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चटाई बेचने वाली सविता भाभी-१: Hindi Sex Stories

मेरा नाम अमेय है और में महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर में रहता हूं। ये कहानी है मेरी और घर घर जाकर चटाई बेचनेवाली एक गांव के भाभी की। उनका नाम सविता है।


ये कहानी कोई मनघडंत नही है। बल्कि इसका एक एक शब्द सत्य है। ये कहानी थोड़ी लम्बी होने वाली है क्योंकि मेने इसमे हर एक डिटेल और बहोत बरिकी से लिखा है। आशा करता हु की ये मेरा जीवन का अनुभव आपको भी पसंद आये।


सविता हमारे घर हमेशा हर संडे को आती थी। क्योंकि मेरी माँ और पापा दोनो भी जॉब करते है, तो घरपे हम सबलोग बस संडे को ही होते थे। वो लगभग 4-5 सालो से हमारे यहाँ आती थी। माँ उससे चटाई, गालीचा वगरैह खरीदती रहती। उसकी और मेरी माँ की बहोत अच्छी दोस्ती हुई थी। वे दोनों भी एक दूसरे को अपने अपने घर का सब बताती।


पति क्या करता है , बच्चे क्या करते है। उसका पति बहोत दारू पिता था तो उसके पास ही बताने के लिए ज्यादा कुछ रेहता और में कभी घरपे रहता तो मैं भी सुनने के लिये बैठ जाता। और वो भी बे झीज़क सब बताती। उसके घर के हालत ठीक नही थे। वो अकेले ही कमाती थी। उसका पति पहले काम पे जाता था पर शराब की वजहसे उसे निकाल दिया था। वो शराब में सारे पैसे उड़ाता था। उनको 1 लड़की थी वो स्कूल में जाति थी। तो पूरे घर का भार सविता पर ही था। लेकिन वो चटाई बेच कर, पति से छिपा कर पैसा जमा करती और अच्छा घर संभालती थी। दिन आगे बढ़ते गए और मे अब 25 साल का हो गया था।


मेरी नजर अब स्त्री के सुंदरता को ढूंढते रहती थी। में अब 3 साल हुए सीखने के लिए बाहर के शेहेर में गया था।और गर्मी की छुट्टियों के लिए अपने घर आया था। मुझे सविता धुंदली धुंदली सी याद थी। एक दिन ऐसेही संडे के दिन 11 बजे हमारे घर की बेल बजी। माँ भी घर पे थी। पापा काम से बाहर गए थे। में गया और मैने दरवाजा खोला तो सामने सविता भाभी। अपने सर पर चटाईयो का ढेर लिए, पूरी पसीने से भरी। उसका एक हाथ चटाईयो को पकड़े था।और दूसरा हाथ दीवार पे।


वो बड़े ही अनोखे अंदाज में दरवाजे पर खड़ी थी। मैरी नजर उसके ब्लाउज़ पर पड़ी। मेने देखा, उसकी ब्लाउज बगल में फ़टी हुई थी और उसके बगल के बाल बाहर आ रखे थे। क्या पता पर वो मुझे अच्छा लगा। मेरी नजर उधर ही 4-5 सेकंड के लिए रुक गयी। मै पहली बार सविता से इतना मोहित हो गया था। उसके स्तन भी पहले से बड़े दिख रहे थे।


उसने साड़ी भी थोड़ी नीचे पहनी थी। तो, उसकी नाभि दिख रही थी। ये सब देख कर, मेरा दिमाग चकरा रहा था। तभी अचानक उसने पूछा, "अमेय क्या ये तुम हो? कितने दिनों बाद तुम्हें देखा। कितने बड़े हो गए हो। और थोडेसे मोटे भी। थोडा excercise किया करो " इतना बोल कर वो हँसते हँसते घर के अंदर आ गई। माँ अंदर से अभी नही आई थी तो मैने सोचा में भी कुछ मजाक कर लेता हूं। मेने भी अपने आप को थोड़ा संभाला और बोला," हा भाभी, छुट्टियां चालू हो गई है तो सोचा घर चलते है।


वैसे आप भी कहा पहचान में आ रहे हो। आप भी कितना बदल गए हो। मोटे तो आप भी लग रहे हो । लेकिन पहलेसे सुंदर भी लग रहे हो ।" इतना सुनते ही वो मुझे एकदम से देखने लगी और जोर से हस पड़ी। में भी मुस्कुराया। तभी अंदर से माँ आ गई। माँ बोली," अरे आजा आजा बैठ सविता। देख तो मेरा बेटा आया है। पहचान हो रही है के नही? सविता बोली ," कितना बड़ा हो गया है। और एकदम सुंदर दिख रहा है। मेने तो पहली बार मे पहचाना ही नही।


कॉलेज की लड़कियां जरुर इसपर मरती होंगी। देख लेना।" ऐसा बोलकर दोनो भी जोर से हसने लगी। में तो पूरा शर्मा गया था। वो हमेशा ही एकदूसरे के साथ मजाक करते। वो हमेशा जमीन पर ही बैठती। अब सविता नीचे बैठ गयी थी। माँ ने मुझे पानी लाने के लिए बोला। मेने झटसे 1 ग्लास पानी भरा और उसको देने के लिए गया। वी नीचे बैठी थी और उसका ब्लाउज उसके साइज के हिसाब से कम था तो उसका पूरा क्लीवेज मुझे दिखाई पड़ा।


मेरे चड्ढी के अंदर मेरा लिंग थोड़ा सा उभर गया उसका एहसास मुझे हुआ। शायद उसे भी वो एहसास हो गया हो या फिर मेरी नजरे उसके बड़े बड़े गोल स्तनों पर टिकी है, वो उसने देख लिया हो। उसने झट से अपना पल्लू , ब्लाउज के ऊपर ढक लिया। और दूसरे हाथ उसने ग्लास ले लिया। अब हमारी नजर एक दूसरे से टकराई।सविता अपने गाल में ही मुस्कुरा रही थी।उसने अपनी नजरे मुझसे चुराई और पानी पीने लगी। ग्लास लेते वक्त उसकी उँगलिया जाने अनजाने में मेरे हाथ को लग गयी और एकदम से एक करंट सा मेरे शरीर मे दौड़ने जैसा एहसास मुझे हुआ। मेरे जिंदगी का वो पराये स्त्री का पहला स्पर्श था।


में उसे कभी नही भूल सकता। वो लगभग 1 घन्टा माँ से बाते कर रही थी और में उसको निहार रहा था। वो बीच बीच मे मुझे देखती जरासा मुस्कुराती और फिर से माँ से बात करती। वो महसूस कर रही थी के में उसको बार बार घूर रहा हु। वो थोड़ा सा असहज भी महसूस कर रही होगी क्योंकि में बस उसको ही देखे जा रहा था। मेरी माँ दूसरे सोफे पे बैठी थी। माँ को ऐसे बातें करना, किसीकी चुगली सुनने में बहोत मजा आता था। तो उसका ध्यान तो मेरी तरफ था ही नही।


पर हम दोनों की नजरों की भिड़ंत बार बार होते ही जा रही थी। उसने अपने बालों का जुड़ा बांध रखा था। माथे पे बिंदी थी। मांग भरी हुई थी। आंखोमें काजल और नाक में छोटीसी बाली थी। उसके रंग सावला गेहू जैसा था। पर उसके चेहरे पर एक भी दाग या कुछ भी ऐसा नही था जो उसकी सुंदरता को ठेच पोहोचाये। में उसे ही ताड रहा था।मेने देखा उसका ब्लाउज का कपड़ा बहोत पुराना था और इस्तेमाल कर कर के वो पतला हो चुका था। उसके अंदर का थोड़ा थोड़ा धुंदला मुझे दिखाई दे रहा था।


मुझे उसका ब्रा का कलर देखने की चाह होने लगी। कुछ भी हो जाये और में वापस उसके पास चला जाउ और देख सकू, ऐसी चाह होने लगी। उतनेमे ही माँ ने आवाज लगाकर बोला," बेटा आधा आधा हम दोनों के लिए चाय बना देगा क्या?" में अकेला रहने के कारण मुझे खाना बनाना सब आता ही था। सविता ने फॉर्मेलिटी के लिए थोड़ा "नहीं नही मत करो, उसको क्यो तकलीफ दे रहे हो ऐसा बोला"। पर माँ ने कहा," एकबार इसके हात की चाय पी कर तो देख मजा आ जायेगा"।


अब वो मना नही कर पायी। मेने झटसे चाय बना ली। और पहले माँ को दी और फिर उसको देने गया। तभी मेने उसके कांधे के ब्रा के स्ट्रिप को देखना चाहा। पर क्या? वहापे कुछ भी नही था। में एकदम से चौक गया। उसने अंदर कुछ भी नही पहना था। उसके कारण में और उत्तेजित होने लगा। उसने चाय ली। वो भी मुझे थोड़ा घूर ही रही थी।


वो फिरसे मुस्कुराई और सविता चाय पीने लगी। सविता के पल्लू ओढ़ने के बाद भी उसके स्तनों का आकार छुप नही रहा था। ऐसा लग रहा था के वे किसी भी क्षण ब्लाउज का बटन तोड़ कर बाहर आ जाएंगे। लगभग एक बड़ा तरबूजे के जितना उसके एक स्तन का आकार था। उसकी पूरी छाती स्तनोसे ही भरी थी।


में देख पा रहा था के उसके स्तनों के बाद 1 या 2 उँगली छोड़कर उसकी नाभि ही दिखाई पड़ रहा था। तो सोचो कितने बड़े रहेंगे वो। उसके पेट पर एक तिल साफ साफ दिखाई दे रहा था। धूप में घूमने के कारण उसका चेहरा थोड़ा सावला था पर पेट के तरफ देखे तो उसका कलर थोड़ा गोरा दिखाई पड़ रहा था। मेने मन ही मन मे सविता के स्तनों की, उसके चुचियो की और जांघो की कल्पना करना चालू कर दिया था। तभी अचानक सविता बोली," अमेय चाय बहोत ही अच्छि बनाई है तुमने। में भी ऐसे नही बना पाती।


