चुदक्कड़ माँ की चुत और गांड चुदाई: Antarvasna Sex Story
नमस्कार दोस्तो!
मैं विनय फिर से आ गया हूँ अपनी कामुक माँ की आगे की चुदाई की Antarvasna Sex Story ले के।
मुझे पक्का विश्वास है जिस तरह से पिछली कहानी
मेरी बुआ के बेटे ने मेरी मम्मी को चोदा
में आपके लंड की उत्तेजना चरम पे रही होगी, ठीक वैसे ही उससे आगे की रियल कहानी में मजा आने वाला है।
तो आप सब अपने पैंट की जिप खोल के अपने लंड को बाहर निकाल लो!
मैंने और मम्मी ने खाना खा लिया और अपने-अपने चारपाई पर लेट गए।
मम्मी ने मेरे लिए दूध रखा हुआ था जिसमें नींद की गोली मिली थी ताकि उनकी चुदाई में कोई रुकावट ना हो।
पर मैं तो उनसे बड़ा खिलाड़ी था; पिछले 2 दिन से मम्मी की चुत अपने सामने ही चुदते हुए देख रहा था।
मैंने दूध का ग्लास ले के बाहर टहलते हुए पीने की बात बता के मम्मी को चला गया और सारा दूध बाहर फेंक के आ गया वापस।
जहाँ से मुझे मेरी मम्मी के नंगे बदन, उनकी बड़ी-बड़ी चूँचियाँ, गोल-मटोल गांड और रसीली चुत के दीदार करने थे।
थोड़ी देर बाद मैंने सोने का नाटक कर लिया।
मम्मी ने आवाज दी पर मैं कुछ नहीं बोला तो वो समझ गई कि गोली का असर हो गया।
तब माँ ने विकास को फोन लगाया लेकिन वो उठा नहीं रहा था।
आधे घंटे बाद मम्मी का फोन बजा जोकि विकास ने किया था।
माँ ने पूछा, “कब तक आओगे? मेरी चुत और गांड मचल रही हैं तुम्हारे लंड पे बैठने को!”
उधर से विकास ने बोला, “साधना जान, सॉरी! आज नहीं आ पाऊँगा। मैं किसी काम से बाहर आ गया।”
तो मम्मी गुस्सा हो गई, बोली, “पहले बता देता! मैंने विनय को नींद की गोली भी दे के अपनी चुत मसल रही हूँ कि कब तू आएगा और चुत की खुजली मिटाऊँगी!”
ये कहते हुए माँ आँगन में टहलते हुए मुझसे दूर चली गई।
विकास ने क्या बोला मुझे अब कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।
इधर से मम्मी चिल्ला रही थी।
कुछ देर बाद वो बात करती हुई चारपाई पे आ के फोन रख के स्पीकर पे कर दिया और बोली, “बताओ क्या करना है?”
तब उसने कहा, “सबसे पहले नंगी हो जा!”
तभी माँ ने सारे कपड़े उतार के मेरे पैर की तरफ खाट पे रख दिए और पूरी नंगी हो गई।
उनकी गांड मेरी आँख के ठीक सामने थी जो कि चाँदनी रात में बिल्कुल साफ दिख रही थी।
गांड का छेद देख के तो मेरा लंड पूरी तरह कड़क हो गया।
मन तो किया कि अभी उठ के मम्मी की गांड में लंड उतार दूँ पर अपने आप को रोक लिया।
तब विकास ने फोन पे बोला, “अब बैठ के अपनी चुत में उँगली करो!”
जिसके बाद मम्मी मेरी तरफ बैठ के अपने दोनों पैर को मेरे खाट पे रख के चुत खोल के बैठ गई और अपनी उँगली चुत में डाल ली।
उधर से विकास ने बोला, “साधना, अपनी उँगली को ही मेरा लंड समझ के आँखें बंद कर लो और अंदर-बाहर करती रह!”
