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खिला पिला कर लंड को वश कर लिया:२ - Antarvasna Sex Stories

आप ने पहले भाग खिला पिला कर लंड को वश कर लिया:१ में पढ़ा की कैसे नीलम ने मेरा लन्ड को वश में कर लिया था । वो अपनी इच्छा से मुझे अब नचाने लगीं थीं। लगभग दो साल गुजर चुके थे। अब चुत कि गर्मी बीना लन्ड को आराम नहीं था। मुझे उसने वो सब आदतें लगायी जो औरतें मर्दों को नहीं लगाती। नीलम अब मुझे चुत से दुर रखने के बहाने निकालतीं और मुझे तड़पाती। लगभग एक महीने तक नीलम ऐसा हि करती रही।


एक दिन नीलम मुझे रात को बोली "मैंने तुम्हें सिर्फ मेरे लिये तुम्हें तयार नहीं किया हैं । मैं देख रही हुं कि तुम सिर्फ मुझे हि आकर चिपकते हो। तुम्हें दुसरी औरतें भी पसंद आनी चाहिए। मैं यह बात सुनके हैरान हो गया।


तुम्हारा दिमाग खराब हो गया हैं? मैं बहार चला गया। मैं वापस आने पर नीलम बोली मैं तुम्हारी हि हुं मरते दम तक तुम्हारी हि रहुंगी । पर तुम्हें बहुत औरतों के साथ संबंध बनाने के लिए मैंने खिला पिला कर तैयार किया हैं। मेरे पहले पति की पत्नी को तुम्हें अब अपना बनाना हैं। जो हमारे दुसरे मेस पर काम करती हैं। पहेले तुम्हें उस को चोदना हैं।


मेरा दिमाग़ खराब हो गया था। मै उसके बाद नीलम से बोलना बंद कर दी और सो गया ।मगर निंद नहीं आ रही थी लन्ड चुत मांग रहा था ।


नीलम बार बार मुझे दुसरी औरतें के बारे मैं बता करतीं रही थी। मैं नीलम पर अत्याचार नहीं कर सकता था। मगर अब चुत से भी दुर नहीं जा रहा था। लगभग महिना गुज़र चुका था। मेरा दिमाग़ अब बस चुत मांग रहा था । नीलम अब हाथ भी लगाने नहीं दे रही थी। इसलिए मै दुसरे मेस पर जाकर उससे मीलने कि तैयारी करने लगा। नीलम को मैंने ये बता दिया और वादा किया तुम बोलोगी वैसे करुंगा मगर मुझे दुर मत करो। उस रात नीलम ने मुझे अलग हि मज़ा दिया।


नीलम ने मेरी एक महिने से सोच गंदी कर दी थी। मैं अब औरतें बारे मेरी सोच ग़लत रखने लगी थी। मैं अपने दुसरे मेस पर भी जाने लगा। सभी स्टाफ से मिलने लगा । पुछताछ करने लगा । मेस सभी पुराने लोग चला रहे थे। मैंने सभी लोगों कि जान-पहचान बना ली। सब को मैंने फोन नंबर दे दिये। उसी दिन मुझे पहिला फोन आया।


बोली मैं पुनम हुं । मुझे नीलम ने आप को अनघा से मिलाने को कहां था। मैं आप को लोकेशन भेज देती हुं आप वहां पर आ जाना।


मैंने नीलम को फोन लगाया । नीलम बोली "तुम मेरा हि काम कर रहें हो"। मैं कुछ नहीं बोला और उस लोकेशन चला गया। पुनम को मैं पहचान या था। पुनम कि नजर भी बहुत बदल चुकी थी। साल पहले अलग थी आज अलग थी। अनघा आ गयी। पुनम बोली यह हमारे मालिक हैं। मैने पहले अनघा को देखा नहीं था। पुनम बोली मैं मालिक को पुरा जानती हुं। भरोसेमंद इन्सान हैं । चिंता मत करो। मैं मालिक के सामने बोलती हुं, जब मुझे पैसों कि जरुरत थी। तब उन्होंने मुझे पुरी मदद कि, हां मैं अपने मर्जी से उनके साथ तीन दिन थी।