तुमको जो भी लड़की पाएगी वो बहुत खुश रहेगी देख लेना। " माँ हसने लगी। और में शर्मा गया। उतनेमें ही वो बोली," चलो दीदी में निकलती हु बहोत देर हो गयी।" ऐसा बोलकर वो अपने चटाइयोको बांधने लगी। माँ ने भी बोला, "ठीक है, मुझे भी खाना बनाना है। आ जाना वापिस। अगली बार तुझे खुशखबरी देनी है।


अभी कुछ पूछ मत" ऐसा बोलकर माँ ने उन दोनों का चाय का कप उठाया और अंदर रखने गयी। और जाते जाते मुझे बोला, वो जाए तो दरवाजा बंद कर देना। सविता भी बोली ,"क्या दीदी आप भी हमेशा ऐसा करते वो, अब मुझे अगली बार आकर वो बात सुने बगैर चैन नही पड़ेगा।पर ठीक है।" चलो मैं भी निकलती हु। और मुझे देखकर हसने लगी।


मैं बोला," अरे माँ, क्या है बात मुझे भी बोलो न क्या हुआ है।" तभी सविता बोली, ,"अमेय ये चटाई उठाने में मेरी जरा मदत करो। ऐसा बोलकर वो उठ गई. मैं उसके पास गया और उसके ढेर को उठाने लगा। वो भी थोड़ा नीचे झुकी। और झुकते ही उसका पल्लू कांधे से नीचे गिरा। मेरी आँखें तो बस खुली की खुली रहे गयी।


जो सामने का नजारा था में शब्दों में बयां नही कर सकता। उसके ब्रा ना पहनने के वजहसे उसकी उभरी हुई चुचिया मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थी। उसके दोनो स्तनों पर बड़ा काला वाला सर्कल था।और उसके बीचो बीच उसकी चुचिया थी। वो थोड़ा धुंधला दिख रहा था पर उसकी खड़ी चुचिया एकदम साफ दिखाई पड़ रही थी। उसने झट से पल्लू को फिरसे कांधे पे ले लिया और सविता ने नजरे चुराई। वो थोड़ी जल्दी दरवाजे के तरफ भागी। पर मैने उसका चेहरा देखा तो वो शर्मा रही थी। उस वक्त तो उसने मुझे देखा भी नही और वो चली गई। वो जैसे ही मूडी तो उसकी बहोत बड़ी गांड मुझे दिखाई पड़ी।


मेने मनमे ही सोचा, इसे मारने मिले तो क्या ही जिंदगी हो जाएगी। मेने थोड़ा सा अपने लिंग को सहलाया। और मेंने दरवाजा बंद कर लिया। और में दौड़कर बालकनी में चला गया और उपरसे उसे देखने लगा। वो नीचे के गेट से बाहर आई और उसने ऊपर मेरी तरफ देखा। उसको अपेक्षा नही थी के में वहां पे आऊंगा। पर अचानक मुझे देखकर वो चौक गयी।


उसने वापस नीचे देखा और हसते हसते वहा से चली गयी। वो चले जाने के तुरंत बाद में माँ के पास गया और पूछा क्या खुश खबरी है माँ मुझे बता ना!।।मेरे बहोत ज्यादा पीछे लगने के बाद उसने बताया, "अरे तेरी बेहेन पेट से है।


अब 5 वा महीना लगने वाला है तो हमे जाना होगा उसके पास"। में भी बहोत खुश हुआ। में मामा जो बनाने वाला था। उस दिन के बाद में सविता को कभी नही भुला। मेने बहोत बार उसको इमैजिन करके मुठ मारी।पर में उतनेसे satisfy नही हो रहा था।


मेरे लिंग को अब एक चूत की जरूरत थी। उस दिन के बाद कई हफ्ते फिर वो आई ही नही। मेने उसकी आशा छोड़ ही दी थी। में भी थोड़े दिनों में वापस चला गया। 4-5 महीने बाद एक दिन वो अचानक आयी। तब में अपने गांव में ही आया था। पर में घर मे नही था। बादमे मुझे माँ ने बताया," वो आके चली गयी। मेने उसे तेरे दीदी के बारे में बताया और मिठाई भी खिलाई।


सविता तेरे बारे में पूछ रही थी।" ये सुनकर पहले तो मेरे लिंग में थोडासा उभार आया। जो उसकी यादे धुंधली पड़ गयी थी वो फिरसे ताजा हो गयी। उसके वो गोल गोल स्तन और उसकी बड़ी गांड को मैने फिरसे महसूस किया। आगे माँ बोली, सुन! अब अगले अगले हफ्ते निकलना है तेरे बेहेन के शहर। तो तेरा सामान पैक कर लेना।


उसकी डिलीवरी है। तो 15 - 20 के लिए हमे उधर जाना है। मैंने माँ से पूछा, " वो भला मेरे बारे में क्या पूछ रही थी। और क्या क्या बाते हूंई आज, मुझे भी थोड़ा बताओ"।


माँ - कुछ नही। तू कहि दिख नही रहा था तो कहाँ पे है पूछ रही थी। और बेचारी के साथ बहोत बुरा हुआ। ( ऐसा बोलकर माँ के आँख से आंसू आने लगे)


में- क्या हुआ माँ? बता तो जल्दी।


माँ- बेचारी का पति गुजर गया। याद है तुझे पिछली बार जब तू आया था तब वो आयी थी। उसके 2 दिन बाद ही उसका पति गुजर गया बेचारी का।


में - बहोत ही बुरा हुआ बेचारी के साथ।


माँ- अब वो अगले हफ्ते आती हु बोलके गयी है। पर हम लोग जाने वाले हैं। बेटी की डिलीवरी है ये बताना ही भूल गयी उसे। अब बेचारी किसको सुनाएगी उसका दुख।


माँ इतना बोलकर चुप हो गयी और अपना काम करने लगी। में भी अपने रूम में चला गया। क्या पता लेकिन उसके पति के गुजरने का मुझे जरा भी अफसोस नही हुआ। अरे ऐसी फिगर वाली मेरी पत्नी हो तो में शराब को हाथ भी न लगाउ। बस दिनभर उसके चुचे मुंह मे लेकर बैठता। उसके स्तन को दबा दबा कर और बड़ा करता। उसकी गांड को पकड़कर ऐसे चोदता के हमारी सात पुश्ते मुझे याद रखती। पर क्या ही करे। अफसोस इसी बात का था। के वो मुझे नही मिली। वरना में उससे खुशी खुशी शादी कर लेता।


इतना ख्याल आते ही मेरे दिमाग मे एक आईडिया आया। अगर अगले हफ्ते में घर पे हु रहा तो? माँ पापा तो जाएँगेहि। अगर में यहाँ पे रहा तो सविता और में घरमे अकेले ही रहेंगे। में उस समय का फायदा उठाकर उसको मेरी मनकी बात बता सकूँगा। वाह! मेने खुदको शाबसी दी और बोला क्या विचार आया है दिमाग मे। अब बस कुछ तो भी करके यहाँ पे रुकना होगा बस। दिन आगे बढ़ते रहे। वो दिन पास आया, अब हमें कल निकलना होगा। रेलवे का बुकिंग हो गया था। सब कुछ तय था।


मे भी पूरा सामान बैग में भरके रेडी था। ऐसा लगे भी ना के मेने जानबूझकर कुछ किया है। रात में खाना खाते समय मेने अचानक सर पे हाथ रखा और ऐसा दिखाने लगा के कुछ तो टेंशन है मुझे। माँ ने भी झटसे पूछा, बेटा, क्या हुआ क्या परेशानी है? पापा भी अचानक मुझे देखने लगे। मै - माँ, मेरा एक कॉलेज का submission था और में वी भूल ही गया । और वो अब मुझे 3 दिन में complete करके देना ही है। वरना मैडम मुझे फैल कर देगी।


इतना सुनते ही पापा खुदसे बोले, "तो फिर वहा पे आने की कोई जरूरत नही है, चुपचाप यहाँ बैठो, पढ़ाई करो। यही तुम्हारी punishment है अब। ये सुनते ही माँ कुछ बोल नही पायी। उसने ठीक है बोल दिया।बस अपना ख्याल रख। कुछ लगे तो बाजू वाली आंटी से मांग लेना और सुनो में तुम्हारी मामी को डिब्बा देने के लिए बोल देती हूं। बस वहापे जाकर ले आना। ठीक है।


में बहोत खुश था। मेरी मुराद अब पूरी होने जा रही थी।मेने बोला, माँ तू कुछ चिंता मत कर।में सब सम्भाल लूंगा। मुझे अच्छे मार्क्स लाने है इस बार। वरना में भी आ जाता आपके साथ। ऐसा बोलते ही दोनों खुश हो गए। आराम से सबने खाना खाया।और सोने चले गए। पूरी रात में सो नही पाया। बस क्या होगा कैसे होगा यही सब खयाल दिमाग मै। सुबह हो गयी। मेने टैक्सी बुक कर ली । और उनको रेल्वे में बिठा कर वापस आ गया।


आज शनिवार था। मुझे अब बस कल का इंतजार था क्योकि वो हर संडे को आती थी। अब ऐसेही टाइम जाते जाते शाम हो गई। अब मै बस बेड पर लेटकर सविता भाभी के सपने देख रहा था। मैंने मेरा लन्ड बाहर निकाला और शीशे में देखने लगा। सविता को सोचते सोचते मेरा लन्ड बड़ा हो गया था। मेरा 6 इंच का लन्ड शीशे में समा ही नही रहा था। में बस उसे देखे कर, सविता का ना लिए जा रहा था। 10-15 मिनिटों के बाद मेने पूरा मेरे हाथ पर ही झाड दिया। मेने बहोत दिन से हिलाया नही था।


