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चटाई बेचने वाली सविता भाभी-३: Free Sex Kahani

अब किस करते करते मैने उसके चुत पर मेरा हाथ डाला। उसकी चुत पूरी गीली हो चुकी थी और में कंट्रोल नही कर पाया। मेने एकदम से मेरे 2 फिंगर्स उसकी चुत में सरका दिए। उसने जोरसे आवाज निकाला, "aaaahhhhhhhhh, ohhhhhh अमेय य य...नही नही aahhh ahhh ohhh। में उंगलियो को अंदर बाहर करता रहा और वो मजे लेती गयी।वो भी अब मेरा लन्ड हिलाने में लग गयी।


उसके मुँह से बहकर आयी थूक पर ही वो मेरा लन्ड घिसती और गिला करती। अब रात के 12.30 बज गए थे। और इधर शायद हमारी रेस लगी थी के कौन पहला झाडेगा। उसके चुत में उँगली करते करते मेरा हाथ दुखने लगा था।पर मैने भी हार नही मानी थी। मैंने अब तीन उंगलिया उसकी चुत में डालना चालू किया।आखिरकार वो अब कन्ट्रोल नही कर पाई।


वो जोर जोरसे सिसकिया देने लगी। और उसने पूरा मेरे हाथ के ऊपर पर झाड दिया। में मन हि मन खुश था। में जीता जो था। उसने आँखे खोली और वो शर्मा गयी, वो बोली, "मेने कहा था ना, तुम इंसान नही हो तुम तो शैतान....." वो अपनी बात पूरी करने से पहली ही, मैने वो उँगलिये उसके मुँह में ठूस दी। वो बस मुझे देखते रहे गयी। और उसने भी बड़े चाव से मेरी उँगलिया चाट चाट कर साफ की। अब मेने फिरसे उसको जोर जोरसे किस करना चालू किया।मुझे उसके मुँह का स्वाद चखना था।


उसके मुँह का स्वाद पूरा नमकीन लग रहा था। किस करते वक़्त में भी उसके चुत के बाल हल्के हल्के खिंचने लगा। पर वो उसके भी मजे ले रही थी। हमारा kiss चालू ही था। हम पूरा का पूरा एकदूसरे का थूक चूस रहे थे। थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा। अब मेने मेरे दोनो हाथोंको उसके गांडपर ले जाकर उसकी गांड को सेहेलाने लगा। उसको मजा आने लगा था।


वो भी उसकी गांड हिला हिला कर मजे लेने लगी। में उसकी गांड को पकड़कर जोरसे खिंचता और उसके गांड के होल को स्ट्रैच करता। और छोड़ता। वो उससे भी सिसकिया देती और मजे लेती। मुझे उसके गांड के होल में उंगली करने की इच्छा होने लगी। पर उसकी गांड इतनी बड़ी थी के सामनेसे मेरी उँगलिया उधर पोहोच भी नही पा रही थी।


शायद उसे मेरा ये प्रयास पता चल गया हो। उसने मेरी तरफ देखा।मुझे लगा के वो अब मुझे डाँटेगी। और मेरे हाथ अपने गांड से हटाएगी। पर वो एकदम से हसने लगी और मेरे कान के पास आकर बोली ," अमेय। क्या हुआ। हाथ पोहोच नही पा रहा क्या बच्चे का? इतनी बड़ी है क्या मेरी गांड। " और वो जोर से हसने लगी। सविता ने मेरा कस कर पकड़ा लन्ड छोड़ा, और वो मुझसे थोड़ा पीछे चली गयी। सविता अब पूरा घूम गयी थी। और उसने उसकी मोती गांड मेरी तरफ की। उसकी मोटी गांड मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थी।


उसने अपनी कमर पर काला धागा बांध रखा था। उसके पूरे गांड पर स्ट्रेच मार्क्स थे। पर वो भी ऐसे एक जैसे थे मानो किसीने डिज़ाईन ही बना दी हो। ये सब देखते ही मेरा लन्ड एकदम से उछल गया और बडा हो गया। वो थोड़ासा हि आगे होने के कारन मेरा 6इंच मोटा लन्ड उसकी गांड पर एकदम से लग गया। सविता ने पीछे मुड़ कर देखा और वो हसने लगी और बोली, "शैतान कहि के! उसको जरा लगाम लगा दे। वरना मेरी हालत बुरी कर देगा तुम्हारा हथियार।"