माँ जोर-जोर से अपनी बुर में उँगली करने लगी।
पहले एक, फिर दो।
अब सारी उँगलियों को इकट्ठा कर के अपने भोसड़े में डालने लगी और जोर-जोर से सिसकियाँ ले रही थी।
तभी मैंने अपने पैर से मम्मी के कपड़े थे उसे अपने पास ले लिया।
उसमें से मैं माँ की चड्डी को ले के सूँघने लगा और लंड को हिलाने लगा। मेरी आँखें अपनी माँ की चुत से हटने का नाम ही नहीं ले रही थीं। तभी मम्मी ने विकास से कहा, “मुझे तेरा लंड चूसना था। तू आ जाता तो कितना मजे करते हम आज भी!”
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तो विकास ने मजाक में बोला, “इसमें कौन सी बड़ी बात? लंड चूसना है तो विनय का चूस ले। उसको तो गोली खिला के सुला ही दिया है। कौन सा उसको पता चल रहा है!”
ये सुन के मम्मी गुस्सा हो के फोन काट दी।
विकास दुबारा करता है पर माँ ने फोन नहीं उठाया और फोन को बंद कर के नंगी ही बिस्तर पे लेट गई।
उनके लेटने पे मुझे सिर्फ उनकी चूँचियाँ ही दिख रही थीं।
करीब 5 मिनट बाद मम्मी उठ के बैठ गई और उसके बाद मेरे चारपाई पे आ के बैठ गई।
मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था।
तभी माँ ने अपना हाथ मेरे चादर में डाल के मेरे जाँघों को सहलाने लगी क्योंकि माँ की चुत देख के मैंने लोअर उतार दिया था, सिर्फ कच्छे में था।
पर डर के मारे मेरा 7” का लंड सिकुड़ के नुन्नी का रूप ले लिया।
तभी मैंने माँ को बड़बड़ाते हुए सुना।
माँ बोल रही थी, “विकास ने सही आइडिया दिया है। कौन सा मेरे बेटे को पता चल रहा है और मेरा काम भी हो जाएगा!”
इतना कहते ही उन्होंने मेरे चादर को मेरे ऊपर से हटा दिया और मेरी जाँघों पे आ के बैठ गई और मेरे अंडरवियर के ऊपर से लंड सहलाने लगी।
पहली बार किसी औरत का हाथ अपने लंड पे पा के मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मेरे लंड ने फिर से अपना विकराल रूप धारण कर के अपनी माँ के हाथों में समा गया।
मम्मी ने मेरा लंड को आजाद कर दिया कच्छे से और अपने आप में बोली, “बाप रे! कितना मोटा है ये तो! इसके पापा और विकास से भी मोटा है। इसको तो मेरे मुँह में नहीं, मेरी चुत के अंदर होना चाहिए!”
ये कहते हुए उन्होंने झुक के मेरे मोटे लंड को अपने मुँह में ले लिया और जीभ से लपेट के चूसना चालू कर दिया। उनके चूसने के स्टाइल से मुझे अब यकीन हो चला था कि मेरी माँ की बुर में कई सारे लंड ने डुबकी लगा रखी है। जैसे कोई प्रोफेशनल रंडी हो, ऐसे लंड को अपने मुँह में अंदर-बाहर कर रही थी और मैं उनकी इस कला को अब बिल्कुल अपनी आँखों के सामने देख रहा था।
तभी उन्होंने मेरे पैर को फैला के मेरे टट्टे और गांड के आस-पास भी चाटने लगी। मैं तो पागल ही हुआ जा रहा था। इतने में मम्मी थोड़ा ऊपर आई और अपनी चुत को मेरे लंड पे सेट करने लगी। जैसे ही मम्मी के बुर का छेद मेरे लंड के संपर्क में आया, मम्मी की चुत को चीरता हुआ एक ही झटके में अंदर चला गया। जिस बुर से मेरा जन्म हुआ था, आज उसी बुर जो कि अब भोसड़ा बन चुकी थी, उसमें समा गया था और मम्मी अपने आप को उछाल-उछाल के चुद रही थी और सिसकारियाँ निकाल रही थी।
करीब 8 से 10 मिनट चुदने के बाद मम्मी की चुत ने पानी छोड़ दिया जिससे मम्मी की चुदने की रफ्तार में कमी आ गई। मैं समझ गया वो झड़ चुकी है। पर मेरा लंड अभी भी फूफाकार रहा था और मेरे ऊपर से कंट्रोल जा चुका था। मैंने बिना देर करते हुए अपने दोनों हाथ उनकी चूँचियों पे रख के मसलने लगा। ये देख के मम्मी चौंक गई और मुझसे अलग होने की कोशिश करने लगी। तभी मैंने उनकी गर्दन पकड़ के झुका दिया और उनके होंठ को अपने होंठ पे रख दिया। बहुत विरोध करने के बाद मैंने बोला, “आप तो झड़ गईं, अब मैं क्या करूँ? मुझे भी तो झड़ना है!”
