चटाई बेचने वाली सविता भाभी-५: Indian Sex Stories
- Amey
- Jul 18
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में बोला," ठीक है चल सविता तेरी सारी शर्ते मंजूर। लेकिन बस तू सोच, अगर में जीत गया! तो? तो फिर तुझे जो भी में कहु सब मानना पड़ेगा । तब नखरे नही हा। " सविता बोली, " हा हा पहले जीत तो जा। अगर सचमे तेरा इतना स्टैमिना रहा न अमेय तो में दिन रात तुम्हारी पूजा करूँगी। ये चुत ये पिछवाड़ा सब तेरे नाम पे कर दूँगी।
तू जब चाहे, जहाँ चाहे, जैसे चाहे उसे इस्तेमाल कर। में कुछ नही बोलूंगी। ठीक है। हो गई अब तसल्ली।" में बोल, " है सविता ठीक है। और चल अब जल्दी से घोड़ी बन जा! और कितना इंतेजार करवाएगी मेरे लन्ड को?। " सविता बोली," हा। ले अभी बन जाती हूं। डाल दे।" और सविता मेरे सामने घोड़ी बनके बैठ गयी। मेने जराभी देर न करते हुए झटसे लन्ड को उसके चुत में डाल दिया। मेने इसबार जरासा भी रहम नही दिखाया था।
मेने पूरा का पूरा लन्ड एक ही झटके में उसके चुत में घुसेड़ दिया। सविता जोरसे चिल्ला उठी। उसने मुझे रोकने के लिये अपना हाथ मेरे बदन पर सटाया। पर देर हो चुकी थी। मेरा पूरा लन्ड उसकी चुत फाड़ कर अंदर जा चुका था। सविता की चीखें रुक ही नही रही थी। सविता," अहह आह मर गई में। मेरी चुत फट गई रे। अमेय तुने ये क्या कर दिया । इतनी जोरसे नही डालना था रे पागल। दूख रहा है अब। आह आह ओह्ह , हाये ये जलन क्यो नही रुक रही। हाय दय्या मर गयी रे।" में रुकने वाला नही था।
अब मेने जोर जोरसे लन्ड को अंदर बाहर करना चालू किया। मेने एक हाथ से सविता के बाल पकड़ लिये। और उन्हें जोरसे खिंचा। सविता चिल्लाई और कमर के भाग से ऊपर उठ गई। मेने झटसे दूसरे हाथ से उसके स्तन को हाथ मे लिया और उसके मम्मे दबाने लगा। थोड़ी देर होने के बाद सविता का दर्द कम हो गया।अब उसे भी मजा आने लगा। वो भी पीछे हो कर मुझे चूमने लगी। सविता बोली," और जोरसे दबा ना मेरे तरबूजे। दूध निकाल इसमेंसे। कर दे पूरा बिस्तर गीला।" मेने बोला," रुक मेरी घोड़ी। तुझे बताता हूं।"
मेने इतना बोलके उसके बाल जोरसे खींचे और उसे पीछे लाया। अब में दोनों हाथोंसे उसके तरबूजे मसल रहा था। जसके स्तन से दूध के फव्वारे पूरे बिस्तर पर उड रहे थे। वो बस चिल्लाये जा रही थी। में अपने लन्ड से भी उसे जोरदार झटके दिए जा रहा था। जबतक में झड नही जाता में रुकने नही वाला था। मेने स्पीड बढ़ाया। सविता की सिसकिया बढ़ने लगी। वो जोर जोरसे से चिल्लाने लगी। और तभी अचानक सविता झड गयी। इसबार उसके चुत से बहोत सारा पानी निकला था। मेरे लन्ड के साथ साथ पुरा बिस्तर गीला हो चुका था।
वे सब देख कर मुझे भी लगने लगा में झड़ने वाला हु। में अब खुदको रोक नही पा रहा था। मेने सविता के बाल कस कर खींचे। वो चिल्लाते हुए पीछे आई। मेने उसके होंठ को मेरे दाँतोसे दबाया और जोरदार लन्ड से झटके देने लगा। सविता ने भी मेरे होठो को चबाया। और हम एक दूसरे को जम के चूमने लगे। अब बारी आ गयी थी। मेने सविता के स्तन को जोरसे दबाया। और लन्ड का जोरदार आखरी झटका दिया। सविता ने अपनी आँखे एकदम बड़ी कर दी। उसे कुछ समझ नही रहा था। उसका मुँह खुला का खुला रहे गया।
और सविता ने अभीतक की जोरदार चीख निकाली। उसकी आवाज पूरे घर मे गूंज उठी। सविता," उईईईई मा! अमेय! नही नही! अरे मर गयी रे...आह अहह ओह्ह ओह्ह ओह्ह।" और मैने पूरा उसके चुत में झाड दिया। पूरा झड़ने तक मेने उसके स्तनोको ऐसा पकड़कर रखा था के वो कोई स्पंज बॉल हो।बस वो चिल्लाये ही जा रही थी।