हम दोनों भी जोरसे हसने पड़े। सविता बोली,"अमेय अब ध्यान से देखो।" इतना बोलकर अब वो doggy स्टाइल में मेरे सामने झूक गयी। उसने उसकी छाती जमीन पर टिका दी और अपने घिटने फैलाकर गांड ऊपर की तरफ कर दी। सविता ने अपने दोनों हाथोंसे अपनी गांड के छेद को फैला दिया। सविता बोली, "अमेय, क्या तुम अब इसे देख पा रहे हो क्या? मेरी आँखें फ़टी की फटी रह गयी थी।ये सब मेरे लिए पहली बार था। ऐसा कुछ पहली बार मेरे ज़िन्दगी में घटित हो रहा था।


अब में उसके गांड के छेद को एकदम साफ साफ देख पा रहा था।उसके छेद के बाजू में छोटे छोटे बाल उगे थे। और वो उसके छेद को अंदर बाहर करे जा रही थी। वो एक अद्बुत दृश्य था। उस छेद के बिल्कुल नीचे ही उसकी चुत की रेषा थी। उसके गांड के फैलाने के वजहसे उसके चुत के अंदर योनि का भी थोड़ा भाग दिखाई दे रहा था। बस में पागल होने वाला था। ऐसा दृश्य। मेरा लन्ड खड़ा तो था ही अब उसके ऊपर की धमनिया भी एकदम फूल गयी थी। सविता का ये रूप में बस देखता ही रहे गया ।


मेने बोला," हा सविता, देख तो पा रहा हु। पर कहि में पागल ना हो जाऊं इसका मुझे डर है। मुझे कुछ सूझ नही रहा। आपही बोलो में क्या करूँ?" अब सविता हसने लगी। जैसे कि उसने मुझे हरा दिया हो।अपनी मुट्ठी में कर लिया हो। और अपने ऊपर गर्व हो रहा हो ऐसा उसका हसना था। सविता बोली," अम्म अमेय! क्या तुम इसे चाटना पसंद करोगे, या फिर उंगली डालकर इसकी गर्मी महसूस करोगे। देखो तुम्हारी मर्जी। तुम्हे जो चाहिए वो करो। आज ये पूरी सविता अमेय की है। और वो हसने लगी।


मेरी उंगलिया तरस रही थी उसके बिल में जाने के लिए। मेने देर न करते थोड़ीसी थूक हाथ पे लगाई और मेरी बीच वाली दो उन्गली उसके गांड में डाल दी। वो एकदम से चिल्लाई," ahhh ohhhh, धीरे धीरे।" मुझे उसके गांड की गरमाहट महसूस हो रही थी। उसका छेद बहोत गर्म था। मेने थोड़ी देर तक उंगली से अंदर बाहर किया।


उससे उसकी गांड से भी पानी निकलने लगा था। सविता बस सिसकिया दे रही थी। उसके गांड का छेद बहोत टाइट और छोटा था। सविता बोली, " अमेय धीरे करो। बहोत साल हो गए गांड को चुदवाए। आदत छूट गयी है। उस साले छेद को थोड़ा ढीला कर देना फिर जो मर्जी कर लेना।" में बोला," ठीक है सविता। जैसी तेरी मर्जी। रुक इसे अभी ढीला करवाता हु।"


मुझे उसकी गांड चखनी थी। और वो वैसेही अपने हाथोंसे गांड का छेद फैलाये लेटी थी। तो मेंने जरा भी देर न करते हुए उसकी गांड में मेरी जबान डाल दी और चाटने लगा। उसके मुँह से आवाज आयी, "ओह्ह, वॉव, अमेय ये तुम क्या कर रहे हो। ओह्ह अहह। प्लीज ऐसे ही चाटते रहो। बहोत अच्छा लग रहा है अमेय!।" उसकी गांड इतनी बड़ी थी कि मेरा पूरा मुँह उसकी गांड में छुप रहा था।


चाटते वक्त मेने एक चीज पर ध्यान दिया के उसके चुत और गांड से कोई भी बदबू नही आ रही थी। बल्कि कोई सी तो खुशबू थी एक प्रकार की। शायद Pears या lux साबुन से वो नहाई थी । यहि बात से में अधिक मोहित हो गया था उसपर। वो ऐसेही उठ कर नही आयी थी, सविता पूरा शरीर साफ और स्वच्छ करके आयी थी। जैसे कि उसे पता हो आज उसके साथ ये सब होने वाला है।


इसलिए में भी उसे पूरे मजे दे रहा था। में उसकी गांड खूब चूस रहा था। में बीच मे उसकी गांड को काटता। उसे चूमता। अब तो उसके पूरे गांड पर बस मेरे काटने के निशान थे।उसकी गांड लाल लाल हो चुकी थी। वो तो पागल ही हो गयी थी। वो जोर जोर से आवाजे निकालते ही जा रही थी। उसे मजा तो बेहद आ रहा था। में बीच बीच मे उसकी चुत भी चूसता।