इसलिए एकदम गाढ़ा और गरम वीर्य बाहर निकला। मैं अब कंट्रोल ही नही कर पा रहा था। मन मे अब ख्याल आने लगे थे, "कल अगर वो आयी ही नही तो? , मेने उसको मेरी दिल की बात बता दी और उसने मना कर दिया तो? , अगर उसने माँ को बोल दिया तो? बापरे, पूरा बवाल हो जाएगा। फिर तो घर से बाहर का रास्ता पक्का? तभी अचानक फ़ोन की घंटी बची।


मामी का कॉल था। खाना तैयार है लेके जाओ। मेने डब्बा लेके आया। आराम से खाना खाया। और बेड पर लेटे लेटे सविता के खयालो में डूब गया। मुझे कब नींद लगा मुझे भी नही पता चला। पर सुबह 8 बजे मामी का कॉल आया ब्रेकफास्ट करने के लिए, तब एकदम नींद खुली। में उठा तभी मेरी नजर मेरे लन्ड पे पड़ी साला सुबह सुबह एकदम खड़ा हो चुका था। माने की आज कोई जंग है और वो पूरी तरह से तैयार है दुश्मन को पेलने के लिए। मेरा मोटा और 6 इंच का होने के कारण मै उत्तेजित न भी रहू तब भी मेरे लन्ड का शेप थोड़ा थोड़ा दिखाई पड़ता ही है।


मेने उसी वजहसे लंगोट पेहेनना चालू कर दिया था। उसके ऊपर underwear पहनता था ताकि किसीको मेरे लन्ड की शेप न दिखाई दे। मेने लन्ड को शांत किया और मामी के पास डब्बा लेने बाहर निकल गया। मामा घर पे ही था तो मामी बोली, आज इधर ही बैठ हमारे नाश्ता करके जा। हमने बाते करते करते नाश्ता किया। घर आते आते मुझे 9.30 बज ही गए थे। क्योंकि मामा घर थोड़ा दूर था।


आते ही मे नहाने चला गया। आज बड़ी शांति से एक एक अंग को घिस कर मेने नहाया। वो लगभग हमेशा 11 से 12 बजे के बीच मे आती थी। मेने बाल सेट किये। परफ्यूम मारा। और मेरे उसकी राह देखने लगा। अब वो आने में कुछ ही समय बचा था। मैंने दिमाग मे पूरी प्लानिंग कर के रखी थी। मेने जान बुचकर मेरी सबसे टाइट होने वाली लोअर पेहेनी और अंदर underwear बिल्कुल नही पहनी। मेरी इच्छा थी कि वो अपने आँखो से मेरा 6 इंच लम्बा और मोटा लन्ड देखे और पागल हो जाये। अब में सोफे पर बैठा था अपना मोबाइल देखते तभी दरवाजे की घन्टी बची। मेरे धड़कने अचानक से तेज हुई। मेंने door hole से देखा।


बाहर सविता भाभी खड़ी थी। मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा था। मैं मनमे जोर जोरसे चिल्ला रहा था। मेरे लन्ड की पूरी नसे खड़ी हो गयी थी। मेने उसे शांत किया, अभी नही जरा टाइम दो। फिर उसके बाद तुम्हे कोई नही रोकेगा मेरे शेर। इतना बोलकर में दरवाजा खोलने गया। मेने दरवाजा खोला। सामने सविता अपनी हरे रंग के साड़ी में मेरे सामने खड़ी थी। उसकी साड़ी एकदम पुरानी, ब्लाउज कंधे पर थोड़ा फटा हुआ ऐसा था। पर मुझे वो अप्सरा से कम नही लग रही थी।उसका वो कटीला बदन।


उसकी दिखती नाभि और उसकी बड़ी मोटी गांड। जैसे कि वो सब मुझे पुकार ही रहे हो। बहोत दिन से उनकी प्यास ना बुझी हो। और इस पूरे रेगिस्तान में ही एक उनकी प्यास बुझ सकता हो। सविता बोली," अरे मुझे यहापे ही खड़ा रखोगे क्या? या अंदर आने के लिए भी पूछोगे! मै सविता को ही घूरे जा रहा था।


तभी सविता भाभी बोली - अरे ओये। कहा खो गए।


मै - सॉरी भाभी। वो थोडा मेरा ध्यान कहि और था। आइये आइये ना आप, अंदर आइये। बैठिए।


वो मुस्कुराई और वो अंदर आ गयी। हमेशा की तरह वो नीचे बैठी। और बोली," बेटा जरा पानी पिला दे। आज बहोत ही ज्यादा चलना हुआ है। और दिदि कहा है उनको भी बुला दे। में पानी लाने अंदर चला गया। पानी के ग्लास उनको देते देते मेने बोल दिया के," माँ पापा तो दीदी के यहापे चले गए। अभी वो 15-20 दिन के बाद ही आएंगे।


ये सुनते ही वो थोड़ी मायूस सी हो गयी। शायद उसको बहोत कुछ बताना था मेरी माँ को। उसकी निराशा साफ चेहरे पर झलक रही थी। अब में उसे अच्छेसे देख पा रहा। उसने मंगलसूत्र नही पहना था। बस एक बिंदी लगाई थी। उसकी मांग भी खाली ही थी। पर उसका सौंदर्य और ही झलक रहा था । वो बेहद सुंदर लग रही थी और उसकी सुंदरता उभर के बाहर आ रहा थी।


मैंने कहा - भाभी, माँ ने बताया आपके पति के बारे में। बहोत ही बुरा हुआ। अब आप कैसे हो। ठीक तो होना।


सविता भाभी - हा अमेय। अब ठीक हु में। में भी अपने मायके गयी थी थोड़े दिन। अभी 2 हफ्ते हुए वापस लौटकर।


मै- तो अब आपकी बेटी काह पे है? वो तो ठीक है ना?


सविता- हा वो ठीक है। मे वहाँपर ही उसे छोड़ के आयी। अब वो वाहि पे बड़ी होगी। वाहि पे पढ़ाई करेगी अपने दादी के यहाँ।


में बोला," हा क्या भाभी! फिर आप यहापे अकेले ही रहोगे क्या?।"


सविता, " हा! अब पैसे कमाने के लिये किसीको तो इधर रुकना पड़ेगा ना।"


मेने कहा,- हा सही बात कही आपने, वो भी बात है। भाभी आप रुकिए में चाय बनाता हु एकदम बढ़िया से।


वो एकदम से नही नही बोलने लगी। वो बोली, तू बस बैठ जा यहापे। कुछ मत बना। अब में निकलने वाली हु।


तेरी माँ होती तो थोड़ा बात करके मन हल्का हो जाता पर अब क्या करे। ऐसा बोलके वो चटाईया उठाने लगी। मैने थोड़ा फ़ोर्स किया। नही आपको चाय तो पीनी ही होगी करके में अंदर बनाने चला गया। भाभी मेरा आग्रह देखकर रुक गयी। चल ठीक है पर थोड़ा सा ही बना हा।ज्यादा नही। ऐसा बोलकर वो फिरसे बैठ गयी। में थोड़ा सा नर्वस होगया था भाभी को सामने देख कर।


मेरा लन्ड पूरा नीचे गिर गया था। मेने सोच लिया था अभी वक़्त है भाभी को अपना हथियार दिखाने का। में ने चाय गैस पर रख दी और मेरे लन्ड को सहलाने लगा। मेने आंख बंद करके सविता को देखा और एकदम से मेरा लन्ड उसकी 6 इंच की अवस्था मे आ गया। तब तक चाय भी उबल कर ऊपर आ गयी। चाय की महक पूरी घर मे आ रही थी।


भाभी हॉल में बैठी , थी वहासे बोली, अरे वा। चाय की खुशबू तो बहोत अच्छि आ रही है अमेय। तुम तो सब सिख गए। मेने हसते हसते भाभी को बोला, हा भाभी अब तो बड़ा हो गया हूं। सब सिख रहा हु। मेने चाय को कप में डाला। मेरा लन्ड का साइज अब पूरी तरीकेसे दिख रहा था। बड़ा मोटा लन्ड मेने चाय के ट्रे के पीछे छुपा लिया। जानबूझकर मेने ट्रे नीचे पकड़ा था। और में भाभी को चाय परोसने निकल पड़ा। में भाभी के पास गया।वो तो निचेही बैठी थी, तो में थोड़ा झुका और मैने भाभी के सामने ट्रे लाया।


मैने प्लान ही ऐसा किया था के सविता जैसी ही कप उठाये और में ट्रे बाजू करू, मेरा लन्ड उसके सामने हो। भाभी ने चाय का कप उठाया। पहले तो उसकी नजर चाय पर थी। पर जैसे ही उसने कप उठाया, मेरे पैंट के अंदर का लम्बा लन्ड उसके सामने पेश हो गया। मेरा लन्ड पैंट में था पर मैने उंडेरवेअर नही पहनी थी तो वो अच्छेसे उभर के दिख रहा था।


मेंने सविता के तरफ ही देखा। सविता की आँखे फ़टी की फटी रहै गयी थी। वो बस वहापे देखे ही जा रही थी। अचानक वो होश में आगयी और उसने कप को मुह से लगाया। चाय एकदम गरम थी। एकदम सविता भाभी का मुंह जल गया। वो जोरसे चिल्लाई। थोड़ी सी चाय उसके ब्लाउज पे गिर गई थी। मैं वही था। मेने झटसे एक मग्गे में पानी लाया और भाभी को दिया और बोला, - क्या हुआ भाभी? आरामसे चाय पियो ना, गर्म है वो।