मैं पुनम कि बात सुनकर हि शाॅक हो गया था । पुनम अनघा को बोली "तुम तुम्हारी जरुरत कितनी हैं मालिक को बोल बाद दे । मैं बाद मैं आगे का देख लुंगी "।


अनघा बोली "मुझे एक लाख कि जरुरत हैं"। पुनम बोली "कल पच्चास हजार बोल रही थी", "आज एक लाख क्या बोल रहीं हैं"। तभी पुनम को नीलम का फोन आया गया और पुनम दुर जा कर बात करने लगीं।


मैं अनघा को देख रहा था। मैंने अनघा से बोला "आपको इतने पैसों कि जरुरत क्यू हैं" । वो कुछ भी नहीं बोली। पुनम वापस आते हि मेरे कान आकर बोली "दस दिन चलेगी क्या" बोलो ॽ मेरे पास आकार पुनम जब कान मैं बोली, तब अलग हि अहसास मुझे हुवा। मैंने पुनम को देखा और फिर अनघा को देखा।


पुनम को एक फोन करके आता हुं बोलकर मैं वहाँ से हि निकलने लगा। मुझे नीकलते देख, पुनम अनघा से कुछ बोली, तो अनघा खुद बोली पड़ी "मैं आधा महिना आने के लिये तैयार हुं", "मरे पती बहार रहते हैं" । "पती आने से पहले मुझे एक लाख की बहुत जरुरत हैं।


मैं कुछ भी नहीं बोला, सिर्फ पुनम कि और देखा कर निकल पडा। जाते जाते अनघा को देख कर बोला "पुनम तुम्हें आगे का बता देंगी। तुम दोनों साथ मैं हि रहना मैं पुनम से बातें कर लुंगा।


मैं गाड़ी जाकर बैठा गया। तभी पुनम सीधे गाड़ी मैं आकर बैठी गयी। पुनम बोली "मैं नीलम के लिये कर रहीं हुं"। "मैं और अनघा आपके नाशिक के घर पर कल रात आ जायेंगे"। "मुझे नीलम ने सब बताया हुवा हैं"। मैंने पुनम कहां "कल कि बात कल देखें लेंगे, मैं आज कि सोच रहा हुं, मैंने गाड़ी चालु कर दी।


पुनम बोली "मुझे कहा ले जा रहे हो"। मैं बोला "दोनों कि भूख कम करनें के लिये"।


पुनम ने हल्की स्माइल दी और बोली मतलब। मैंने गाड़ी को दुसरे मेस कि नजदीक मेरे दोस्त के खाली मकान पर ले गया। तब तक मैं शांत बैठा रहा। पुनम को घर की चाबी दे दी, मैं वापस आया हुं बोल कर निकल पडा।‌ मैंने मेडिकल मैं से कन्डोम के बडा पॅकिंग लिए। पुनम का फोन गाड़ी मैं हि था। नीलम बार बार फोन कर रहीं थीं । स्वीट के दुकान से खाने के लिए लिया।


वापस आया तो पुनम घर को साफ कर चुकी थी । मैंने पुनम को उसका फोन दे दिया और स्पिकर ऑन कर के नीलम को फोन लगाने को बोला। पुनम ने पहिले कुछ सोचा मगर बाद मैं मान गयी। फोन उठाते हि नीलम बोली "निलेश कहा हैं" । पुनम बोली "मालुम नहीं", "अनघा मुझे भी साथ ले जा रहीं हैं नाशिक", "अनघा को एक लाख कि जरुरत हैं" ।


नीलम बोली "मेरा कुत्ता उससे दो लाख वसूल करेगा और मेरा बदला भी लेगा" । मैं पुनम की और देख रहा था। नीलम कि बातें सुनकर दोनों अच्छी दोस्त लग रहीं थीं । नीलम ने वापस पुछा "नीलेश कहां हैं" ।


पुनम बोली "मुझे पता नहीं"। नीलम ने फोन रख दिया और मुझे नीलम का फोन आया। मैंने फोन उठाया बोला "नीलम मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी । नीलम बोली "मैं जो कर रहीं हुं वो क्या कर रही हूं मुझे पता हैं, मैंने आप को मेरे बदले के लिए हि तैयार किया हैं" " तुम सिर्फ मेरी सुनो"।


