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चटाई बेचने वाली सविता भाभी-४: Anatarvasna Sex Stories

Jul 16
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इतना बोलके ही वो नीचे बैठ गयी और उसने अपने स्तनो को के बीच मेरा लन्ड रखा। उसके स्तन के बीच मे तो मेरा लन्ड गायब ही हो गया इतने बड़े थे उसके तरबूजे। सविता मेरे लन्ड को बीच में पकड़कर boobjob देने लगी। वो बीच बीच मे लन्ड को मुँह में लेती। पूरा गिला करती और फिर अपने स्तनों के बीच मसलने लगती। मेरा लन्ड अब लाठी की तरह मोटा और सख्त हो चुका था। सविता बोली," अमेय! तेरा लन्ड तो झटसे खड़ा करवा दिया । देख लिया! मेरा कमाल। " और वो जोरसे हसने लगी।


में बोला," तू ही तो इसकी रानी है सविता। तु ही मेरे लन्ड को जगा सकती है। किसी और में इतनी ताकत ही कहा है। मेरी जान।" सविता शर्माई। मेने लन्ड को उसके मुँह से बाहर निकाला। और लन्ड के 3-4 थप्पड़ उसके गाल पर लगाये। और फिरसे लन्ड को उसके मुँह में सरका दिया।


सविता ने भी लन्ड को पूरा गले लिया। और उसे थूक से गिला और चिपचिपा कर दिया। गौक गौक वैक के आवाज से पूरी रूम गूंज उठी। अब सविता ने मेरे लन्ड को चुत में जाने के लिये पूरी तरह से तैयार कर दिया था।अब मेरी बारी थी। मेने सविता के मुँह से लन्ड निकाला और बोला," सविता ये हथियार अब तय्यार है।


बस अब मुझे तेरी चुत दिखा जल्दी।" सविता बोली," अरे हा। जरा आरामसे ले। में कही भाग नही रही हु।" सविता हसते हसते उठ खड़ी हो गई। में बोला," ठीक है। सविता, अब जैसा में बोलता हूं वैसा कर।" सविता बोली," जबसे आयी हु तबसे वही कर रही हु। और कोई रास्ता है क्या मेरे पास। बोलिये महाराज क्या आदेश है आपका?। इतना बोलतेहि हम दोनों भी हसने लगे। मेरी एक फैंटेसी थी। मेने बहोत सारे वीडियो में खड़े खड़े चोदते देखा था। तो मुझे भी वो करना था । और आज मौका भी था।


में सविता को बताने लगा। में बोला," सामने की दीवार है ना , वहापे चल बस। " सविता को कुछ समझ मे नही आया। लेकिन फिर भी वो चलते चलते दीवार तक गयी और मुड़के मुझे पूछने लगी," हा अब। अब क्या?। में बोला," घूम जा वापीस। पीछे मत देख। में तुझे दीवार पर सटा के रखूंगा और खड़े खड़े चोदुंगा।"


सविता बोली," क्या? खड़े खड़े? अमेय कुछ दूसरा नही कर सकते क्या?। खड़े खडे चुत ज्यादा टाइट रहती है। और फिर दर्द होता है वो अलगसे। " में बोला," सविता जितना दर्द उतना मजा भी तो आता है ना। मुझे कुछ नही सुनना, तू जो बोला गया है उतना कर।" सविता थोडा परेशान हो गयी थी। पर फिर भी वो बेचारी पीछे मुड़ गयी। उसने दीवार पर अपनी छाती लगाई। और खड़ी हो गई।


मुड़ते मुड़ते सविता बोली," अमेय! बस धीरे करना हा। बहोत साल हो गए मेरे चुत ने लन्ड चखे। इनकी बीमारी शुरू होने के बाद उन्होंने मुझे छुआ भी नही था।" मैं बोला," सविता तू चिंता मत कर ।ठीक है। में एकदम हलकेसे चुत में डालूंगा। और हा, सुन ना! वो तेरे हाथ पीछे ले और गांड पर रख।"


सविता बोली," अब किस लिए हाथ पीछे?। तू कुछ नया नया ही निकाल रहा है हा अमेय। इतना बोलकर सविता ने हाथ पीछे किये। में उसके पास गया और मैने उसके हाथ फिरसे टॉवल से बांध दिए। सविता बोली," अमेय! ये क्या कर रहे हो तुम। फिरसे क्यो बांध रहे हो हाथ। " मेने उसकी एक न सुनी। में बोला," तेरे हाथ बंधे रहे वही अच्छा है। तू बस में बोलू वैसा कर। चुपचाप खड़ी रहे यहापे।"


इतना बोलकर मेने उसका हाथ पकडा। उसके बदन को दीवार से सटा दिया।और उसकी कमर को पीछे ओढ़कर उसके पैर फैला दिए। ये सब देखकर सविता पूरी शर्म से लाल हो गयी थी। वो बोली, " सुन। ठीक है । कर ले। आज तुझे कुछ नही बोलूंगी। बस एक बात सुन।" मै गौर से सुनने लगा। सविता आगे बोलने लगी ,"पहली बार मे पूरा मत घुसाना।


