सावधानी के तौर पर मैने एक ड्यूरेक्स कंडोम भी रख लिया। मन मेरा बल्लियों उछल रहा था, कि क्या होगा, खैर, कल दोपहर तक इंतजार तो करना ही था।


अगले दिन दोपहर में गया उसके घर, पूछा मां क्या कर रही हैं। बोली, नवीन मां आज बाहर गई हैं, शाम तक आएंगी। मन तो ग्लैडोग्लैड हो गया पर ऊपर से गुस्सा दिखाते हुए पूछा, नीरा तूने झूठ क्यों बोला? बस ऐसे ही, आओ बैठते हैं। ओके कह कर मैं बैठ गया।



आज वो बला की खूबसूरत लग रही थी। काले पायजामे पर लाइट पिंक टॉप। बातें शुरू कैसे करें। मैने पूछा, कैसी चल रही है तेरी क्लासेज, बोली गुड, अच्छी चल रही है। कहते हैं, ऐसे मौके पर लड़का ही शुरुआत करते है, सो डरते-२ मैने उसके पैर पर हाथ रखा, पूछा, और क्या हाल चाल है। मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा, जब उसने आँखें बंद कर ली और बोली, बिल्कुल ठीक, और कहकर उसने मेरा हाथ थोड़ा ऊपर खींच दिया। उसका हाथ मेरे हाथ पर, झनझना गया मैं, उपर से हाथ जांघ के ऊपरी पोर्शन तक आ गया था, सो मैंने अंदाजा लगा लिया और अपना दूसरा हाथ भी दूसरी जांघ पर समानांतर जगह पर रखते हुए दोनों हाथ कमर तक ले आया।


कोई विरोध नहीं आँखें बंद, गर्दन एक ओर मुड़ गई। अब मैने अपने होठ उसके होंठ की ओर बढ़ाए और और उसे चूमने का प्रयास किया, उसने भी अपने होठ बतख जैसे खोल दिए, और कार्यक्रम शुरू हो गया। दोनों ओर से होठों में नेगेटिव प्रेशर और होठों का रसपान, अब मेरे हाथ उसकी पीठ पर थे और अंगूठे उसकी चूचियों की मसाज कर रहे थे। पर चूची की टिप पर अंगूठा आते ही चूमते चूमते "आह आह" बोली। अब सब मामला क्लियर था, सो मैने अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों पर रख कर मसलना शुरू किया और बीच बीच में चूचियों की घुंडी भी घुमा देता था। अब लड़की "आह आह, मम्मी, प्लीज" कर रही थी।


पकड़े पकड़े ही बगल में पड़े बिस्तर पर लिटा दिया और थोड़ा सा मैं भी ऊपर चढ़ा। इधर मेरा लौड़ा भी पत्थर हुआ जा रहा था, और चीजें बर्दाश्त के बाहर हो रही थीं। उसकी आँखें अभी भी बंद थीं। अब मैने धीरे से एक हाथ उसकी चूत पर रखा और वहां पर थोड़ा गीलापन था। मतलब अब ये पूरी गरम हो गई थी।


लेटे लेटे ही उसका टॉप उतारा अंदर काली ब्रा से उसकी चूचियां झांक रही थी। उसकी ब्रा भी खोल कर अलग कर दी और एक चूचि को मुंह में लेकर दूसरी को हाथ से मलने लगा। फिर वही, आह आई, मम्मी की सिसकियां. इस अवसर पर मैने उसका पैजामा और पेंटि एक साथ उतार दिया अब मेरे सामने वो बिल्कुल खुली पड़ी थी। चूत चिप चिप कर रही थी, छोटे-२ बाल, मांसल जांघे।


उसने आँखें खोली, मुस्कराई और मुझे कमर से पकड़ कर चड्डी सहित मेरी पैंट उतार दी। मेरा लौड़ा टनटना रहा था, मैने भी अपनी टी शर्ट उतार दी। और पैंट की जेब से कंडोम निकाल कर लौड़े पर चढ़ाने लगा। उसने मेरे हाथ से कंडोम ले लिया और मुंह की तरफ इशारा किया कि वो गोली ले चुकीं है। अब मैने उससे पूछा, कोई लुब्रिकेंट है क्या, उसने कहा, सामने मॉइश्चराइजर रखा है। मॉइश्चराइजर पहले उसकी चूत में लगाया, पहला एक्सपीरियंस था सो उंगली अंदर चली गई।