नीलम ने फोन रखते वक्त बोला "नीलेश तुम सोचो मत"।


नीलम फोन बंद हो जाने बाद। मैं पुनम के सारे मैं सोच रहा था। पुनम से मैं एक साल पहले मिला था। उस के बाद आज मगर मुझे जैसे बोहोत पहचानती हैं ऐसा व्यवहार कर रहीं थीं। पुनम बोली "मुझे आप यहां क्यूं ले आये हो"। मैंने सुना नहीं था । मैं सोच रहा था। पुनम फिर जोर से बोली "नीलेश क्या सोच रहें हो", मैं पुंछ रही हुं तुम मुझे यहां क्यूं ले आये हो। तब मैंने पुनम को देखा तो पुनम चाॅकलेट और नमकीन स्वीट खा रही थी। उसने अपना साड़ी का पल्लू बेड पर डाला था। सिर्फ उपर ब्लाउज था और खाते खाते बोली रहीं थीं। मेरी नज़र पुनम के स्तनों पर गयी । जो नीलम से बोहोत हि बड़े थे। मेरी नज़र स्तनों पर हैं यह पुनम समझ चुकी थी।


मैं पुनम को देख रहां था । पुनम बोली रहीं थीं "अनघा ने हि नीलम के जिंदगी नर्क बना दी थी"। "जबसे तुम नीलम के जिंदगी मैं आयो हो, तब से नीलम सुखी हैं" । "नीलम की कुछ गलती न होते हुए भी उसे पुरी जिंदगी सिर्फ दर्द मिला है"। मैंने पुनम से पुछा "मगर तुम नीलम के लिये यह सब क्यूं कर रही हों। पुनम हंसते हुवे बोली " मैं हि नीलम की गुरु हुं।


जब कमला ने तुम्हारा और नीलम का कुछ नहीं होते हुए भी नीलम पर आरोप लगाये थे। तब तुमने नीलम का साथ दिया था । उस दिस से लेकर आज तक नीलम और तुम्हारे बीच कि मैं हि बुनियाद हुं। नीलम को क्या करनें का मैं हि बता रही थी। नीलम कि सारे बातें सुनकर मुझे भी तुम से लगाव हो चुका था । आज जाकर तुम मुझे मिले हो। मुझे सब बात समझ मैं आई चुकी थी। मैं पुनम से बोला तुमने नीलम से जो कुत्ता बनवाया हैं वो कुत्ता कैसे काम करता हैं दिखाने के लिये मैंने तुम्हें यहां लाया हैं। पुनम ने कातिल स्माइल देते हुए बोली "समझीं"।


मैंने पुनम से पुछा "तुम्हारे और मेरे बारे मैं नीलम को पता चला तो"। पुनम बोली "पहले अनघा नहीं थी" पहले मैं हि थी । नीलम बोल रही थी तुम नीलम को छोड़कर तुम किसी और औरत को अपनाने का नाम भी नहीं ले रहे थे। तब मैंने हि उसे बताया था। तुमने नीलेश के लन्ड को चुत कि आदत लगा दी हैं। अब तुम चुत मत दो वो दुसरी तलाश करेगा। तब मैं उसे भी पटा लुंगी। नीलम तैयार भी थी । तुमने हि महिना लगाया और अनघा कि जरुरत सामने आती। यह सुनकर मैं हैरान हो चुका मगर कोई प्रश्न बाकी नहीं था।


पुनम बोली मेरा पती ना मुझे चोदता हैं ना मेरे तरफ देखता हैं । बाहर किसी के साथ चक्कर चलाया तो वो ग़लत इस्तेमाल करते हैं। तुम्हारे बारे मैं जब नीलम बोल रही थी तब मुझे पता चला कि संसार मैं औरत का सम्मान करने वाले भी लोग हैं। उसने फोन उठाया और नीलम को फोन लगाया। पुनम बोली "नीलेश मेरे पास आया हैं"। मैं वापस यह सुनकर हैरान हो चुका था।