दिखवा मुझे क्या हुआ। भाभी- अरे कुछ नही। वो ज्यादा ही गर्म थी। बोलके भाभी ने पानी पिया। मैं भाभी के सामने ऐसे खड़ा था के उसे मेरा खड़ा 6 इंच का लन्ड साफ साफ दिखाई दे। अब वो चाय पी रही थी जब जब वो चाय का कप अपने मुह को लगाती तब तब वो पूरा टाइम मेरे लन्ड को घूरती। और उसके बाद थोड़ा मेरे तरफ देखके मुस्कुराती और बाते करती।


में वो समझ रहा था की वो भी थोड़ा उत्तेजित हो रही है। मेने भी थोड़ा थोड़ा लन्ड को सविता के सामने छूना चालू किया। जैसे ही मेने वो किया मेरा लन्ड एकदम से खड़ा हो गया और कभीभी मेरी पैंट फाड कर बाहर आ जायेगा ऐसा लगने लगा। भाभी वो सब देख रही थी।उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। अब उसने चाय खत्म करि और बोली," चलो, में निकलती हु।माँ को बता देंना में आयी थी।" ऐसा बोलकर वो खड़ी हो गयी।


वो खड़ी हो ही रही थी कि उसका पल्लू नीचे गिरा और उसका पूरा बदन मेरे सामने था। मैने देखा उसके ब्लाउज का ऊपर वाला बटन टूटा है।और उसकी वजहसे सविता के आधे स्तनों का दर्शन हो रहा था। सविता ने सिर्फ बीच वाला बटन लगाया था। और नीचे वाले बटन की जगह सेफ्टी पिन लगी हुई थी।


वो बहोत ही गरीब थी पर सुंदर बहोत थी। उसके गोल गोल स्तन उसके ब्लाउज से बाहर आना चाहते थे। उसके चुचे मुझे फिरसे दिखाई पड़े। वो भी बड़े और खड़े हो चुके थे। उसका चेहरा भले ही सावला हो पर उसकी छाती तो गोरी ही दिख रही थी। शायद सविता भी मेरा लन्ड देखकर उत्तेजित हो चुकी थी।


में उसके पास ही था तो में देख सकता था उसकी नजरे मेरे ऊपर ही गढ़ी थी। लोहा गरम तो हो गया था बस अब एक घाव करने की देर थी। सविता ने अपना पल्लू उठाया और वो एकदम से सोफे के पास जाकर खड़ी हो गयी। में भी झट से सविता के पास गया और उसके पास जाकर खड़ा हो गया। अनजाने से, में सविता के इतने करीब चला गया के मेरा खड़ा लन्ड सविता के पिछवाड़े को हलकेसे लग गया। ऐसा होने से भाभी थोड़ा असहज महसूस करने लगी।


वो थोड़ा आगे चली गई। मेरी तरफ घूमी और बोली, "अमेय, ये क्या चल रहा है तुम्हारा? तुम इतने पास क्यो आकर खड़े हो गए हो।" सविता के आवाज में थोड़ा गुस्सा और थोड़ी घबराहट साफ साफ दिखाई पड़ रही थी। ये सब एकदम अचानक होने के कारण वो थोड़ी घबरा गई थी। पर अब मेने बड़ी हिम्मत से सबकुछ सविता को बताने के लिए मन बना लिया था।


अब बस मुँह से कहना बाकी था। मै बोला, "देखो सविता, में तुम्हे कुछ बताना चाहता हु। तुम पहले शांत हो जाओ और मेरी बात सुनो। सविता बोली, "क्या! कौनसी बात?" में बोला," पहले तुम गुस्सा नही करोगी ये मुझे वचन दो। तभी में बताऊंगा।"


सविता अब थोड़ी सिरिअस हो गई थी। सविता अब मेरे तरफ देखके बात करने लगी। सविता बोली, " पर ऐसी कौनसी तुम बात करने वाले हो के मुझे गुस्सा आये? । पहले तुम बताव फिर में सोचूंगी।" में बोला, " में कोई घुमा फिरके नही बात करने वाला भाभी। मुझे आप बहोत पसंद हो। मेंने आपको जबसे देखा था, तबसे में आपको चाहने लगा था।


पर तब आप शादीशुदा थी और में बहोत छोटा भी था।कुछ समझ नही पाता था के ये क्या है। इसलिए कुछ बोल नही पाया। पर अब मुझे समझ आ रहा है। में आपके प्रति हमेशा आकर्षित होता हूं। " इतना बोलते ही सविता चौक गयीं।


शायद ये सब हज़म ना कर पा रही हो। और बोली," अमेय ये तुम क्या बोल रहे हो। तुम्हारी उम्र ही क्या है। तेरी माँ और में अच्छे दोस्त है। तुझको मैने ऐसे नजरोसे.... " इतना बोलते ही मेने उसके होठो पर मेरा हाथ रख दिया। और मैने कहा, "रुको जरा भाभी। तुम मेरी पहले बात तो सुनो। " सविता बस मुझे देखे जा रही थी।


वो रुक गयी और उसने मेरा हाथ हटा दिया। और बोली, " क्या अब बोलना बाकी है। इस सब के बाद भी। ठीक है बोलो।" मेने कहा," देखो! जरा आराम से सोचो। अब तुम्हारे पति का तो देहांत हो चुका है। तुम्हारी बेटी भी तुम्हारे पास नही रहती भाभी। तो तुम्हारी भी कुछ इच्छाएं होंगी। तुम तो अभी जवान हो। और तो और तुम्हारा अभी चटाइयोको बेचना भी बंद था। तो तुम्हारी हालात भी अभी ठीक नही है। तो ऐसे परिस्थिति में तुम्हे कोई तो साथ देने के लिये चाहिए होगा के नही तुम ही बताव।


तो में तुम्हे वो सारी मदत करूँगा और तुम मेरी मदत करना। " वो बीच मे ही बोली, " तुम्हारी मदत? कैसी मदत? और वो भी मुझे कौनसी मदत तुम करोगे? ।" में बोला," भाभी आप समझ नही रहे हो।में अब जवान हो चुका हूं। मेरे भी कुछ जरूरते है। और आपकी भी।" और मैने भाभी का हाथ अपने हाथ मे लिया। सविता को सब समझ रहा था।मुझे उससे क्या चाहिए। पर फिर भी वो भोली बन रही थी।


सविता ने मेरे हाथसे अपना हाथ छुड़ा लिया। सविता जबसे आयी थी तबसे ही पूरे टाइम वो मेरे लन्ड को बिना कुछ बोले घूरे जा रही थी। इसका मतलब साफ था के उसके मनमे भी बहोत सारी इच्छाएं दबी हुई थी। अगर उसे ऐसा कुछ भी गलत लगता तो वो कब की चली गयी होती या फिर मुझे साफ साफ बोल देती। वो इस सबके मजे लेते नही बैठती। वो बस घबरा गई थी के ये सब इतनी जल्दी और अचानक हुआ। उसे शायद लगा भी नही होगा के में उसे ऐसा कुछ पूछुंगा भी। पर मैने सारा आत्मविश्वास जुटा कर उसे ये पूछा था।


सविता बस शांत खड़ी मेरी बाते सुन रही थी। में बोला," "देखो भाभी। मुझे माफ़ कर देना मेने कुछ भी गलत कह दिया हो तो। पर मुझे साफ साफ लगता है के आपको किसीकी तो जरूरत पड़ेगी आगे जाके। आप अकेले नही सब कर पाओगी। और जिस किसी इंसान के साथ आपन आगे रहोगे । वो जो भी इंसान रहेगा वो कैसा होगा आपको मालूम भी नही होगा।


अगर वो भी आपके पति जैसा निकला तो?। रोज शराब , मारना, पीटना अब आप ही सोचो, आप ये झेल भी पाओगी?।" "उससे अच्छा में ही हु ना!। आपने मुझे पहलेसे देखा है। आप मुझे अच्छे से जनती हो। और में आपको चाहता भी हु।में आपके लिए कुछ भी कर सकता हु। " भाभी बस मुझे सुन रही थी। वो कुछ भी नही बोल रही थी। वो मायूस होकर बस मुझे देखे जा रही थी। में आगे बोला," वो सब छोडो। मुझे मालूम है आपका घर भाड़े पे है। और जबकि इतने दिन से आपने ने काम नही किया इसका मतलब आपके पास पैसे कम होंगे और आपको खर्चा पानी सब देखना होगा। आपकी लड़की आपके पास नही रहेगी, पर उसका खर्चा तो आपको ही उठाना पड़ेगा ना। आप समझ रही हो। इतने पैसे आप लाओगी कहासे?।


मुझे थोड़े ही दिन में जॉब लग जायेगा। क्यो न ये सब जिम्मेदारियां में ही उठाऊ। और बस आप मेरा ध्यान रखो! । इतना सब सुनकर वो थोड़ी शान्त हो गई थी। वो थोड़ी सोच में तो जरूर पड़ी थी। भाभी मेरे से दूर हो गई और बस मुझे देखती रहे गई। मेने बहोत अच्छेसे अपना जाल बिछाया था। मेने पहले उसे उत्तेजित किया।


उसकी शारीरिक इच्छाए जो दब चुकी थी उन्हें जगा दिया। फिर मेने उसे उसकी जरूरते गिनवाई। उसके अभिके हालात उसके सामने रखे। अब भाभी के पास मेरे इलावा कोई अच्छा विकल्प भी नही था। उनकी शारीरिक और भौतिक जरूरते में ही अच्छेसे पूरी कर सकता हु, ये वो समझ रही था। पर सविता भाभी कुछ बोल नहीं रही थी। वो बड़े दुविधा में फस चुकी थी। मैंने आगे कहां," अब कुछ तो बोलो भाभी। देखो! में कुछ भी तुम्हे फ़ोर्स नही करने वाला। मुझे बस हा या ना में जवाब दो। अगर तुम्हारी "ना" होगी तो में आगेसे आपको अपना चेहरा भी नही दिखाऊंगा। और अगर आपकी "हा" आ गयी तो आपको मेरी रानी बना कर रखूंगा। सोचलो आप ही अब।