एक्चुअली मजा तो बहुत आया पर ये काम लौड़े का था। सो लौड़े पर मॉइश्चराइजर लगा कर उसकी चूत पर रखा और थोड़ा जोर लगाया तो करीब आधा लौड़ा अंदर गया। इस बार लड़की दर्द से कराह उठी। बोली "ओह नो", मैने कहा क्या हुआ?? बोली दर्द हो रहा है। लौड़ा निकाला, उस पर थोड़ा खून लगा था, शायद झिल्ली फट चुकी थी।



मॉइश्चराइजर लौड़े पे और चूत में फिर से लगाया और इस बार लौड़ा रखकर पूरे जोर से घुसेड़ा। लौड़ा तो पूरा अंदर समा गया पर लड़की, ऊई मां, ओह नो कर रही थीं। मैने पूछा बहुत दर्द हो रहा है क्या, बोली हां, पर नवीन, तू करता रह, रोकना मत। यह सुनकर मैने स्पीड बढ़ा दी। दोनों हाथों में चूचियां, लौड़ा अपना काम कर रहा था और बीच बीच में होठ अपने काम कर रहे थे। उधर लड़की की सिसकियां अब हर्षमिश्रित आवाजों में बदल गई। लगभग 4-5 मिनट तक मैने चोदा। बीच बीच में लड़की भी दो बार द्रवीभूत हो चुकी थीं अंततः मेरा गाढ़ा द्रव 7-8 राउंड में नीरा की चूत में समा गया। मेरी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी।


चोद कर मैं उसके चूचियों के बीच में सर रख कर लेट गया, लौड़ा अभी भी चूत में आहें भर रहा था। करीब 15 मिनट बाद हम अलग हुए, पर लड़की का सर झुका हुआ था। मैने पूछा क्या हुआ, मजा आया क्या। उसने मुझे कस कर जकड़ लिया और बोली बहुत मजा आया नवीन। कहकर हमने अपने कपड़े पहने और थोड़ी देर बैठे। उसने पूछा, नवीन चाय पियेगा, या प्यास बुझ गई। मैने कहा, हां पर चाय जरूर पियूँगा। चाय पीकर, और फिर मिलने के वादे के साथ मैं अपने घर आ गया।


मैं उसके इस प्रकरण की विस्तृत वर्णन से दंग था, हतप्रभ था। नहीं रहा गया तो पूछा कि तुझे इसी उम्र में इतना दिव्य ज्ञान कैसे हो गया नवीन। बोला, अंकल, नेट सर्फिंग से।


वाउ, कहकर मैने उसको जकड़ लिया, और लगा कि अगला कार्यक्रम जो मेरे साथ होने जा रहा है, वह भी धमाकेदार रहेगा।


थोड़ी देर तक जकड़े रहने के बाद उससे पूछा, क्या कभी किसी लड़के के साथ भी संसर्ग किया है। बोला नहीं अंकल, मेरे फ्रेंड्स इतने फ्रैंक नहीं हैं, फिर भी एक दोस्त जिसका नाम अंकित था वो घर आया था। उसके साथ कुछ खतरनाक वीडियो देखे, तो दोनों का लौड़ा खड़ा हो गया। इस पर हम दोनों एक साथ बाथरूम में गए और एक दूसरे का सड़का मार कर चले आए।


मैने ऐसे ही पूछा, कि उस लड़के का लौड़ा तुझसे बड़ा था या छोटा।


बोला, करीब करीब मेरे बराबर ही रहा होगा या थोड़ा बड़ा पर थोड़ा ज्यादा मोटा था।

मेरे जेहन में उस लड़के के लौड़े की कल्पना करके एक सिहरन सी हुई पर ये जो इतना अनुभवी संगमरमर का पीस मेरे सामने था, पहले उससे निपटना था।


मैने कहा, आज मेरे साथ...

मेरा वाक्य पूरा होने से पहले ही बोला, ऑफ कोर्स अंकल।


ओह थैंक्स डियर, यह कहकर मैने उसे लिप्लॉक में ले लिया और एक हाथ से उसका लौड़ा सहलाया, लौड़ा काफी हेल्दी लग रहा था और अनुज के वर्णन से थोड़ा बीस ही लग रहा था। और उधर उसने मेरी कमर में हाथ डालकर दबाने लगा। मतलब मैदान तैयार था। मैने कहा, तेरा काफी लंबा और मोटा है, नवीन, तभी नीरा चिल्लाने लगी थी, पहली बार घुसेड़ने पर, लौंडा शर्मा गया, बोला जी अंकल, शायद!!