नीलम बोली "क्या कर रहा हैं"। ( स्पिकर ऑन था ) पुनम बोली "पूछताछ कर रहा था"। नीलम बोली "तुम क्या बोली"। पुनम बोली "सब बोल दिया"। "छुपाने से अच्छा हैं सब बता देना अच्छा होता हैं"। "आदमी हमें ग़लत नहीं समझते"। नीलम बोली "नीलेश सब सुनने के बाद कहां हैं"। पुनम बोली "यही हैं "। नीलम बोली "अब नीलेश क्या करनें वाला हैं"। पुनम बोली "तुम्हारे बाद नीलेश किसका होने वाला था"। नीलम कुछ नहीं बोल रही थी । पुनम ने वापिस पुछा "क्या हुआ नीलम" नीलम बोली "मैंने हि तुम्हें अपनाने को बोला था। जिससे नीलेश को दुसरे औरतों की आदत लग जायेगी"।


नीलम बोली "नीलेश अपनी बातें तो सुन नहीं रहा ना" ? पुनम बोली "नहीं । नीलम बोली "मरे जैसे हि तुम्हारी जिंदगी भी पुरी उदास हैं "। "तुमने हि मुझे नीलेश पुरा दिलवाया हैं"। "मगर याद रखना मैं सिर्फ अब नीलेश कि हुं"। "मेरे नीलेश को वश मत कर लेना"। "तुम हि मेरी गुरु हो"।


पुनम बोली "चिंता मत कर, जब तक तुम नहीं बोलती तब तक मेरा ज्यूस नहीं दुंगी"। दोनों हंसने लगी। मैं सब बातें सुनते सुनते सिगारेट पी रहा था। पुनम मेरे सामने फोन पर नीलम के साथ बोलते बोलते घुम रही थी। मैं पुनम के पुरे शरीर का माप आंखों से ले रहा था। पुनम भी जान चुकी थी अब मैं छोड़ने वाला नहीं। पुनम नीलम का फोन बंद हो गया। नीलम का फोन मुझे आया। नीलम सिर्फ इतना बोली "तुम मेरे लिये मेरी जिंदगी हो, तुम कुछ भी कर सकते हो, मगर मैं जिंदगी भर अब सिर्फ तुम्हारी हि रहुंगी"। मेरे फ़ोन पर पुनम बोली " हा तुम सिर्फ नीलेश कि हो मगर अब नीलेश आज पुनम के भी साथ हैं और याद रखना पुनम का भी अब नीलेश हैं। मैं नीलम से बोला "घर आने बाद बात करेंगे" । नीलम बोली "नीलेश सॉरी"। मैं बोला "मी टु" । मैं फोन पर बोलते बोलते पुनम कि तरफ देख हि नहीं रहा था।


घर के सारी खिड़कियां बंद हो चुकी थी और पुनम को देखा तो पुनम के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। पुनम मुझे उसका जिस्म दिखा रहीं थीं। जो नीलम से बोहोत हि अच्छा था। मैंने पहले पुनम के स्तनों को और बादमें कमर को देखा जब मेरी नजर चुत पर पड़ी तो मुंह मैं पानी छुट चुका था जो पुनम देख कर हल्की हल्की मुस्करा रही थी। मेरा निचे लन्ड आकार बदल रहा था। मैंने पुनम को नंगा देख अपने सारे कपड़े निकालने लगा। पुनम मुझसे दुर हि खड़ी थी। मैं नंगा होते हि पुनम मुझे आकार लिपट गयी।


पुनम का शरीर और मेरा शरीर समान था। मैंने पुनम के शरीर को हाथों से पुरा सहलाया। लन्ड का बदलता आकार हम दोनों मैं दरार कर रहा था। पुनम ने निचे लन्ड को हाथ मैं लेकर उपर किया। पुनम बोली "नीलम सच बोल रहीं थीं"। मैं बोला "क्या" ?। पुनम हंस कर बोली "मुसल हैं तु जब लेंगी तब पता चलेगा क्या दर्द देता हैं"। मैं बोला "तुझे कम दर्द होंगा" । पुनम बोली "क्यूं" ? मैं बोला तुम्हारा शरीर और नीलम का शरीर अलग हैं।