मेने लगभग 5 साल से कुछ भी नही किया है।मेरी चुत अब टाइट हो गयी होगी। और मुझे जोर के झटको की भी आदत नही है।तो धीरे हा। और तो और मेरे पति का हथियार तुम्हारे जितना बड़ा और लम्बा नही था। तो बिल्कुल गड़बड़ मत करना। धीरे धीरे ही डालना।" मैंने कहा, " ठीक है सविता । तू एकदम निश्चिन्त होजा। तू कहेगी वैसा ही सब होगा।"


सविता अब दीवार के सहारे खड़ी थी। उसका पूरा बदन दीवार में चिपका था। उसके हाथ पीछे बंधे थे। उसकी गांड मेने एकदम पीछे ला रखी थी। उसकी वजहसे मेरा मोटा लन्ड उसकी गांड को चुभ रहा था।उसने अपने पैरोंके बीच अच्छा खासा गैप लिया था ताकि चुत ज्यादा से ज्यादा फैल जाए। और दर्द कम हो। इसकी वजहसे में उसकी चुत की रेशा और गांड का छेद एकदम अच्छेसे देख पा रहा था।


अब में ख़ुद को रोक नही पाया। मैंने थोड़ी थूक अपने हाथों पर ली और उसके चुत के ऊपर मसल दी। उसके शरीर मे करंट सा दौड़ने लगा। मेरी ये सब हरकते देख, सविता अब हसने लगी थी। सविता बोली," कहासे सिखा तुमने ये सब अमेय। कितने शरारती हो तुम। सुनो! और थोड़ी थूक लो। इतनी काफी नही होगी।" में बस शर्माने लगा। में बोला," ठीक है रुक। और थूक लगाता हु। और में नीचे बैठ गया और मैने अपनी जबान उसके चुत में डाली और चूसने लगा।


सविता ने सिसकिया दी और बोली," उई माँ! ओह्ह अहह अच्छा लग रहा है। आ आ आ कर और कर अमेय। चूस मेरी चुत को। चाट ले पूरी चुत। आज बस ये तेरी है। रुक मत चाटता रेह।" मेने उसकी चुत और गांड का छेद , चाट चाट के गिला कर दिया। में चुत की रेशा से चालू कर गांड के छेद तक मेरी जबान घसीटता। सविता बस सिसकिया देती रह जाती। अब उसके चुत से पानी बहने लगा था। मेने अब देर नही की।में खड़ा हो गया। मेरा हथियार एकदम सख्त और बड़ा हो चुका था।


मेने लन्ड को उसके चुत पर रख दिया। उसकी चुत की गरमाहट मेरे लन्ड पर महसूस हो रही थी। सविता ने जोर की सिसकी ली। और तभी मैने धीरे से ऊपर का टोपा सविता के चुत में सरका दिया। सविता ने बस जोरसे मेरा हाथ पकड़ लिया और वो चिल्लाई," अहह आहहह, बस बस धीरे। जल रहा है वहा जल रहा है। अहह अहह ।"


सविता सच बोल रही थी । उसकी चुत बहोत टाइट थी। मुझे मजा आ रहा था। मुझे अब रुकना नही था। लन्ड को पूरा अंदर घुसा के ही मानना था। में रुका नही। में हल्के हल्के झटके उसे देने लगा। मे सिर्फ लन्ड के कुछ ही हिस्से से अंदर बाहर कर रहा था।वो पागल हो रही थी। वो बस आँख बंद कर सिसकिया ले रही थी। उसके चुत ने मेरे लन्ड को ज़खड़ लिया था।


सविता की चुत मजे ले कर मेरे लन्ड को खाये जा रही थी। सविता को कई दिनों बाद इतना बड़ा लन्ड मिला था। इसलिये वो पूरे मजे लेकर , उसे अंदर बाहर करवा रही थी। मेरे लन्ड ने पहली बार किसी चुत को चखा था। मुझे तो , जो महसूस हो रहा था वो में शब्दोंमें बयान भी नही कर सकता।ऐसे लग रहा था के बस वक़्त यहा पर ही रुक जाए। और बस में सविता के साथ दिन रात चुदाई करता रहु। सविता के मुँह से बस," आहहहह ओह्ह, धीरे अमेय। चोदो मुझे चोदो।"


इतना ही निकल राहा था। उसकी चुत का रस मेरे लन्ड को गिला करे जा रहा था। अब मेने धीरे धीरे झटके बढ़ाने चालू किये। अभी तक सविता ने मेरा आधा ही लन्ड अंदर लिया था। में ने अपना स्पीड बढ़ाया। सविता जोर जोर से चीखने लगी। अब सविता को भी मजा आने लगा था। मेने एक हाथसे सविता के बाल कस कर पकड़ रखे थे।थोड़ी देर यही चलता रहा।


अब हम दोनों ने भी पसीने से नहा लिया था। उसके तो शरीर से पसीना टपक रहा था। मेने सविता के स्तन को पकड़ा और उन्हें दबाने लगा। वो बस मुझसे चुदे जा रही थी और चिल्ला रही थी। "चोदो मुझे चोदो अहह अहह ओह्ह ओह्ह और जोरसे अमेय।" ये सब सुनकर में और उत्तेजित हो रहा था। मेरे भी मुँह से, "आह आह ओह्ह" निकल रहा था।


मुझे अब देर नही करनी थी। मुझे पूरा लन्ड सविता के चुत में घुसाना था। मे रुक गया और सविता से कहा," सविता अब थोड़ा दर्द होगा में पूरा लन्ड अंदर डालने वाला हु।" वो कुछ भी नही बोली। उसने सिर्फ अपनी आँखे बंद कर ली और मेरे पेट पर उसके नाखून गाड़ दिए। मेने जोरसे एक झटका दिया और मेरा पूरा लन्ड उसके चुत में समा गया।