क्या तुम्हें रानी बन कर रहना है या फिर तुम्हे फिरसे वही जिंदगी में वापस जाना है। " वो एकदम से मेरे तरफ देखने लगी। शायद जाने अनजाने में उनकी एकदम हल्की नजर मेरे नीचे गई। और वो फिर मुझे देखने लगी। इस सब मे मेरा लन्ड नीचे बैठ चुका था। पर अंदर कुछ न पहनने के कारण कुछ तो पैंट के अंदर लम्बा छुपा है वो समझ रहा था। उसके ऐसे करने के पीछे का कारन मुझे समझ नही आया। शायद वो भी बहोत कुछ चाहती थी। बस डर रही थी ।


इतना सब उसके लाइफ में अचानक घट रहा था। सविता बोली, " में क्या बोलू। में ऐसे जवाब नही दे सकती तुम्हे इस सबका। मेंने अभी अभी बहुत कुछ झेला है। मेरा पति शराब पिके आता था, मुझे बहोत मारता था। गालिया देता था। में कितने दिन भूकी सोई हु। मेरी जरूरतों का तो उसने कभी ख्याल ही नही किया था। इस सबसे में अभी अभी बाहर आई हूं। और इतनी जल्दी किसी और पर भरोसा करना। और वो भी तुम जैसे छोटे और नादान लड़के पर।


मुझे कुछ समझ नही आ रहा है।" वो अपनी भड़ास निकाल रही थी। वो मेरे सामने अपना मन हल्का कर रही थी। ये एक अच्छा संदेश था। इस दौरान में उसके थोड़े से पास गया और उसका हाथ मेरे हाथ में लिया, इसबार इसने हाथ को झटका नही। उसने थोड़ा सा हाथ पीछे लिया और उंगलिया मेरे हाथमे रहने थी। वो आगे बोली," देखो अमेय, मेने आजतक बस दुसरो के लिए ज़िन्दगी जीई है। में अब अपने लिए जीना सोच रही हु। और तुम मेरे जिंदगी में आ गए तो क्या होगा मुझे नही पता।


में बड़े संकट में पड़ गयी हु।" मैं बोला, "कैसा संकट भाभी? आपसे प्यार करना ये गलत है? या फिर आपको मेरे प्यार का इज़हार करना गलत लगा? मेने तो साफ शब्दों में आपको बताया है। में आपसे प्यार करता हु। मेरे कुछ जरूरते है । वो आप पूरे करो। आपके भी कुछ जरूरते होंगी वो में पूरा करूँगा। ये इतना आसान है।" सविता बोली," नही तुम ये समझ नही रहे हो तुम क्या बोल रहे हो। तुम इतने जवान हो। और में विधवा।तुम्हे जितना लगता है ये इतना आसान नही होगा। और तुम्हे में ही क्यों पसंद आई। सिर्फ में ही क्यों? मेने कहा," मुझे सिर्फ आपको पाना है भाभी।


मेरे पास, तुम ही क्यों..इसका उत्तर नही है। मुझे बस इतना पता है के ,बस तुम ही और कोई नही। " सविता गहरे सोच में पड़ गई। वो कुछ बोल ही नही पा रही थी। उसे भी वो सबकुछ चाहिए था। पर वो अपने जबान पर नही ला रही थी। अब मुझे बस आखरी वार करना था। मेने अब भाभी छोड़कर, सविता को उसके नामसे बोलनेकी योजना रखी।


उससे सविता को थोड़ा अपना पन महसूस होता। और वो मुझे अलग नजर से भी देख पति। मेने आगे बोला। "सविता! अब मुझे तुम आखरी बार बताओ। क्या तुम्हें मेरे से प्यार है के नही। तुम ये सब चाहती हो या नहीं। वरना तुम यहासे जा सकती हो। पर जाते जाते एक बाद याद रखना । में फिरसे तुम्हे कभी नही दिखूंगा।" वो चौक गयी थी। मेने उनको अचानक से उनके नाम से जो पुकारा था।


में आखरी के थोड़े शब्द गुस्से में बोल दिए थे। तो उसका चेहरा देखने लायक था। वो बस रोना रहे गयी थी। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़े और उसकी आँखों मे आँखे डालकर पूछा, क्या है तुम्हारा जवाब भाभी? में भाभी को बाहो में लेना चाहता था। और उसके स्तनों को महसूस करना चाहता था। में उसे बाहोंमे लू...तब तक अचानक उसने मेरे हाथ छोड़े और बोली," ठीक है अमेय, तुम्हे मेरा जवाब चाहिए ना। तो मुझे वक़्त चाहिए, में ऐसे जल्दबाजी में कुछ नही बता सकती।


अभी तो मुझे घर जाना होगा। दोपहर हो गयी है। मुझे आज कुछ ज्यादही देर हो गई है।" मेने घडी देखी। अभी 1.30 बज रहे थे। सविता भी मेरे हाथ छोड़कर, मुझसे थोड़ा दूर जा कर खड़ी हुई। (मुझे अब उस्से आशा नही थी। मुझे लगा के वो अब तो नही मानने वाली। वो जाएगी और कभी वापस नही आएगी) मुझे अब क्या करूँ समझ नही आ रहा था। मुझे सविता को खोना नही था। मेने कहां," ठीक है सविता। तुम जा सकती हो। पर एक बात सुन लेना! मुझे अभी तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत है। माँ और बाबा तो दीदी के पास चले गए।वो तो 15,20 दिन बाद आएंगे। मेरे पढ़ाई के वजहसे उन्होंने मुझे यही छोड़ा।


अब मुझेहि सब खाना बनाना पड़ रहा है। सब काम करने पड़ रहे है। और मेरा पढ़ाई का वक़्त सब इसमे में ही जा रहा है। तो क्या तुम यहाँ रहकर मेरा ध्यान रख सकती हो?। खाना बनाव। घर साफ रखो। और में जो भी हो उसके पैसे तुम्हे दे दूंगा।" सविता एकदम बीच मे बोली," क्यो? खाना तुम क्यो बना रहे हो। जुठ मत बोलो।


मुझे मालूम है तुम्हारे मांमा का घर पास में ही है। उधर तुम जा सकते हो।" में बोला, "मामा मामी 4-5 दिनों के लिए अपने रिश्तेदारों के यहाँ गए है। उन्होंने मुझे उसके बाद खाने के लिए बुलाया है। पर 4-5 दिन तो सब मुझेहि करना पड़ेगा ना। " (मेने सविता को मनाने के लिए जुठ बोल दिया था) सविता सोच में पड़ गयी। वो सोचने लगी क्या किया जाये।


तभी में बोला, " तुम्हे वक़्त ही चाहिए था ना। लो फिर तुम्हे में आज रात तक का समय देता हूं। अगर तुम्हारा जवाब "हा" है तो तुम्हे मुझे आज रात तक बताना होगा। में तुम्हे इतना ही वक़्त दे सकता हु। अगर तुम्हारा जवाब कुछ भी नही आया तो में समझ जाऊंगा तुम्हारे "ना" को।" "अभी मुझे तुम्हारी जरूरत है।


तुम मेरे काम पड़ी तो में हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा।" सविता मेरे तरफ देखने लगी। सविता को भी मेरे प्रति आकर्षण होने लगा था। सविता बोली, " ठीक है। में सोचूंगी इसके बारे में। अगर बात सिर्फ खाना बनाने की हो तो में तैयार हूं। पर में सिर्फ 2-3 दिन बनाउंगी। तुम्हारे मामा आने तक।" मुझे थोड़ा गुस्सा आने लगा था।


बार बार समझाना मुझे अच्छा नही लगता। में बोला, "सविता में तुम्हे सिर्फ खाना बनाने के लिये नही। यह 3 दिन रहने के लिए बुला रहा हु। तुमको पूरे घरको सम्भालना होगा। और मेरा भी ध्यान रखना होगा। अगर तुम्हे ये मंजूर है, तो ही आना वरना कोई जरूरत नही है।" "और सुनो इसके बाद मुझे कुछ नही सुनना, एक शब्द भी नही, अपना सामान लो और जाओ।"


सविता थोड़ी मायूस हो गई गयी और उसके आँख से आंसू टपकने लगे। सविता बोली," ठीक है। में निकलती हु।" (मुझे एकदम से बुरा लगा। शायद में कुछ ज्यादा ही कठोर हुआ था उस बेचारी पर। पर चूत के लिए उतना तो करना पड़ेगा ऐसा मेने सोचा।) मैंने कहा, " अब आगेकी बातें तुम्हारा जवाब आने पर ही होंगी। तुम जा सकती हो।"


सविता ने आँखे पोछली और वो अपना सामान( चटाइयां) उठाने लगी।वो अकेले उठा नही सकती थी। तो मै भी उसे उठाने के लिये आगे गया। मे झटसे आगे जाने की वजहसे मेरा लन्ड एकदम से 1-2 बार पैंट में ही उछला। और उसपर सविता की नजर पड़ी। मेने कुछ जानबूझकर नही किया था। अंदर चड्डी ना पहनने के कारण वैसा हुआ था। ऐसा होने के बाद सविता की का मूड एकदम ही बदल और अपने गाल में ही सविता हस पड़ी। में उसेही देख रहा था।


उसे मेरा उछलता लन्ड देख शर्म आ गई थी। समान उठाते वक़्त मेने उसके हाथ के ऊपर हाथ रखे। और उसे चटाइयोका ढ़ेर उसके सरपे दिया। सविता मेरेसे आँखे चुरा रही थी। पर उसके चेहरे पर मुस्कान साफ साफ दिखाई दे रही थी। सविता ने दरवाजा खोला । और वो नीचे जाने लगी गयी।मेंने दरवाजा लगा दिया और दौड़के बाल्कनी में गया पर में थोड़ा छूपके देखने लगा के वो ऊपर देखती है क्या? और उसने जाते वक्त ऊपर देखा। और जैसे ही सविता नीचे आयी। सविता ने बाल्कनी में देखा।