मेरा सारा माल उसके चुत में धीरे धीरे उतर रहा था। पूरा माल उतारने के बाद मेने लन्ड को बाहर निकाला। सविता बिस्तर पर ही गिर गई। उसकी सासे फूल गई थी। वो जोर जोर से सास ले रही थी। उसे कुछ भी सूझ नही रह था। पसीने से लतपत हम दोनो बस एक दूसरे को देख रहे थे। मेरे पूरे बदन से पसीना टपक के बिस्तर पर गिर रहा था। मेने सविता के तरफ देखा। वो अपने पैर फैलाये मेरी तरफ देखती पड़ी हुई थी। मेरी नजर उसकी चुत पे गई। धीरे धीरे मेरा माल उसके चुत से बाहर निकल रहा था। सविता की सावली चुत पर मेरा दही जम चुका था। किसी पहाड़ से सफेद पानी का झरना बह रहा हो, ऐसा वो दृश्य था। सविता ने वाहिपर डाली हुई चद्दर उठाई और अपनी चुत साफ कर ली। घड़ी में 5.00 बज चुके थे। बाहर बारिश चालू हो गयी थी। मौसम ठंडा पड़ गया था।
हमारे घर मे AC चलने के वजहसे ठंड ज्यादही पड़ गयी थी। में झटसे सविता के पास जाकर उसे अपनी बाहोंमे लिया। उसने भी मुझे बाहोंमे जकड़ लिया। अब हम एक दूसरे के बाहोंमे लिपट कर सो रहे थे। हम दोनों भी नंगे होने के कारण हमें एक दूसरे की शरीर की गरमाहट मिल रही थी। सविता ने तो आँखे बंद कर ली थी। पर में सिर्फ उसके चेहरे को देखे जा रहा था। सविता का चेहरा सावला था। सविता घर घर जाकर चटाई बेचती इसके वजहसे उसे धूप में चलना पड़ता।
पर सविता का अंदर का शरीर यानी उसके स्तन उसकी नाभी और उसकी गांड थोड़े गोरे ही थे। पर सविता का चेहरा सावला होने के बावजूद भी आकर्षक था। वो सुंदर और मनमोहक थी। उसकी फिगर की वजहसे वो और मादक दिखती। में उसे अपनी आँखों मे भर रहा था। तभी अचानक सविता ने आँखे खोली। में उसको ही घूरे जा रहा था वे उसे समझ आया।
सविता शर्माई बोली," अमेय! क्या देख रहे हो तुम ऐसे।" मेने कहा," तुम्हरी खूबसूरती।" सविता और ही ज्यादा शर्माई," तुम भी ना अमेय। अब मुझे लज्जा आ रही है।" ऐसा बोलकर उसने अपना मुँह मेरी बदन पर लाकर छूपा लिया। में बोला," अरे अरे! इसमे शर्माने की क्या बात। में तो सच ही बोल रहा हु। मेने आजतक तेरे जितनी सुंदर और सुडौल औरत नही देखी।
तेरा चेहरा, तेरा कटीला और भरा बदन, इतनी बड़ी गांड, चिकनी चुत। आहाहा हा...और सब कुछ स्वाद में भी बढ़िया। वाह।" सविता मेरे तरफ देखने लगी और बोली," हा! आ गए ला लाइन पर वापिस। मेने छाती और कुल्ले इलावा कुछ दिखता भी है तुम्हे। जब देखो लगे ही रहते हो।" में बोला," हा तो तूने इतने बड़े करवाये है कि उसके आगे का कुछ दिख ही नही पता ना।" और में हसने लगा। सविता भी जोरसे हसने लगती। सविता बोली, " शरारती कहिके!। इतना बोलकर उसने मुझे चूमना चालू किया। हम मस्त 10-15 मिनिट तक एक दूसरे की थूक पीते रहे और जबान चूसते रहे। धीरे धीरे मेरा लन्ड बड़ा होने लगा। और एकदम से उसने सलामी दी। और वो सविता के जांघो को चुभने लगा।
तभी सविता ने मेरे लन्ड पर मारा।और मेरे जबान को चूसता छोड़ हसने लगी। सविता बोली, " तुम्हारा तो थक ही नही रहा है अमेय। हाए राम! क्या होगा मेरा आज। " ऐसा बोलकर वो बेरे बाहोसे उठ गई और बिस्तर पर बैठ गयी। में भी उसके साथ बाजू बैठ गया। में बोला, " कुछ भी नही होगा सविता। में शर्त जीत जाऊंगा और तुम कलसे सिर्फ मेरी हो जाओगी।"
सविता ये सुनकर बस गाल ही गाल में शर्मा गयी। और वो एकदम से उठ गई। में बोला," क्या हुआ सविता रुक ना। क्यों उठ गई।" और में भी उसके साथ उठ गया। सविता बोली, " अरे ! मुझे बाथरूम जाना है। उसको भी नही जाऊ क्या। पागल।" हम दोनों भी हसने लगे। में बोला, " हा सविता जाव जाव। मेने कहा रोका है।" सविता बाथरूम के तरफ जाने लगी। उसको बाथरूम का लाइट वगरह दिखाने, में भी उसके पीछे पीछे जाने लगा। सविता चलते वक़्त उसके कुल्ले बहोत ही अच्छेसे ऊपर नीचे हो रहे थे।
उसके कमर तक आये बाल चलते वक़्त उड़ रहे थे। वो पिछेसे बहोत ही मादक दिख रही थी। अब सविता बाथरूम तक पहोच गयी। मेने झटसे उसे पास जाकर उसको लाइट चालू करके दे दिया। सविता बाथरूम में गयी और जैसेही वो दरवाजा बंद करती, मेने दरवाजे को पकड़ लिया। सविता बोली, " अमेय! ये कैसा मजाक है। जल्दी से दरवाजा छोड़ो।
मुझे बड़ी जोरकी आई है।" मेंने दरवाजा पीछे किया। और में सविता के सामने जाकर खड़ा हुआ। में बोला," ये दरवाजा बंद नही होगा सविता। मुझे तुझे ऐसे देखना है।" सविता चौक गयी और बोली, "क्या! तुम क्या बोल रहे हो अमेय। तुम्हे समझ भी रहा है क्या?" और वो हसने लगी। में सविता के साथ बाथरूम के अंदर गया। और मैने बोला, " हा सविता।