सविता जोरसे चिल्लाई," उई मा! मर गयी में तो! आहह आहह। रुको! ओह्ह ओह्ह। मार डाला रे! फाड़ दी तूने । अहह फाड डाली रे मेरी चुत। बापरे! अहह ओह्ह।" में अब रुकने वाला नही था। में अब पुरी ताकत से लन्ड को अंदर बाहर करवा रहा था। उसकी चुत अब थोड़ी ढीली पड़ गयी थी। वो अब आरामसे लन्ड को अंदर ले रही थी।


मेरी जांघे उसके गांड पर जोरसे भीड़ रही थी। और पूरे रूम में बस पच पच..पच..पच.. की आवाज गूंज रही थी, जैसे कोई ताली बजा रहा हो। सविता की आवाज एकदम तेज हो गई।" आह आह अहह अहह जोरसे और जोरसे। सही कर रे हो जान वही वही पे । आह आह। रुक मत। मुझे और दे और घुस लन्ड और घुसा। ऐसेही करता रह। हा हा बस बस रुकना नही। जोरसे और जोरसे कर।" और सविता ने मेरे पूरे लन्ड पर झड दिया। सब पानी मेरे लन्ड पर और जमीन पर गिर गया था। वो जोर जोरसे सिसकिया दे रही थी।


मेने सविता के चुत से लन्ड को बाहर निकाला। वो जोर जोरसे सासे ले रही थी। मेने उसके बंधे हाथ मेने खोल दिये। और उसे मेरी तरफ घुमाया। सविता अब हाँफने लगी थी। उसी सासे फूली थी। जोर दार चुदाई के कारण उसकी टांगे कापने लगी थी।वो ठीक से खड़ी भी नही हो पा रही थी। सविता के स्तन बहोत लाल हो चुके थे।


सविता ने एक हाथ से मुझे पकड़ रखा था। और दूसरे हाथ से चुत को सहला रही थी। शायद उसे वाहिपर थोड़ा दर्द हो रहा था । बहोत दिनों के बाद उसने चुदाई की थी वो भी खड़े खडे। तो ये तो होना ही था। मेने पूछा," सविता तू ठीक है ना? तुझे मजा तो आ रहा है ना मेरी जान?" सविता गाल ही गाल में हसने लगी। उसने आँखे खोली।


सविता बोली, " तूने आज मेरी चुत ही फाड़ दी है। मेरी टांगे तक कापने लगी है देख। मुझे ठीक से खड़ा भी नही होने या रहा है। और देख में पूरा झड गयी तेरे लन्ड पे। आजतक मेंने इतना झडा नही है।तू मुझे पागल ही कर देह अमेय।" "अरे! तेरा आज झडेगा भी के नही?। शैतान की औलाद। मेरी तो अब कमर तोड़ दी और तेरा अभीतक वैसे का वैसा ही खड़ा है। हये दय्या! किस चक्की का आटा खाता है तू?। ये सुनके में तो हसने लगा।


में बोला," तूने आज असली मर्द देखा है मेरी जान! मर्द ऐसेही अपनी रानी को चोदता है। अभी तो पूरी रात बाकी है।" सविता बोली, " मर्द? तूम शैतान हो अमेय। तुम मनुष्य ही नही हो। और हा, अब बस हा खड़े खड़े चोदना। मेरी कमर गयी अभी से। मुझसे और नही होगा।" में बोला," हा क्या सविता! फिर क्या करे? ऐसा कर तू बैठ जा थोड़ी देर। आराम कर जरा।"


सविता ने अलग ही नजर से मुझे देखा। वो बोली," बैठु क्यू!? बूढ़ी थोड़ी हो गयी हु। बस केई दिनों बाद चुदवा रही हु न इसलिए ऐसा हुआ। अभी तो में गरम हो चुकी हूं। बस तू रुक मत। कैसेभी करके मरवा मेरी चुत। वैसे भी रुक ,अब मेरी बारी। तू बस लेट जा, बाकी का अब में करूँगी। मुझे तुम्हारी सवारी करनी है।" सविता अब रुकने वाली नही थी। वो मेरे लन्ड की दीवानी हो चुकी थी। मैंने कहा," तू जैसे चाहे वैसे चुदवा सविता। आज ये लन्ड तेरे हवाले।


आज पूरी रात में तुझे चोदनेवाला हु। तू बस अपनी चुत तय्यार रख।" और में बिस्तर पे चला गया। सविता बोली," पूरी रात?! तेरा लन्ड इतनी देर तक खड़ा तो रहेगा क्या? आया बड़ा पूरी रात चोदनेवाला। अभी 2 मिंट में देख , तू झड़ जाएगा। इसके बाद तू और तेरा लन्ड सीधा सुबह ही जगेंगे।" सविता को मेरे स्टैमिना पर भरोसा नही था।


उसने आजतक अपने ही पतिसे चुदवाया था। तो उसे लग रहा था में भी उसके पति के जैसा 1-2 बार झड़ने के बाद बस कर जाऊंगा और थक कर सो जाऊंगा। पर में भी रोज जिम जाता था। मेरी डाइट अच्छी थी। और स्टैमिना बढ़िया था। मेने कहा," सविता तू मुझे चुनौती मत दे। ठीक है चल! अगर मेने तुझे पूरी रात चोदा तो फिर क्या देगी मुझे?।