नवीन के साथ काम हुआ।


थोड़ी देर तक एक दूसरे को चूमने के बाद मैने उससे पूछा कि पहले वो चोदेगा? स्मार्टली बोला, आई वोंट माइंड। ओके देन। मैने उसकी पैंट उतारी, अंदर काल्विन क्लाइन की चड्डी, लौड़े के प्रेशर से फूली हुई। चढ्ढी उतारने पर उसका लौड़ा बाहर आ गया। अनुज के बताए साइज से थोड़ा ज्यादा, लगभग 16 सेमी लंबा और चार सेमी के आस पास मोटा। टोपा 3-3.5 सेमी, भूरे लाल रंग का, ट्रिम्ड झांटे 1-1.5 सेमी की। देखते ही उसका लौड़ा मैने मुंह में ले लिया और मुंह में घुसते ही लौड़े के अतिरिक्त मोटापे से मुंह बिल्कुल रुंध गया, ऊपर से लौंडे ने मूवमेंट शुरू कर दिया जिससे लौड़ा घान्टी द्वार तक जा रहा था। साला सर पकड़ कर करीब करीब पूरा लौड़ा ठूंस रहा था। करीब 2-3 मिनट तक मुख मैथुन करने के बाद बाहर निकाला, बोला नेक्स्ट अंकल??


मैने कहा, अब तू मेरी गांड़ भेद दे। शर्माता हुआ बोला ओके अंकल।


मैने कहा, मुझे निर्बस्त्र कर दे नवीन। बोला ओके अंकल, उधर उसका लौड़ा टनटना रहा था। उसने पहले पैजामा और फिर चढ्ढी उतार दी। बोला, वाह अंकल आपका भी काफी दमदार है, मैने कहा हट् , तेरा तो जायंट साइज है। और बातों बातों में उसने अपनी टी शर्ट उतार दी। वाउ, क्या फिगर था, वक्षस्थल छोटे छोटे बालों से सुसज्जित थी।


बाहों के नीचे काले काले 1-1.5 इंच के बाल। फिर आगे बढ़ कर मेरी टी शर्ट भी उतार दी। बोला अब अंकल, मैने उसे तेल की शीशी दी और कहा कि अपने लौड़े परऔर टोपी पर और मेरी गांड़ में अच्छे से तेल चुपड़ ले। अबकी उसने पहल करते हुए मुझे उल्टा लिटा दिया और कथनानुसार वैसा वैसा ही तेलीकरण किया। मेरे मन में थोड़ा भय था, क्योंकि काफी दिन बाद डलवा रहा था और लौड़ा भी काफी लंबा मोटा था, खैर।बोला, अब डालूँ अंकल, मैने कहा, हां, पर संभाल के।


ओके अंकल, कह कर उसने लौड़ा गांड़ पर रखा और धक्का लगाया तो पहले बार में आधी टोपी गई। लंबे गैप के बाद हैवी लौड़ा डलवाना, दर्द हुआl लौंडा बोला, अंकल दर्द हो रहा है क्या, मैने कहा, थोड़ा, पर तू निकाल कर थोड़ा और तेल लगा के डाल। बोला, ओके। पुनर्तैलीकरण करके लौंडे ने फिर डाला, अबकी फोर्स ज्यादा था सो टोपी सहित दो तिहाई के लगभग लौड़ा घुस गया, मुंह से "आह" निकला। लौंडा बोला, बहुत दर्द हो रहा है क्या? मैने कहा, वो तो है, पर तू टोपी अंदर छोड़ के लौड़े पर और तेल डाल कर फिर घुसेड़। ओके अंकल। उसने निकाला लौड़ा, और बोला, अंकल थोड़ा खून लगा है क्या करूं?? मैने कहा, चिंता मत कर तू तेल लगा के घुसेड़। ओके अंकल।


मेरी बातों से उसका उत्साह बढ़ा, इस बार तेल लगा के लौंडे ने और जोर से घुसेड़ा, और लो, पूरा लौड़ा अंदर। इस बार काफी दर्द हुआ, 15-16 सेमी का 4 सेमी मोटाई का पूरा लौड़ा अंदर था। अब लौंडे ने स्ट्रोक लगाने शुरू किये। हाथ दोनों कंधों पर, लौंडे की लंबाई भी ज्यादा थी सो हर स्ट्रोक पर उसका चेहरा मेरे सर के पास आ जाता था। चोदता रहा, चोदता रहा, समय के साथ स्पीड भी बढ़ गई (18-19 साल का ही था नवीन, एनर्जी लेवल काफी हाई था)। करीब 6-7 मिनट तक झिंझोड़ता रहा, और अब आया क्लाइमेक्स का नंबर।