उसकी चुत के छेद में जबान डालकर उसके गांड के होल तक मेरी जीभ घसीट कर ले आता और गांड के छेद पर थूक देता। और वही वापिस से चाट के उसकी गांड में जबान घुसता। वो बस सिसकिया देती रह जाती। बहोत देर तक ऐसा चलने के बाद आखिरकार वो खुदको रोक नही पायी और उसने मेरे मुँह में झाड दिया।मेरा मुँह पूरा उसके रस से भरा था। आज पहली बार किसने सविता की गांड इतने देर तक चूसी थी। सविता बोली," अमेय! में अब....ओह्ह अहह...मेरी सास...में थक गई बाबा...में थक गई।


और वो वैसेही लेट गयी बिस्तर पे। उसकी सास फूली थी।वो अपनी आँखें बंद करके चुपचाप पड़ी रही। वो जोर जोरसे सासे ले रही थी। अब मुझे फिरसे अपना लन्ड सविता से चुसवाना चाहता था।वो पिछला वाला अधूरा रहे गया था। में उठा और मैने चुपकेसे मेरा लन्ड सविता के मुँह के सामने रख दिया। और मेने सविता को बोला, "सुनो सविता! उठो ना। अब थकने का टाइम नही है।


अभी बहोत कुछ करना है। सब मजा क्या तुम ही लोगी क्या? उठो उठो। अब मेरी बारी है। अब मुझे मजे लेने है। चलो उठो। सविता तो पेहेलेही मदहोश थी। हमारे दोनों का शरीर पसीने से लतपत हो रखा था। सविता बोली," हम्ममम, जरासा रुको। मेरी सास फूल गयी है। तुम्हे तो कुछ होता है के नही। अरेरे में तो भूल ही गयी थी, मेरा पाला इन्सान से कहा पडा है। शैतान ही हो तुम शैतान ।"


और सविता ने आँखे खोली। उसके आँखो के सामने ही मेने लन्ड को रखा था। बड़ा लन्ड मुँह के सामने देखकर वो एकदम से डर के उठ गयी। और जोर से हसने लगी। हसते हसते सविता बोली, "तुम्हे जरा भी रुकना नही आता ना। देख रहे हो न क्या हालत की है तुमने मेरी।" (उसने पसीना पोछते पोछते कहा) सच बात बोले तो उसका मुँह इतना बड़ा नही था, के वो मेरा 6इंच का पूरा लन्ड गले तक ले सके।


पर में भी आज सुनने वाला नही था। मुझे वो एहसास महसूस करना था । मुझे उसके गले तक मेरा लन्ड पोहोचाना ही था । उसको बैठा देख में झटसे में खड़ा हो गया। सविता हसते हसते मुझे ही देख रही थी। में बोला," सविता , चल अब घुटनो पर बैठ जा। देर मत कर अब। में नही रुक सकता।" सविता बोली, " अरे हा बाबा रुको जरा। मुझे तैयार तो होने दो।" सविता स्तन को सहलाते और गाल में हसते हसते अपने घुटनों पर आ गयी।


वो बोली," हा, लो महाराज आ गयी घटनो पे। और कुछ?" में 2 कदम आगे गया और उसके सामने खड़ा हो गया। अब मेरा 6 इंच बड़ा और 2 इंच मोटा लन्ड उसके ठीक मुँह के सामने था। सविता मेरे लन्ड को घूरने लगी थी। सविता को अब समझ नही आ रहा था के इतना बड़ा लन्ड पूरा मुँह में कैसे लू। उसकी चिंता साफ साफ दिखाई दे रही थी।


सविता बोली," अमेय सुनो ना। तुम्हारा लन्ड बहोत बड़ा है और मोटा भी। तू ही देख ले मेंरा मुह कितना छोटा है। (और वो अपना मुह खोल कर मुझे दिखाने लगी) में बोला," समझ ले में तेरा पति हु। और यही मेरी इच्छा है। मुझे और कुछ भी नही सुनना है।" सविता के चहरे की मुस्कुराहट कम हो गयी थी। वो अपने आपन को तैयार कर रही थी। सविता बोली," ठीक है अमेय। जैसा तुम कहो। पर सुनो,धीरे तो कर सकते हो ना। में जितना हो सके उतना बड़ा मुँह करती हूं। तुम बस धीरे धीरे डालो।"


