चचेरी बहन की चुत चाटी : Hindi Sex Stories
- Aman
- Jul 15
- 12 min read
हैलो फ्रैंडस अमन है और ये जो कहानी है ये मेरे और मेरी चचेरी बहन गौरी की है। हमारा परीवार गाव मे रहता है लैकिन गाव से २ किलोमीटर दुर हमारे खेत है। तो हमारा जो घर है वो खेतो मे ही बना हुआ है तो हम गाव से २ किलोमीटर दूर खेतो मे ही रहते है। और हमारे पास लगभग ३०-३२ एकड खेती है और हमारा परिवार खेती ही करता है।
गांव में चुदाई के बारे में बस कुछ लोगों को ही सही से पता होता है कि चुदाई कैसे करते हैं।
गांव में तो चुत में डायरेक्ट लंड घुसाया और चुदाई शुरू ना कोई चुमा चाटी। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ लेकिन उसके बाद क्या हुआ ये में आपको एक एक पार्ट में बताऊंगा।
तो बात आज से ४ साल पहले की है जब १२ वी कक्षा मे था और गौरी १० वी कक्षा मै। और इस उमर सबको चुदाई की थोडी बहुत जानकारी होती है । तो आज से ४-५ साल पहले गाव मे ज्यादा करके चुल्हे पे खाना पकाया जाता था। अब गाव मे हर घर मे गैस आ गया है ।
अब मे मेरे परिवार के बारे थोडा बता दु। मेरे पापा और चाचा दो भाई है और खेती करते हे। और हमने खेत मे हवेली टाईप बडा सा घर बनवाया है। जिसमे सभी के लिए अलग-अलग कमरे है। और चुल्हे पे का खाना स्वादिष्ट लगता है इसलिए हमारे घर मे चुल्हे पे पकाया जाता है। तो तब चुल्हे पे खाना पकाने के लिए लकडीया लानी होती थी तो मुझे और गौरी को स्कुल और काॅलेज से आने के बाद लकडीया लाने का काम दिया गया था।
मे और गौरी ३:३० बजै घर आ जाते थे क्योकी हमारा स्कुल और कॉलेज प्रायव्हेट थै तो सुबह जल्दी जाते थे और ३:३० बजे तक वापस आ जाते थे। लकडिया लाने के लिए हमे घर कुछ ४०० मीटर की दुरी पर हमारे खेत नाले के पास जाना होता था। नाला वह होता है जो नदी से थोडा सा ही छोटा होता है, लैकीन नाले के किनारे भी नदी के किनारे के जैसै बडे-बडे पेड और झाडिया होती है। लेकिन नाले मे जो है बरसात में ही पानी होता है और सर्दियौं के मौसम कुछ गढ्ढो मै ही पानी होता है।
बरसात के मौसन आधिंयो की वजह से जो नाले के किनारे के पेडो कि टहनिया टुट कर गिर जाती हे। जो सर्दी के मौसम तक अच्छी तरह सुक जाती है। सर्दी आग तापने के लिए या चूल्हे लिए काम मे आती है।
यदी आप भी गाव मै रहते हे तो आपको पता हि होगा की गाव के लोग जो अक्सर नाले के तरफ ही हगने के लिए जाते है। हमारे खेतो मे हम जो है ५ एकड मे गन्ना लगाये हुए जो नाले से बिल्कुल सटाकर है और गन्ने वाले खेत मे तब ही जाया जाता था।
तो अब आते हे कहानी पे तो बात सर्दी के दिनो की है हमारे कुछ खेतों को गेहुं की बुआई के लिए तैयार करना था, तो पापा और चाचा उधर बिजी रहने वाले थे। और कुछ खेतो मे कपास चुनने का काम चल रहा था तो मम्मी और चाची जो हे कुछ मजदुरन औरतो से कपास चुनने का काम करवाने के लिए उन्हे लेकर सुबह से ही काम पर लग गयी थी।
मुझे और गौरी को बोल दिया था कि स्कुल और कॉलेज से आने के बाद रात के खाने के लिए और आग तापने के लिए लकडिया लेकर आना। तो मेरा और गौरी का ये रोज का काम था। हम दोनो ३:३० बजे घर आते और कपडे बदल कर लकडिया लाने के लिए जाते और मे रोज कॉलेज से आने के बाद हगने के लिए उसी तरफ नाले मे जाता हुं और अपना पिछवाडा वही गढ्ढो मे के पानी से साफ करता हुं।
मे और गौरी हररोज की तरह लकडिया लाने के लिए नाले की और चल दीए और हमने लकडीया इकठ्ठा कर ली और तभी गौरी बोली की भैय्या मुझै अर्जंट टायलेट जाना है।