सांस बढ़ गई और सड़ाक सड़ाक कर के 7-8 झटकों में लौंडे ने गरमागरम मॉल उड़ेल दिया। लौंडा हा, हा हा करके मेरे ऊपर लेट गया। सांस की गर्म हवा मेरे कानों में फर्र फर्र करके आ रही थी। मैने पूछा, मजा आया नवीन। बोला अंकल, आज पहली बार गांड़ मारी, पर मजा आ गया अंकल। लौड़ा बाहर निकाला तो उस पर थोड़ा थोड़ा खून लगा था, लौंडे का मुंह लाल हो गया था। लौंडा बोला, अगर आपको ज्यादा प्रॉब्लम न हुई हो तो फिर जब भी आप फ्री हों, मैं आ जाऊंगा। मैं हैरान था, इतना सीधा सा दिखने वाला लड़का सीधे अगले राउंड के लिए मचल रहा है। मैने कहा, ओके बोलता हूं। कहकर उससे अपनी गांड़ में एक एंटीसेप्टिक क्रीम का लेपन करवाया।



मैने कहा, अब मैं भी चोदूं नवीन? बोला ओके, पर कभी डलवाया है तुमने। बोला नहीं अंकल। मैने कहा नो प्रॉब्लम, देखा अभी तुमने, थोड़ा दर्द होता है पर मजा आता है। ओके अंकल। मैने कहा उल्टा लेट जा, और कह कर उसको चूम लिया, और उसने भी मुझे बहुत जोर से चूमा और लेट गया। वाउ, क्या दूधिया नितंब थे। चूमने और चाटने का मन था, पर मैने बिना टाइम बेकार किए उसकी गांड़ पर उंगलियां फेरी और थोड़ा उंगली घुसेड़ी तो लौंडा बोला अंकल अच्छा लग रहा है। मैने कहा, ओके।


मैने कहा, शुरू करूं, बोला जी अंकल। मैने उंगलियों में तेल पोत कर उसकी गांड़ में गुपगुपा दिया, लौंडा बोला, आईई। पूछा क्या हुआ? बोला थोड़ा दर्द हुआ अंकल। मैने कहा पहली बार है, थोड़ा होगा। कहकर अपने लौड़े की तेलवाई की और चढ़ कर टोपा गांड़ पर रखा और लो प्रेशर पर पुश किया। मेरा आधा लौड़ा अंदर पर लौंडा, "आई मम्मी" कहकर चीखा। मैने लौड़ा वहीं रोक दिया और पूछा, बहुत दर्द हुआ क्या। बोला जी अंकल। मैने पूछा "चोदूं फिर"? बोला लौड़ा निकाल लीजिए और दो मिनट वेट कर लीजिए। समझ गया मैं कि पहला शो है, थोड़ा एडजेस्ट कर रहा है। उधर मेरे लौड़े पर भी थोड़ा खून लगा था, शायद रिम क्रेक हो गई होगी।


इस बीच मैने उसे बाहों में जकड़ कर उसे सांत्वना देने के लिए उसका लौड़ा सहलाता रहा। ऐनी वे, 2-3 मिनट बाद बोला, अंकल चढ़ जाइए। मैने कहा ओके बेटा। फिर से गांड़ में तेल लगाया, लौड़े पे तेल लगाया, टोपी पर तेल पोता, और जोर से घुसेड़ा, इस बार पूरा लौड़ा अंदर घुस गया। लौंडा "ओह, आह" कर रहा था और मैं अपने काम में लगा था। मैने भी उसकी टाइट गांड़ को करीब 3-4 मिनट चोदा, और अंततः, 4-5 राउंड में मेरा मॉल उसके अंदर उतर गया। लौंडा आआह करके शांत हुआ।