तब मम्मी ने कहा, “तू कब से जग रहा है?”
तो मैंने उन्हें पिछले 2 रातों की चुदाई के बारे में बताया। तो वो अंदर से हिल गई और डर के मारे रोने लगी। बोली, “प्लीज बेटा! किसी को मत बताना। नहीं तो मैं मुँह नहीं दिखा पाऊँगी किसी को!”
तो मैंने बोला, “नहीं बताऊँगा। बस आप मुझसे अपनी चुदाई करवाना चालू कर दो!”
तो वो मान गई और मैंने उनको सीधा लिटा के सारा लंड उनकी गरमाई चुत के अंदर पेल दिया। तो उनकी चीखें निकल गईं। तभी मैं बोला, “अभी से ही चीख निकल गई? आज तो तू गांड में लेने वाली थी!”
तो वो बोली, “ऐसा नहीं है। मैं विकास को टरका देती!”
तो मैंने बोला, “पर मुझे नहीं टरका पाओगी। इस चुदी-चुदाई चुत को मैं चोद के संतुष्ट नहीं होने वाला। मुझे गांड भी मारनी है। साली रंडी! कितने लंड अभी तक तूने गांड में लिए?”
तो मम्मी बोली, “गांड मैंने किसी को नहीं दी!”
मैंने पूछा, “किसी को मतलब?”
तो बोली, “जिससे भी चुदवाया सिर्फ बुर में ही करवाया।”
मैंने कहा, “अब तक कितनों से?”
तो बोली, “तेरा पाँचवाँ।”
तो मैंने कहा, “विकास और पापा के अलावा दो कौन हैं?”
तो बोली, “एक तो अपना मजदूर और दूसरा एक जीप ड्राइवर था जिससे बहुत पहले एक बार चुद गई थी।”
तो मैंने बोला, “साली रांड! इतना चुदवा के अब लास्ट कर दे। अब मेरे बाद किसी से नहीं!”
तो बोली, “तू मुझे रोज चोदेगा ना?”
तो मैंने कहा, “रोज नहीं, दिन में 3 बार चोदूँगा। तेरी चुत की सारी गर्मी अब निकाल दूँगा!”
कहते हुए मैंने अपने झटकों की स्पीड बढ़ा दी और सारा माल अपनी माँ की चुत में भर दिया और बुर में ही डाल के लेट गया। मम्मी बोली, “बेटा! मजा आ गया रे! तुझसे चुदवा के गजब का चोदा तूने आज अपनी माँ को!”
मैंने कहा, “जानेमन! अब तू दिन में माँ और रात में मेरी रखैल है। जिसे चोद-चोद के अपने बच्चों को तेरी चुत से निकालूँगा!”
तो मम्मी हँसने लगी।
सुबह हुई।
मैं उठा तो माँ नाश्ता बना रही थी और मुझे देख के मुस्कुरा दी।
मैंने उनके पीछे जा के उनको अपनी बाहों में जकड़ लिया और बूब्स को दबाने लगा।
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माँ बोली, “अभी नहीं जाओ, नहा लो। एग्जाम है तुम्हारा, नहीं तो फेल हो जाओगे!”