मेने सिर्फ गर्दन हिलाई हो "हा" बोला। सविता ने अपनी आँखें बंद कर ली। उसने 2 बार थूक गटक ली। और अपनी जबान निकल कर मुँह खोल कर बैठ गयी। मेने जरा भी देर न करते हुए झटसे उसके मुँह में मेरा लन्ड सरका दिया। उसने एकदम से उसके दोनों हाथ मेरे जांघो पर सटाये और पीछे होने लगी। मेने उसकी गर्दन पकड़ी और मेरा आधा लन्ड उसके मुँह में घुसेड़ दिया । अब सविता के पास कोई विकल्प नही था , सिवाय मेरे लन्ड को अंदर लेने के।


मेने सविता के हाथ मेरे जांघो पर से हटाये और दोनों हाथ मेरे गांड पे रख दिये। अब सविता ने जितना हो सके उतना उसका मुँह बड़ा किया। सविता ने अभीभी अपनी आँखें नही खोली थी। उसके आँख से पानी निकलने लगा। मुझे भी सविता की परवाह थी इसलिए में भी धीरे धीरे आगे पीछे हो रहा था। उसे जितना चाहिए उतना मुँह में देता और वापस निकलता। सविता बीच बीच मे मेरा लन्ड पकड़ती और खुदसे आगे पीछे होती। कभी तो वो पूरा लन्ड निकालके उसपर थूकती और फिरसे मुँह में लेकर वो सब थूक चाट लेती।


अब रूम में बस "gawk gwak pch pch gawk gawk supppp" इतना ही आवाज गूंज रहा था। उसकी थूक से मेरा पूरा का पूरा लन्ड गिला हो चुका था। लन्ड से उसकी थूक नीचे भी टपक रही थी। अब मुझे मेरा पूरा लन्ड उसके मुँह में देना था।बहोत देर तक मेने उसके मुताबिक लन्ड को अंदर बाहर किया। अब मुझे चार्ज लेना था। मेने अपना लन्ड उसके मुँह से निकला।


मेने सविता को कहा," सविता अब तेरी आँखे खोल और मेरी तरफ देख"।सुन रही है क्या? मेरी तरफ देख। ( सविता ने धीरे धीरे आँखे खोली। और वो मुझे घूरने लगी। उसके चेहरे पर कोई भाव नही थे। उसके मुह से थूक टपक रही थी।) मेने आगे कहा," अबसे मेरा लन्ड चूसते वक्त तू सिर्फ मुझे देखेगी। ना बाजू ना नीचे और नाही तेरी आँख बंद रहेगी।


और हा, तू लन्ड को हाथ भी नही लगाएगी। पूरा वक़्त तेरे हाथ पीछे बंधे रहने चाहिए। में मेरे हाथ से जैसा चाहिए वैसा तेरा सिर हिलाऊंगा और जितनी देर तेरे मुँह में लन्ड रखना चाहूं उतना रखूंगा। तुझे बस चूसना होगा।


अगर एक बार भी तूने हाथ लगाया, या लन्ड को मुँह से बाहर करने की , या फिर मुझे धकेलने की कोशिश भी की तो मेरेसे बुरा आज कोई नही होगा। अब तक तूने कहा वैसे किया अब मेरी बारी है। समझी?।"


(मेने ये सब जानबूझकर ग़ुस्सेमे बोला था। पर अगर वो मुझ पर गुस्सा करती और इसके लिए ना भी करती तो में रुकने वाला था। पर मुझे रिस्क लेके देखना था वो क्या करती है। मुझे मालूम था वो मेरे गुस्से से डरेगी। और वैसे भी मुझे पूरा लन्ड उसके मुँह में डालकर देखना था। मुझे एक बार वो करना था वो एहसास लेना था। और वो मौका अभी था) इतना सुनते ही सविता थोड़ी सी डर गई ।


उसके चेहरे पन कोई भाव नही थे। सविता ने झटसे अपने हाथ पीछे बांध दिए। (सविता बहोत भोली थी।उसके साथ पहली बार ऐसा कुछ हो रहा होगा शायद । क्योकि मुझे नही लगता के उसके पति ने उसको कभी भी संतुष्ट किया रहेगा। अब वो विधवा भी थी। उसे भी मालूम था उसे प्यार करनेवाला मेरे इलावा अब कोई नही बचा है। और उसने भी मन ही मन मे हो न हो मुझे अपना सबकुछ मान ही लिया था। में अगर कल उसे शादी के लिये भी पूछता तो वो शादी कर लेगी मुझसे।)


सविता ने कहा," अमेय ठीक है। तुम जो बोलेगो वैसा में करूंगी ,बस तूम गुस्सा मत करना। और जो भी करना ध्यान से करना। तुम्हारा लन्ड बहोत बड़ा है। मेने आजतक इतना कभी मेरे मुंह के अंदर नही लिया। " मेने कहा," हा सविता।अगर तुम मुझे खुश रखोगी तो में क्यों तुमपर गुस्सा करूँगा। और तुम बस मेने कहाँ उतना करो। मुझे और कुछ नही चाहिए।"