क्यौकी गौरी कभी बाहर टायलेट नही जाती वह घर पर बने टायलेट मे ही जाती। तो मैने कहा की तो आ जाओ उस झाडी के पीछे। तो उसने कहा की भैय्या यहा तो पानी भी नही है और मै ऐसे खुले मे पहले कभी गयी नही तो मुझे डर लगता है।
मेने कहा की गौरी इस झाडी के पीछे जाओ और वही पर गढ्ढो मे पानी है उसका इस्तेमाल कर लो।
उसने कहा की भैय्या मुझे बहोत डर लगता है अगर अर्जंट नही होती तो मै आपको नही बोलती। आप एक काम किजिए इस झाड़ी के बिल्कूल नजदीक खडे रहीए, जिससे मुझे डर थोडा कम लगेगा।
तो मेने कहा की ठीक है ।और वह झाडी के पीछे चली गई और हगने के लिए बैठ गयी होगी और वह जैसै ही थोडे आगे की और सरक कर बैठी होगी उसके गांड मे कुछ चुभा होगा या कुछ हुआ होगा तो गौरी ने मुझे जोर से आवज दी- भैय्या और रोने लग गयी।
मे घबराते हुए झाडी के पीछे गया और सामने का नजारा देख कर मेरे होश उड गए और लंड एकदम से खडा हो गया मेने देखा गौरी ने एक हाथ से अपनी सलवार और एक हाथ से अपना सुट पकड रखा था। जिससे उसकी चुत और चिकनी जांघे साफ नजर आ रही थी। और गौरी रो रही थी और उसे देखकर मुझे भी डर लगने लग गया।
मेनै गौरी की और देखा और उसे चुप कराते हुए पुच्छा तो उसने जैसै ही मुझे देखा तो उसने अपना सुट झट से निचे कर दिया जिससे उसकी चुत पुरी तरह से छिप गयी और उसने सलवार को वैसै ही पकड कर रखा और कहा कि भैय्या वो आआ अह भैय्या वो।
और वो हिचकिचाने लगी तो मैनै धिरे उसे कहा की गौरी क्या हूआ?
तो उसने रोते हुए कहा की भैय्या मुझै नीचे कुछ चुभा है और बहुत दर्द हो रहा है और रौनै लग गयी इस वजह से मे भी घभरा गया। और मैने कहा की गौरी चुप हो जाओ और गौरी चुप हो गयी ओर मे कहा कि गौरी तुम एक काम करो अच्छी तरह देखो की क्या हुआ मे झाडी के पीछे जाता हुं।
तभी गौरी ने मेरा हाथ झट से पकडा और रोते हुए कहा की भैय्या बहोत तकलीफ हो रही है, हिली तो और ज्यादा हो रही है। तुम ही कुछ करो।
तो मेने भी कापते हुए कहा की गौरी तुम एक काम करो अपने पैरो को थोडा फैलाकर आगे की और झुक जाओ, मे देखता हु की क्या हुआ हे । तो इतना कहते ही गौरी थोडा हिचकिचाने लगी और बोली भैय्या वो।
तो मेने कहा गौरी देखो यहा दुर-दुर तक कोई नही और हम भी किसी से कुछ नही कहेगें तभ भी गौरी हिचकिचा रही थी। तब मैने कहा की गौरी से कहा देखो इससे तुम्हारा दर्द कम नहि होगा और हमे घर जाने के लिए देर हो रही है।
तब गौरी आगे की और झुक गई जिससे उसकी गंदी ओर गुलाबी गांड़ साफ दिखाई दे रही थी और उसकी चुत भी चुत पर छोटे-छोटे भुरे बाल जिसे मैं देख ही रहा था और मेंरा लंड पेंट में पुरी तरह से खड़ा हो चुका था। तभी गौरी ने कहा कि भैय्या क्या है जल्दी देखो मूझे दर्द हो रहा है।
तों मेंने उसकी चुत और गांड़ ध्यान हटाकर देखा तो तो एक पेन्सिल के साइज़ की लकड़ी उसकी चुत और गांड़ के छेद के बिल्कुल बीच में कांटे की तरह घुसीं हुयी थी तों मेंने गौरी से कहा कि कुछ नहीं हुआ गौरी तुम्हें छोटी-सी लकड़ी का टुकड़ा कांटे की तरह चुभ गया है। तों गौरी ने कहा कि भैय्या मुझे दर्द हो रहा है उसे जल्दी से निकाल दो तों मेंने एक हाथ से गौरी के चुतड को फैलाया और एक हाथ से एकदम से उस लकड़ी को खिंचा जिससे गौरी को दर्द भी हुआ और उस लकड़ी की वजह से जखम बन गई जिससे खुन निकल नै लग गया।