तो मैंने बोला, “एग्जाम का रिजल्ट तो बाद में आएगा। ये बताओ, रात के रिजल्ट में मैं पास हुआ या नहीं?”
उन्होंने कहा, “अब तक जितनों से भी चुदवाया है, उनमें से एक को छोड़ के बाकी सब से अच्छा चुदाई किया तूने!”
मैंने पूछा, “मेरे से अच्छा किसने पेला तेरे को, रे रंडी माँ?”
तो माँ बोली, “जा तैयार हो, नहीं तो लेट हो जाएगा!”
फिर मैं नाश्ता कर के निकल गया और 2 घंटे में वापस आ गया, क्योंकि मेरा उस दिन प्रैक्टिकल था।
मैं गेट पे पहुँच के सोचा अपनी वाली चाबी से दरवाज़ा खोल के माँ को देखूँ क्या कर रही हैं।
मैंने गेट खोला और अंदर गया तो माँ मुझे कहीं नहीं दिखी।
पर उनकी आवाज़ छत से आ रही थी।
मैं ऊपर गया तो पता चला शायद वो मेरे बुआ के लड़के से बात कर रही थी और उसको रात में आने के लिए मना कर रही थी।
पर वो मान नहीं रहा था।
काफी बहस के बाद उसने बोला, “अच्छा, वीडियो कॉल कर के अपनी चुत तो दिखाओ!”
तो माँ मान गयी और सीढ़ी पे बैठने के लिए आने लगी।
उन्होंने मुझे देख लिया।
मैं बोला, “कोई बात नहीं, उसको फोन पे दिखा दो। मैं सामने से देख लूँगा!”
तो माँ मान गयी और वीडियो कॉल कर दी और अपनी मैक्सी को ऊपर कर के विकास को अपनी चुत के दर्शन कराने लगी।
मैंने पहली बार अपनी माँ की चूत को दिन के उजाले में देखा।
क्या मस्त बुर! एकदम सुर्ख लाल दाने के साथ पूरी चुत गुलाबी दिख रही थी।
बिना बालों के चूत और चूत के दोनों तरफ फाँके ऐसे फैले हुए थे जैसे कोई चिड़िया उड़ने के लिए अपने पंख फैला रखे हों।
चूत देखते ही मैं पागल हो गया और पैंट-कच्छा सब उतार के मम्मी के सामने नंगा हो गया।
शायद विकास ने भी फोन पे मम्मी को लंड दिखाना चालू कर दिया था।
उसने बोला, “जान, चुत में ऊँगली डालो!”
तो मम्मी जोर-जोर से ऊँगली करने लगी।
और मैं माँ के सामने अपने लंड को फेटने लगा।
तभी मुझे रहा नहीं गया, मैंने फोन काट के बंद कर दिया और सीढ़ी पे ही माँ को घोड़ी बना के पूरा लंड चुत में उतार के एक झटके में ही चोदना चालू कर दिया।
माँ भी दो-दो लंड देख के चुत में ऊँगली कर रही थी, जिससे वो काफी गरम हो चुकी थी।
मेरे 15-20 झटके में ही माँ की चूत से गरम लावा बाहर आ गया।
वो जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “चोद, घुसेड़ दे पूरी बच्चेदानी तक!”
ये सुन के मैं और भी उत्तेजित हो के चोदने लगा और सारा का सारा माल माँ के भोसड़े में भर दिया।
डायरेक्ट हम दोनों नीचे आ गये।
माँ नहाने चली गयी, नहा के एकदम नंगी बाहर आ गयी।
मेरा तो लंड फिर से उनकी गीली चुत देख के खड़ा हो गया।
वो नंगी ही कमरे में गांड हिलती हुई चली गयी।
पीछे-पीछे मैं भी आ गया और उनके पीछे बैठ के उनकी गांड पे जीभ लगा के चाटने लगा।
मम्मी बोली, “ये क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा, “मुझे आपने रात में बोला था कि गांड दूँगी, अब दो!”
तो बोली, “अभी तो चोदा है, रात में कर लेना!”