सविता बोली," ठीक है अमेय।जाओ, वो वहा पड़ा टॉवल है ना वो ले आ इधर।" मुझे कुछ समझ नही आया। मैने जाकर ,कुर्सी पर पडा टॉवल उठाया, और सविता के पास आ कर खड़ा हो गया। सविता ने अपने दोनों हाथ पीछे किये । और बोली,"अब बांध दे मेरे दोनो हाथोको। इससे में चाहू तो भी मेरे हाथो को बीच मे नही ला पाऊंगी। तब तो ठीक है ना।"


मेरे दिमाग मे भी ये आईडिया नही आया था। बस ये सोचकर ही मेरा लन्ड और सख्त हो गया। में बोल," सविता, तेरा दिमाग कितना बढ़िया चलता है। ये आईडिया में सोच भी नही पाया।" सविता तारीफ के वजहसे शर्माई और बोली," हा बस बस! सब समझता है मुझे। अब तारीफ तो होगी ही। सब मन की जो हो रही है।" और हम दोनों भी हसने लग गए। में झटसे गया। और मैने सविता के दोनों हाथ टॉवल से कस कर पीछे बांध दिए। वो चाहे तो भी उन्हें निकाल नही पाएगी इतनी खबरदारी मेने ली। और में जाकर उसके सामने खडा हो गया।


अब रात के 1.30 बज चुके थे। में अब उसके सामने खड़ा था।मेरा लन्ड और भी ज्यादा बड़ा हो गया था। और तरस रहा था सविता के गले मे उतरने को। वो बस मेरे लन्ड को घूरे जा रही थी। सविता थोड़ी डरी थी। वो पहली बार पूरा 6 इंच का लन्ड अपने मुँह में लेने जा रही थी। मेने कहा," सविता, जरा भी डरना मत। में एकदम धीरे से करूँगा। तुझे जरा भी तकलीफ नही होगी।"


सविता हसने लगी और बोली," ठीक है में तैयार हूं। गले तक जाके रुकना मत वरना सब खाना बाहर आ जायेगा, समझा?।" मेने उसे पूछा, " सविता , पहले कभी तूने पूरा लन्ड लिया है क्या मुह में?" सविता हसते हसते बोली," में शादीशुदा थी अमेय। मेरा पति को भी पूरा अंदर देना पसन्द था। पर वो इंसान था। उसका तेरे जितना बड़ा नही था , शैतान कहिके।


पर उसका बहोत ही छोटा था। 3 इंच था बस। अंदर लेते ही ख़त्म हो जाता था। तो ज्यादा दिक्कत नही होती थी अंदर लेने में।" मेने कहाँ," सविता तू मुझे पहले ही क्यों नही मिली? तेरा पति तो बिल्कुल नाकारा था!।" सविता बोली," अमेय, तू क्यों अभी इतने सवाल कर रहा है?। अब मुझे गुस्सा मत दिल और तरसा भी मत।वरना सब cancel कर दूंगी। फिर बैठना रोते।


अब मेरे मुँह में देदे जल्दी। मुझे बस अब चूसना है तेरा लन्ड , अब कोई सवाल नही और कुछ नही।" में हसके बोला," ठीक है बाबा ये ले।" में लन्ड लेके उसके चेहरे के पास गया। सविता ने मुँह खोल दिया। तभी मेने हल्के से उसके गाल पर लन्ड से 4-5 थप्पड़ लगाए। मेने ये करते ही सविता एकदम से शर्माने लगी और हस पड़ी। वो मुझे हवस भरी नजरोसे देखने लगी। अब मेंरा लन्ड तैयार था। उसने अपना मुँह खोला और मेरा लन्ड अंदर लिया। पहले बस वो टोपा चूसने लगी। मुझे बहोत मजा आ रहा था।


वो लन्ड के चिर में भी उसकी जीभ डाल रही थी। और लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। अब मुझे कंट्रोल नही हो रहा था। मेंने उसकी गर्दन पकड़ी और झट से आधा लन्ड उसके मु में सरका दिया। उसने एकदम उल्टी आने जैसा आवाज निकाला, aaawwkkk। और उसके गले का सारा थूक मेरे लन्ड पर गिर गया। में रुका नही , मेने वैसेही आगे पीछे करना जारी रखा।