पुनम के पुरे शरीर पर हाथ फेरने के बाद मैं पिछे हटकर चुत पर हल्ला बोलने वाला हि था उससे पहले पुनम ने लन्ड को हाथ मैं पकड़ लिया। पुनम बोली "तु खड़े हि रहो" । पुनम निचे बैठी कर मेरे लन्ड को एक हाथ मैं दुसरे हाथ मैं मेरी आंडकोष को दबाने लगी। उसने लन्ड को हाथ से ऊपर उठा कर पहले एक आंडकोष को मुंह मैं लिया।


फिर दुसरे हाथ से दुसरे आंडकोष को मुंह मैं डालने कि नाकाम कोशिश करने लगी थी। मैं पुनम का सर सहला रहा था। दुसरा आंड मुंह न जाने के बजे से पुनम ने पहला अंडकोष चुस चुस कर बाहर निकाला और दुसरा चुसने लगी। दोनों आंड को चुसने के बाद पुनम बोली "नीलम आंडो को रबर नहीं लगाती हैं क्या" ? मैं बोला "नहीं"। पुनम ने अपने बालों का रबर बॅड निकाला और दोनों आंड को रबर बॅड के अन्दर डालकर दोन तीन राउंड लगा कर दोनो आंड को अच्छे से बांध दिया। मरे लिये यह पहली बार था। उस के बाद पुनम ने दोनों हथेली मैं लन्ड को पकड़ कर निचे से उपर हिला कर देखा और रबर बॅड को फिर से सेट किया। मेरे आंड को रबर बॅड लगाने से आंड हिलना बंद हो चुके थे।


पुनम ने मरे लन्ड मुंह से ऐसा चुसने लगी थी। जैसे बच्चा कुल्फी चुसती हैं। मैं पास के सोफा सेट पर बैठ गया पुनम को अपनी और खींचा। पुनम वापिस लन्ड चुसने लगी थी। मेरे लन्ड को नीलम के मुंह कि आदत लग गयी थीं। मगर आज मुंह भी बदल गया था और चुसने कि रीत भी बदल चुकी थी। जो मुझे अच्छी लग रही थी।


जिस तरह पुनम लन्ड चुस रही थी मुझे लग रहा था पुनम मेरा पानी निकाल कर हि छोड़ेगी। वैसे हि पुनम ने दस मिनट बाद मेरा पानी निकाला । मेरी आह निकलते देख पुनम ने लन्ड मुंह को अपने मुंह मैं भर लिया। मैंने पुनम सर पकड़ कर पानी को पुनम के मुंह मैं डालने लगा। मेरा पुरा पानी पुनम के गले से निचे जाता देख। पुनम पक्की खिलाड़ी हैं मैं समझ गया। पुनम मेरे तरफ देख कर हंसते हसते बोली "कैसा लगा नीलू"। मैं उसे देखकर बोला "सब औरतें लन्ड को वश करना जानती हैं"। "उन्हें सिर्फ इंसान अपने मन पसंद चाहिए"। पुनम ने हंसते हंसते आंख मारी फिर बोली मटन खिला खिला कर नीलम ने तुम्हारा पानी भी मटन जैसे स्वाद का बना दिया हैं। मैं बोला "तुम्हें आदमी को नचाना अच्छा आता हैं कहा से सिखा?


पुनम बोली सारी बुढ़ी औरतें दोस्त थी सब बताती थी, मगर आदमी सिर्फ तुम एक हि मिले। मरा नसीब फुटा हि रहा।


पुनम बेड पर जाकर सो कर अपने दोनों पैर फैलाकर मुझे अपनी चुत दिखा कर आमंत्रित कर रही थी। उसकी चुत देखकर पहले हि मेरे मुंह मैं पानी आ चुका था। मैंने सोपा सेट उठाकर मेरी बॅग कि और गया उस मैं कान्डम निकाले पुनम देख रही थी। कान्डम देखकर पुनम बोली "नीलू जान, नीलम और मेरे लिये कभी कान्डम इस्तेमाल नहीं करना। " हमारी चुत सिर्फ तुम्हारे लिए हैं। मेरा पती नामर्द हैं नीलम को भी मालुम हैं। मैंने कुछ नहीं बोला। पुनम पहले हि लन्ड कि गर्मी निकल चुकी थी तो मेरा लन्ड आराम कर रहा था।