" सविता बोली," हा हा हा। मजाक अच्छा कर लेते हो। पर चल, अगर तूने मुझे पूरी रात चोदा तो, तू कलसे जो बोलेगा में वैसा करूँगी। जो भी तू बोले वही होगा। समझ ले कि तू मेरा मालिक और में तेरी नौकरानी। " "पर अगर तू जरासा भी थक के सो गया तो फिर कलसे तुझे कुछ नही मिलेगा। ना मेरी चुत ना चोदना। में कल ही घर चली जाउंगी। बोल है मंजूर?" मुझे ये चुनौती मंजूर थी।


मेने कहा," ठीक है सविता। तो लगी शर्त। अब बात मेरे सम्मान की है। तू देख आज रात भर तुझे बैठने तक नही दूंगा। बादमे मत बोलना कमर दुख रही, गांड दुख रही। बस अब आराम करे।" सविता जोरसे हसने लगी। लेकिन में सीरियस था। अब मुझे खुदको साबित करना था। सविता बोली," हा हा कुछ नही बोलूंगी। पर सुन। रात तक तो तुझे रुकना ही नही है और जैसे ही सुबह होगी, में तेरे लन्ड को देखूंगी। वो खड़ा ही होना चाहिए। अगर वो सिकुड़ गया होगा। या फिर वापस से खड़ा नही हो रहा होगा, तो तू शर्त हार गया।"


सविता अब जानबूझकर कुछ भी शर्ते बीच मे डाल रही थी। वो डर रही थी। कई में सचमे जीत गया तो उसे लेने के देने पक सकते थे। मेने कहाँ, " ठीक है सविता। तेरी सारी शर्ते मुझे मंजूर है। इतना बोलकर में बिस्तर पे लेट गया था। मेने इशारे से सविता को मेरे ऊपर आने के लिए कहा। सविता भी झटसे मेरे पास बिस्तर पर आ गयी। मेने लेटे लेटे ही दीवार पे टंगी घड़ी देखी। रात के 3 बजे थे। और बस 4-5 घण्टे की बात थी। मुझे मेरे स्टैमिना टिका के रखना था। सविता बोली," ठीक है । चलो देखते है।आज कौन पहले थकता है।


चल अब मुझे तेरी सवारी करने दे। " इतना बोलके सविता मेरे ऊपर आ गयी। उसने अपने हाथ से मेरे लन्ड को चुत में सरकाया और हल्का हल्का लन्ड को अंदर सरकाते वो मेरे ऊपर बैठ गयी। सविता ने अपनी आँखे बंद कर ली थी। सविता धीरे धीरे खुदसे ही आगे पीछे होने लगी। और सिसकिया देने लगी। सविता ने मेरे हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिये। वो मुझे दबाने का इशारा कर रही थी। मेंने भी देर न करते उसके स्तनो को जोर जोरसे दबाना चालू कर दिया। वो भी मजे लेने लगी।सिसकिया देने लगी।


उसका दूध मेरे पूरे बदन पर गिर रहा था। अब सविता मदहोश हो रही थी। उसकी आवाज तेज हो रही थी। उस ने उछल कूद करना चालू कर दिया था। सविता अपने पंजो पर बैठ गयी थी और मेरी लन्ड पे उछलने लगी थी। वो आधा लन्ड चुत से बाहर आये इतना उठ जाती और झटसे बैठ जाती। उसे अब मेरे लम्बे लन्ड का मजा आने लेने आ रहा था।उसकी चुत धीरे धीरे ढीली पड़ने लगी थी और उसे और मजा आ रहा था। सविता बीच बीच मे झड रही थी और उसके चुत का पानी बहकर पूरे मेरे पेट पर गिर राह था। और वो बस ," आह आह ओह्ह, इतना मोटा लन्ड। ये में खा जाउंगी। ओह्ह आहहहह चोदो चोदो मुझे"। यही कहे जा रही थी।


थोड़ी देर तक यही चलता रहा। अब थोड़ी देर बाद सविता रुक गयी। वो मेरे बाहोंमे आकर मुझे चूमने लगी। लन्ड अभीभी उसके अंदर ही था। वो उसकी सारी थूक मेरे मुँह में दे रही थी और मेरी जबान चूस रही थी।किस करते टाइम भी सविता चुत को ऊपर नीचे करे जा रही थी। थोड़ी देर किस करने के बाद, मेने सविता को उठ जाने का इशारा किया। और मेने उसे फिरसे अपने पंजो पर बैठने के लिए कहा। सविता ने वैसे ही किया।वो मदहोश थी। वो पंजो पर बैठ गयी।


मेने झटसे कमर का भाग ऊपर उठाया और लन्ड उसकी चुत में घुसाया। वो एकदम से चिल्लाई। उसे समझ मे आ गया था अब उसे सिर्फ ऐसेही बैठना है। बाकी सब मे करनेवाला हु। वो कुछ न करते वैसेही बैठी रही। में जोर जोर से उसे झटके देने लगा। में लन्ड टोपे तक बाहर निकालता और एक जोर दार झटका देकर पूरा लन्ड उसकी चुत में डालता। वो हर बार चिल्ला उठती। उसे भी मजा आने लगा था। मेने अपनी स्पीड बढ़ाई। में और जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा।