मेने जैसे कहा था, सविता अपनी आँखें बस मेरेपे टिकये बैठी थी। वो बस मुझेहि देखे जा रही थी। अब मेने उसे हल्के हल्के झटके देना चालू किया। पूरी रूम gawkk gawkk gawkk gwakkk के आवाज से गूंज रहा थी। मेने उसके सारे बाल इकट्ठा करके उन्हें पकडा था, में उन्हें बीच बीच मे खिंचता और उनसे ही उसका सिर आगे पीछे कर लन्ड को मुँह में आगे धकेलता। अब टाइम आ चुका था मेरा लन्ड पूरा सरकाने का। में रुक गया। मेने उसकी आँखों मे देखा। उसकी "हाँ" उसके आंखोसे ही झलक रही थी।


मेने थोड़ा थोड़ा करके लन्ड उसके मुह में सरकाना चालू कर दिया। उसकी जीभ मेरे लन्ड के नीचे थी और में उसपर ही लन्ड घिसते घिसते उसके गले के अंदर जा रहा था। मेरे पूरे लन्ड पर उसकी थूक होने के वजहसे वो आसानीसे अंदर ले पा रही थी। में अंदर डालते जा रहा था। सविता के आंखोसे पानी आने लगा था। उसकी आँखें लाल होने लगी थी। वो थोड़ा असहज महसूस तो कर रही थी।पर में अब रुकने वाला नही था। मेने अब आधे जे ज्यादा लन्ड उसके मुंह मे ठूस दिया था।


वो ahhh ahmmm आवाज निकलने लगी थी। शायद उसे उल्टी आने जैसा हो रहा हो। पर फिर भी मेने पूरा लन्ड उसके मुह में डाल दिया।मुझे उसके गले का सबकुछ महसूस हो रहा था। मेने कहा," ohhh सविता। तुम क्या चीज़ हो यार! तू मेरा पूरा लन्ड खा गयी साली। ahhhhhhh। तू... तू लाजवाब है रे सविता। " इतना कहते ही उसने गले से एकदम सारा थूक मेरे लन्ड पर गिरा दिया। वो सब मेरी पेट तक आया और मेरा पूरा लन्ड गोटिया सब उसकी थूक से भर गया। अब मेने कसके उसके बाल पकड़े। और उसका सिर आगे पीछे करना चालू किया। में आधे लन्ड को बाहर निकलता और फिरसे अंदर डालता।


अब 15 मिनट से वो मेरा लन्ड मुँह में लिए बैठी थी। उसे आदत हो रही थी मेरे लन्ड की। अब वो आसानीसे मेरा पूरा का पूरा लन्ड उसके गले तक ले रही थी और निकाल रही थी। अब तो उसके मुह में पूरा लन्ड जब जाता तो अलग ही आवाज आती। वो में लिखके बता नही सकता पर मुझे वो अभीभी सुनाई देती है। वो लगभग ऐसी थी, gawiik pch gwaiiikk puchh...उसके नाक से भी पानी टपक कर मेरे लन्ड पर गिर रहा था। अब मेरा कंट्रोल छूट रहा था। वो पूरे मजेसे मेरा लन्ड चूस रही थी।


वो लन्ड पूरा लेतेहि मेरी गोटियोको अपनी जुबान से चाटती और फिर लन्ड के ऊपर का सारा थूक चूस के गटक जाती। मेरा पूरा लन्ड उसकी थूक से भरा था। उसकी थूक मुँह से बहकर मेरी जांघो पर चिपक रही थी। में अब पहली बार झड़ने वाला था। मेने सविता से पूछा," सविता क्या तुम तैयार हो मेरा माल मुँह में लेने के लिए।" वो मुझे हि देख रही थी। मुँह में लन्ड होने के कारन उसने सिर्फ"अम्म्म ह्म्म्म " इतना ही आवाज निकाला। में समझ गया के वो भी तैयार है। मैंने उसकी गर्दन पकड़ी और जोरसे आगे पीछे करना लगा।


अब उसकी आँखों से पानी ज्यादा ही पानी आ रहा था। जैसे कि वो रो रही हो। या फिर वो उसके खुशी के आँसू भी हो सकते है। लगभग पिछले 15 मीनट से, में उसके मुँह से लन्ड को निकाला ही नही था। वो अपनी सासे बस नाक से ही ले रही थी। मेंने उसका सिर जोर से पकड़ा। में और जोर से आगे पीछे करना चालू किया और में एकदम से चिल्लाया," सविता भाभी अब में तुझे अमर करने जा रहा हु...ये ले अमृत पिले सारा। और होजा अमर।" ऐसा बोलकर मैंने पूरा लन्ड उसके गले तक सरकाया और वैसेही ठहर गया।