मैं बेड पर जाकर पुनम के चुत के सामने जा कर बैठा गया। पुनम ने अपना मोबाइल साथ हि रखा था। मैं ने हाथों कि उंगली पहले पुनम के चुत सहलाया। मुलायम चुत थी। धीरे धीरे मैंने चुत के चारों और हाथों कि उंगली फेरी, पुनम के घुटनों से चुत कि तरफ जीभ निकाल कर चाटने लगा। चुत की ओठों पर मुंह लगाते हि पुनम ने अपना एक हाथ मेरे सर पर रख दिखा और मेरे बाल सहलाने लगी। उसने नीलम को व्हिडिओ फोन लगाया दिखाया था। मैं पुनम कि चुत चाट रहा था जो पहले हि पाणी छोड़ चुकी थी। मरे लिये नीलम ने चुत का पानी पसंद कर दिया जो। इसलिए मैं चुत पाणी अच्छे-से चाट रहा था। जीभ को अंदर डाल चुत से को साफ कर रहा था। मैं चुत के ओठों को हल्का हल्का ओढ़ से चबा रहा था, पुनम आहे भर रहीं थीं।


तभी नीलम का आवाज आयी " देखा नीलु, तुम्हें सिर्फ चुत कि जरुरत हैं तुम चुत देखते हि कुत्ते बन जाने चाहिए यह पुनम मुझे सिखाती थी, और आज कुत्ती मुझे दिखा रहीं हैं, देख तेरा कुत्ता आज मेरी चाट रहा हैं। नीलू मैं नाराज नहीं हुं। पुनम हंस रही थी और मेरा बाल सहला रही थी।


मैंने उपर देखा तो पुनम के हाथ मैं मोबाइल दिख रहा था । मैंने वापस मुंह निचे किया और पुनम के चुत मैं जीभ से चोदने लगा। उपर देखा तो पुनम ने मोबाइल फेंक दिया था। दोनों हाथ मेरे सर पर लगाकर मेरे मुंह को चुत पर दबाना शुरू किया था। पुनम नीलम के कुत्ते चाट मेरी भी चुत बड़बड़ा रही थी। आज से तु नीलम और पुनम का कुत्ता हैं। मैने भी वापस पुनम का पानी पीने का धाम लिया था। लगभग बीस मिनट चुत चुसने के बाद पुनम ने वापिस पाणी निकला। पानी निकलते निकलते मेरा लन्ड तयार हो चुका था।


पुनम का पानी निकलते हि पुनम बाथरूम जाने लगी मैंने जाने नहीं दिया। मै पुनम को बोला क्या हुआ ओ बोली साफ करके आती हुं । मैं बोला मैं पुरा तो साफ कर चुका हुं अभी नहीं जाने का। पुनमपर सीधे मिशनरी पोजीशन मैं हल्ला बोल दिया। पुनम हंसने लगी थी। बोली "अब मेरी खैर नहीं "। मैंने पुनम कहां मुसल को चुत पर सेट करो, उसने हाथ मैं लन्ड लिया चुत के मुंह पर रख्खा।


मैंने जोर का धक्का दिया। लन्ड थोड़ा हि अन्दर गया। मुझे अजब लगा। मैंने वापस लन्ड बाहर निकाल पुनम के माथे को चुमा और जोर से चुत अन्दर लन्ड को डाला। पुनम जोर से चिल्लाई "मर गई", आधा हि लन्ड अन्दर जा चुका था। मैंने पुनम का चेहरा देखा तो ओ भी रो रही थी। पुनम बोली मेरी और नीलम कि कहानी सेम हैं। पंद्रह साल हो चुके हैं। मैं कुछ नहीं बोला। पुनम ने थोडा कमर को ही लाया। मैंने वापस लन्ड बाहर निकाल और वापस जोरसे चुत के अन्दर डाल दिया। आधे से उपर लन्ड चुत के अन्दर जा चुका था।