सचमे मुझे देखना है तुझे। प्लीज तुम करो ना , मैं बस देखूंगा यहापर खड़े खड़े।" सविता गाल में हसने लगी और बोली, " नही हा अमेय। ये क्या पागलपन है। तूम जाव बाहर जल्दी।" में बोला, " अरे सविता आज मेरे अंग पर मेरे मुँह में बल्कि मेरे बिस्तर पर भी मुता है। और वो सब मेने अपनी खुली आँखों से देखा है। तो अभी क्या प्रॉब्लम है।"
सविता बोली, " वो और ये दोनो अलग अलग होता है अमेय। तुम जाव ना! ।" मैं वाहि पर डटा रहा। सविता को बड़ी जोरसे मूत आया था। वो कंट्रोल नही पा रही थी। उसने मेरे छाती पर धक्का दीया। सविता बोली, " ठीक है । करले जो करना है। देख ले। और सूंघ ते रहना सारी दुर्गंध। यहासे हिले तो देखना अब।"
ऐसा बोलकर सविता अपने पंजो पर नीचे बैठ गयी। उसका मुँह मेरी ही तरफ था। उसने अपनी टांगे फैलाई। और एक हाथ से चुत को सहलाकर, 2 उंगलियो से अपना मूत्रद्वार को खुला किया। अब सविता मेरे तरफ देखने लगी। पर में उसकी चुत को ही घूरे जा रहा था। एक शूशुशु जैसी आवाज आयी और सविता के चुत से उसका मूत बाहर गिरने लगा।
उसके मूत का रंग हल्का पीला और सफेद था। सविता मूतते हुए मेरी तरफ देखे जा रही थी। उसके आंखोमें लाज साफ साफ दिखाई दे रही थी। में उसके आंखोमें देखता और फिर उसकी चुत पर नजर गड़ाए रखता। एक लंबी धार के बाद उसके चुत से पानी आना रुक गया। उसने थोड़ा और जोर लगाने के बाद और थोड़ा पानी बाहर आया। और रुक गया।
सविता का मूत के हो चुका था। उसका सारा पानी बाथरूम के फर्श पर था। उससे ज्यादा नही पर थोड़ी सी गंध आ रही थी। सविता उठ के खड़ी हो गई। सविता ने पानी डालकर अपने मूत को साफ कर दिया। सविता मेरी तरफ मुड़ी और बोली, " हो गई तसल्ली। पड़ गयी कलेजे में ठंडक। " में कुछ नही बोला।
में बस उसकी आंखोमें देखते देखते उसके पास गया। में नीचे बैठ गया और मेने झटसे उसकी जांघ पकड़कर एक टांग उठाई। सविता ने एकदम से दीवार का सहारा लिया और दीवार को सटाकर खड़ी हो गयी। उसे कुछ समझता तब तक मेने मेरी जबान उसके चुत में डाल दी थी। सविता ने बड़ी जोरकी सिसकी दी और जोरसे मेरे बाल पकड़ लिये।
में सविता की चुत चाटने लगा। उसका थोड़ा मूत अभीभी वाहिपे मौजूद था। उसके पूरे चुत का स्वाद नमकीन ही नमकीन लग रहा था। में रुका नही। में और जोर जोर से मेरी जबान से उसकी चुत चाटने लगा। सविता बस सिसकिया देते जा रही थी। सविता बोली," ओह्ह अमेय! ये तुम क्या कर रहे हो। ओह्ह ओह्ह। तुमने बचा सारा मूत पी लिया मेरा ओह्ह अहह।
चाटो और जोरसे चुसो मेरी चुत को। करदो मेरी चुत को साफ। एक बून्द भी मत छोड़ना मूत की। आह ओह्ह ओह्ह ओह्ह।" इतना बोलकर सविता ने मेरे सिर को पकड़ा और वो मेरे सिर को अपने चुत पर दबाने लगी। मेने जबान को उसके चुत के अंदर गाड़ दिया और अंदर ही में उसे घुमाने लगा। वो सविता को बहोत ही अच्छा लगा। वो पागल होने लगी।
सविता की सिसकिया बढ़ने लगी। वो जोर जोरसे, " ओह्ह अमेय ओह्ह। और चुसो और चुसो। आह आह ओह्ह।" यही कहने लगी। और एकदम से वो मेरे मुँह में झड गयी। उसका सारा पानी मेरे चेहरे पर और मेरे मुँह के अंदर था। सविता की सासे तेज थी। वो आँखे बंद कर दीवार को टिक के बस खड़ी थी। उसका बदन जोर जोरसे ऊपर नीचे हो रहा था।
मेने सविता का उठाया हुआ पैर हल्के से नीचे रख दिया। और में उठ के खड़ा हो गया। सविता ने आँखे खोली और मेरे तरफ देख के बोली, " तुम सचमे पागल हो अमेय! और तुम्हारे साथ तुम मुझे भी पागल कर दोगे।" इतना बोलकर उसने मुझे चूमना चालू कर दिया। मेरे मुँह पे गिरा सारा पानी उसने चाट लिया। और मेरी जबान चूसने लगी।
चुत का सारा नमकीन पानी हम दोनों ने मिलके गटक लिया था। अब मेरे लन्ड ने उभार ले लिया । हमारे बीच खड़ा लन्ड सविता के पेट पर चुभ रहा था। सविता समझ गयी थी मेरा लन्ड सख्त हो गया है। सविता ने बिना बोले मेरे लन्ड पर हाथ रखा और वो सहलाने लगी। वो जोर जोर से हिलाने लगी। अब में सिसकिया दिए जा रहा था। हमारी जगह बदल गयी थी।