में वहापे ही समझ गया के वो भी मुझे पसंद करती है।बस डर रही है। उसे भी मेरे साथ वो सब करना है जो में उसके साथ करना चाहना था। वो भी बहोत दिनों से प्यासी थी। और कुँवा सीधे चलके उसके पास आया था। उसकी चुत जरूर गीली हो गई होगी ऐसा मेरा अंदाजा था। पर मुझे कही न कही लग रहा था कि वो आज रात नही आएगी। वो एकदम डरपोक थी। उसे उसकी इच्छा से जीना शायद ना आता हो। और अगर कुछ हिम्मत जुटा कर आयी तो भी अगले दिन ही वो आएगी।


वो भी कुछ खाना बनाने के लिये। और मुझे तभी उसके साथ कुछ करने मिलेगा। अगर वो तय्यार हो तो। वरना चुपचाप खाना खाकर बैठना पड़ेगा। ये सब मे सोच ही रहा था। शायद वो आएगी भी नही। शायद आज के बाद वो मुझे अपना मुँह भी न दिखाई। ये सब विचार करके मेरा दिमाग फटने लगा था। में मामा के यहासे दोपहर का खाना खा के आया।अब ऐसे करते करते शाम हो गयी।


में मेरे दोस्तों के साथ बाहर घूमने चला गया। और हमने बाहर ही खाने का प्लान बनाया। हमने बहोत मस्ती की। अब दोस्तो के वजहसे में थोड़ा सविता को भुला था। रात 8 बजे में घर पर आया। मेने मेरा बिस्तर हॉल में ही लगाया था। क्योकि वहापे TV था और में कोई तो एडल्ट फ़िल्म देखके हिलाने वाला था। पूरे दिन का स्ट्रेस मुझे बाहर निकलना था। में बिस्तर पे पड़ा था। रात के लगभग 9 बजे थे। मेरे खयाल में भी अब सविता का आना नही था। मेने मस्त मोबाइल पे कामवासना वेबसाइट खोल रखी थी।


खड़ा लन्ड मेरे हाथ मे था। बाहर हल्की सी बारिश चालू थी। सब दरवाजे खिड़कियां बंद थी। इसलिये घर के अंदर थोड़ी गर्मी थी । मेने मस्त AC चालू किया था और मे मस्त लन्ड को हाथ मे लिये कामवासना पर भाभी की चुदाई की कहानी पढ़ रहा था। तभी अचानक दरवाजे की घन्टी बजी।मे डर गया। मेंने झटसे शॉर्ट्स पहना। मुझे लगा मामा होगा या फिर , पड़ोस वाली आंटी दिमाग खाने आ गयी होगी। में गालिया देते देते ही उठा और मैने बिना देखे दरवाजा खोला।


दरवाजा खोलने के बाद मेने जो देखा में देखता ही रहे गया। सविता भाभी दरवाजे पर खड़ी थी। वो पूरी भीगी हुई थी।उसने साड़ी पेहेन के रखी थी पर वो बारिश में भीगने के कारन उसके बदन को चिपक गयी थी। में तो पूरा चौक गया था। मेने इसकी अपेक्षा ही नही की थी की ओ आएगी। पर वो आयी। मेरे चेहरे की खुशी साफ साफ झलक रही थी। वो मुझे देखकर मुस्कुराई। सविता भी एक अलग अंदाज से यहापर आयी थी ये दिखाई दे रहा था। उसके चेहरे की चमक छिपाए नही छिप रही थीं।


भाभियो की कहानियां पढनेके कारण मेरा लन्ड सख्त हो गया था। और शॉर्ट्स से साफ साफ मेरे लन्ड का आकार दिख रहा था। सविता मेरे सामने ही खड़ी थी। उसकी नजर आसानीसे मेरे लन्ड पर गयी। और वो वही देखकर गाल में ही हसने लगी। सविता बोली, " क्या में अंदर आउ? या फिर मुझे यही रोकने का इरादा है? ।" में बस सविता को देख रहा था। उसका भीगा शरीर। कटीला बदन। मेरी नजर उससे हट ही नही रही थी। में होश में आया, में बोला," अरे नही नही। आव न अंदर सविता। बारिश बहोत थी क्या? ।"


मेने उससे पूछा। सविता अंदर आ गयी थी। वो बोली, " हा आते वक्त बहोत बारिश लग गई। क्या करे।" में बोला, " अरे पर ऐसे बारिश में क्यो आयी तुम? अब बीमार पड़ गयी तो? हा! कौन देखेगा तुम्हे?" वो बोली," क्या करे! किसीने तो बस आज रात तक का समय दिया था। उसे परवाह नही थी तो में क्या कर सकती हूं।" वो मुझे ताने दे रही थी। पर में खुश था। में बोला, " हा फिर।


जवाब मिलना जरूरी था चाहे कुछ भी हो। अब रुको में आया।" इतना बोलकर में दौड़के जाकर उसके लिए टॉवल ले के आया। और उसे पोछने कर लिए दिया। सविता अपना शरीर पोछने लगी।में बस उसे देख रहा था। वो पूरी गीली हो चुकी थी। मैने देखा उसके ब्लाउज के अंदर का सब कुछ दिख रहा था। पर उसने अपने स्तनों को साड़ी से ढक दिया था। फिर भी उसके गोल स्तन भीगी साड़ी में ज्यादा उभर के दिख रहे थे। उसकी चूची साड़ी में से भी ऊपर आयी दिख रही थी।


वो अपना शरीर पोछने लगी । उसके हाथ मे एक फ़टी बैग थी। उसका चेन आधा खुला था। उसमें उसके कपड़े थे। सविता ने बैग को मुझे सोप दिया। और बोली," अमेय ये सारे कपड़े भीग चूके है। वो बाहर जाकर सूखने डाल देना।" सविता सच मर 2-3 दिन के लिये रहने आयी थी। मेरे खुशी का ठिकाना नही था। में बस अब ऊसे नंगा करने के सपने देखने लग गया। उसे कैसे चोदना है वही सोचने लगा। सविता बोली, " जा रहे हो ना? या फिर में ही करू? " मैंने होशमें आया। मेंने बोला, " अरे! नही नही। में जा रहा हु। ठीक है।


तब तक टॉवेल से पहले बाल सुखा देना वरना सर्दी लग जायेगी। सविता मेरी तरफ देख के बस मुस्कुराई और उसने गर्दन हिलाई। मे balcony में गया और मैने उसका बैग खोला। उसने 3 साड़िया लायी थी। मेने एक एक कर 2 साड़िया टांग दी।और मैने जैसेही तीसरी साडी खोली अचानक साडी से कुछ गिरा। मेने देखा तो वो उसकी अंदर की चड्डी थी।


मेने चड्डी को उठाया और देखा तो उसका पिछला भाग पूरा फटा था और उसमें छेद छेद बन गये थे। मेने झटसे उसे सुंघा। सविता के चूत की मिठास उसमेंसे आ ही रही थी। वो गिला होने कर कारण मेने उसे भी सुखने डाल दिया। सविता ने शायद अपने साथ सिर्फ 1 ही पैंटी लायी थी। वो ब्रा तो पहनती ही नही थी ये मुझे मालूम था। अब में अंदर गया।


हॉल में AC चालू था और वो भीग के आयी थी इसलिए सविता को थोड़ी ठंड लगने लगी थी। मेने फटाक से बोला, सविता में तुम्हरे लिये गरमा गरम कॉफी लेकर आता हूं। या तुम्हे चाय चाहिए? तुम बोलो क्या चाहिए। सविता ने धीरे से बोला ," चलेगी कॉफी।" और वो मुस्कुराई। वो आगे बोली ," सुनो ना, मेंरे पास सिर्फ साड़ियां ही है। और वो सब भीग गयी। तुम्हारे पास अपनी माँ का कोई गाउन वगरे होगा तो मुझे दोगे क्या? " ये तो नेकी और पुछ पुछ ऐसी बात हो गयी थी।


में बोला," हा सविता क्यो नही।, और अब ये घर तुम्हारा ही है।कुछ चाहिए तो एकदम बे झिझक मांगो।" वो बस मुस्कुराई। में उसकी बहोत ज्यादा फिक्र कर रहा था। शायद उससे पहली बार इतने अच्छेसे कोई पेश आ रहा हो।वो भी खुश थी। मेने सविता को अंदर चलने के लिये कहा और मेरा कमरा दिखाया। में बोला, " सविता ये मेरा रूम है। तुम गीले कपड़े उतारो। में तब तक नए कपड़े ले कर आता हु।" सविता कमरे में गयी और वो मुड़ गयी। सविता ने मेरी तरफ देखते देखते दरवाजा बंद कर लिया। और हसते हसते बोली, " अब जाव यहासे और गाउन लेके आव जल्दी।' में थोड़ा शर्माया। मुझे सविता की साड़ी उतरते देखना था।


उसके पीछे पीछे मुझे आते देख वो भी समझ गयी थी इसलिए उसने झटसे दरवाजा लगा दिया था।पर अब वो और कितनी देर तक रोक सकती थी?। आज पूरी रात मेरी थी। में झटसे माँ पापा के रूम में गया। मुझे मालूम था जब पापा गुस्सा होते है तो माँ उनको शांत करने के लिए कुछ अलग प्रकार के गाउन use करती है। और वो ऊपर वाली अलमारी में रखे है।


मे बेड पर चढ़ा और देखने लगा सबसे हॉट गाउन कोनसा है। गाउन देखते देखते ही अचानक मेरे लन्ड ने सलामी दे दी और वो खड़ा हो गया। में उस हर एक गाउन में उसे ही देख रहा था। मेने लन्ड को बोला, बेटे आज तू ही मेरी इज़्ज़त रखने वाला है। मस्त खड़ा हो जा। मुझे एक गाउन मिला। वो एक रेड कलर स्लीवलेस था। उसका नेक बहोत नीचे था। और स्तनों वाले हिस्से पर जाली लगी थी। और वैसेही कमर के नीचे का साइड वाला कपड़ा पूरा जाली से बना था।