पुनम बोली "नीलु तुम भी ना" ? मैंने वापस पुरा लन्ड बाहर निकाला । बेड के निचे जाकर खड़ा हो गया। पुनम की पैरों को हाथ को पकड़ कर अपनी और खींचा। पुनम को पता चल चुका था मैं छोड़ने वाला नहीं। मैंने देखा कि पुनम कि चुत भी थोड़ा थोड़ा खून छोड़ रही हैं। मैंने लन्ड को वापस चुत पर चारों और घुमवाया, लन्ड को चुत के मुंह मैं डालकर, पुनम कि कमर को पकड़ा पुरा जोर लगाकर लन्ड पुरा अन्दर डाल दिया। पुनम बीन पानी मछली जैसी तड़प रही थी।


मैंने पुनम पर कुछ भी दया दिखाई नहीं। मेरा पहले पानी निकाल चुका था, तो मुझे मालुम था अब पुनम कि खैर नहीं। पुनम को मैं लिंबू जैसे निचोड़ चुदाई दे रहा था। खड़े खड़े मुझे मजा नहीं आ रहा था, तो मैं पुनम के उपर लेट कर पुनम कि चोदने लगा। पुनम कि स्तनों को जोर जोर दबाने लगा। पुनम का शरीर मेरा हल्ला बर्दाश्त कर रहा था। मैं पुरी ताकत लगा कर पुनम को चोदता रहा। पुनम अब धीरे धीरे संभोग का मजा लेने लगी थी। पुरा साथ दे रही थी। मुझे किस कर रही थी। पुनम ने अपनी कमर उठा उठा कर साथ देने लगी थी।


पुनम हल्की आवाज दे कर बोली नीलु "मैं गयी" । पुनम ने पानी छोड़ते हि मैने वापस लन्ड बाहर निकाल लिया तो पुनम तड़प उठी। मैं बेड के पास वापस खड़ा होकर, पुनम कि तरफ देखा । पुनम मेरा खड़ा लन्ड देख कर अपने सर पर हाथ मार रही थी और बोल रही थी आज पता चला नीलम क्यू रबर बॅड नहीं लगाती थी। मैं हंस पड़ा, पुनम को वापस पलटी किया, घोड़ी बनाकर चोदने लगा। लगभग आधे घंटे बाद मैंने पुनम के चुत मैं पानी छोड़ा। हम दोनों हि हाँफ रहें थे। पुनम ने मेरे चेहरे को देखकर हल्की हल्की स्माइल दे रहीं थीं। मैं पुनम के नजदीक बेड सो रहा था। पुनम बेड से उठने कि कोशिश कर रही थी। मैंने पुनम का फोन पुनम को दिया, ओपन करनें को बोला, पुनम ने फोन ओपन कर के मुझे दिया और बाथरूम के और जाने लगी।


मैंने नीलम को व्हिडिओ फोन लगाया और पुनम को दिखाया। पुनम चल भी नहीं पा रही थी। चलते चलते बाथरूम से पहिले हि सोफा सेट पर जा कर बैठी गयी। उसने फोन को अपनी तरफ देखा तो समझ गयी, हंसने लगी, पुनम बोली "नीलम तुम सच बोल रही थी", "मुसल हैं, तु जब लेंगी तब पता चलेगा क्या दर्द देता हैं" । हंसते हंसते बाथरूम मैं चली गई। नीलम बोली रहीं थीं "मुझे हमेशा ग़लत ठहराया करती थी"। बोलती थी "तुझे आदमी नचाना आता नहीं" । मैं बोलती थी आदमी मेरे हिसाब से नाचता हैं पर बेड पर मेरी जान निकालता हैं, और अपने हिसाब से नचाता हैं। आज पता चला पुनम को मेरा आदमी क्या हैं। " पुनम बाथरूम से आकर मेरे पास सो गई और नीलम से बात करने लगीं। मैं बाथरूम चला गया। वापस आया तो नीलम और पुनम बात कर हि रहीं थीं।


पुनम बोल रही थी 'मैं अपने घर नहीं जा सकती। घर जाते हि मां समझ जायेंगी आज क्या कर के आयीं हुं। तो मैं बोला कि "मेरा अभी मन भरा नहीं हैं नीलम, पुनम मेरे तरफ अब गुस्से से देख रही थी। उधर नीलम हंस रही थी। मैंने नीलम को बोला कि तुम पुनम के मां को बोल दो, पुनम नहीं आयेगी, ओ तुम्हारे साथ हैं । मैं पुनम को लेकर घर आ रहा हुं। मैंने नीलम का फोन कट किया। और पुनम को वापस चुमने था, पुनम बोली "नील तुम भी ना"। फोन कट हुवा नहीं था । नीलम बोली "ठिक हैं" मैं मटन ले आती हुं। घर जाकर मैंने पुनम को "अनघा को सात दिन बाद जायेगे कहने को बोला। नीलम मेरी बात सुनकर हंस रही थी।