अब में दीवार को सटा के खड़ा था। और सविता मेरे सामने। वो धीरे धीरे मुझे चाटते नीचे बैठ गयी और उसने मेरा लन्ड मुँह में ले लिया। मेरे मुँह से बस आवाजे निकल रही थी। सविता मेरा लन्ड पूरा अंदर तक लेकर बाहर निकल रही थी और फिरसे मुँह के अंदर ले रही थी। मेरा लन्ड सविता के थूक से भरा पड़ा था। जब भी सविता मुँह से लन्ड को बाहर निकलती, उसके थूक की एक तार बनती।
वो उसके मुँह से होके मेरे लन्ड के टोपे तक जुडी हुई होती। सविता उसे ," सुपपाप" करके वापस मुँह में खिंचती और फिरसे लन्ड को चूसने लगती। अब सविता का मेरे 6 इंच लन्ड से डर खत्म हो चुका था।
वो आसानीसे उसे गले तक लेती। बाहर निकलती। सारा जमा हुआ थूक मेरे लन्ड पर थूकती। अपने हाथसे से थूक को पूरे लन्ड पर फैलती और वापस झटसे अपने मुँह में लेके सारा थूक गटक जाती। वो अब इस काम मे माहिर बन चुकी थी। मुझे चरमसुख मिलने लगा था। सविता रुकने का नाम ही नही ले रही थी। मेरे मुँह से बस," सविता चूस ऐसेही चूस। ओह्ह आह आह। चुस्ती रेह मेरी जान। ओह्ह ओह्ह।"
बस यह निकल रहा था। थोड़ी ही देर बाद में खुदको रोक नही पाया। और मैने सारा वीर्य सविता के मुँह में छोड़ दिया। सविता मेरे लन्ड से आखरी बूंद निकलने तक लन्ड को मुँह में पकड़ी रही। सविता मेरा सारा वीर्य मुँह में इकट्ठा कर रही थी। मेने दोनो हाथसे सविता का सिर पकड़ कर रखा था , ताकि वो लन्ड को बाहर ना निकाल पाए।
पर सविता ने ही मेरे लन्ड को जोर से मुँह में जखड़ रखा था। उसे वीर्यपान करना पसंद आ रहा था । पूरा झड जाने के बाद मेने सविता के मुँह से लन्ड को निकाला। सविता मुझे बड़े ही कामुक नजरसे देखे जा रही थी। सविता ने मुँह में मेरा सारा वीर्य पकड़ रखा था। उसने अभी तक वो गटका नही था। इसी वजहसे सविता का मुँह फूल गया था। अब में भी सविता कर तरफ देख रहा था। सविता अपने घुटनोपर थी। उसकी नजर मेरी तरफ और उसके होठ ठीक मेरे लन्ड के सामने।
में बोला, " सविता! जरा दिखा तो मुझे, तूने क्या अपने मुँह में छिपा रखा है!।" इतना सुनतेही सविता ने धीरे से अपना मुँह खोलकर मुझे दिखाया। मेरा एकदम गाढ़ा, ताजा वीर्य उसके मुँह में भरा था। सविता ने जमके लस्सी पी हो और वो ही मुँह में रख के दिखा रही हो ऐसा लग रहा था। मेने कहा," अब किसका इंतेजार है तुम्हे सविता। गटक ले मेरा माल और उसके बाद ही मुँह खोलना।"
सविता ने भी वैसे ही किया। वो एक ही बार मे मेरा सारा वीर्य गटक गयी थी। सविता बोली, " देख ले अमेय! कुछ बाकी तो नही रहा ना? " और सविता ने अपना मुँह खोला। जबान बाहर निकाली और मुझे दिखाने लगी। नंगी सविता बडी ही कामुक दिखाई दे रही थी।मे कुछ नही बोला। मेने सविता को उठाया और उसे कस कर पकड़े किस करने लगा।
वो भी बड़े मजेसे मुझे किस करने लगी। थोड़ी देर सब ऐसेही चलता रहा। हम दोनों एकदुसरे को खुब चूसते रहे। हमारे गांव में सुबह के 6.30 बजे सायरन बजती है। वो किसलिये बजती है क्यो बजती है नही मालूम पर हर रोज सुबह 6 बजे और रात को 8.30 बजे वो सायरन बजती थी। हम एक दूसरे को चूसे ही जा रहे थे के , हमे सुबह 6.30 बजे के सायरन से होश आया।
हम नंगे बाथरूम में लगभग 1 घण्टे से सेक्स कर रहे थे। सविता मेरी तरफ देखे बस हस रही थी। सविता बोली," अमेय! चलो बाहर अब। बस हो गया यहाँ।" और सविता मेरा हाथ पकड़कर मुझे बाथरूम के बाहर ले आयी। में बोला," है कितना अच्छेसे सब चल रहा था। इस सायरन की तो ना...।" सविता जोरसे हसने लगी. वो बोली, " अरे ! वो लोग तो अपना काम कर रहे है। उनका क्या दोष।
जैसे अब देखो हम हमारा काम कर रहे थे वैसे ही।" ये सुनते ही हम दोनों भी हस पड़े। सविता बोली, " तुम्हे मालूम है, इस टाइम पे हम लोग उठ के चाय पी रहे होते थे। इनको कामपर जाने के जल्दी रहती थी और मुझेभी। तो हम रोज 5.00 बजे उठकर सब काम करने लगते।"