मेरे लौड़े पर खून लगा था, मतलब इसकी गांड फट गई थीं। मैने पूछा क्या हुआ, बहुत दर्द हुआ क्या? बोला, हां अंकल पर मजा भी खूब आया, आपका मॉल काफी गरम था। मैने कहा, तूने कभी गांड़ मराई नहीं है, ऐसा ही सबका होता है। बोला मेरा भी इतना ही गरम था?? मैने कहा, ऑफ कोर्स। सड़का तो मारते ही होगे। इस पर फिर शर्माते हुए बोला, जी अंकल। मैने कहा कितने दिनों बाद? बोला 4-5 दिन में एक बार। ओके, तेरी गांड़ में भी एंटीसेप्टिक क्रीम का लेपन कर देता हूं। बोला, ओके अंकल। कहकर उसकी गांड़ में भी क्रीम लगाया। मैने कहा, सड़का मारते समय कुछ लगाते हो लौड़े पे।


बोला जी अंकल, सर पर लगाने वाला कोकोनट ऑयल उस दिन लौड़े पर भी लगाता हूं। पूरे लौड़े पर, या टोपी पर ही, मैने पूछा। बोला टोपी पर ज्यादा और लौड़े पर थोड़ा। वाओ, कहकर उसको फिर से जकड़ कर चूम लिया। ओके, नेक्स्ट क्या नवीन। काम तो हो गए, चाय पियेगा क्या। बोला ऑफ कोर्स अंकल, पर कपड़े पहन लेते हैं। मुझे हंसी आ गई, और वो भी मुस्करा दिया। चाय पीते पीते साले ने फिर पूछा, अंकल नेक्स्ट कब। मैने कहा बताता हूं। ओके अंकल। और चाय पीकर एक बार फिर से गल बहियाँ होकर लौंडा वापस चला गया।


बाद में उसका टेक्स्ट आया, अंकल आज मेरी अब तक की लाइफ़ का सबसे हसीन दिन था, थैंक्स ए लॉट। मैने पूछा, बेटू, नीरा की पहली बार चोदने वाले दिन से ज्यादा अच्छा था क्या। बोला, जी अंकल,


उस दिन वन वे ट्रैफिक था, आज ट्रैफिक बाई डायरेक्शनल था, सो अति आनंद दायक था। विल लुक फॉरवर्ड टू मीट यू ASAP"।

पढ़ कर अति संतोष हुआ म्यूचुअल संतुष्टि के लिए।


पाठको कहानी पढ़ने के बाद आप को कितना मजा आया, जरूर साझा करें।


आज गुरु पुर्णिमा हैं इसलिए मैं अपने सेक्सगुरु भ्राताश्री को प्रणाम करता हूँ और उनको अपनी हसीन गाँड़ को भोग अर्पित करता हूँ। Gay Sex Story प्रकाशन केलिए कामवासना साइट का आभार

Recent Posts

See All
पहली बार गांड मरवाई: Antervasna

वो मेरी पीठ को चूमने लगा, मेरे कानों में फुसफुसाया, “तेरी गांड कितनी टाइट है, दीपक… मजा आ रहा है।” उसने मेरे लंड को पकड़ा और हिलाने लगा। मैं पूरी तरह से कामुक हो चुका था। मैंने कहा, “सौरभ, अब मार मेरी

 
 
 
ख़ाली घर में यार ने मेरी गांड मारी: Antarvasana

अर्जुन ने अपने झटके और तेज़ कर दिए और कुछ ही सेकंड में वो मेरी गांड में ही झड़ गया। उसने ज़ोर से गरज कर मेरी गांड के अंदर अपना सारा माल छोड़ दिया। उसके गर्म-गर्म माल का एहसास मेरी गांड में बहुत अच्छा

 
 
 
लौंडेबाज मामा की गांड चुदाई : Indian Sex Stories

तेल की शीशी उन दोनों ने मेरी गांड में लगा कर और अपने अपने लंड पर चुपड़ चुपड़ कर खाली कर दी थी अतः मैंने थूक लगा कर लंड उसकी गांड पर टिकाया वह गांड सिकोड़ने लगा मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ अलग किए

 
 
 

Comments


Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Desi Stories, Antarvasna, Free Sex Kahani, Kamvasna Stories 

कामवासना एक नोट फॉर प्रॉफिट, सम्पूर्ण मुफ्त और ऐड फ्री वेबसाइट है।​हमारा उद्देश्य सिर्फ़ फ्री में मनोरंजन देना और बेहतर कम्युनिटी बनाना है।  

Kamvasna is the best and only ad free website for Desi Entertainment. Our aim is to provide free entertainment and make better Kamvasna Community

bottom of page