तो पुनम समझ चुकी थी, पुनम कि साथ दिन चुदाई होने वाली हैं। नीलम पुनम ने खाना बनाया था। आज खाने का स्वाद अलग आ रहा था। मैंने नीलम और पुनम को भी खाने को बुलाया। पुनम अपने लिये थाली लेने जाने लगी। नीलम बोल एक साल हो गया हम एक हि थाली मैं खाते हैं। तुम्हें अलग खाना हैं तो थाली ले आना नहीं तो एक थाली मैं हि खायेंगे। साल भर से चालू ज्यूस सामने था । मैंने पी लिया, तो पुनम बोली नीलू और ज्यूस चाहिए, तो मैंने नीलम कि और देखा, नीलम पुनम के कान मैं कुछ बोली ।


पुनम बोली "अभी दो हफ्ते बाकी हैं"। यह सुनते हि नीलम वापस पुनम के कान मैं कुछ बोली। पुनम बोली हो सकता हैं। दोनों ने एक दुसरी तरफ देखा और हंस पड़ी। मैं बोला "क्या हुआ" पुनम बोली "दो हफ्ते के बाद अब दो ज्यूस मिलेंगे",और दोन हंसने लगी। मैंने पुनम से पुछा "नीलम बताती नहीं यह ज्यूस किस चिज़ का हैं तुम बताओ"।


पुनम बोली " सिर्फ तुम्हे वश करने का नुस्खा हैं"। नीलम बोल "तुम्हें कुछ नहीं होंगा, चिंता मत करों। हां तुम्हें बस्स चुत कि प्यास रहेंगी हमारी"। मैं कुछ बोला नहीं । नीलम से जादा पुनम शरारती थी। पुनम ने मटन के एक हड्डी का मांस खाया और हड्डी मुझे चुसने को दि। नीलम के तरफ देख कर बोली तुमने कुत्ते को इतनी अच्छी तरह से चुसना सिखाया है कि बना नहीं सकती अभी तक निचे अहसास हो रहा हैं। नीलम बोली नीलू शांत हैं मगर याद रखना पुनम, छोड़ता नहीं। पुनम बोली रबर कभी नहीं। उस रात नीलम ने मुझे पुनम को चोदने नहीं दिया। खुद हि मुझे चिपक गयी।


मै पुनम के साथ अनघा से मिलने गया था। मैंने अनघा कि ऐसी चुत बजाईं कि वो मेरी पागल हो चुकी थी। पहले उसने जरुरत के लिये पैसे लिये थे । पर बाद मैं अपनी खुजली मिटाने के लिये ओ खुद हि मिलने आ जाती थी। अब लग भग मरे नीलम, पुनम के साथ पाच साल गुज़र चुका हैं। नीलम एक मेस और पुनम एक मेस संभालती हैं। पुनम कि मां और पती अपघात मैं तीन साल पहले गुज़र गये।


नीलम, पुनम और मैं एक साथ हि रहते हैं। मेरा लड़का अमेरिका निकल गया हैं। अनघा का पतीने अनघा को भी छोड़ा और रोज दारु पिता रहता हैं, बाद मैं अनघा को भी सभी बातें पता चली तो भी वो हम सब पर नाराज नहीं थी और आज भी मेरे पास आती हैं।


कामवासना के सभी पाठको, मुझे पुनम और नीलम मुझे क्या पिलाती थी हैं। मुझे आज तक पता नहीं चला हैं। आप को पता हो तो मुझे लिखें।


तो आप सभी कैसी लगी मेरी "खिला पिला कर लंड को वश कर लिया "


यह कहानी, मुझे प्लीज़ मेरे मेल बतायें और अपने सुझाव लिखे।

मेरा मेल आईडी nileshlonke@gmail.com आगे कि बाकी कहानी जल्द हि आपके लिए लेकर आऊंगा।

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