उसकी नाक मेरी पेट पर लगी थी। उसकी जबान मेरी गोटियों पर थी। उसने मेरा पूरा लन्ड कहा लिया था। अब उसने आँखे बंद कर ली थी। उसका पूरा चेहरा अब लाल लाल टमाटर जैसा हो गया था। और मेरे मुँह से आवाज आइ, "ohhh aaahhhh ,सविता में झड गया। ohhhh ohhh ahhhh aaahhhhh"। और मेने उसके गले मे ही पूरा झड दिया। में कुछ देर ऐसेही रुका। सविता हिल भी नही रही थी। सिर्फ उसकी नाकसे जोरदार सासे चालू थी। अब में धीरे धीरे मेरा लन्ड बाहर निकालने लगा।


मेरे लन्ड से अभीभी गाढ़ा वीर्य बाहर आ ही रह था । मेने उसके गले मे झाडा माल वो पूरा निगल चुकी थी। मेने लन्ड पूरा धीरे धीरे कर बाहर निकाला। अभीभी उसके मुह मेरा वीर्य भरा था।मुझे डर था के कहि वो थूक न दे। मेने सविता को बोला, "सविता मुँह खोल अपना। और मुझे दिखा क्या छुपा रही है। " उसने आँखे खोलकर मेरी तरफ देखा।उसकी आँखें लाल लाल हो रखी थी। उसने गर्दन ऊपर करके मुँह खोला। मे उसके मुँह में देख पा रहा था। मेरा वीर्य मेयोनीज की तरह गाढा था। और इसका पूरा मुँह वीर्य से भरा था।


मेने सविता से कहा," ये तुझे पूरा पीना ही पड़ेगा सविता। थूकना नही है।" वो बेचारी कुछ बोल ही नही पा रही थी। उसके हाथ बंधे थे। और सामने मे और मेरा लन्ड थे। अब उसके पास कोई चारा भी नही था। सविता एकदम से शर्मा गयी। उसने मुँह बंद कर लिया और आँखे नीचे कर के सारा माल गटक लिया। और फिर मेरी आंखोमें आँखे डाल कर मुझे देखने लगी। सविता बोली, "देख कुछ बचा होतो बोल मुझे।" इतना बोलकर उसने अपना मुँह खोला और जीभ बाहर निकाल कर दिखाने लगी।


में हैरान था। मुझे सविता का ये अंदाज बेहद पसंद आया था। मैंने कहा-" सविता, तू सबसे अलग है। अब तू सिर्फ मेरी है।सिर्फ मेरी।" और मैने उसे बाहोंमे लिया। ये सुनते ही वो शर्मा गयी। उसके हाथ बंधे ही थे। मेने उसे कस कर बाहोंमे लिया। मेरी इच्छा तो अब उसको किस करने की हो रही थी। मेने उसकी तरफ झट से देखा। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि में उसे किस करूँगा।


तभी मेने एकदम से उसको किस करना चालू किया। सविता हैरान थी। उसकी आँखें खुली की खुली रह गयी। उसके मुँह में इधर उधर थोड़ा वीर्य बचा था। उसने मुझे एकदम से दूर किया। सविता बोली, "तुम पागल हो चुके हो पूरे। मुझे मुँह तो धोने दो। फिर जो चाहे कर लेना।" में बोला," सविता मुझे तुम्हे ऐसेही चूमना है बस्स। मुझे और कुछ नही सुनना।"


वो कुछ आगे बोल ही नही पायीं। वो गाल में हसते हसते मुझे बस देखने लगी। अब उसके बाल बिखरे थे।चेहरा लाल लाल दिख रहा था। माथे का कुमकुम और आखोका काजल फैला था। उसके ओठो से उसकी थूक और मेरा वीर्य जरासा बाहर आ गया था। उसकी सास फूल गयी थी। सास फूलने के कारन उसके स्तन जोरसे ऊपर नीचे हो रहे थे। उसके हाथ अभीभी पीछे बंधे थे।


उसकी चुत पूरी गीली थी। और उससे पानी निकलकर उसके जांघो से घुटने तक आ चुका था। उसकी टांगे हलकिसी कांप रही थी। शायद वो थोड़ा नरव्हस हो गयी थी। मे उसके पास गया। उसे उठाकर कर खड़ा किया। उसे बाहोंमे लिया। और उसे फिरसे चूमने लगा।लन्ड चूसने के बाद चुमनेमे उसे भी मजा आ रहा था।मेने बाहर आया सारा वीर्य और उसकी थूक चाट ली थी। मेने पहली बार अपना वीर्य चखा था। वो उसके थूक के मिलावट के कारण और भी स्वादिष्ट लग रहा था। हमने लगभग 10 मीनट लगादार एक दूसरे को किस किया।