मुझे वही पसंद आया। मेने दौड़ते दौड़ते जाकर दरवाजे पर नौक किया। सविता ने दरवाजा खोला। उसने अपनी साडी खोल रखी थी। अब वो बस अपने ब्लाऊज पर थी। मुझे उसकी चुचिया साफ साफ दिखाई दे रही थी । नीचे बस लहँगा था। सविता हसते हसते मुझे देखने लगी। उसे ऐसा देखकर मेरा लंड और खड़ा हो गया। उसने मेरे हाथसे गाउन लिया।


गाउन लेते वक्त सविता की नजर मेरे खड़े लन्ड पर पड़ी। वो शॉर्ट्स में था लेकिन बाहर आने के लिए तरस रहा था। वो एकदम से शर्मा गयी। उसने मेरी तरफ देखा और झटसे दरवाजा बंद कर लिया। में उसका रिएक्शन देखने वही रुका। और वही हुआ।


वो जोरसे बोली," अमेय ये क्या है। मुझे गाउन चाहिए था और ये तुमने क्या दिया है ( वो जोरसे हसते हसते ही बोल रही थी) . में बाहर ही था, " मेने बोला माँ जाते वक्त सब लेके के गयी है। जो बचा है वो ही दिया तुमको। वही पहनना पड़ेगा तुम्हे आज।वरना अपनी अपनी साड़ी पेहेनके आ जावो बाहर। " ऐसा बोलने पर वो शांत ही हो गई। उसे लगा होगा में गुस्से से बोल रहा हु। वो कुछ भी नही बोली।


और में भी कॉफी बनाने चला गया। कॉफी बनके रेडी हो गयी थी। में उसको देने रूम गया तो वो वहा पर नही थी।में हॉल में गया और देखा तो सविता सोफे पर चादर लिपट कर बैठी है। वो पहेली ही भीगी थी । और घर मे AC भी चालू था। उपरसे मेंने उसको वैसा वाला गाउन दिया था। तो उसे ज्यादा ही ठंड लगने लगी थी। मेने जाकर उसके हाथ मे कॉफी थमाई। वो मुझे देख कर एकदम शर्मा गई। अब तो मेरा खड़ा लन्ड वो साफ साफ देख रही थी। उसने मुझे पूछा ," अमेय, तुम्हे तो ज्यादाहि ठंड लग रही है ऐसा लगता है। "


(और वो मेरे लन्ड को देखकर हस पड़ी) मेने एकदम से उसको जवाब दिया, "अब रातभर तो गरम ही होना है। अभी थोड़ी ठंड सहन करने में क्या जाता है।" उसे मेरे से इस जवाब की उम्मीद नही थी। वो बस शरमाई और कुछ न बोले कॉफी पीने लगी।


वो बीच बीच मे मेरे लन्ड को घूरती, मेरे आंखोमें देखती और कॉफी का घुट लेती। पूरी कॉफी खत्म होने तक उसका यही कार्यक्रम चल रहा था। वो कुछ भी बोल नही रही थी। और में भी बस उसके आंखोमें देखे जा रहा था। कॉफी खत्म होने के बाद उसकी ठंड कम हो गयी। मेने सविता के हाथ से कप लिया और जाकर किचन में रख दिये। में अब खुदको रोक नही पा रहा था। इतनी ठंड में किसीके शरीर की गरमाहट को महसूस करना कुछ अलग ही सुख देता है। में झटसे हॉल में आया। सविता मेरी ही राह देख रही थी। मेरे आते ही , वो मुझे बड़े कामुक नजर से देखने लगी। सविता ने मेरे आने से पहले ही, अपनी चादर उतार रखी थी। वो सोफे पर पैर फैलाकर बैठी थी। उसके स्तन जाली से ढके थे पर गाउन के जाली से उसके चुचे बाहर निकल आये थे।


ये सब देखकर मेरा लन्ड एकदम से और बड़ा हो गया। मेरी शॉर्ट्स मे अब वो छेद ही कर देगा ऐसा लग रहा था। मेने कहा," सविता, तुम कितनी खूबसूरत हो। क्या तुम सचमे मेरे सामने हो या में सपना देख रहा हु।" सविता शरमाई और बोली, " अगर तुम्हे ये सपना लग रहा है तो मुझे छू के देख लो। में सच मे ही हु तुम्हारे सामने। आव इधर।" मेने पहले तो झटसे अपना शर्ट निकाला। और उसके पास चला गया। वो एकदम से बोली, शैतान! मेने बस छूने के लिए कहा था। शर्ट उतारने के लिए नही।" मेंने अब उसकी एक न सुनी। में उसके पास गया और मेने उसको मेरो बाहोंमे जखड़ लिया। उसके स्तन मेरे छातीसे पूरे चिपक गए।


उसके बड़े चुचे मुझे चुभ रहे थे। सविता ने अब उसका शरीर मुझे सौप दिया। उसने भी मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसने अपनी आँखें बंद कर ली। हम दोनों जोरसे सास ले रहै थे। मुझे कुछ तो अलग ही एहसास हो रहा था , जो मेने आजतक महसूस ही नही किया था। मेरा लन्ड अब एकदम कड़क हो गया था और थोड़ा थोड़ा उसके घुटने को टच हो रहा था।सविता भी जानबूझकर अपना घुटना आगे पीछे कर मेरे लन्ड को सता रही थी। सविता ने अपने आप को मुझे सोप दिया था और वो अपना होश खो बैठी। उसके पति की कमी और उसकी अधूरी प्यास आज में पूरी कर रहा था। उसके स्तन मुझे लगने के बाद मुझे एक गुदगुदे गद्दे का अहसास हो रहा था।


में अपनी छाती से उसके स्तनों के ऊपर दबाव डाल रहा था। और वो हल्के हल्के सिसकिया दे कर मुझे और उत्साहित कर रही थी। थोड़ी देर तक ये खेल ऐसे ही चलता रहा। अब मुझे उसके रसीले होठ चूसने थे। मेने उसे थोड़ा दूर किया और उसकी गर्दन पकड़कर उसके मुह में मेरी जबान दे दी। और उसकी जबान को चाटने लगा। उसके मुँह का सारा रस में पी रहा था। में बीच बीच मे उसके गले को चाटता।और उसको love bites देता। वो बस सिसकिया देती। सविता को भी अब मजा आ रहा था। मेने हलकेसे सविता का हाथ अपने हाथ मे लिया और उसका हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया। लन्ड हाथ मे आते ही उसने लन्ड को कस कर पकड़ा और सहलाने लगी।


सविता के मुँह से खुद ब खुद शब्द निकले," इतना बड़ा लन्ड है तुम्हरा अमेय। बापरे। " और वो हसने लगी। मेने कुछ भी नही बोला। में बस सबकुछ महसूस कर रहा था। में और जोरसे उसे किस करने लगा। उसका हाथ मेरे लन्ड को और उत्तेजित कर रहा था। मेने भी एक हाथ गाउन में डाला और उसके स्तन को जोर जोरसे दबाने लगा। सविता ने जोर से सिसकी दी। ओह्ह अमेय आह आह।। उसकी पूरी चुत गीली हो चुकी थी। चुत से पानी बहकर उसके जांघो तक आ चुका था। 15- 20 मिनट के किस के बाद हम दोनों थोड़ा होश में आ गए। अब हम दोनों को भी प्यास लगी। क्योंकी एक दूसरे का रस पी पी कर हमने पूरा मुँह सूखा कर दिया था। मेने पास में ही रखी बोतल खोली और 2 घुट पिये। वो भी मस्ती के मूड में थी। सविता मेरे मुँह के नीचे अपना मुँह खोल कर रुक गयी। उसने मुझे इशारा किया।उसे मेरे मुँह से ही पानी पीना था। मेने भी वैसाही किया। मेने मेरे मुँह में लिया सब पानी उसके मुँह में डाल दिया।


सविता ने भी पूरी चाव से वो पानी गटक लिया। वो अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी। अब उसको पसीना पसीना हो रहा था। में समझ गया था अब वो तैयार है। मेने अब उसके स्तनों पर हाथ रखा।और जैसेही में उसको दबाना चालू करता। तभी अचानक ! उसे क्या हुआ क्या मालूम। पर वो एकदम से उठी और थोड़ा दूर जाकर खड़ी हुई। में सोफे पर बैठा था और वो उस सेक्सी गाउन में मेरे सामने खड़ी थी। मे बस उसे देखता ही रहे गया। अब उस कपड़े में उतनी ताकत नही थी को वो उसकी सुंदरता छूपा सके।


उसके चुचे एकदम खड़े हो चुके थे। उसकी गांड बहोत ही बड़ी थी, गाउन उसे थोड़ा फिट हो रहा था। और वो एकदम से उठने के कारण गाउन का पूरा कपड़ा उसके गांड के अंदर चला गया था। और उसकी गांड और उभरके दिख रही थी। मेरा लन्ड बस अभी फटना बाकी था, इतना वो कड़क हो चुका था। रोमांस के दौरान मेरा लन्ड का टोपा शॉर्ट्स से थोड़ा बाहर आ चुका था। और उसे वो साफ साफ दिखाई दे रहा था। पर वो जरा उदास थी। उसने वहा से ही पूछा," अमेय, क्या हम ये सब सही कर रहे है?।