सविता अपने हाथ घुटनो पर रखके इंडियन टॉयलेट पर जैसे बैठते है वैसी बैठी थी। उसका मुँह खुला ही था। वो बस जोर जोरसे सिसकिया मारकर चिल्ला रही थी। ," आह आह आह ओह्ह ओह्ह आह आह ओह्ह"। अब मेरी स्पीड बहोत बढ़ चुकी थी। में लगातार उसे झटके दे रहा था। सविता कभीभी झड़ने वाली थी। बस 1 ही मिनिट बाद, अचानक मुझे कुछ समझता न समझता , और सविता एकदम से खड़ी हो गयी और उसकी चुतसे एक बड़ा पानी का फव्वारा मेरे मुँह पे और पूरे बदन पे गिर गया। सविता पूरा झड़ गयी थी। सविता मेरे तरफ देखने लगी। हम दोनों ही जोरसे हसने लगे थे। सविता थक गई थी। वो नीचे बिस्तर पर बैठ गयी।


में तुरन्त ही उठ गया और मैने लन्ड को उसके मुँह के सामने रख दिया। में बोला," सविता, मुँह खोल और ये पूरा मुझे साफ करके दे। और मुझे बता तेरी चुत का स्वाद कैसा है। " सविता ने कुछ नही बोला। उसने मेरा लन्ड पकड़ा और उसे मुँह में ठूस दिया। सविता मस्त अपने चुत का स्वाद ले ले कर लन्ड चूसने लगी। मे बार बार लन्ड को पूरा उसके मुँह में घुसाकर उसके गले तक ले जाता। वो भी बड़े मजे से उसे चूस रही थी। उसकी सारी थूक मेरे लन्ड पर थी।


सविता लन्ड को पूरा मुँह में लेकर मेरी गोटियों को चाटती और उन्हें भी गिला करती। अब उसे भी लन्ड को गले तक लेनेमें मजा आ रहा था। सविता ने पूरा लन्ड साफ कर दिया था। अब मेरे लन्ड पर सिर्फ उसकी थूक की परत थी। मेने अब उसके मुँह से लन्ड निकाला। मेने सविता को लेट जाने का इशारा किया। सविता ने मुँह से निकलती थूक को पोछा। और अपनी टांगे फैलाकर लेट गयी। उसकी चुत, उसके ऊपर के बाल मुझे और दीवाना बना रहे थे।मेने जरा भी देर न करते में उसके ऊपर चढ़ गया।


सविता ने अपना हाथ हमारे बीच से नीचे लिया और मेरा लन्ड पकड़कर चुत पे रख दिया। नीचे सविता, ऊपर में ,और उसके चुत के ऊपर मेरा लन्ड। आप ही सोचिये क्या नजारा होगा। सविता बोली," सुनो! ये तकिया लो और मेरी कमर के नीचे सरका दो। इससे लन्ड आसानीसे अंदर तक जाएगा।" ऐसा बोलकर उसने मुझे अपने सर के नीचे का तकिया थमा दिया।


मेने तकिया पकड़ कर उसने कमर के नीचे सरकाया। तकिये की वजहसे उसकी चुत और ऊपर आ गयी। अब में आसानीसे उसके चुत में लन्ड सरका सकता था। मेने सविता के चुत में एक जोरदार झटके से लन्ड को घुसा दिया। वो जोरसे चिल्लाई," आआआ धीरे धीरे ओह्ह ओह्ह नही। इतना जोरसे नही। "। पर मैने एक न सुनी और पूरा का पूरा लन्ड उसके चुत में डाल दिया। सविता बस मुँह खोल कर सिसकिया दिए जा रही थी। मौका देखके मेने उसके खुले मुँह में थूक दिया। सविता ने एकदम से आँख खोली। मुझे देखा , वो मुस्कुराई ,और झटसे मेरी जबान अपने मुँह में लेकर उसे चूसना चालू कर किया। में अब उसके शरीर पर था ।


में जोरदार झटकोसे उसकी चुत फाड रहा था। वो बस मुझे किस करती और चिल्लाती," उई माँ उई माँ! जोर से और जोर से! फाड् दे आज चुत को मेरे! ओह्ह आह आह अहह।"। उसके चिल्लाने के वजहसे में और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था। उसकी चुत का अंदर का फील किसी मखमल के कपडे जैसा था। एकदम नरम और गरम। अब में कंट्रोल नही कर पा रहा था। मेरा वीर्य बाहर आने के लिये तरस रहा था।में अब उसकी चुत में झड़ने वाला था। मेने चोदते चोदते ही सविता से पूछा," सविता क्या में अंदर ही झड जाऊ क्या?।"


सविता मदहोश थी। उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था। सविता मेरे कानमे बोली," अहह ओह्ह अमेय। हा! झड जा, झड़ जा मेरे अंदर अमेय। बुझा दे मेरे चुत की प्यास। दे दे मुझे तेरा सारा रस। दे दे मुझे ,पिला मेरे चुत को सारा रस। तू झड जा।"