मेने उसके हाथ बंधे ही रहने दिए थे।उस दौरान मेरा लन्ड फिरसे खड़ा हो गया। और सविता को पेटपर चुभने लगा। सविता भी जानबूझकर अपनी टांगे उठती और मेरे लन्ड को मसलती और जांघो से सेहेलती। में भी बीच बीच में उसके चुत में अपने फिंगर डालता। कभी उसके चुचे जोरसे दबाता। और उन्हें चूसता। वो बस लगातार सिसकिया लेती।


उसे मुझसे पूरा सुख मिल रहा था।उस 15 मिनट में हमने कुछ बाते नही की। उसी दौरान वो 2 बार मेरे हाथों पर झड गयी थी। मेरा हाथ पूरा गिला और चिपचिपा हो चुका था। सविता मेरी तरफ अब देखने लगी थी। उसे मुझपर प्यार आया था। उसकी कामुक नजर मुझे घायल ही किये जा रही थी। में उसकी चुत में डाली वही उंगलिया उसके मुँह में भी डाल देता। और वो भी बड़े चाव से उसे चूसती। फिर वही जीभ से मुझे किस करती। ऐसे मुझे उसके चुत का नमनकीन मीठा स्वाद भी आ रहा था। और में उसे मजे भी दे पा रहा था। रात के 2.15 बज रहे थे। हम दोनों भी पसीने से लतपत हो चुके थे।


AC चालू था पर हम दोनोके शरीर एकदम गरम थे। अब में सविता को लन्ड का असली सुख देने वाला था। उसके चुत में मेरा लन्ड घुसाकर उसको दुनिया की सबसे बेहतरीन सवारी करवाना चाहता था। सविता की आँखें बंद थी। मुझे वो खोलने के लिये कुछ शरारत करनी की। तो मेने सीधे उसके चूची पकड़ी और उसे जोरसे दबा दिया। वो एकदम से चिल्ला उठी और आँखे खोल मुझे देखने लगी। उसकी चूची दबाने से उसके दूध की धार एकदम से मेरे चेहरे पर गिरी थी। सविता बोली," अमेय! इतनी जोरसे कोन दबाता है। दुखता है वो , दर्द होता है मुझे। " इतना बोलकर वो स्तन को सहलाने लगी। में बोला," इतना दर्द हुआ तुझे? सॉरी सविता। ले तू भी दबादे मेरा।"


इतना बोलके मेने मेरा लन्ड उसके आगे किया। वो थोड़ा चीड़ गयी थी। सविता बोली," पहले तो मेरे हाथ खुले करदे । जल्दी से। सब तेरी मनमानी चल रही है यहापर।" मैंने कहाँ,' सविता गुस्सा मत कर। रुक खोलता हु।" मेने उसके बंधे हाथ खोल दिये। उसने दोनों हाथोंको थोड़ा सहलाया। और मुझे देखने लगी। मेने झटसे सविता को पास लिया और सविता के कानमे बोला, "सविता, अब में तेरे चुत में लन्ड घुसाने वाला हु। तू तैयार होजा। मुझे अब कंट्रोल नही हो रहा।" हम दोनों भी अब एक दूसरे के साथ comfortable हो चुके थे। हम बिना लाज रखे सबकुछ बोल रहे थे। वो भी बिना शरमाये मेरे अंग के नाम ले कर गंदी बाते कर रही थी।


जो भी हमे चाहिए था वो हम बेझीज़क एक दूसरे को बता रहे थे। वो बस मुझे देखने लगी। वो गुस्सा थी। पर उसे भी अब चुत के अंदर मेर लन्ड लेना था। वो भी तरस रही थी। मेरे ऐसे बोलनेसे उसका गुस्सा गायब हो गया। वो एकदम से गाल में ही मुस्कुराई। और हसने लगी। में समझ गया था अब वो भी मजे लेना चाहती है।


सविता बोली, " हा क्या! पहले तेरा लन्ड को तो तय्यार कर ले। फिर आ जाना डालने। शैतान कही के।" और झटसे सविता ने मेरे लन्ड को कस कर पकड़ा, और हिलाने लगी। इसबार उसकी पकड़ ज्यादही मजबूत थी। में बोला," सविता, धीरे धीरे। अहह ओह्ह। " सविता थोड़ा शर्माई। वो बोली," इस शैतान को अगर जल्दी खड़ा करवाना हो तो ऐसेही करना पड़ेगा अमेय ।" और वो जोरसे हसने लगी। मेने बोला," सविता! मेरे लन्ड को थोड़ा गिला कर दे ना। तभी वो तेरे चुत में आरामसे जा पाएगा।"


सविता मेरी तरफ देख बस शर्माई और बोली," हा हा लेती हूं मुँह में। रुक जरा।"


आगे की कहानी के लिए २ दिन इन्तज़ार करे, और मुजे मेल करना ना भूले:

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