ओर गौरी फिर से रोने लगी और बोली कि भैय्या मुझे और भी ज्यादा दर्द हो रहा है। तों मेंने गौरी को समझाया और चुप कराते हुए जहां से खुन निकल रहा था उस जगह को उंगलियों से दबा दिया। जिससे गौरी को थौडी राहत मिली, लेकिन उसकी गांड़ और चुत देखकर मैंरा हाल बुरा हो रहा था।
तभी गौरी ने कहा कि भैय्या, तब मुझे समझ गया कि गौरी अब शरमा रही है। तों मेंने गौरी को कहा कि गौरी तुम यहां पानी के गड्ढे के पास बैठ जाओ मैं तुम्हारी गांड़ धो दें ता हुं।
तों गौरी शरमा गई और बोली कि भैय्या।
तब मेने कहा कि देखो शरमाओ मत, तुम्हें जखम बन गई है तों मैं इसे साफ कर देता हूं और फिर घर जाकर तुम दवाई लगा लेना। तो गौरी धिरे से निचे बेठ गई। अब मैं उसकी गांड़ को धोते हुए सहलाने लगा था तों मेंने देखा कि गौरी कि आंखें बंद थी और उसके गाल लाल हो गये थे।
शायद मैरे गांड़ सहलाने से उसे मजा आने लगा था। अब हमें देर हो रही थी तो मैंने पास की झाड़ी से एक पत्ता तोड़ कर उसे अच्छी तरह से साफ कर के जहां से खून निकल रहा था वहां पर लगा दिया। और गौरी से कहा कि सिधे खड़ी हो जाओ।
तब गौरी सिधे खड़ी हो गई और मेने उसकी निक्कर को अच्छी तरह से उपर खिंचकर पहना दिया और कहा कि इसे ऐसे ही रहने दो। जिससे जख्म के उपर जो पत्ता रखा है वो हिलेगा नहीं और खुन निकल ना बंद हो जाएगा और घर जाकर दवाई लगा लेना जिससे दर्द कम हो जाएगा।
फिर गौरी ने मेरे सामने ही अपनी सलवार को बांधने लगी और बोली कि भैय्या मम्मी को मत बताना, नहीं तो वो मुझे मारेगी।
मेंने कहा कि मैं क्यों बताउंगा ।और फिर हम लकड़ियाँ लेकर निकले। तभी गौरी ईशशश आह निकली और बोली कि भैय्या बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने कहा कि घर जानें तक सहले और घर जाते ही मलम लगा लेना जिससे दर्द कम हो जाएगा। फिर जैसे तैसे हम लोग घर आ गए और लकड़ियां रसोईघर में रख दीं और अभी तक घर पर मम्मी पापा और चाचा चाची नहीं आऐ थे।
तभी गौरी बोली कि भैय्या अभी तक घर पर मम्मी पापा नही आए हैं तो आप ही मलम लगा दिजीए, प्लीज़ मुझे दर्द हो रहा है।
मेंने कहा कि ठीक है जा अपने कमरे में मलम लेकर आता हूं और फिर मेने एक डिब्बे में चोट पर लगाने वाली मलम लेकर गौरी के कमरे आ गया। ओर रूम के अंदर का नजारा देखने बाद मेरा लन्ड इतना टाईट हो गया कि उसमें दर्द होने लग गया और अगर आप ऐसा नजारा देखते तो आपका भी लन्ड खड़ा हो जाता।
गौरी ने अपनी सलवार और निक्कर को एक पैर से निकाल कर अपने पेरो को मोड़कर कर और पैरों को फैलाकर कर ऐसे लेटीं थी कि जैसे मुझसे कह रही हो आओ और मुझे चौद दो।
में मन ही मन में उसकी चुदाई ईमॅजीन करने लगा तभी गौरी ने मुझसे कहा कि भैय्या मुझे बहुत दर्द हो रहा है, जल्दी से मलम लगा दो तब मैं होश में आ गया और उसके बैड पर जाकर बैठ गया और देखा तो पत्ता मेंने उसकी जख्म पर लगाया था वो खुन बंद होने से चिपक गया था और उसकी चुत का आधा हिस्सा उस पत्ते से छिप गया और उसकी गुलाबी गांड़ और चुत के हल्के भूरे बाल मुझे बहुत उत्तेजित कर रहै थे।
तभी गौरी बोली कि भैय्या मुझे दर्द हो रहा है। तो मेने पत्ते को निकालने लगा जेसे ही मेने पत्ते को खिंचा गौरी को दर्द हुआ। क्योंकी खुन सुकने की वजह से पत्ता चिपक गया था और फिर मेने हल्के हाथ से मलम लगा दी और गौरी को कह की अब कपड़े पहनलो और मे झट से अपने कमरे में आ गया और सीधे बाथरूम में जाकर गोरी के बारे मे सोचकर मुठ मारी और फिर निचे आकर सीधे गांव में चला गया ओर दोस्तो के साथ गप्पे लड़ाने लगा ।