इतना बोलकर सविता ने अपने नाखून मेरे पीठ में घुसा दिए।सविता अपना होश खो बैठी थी। वो कुछ भी बोले जा रही थी। उसे ध्यान नही था के वो मेरे वीर्य से गर्भवती भी हो सकती हैं। मेरा वीर्य उसे नो महीने के लिये घर बिठा सकता था। पर वो भी सुनने के लिए तैयार नही थी। वो बस ," झड जा मेरे चुत के अंदर। ओहह आहह अहह आहह। भर दे मेरी चुत भर दे।"


इतना ही कहे जा रही थी। मुझे भी वही चाहिए था। मेरी भी इच्छा थी उसके चुत में झड़ने की। मुझे भी उसके चुत में ही सारा पानी छोड़ना था। जो भी होगा बादमे देखा जाएगा ऐसे कहकर, मेने मेरी स्पीड बढ़ाई। जोर जोर से में लन्ड को अंदर बाहर करने लगा। सविता बस चीखे जा रही थी। वो पूरी पागल हो गई थी।उसने अपनी आँखे बंद कर ली थी। अब में झड़ने वाला था। में चिल्लाया," सविताताता!!! लेले मेरा रस। आ आ आ आ। " इतना बोलकर मेने सारा वीर्य उसकी चुत में झड दिया।


मेरा गर्म वीर्य उसके चुत में जाते ही वो शांत हो गयी। में उसके ऊपर ही लेटा था। हमारी सासे फूली थी।हम दोनों भी जोर जोरसे सासे ले रहा थे। सविता ने मुझे बाहोंमे जकड़ रखा था। मेरा एक एक बूंद उसके चुत में गिर रहा था। सविता बस मुझे लिपटी हुई, आँखे बंद कर पड़ी थी। उसे मेरे गर्म वीर्य का एहसास हो रहा था।


अब में उठने लगा था। तभी सविता बोली," अम्म अमेय! रुको न, जल्दी क्या है। लेटे रहो मुझपे। और रहने दे उस शैतान को को अंदर ही, छोड़ने दे उसे पूरा रस ।" में बहोत खुश था। मेने सविता को चूमा। और मेंने उसके कान में बोला, "आजसे तू सिर्फ मेरी है सविता। मे ही आजसे तेरा पति हु। आजसे तेरी चुत और तेरी मांग भरने का अधिकार सिर्फ मेरा है।" सविता बस मेरी तरफ देखती रहे गयी। उसने बस मुझे बाहोंमे लिया और आँख बंद करके लेटी रही। में उसके ऊपर था ।


मुझे सविता की तेज धड़कन तक सुनाई दे रही थी। हम वैसेही थोड़ी देर एक दूसरे के बाहोंमे लिपट कर सोते रहे। मेरा वीर्य पूरा उसके चुत में उतर गया था। मेरा लन्ड थोड़ा नरम हो चुका था।पर सविता तो अभीभी उसे अंदर लिये बैठी थी। शायद उसे मेरे लन्ड की गरमाहट का एहसास अच्छा लगा हो। में होश में आया। सविता ऐसेही आँख बंद करके सोयी थी।


मेने सविता को माथे पर किस किया। और उसे देखने लगा। अब उसने भी आँखे खोली। उसके चेहरे पर मुस्कान थी। और आंखोमें अलग ही चमक। वो मुझे बस देखते ही जा रही थी। उसने मेरे होठो पर एक लम्बा किस किया। और मेरे मुँह का सारा रस पी गई। अब में सविता के उपरसे उठने लगा। मेने हाथ का सहारा लेकर उसके ऊपर से हटा। और मेने धीरेसे मेरा लन्ड उसकी चुत से निकाला। सविता हसने लगी। लन्ड को बाहर निकलते ही मेरा गाढ़ा वीर्य उसके चुत से नीचे बहने लगा। सविता ने जरा भी देरी न करते, झटसे अपनी चुत पे हाथ रखा। सारा बाहर आता वीर्य उसकी उंगलियों पर लेकर, उसने वो उंगलिया अपने मुँह में डाल दी। और वो उन्हें को चाटने लगी।


सविता बड़ेही कामुक नजरसे मुझे देख रही थी। ये देख कर मेरे होश उड़ गए। में सविता का ऐसा रूप देखकर चौक गया था। अब में खुदको रोक नही पाया और मै फिरसे उसके ऊपर चढ़के उसको चूमने लगा। मेरा वीर्य उसके मुँह में था। किस करते वक़्त मुझे उसका भी स्वाद आ रहा था। पर मुझे अब किसी चीज की परवाह नही थी। शायद मुझे सविता से प्यार हो गया था।


हम बहोत देर तक एक दूसरे को किस करते रहे। इसी दौरान सविता ने मेरे लन्ड को पकड़ कर सहलाना चालू किया। मेंने भी उसके चुत में अपनी उंगलिया डाली, और उन्हें अंदर बाहर करने लगा। सविता को मजा आ रहा था। वो सिसकिया देते ही जा रही थी। चुत में उँगली करनेसे मेरी उंगलियो पर थोड़ा वीर्य लग गया था। में वही उंगलिया सविता के मुँह में देता।और वो बड़े चाव से उन्हें चाटती और फिर मुझे चूमने लगती। हम बस एक दूसरे को चूमे जा रहे थे।