मुझे डर लग रहा है। में आज आयी तो हु। पर मुझे कुछ समझ नही आ रहा है।" में उठकर उसके पास चला गया, और मैने बोला, हा सविता। हम कुछ भी गलत नही कर रहे। तुम ही सोचो अब, तुम्हरा पति अब नही रहा। में भी सिंगल हु। तो हम किसीको धोका तो नही दे रहे ना। रही बात समाज की तो वो तो वैसे भी बोलेगा ऐसे भी बोलेगा। हमे चुनना है हम किसका सुने। में किसीसे नही डरता। तेरे लिये में कुछ भी कर सकता हु। और में तो तुमसे बेहद प्यार करता हु। ये ले तू ही देख ले ऐसा बोलके मेने मेरा लन्ड उसके बाए हाथ को टच किया। वो एकदम से हसने लगी, और बोली "अमेय तुम्हे कुछ शर्म है के नही।


तुम कुछ ज्यादाही शरारती होते जा रहे हो।" इतना बोलके शर्माते हुए उसने हाथ ऊपर करके एक जोरकी अंगड़ाई ली। मेने मौके का फायदा उठाया और उसको झपट लिया। वो एकदम से चिल्लाई। और बोली ,"अमेय थोड़ा धिरे। वरना आज तो तू मेरी मेरी कमर तोड़ ही देगा।" और वो हसने लगी।" मैंने बोला, "सविता तेरी कमर टूट जाए या फिर पलंग पर आज तो में तुम्हे नही छोड़ने वाला कुछ भी हो जाये। में तुम्हे आज ऐसा चोद ने वाला हु की तू तेरे पति को भूल जायेगी, देख ले। " सविता ने बस मेरी तरफ देखा।


शायद उसे अपने पति का जिक्र अच्छा न लगा हो। सविता बोली, " तुम कुछ भी बोलते हो! पागल ...मेने तो तुम्हे कितना भोला और सीधा समझा था। माँ के सामने कितना अच्छा बनकर घूमता है। बताना पड़ेगा दीदी को तुम कैसे हो। इतना बोलकर वो जरा हस पड़ी। मेने बोला,"हा हा। पागल तो तूने मुझे बनाया है सविता। ये सब तेरा ही दोष है। और देख। मनमे तेरे भी है। फर्क इतना है के बस में बोलके दिखा रहा हु और तू मन मे रखती है।" और में उसे देखकर हसने लगा।


वो भी एकदम से शर्मा गयी। इस दौरान मेरा मोटा लन्ड उसके हाथ पर बार बार लग रहा था। सविता भी जाने अनजाने में अपना हाथ उसपर घिस रही थी। जैसे कि वो कोई जादुई चिराग हो और उससे कोई जिन बाहर आने वाला हो। उसके बाद मेने सविता को पकड़ा और उल्टा घुमाया। सविता भी कुछ ना बोलके जैसे में कर रहा था वो चुपचाप करते जा रही थी। मेने सविता के हाथ पीछे लिए और अपने दोनों हाथों से उसके स्तन को जोरसे दबोच लिया। सविता चिल्लाइ," ahh ohhh अमेय। धीरे से ना दुखता है।


ऐसे कोन करता है क्या।" मेंने उसके कानमे हल्की आवाज में बोला," में ऐसा ही करूँगा। मुझे तेरे स्तन और बड़े करने है। चुप बैठ और में जैसा बोलता हूं वैसा कर।" इसबार वो कुछ नही बोली। उसकी आँखें बंद थी। वो बस सिसकिया दे रही थी।में उसके छाती जोर जोर से दबाने लगा। शायद उसे दर्द हो रहा था पर वो सहन कर रही थी।


में सविता के स्तनों को दबाते दबाते उसके चुचियो तक धीरे धीरे जाता था और लास्ट में चुचिया जोरसे दबाता था। सविता एकदम से सिसकी देती। और जोर जोरसे सासे सासे लेती। मेने सविता के हाथ पीछे ले लिए थे। मेने हलकेसे सविता के एक हाथ मे मेरा मोटा लन्ड सोप दिया। लन्ड हाथ मे आते ही उसने उसे दबाना चालू किया।


अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था। मेरी भी सासे बढ़ने लगी थी। वो मस्त मेरा लन्ड सहला रही थी। बीच बीच में, में मेरा लन्ड उसके गांड पे लगता और में हल्के से उसके दोनों टांगो के बीच मेरा लन्ड ले जा कर रगड़ता । उसको वो पसंद तो आ रहा था। सविता को ऐसा सुख बहोत दिनों के बाद मिल रहा था। वो जोर जोरसे बस सिसकिया देती। और मुह से आह ओह्ह करके आवाजे निकलती। मेने धीरे से उसके बंधे बाल भी खुले कर दिए। सविता के बाल बहोत लम्बे थे।उसके गांड तक उसके बाल देखकर में और उत्तेजित हो गया।


में और जोरसे उसके स्तनोको सेहेलाने लगा। और मेरा लन्ड उसके हाथ मे आगे पीछे करने लगा। अब उसको ज्यादा दर्द होने लगा था। सविता बोली, " अमेय आह आह रुको जरा। ओह्ह ओह्ह...और जोर से मत दबाओ। वरना मेरा दूध निकल जाएगा।" में समझ गया था उसे मजा आ रहा है। और वो भी एकदम गरम हो चुकी है। उसने मेरा लन्ड छोड़ा।


उसने मेरे हाथो पर अपने हाथ लगाए और वो मेरे हाथ अपनी चुचियो पर ले गयी। जैसे उसे बस मेरेसे चुचिया दबवानी हो। मेने भी वैसेही ही किया। अब में बस उसकी चुचियोको जोरसे दबाने लगा। जोर जोरसे दबाने लगा। वो बस चिल्ला रही थी, "ओह्ह ahhh ahh बस बस।" थोडीही देर में उसके स्तनोसे दूध बेहेने लगा । मुझे तो वो पीना था, पर उसके इतने बड़े स्तन मुझे मेरे हाथोंसे छोड़ने नही थे, मुझे उन्हें और थोड़ा दबाना था। तो में थोड़े देर फिरसे उसके स्तनोको सेहेलाते रहा।


फिरसे मेने वही चालू किया उसकी छातीसे चुचियो तक के सफर मेने जारी रखा। वो जोर जोरसे सिसकिया भरे जा रही थी। अब बारी थी मेरा हथियार पैंट से निकलने की। अभी तक वो मेरे लन्ड को मेरे शॉर्ट्स के अंदर ही मसल रही थी। में तो पहले उसे नंगा देखता चाहता था।पर अब मुझसे रहा नही गया। मैंने झटसे मेरी शॉर्ट्स उतार दी।


अब में 26 साल का लड़का, 40 साल के औरत के सामने नंगा था। मेरा 6 इंच का लन्ड अब सविता कर पिछवाड़े में चुभने लगा था। मेरे लन्ड की गरमाहट उसे महसूस हो रही थी और उसके गांड की गरमाहट मेरे लन्ड को। मेरे हाथ उसके स्तनों पर थे और उसके हाथ मेरे हाथों पर थे। मेने मेरा बाया हाथ हटाकर उसके बाएं हाथ पर रखा। और उसीके हाथ से उसके स्तन सेहेलाने लगा।


सविता बस आह ओह्ह ओह्ह अमेय जोरसे और जोरसे इतना कहने लगी। बस थोड़ी देर मेने उसके उंगलियों से उसकी चुचियो को दबाया और झटसे उस हाथ को नीचे लाया। उसे कुछ समझता न समझता उससे पहले मेरा गरम ,मोटा ,लम्बा लन्ड उसके बाये हाथ मे मेने सोप दिया था। अब वो मेरे लन्ड को महसूस करे जा रही थी।


अब उसपर कोई कपड़ा नही था। उसके ठंडे हाथ मे मेरे लन्ड पर महसूस कर रहा था। वो मेरे लन्ड के हर एक धमनियों पर अपनी उंगलिया घुमा रही थी। वो हर एक जगह को हाथ लगाकर देख रही थी। उसने मेरे टोपे के चिर पे भी उंगली फहराई। उसने इतना बड़ा लन्ड पहले कभीभी हाथ मे नही लिया था।


मेने हलकेसे उसके कान में बोला, " सविता कैसा लगा मेरा हथियार? उसको जरा हिलाओ न। या बस हाथ ही घुमाती रहोगी।" उसकी आँखें बंद ही थी। वो एकदम से हसते हसते बोली, "अरे तुम आदमी हो, के कोई शैतान। इतना बड़ा लन्ड।


मेरे पति का 2 बार लन्ड लिया तो भी तेरे जितना नही हो पायेगा। मुझे आदत नही है हा अमेय, इतना बड़ा लन्ड अंदर लेने की। ये तो मेरी चुत फाड़ देगा। धीरे करना थोड़ा। वरना में बात नही करूँगी तुमसे। में बोला," सविता सब का कभी न कभी पहली बार होता ही है। हा हा पहले थोड़ा धीरे से ही करूँगा पर बादमे तुझे बुलेट ट्रेन की सवारी करनी पड़ेगी।


में आज तो तेरी चूत को फाड़ने वाला हु। आज तू बस मेरी सुनेगी। जो में बोलूंगा वही होगा।" ऐसा बोलते ही उसने मेरे लन्ड को जोर से कस कर पकड़ा। में दर्द से थोड़ा चिल्लाया। पर उसके हाथ मे मेरा पूरा लन्ड बैठ ही नही रहा था। फिर भी वो मेरे लन्ड को दबाते जा रही थी। शायद उसे आगे मिलने वाले दर्द का एहसास मुझे अभी महसूस करवाना था। में बोला, सविता धीरे । क्या इसेको पकड़ के झूलने वाली हो क्या इतना जोरसे पकड़ रही हो। और बदला लेने के लिए मेने भी उसके स्तनों को एकदम जोर से दबाया। वो एकदम मुझे झटका देकर मेरेसे दूर आगे भाग गई।


आगे की Hindi Sex Stories अगले भाग में सुनाऊँगा। जो २-३ दिन बाद पब्लिश होगी। अगर मेरी कहानी अच्छी लगी हो तो मुजे मेल करके मेरा होंसला बढ़ाए। amymog74@gmail.com

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