जब में वापस आ गया तो सब लोग घर आ गए थे और खाना खाने बैठगए थे मेने देखा कि गोरी भी निचे खाना खाने आ चुकी थी मुझे लगा कि अब गोरी का दर्द खत्म हो गया है और फिर हम सबने मिलकर खाना खाया और अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
मेरा ओर गौरी का कमरा एकदम सटकर है। जिसमे एक दुसरे के के कमरे में आने जाने के लिए कमरे के बीच में ही एक दरवाजा है जिससे अगर हमे एक दुसरे के कमरे में जाना हो तो बाहर आने की जरूरत नहीं होती है । अब खाना खाने के बाद में सो गया त भी रात के 9:30 या 10 बजे होंग शायद तभी गोरी मेरे कमरे में आकर मुझे धीरे से जगाने लगी।
और जैसे ही मे उठा तो गौरी ने रानी सुरत बनाकर कहा कि भैय्या मुझसे जो दर्द कम करने की मलम है गलत जगह पर लग गई है और मुझे वहाँ पर जलन हो रही है। मैने गौरी की और देखा उसने सिर्फ टॉप पहना हुआ था और निचे कुछ भी नहीं। गोरी ईश् ईश फु फु कर रही थी।
लग रहा था कि उसे सच में जलन हो रही थी और मैं उसे आधा नंगा देख कर शॉक हो गया था और मेरी निंद पुरी तरह से खुल चुकी थी। अब जैस ही में बिस्तर पर उठ कर बैठ गया तो गौरी ने भी अपने टांग चौड़ी करके मेरे सामने बैठ गई और अपनी चुत को दिखाते हुए कहा कि भैय्या मुझसे दर्द हो रहा था तो मैंने मलम लगाने लगी। लेकिन मुझसे वह यहां पर भी लग गई और अब जलन हो रही है तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। तो मैंने सोचा कि आपके पास कोई उपाय होगा जिससे जलन कम हो ।
तो मैंने सोचा कि यहीं सहीं मौका है चुदाई करने को मिल सकती है । दोस्तों मेने अभी तक कोई चुदाई नही की है और ना ही गौरी ने। तो हम दोनो वर्जिन हैं और हमे झाट भर भी नहीं पता था कि पहली चुदाई केस होती है । लेकिन मैन पोर्न विडीओ देख रखे थे तो बस मुझे थोड़ा बहोत पता था।
तो मेने कहा कि हा इसे साफ कपडे से अच्छी तरह से पोंछना होगा। अब साफ कपडा रात में?
तो मेने कहा कि गौरी तुम्हारा टी - शर्ट उतार कर दो इसस पोंछता हूँ। तो गौरी ने झट से टी-शर्ट उतार दी और मैं गोरी की और देखता ही रह गया उसके छोटे छोटे संतरे जैसे चूचियों को बिल्कुल गुलाबी और वो मेरे सामने पहले ही टांगे चौड़ी कर बेठी थी। तो मेरा हाल और भी बुरा हो रहा था और मैं फिरसे उसे देख कर खो गया।
फिर गौरी ने मेरे हाथ में उसकी टी-शर्ट दी और कहा कि ये लो भैय्या तो मेने टी-शर्ट ली और फिर उसकी चुत को पोंछा और कहा कि अब जलन हो रही है तो गौरी ने कहा कि हां तो मैंने कहा की इसे अच्छी तरह से साफ करना होगा इसके लिए इसे तो चाटना पड़ेगा।
तो गोरी ने कहा कि भैय्या जो करना है करो, मुझे इस जलन से छुटकारा चाहिए। तो मैंने गौरी को अच्छी तरह से बेड पर लिटा लिया और उसे कहा की अपनी टांगे चौड़ी कर लै। फिर मेने उसकी चूत को चाटने लगा और फिर गौरी ने सिसकारी या लेना सुरू कर दिया। हा ओ हुम्म माह आ ओ।
करीब 15 मिनट तक मे ने उसकी चूत को चाट कर उसका पानी निकाल दिया था। अब गौरी का चेहरा खिला खिला लग रहा था और वो वेसे ही लेट कर हाफ रही थी।
मैंने गौरी से पूछा कि अब केस लग रहा है तो गोरी ने कहा कि अब ठीक है और बहुत अच्छा लग रहा है । तो मैंने गौरी से कहा कि देख मेने तेरी तकलीफ दुर की हे, तो तुझे भी मेरी तकलीफ दुर करना होगा।
गौरी ने कहा कि आपको क्या तकलीफ़ है भैय्या?