तो मैंने कहा, “नहीं, मैं अभी ही आपकी गांड मारूँगा!”
तो वो मान गयी और जा के बेड पे गांड ऊपर कर के लेट गयी और बोली, “पहले नारियल का तेल डाल दो, उसके बाद अपना लंड डालना!”
तो मैंने नारियल का तेल मम्मी की गांड में डाल के ऊँगली से पूरा तेल गांड में भर दिया और अपने लंड पे लगा के मम्मी के गांड पे लंड टिका दिया।
मम्मी बोली, “आराम से करना, पहली बार है!”
तो मैंने कहा, “चुत में भी तो पहली बार डलवाया था, तब भी आराम से ही करवाई थी!”
तो बोली, “हाँ, तेरे बाप को दो दिन तक चुत नहीं दी थी!”
मैंने कहा, “मैं बाप नहीं, बेटा हूँ। बाप एक नम्बरी, बेटा दस नम्बरी!”
बोल के लंड को गांड में उतार दिया।
मम्मी की तो चीख निकल पड़ी।
मैं डर गया और उसी पोजीशन में रुक गया।
माँ रो रही थी, बोली, “बेटा, निकाल ले, बहुत दर्द हो रहा है!”
मैंने कहा, “जब चुत की सील टूटी होगी, उससे तो कम ही हो रहा होगा!”
बोल के पूरा लंड गांड में उतार दिया।
मम्मी को पसीने से भीग गयी और मिन्नतें कर रही थी।
मैंने कहा, “साली रंडी, 5 लंड ले चुकी है। अब बेटे की बारी। एक सील बाप ने तोड़ी, एक बेटे ने। हिसाब बराबर मेरी रंडी माँ!”
इतना बोल के मैंने जो गांड मारना चालू किया कि पूछो मत।
करीब 5 मिनट बाद मम्मी भी गांड को उठा-उठा के अब साथ देने की कोशिश कर रही थी।
अब मेरा मजा डबल हो गया।
जो गांड मारी मैंने अपनी माँ की, कि गांड का गुड़गाँव बना दिया।
और सारा का सारा माल माँ के गांड में गिरा दिया।
जब लंड को बाहर निकाला तो देखा लंड पे टट्टी लग गयी थी।
मैंने माँ को बोला, “साफ कर, रंडी, इसे!”
तो वो कपड़े से साफ करने लगी।
तभी मैंने कहा, “मुँह में ले पहले!”
वो मना कर रही थी।
तब मैंने कहा, “तेरी गांड मारने से पहले मैंने भी चाटा था। अब इसे तू चूस के साफ करेगी तो तुझे मैं ऐसा मजा दूँगा जो तूने सपने में भी नहीं सोचा होगा!”
तो कहने लगी, “क्या?”
जैसे ही “क्या” के लिए मुँह खोला, मैंने उनके मुँह में डाल के अपनी ओर सर दबा लिया और बोला, “अगर तू कहे तो तेरी चुत और गांड दोनों में लंड जा सकता है एक साथ। डबल धमाका!”
तो बोली, “ओ कैसे?”
मैंने बताया, “विकास आने के लिए कह रहा था। रात में बुला लो। जब उससे चुदवाने लग जाओगी तो मैं जग जाऊँगा। और जो मैं कहूँगा वो करना। तब जा के हम तीनों एक साथ मजे करेंगे!”
तो माँ खुश हो गयी और मस्त तरीके से लंड चूसने लगी।
तभी मेरा लंड खड़ा हो गया।
और मैंने इस बार माँ के मुँह में सारा माल गिरा के उन्हें पिला दिया।
इस तरह मैंने अपनी माँ के चुत, गांड और मुँह सब जगह होना बीज गिरा के अपनी माँ पे कब्जा कर लिया था।
तो दोस्तो, अगली कहानी में बताएँगे कि कैसे मैंने मेरी रंडी माँ और विकास मिल कर मजे किया।
यह Antarvasna Sex Story कैसी लगी?
तब तक के लिए बाय!

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