में बोला, " अच्छा! तेरा पति तो बीमार था ना। तो फिर?" वो बोली, " अरे उससे पहले की बात है ये। वो जब ठीक था तब काम पे जाता था मजदूरी करने और आते वक्त सारे पैसोकि दारू पी के आता। और मुझे मारता। तबकी बात हैं ये।" ये सुनकर मुझे बुरा लगा। अब मेने सोच ये टॉपिक बदल दु। तो में बोला, " अच्छा।
सविता वो गन्दी यदि छोड़ दे। अब हम हमारी नई यादे बनाएंगे। देख कैसा मौसम ठंडा पड़ गया है। बता तुझे चाय पानी है? गरमा गरम।" सविता हसने लगी वो बोली, " हा हा क्यों नही! पर अब तुम रुको। में मेरे हाथ की चाय तुम्हे पिलाती हु। मुझे बताना कैसे बनी है।" ऐसा बोलकर सविता किचन के तरफ गई।
नंगी सविता को किचन में जाते में पिछेसे देख रहा था। उसकी बड़ी गांड इतने बढ़िया से मटक मटक के ऊपर नीचे हो रही थी के बस में देखता ही रह गया। सविता बोली," आ जी! इधर आकर मुझे समान बताओगे कहा कहा क्या है। या फिर वाहिसे घूरते रहोगे? ।" में झटसे सविता के पीछे गया। सविता किचन के ओटे के पास खड़ी थी।
मेने पिछेसे जाकर सविता को अपनी बाहोंमे लिया। और बोला, " हा जान! तुम जैसे बोलो। बताव मुझे क्या क्या चाहिए तुम्हे?।" सविता बोली, " पहले तो इस शैतान को जरा बाजू कर।" इतना बोलकर सविता ने मेरा लन्ड जो कि उसके गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था उसको हाथ में पकड़कर बाजू किया। और हम दोनों जोरसे हसने लगे। सविता ने गैस पर मेने दिया हुआ पतेला रख दिया। मेने उसे चाय और शक्कर के डिब्बे दिखाए।और में उसके स्तन को सहलाने लगा।
सविता बोली, " अमेय! जरा रुको है अब। मुझे चाय बनाने दो ठीक से।" पर आज में कहा सुनने वाला था। में बोला, " सविता! तुम चुप चाप अपना काम करो। ।एड़ी तरफ ध्यान मत दो। मुझे इन्हें अभी तय्यार करना है।" सविता बोली, " तय्यार! वो अब किस लिये। क्या क्या है तय।हरे दिमाग मे मुझे बताव अभी... चलो!" में बोला, " हा हा! जब चाय तैयार होगी ना तो मुझे तुम्हारा दूध चाय में डालना है। " सविता ने बस मुझे देखा, " तुम्हारी शरारते बढ़ती ही जा रही है, हा अमेय।"
में उसके स्तन को दबाए ही जा रहा था। सविता ने भी आगे कुछ नही बोला और वो भी मजे लेने लगी। अब सविता ने दूध, चायपत्ती और शक्कर डालकर चाय को उबाल दिया। में उसके स्तन दबाए ही जा रहा था। अब द्धिरे द्धिरे उससे दूध की धारा निकल रही थी। सविता ने मुझे दूर किया। उसे चाय को उतारना था।
सविता बोली, " चलो अब दूर हटो! वरना चाय गिर जाएगी शरीर पर।" में ने उसके स्तन दबाना छोड़ दिया। पर उसको अभीभी मेने पिछेसे बाहोंमे पकड़ रखा था। सविता ने चबाय कप में उतारी और मुझे दिया। दूसरे कप में अपने लिये लेकर वो बोली, " चलो आरामसे अब बैठ कर चाय पीते है।" मेने सविता को रोका। में बोला," रुको! तुम कुछ तो भूल रही हो।" और मैने मेरा कप आगे करके उसे उसका दूध डालने के लिये कहा।
सविता मुझे देखती ही रह गयी। वो बोली, " अमेय कुछ भी करते हो क्या तुम। तुम ही ले लो में कुछ नही करनेवाली। मुझे चाय पीना है।" और वो चाय पीने गई। मेने अपनी चाय की कप ली। और उसके चुचियो पर लगा थी। और एक हाथसे में उसके स्तन को दबाने लगा। उन्हें पहलेसे ही दबाकर मेने दूध निकल रखा था। मेने जैसेही 1-2 बार दबाया उसके दूध की धार चाय के कप में गिरनी लगी। सविता बस अपना चाय पी रही थी।वो कुछ भी नही बोली।
में ने उसके चुचे दबा दबा कर मेने चाय में दूध मिला लिया। मेने बाजू होकर चाय की पहली घुट ली। वाह s s! क्या चाय बनी थी। में बोला," सविता ये तुमने क्या बनाया है?" सविता बोली, " इसीलिये बोल रही थी फालतू का कुछ भी मिक्स मत करो। चली गयी न पूरी टेस्ट चाय की। सुनो मत कुछ तुम।" में बोला, " अरे पागल! पहले सुन तो ले। तुम्हे मालूम है, ऐसी चाय मेने आजतक नही पी है। वाह।