तो मैंने कहा की देख मेने जैसे तेरी जल न को चाट कर कम कर दिया, तो तुझे भी मेरे लिए कुछ करना होगा।
गौरी ने कहा कि जरुर करुंगी भैय्या। आप बताईए जो करना है मैं करुंगी।
मैंने अपनी पैंट उतार दी और जैसे ही ग़ौरी ने मेरी तरफ देखा तो अपनी आंखें बंद करके बोली, कि छि भैया ये क्या?
मैंने उसे अपना टाईट लंड दिखाया और कहा कि देख इसमें भी जलन हो रही है। तुझे ईसे चुसकर ईसकी जलन कम करनी होगी जैसे मैंने तेरी चाटकर की।
गौरी ने अपनी आंखें खोली और मेरे लन्ड को ध्यान से देखा और बोली भैया वो अ म वो तो।
मैंने उसे कहा कि तु एक काम कर बिस्तर पर पेट के बल लेट जा और मैं निचे खड़ा हो जाता हूं। इससे तुम्हें दर्द भी नहीं होगा और चूसने में भी आसानी होगी। तो गौरी ने कहा कि मैं ईसे कैसे चुसु?
मैंने कहा कि देख आसान है जैसे लालीपाप चुसते हैं, वैसे ही चुसना है। तो गौरी मान गई और मेरे लन्ड को हाथ में पकड़ कर देखने लगी।
मैंने नाटक करते हुए ईशश किया तो गौरी ने झट से लंड को मुंह में ले लिया और चुसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि पुछो ही मत और गौरी लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे सचमुच में कोई लालीपाप हों।
पुरा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी करीब १५-१७ मिनट तक लंड को चूसने के बाद मेरा वीर्य निकल पड़ा और फिर भी गौरी ने लन्ड को चूसना शुरु ही रखा और मेरे वीर्य को भी पी लिया और चुस के मेरे लन्ड को साफ कर दिया।
फिर मैंने गौरी को रोख कर उसके साथ बिस्तर पर लेट गया और फिर गौरी ने मुझसे हांफते हुए कहा कि भैय्या अब केसा लग रहा है?
तो मैंने कहा कि बहुत अच्छा।
गौरी ने कहा कि मुझे भी बहुत अच्छा लगा। तो मैंने कहा कि ओर भी अच्छा लगेगा ,लेकिन उसके लिए ओर कुछ करना होगा।
गौरी ने कहा कि क्या करना होगा भैय्या? तो चलो अभी करते हैं।
मैंने उसे कहा कि अभी नहीं होगा, जब तक तुम्हारी जख्म ठीक नहीं होगी तब तक ये नहीं कर सकते। और हा इसके बारे में किसी को भी बताना मत।
तो गौरी ने कहा कि क्या भैय्या में इस के बारे में किसी को बताते थोड़ी है। और में चाहता तो गौरी की चुत की सिलपेक चुत को अभी चोद सकता हूं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि एक बार चुदवाने के बाद गौरी दर्द के मारे बाद में चुत चुदवायें ना। तो मैंने सोचा कि इसे आराम से करूंगा फिर रोज़ चुदाई होगी।
फिर मैंने गौरी की चुत को और उसने मेरे लन्ड को आठ दिनों तक चुसा और चाटा और फिर जैसे ही ग़ौरी की जख्म पुरी तरह से ठीक हो गयी तो मैंने उसे कैसे चोदा और कैसे हम लोग रोज चुदाई करते हैं ये सब में आपको अगली कहानी में बताऊंगा।
फिलहाल ये रियल कहानी आपको कैसी लगी जरूर बताना।
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