बहोत देर तक चूमने के बाद हम दोनों भी थोड़ा होश में आ गए। में सविता के उपरसे उठ गया और सविता शर्माते शर्माते थोड़ी दूर जाकर बिस्तर पर अंगड़ाई देने लगी।में भी थोड़ा उठ कर बैठ गया। हम दोनों अब एक दूसरे को देखकर सिर्फ मुस्कुरा रहे थे। मेरी नजर घड़ी पर गयी। रात के 4.00 बज रहे थे। अब पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था। सविता ने आँखे बंद कर ली थी। और वो बस , बिस्तर पर मदहोश होकर नंगी पड़ी थी।


सविता अभीभी होश में नही थी। मेने पास में रखी पानी की बोतल उठायी और पानी पिने लगा।पानी पीने की आवाज सुनकर सविता भी जग गयी। उसे भी प्यास लगी थी। सविता धीरेसे बोली," आ जी सुनते हो! मुझे भी पानी पिला दो। मेरा पूरा गला सूखा पड़ गया है देख।" अब तो पक्का था। सविता ने मुझे अपना पति मान लिया था। और ऐसी भाभी को पा कर में भी तो खुश था। सविता के इतने बड़े बड़े तरबूजे। मटकी से भी बड़ी गांड। प्यारी चुत। और रोज रोज मिलनेवाली चुदाई। किसे ऐसी बीवी नही चाहिए होती?। और उपरसे सविता मेरी जितनिहि कामुक थी। ऐसी बीवी तो खुशनसीब वालो को ही मिलती है।


मेने सविता को पानी दिया। उसने बोतल मुँह से लगाई और पानी पीने लगी। में बस उसे देख रहा था। सविता के होठो से थोड़ा थोड़ा पानी नीचे गिर रहा था। और वो बूंदे उसके दोनों स्तनोके बीच से जाकर उसके चुत पर गायब हो रही थी। ऐसा नजारा देखकर किसका लन्ड खड़ा नहीं होगा? मेरे लन्ड ने वापस सलामी दे ही दी। वो उठ खड़ा हो गया। सविता तो सामने ही थी।


उसने पानी पिया और बोतल मेरे हाथमे देते ही उसकी नजर मेरे सख्त लन्ड पर पड़ी। सविता एकदम से हसने लगी और बोली," अरे अमेय! ये थकता भी है या नही। तूने क्या इसमे सेल वगैहरा फिट कर दिए है क्या? जो रुकने का नाम ही नही ले रहा। थोड़ा आराम भी करवा इससे। " और वो हसने लगी। में बोला," मेने तो तुझे पहले ही बताया था सविता।


में इतनेमे थकने वाला नही हु। और नाही में तेरे पति जैसा हु। एक दो बार किया और घी खत्म। अभी तो और जलवे दिखाने बाकी है मेरी जान। आराम तो आजतक इसने किया ही था, आज से इसकी जॉब पक्की हुई है, वो भी तेरे खदान में।" सविता जोर से हसने लगी और बोली," तुम भी ना अमेय! जाव! कुछ भी बोलते हो। में तो अब थक गई बाबा! अब मुझसे तो नही होगा। मुझे बस तुम्हारी बाहोंमे ले लो अब।और कुछ नही करना।" ऐसा बोलकर सविता शर्माते शर्माते मेरे बाहोंमे आकर मुझसे लिपट गयी। मेने भी उसे बाहोंमे लिया।


मेरा लन्ड तो खड़ा हो चुका था। वो हमारे बीच मे एकदम से आकर चुभ रहा था। मेने उसको हमारे बीच मे खड़ा रख कर दिया। वो 6 इंच का होने के कारण उसके स्तन तक चला गया। अब तो सविता के स्तन को भी मेरे लन्ड की गरमाहट लग रही थी। सविता ने मुझे लिपट के आँखे बंद कर ली थी। सविता बोली," अमेय! अम्ममम! हटाओ इसे। अभी तो इसे शांत कर दे तू।


थोडी देर बाद करेंगे अब। में थक गई हूं न।" मेंने कुछ भी नही बोला। सविता बोली," कुछ तो बोलो ना! चुप मत बैठो ऐसे।" में बोला," क्या बोलू? सविता , " कुछ भी बोलो। बताव मुझे तुम मुझे कभी छोड़कर तो नही जाओगे ? बताव मुझे तुम मुझसे कितना प्यार करते हो? कुछ भी प्यारी बाते करो मेरे से।" सविता ने आँखे खोली वो मेरी तरफ देखने लगी।


में बोला," सविता ! अब ये क्या अचानक से बीचमे पूछ रही हो।" सविता," तुम बस बताओ।" में," अरे नही जाऊंगा बाबा। तू ऐसे सोच भी मत सविता। और रही बात प्यार की तो आजतक मेने किसीसे भी इतना प्यार नही किया जितना में तेरे से करता हु।" सविता मुस्कुराने लगी। वो एकदम लाड़ में आ गयी। सविता बोली," हा! तुम मुझे अगर छोड़ दोगे ना तो में मर ही जाऊंगी।


में भी बहोत प्यार करने लगी हु तुमसे।में अब नही जी सकती तुम्हारे बीना।" में बोला," इतना प्यार करती है तू ,सविता मेरेसे?" सविता," हा फिर। बहोत बहोत ज्यादा। मुझे तुम पहलेसे ही पसंद थे। पर में शादीशुदा थी और तुम इतने छोटे थे तो उस बात पे ज्यादा मेने कभी ध्यान ही नही दिया। पर मेरे मनमे तुम्हारे लिये कुछ था। और इन दिनों में तुमसे कुछ ज्यादही प्रभावित होने लगी थी। और देखो अब सब बदल गया है। अब हमारे बीच मे कुछ भी नही आ सकता। हमे कोई जुदा नही कर सकता।"