जो इसमे स्वाद आया है ना वो कभी भी किसीके हाथ से नही आ सकता। वाह सविता वाह। तूने तो मुझे आज अमृत पिला दिया।" सविता शर्मा के लाल हो गई थी। वो हसते हसते बोली, " जाव!तुम्हरा तो कुछ भी होता है। पागल कहिके।" अब हमारी चाय पीके हो गयी थी। मेने घड़ी को देख तो अब सुबह के 7 बज चुके थे। मेने सविता को कहा, " सविता क्या तुम्हें याद है तुमने जो बोला था। हमारी शर्त लगी थी। देखो अब 7 बज चुके है। आधा घण्टा बचा है।"
सविता की नजर जल्दी से दीवार पर गयी। उसने भी देखा 7 बजे है। वो मुझे देखने लगीं। सविता बोली, " हा में क्यो भूलूंगी भला।मुझे सब याद है। और तुम्हे भी याद होगा। मेने कहा था के, 7:30 बजे के बाद भी तेरा खड़ा हो गया और तू मुझे और एक बार चोद सका तो ही तू शर्त जीतेगा। वरना तू हार जाएगा।" में बोला, " है बिल्कुल याद है मुझे।"
सविता बोली, " तो तू देख तेरे नीचे। एरा सिकुड़ गया है। और तुझे लगता भी है ये उठने की हालत में भी होगा।" और सविता जोर जोरसे हसने लगी। अब बात मेरे सम्मान की थी। हम लोग किचन में ही थे। मेने वाहिपर ही सविता को घुमाया। और उसके पिछेसे के उसके स्तन जोर जोरसे दबाने लगा। सविता चिल्लाई, " हाई। रुको। बाहर तो चलो। आह आह। जो भी करना हो करलो पर तेरे शैतान को मैने सुला दिया है। अब वो नही जगने वाला।" और सविता जोर जोरसे हसने लगी। में बोला,"
सविता तू बस देखती जा और जो भी में करवाऊ वो करती जा।" मेने सविता को ओटे पर ही टिकाया और उसके स्तन को जोर जोरसे दबाने लगा। बीच बीच मे वो खुद मुँह को पीछे कर मुझे चूमती और मजे लेती। मेने सविता का हाथ पकड़ा और उसको मेरे लन्ड पर रख दिया। गिरा लन्ड हाथ मे पकड़ते ही सविता और हसने लगी। मेने उसे हिलाने का इशारा किया। और सविता लन्ड के ऊपर के चमड़े को ऊपर नीचे करने लगी। मेरी किचन में सेक्स करनेकी भी fantacy थी।
इसलिये मुझे मालूम था के में कुछ भी करके लन्ड यहा पर ही खड़ा कर सकूंगा। इसलिये मेने सविता को हॉल या रूम में नही एकर गया था। सविता मेरे लन्ड को जोर जोरसे हिला रही थी।मेने मेरे हाथ उसके स्तन से हटाकर उसकी गांड पर लाये और उन्हें सहलाने लगा। सविता के लिये ये अचानक था। गांड को सहलाना उसे भी अच्छा लगने लगा। मेने हलकेसे एक उंगली को उसकी गांड में दाल दिया। सविता जोरसे चिल्लाई। और सिसकिया देने लगी।
सविता बोली, " ओह्ह अमेय! वहां नही । अभी नही। ओह्ह अहह ओह उई माँ। " उसकी सिसकिया सुन मेरे लन्ड ने अचानक से रेंज पकड़ ली। और वो थोड़ा थोड़ा खड़ा होने लगा। सविता का हाथ मेरे लन्ड पर ही था। सविता एकदम से चौंक गयी। उसे लगा नही था के मेरा लन्ड इतनी बार झड़ने के बाद भी खड़ा हो पायेगा।
अब उसने भी मेरे लन्ड पर पकड़ बना ली। और सविता उसे जोर जोरसे हिलाने लगी। सविता की चुत और गांड का छेद पानी से भर गए थे। मेरी उंगलिया चिपचिपी हो गई थी। मेने वही उंगलिया सविता के मुँह में डाली और उसे कस के चूमने लगा। सविता के मुँह से चाय की मिठास और चुत का नमकीन स्वाद मुझे और उत्तेजित कर रहा था।
मेरा लन्ड अब एकदम सख्त और मजबूत बन गया था।मेने सविता का हाथ मेरे लन्ड पर से निकाला और सविता को झटसे झुका दिया। किचन के ओटे पर ही सविता को मैने झुकाया था। अब मुझे ऊसर जोरदार झटके देकर उसकी चीखे निकालनी थी। क्योकी शायद आज के लिये मार लन्ड आखरी बार खड़ा हो गया था। इसके बाद शायद शाम को ही मेरे लन्ड में जान आने वाली थी। और मुझे सविता को यही मेरे जीवन का आखरी सम्भोग हो ऐसे चोदना था। मेने सविता के बाल पकड़े। और जोरसे उन्हें पीछे ओढ़ा। सविता की बस एक ही जोरकी चीख निकली। सविता," ओह्ह अमेय! अब डाल भी दे। मत तरसा अभी। द दे चुत में मेरे। और फाड़ दे आज चुत मेरी।" सविता के ऐसे बोलनेसे मुझे और भी उत्तेजना मिली। मेरा लन्ड अब सविता के गांड को जोरसे चुभने लगा था।
मेने जरभी देर न करके सविता के चुत में मेरा पूरा लन्ड एक ही झटके में घुसा दिया। सविता जोरसे चिल्लाई। उसका मुँह खुला का खुला रह गया था। वो इतनी जोरसे चिल्लाई के आवाज पूरे घर में गूँजने लगी। अब में सविता को छोड़ने वाला नही था। मेने जोर जोरसे झटके देना चालू किया। सविता बस , " ओह्ह ओह्ह। और जोरसे करो। और जोरसे अहह अहह। फाड़ दो आज मेरी चुत। ये तुम्हारी चुत है , मेरे जानेमन इसे जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करो । और मुझे चोदो मेरे बड़े लन्ड वाले शेर।"