मेंने थोड़ा सीरियस चेहरा किया। और में बोला," नही सविता। अभीभी हमारे बीच एक चीज आ सकती है। जिससे तुम्हे शायद तकलीफ हो।" सविता अब एकदम सीरियस होके मुझे देखने लगी। उसने झटसे पूछा ," क्या ? कौनसी चीज अमेय? बताव मुझे!" मेने सविता के तरफ देखा। मेने उसका हाथ पकड़ा और सीधे मेरे लन्ड पर रख दिया। में बोला," ये चीज। यही आ रही है हमारे बीच सविता। तू ही देख।" और में हसने लगा। सविता एकदम से शर्मा गयी। उसने मेरे लन्ड पर थप्पड़ लगाया। और बोली," तुम कुछ ज्यादही शरारती होने लगे हो हा। शैतान कहिके।"


इतना बोलकर सविता फिर मेरे बाहोंमे आकर मुझे लिपट गयी। पर सविता ने एकदम से मेरा लन्ड पकड़ा और उसे हिलाकर मसलने लगी। सविता बोली, कैसा लग रहा है अमेय! अब तुम लेट जाओ और सब मुझपर छोड़ दो!" इतना बोलकर सविता ने मुझे दूसरे हाथ से पीछे धक्का दिया। और में बिस्तर पर लेट गया। सविता मेरा लन्ड हिलाने लगी। और हिलाते हिलाते झट से उसने लन्ड को मुँह में ले लिया। सविता बस मेरे लन्ड को चूसे जा रही थी।


उसकी थूक मेरे पूरे लन्ड से फिसलकर मेरे जांघो पर टपक रही थी। मेरे मुँह बस," आह आह सविता। चूस मेरा लन्ड और जोरसे चूस। पूरा ले मुँह के अंदर पूरा ले। आह आह। में झड जाऊंगा तेरे मुँह में सविता। ओह्ह ओह्ह। ऐसेही मेरी जान।" इतना ही निकल रहा था। सविता रुक ही नही रही थी। उसने 15 मिनट से मेरे लन्ड को मुँह में ही दबा के रखा था। वो मुझे झड़ने भी नही दे रही थी।


जब भी में झड़ने के करीब आता ,वो झटसे रुक जाती। ऐसा ही बड़ी देर तक चला। अब सविता ने मुँह से लन्ड को निकाला।और वो थोड़ा बाजू बैठ गयी। वो चूस चूस के थक चुकी थी। में तुरन्त उठ गया।मेने सविता को पास लिया। मेने कहा," सविता अब मुझे तेरी चुत चाहिए। जल्दी से तू घोड़ी बन जा।" सविता की भी चुत गीली हो चुकी थी।


वो बस शर्माई और बोली," तुझे पिछेसे करनेमे ही मजा आता है क्या?।" और वो हसने लगी। में बोला," हा सविता। तेरी गांड देखते देखते तुझे चोदने में अलग ही मजा आता है। और में पिछेसे तुम्हारे चुचे भी दबा सकता हु। और चाहे तो तेरी गांड भी मार सकता हु।" सविता बोली," एक थप्पड़ पड़ेगी ना जोरसे कि सब बोलती बंद हो जाएगी तेरी। उस तरफ जाने की सोचना भी मत।बहोत दर्द होंता है मुझे वहाँपर।


पति ने पहले ही मार मार कर इतने बड़ी करवाये है मेरे कुल्ले। सब लोग इसे ही देखते रहते है। अब इससे बडे मुझे नही करवाने।" "और उपरसे तेरा इतना बड़ा और मोटा है, में तो सपने में भी न सोचु इसे पिछवाड़े में लेना।"


में बोला," सविता। तुझे लगी शर्त तो याद है ना। सूबह तक अगर में नही थका तो जो भी में बोलू तू वही करेगी। नोकरानी-मालिक हम्म कुछ याद आ रहा है?।" सविता को एकदम से शर्त याद आ गयी। उसने घड़ी की तरफ देखा। घड़ी में 4.30 बजे थे। सविता ने मेरी तरफ देखा। सविता बोली," हा हा याद है। में लगाई शर्ते कभी भूलती नही। और वैसेभी अभी 4.30 बजे है।


सूरज उगने में 3 घण्ड़े है अभीभी। 3 घण्टो में तुझे और तेरे लन्ड को सुला कर ही मानूँगी। देख लेना।" मेने कहा," कोनसे 3 घण्टे? 6 बजे सूरज निकलना चालू होता है। उस हिसाब से डेढ़ घण्टा ही बचा है।" सविता बोली," मेरा सूरज 7.30 बजे के बाद निकलता है। मंजूर है तो बोल वरना तू अभी भी शर्त छोड़ सकता है।"


मेरे पास कोई चारा नही था।मेने हा कर दी। और सारी शर्त मंजूर कर ली। अब मुझे कैसेभी करके 3 घण्टे निकलने थे। तभी में उसकी गांड मार सकता था।


आगे का भाग २ दिन में पब्लिश होगा। मुजे मेल करके मुजे प्रोत्साहित करे की मैं सच्ची कहानियाँ सुनाके आपका मनोरंजन करता रहु।

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