सविता मदहोश होकर कुछ भी बोले जा रही थी। पर में अब कुछ नही बोलने वाला था। में बस उसे जोर जोरसे चोदने में लगा था। पूरे किचन में बस ," टप टप टप" ऐसेही आवाज गूंज रही थी।मेरी जांघे जोर जोरसे उसके गांड पर जाकर टकराती और वो आवाज होता। वो हर एक झटके के साथ जोरसे चिल्लाती। थोड़े देर पीछे से चोदने के बाद मेने सविता को घुमा लिया। उसे मेने उठाकर किचन के ओटे पर बैठाया। सविता मदहोश थी। पर वो हसने लगी थी। मेरे शरीर से टपकता पसीना उसे भी उत्तेजीत कर रहा था।
सविता बोली, " चाहो तो तुम रुक सकते हो। तुम्हारी सासे फूल गयी है मुझे चोदते चोदते अमेय।" में बोला, " सविता अब में शर्त जीतकर ही रुकने वाला हु। " और हम दोनों ने घड़ी के तरफ देखा।घड़ी ।के ठीक 7:30 बज चुके थे। लगभग में शर्त जीत ही चुका था। मेने झटसे सविता के चुत में लन्ड को सरकाया। सविता मेरी तरफ देख रही थी। में चिल्लाया," सविता में जीत चुका हूं। ओह्ह ओह्ह। अब तू सिर्फ मेरी है। सिर्फ मेरी। आह आह।" और मैने आपन स्पीड बढ़ा दिया।
सविता बोली, " अमेय! ओह्ह ओह्ह। तुम जीत चुके हो मुझे।आह धीरे धीरे करो। तुम पूरी तरह से मुझे जीत चुके हो अमेय। अब मुझपे सिर्फ हक तुम्हारा है।" ये सब हम एक दूसरे के आखो में आँखे डाल के बोल रहे थे। में सविता को जोर जोरके झटके दे रहा था। में बोला, " सविता अब तेरी ये चुत, तेरी ये बड़ी गांड, के बड़े बड़े चुचे सबकुछ मेरा है। बोल तू, ये सबकुछ मेरा है।" सविता बोली, " है अमेय, मेरी चुत पे ,गांड पे अब बस तेरही अधिकार है। तू जो चाहे इससे कर अब में कुछ नही बोलूंगी। तू इसमे जितना चाहे उतना , जिस वक्त चाहे उस वक़्त कुछ भी डाल सकता है।
ये दोनों छेद मेने आजसे तुम्हारे नाम किये अमेय।" में बोला, " ओह्ह सविता। बस यही तो मुझे सुनना था। आजस तुझे मूतना हो या फिर हगना वो भी मेरी इज़ाज़त से होगा समझी मेरी रंडी। में जब बोलूंगा और जहाँ बोलूंगा वही तुझे करना होगा।" सविता बोली, " हा अमेय। आजसे में बस तेरी रंडी हु।
तू जो बोलेगा वही आजसे ये रंडी करेगी। तूने मुझे जीत लिया है। अब इस शरीर का हर एक कोना तेरे इज़ाज़त से चलेगा मेरी जान।" हम ऐसेही कुछ देर तक गन्दी बाते करते करते चुदाई करते रहे। सविता बहोत ही जोर जोरसे मुझसे चुदवा रही थी। उसकी चुत टाइट होने के बावजूद उसे लन्ड को पीड़ा अंदर लेने में मजा आ रहा था।
वो भी रुकने का नाम नही ले रही थी। 15-20 मिनिट बाद में सविता को बोला," सविता ओह्ह सविता। में अब झड़ने वाला हु। क्या तुम मेरा रस अपने अंदर लेने के लिए तैयार हो?।" सविता बोली, " हा रे मेरे चीते। मुझे बस तेरा रस देदे। झड जा मेरे चुत में। मुझे और तेरे जैसे शैतान पैदा करने है। ताकि और औरतों को तेरे जैसा लन्ड मिले और वो भी स्वर्गसुख ले सके। चोद मुझे और जोरसे चोद। झड जा अपना सारा माल अमेय। ओह्ह ओह्ह ओह्ह आह।" में बोला, " हा सविता। ओह्ह।
मुझे भी तुझे गर्भवती करना है ओर कम से कम 10 बच्चे पैदा करने है तेरे पेट से। तुझे इस जन्म में बस मेरी रंडी बन कर रहना है। और मेरे बच्चे पैदा करने है सविता।" सविता बोली, " ओह्ह आह अमेय। तुम जैसे कहोगे वही होगा। तेरे इस लन्ड के लिए तो में अगले 7 जन्म तेरी रंडी बन कर रहना पसंद करूँगी। तू बस मुझे चोदना मत छोड़।
कर और जोरसे साले और जोरसे कर।" ये बाते सुनकर में कंट्रोल नही कर पा रहा था।में अब सविता के चुत में झड़ने वाला था। मेने ज़ोर बढ़ा दिया। सविता अब जोर जोरसे सिसकिया मारने लगी। मेंने सविता के चुचियो को जोर से दबा कर रखा। सविता ने भी मेरे हाथ मे नाखून गडा दिए। और मे जोरके झटका देकर सविता के चुत में झड गया। मेरा सारा माल उसके चुत में उतर गया। आज पहली बार ऐसा हुआ था के सविता के पहले में झड चुका था। सविता बहोत खुश थी।
वो मेरे तरफ ही देख रही थी। मेने उसे एक लंबा किस किया। और मैने उसे घड़ी दिखाई। घड़ी में सुबह के 8 बज के जा चुके थे। वो घड़ी को देखके मुझे देखने लगी। और वो शर्मा कर बोली, " अरे हा बाबा! तुम जीत गए अमेय। आजसे तुम मेरे सबकुछ हो और तुम जो बोलोगे वैसा ही में करूँगी। ठीक है? हो गई तसल्ली? मेने सब शर्ते मान ली है।" में बहोत खुश था।में जीत जो चुका था। और उससे भी ज्यादा मुझे इस बात की खुशी थी कि अब में सविता के गांड में लन्ड को घुसा सकता था जब चाहे और जहाँ चाहे।
बस गांड छोडो उसका पूरा शरीर अब मेरा था। में उसे जैसे भी चाहे इस्तेमाल कर सकता था। में बोला," हा सविता। अब हुई न बात। देख लिया मुझसे भिड़ने का अंजाम। अब बस मुझे तेरी गांड मारनी है। और उसे इतना बड़ा करना है के तू कोई भी चड्डी ना पेहेन सके।" सविता मेरे पास आ कर बोली, " हम्म अब ये गांड तो तुम्हारी हो चुकी है अमेय। तुमने इसे कमाया है।तो तुम इसे जितना चाहे अब मार सकते हो। जितना चाहे बड़ा कर सकते हो।
में कुछ नही बोलूंगी।और रही बात चड्डी की तो वो में कभी नही पहनती। बस मासिक धर्म मे मजबूरी में पहननी पड़ती है। वरना में वो भी न पहनू।" और वी हसने लगी। में बोला, " ओह्ह सविता। तुझे चोदना तो कितना आसान है। बस साड़ी उठाओ और लन्ड घुसाओ। में सोच कर ही पागल हो रहा हु।" सविता बोली, " अमेय! तुम तो झड गए। मेरा इंजिन गर्म करके खुद ठंडे पड़ गए। अब मेरी तो आग बुझाओ। मेने कहा," सविता, अब ये लन्ड तो उठनेसे रहा। में तेरी चाटता हु रुक।" इतना बोलकर में सविता के चुत में अपनी जबान डालकर चूसने लगा।
बस 10-15 मिनिट तक चूसने के बाद सविता को कंट्रोल नही हुआ और वो मेरे मुंह के अंदर और बाहर झड गयी। में उसका सारा पानी गटक लिया और उसे भी पिलाया। उसके बाद हम बड़ी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे। रात भर जगने के कारण हम दोनों भी थक चेक थे। हमने जराभी आराम नही किया था। सविता बोली," अमेय! क्या हम अब थोड़ी देर के लिये सो जाए क्या? फिर थोड़ी देर बाद तुम्हे गरमा गर्म खाना बनाके खिलाती हु।" मुझे भी अब नींद आ रही थी। में बोला," ठीक है सविता।
चलो हम आराम करते है। दोपहर में आज कुछ तो बाहर से ही आर्डर करता हु। तू भी कितना थकी है। आज कुछ मत करना तुम। आज तो तेरे हाथ और मुँह बस आज एक ही चीज के लिये काम मे आने चाहिए।" सविता शर्मा गई। वो बोली, " अमेय! तुम भी ना। और कुछ सूझता भी है तुम्हे? पर ठीक है । तुम जैसे बोलो वही होगा अमेय। तुम्हे जब भी मन करे बस मुझे उठा देना। मेरी चुत तुम्हरे लिये हमेशा सजी रहेगी।" मेने एकदम कहा," बस चुत? " सविता बोली," अरे बाबा सबकुछ।
जो भी तुम्हे चाहिए होगा वही होगा। तुम फीलिंग्स पे ध्यान दो ना। " हम दोनों भी हसने लगे। मेने सविता को बाहोंमे लिया और हम हॉल के बिस्तर पर लेट गए। सविता मेरी बाहोंमे थी। वो मेरे सीने पे सिर रख के सोयी थी। मुझे भी नींद आने लगी थी। पर मुझे आज जो कुछ भी हुआ उसपर विश्वास नही हो रहा था। ऐसे सविता का आना। ये सबकुछ हमारे बीच होना।
में बहोत खुश था। मेने भगवान को मन ही मनमे शुक्रिया कहा। और मेने सविता के माथे को चूमा। सविता बहोत ही गहरे नींद में सो गई थी। मुझे उसे देखके बहोत अच्छा लगा। में भी अब नींद को रोक नही पा रहा था।मेने भी आँखे बंद कर ली। उसके बाद मेरी भी आँख कब लग गयी पता नही चला और में भी सो गया। अगले 2 दिन भी हम दोनों ने बहोत चुदाई की।
मेने उसकी गांड कैसे मारी? उसने बनाया खाना हमने किस किस प्रकार से खाया। और हमने और कौन कोनसी मस्तिया की ये डिटेल में जानने के लिये , मेरे से जुड़े रहिये।
आपको ये मेरे जीवान सच मे घटित हुआ प्रसंग कैसा लगा ये मुझे आप मेरे ईमेल पर फीडबैक देकर जरूर बताइए। और मुझे आगे लिखने के लिये प्रोत्साहित कीजिये। धन्यवाद। ईमेल - amymog74@gmail.com
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